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RBSE Solutions for Class 10 Social Science Chapter 17 मुद्रा और वित्तीय संस्थाएँ

February 8, 2019 by Fazal Leave a Comment

RBSE Solutions for Class 10 Social Science Chapter 17 मुद्रा और वित्तीय संस्थाएँ are part of RBSE Solutions for Class 10 Social Science. Here we have given Rajasthan Board RBSE Class 10 Social Science Solutions Chapter 17 मुद्रा और वित्तीय संस्थाएँ

Board RBSE
Textbook SIERT, Rajasthan
Class Class 10
Subject Social Science
Chapter Chapter 17
Chapter Name मुद्रा और वित्तीय संस्थाएँ
Number of Questions Solved 41
Category RBSE Solutions

Rajasthan Board RBSE Class 10 Social Science Solutions Chapter 17 मुद्रा और वित्तीय संस्थाएँ

पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न [Textbook Questions Solved]

भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियाँ अति लघूत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
मुद्रा किसे कहते हैं?
उत्तर:
मुद्रा वह कोई भी वस्तु है, जिसे वस्तुओं और सेवाओं के भुगतान के लिए सामान्य स्वीकृति प्राप्त है।

प्रश्न 2.
विनिमय का अर्थ बताइए।
उत्तर:
वस्तु या सेवा का मुद्रा या अन्य किसी वस्तु अथवा सेवा के बदले आदान-प्रदान विनिमय कहलाता है।

प्रश्न 3.
चैक से क्या आशय है?
उत्तर:
चैक एक ऐसा आदेश-पत्र है, जो बैंक को किसी व्यक्ति के खाते से चैक पर नामित व्यक्ति को एक विशेष राशि के भुगतान का आदेश देता है।

प्रश्न 4.
भारतीय मुद्रा का क्या नाम है?
उत्तर:
भारतीय मुद्रा का नाम भारतीय राष्ट्रीय रुपया है।

प्रश्न 5.
भारत का केंद्रीय बैंक कौन-सा है?
उत्तर:
भारत का केंद्रीय बैंक ‘ भारतीय रिजर्व बैंक’ है।

प्रश्न 6.
बचत से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
बचतकर्ता अपनी आय का कुछ अंश/भाग मुद्रा के रूप में बैंक आदि वित्तीय संस्थाओं में जमा करता है।

प्रश्न 7.
भारतीय मुद्रा का प्रतीक चिह्न क्या है?
उत्तर:
भारतीय मुद्रा का प्रतीक चिह्न ३ है।

प्रश्न 8.
भारत सरकार द्वारा 2016 ई० में कौन-कौन से नोटों का विमुद्रीकरण किया गया है?
उत्तर:
भारत सरकार द्वारा 2016 में प्रचलित 500 ३ तथा 1000 के के नोटों का विमुद्रीकरण किया गया था।

प्रश्न 9.
वित्तीय मध्यस्थ किसे कहते हैं?
उत्तर:
वित्तीय मध्यस्थ वे संस्थान तथा फर्म हैं जो वित्तीय बाजार में जमाकर्ता तथा उधार लेने वालों के बीच एक सेतु या मध्यस्थ का कार्य करते हैं।

प्रश्न 10.
ऋण की आवश्यकता किन कार्यों के लिए हो सकती है?
उत्तर:
आय से अधिक व्यय को पूरा करने तथा व्यवसाय को आगे बढ़ाने जैसे कार्यों के लिए ऋण की आवश्यकता हो सकती है।

प्रश्न 11.
संस्थागत वित्तीय स्रोतों का नियंत्रण किसके द्वारा किया जाता है?
उत्तर:
संस्थागत वित्तीय स्रोतों का नियंत्रण भारतीय रिजर्व बैंक तथा सरकार द्वारा किया जाता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियाँ लघूत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
वस्तु विनिमय प्रणाली किसे कहते हैं?
उत्तर:
वस्तुओं और सेवाओं का विनिमय प्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं और सेवाओं के बदले में किया जाता है। विनिमय के माध्यम के रूप में वस्तु-विनिमय प्रणाली अब लगभग इतिहास हो चुकी है। इसमें धन या मूल्य के संचय तथा मूल्य के | हस्तांतरण में भी भारी असुविधा का सामना करना होता है।

प्रश्न 2.
वस्तु विनिमय प्रणाली में क्या कठिनाइयाँ थीं?
उत्तर:
वस्तु-विनियम प्रणाली में मूल्य के एक मानक मापक का अभाव था। इसमें धन या मूल्य के संचय तथा मूल्य के हस्तांतरण में भी भारी असुविधा का सामना करना होता है। इसमें सबसे बड़ी समस्या विभाज्य वस्तुओं के संबंध में उत्पन्न होती थी। अत: इसे त्याग दिया गया है तथा मौद्रिक विनिमय प्रणाली को अपना लिया गया है।

प्रश्न 3.
मूल्य के मापक के रूप में मुद्रा के कार्य को समझाइए।
उत्तर:
मुद्रा का माध्यम के रूप में उपयोग विनिमय क्रिया को सुविधाजनक बना देता है। मुद्रा मूल्य के सामान्य मापक का कार्य करती है। इसकी सहायता से सभी वस्तुओं और सेवाओं के विनिमय मूल्य की मुद्रा के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। मूल्य के मापक के रूप में मुद्रा की सबसे बड़ी समस्या स्वयं का मूल्य परिवर्तित होना है।

प्रश्न 4.
साख किसे कहते हैं?
उत्तर:
साधारण भाषा में साख शब्द वित्तीय सुदृढ़ता की प्रतिष्ठा को बताता है। अर्थशास्त्र में साख शब्द का प्रयोग ऋण के वित्तीयन के लिए लिया जाता है। वित्तीय लेन-देन में जितनी राशि ऋण की प्राप्त होगी; उतनी ही राशि प्रदत्त साख की होगी।

प्रश्न 5.
धातु मुद्रा की क्या सीमाएँ होती हैं?
उत्तर:
धातु मुद्रा का हस्तांतरण सुविधाजनक न होना, उत्पादन मूल्य का अधिक होना तथा मुद्रा की बढ़ती आवश्यकता को धातु मुद्रा से पूरा किया जाना संभव नहीं था।

प्रश्न 6.
वित्तीय संस्था किसे कहते हैं? उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर:
वित्तीय संस्थाएँ वित्त के लेन-देन का कार्य करती हैं। ये संस्थागत तथा गैर संस्थागत होती हैं। बैंक तथा सहकारी समितियाँ संस्थागत शाखाएँ हैं। जबकि गैर-संस्थागते लेन-देन के लिए सरकार तथा रिजर्व बैंक के पास पंजीकृत नहीं होती। जिनमें साहूकार, आदि शामिल हैं।

प्रश्न 7.
संस्थागत वित्तीय स्रोत किसे कहते हैं? उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर:
संस्थागत वित्तीय स्रोत वे होते हैं जिनका नियमन नियंत्रण तथा निर्देशन भारतीय रिर्जव बैंक तथा सरकार द्वारा किया जाता है। इन स्रोतों द्वारा वित्तीय लेन-देन के कार्य; जैसे-जमा, ऋण निवेश आदि किए जाते हैं जो कि बैंक, सहकारी समिति आदि द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 8.
गैर संस्थागत वित्तीय स्रोतों के गुण तथा दोष बताइए।
उत्तर:
गुण-गैर संख्यागत वित्तीय स्रोत बहुत लोचशील होता है। गतिविधियाँ समय बाधित नहीं होतीं। इनके द्वारा साख प्रदान करने की प्रक्रिया बहुत सरल तथा सीधी होती है। कम कागजी कार्यवाही की जाती है।
दोष-ये संस्थाएँ मौद्रिक प्राधिकरण के नियमन तथा नियंत्रण से बाहर होती हैं। इनकी ब्याज दर बहुत ऊँची होती है। देशी बैंकर, साहूकार, भू-स्वामी, रिश्तेदार को इन स्रोतों में शामिल किया जाता है।
लेन-देन में हेरा-फेरी के आरोप लगते रहते हैं। मुद्रा वसूल करने के लिए अनुचित साधनों का भी उपयोग करते हैं।

प्रश्न 9.
देशी बैंकर किसे कहते हैं? इनकी तीन प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
देशी बैंकर निजी फर्म या व्यक्ति होते हैं; जो बैंक की तरह कार्य करते हैं। ये भारत में गैर संस्थागत साख का महत्वपूर्ण स्रोत रहे हैं। विशेषताएँ|

  • जनता से जमाएँ स्वीकार करना।
  • एक स्थान से दूसरे स्थान तक कोषों को स्थानांतरित करना।
  •  ग्राहकों के लिए बैंकर ही नहीं बल्कि मित्र एवं सलाहकार की तरह व्यवहार करना।

प्रश्न 10.
साख के स्रोत के रूप में साहूकार को समझाइए।।
उत्तर:
साख के गैर संस्थागत स्रोतों में साहूकार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। साहूकार पूर्णत: अपनी स्वयं की पूँजी को उधार देते हैं। जनता से जमाएँ स्वीकार नहीं करते। ये छोटे व्यक्तिगत कर्ज प्रदान करते हैं। ग्राहकों से ब्याज दर ऊँची ही ली जाती है। वे संपत्ति को गिरवी रखकर ग्राहकों को ऋण प्रदान करते हैं। साख के आधार पर बिना गिरवी के भी कर्जा देते हैं। इन्हें ऊँची ब्याज वसूली के कारण शोषक भी माना जाता है। साहूकारों तथा देशी बैंकर के अलावा भू-स्वामी मित्र आदि गैर संस्थागत साख के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियाँ निबंधात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
मुद्रा के विकास के विभिन्न चरणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
मुद्रा विकास के चरणों की व्याख्या

  • रोम में पहली टकसाल देवी मोनेटा के मंदिर में स्थापित की गई थी। मुद्रा के लिए सामान्य रूप से मनी शब्द का प्रयोग किया जाने लगा।
  • चीन के साथ-साथ भारत भी विश्व के प्रथम सिक्के जारी करने वाले देशों में से एक है। भारतीय सिक्कों का इतिहास ईसा पूर्व से प्रारंभ हो जाता है।
  • खुदाई से प्राप्त मौर्यकालीन चाँदी के सिक्के इस बात को सिद्ध करते हैं कि भारत में ईसा से पूर्व ही सिक्कों की शुरुआत हो चुकी थी।
  •  भारत में पहला रुपया शेरशाह सूरी ने 1540-45 ई० में जारी किया था। किसी व्यक्ति ने मुद्रा का आविष्कार नहीं किया यह केवल संयोग मात्र है।
  •  सर्वप्रथम वस्तु विनिमय पद्धति शुरू हुई फिर मुद्रा का विकास हुआ। मुद्रा का वर्तमान स्वरूप तक पहुँचने का प्रथम चरण निश्चित ही वस्तु विनिमय पद्धति थी।

प्रश्न 2.
मुद्रा के प्रमुख कार्यों की विस्तृत विवेचना कीजिए।
उत्तर:
मुद्रा के प्रमुख कार्य

(i) विनिमय का माध्यम- अर्थव्यवस्था में मुद्रा की आधारभूत भूमिका विनिमय के एक माध्यम या भुगतान के एक साधन के रूप में काम करने की होती है। यह कार्य वस्तु विनिमय प्रणाली की आवश्यकताओं के दोहरे संयोगों की समस्या को समाप्त कर देता है। मुद्रा विनिमय के माध्यम के रूप में कार्य करती है। इसी गुण के कारण मुद्रा अन्य संपदाओं से अलग है। मुद्रा माध्यम विनिमय क्रिया को सुविधाजनक बनाता है। मुद्रा की एक समस्या है कि इसका स्वयं का मूल्य बदलता रहता है।

(ii) विलम्बित भुगतानों की मानक- मुद्रा एक इकाई है जिसके द्वारा स्थगित अथवा अग्रिम भुगतान आसानी से निपटाए जा सकते हैं। ऋणों को मुद्रा के रूप में चुकाया जाना सर्वाधिक सरल है। मुद्रा में सामान्य स्वीकृति का विशेष गुण पाया जाता है। इसलिए मुद्रा को स्थगित भुगतानों का श्रेष्ठ मानक माना जाता है।

(iii) मूल्य भंडार- धन व संपदा को मुद्रा के रूप में रख सकते हैं। यह मूल्य के स्वयं के रूप में भी कार्य करती है। मूल्य का आशय मुद्रा की क्रय शक्ति से है। क्योंकि मुद्रा मूल्य का एक भंडार नहीं है। वस्तुएँ तथा संपदाएँ भी मूल्य के भंडार का कार्य करती है। मुद्रा विशेष तथा तरल परिसंपत्ति है।

(iv) मुद्रा के अन्य कार्य तथा अर्थव्यवस्था में भूमिका- मुद्रा द्वारा मूल्य का हस्तांतरण सुविधाजनक हो जाता है। साथ ही यह अर्थव्यवस्था में साख का आधार प्रदान करती है। लोग अपनी आमदनी का एक भाग बैंकों में मुद्रा के रूप में जमा करवाते हैं। इसी धन से बैंक साख का सृजन करते हैं। मुद्रा के कारण ही पूँजी को एक उद्योग से दूसरे उद्योग तथा स्थान परिवर्तन संभव हुआ है। मुद्रा के द्वारा उपभोक्ता अधिकतम संतुष्टि अथवा कल्याण की स्थिति को प्राप्त कर सकता है। यह आसानी से विभाजित हो जाती है।

प्रश्न 3.
वाणिज्यिक बैंकों के कार्यों का विस्तार से उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
वाणिज्यिक बैंकों के प्रमुख कार्य

(i) जमाएँ स्वीकार करना- वाणिज्यिक बैंक द्वारा प्रदत्त सेवाओं में सर्वाधिक महत्वपूर्ण और प्रथम कार्य जमाएँ स्वीकार करना है। बैंक व्यक्तियों, फर्मों एवं अन्य संस्थाओं से जमाएँ प्राप्त करते हैं। ये जमाएँ तीन प्रकार की होती हैं :

  • चालू खाते की जमाएँ,
  • बचत खाते की जमाएँ,
  •  स्थायी जमाएँ। बैंक इन चालू जमाओं पर ब्याज बहुत कम या शून्य ब्याज देते हैं। आम जनता द्वारा अपनी धनराशि बचत खाते में बचत जमा के रूप में रखी जाती है।

(ii) ऋण प्रदान करना- यह बैंक अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में; जैसे कृषि उद्योग, व्यापार आदि को ऋण प्रदान करते हैं। यह ऋण नकद, साख, अधिविकर्ष आदि रूपों में हो सकता है। ब्याज दर अनेक हो सकती है। कर्जदारों से लिया गया ब्याज और जमाकर्ताओं को प्रदत्त ब्याज के मध्य जो अंतर राशि होती है वह बैंक की आय होती है।

(iii) अन्य कार्य- बैंक अपने ग्राहकों को अनेक प्रकार की सेवाएँ प्रदान करते हैं। बैंक बिलों तथा चैकों का संग्रहण करते हैं। बीमा की किश्त आदि का नियमित भुगतान करते हैं। लॉकर की सुविधा प्रदान करके कीमती वस्तुओं को सुरक्षित रखते हैं। आर्थिक विकास तथा वित्तीय समावेशन में बैंक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। धन के हस्तांतरण की सुविधा
प्रदान करते हैं।

प्रश्न 4.
अर्थव्यवस्था में मुद्रा की क्या भूमिका है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अर्थव्यवस्था में मुद्रा की भूमिका

(i) मुद्रा अर्थव्यवस्था में साख का आधार प्रदान करती है। लोग अपनी आमदनी का एक अंश बैंकों में मुद्रा के रूप में जमा करवाते हैं। जिससे बैंक साख का सृजन करते हैं।

(ii) मुद्रा ने पूँजी को गतिशीलता प्रदान करके भी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया है। इसके कारण ही पूँजी को एक उद्योग से दूसरे उद्योग में तथा एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना संभव हुआ है।

(iii) मुद्रा की सहायता से बचतों को निवेशों में परिवर्तित किया जाना संभव हुआ है। अर्थव्यवस्था में बचतकर्ता तथा निवेशक दो अलग-अलग वर्ग हैं। लोग अपनी बचतों को मुद्रा के रूप में बैंक आदि वित्तीय संस्थाओं में जमा करवा देते हैं।

(iv) मुद्रा उत्पादन के क्षेत्र में भी महती भूमिका निभाती है। इसके कारण श्रम- विभाजन एवं विशिष्टीकरण को अपनाने से बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव हो पाया है। विशिष्टीकरण तब होता है जब एक आर्थिक संसाधन एक विशिष्ट वस्तु या सेवा को उत्पादित करता है।

(v) मुद्रा के माध्यम से उत्पादन में सलंग्न विभिन्न उत्पादक इकाइयों में उत्पादन का वितरण संभव है। कुल उत्पादन | या वस्तु को विभाजित किया जाना सदैव संभव नहीं है लेकिन उसके मूल्य का मुद्रा के माध्यम से सभी इकाइयों में उचित आर्थिक नियमों का अनुकरण करते हुए वितरण किया जा सकता है।

प्रश्न 5.
संस्थागत तथा गैर संस्थागत वित्तीय स्रोत में अंतर बताइए।
उत्तर:
संस्थागत तथा गैर संस्थागत वित्तीय स्रोत में अंतर वित्तीय संस्थाओं को संस्थागत तथा गैर संस्थागत स्रोतों में वर्गीकृत किया गया है। संस्थागत वित्तीय स्रोत

(i) संस्थागत साख प्रदान करने वाली संस्थाएँ साकार और भारतीय रिजर्व बैंक के यहाँ पंजीकृत होती हैं। इनका नियमन, नियंत्रण तथा निर्देशन भारतीय रिजर्व बैंक तथा सरकार द्वारा किया जाता है।

(ii) ये संस्थाएँ अपनी सभी क्रियाओं/गतिविधियों के विषय में जानकारी अपनी नियामक संस्थाओं को सूचित करती हैं। कार्य लाभ के लिए ही नहीं वरन सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के लिए भी करना होता है।

(iii) गरीब व कमजोर वर्ग को साख प्रदान करती है। गैर संस्थागत वित्तीय स्रोत

(i) गैर संस्थागत वित्तीय स्रोत अधिकांशत: स्थानीय होते हैं तथा क्षेत्र की संस्कृति; प्रथाओं, रीति-रिवाजों से सुपरिचित होते हैं।

(ii) इनमें देशी बैंकर, साहूकार, भू-स्वामी, रिश्तेदार शामिल होते हैं। इन्हें कोई भी नियामक संगठन या केंद्र गैर संस्थागत वित्तीय स्रोतों की गतिविधियों को निर्देशित या नियंत्रण नहीं करता।

(iii) इन संस्थाओं द्वारा साख प्रदान करने की प्रक्रिया बहुत सरल तथा सीधी होती है। ये अधिक कागजी कार्यवाही नहीं करते हैं। इन पर लेन-देन के गंभीर आरोप लगते रहे हैं।

(iv) मुद्रा (कर्ज) वसूल करने के लिए अनुचित साधनों का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 6.
स्वयं सहायता समूह क्या होते हैं? यह किस प्रकार ऋण प्रदान करने के परंपरागत तरीकों से भिन्न हैं?
उत्तर:
स्वयं सहायता समूह

(i) अनेक गैर संस्थागत वित्तीय संस्थाओं द्वारा ऊँचे ब्याज पर ऋण देने तथा वसूली के लिए गरीब कर्जदारों के शोषण करने, तंग करने आदि के कारण लोगों ने गरीबों को उधार देने के कुछ नए तरीके अपनाने की कोशिश की। जिनमें एक विचार ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब महिलाओं को छोटे-छोटे स्वयं समूहों को संगठित करने तथा बचत पूँजी को इकट्ठा करने पर आधारित है।

(ii) एक स्वयं सहायता समूह में 15-20 सदस्य होते हैं। नियमित रूप से मिलकर बचत करते हैं। इसमें प्रति व्यक्ति बचत 25 १ से 100 २ या अधिक हो सकती है। बचत परिवारों की क्षमता पर निर्भर करता है।

(iii) सदस्य अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए छोटे कर्ज समूह से कर्ज ले सकते हैं। इस पर समूह ब्याज लेता है, लेकिन ब्याज दर कम होती है।

(iv) एक या दो वर्ष के बाद यदि समूह नियमित रूप से बचत करता है तो समूह बैंक से ऋण लेने योग्य हो जाता है। ऋण समूह के नाम पर दिया जाता है।

(v) सदस्यों को छोटे- छोटे कर्ज अपनी गिरवी रखी जमीन छुड़वाने के लिए, कार्यशील पूँजी की जरूरतें पूरी करने, बीज, खाद्य, बाँस और कपड़े खरीदने के लिए, घर बनाने, सिलाई की मशीन, हथकरघा, पशु इत्यादि खरीदने के लिए दिए जाते हैं।

(vi) समूह दिए गए ऋण, उसका लक्ष्य, उसकी रकम, ब्याज दर, वापस लौटाने की अवधि आदि के बारे में निर्णय करता है। अगर सदस्य ऋण नहीं लौटाता, तो समूह के सदस्य गंभीरता से निर्णय लेते हैं। स्वयं सहायता समूह कर्जदारों को कर्जदार की कमी की समस्या से उबरने में मदद करते हैं।

प्रश्न 7.
देशी बैंकर व्यवस्था पर एक लेख लिखिए।
उत्तर:
देशी बैंकर व्यवस्था|

  1. देशी बैंकर द्वारा भी भारत में बैंकिंग व्यवसाय संपन्न किया जाता रहा है। यह निजी फर्म या व्यक्ति होते हैं। जो बैंक की तरह ही कार्य करते हैं।
  2. भारत में आधुनिक वाणिज्यिक बैंकों के विकास से पूर्व बैंकिंग का कार्य पूर्णतः इनके द्वारा संपन्न किया जाता था। ये गैर संस्थागत साख का महत्वपूर्ण स्रोत रहे हैं।
  3. देशी बैंकरों द्वारा किए जाने वाले प्रमुख कार्य निम्न हैं
  • जनता से जमाएँ स्वीकार करना।
  •  ग्राहकों को विभिन्न प्रकार की संपत्तियों को गिरवी रखकर ऋण प्रदान करना तथा साख के आधार पर बिना गिरवी रखे भी ऋण प्रदान करना।
  • एक स्थान से दूसरे स्थान तक कोषों को स्थानांतरित करना।
  • छोटे व्यापारियों तथा छोटे उद्यमियों के साथ लेन-देन करना।
  •  बैंकिंग कार्य के साथ-साथ अपना व्यवसाय भी चलाना।
  • कर्जदार को वित्तीय स्थिति एवं व्यवसाय के संबंध में निजी जानकारी के आधार पर ऋण प्रदान करना।
  • ग्राहकों के लिए बैंकर ही नहीं बल्कि मित्र एवं सलाहकार भी बनना।

भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियाँ अतिरिक्त प्रश्नोत्तर (More Questions Solved)

भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियाँ अतिरिक्त प्रश्नोत्तर बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

प्रश्न 1.

एक रुपया कितने पैसों के बराबर होता है?
(अ) 100 पैसे
(ब) 50 पैसे
(स) 12 आने
(द) 14 आने

प्रश्न 2.
मोनेटा’ शब्द किस भाषा से संबंधित है?
(अ) अंग्रेजी
(ब) फ्रेंच
(स) लैटिन
(द) हिंदी

प्रश्न 3.
भारत में पहला ‘३’ किस शासक के शासन काल में जारी हुआ?
(अ) अकबर
(ब) शिवाजी
(स) हुमायूँ
(द) शेरशाह सूरी

प्रश्न 4.
पंकज राजस्थान के किस गाँव का रहने वाला है?
(अ) नीमकाथाना
(ब) श्योपुर
(स) कटराथल
(द) आमेर

प्रश्न 5.
एक स्वयं सहायता समूह में कितने सदस्य होते है?
(अ) 20-25
(ब) 15-20
(स) 30-35
(द) 10-15

उत्तर:
1. (अ)
2. (स)
3. (द)
4. (स)
5. (ब)

भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियाँ अति लघूत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
इंग्लैंड की मुद्रा का नाम लिखिए।
उत्तर:
इंग्लैंड की मुद्रा पाउंड स्टर्लिंग है।

प्रश्न 2.
मौर्यकाल के प्राप्त सिक्के किस धातु के बने थे?
उत्तर:
ये सिक्के चाँदी के बने हुए थे।

प्रश्न 3.
‘मुद्रा वह है, जो मुद्रा का कार्य करें मुद्रा के विषय में ये शब्द किन विद्वानों द्वारा कहे गए थे?
उत्तर:
ये शब्द वाकर तथा हार्टले विदर्स द्वारा कहे गए थे।

प्रश्न 4.
नितेश तथा उसकी पत्नी चाँदनी कहाँ रहते हैं? वे किस सेवा में हैं?
उत्तर:
नितेश तथा उसकी पत्नी चाँदनी जयपुर में रहते हैं। नितेश बैंक कर्मी है, जबकि चाँदनी सरकारी सेवा में है।

प्रश्न 5.
रेखांकित चैक किस बात का सूचक है?
उत्तर:
यह इस बात का सूचक है कि चैक प्राप्तकर्ता के खाते में ही जमा होगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियाँ लघूत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
आवश्यकताओं को दोहरा संयोग से क्या आशय है?
उत्तर:
वस्तु विनिमय प्रणाली में दो व्यक्तियों के पास ऐसी वस्तु अवश्य होनी चाहिए, जो एक-दूसरे की आवश्यकता को । | पूरा कर सके।

प्रश्न 2.
साख के महत्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
साख आर्थिक जीवन का एक महत्वपूर्ण तत्व है। साख गरीब और मध्यम वर्ग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जरूरतमंद लोग साख के जरिए अपने रुके हुए कार्य करते हैं। किसान साख के जरिए अपनी फसलों के उत्पादन को बढ़ाते हैं।

प्रश्न 3.
आधुनिक मुद्रा करेंसी को विनिमय का माध्यम क्यों स्वीकार किया जाता है?
उत्तर:
मुद्रा जो कि विनिमय का साधन है। किसी देश की केंद्रीय बैंक द्वारा जारी की जाती है और सरकार द्वारा मान्यता प्रदान की जाती है।

प्रश्न 4.
लोग अपने धन को कैसे सुरक्षित रखते हैं?
उत्तर:
लोग अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद बचे धन को बैंकों में जमा रूप में रख देते हैं। खाताधारक अपने खाते में जमा कर देते हैं। बैंक द्वारा उनका जमा धन स्वीकार किया जाता है। बैंक इस जमा राशि पर ब्याज भी देते हैं। इस प्रकार खाता धारक का धन सुरक्षित रहता है। वे अपने धन को किसी भी समय निकाल सकते हैं।

5.
संजय का क्या दायित्व है?
उत्तर:
परिवार में सबसे बड़ा होने के कारण परिवार की सभी आवश्यकताओं को पूरा करने की जिम्मेदारी उसी की है। वह कृषि आय से अपने परिवार का गुजारा चलाता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियाँ निबंधात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
ऋण के नकारात्मक प्रभाव बताएँ।
उत्तर:

  • ग्रामीण क्षेत्रों में कर्ज की वजह फसल उगाने में लगने वाली लागत होती है। किसान फसल के आने के बाद ऋण चुकाते हैं लेकिन यह फसल उत्पादन पर निर्भर करता है।
  • यदि फसल में क्षति अथवा आशानुरूप उत्पादन न हो तो ऋण की अदायगी मुश्किल अथवा असंभव हो जाती
  •  इस प्रकार ऋण फसल उत्पादन में वृद्धि की बजाए आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है।
  •  कर्जदार ऋण के भंवर में फँस जाता है। जहाँ से उसका निकलना बहुत ही मुश्किल होता है। देश के विभिन्न क्षेत्रों के किसानों द्वारा आत्महत्या करने का मुख्य कारण यही है।
  • ऋण के जाल में फंसे लोगों के सामाजिक क्रियाकलापों पर भी नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है। बच्चों की शिक्षा तथा अन्य कार्यों पर प्रत्यक्ष प्रभाव दिखाई देता है। इस प्रकार परिवार का विकास अवरुद्ध हो जाता है।

प्रश्न 2.
चिटफंड की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:

(i) भारत में बचत प्रवृत्ति को बढ़ावा देने तथा ऋण उपलब्ध करवाने की दृष्टि से चिटफंड कंपनियों की अहम भूमिका है। जो कंपनी चिट योजना का प्रबंध, संचालन तथा निर्देशन करती है चिटफंड कंपनी कहलाती है।

(ii) यह विशेष बचत एवं ऋण योजना है जो पारस्परिक लाभ की एक योजना है। इसमें योजना के सभी सदस्य एक अनुबंध का हिस्सा होते हैं जिसमें एक निश्चित अंश जमा करवाते हैं।

(ii) कुल जमा राशि निविदा निकालकर किसी एक सदस्य को प्रदान कर दी जाती है। इस निविदा में सभी सदस्य हिस्सा लेते हैं। जो अधिक बट्टा कटवाकर राशि लेता है उसे पुरस्कृत क्रेता घोषित किया जाता है।

(iv) जब कोई सदस्य राशि लेने के लिए नीलामी में भाग नहीं लेता है तो न्यूनतम राशि बट्टा काटकर लॉटरी चिट निकालकर विजेता का नाम तय कर लिया जाता है। प्रत्येक महीने एक सदस्य को विजेता के रूप में पुरस्कार की राशि मिलती है।

(v) एक बार विजेता होने पर सदस्य पुनः निलामी में शामिल नहीं किया जाता है। इसमें केवल गैर पुरस्कृत सदस्य ही हिस्सा ले सकते हैं। लाभांश की राशि को घटाकर अगली किश्त की राशि निश्चित कर दी जाती है। चिटफंड योजनाएँ संगठित वित्तीय संस्थाओं के अतिरिक्त मित्रों, रिश्तेदारों आदि असंगठित समूहों द्वारा भी चलाई जाती
स्वयं करें

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