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RBSE कक्षा 5 पर्यावरण पाठ 9 के प्रश्न उत्तर हमारा अतीत और वर्तमान
RBSE Class 5th EVS Chapter 9 Question Answer in Hindi
पृष्ठ संख्या-83
प्रश्न 1.
आपके दादा-दादी के बचपन में विद्यालय और गाँव कैसे रहे होंगे?
उत्तर:
दादा-दादी जी के बचपन (1940-60) में विद्यालय कच्चे भवनों या पेड़ों की छांव में होते थे। स्लेट-तख्ती पर लिखा जाता, किताबें साझा होती थीं। गुरु-शिष्य परंपरा थी, बिजली से चलने वाले पंखे नहीं होते थे, लड़कियों की शिक्षा सीमित थी। गाँवों में बिजली भी नर्हीं होती थी, दीया-लालटेन से रोशनी की जाती थी, कच्चे घर होते थे, खेती मुख्य व्यवसाय था। मंदिर-बावड़ी सामुदायिक केन्द्र थे। त्योहारों पर मेले व लोकगीत आम थे।
प्रश्न 2.
आपको क्या लगता है, पहले लोग कैसे यात्रा करते थे?
उत्तर:
पहले यात्राएँ पैदल, बैलगाड़ी या घोड़ा गाड़ी से होती थीं। नदियों में नाव चलती थी, धनी लोगों के लिए पालकी की व्यवस्था थी। बाद में, साइकिल आई। यात्राएँ धीमी, श्रमसाध्य और मौसम पर निर्भर थीं। सामान सीमित मात्रा में ले जाया जाता था, समूह में यात्रा करना आम बात थी। ट्रेनें थीं, पर गाँवों से स्टेशन दूर होते थे। आज के विपरीत, तब यात्रा में समय ज्यादा लगता था, लेकिन प्रकृति के अनुकूल होती थी। परंपराएँ आज भी हमें अतीत व प्रकृति से जोड़ती हैं।
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अब बताइए-
प्रश्न 1.
हमारे त्योहारों में कौन-कौनसे रीति-रिवाज आज भी वैसे ही हैं?
उत्तर:
भारतीय त्योहारों में कई रीति-रिवाज आज भी अपरिवर्तित हैं; जैसे-दीपावली में दीए जलाना, लक्ष्मीगणेश पूजा, रंगोली बनाना, होली में रंग-गुलाल और होलिका दहन, रक्षाबंधन में राखी बाँधना, दशहरा में रावण दहन, ईद में नमाज और सेवईयाँ तथा गुरुपर्व में कीर्तन व लंगर।
प्रश्न 2.
आपके परिवार में कौनसी परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है?
उत्तर:
मेरे परिवार में दीपावली पर मिट्टी के दीए जलाना और पूजा के बाद मिठाइयाँ बाँटना पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है।
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प्रश्न 3.
क्या सभी राज्यों में त्योहार मनाने के तरीके एक जैसे होते हैं?
उत्तर:
सभी राज्यों में त्योहार मनाने के तरीके एक जैसे नहीं होते हैं। उदाहरण के लिए, दीपावली उत्तर भारत में पटाखों के साथ, जबकि दक्षिण भारत में तेल स्नान के साथ मनाई जाती है; होली मथुरा में लठमार, जबकि गुजरात में सूखे गुलाल के साथ मनाई जाती है। पोंगल तमिलनाडु में चावल-गुड़ के व्यंजन के साथ, जबकि गुजरात में पतंगबाजी के साथ मनाते हैं। भौगोलिक व सांस्कृतिक अंतरों के बावजूद, खुशी, एकता और मिठाइयाँ बाँटने की भावना समान रहती है।
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अब बताइए-
प्रश्न 1.
आपके विद्यालय माता-पिता के बचपन के विद्यालय से कैसे अलग हैं?
उत्तर:
मेरे विद्यालय में डिजिटल बोर्ड, प्रोजेक्टर और ऑनलाइन कक्षाएँ हैं, जबकि मेरे माता-पिता के विद्यालय में स्लेट-तख्ती और सीमित किताबें होती थीं; उनकी शिक्षा गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित थी। उनके समय में बिजली से चलने वाले पंखे तो थे, लेकिन अन्य तकनीकी सुविधाएँ नहीं थीं।
प्रश्न 2.
पहले लोग यात्रा कैसे करते थे और अब कैसे करते हैं?
उत्तर:
पहले लोग पैदल, बैलगाड़ी, घोड़ागाड़ी या नाव से यात्रा करते थे, जो धीमी और मेहनत वाली थी; अब कार, ट्रेन और हवाई जहाज से यात्रा की जाती है जो कि तेज एवं सुविधाजनक है।
प्रश्न 3.
क्या कोई ऐसा बदलाव आया है जो आपको अच्छा नहीं लगता?
उत्तर:
मुझे तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता और पारंपरिक खेलों, जैसे-गिल्ली-डंडा के कम होने का बदलाव अच्छा नहीं लगता, क्योंकि इससे शारीरिक गतिविधियाँ कम हुईं और पर्यावरण पर दबाव बढ़ा।
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गतिविधि- क्या होता यदि बिजली का आविष्कार नहीं हुआ होता? तो आप बता सकते हैं क्या?
प्रश्न 1.
बिजली के बिना हमारी जिंदगी कैसी होगी?
प्रश्न 2.
पुराने जमाने में लोग रात में रोशनी के लिए क्या-क्या करते थे?
प्रश्न 3.
क्या सभी बदलाव जरूरी होते हैं?
उत्तर:
यदि बिजली का आविष्कार नहीं हुआ होता, तो हमारी जिंदगी कठिन होती। हम दीया, लालटेन या मशाल पर निर्भर रहते, जिससे रात में पढ़ाई व अन्य कार्य करना मुश्किल होता।
- बिजली के बिना हमारी जिंदगी बहुत कठिन होगी। घरों में रोशनी नहीं होगी, उपकरण काम नहीं करेंगे और संचार बाधित होगा। दैनिक जीवन की कई गतिविधियाँ प्रभावित होंगी, जैसे कि काम, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ। जीवन असुविधाजनक और चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
- पुराने जमाने में लोग रात में रोशनी के लिए मिट्टी के दीए, लालटेन, डिब्बरी या मशाल जलाते थे, जो तेल या मोम पर चलते थे और अस्थिर थे।
- सभी बदलाव जरूरी नहीं होते; जैसे-तकनीक ने सुविधा तो दी, लेकिन पारंपरिक रीति-रिवाजों और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
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गतिविधि-तर्क-वितर्क-कक्षा में दो समूह बनाएँ। एक समूह बिजली के फायदे और दूसरा समूह उससे होने वाले नुकसान पर अपने विचार साझा करें।
तो क्या आप अब बता सकते हैं कि-
प्रश्न 1.
बिजली आने से क्या-क्या फायदे हुए?
उत्तर:
बिजली के आगमन से जीवन आसान हुआ। बल्ब, ट्यूबलाइट और एल.ई.डी. ने रात में पढ़ाई और अन्य सभी तरह के कार्यों को सरल बनाया। मशीनों, कंप्यूटर और इंटरनेट ने उत्पादकता, संचार और मनोरंजन बढ़ाया चिकित्सा (एक्सरे, वेंटिलेटर) और यातायात (ट्रेन, हवाई जहाज) में क्रांति आई।
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प्रश्न 2.
क्या बिजली के उपयोग से कोई नुकसान भी होता है?
उत्तर:
बिजली के उपयोंग से कुछ नुकसान भी होते हैं, जैसे-पर्यावरण प्रदूषण (कोयला संयंत्रों से), तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता और स्वास्थ्य पर प्रभाव (स्क्रीन टाइम से आँखों की समस्या)।
प्रश्न 3.
क्या प्राचीन वस्तुएँ हमें आज भी इस्तेमाल करनी चाहिए?
उत्तर:
प्राचीन वस्तुएँ जैसे मिट्टी के दीए या बर्तन आज भी उपयोगी हैं, क्योंकि वे पर्यावरण अनुकूल हैं और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवित रखते हैं, लेकिन इन्हें आधुनिक सुविधाओं के साथ संतुलित करना आवश्यक है।
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गतिविधि-
आप अपने घर से कोई प्राचीन वस्तु (दादी-नानी की वस्तुएँ, पुराने सिक्के, मिट्टी के बर्तन, ताँबे के बर्तन, मिट्टी के खिलौने, पुरानी किताबें) लाएँ और उनके बारे में चर्चा कीजिए।
आप बताइए-
प्रश्न 1.
प्राचीनकाल के बर्तन और आज के बर्तनों में क्या परिवर्तन आया है?
उत्तर:
प्राचीनकाल में बर्तन मुख्य रूप से मिट्टी, ताँबे या पीतल के होते थे, जो हस्तनिर्मित, पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ थे, लेकिन भारी होते थे और रखरखाव में मुश्किलें होती थीं। आज स्टेनलेस स्टील, एल्यूमीनियम और नॉन-स्टिक बर्तन प्रचलित हैं, जो हल्के, साफ करने में आसान और बड़े पैमाने पर मशीनों से बनते हैं, परन्तु पर्यावरण पर दुष्प्रभाव डालते हैं।
प्रश्न 2.
पुरानी वस्तुएँ हमें अतीत के बारे में क्या सिखाती हैं?
उत्तर:
पुरानी वस्तुएँ हमें अतीत के बारे में बहुत कुछ सिखाती हैं। मिट्टी के बर्तन पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता, पुरानी किताबें तत्कालीन शिक्षा और संस्कृति तथा सिक्के आर्थिक व्यवस्था दर्शाते हैं। ये हमें हमारी जड़ों, हस्तशिल्प और सादगी भरे जीवन से जोड़ती हैं।
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प्रश्न :
अपने सहपाठियों के साथ मिलकर इस तालिका/सारणी को भरिए-

उत्तर:

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
सत्य/असत्य लिखिए-
1. बिजली का बल्ब सबसे पुराना रोशनी का साधन है।
उत्तर: असत्य
2. लोग आज भी त्योहारों पर दीए जलाते हैं।
उत्तर: सत्य।
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3. पुराने समय में टेलीविजन नर्ही था।
उत्तर: सत्य।
अपने अनुभव लिखिए-
‘रोशनी के साधनों में परिवर्तन’ पर 10-12 पंक्तियों में लिखिए।
उत्तर:
रोशनी के साधनों में समय के साथ बहुत बदलाव आया है। मेरे नानाजी बताते हैं कि उनके बचपन में बिजली नहीं थी और रात में पढ़ाई के लिए दीए की रोशनी का सहारा लेना पड़ता था। तेल खत्म होने या हवा चलने पर पढ़ाई मुश्किल हो जाती थी। बाद में बिजली आई और बल्ब ने रोशनी को आसान और स्थिर बनाया। फिर टयूबलाइट, सीएफएल और अब एल.ई.डी. बल्ब आए, जो कम बिजली खपत करते हैं और ज्यादा रोशनी देते हैं। सौर ऊर्जा से चलने वाली लाइटें भी अब लोकप्रिय हैं। इन खदलावों ने जीवन को सुविधाजनक बनाया, पढ़ाई आसान हुई और रात में भी काम करना सरल हो गया। हालांकि, दीए जलाने की परंपरा आज भी त्योहारों में जीवित है, जो हमें हमारी जड़ों से जोड़े रखती है।
निम्नांकित में से किसी एक का चित्र बनाइए
(दीया, मशाल, डिब्बरी, लालटेन, टॉर्च, साधारण बल्ब, ट्यूबलाइट, सीएफएल, एलईडी बल्ब, बैट्री वाले बल्ब)

उत्तर:

सोचिए और बताइए-
प्रश्न 1.
बिजली के आविष्कार से पहले लोग रात में कैसे पढ़ते थे?
उत्तर:
लोग दीया, लालटेन, डिब्बरी या मश़ाल की रोशनी में पढ़ते थे। दीए में तेल और बाती डालकर जलाया जाता था, लेकिन हवा चलने पर लौ कांपती थी और तेल खत्म होने पर रोशनी बंद हो जाती थी। अतः पढ़ाई के लिए स्थिर रोशनी का कमी के कारण समय और मेहनत ज्यादा लगती थी।
प्रश्न 2.
दीए और बल्ब में क्या अंतर है?
उत्तर:
दीया-मिट्टी का बना, तेल और बाती से जलता है, रोशनी कम और अस्थिर होती है, पर्यावरण-अनुकूल लेकिन बार-बार तेल डालना पड़ना है। दीए का परंपरागत एवं सास्कृतिक महन्व है :
बल्ब-बिजली से चलता है, ज्यादा और स्थिर रोशनी देता है, रखरखाव आसान है, लेकिन बिजली की खपत करता है और पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है।
प्रश्न 3.
समय के साथ रोशनी के साधनों में क्या बदलाव आया है? इससे हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
बदलाव-
- प्राचीन काल में-मशाल, दीया, लालटेन (तेल आधारित, कम रोशनी, अस्थिर)।
- मध्य काल में-गैस लैंप, बैटरी टॉर्च।
- आधुनिक काल में-बिजली का बल्ब, ट्यूबलाइट, सीएफएल, एल.ई.डी. बल्ब, सौर लाइटें (ज्यादा रोशनी, कम बिजली खपत, पर्यावरणअनुकूल)।
प्रभाव-
- सकारात्मक-पढ़ाई, काम और रात की अन्य गतिविधियाँ आसान, शिक्षा और उत्पादकता बढ़ी, जीवन सुविधाजनक हो गया।
- नकारात्मक-बिजली पर निर्भरता, प्रदूषण (पुराने बल्बों से), पारंपरिक दीया-लालटेन का उपयोग कम हुआ।
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प्रश्न 4.
अपने दादा-दादी या नाना-नानी से पूछें कि उनके बचपन में रोशनी के क्या साधन थे और इसकी तुलना आज से कीजिए।
उत्तर:
मेर नाना-नानी जी ने बताया कि उनके बचपन में गाँव में बिजली नहीं थी। वे दीया और लालटेन जलाते थे। उन्हें रात में पढाई के लिए लालटेन को साथ में रखना पड़ता था और तेल की गंध से परेशानी भी होती थी। आज बिजली के बल्ब, ट्यूबलाइट और एल.ई.डी. लाइटें हैं, जो ज्यादा रोशनी देते हैं और इस्तेमाल में आसान हैं। चहले रोशनी सीमित थी, अब हर घर में उजाला है। हालांकि, वे कहते हैं कि दीए की रोशनी में एक अलग शांति थी, वो अब कम मिलती है।
गतिविधि-
आप अपनी कक्षा में त्योहारों पर दीए जलाने या पुराने रीति-रिवाज के बारे में अनुभव साझा कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
RBSE Class 5 Paryavaran Chapter 9 Question Answer in Hindi
बहुविकल्पात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
नानाजी के समय में गाँवों में रोशनी का मुख्य साधन क्या था?
(अ) दीया और लालटेन
(ब) बल्ब
(स) एल.ई.डी. लाइट
(द) सौर लाइट
उत्तर:
(अ) दीया और लालटेन
प्रश्न 2.
पहले लोग यात्रा के लिए मुख्य रूप से क्या उपयोग करते थे?
(अ) कार
(ब) बैलगाड़ी और घोड़ा गाड़ी
(स) हवाई जहाज
(द) मेट्रो
उत्तर:
(ब) बैलगाड़ी और घोड़ा गाड़ी
प्रश्न 3.
वर्तमान समय में शिक्षा में क्या शामिल हैं?
(अ) स्लेट-तख्ती
(ब) गुरुकुल
(स) डिजिटल कक्षाएँ और स्मार्ट बोर्ड
(द) पत्र-लेखन
उत्तर:
(स) डिजिटल कक्षाएँ और स्मार्ट बोर्ड
प्रश्न 4.
नानाजी के समय में संदेश भेजने का मुख्य साधन क्या था?
(अ) मोबाइल
(ब) ईमेल
(स) क्राट्सएप
(द) पत्र और तार
उत्तर:
(द) पत्र और तार
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प्रश्न 5.
बदलाव का मुख्य कारण क्या रहा?
(अ) विज्ञान और तकनीकी का विकास
(ब) पारंपरिक खेल
(स) राजशाही
(द) मिट्टी के बर्तन
उत्तर:
(अ) विज्ञान और तकनीकी का विकास
प्रश्न 6.
बिजली के उपयोग से कौन-सा नकारात्मक प्रभाव हुआ?
(अ) पढ़ाई आसान हुई
(ब) प्रदूषण बढ़ा
(स) यात्रा तेज हुई
(द) संचार बेहतर हुआ
उत्तर:
(ब) प्रदूषण बढ़ा
प्रश्न 7.
प्राचीन वस्तुएँ हमें क्या सिखाती हैं?
(अ) आधुनिक तकनीक
(ब) मोबाइल का उपयोग
(स) अतीत की जीवनशैली
(द) इंटरनेट का इतिहास
उत्तर:
(स) अतीत की जीवनशैली
प्रश्न 8.
नानाजी के समय में घरों का प्रकार कैसा था?
(अ) मल्टी-स्टोरी फ्लैट
(ब) स्मार्ट होम
(स) कंक्रीट भवन
(द) कच्चे मिट्टी के घरं
उत्तर:
(द) कच्चे मिट्टी के घरं
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. समाज में समय के साथ _____ आता है।
उत्तर: बदलाव
2. एक रात बिजली चली गई तो नानाजी ने एक _____ जलाया।
उत्तर: दीया
3. पहले दीया, लालटेन और _____ का उपयोग होता था।
उत्तर: मशाल
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4. विज्ञान और तकनीक के विकास से नई-नई _____ बर्नी।
उत्तर: वस्तुएँ।
निम्नलिखित कथनों में से सत्य/असत्य बतलाइए-
1. त्योहारों पर दीए जलाना आज भी प्रचलित है।
उत्तर: सत्य।
2. प्राचीन बर्तन पर्यावरण-अनुकूल थे।
उत्तर: सत्य।
3. गिल्ली-डंडा एक पारंपरिक खेल है।
उत्तर: सत्य।
4. प्राचीन वस्तुएँ इतिहास को समझने में मदद करती हैं।
उत्तर: सत्य।
निम्नलिखित को सही सुमेलित कीजिए
| स्तंभ ‘अ’ | स्तंभ ‘ब’ |
| 1. वर्तमान समय में मनोरंजन | (क) वीडियो गेम और मोबाइल गेम |
| 2. पहले मनोरंजन | (ख) गिल्ली-डंडा और कबड्डी |
| 3. पहले खेल | (ग) ओटीटी प्लेटफॉर्म और स्मार्टफोन |
| 4. वर्तमान समय में | (घ) लोकगीत और मेले खेल |
उत्तर:
| स्तंभ ‘अ’ | स्तंभ ‘ब’ |
| 1. वर्तमान समय में मनोरंजन | (ग) ओटीटी प्लेटफॉर्म और स्मार्टफोन |
| 2. पहले मनोरंजन | (घ) लोकगीत और मेले खेल |
| 3. पहले खेल | (ख) गिल्ली-डंडा और कबड्डी |
| 4. वर्तमान समय में | (क) वीडियो गेम और मोबाइल गेम |
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
बिजली के उपयोग का एक सकारात्मक प्रभाव क्या है?
उत्तर:
पढ़ाई आसान एवं सुविधाजनक हुई।
प्रश्न 2.
प्राचीन सिक्के हमें क्या बताते हैं?
उत्तर:
पुरानी मुद्रा व्यवस्था के बारे में।
प्रश्न 3.
बिजली के बिना पढ़ाई के लिए किसका उपयोग किया जाता था?
उत्तर:
दीए का।
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प्रश्न 4.
पहले रसोई के बर्तन किसके बने होते थे?
उत्तर:
मिट्टी, ताँबे और पीतल के।
प्रश्न 5.
पहले शासन व्यवस्था कैसी होती थी?
उत्तर:
राजा का शासन होता था।
प्रश्न 6.
बदलाव का एक पर्यावरणीय कारण क्या है?
उत्तर:
संसाधन संरक्षण।
प्रश्न 7.
पहले पानी का स्रोत क्या था?
उत्तर:
बावड़ी और कुआँ।
प्रश्न 8.
बदलाव का एक सकारात्मक दृष्टिकोण क्या है?
उत्तर:
तेज परिवहन।
प्रश्न 9.
पहले विद्यालयों में लेखन हेतु क्या उपयोग होता था?
उत्तर:
स्लेट-तख्ती।
प्रश्न 10.
बिजली के बिना जीवन कैसा होता था?
उत्तर:
कठिन और सीमित।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
बिजली के आविष्कार ने पढ़ाई को कैसे आसान बनाया?
उत्तर:
बिजली के आविष्कार से बल्ब और ट्यूबलाइट आए, जिससे रात में स्थिर रोशनी मिली। यह दीए की अस्थिर रोशनी से बेहतर थी, जिससे पढ़ाई आसान और प्रभावी हुई।
प्रश्न 2.
प्राचीन वस्तुओं से हमें किसका ज्ञान होता है?
उत्तर:
प्राचीन वस्तुएँ जैसे सिक्के, मिट्टी के बर्तन और किताबें अतीत की मुद्रा, पर्यावरण-अनुकूल जीवन और शिक्षा को दर्शाती हैं, जो हमें पुरानी जीवनशैली और संस्कृति का ज्ञान देती हैं।
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प्रश्न 3.
नानाजी के समय में गाँवों की जीवनशैली कैसी थी?
उत्तर:
नानाजी के समय में गाँवों में बिजली नहीं थी, लोग दीया-लालटेन जलाते थे, खेती करते थे और कच्चे घरों में रहते थे। उस समय मंदिर और बावड़ी सामुदायिक केन्द्र थे।
प्रश्न 4.
बदलाव क्यों आवश्यक होते हैं?
उत्तर:
बदलाव समस्याओं को हल करने और जीवन को आसान बनाने के लिए आवश्यक हैं। विज्ञान और तकनीक ने शिक्षा, यातायात और संचार को बेहतर बनाया, जिससे समय और श्रम की बचत हुई।
प्रश्न 5.
पुरानी किताबें और पत्र हमें क्या बताते हैं?
उत्तर:
पुरानी किताबें और पत्र तत्कालीन शिक्षा, संचार और संस्कृति को दर्शाते हैं। वे हमें अतीत के ज्ञान, लेखन शैली और सामाजिक व्यवस्था की जानकारी देते हैं।
दीर्घ उत्तरीय एवं निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
त्योहारों की परंपराएँ समय के साथ कैसे बनी रहीं और क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
उत्तर:
त्योहारों की परंपराएँ जैसे दीपावली में दीए जलाना, होली में रंग खेलना और रक्षाबंधन में राखी बाँधना आज भी कायम हैं। ये परंपराएँ सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों को
जीवित रखती हैं, परिवार और समुदाय को जोड़ती हैं और खुशी का अवसर देती हैं। ये हमें हमारी जड़ों से जोड़े रखती हैं और आधुनिकता के बीच भी एकता और सादगी का महत्त्व सिखाती हैं।
प्रश्न 2.
नानाजी के समय की जीवनशैली और वर्तमान जीवनशैली की तुलना करें।
उत्तर:
नानाजी के समय की जीवनशैली सादगी भरी थी। लोग कच्चे घरों में रहते थे, दीया-लालटेन जलाते थे और बैलगाड़ी से यात्रा करते थे। खेती मुख्य व्यवसाय था। वर्तमान में पक्के घर, बिजली और इंटरनेट हैं। कार, मोबाइल और डिजिटल शिक्षा ने जीवन को तेज और सुविधाजनक बना दिया है। हालांकि, तब पर्यावरण स्वच्छ था और अब प्रदूषण एवं व्यस्तता बढ़ी है।
प्रश्न 3.
बिजली के बिना जीवन की कल्पना करें और इसके प्रभावों की चर्चा करें।
उत्तर:
बिजली के बिना हमारा जीवन कठिन होता। रोशनी के लिए दीया-लालटेन, यातायात के लिए बैलगाड़ी और संचार के लिए पत्र पर निर्भरता होती। पढ़ाई, चिकित्सा और उत्पादन सीमित होते। जीवन धीमा और श्रमसाध्य होता, लेकिन पर्यावरण स्वच्छ होता। बिजली ने शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार को आसान बनाया, परन्तु इसकी अनुपस्थिति में सामुदायिक सहयोग और प्रकृति से जुड़ाव बढ़ता। अतः संतुलन आवश्यक है।
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प्रश्न 4.
समय के साथ समाज में आए बदलावों के कारणों और परिणामों की विस्तार से व्याख्या करें।
उत्तर:
समय के साथ समाज में बदलाव विज्ञानतकनीक, सुविधा की माँग और संसाधन संरक्षण के कारण आए। बिजली, इंटरनेट और मशीनों ने शिक्षा, यातायात और संचार को बेहतर बनाया। परिणामस्वरूप, जीवन आसान, स्वास्थ्य सेवाएँ उन्नत और वैश्विक जुड़ाव हुआ। नकारात्मक रूप से, प्रदूषण, पारंपरिक रीतिरिवाजों का कम होना और व्यस्त जीवनशैली बढ़ी। तकनीक पर निर्भरता से शारीरिक गतिविधियाँ कम हुईं।
RBSE Class 5 EVS Chapter 9 Notes in Hindi हमारा अतीत और वर्तमान

दादा-दादी के बचपन में विद्यालय और गाँव-
- विद्यालय-कच्चे भवन, स्लेट-तखी पर लेखन, गुरु-शिष्य परंपरा, सीमित संसाधन होते थे।
- गाँव-बिजली नहीं, दीया-लालटेन का उपयोग, बैलगाड़ी से यातायात, बावड़ी-कुएँ से पानी, हवेलियाँ और मंदिर पुरानी शान के प्रतीक हैं।
- जीवनशैली-साधारण, प्रकृति के करीब, मेहनत आधारित होती थी।
पहले की यात्रा के साधन-
- बैलगाड़ी, घोड़ा गाड़ी और पैदल यात्रा होती थी।
- बाद में साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, कार, ट्रेन, ह्वाई जहाज आदि प्रयुक्त हुए।
- पहले यात्रा धीमी और श्रमसाध्य थी, अब तेज और सुविधाजनक हो गई है।
कहानी : दीए से बल्ब तक-
- नानाजी का अनुभव
- बचपन में बिजली नहीं, दीया-लालटेन से रोशनी, पढ़ाई में कठिनाई होती थी।
- बिजली आने के बाद बल्ब, फिर एल.ई.डी. और सौर ऊर्जा वाली लाइटें आ गईं।
- यातायात-बैलगाड़ी से कार, ट्रेन व हवाई जहाज तक पहुँच गए हैं।
- पंखा-हाथ से झलने वाला पंखा से लेकर एयर कंडीशनर तक आ गए हैं।
- संदेश-हर बदलाव ने जीवन को आसान बनाया, प्रत्येक वस्तु का अपना इतिहास है।
समाज में परिवर्तन और निरंतरता
- जो नहीं बदला-त्योहारों पर दीए जलाना, पारंपरिक पहनावा, रीति-रिवाज व जीवन मूल्य आदि।
- जो बदल गया-
- शिक्षा-कच्चे भवन वाले विद्यालय से पक्की इमारतें, डिजिटल कक्षाएँ, स्मार्ट बोर्ड, ऑनलाइन शिक्षा।
- परिवहन-बैलगाड़ी व घोड़ागाड़ी से तेज गाडियाँ, बसें, ट्रेन व हवाई जहाज।
- रोशनी-दीया, लालटेन व मशाल से बल्ब, ट्यूबलाइट और एल.ई.डी.।
- खेल एवं मनोरंजन-गिल्ली-डंडा व कबड्डी से वीडियो गेम और मोबाइल गेम।
- संचार-पत्र-चिट्ठी से मोबाइल और ईमेल।
- पानी के स्रोत-बावड़ी-कुओं से नल व ट्यूबवेल।
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बदलाव के कारण और प्रभाव
- कारण-
- विज्ञान प्रौद्योगिकी-नई खोजें हुईं (जैसे-टीवी, इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ।)
- सुविधा और आराम-तेज और आसान तरीकों की खोज हुई (जैसे-ट्रेनों में बदलाव)।
- पर्यावरण और संसाधन-संसाधन संरक्षण के लिए नए साधन अपनाए गए (जैसे-इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ)।
- प्रभाव-
- सकारात्मक-जीवन आसान, बेहतर शिक्षा-स्वास्थ्य, तेज संचार-यात्रा।
- नकारात्मक-परंपराएँ कमजोर हुईं, प्रदूषण बढ़ा, व्यस्त जीवनशैली।
बदलाव के दृष्टिकोण
- सकारात्मक-मशीनों ने काम आसान किया, तेज परिवहन, इंटरनेट से वैश्विक जुड़ाव।
- नकारात्मक-तकनीक पर निर्भरता, शारीरिक गतिविधि में कमी, प्रदूषण व कचरे की समस्या, पारंपरिक खेलों का लोप।
पुरानी वस्तुओं से इतिह्रास समझना
- ऐतिहासिक प्रमाण-
- पुराने सिक्के-नोट-प्रचलित मुद्रा।
- ताँबे-मिट्टी के बर्तन-पर्यावरण अनुकूल जीवन।
- पुरानी किताबें-पत्र-शिक्षा-संचार के तरीके।
- उदाहरण-
- रोशनी-दीया, मशाल → बल्ब, एल.ई.डी.।
- परिवहन-बैलगाड़ी → मोटर गाड़ियाँ।
- शिक्षा-गुरुकुल → विद्यालय, आँनलाइन कक्षाएँ।
- संचार-चिट्टियाँ, पत्र → मोबाइल, ईमेल।
- पंखा-हाथ से चलने वाला → बिजली से चलने वाला।
- पानी का स्रोत-बावड़ी, कुआँ, तालाब → नल, ट्यूबवेल।
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गतिविधियाँ : पुरानी वस्तुओं का अध्ययन।
- वस्तु का इतिहास-
- परिवार से जानकारी-वस्तु की आयु, उपयोगकर्ता, वर्तमान उपयोग।
- उदाहरण-घड़ा, लालटेन, चक्की, पुराना कैमरा, मिट्टी के बर्तन, रेशम की पुरानी साड़ी, हाथ से बुने कपड़े, पुरानी किताबें आदि।
- कक्षा में संग्रहालय-पुरानी वस्तुओं का प्रदर्शन, प्रत्येक के साथ जानकारी (नाम, समय, किसने दिया, उपयोग)।
- गाइड की भूमिका-अन्य विद्यार्थियों को वस्तुओं का इतिहास बताना, संग्रहालय दर्शन के लिए अन्य कक्षाओं को आमंत्रण देना।
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