Practicing these RBSE Solutions Class 5 Hindi and Class 5 Hindi Chapter 1 सबसे पहले प्यार बनाया Question Answer improves confidence in the language.
Class 5 Hindi Chapter 1 सबसे पहले प्यार बनाया Question Answer
सबसे पहले प्यार बनाया Question Answer
आओ बात करें-
प्रश्न 1.
कविता में बताया गया है कि इस संसार में सबसे पहले प्यार बनाया गया है। इसके बाद प्यार से क्या-क्या बना है?
उत्तर:
इस संसार में सबसे पहले ईश्वर ने प्यार का निर्माण किया तथा इसके बाद धरती, आकाश, नदियाँ, समुद्र, बादल, पहाड़, सूरज, चाँद, तारे, वन-बाग, कलियाँ, पुष्प, तितलियाँ, भँवरे, इंसान आदि का निर्माण किया है।
प्रश्न 2.
कविता के अनुसार सब संतों ने क्या बतलाया है?
उत्तर:
कविता के अनुसार सब संतों ने प्यार का महत्त्व बताया तथा समझाया कि सम्पूर्ण पृथ्वी प्यार से भरी हुई है।
प्रश्न 3.
प्यार से सभी समस्याओं का समाधान हो सकता है। कैसे?
उत्तर:
हाँ, कुछ हद तक प्यार से समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। प्यार, चाहे वो किसी भी रूप में हो जैसे कि प्रेम, दोस्ती या परिवार का प्रेम, लोगों को एक साथ लाता है और समस्याओं को साझा करने और उनसे निपटने के लिए प्रेरित करता है। प्यार व्यक्ति को सकारात्मकता प्रदान करता है।
सोचो और लिखो –
प्रश्न 1.
नीचे दिए गए शब्दों का प्रयोग कर एकएक वाक्य बनाइए-
(क) संसार = _____.
(ख) प्रकृति = _____.
(ग) मनमानी = _____.
(घ) सृष्टि = _____.
उत्तर:
(क) संसार = इस संसार को खूबसूरत बनाने के लिए हमें प्यार से रहना चाहिए।
(ख) प्रकृति = प्रकृति हमारे जीवन का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।
(ग) मनमानी = उसकी मनमानी हर किसी को परेशान करती है।
(घ) सृष्टि = ईश्वर ने सृष्टि की रचना की है।
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प्रश्न 2.
पहाड़ों को प्रहरी क्यों कहा गया है?
उत्तर:
पहाड़ों को प्रहरी इसलिए कहा गया है, क्योंकि वे प्राकृतिक सीमाओं के रूप में कार्य करते हैं तथा प्राकृतिक आपदाओं और बाहरी खतरों से हमारी रक्षा करते हैं।
प्रश्न 3.
कविता में नानी ने क्या बताया?
उत्तर:
कविता में नानी ने बताया कि ईश्वर ने संसार का निर्माण किया है तथा संसार को व्यवस्थित और सुचारु रूप से चलाने के लिए सबसे पहले प्यार को बनाया।
प्रश्न 4.
नीचे दिए गए शब्दों को सही क्रम में रखकर प्रश्न बनाओ-
(i) किसने / बनाया? / संसार / यह उत्तर: यह्ह संसार किसने बनाया?
(ii) कौन-कौनसे/प्रकृति के/उदाहरण/आए/इस कविता/में /हैं?
उत्तर:
इस कविता में प्रकृति के कौन-कौन से उदाहरण आए हैं?
प्रश्न 5.
इस कविता के मूलभाव को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
इस कविता का मूलभाव यह है कि प्रेम ईश्वर का पहला और सबसे महत्त्वपूर्ण उपहार है। यही मानव जीवन का आधार है और इसे अपने जीवन में महत्त्व देना आवश्यक है।
मेरी बात सबकी बात-
प्रश्न 1.
पुस्तकालय, शिक्षकों और अभिभावकों के सहयोग से इस कविता से मिलती-जुलती आपके घर की भाषा से जुड़ी कोई कविता या गीत यहाँ लिखिए।

उत्तर:
विद्यार्थी शिक्षक एवं परिजन की सहायता से स्वयं करें।
पढ़कर जानें-
1. नीचे कविता की कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें कुछ शब्द छूट गए हैं। रिक्त स्थान पर कविता से खोजकर सही शब्द लिखिए।
(क) बहुत जरूरी समझ ईश ने, सबसे पहले _____ बनाया।
उत्तर:
प्यार
(ख) इसी प्यार से धरती – _____ सरिता – _____ जुड़े हुए।
उत्तर:
अम्बर, सागर
(ग) सारी _____ प्यार भरी है, सब _____ ने समझाया।
उत्तर:
वसुधा, संतों
(घ) तारों की _____ है इससे, इससे सबका है _____.
उत्तर:
टिमटिम, नाता।
आओ रचना करें-
प्रश्न 1.
इस कविता की तरह ही नानी या दादी ने आपको भी कोई कविता/कहानी सुनाई होगी। उसे लिखिए।
उत्तर:
नानी-दादी ने हमें बताया है कि ईश्वर ने सृष्टि का निर्माण किया है। हम सब एक-दूसरे को मित्र बनाकर प्रेम से रहें। कभी किसी का अनर्थ न करें। प्रकृति के सौन्दर्य का आनन्द लें तथा उसे प्रदूषित न करें। परस्पर प्रेम से रहते हुए अपना जीवन व्यतीत करें।
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भाषा की बात-
विद्यालय में फुटबॉल प्रतियोगिता हो रही थी। अक्षिता की टीम फाइनल में थी, लेकिन टीम की खिलाड़ी काजल और निकिता को चोट लग गई थी। सब निराश थे, लेकिन अक्षिता ने टीम को समझाया, “एकता और मेहनत से हम जीत सकते हैं।” सभी ने जोश और धैर्य से खेल खेला। आखिरी मिनट में नैना ने गोल कर दिया। टीम की जीत से सभी खुश हो गए।
प्रश्न 1.
तालिका में दिए गए शब्दों के समानार्थी शब्द कहानी में से पहचानकर लिखिए-

उत्तर:
| विजय | जीत |
| परिश्रम | मेहनत |
| उत्साह | जोश |
| सहनशीलता | धैर्य |
| आनंद | खुशी |
प्रश्न 2.
नीचे दिए गए शब्दों को उनकी सही क्रिया से मिलाओ-

उत्तर:

सबसे पहले प्यार बनाया प्रश्न उत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
कविता में किसके द्वारा प्यार बनाए जाने की बात कही गई है?
(अ) मनुष्य
(ब) ईश्वर
(स) प्रकृति
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) ईश्वर
प्रश्न 2.
कविता का मुख्य विर्षय क्या है?
(अ) प्रेम
(ब) ईश्वर
(स) प्रकृति
(द) जीवन
उत्तर:
(अ) प्रेम
प्रश्न 3.
‘अम्बर’ शब्द का क्या अर्थ है?
(अ) अमर
(ब) पृथ्वी
(स) आकाश
(द) अमृत
उत्तर:
(स) आकाश
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प्रश्न 4.
‘अमृत’ कौन बरसाता है?
(अ) सूरज
(ब) चन्द्रमा
(स) तारे
(द) पर्वत
उत्तर:
(ब) चन्द्रमा
प्रश्न 5.
‘सरिता’ शब्द का पर्यायवाची है-
(अ) समुद्र
(ब) सूर्य
(स) नदी
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(स) नदी
प्रश्न 6.
‘अमृत’ शब्द का विलोम है-
(अ) विष
(ब) अमर
(स) ईश्वर
(द) जल
उत्तर:
(अ) विष
प्रश्न 7.
‘प्रहरी’ शब्द का अर्थ है-
(अ) कठोर
(ब) पत्थर
(स) पहरेदार
(द) ईश्वर
उत्तर:
(स) पहरेदार
प्रश्न 8.
इस कविता में ‘ईश्वर ने संसार बनाया’ यह किसने बताया?
(अ) दादी ने
(ब) नानी ने
(स) नाना ने
(द) बुआ ने
उत्तर:
(ब) नानी ने
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. ईश्वर ने _____ बनाया।
उत्तर:
संसार,
2. इसी प्यार में बरसे _____।
उत्तर:
बादल
3. चन्दा _____ बरसाता।
उत्तर:
अमृत
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4. इक-दूजे से _____ मिलना।
उत्तर:
मन।
निम्नलिखित कथनों में से सत्य/असत्य बतलाइये-
1. बहुत जरूरी समझ ईश्वर ने सबसे पहले प्रकृति बनायी।
उत्तर:
असत्य।
2. चन्द्रमा अमृत बरसाता है।
उत्तर:
सत्य
3. फूलों पर भँवरे मंडरा रहे हैं।
उत्तर:
सत्य
4. सारी वसुधा विष से भरी हुई है।
उत्तर:
असत्य।
निम्नलिखित को सही सुमेलित कीजिए
| प्रथम पंक्ति | द्वितीय पंक्ति |
| 1. तारों की टिमटिम है इससे | (क) सबसे पहले प्यार बनाया। |
| 2. बहुत जरूरी समझ ईश ने | (ख) प्रहरी पर्वत खड़े हुए। |
| 3. नानी जी ने हमें बताया | (ग) इससे सबका है नाता। |
| 4. इसी प्यार में बरसे बादल | (घ) ईश्वर ने संसार बनाया। |
उत्तर:
| प्रथम पंक्ति | द्वितीय पंक्ति |
| 1. तारों की टिमटिम है इससे | (ग) इससे सबका है नाता। |
| 2. बहुत जरूरी समझ ईश ने | (क) सबसे पहले प्यार बनाया। |
| 3. नानी जी ने हमें बताया | (घ) ईश्वर ने संसार बनाया। |
| 4. इसी प्यार में बरसे बादल | (ख) प्रहरी पर्वत खड़े हुए। |
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
इस कविता में कौन, किसकी बात बता रहा है?
उत्तर:
इस कविता में एक बच्ची अपनी नानी द्वारा बतायी गई बातें बता रही है।
प्रश्न 2.
कविता में ईश्वर ने सबसे पहले क्या बनाया?
उत्तर:
कविता में ईश्वर ने सबसे पहले प्यार बनाया।
प्रश्न 3.
कविता के अनुसार प्यार से कौन जुड़े हुए हैं?
उत्तर:
पृथ्वी, आकाश, नदियाँ और समुद्र।
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प्रश्न 4.
इस कविता के आधार पर कौन हमारा प्रहरी है?
उत्तर:
इस कविता के आधार पर पर्वत हमारा प्रहरी है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
कविता में प्रेम को ईश्वर का पहला कार्य क्यों बताया गया है?
उत्तर:
कविता में प्रेम को ईश्वर का पहला कार्य बताया गया है, क्योंकि यह सभी जीवों के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण है और यह उन्हें एक-दूसरे से जोड़ता है।
प्रश्न 2.
प्रेम के महत्त्व को कविता में कैसे दर्शाया गया है?
उत्तर:
कवि का कहना है कि प्रेम से ही पृथ्वी, आकाश, नदियाँ, समुद्र एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसी प्रेम के कारण सूर्य उदय होता है, चन्द्रमा अमृत बरसाता है और वन-बाग हरियाली से युक्त होते हैं।
प्रश्न 3.
‘सारी वसुधा प्यार से भरी है’, यह पंक्ति किसने समझायी?
उत्तर:
‘सारी वसुधा प्यार से भरी है’, यह पंक्ति हमारे देश के सभी महान संतों एवं महापुरुषों ने समझायी है। प्रेम हमारे जीवन का आधार है। इसी से हम ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं।
प्रश्न 4.
पर्वत हमारी रक्षा कैसे करते हैं?
उत्तर:
पर्वत हमारी रक्षा कई तरह से करते हैं जैसे कि जलवायु को नियन्त्रित करके, बाढ़ और भूस्खलन से ब्रचाव करके और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखकर, वे हमारे लिए एक प्राकृतिक ढ़ाल की तरह काम करते हैं।
दीर्घउत्तरीय एवं निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
‘सबसे पहले प्यार बनाया’ यह कविता हमें क्या संदेश देती है?
उत्तर:
यह कविता प्रेम के महत्त्व को उजागर करती है कविता में कवि प्रेम को ईश्वर की देन बताता है, जिससे पता चलता है कि प्रेम एक पवित्र और महत्त्वपूर्ण चीज है। प्रेम ही वह भावना है जो हमें दूसरों से जोड़ती है और हमें जीवन जीने की प्रेरणा देती है। प्रेम ही ईश्वर को प्राप्त करने का सच्चा मार्ग है।
प्रश्न 2.
इस कविता में प्रकृति में निहित प्रेम को बताइए।
उत्तर:
इस कविता में बताया गया है कि प्रकृति प्रेम के कारण ही अपना कर्त्तव्य पूरा करती है। प्रेम ईश्वर की देन है। इसी प्रेम के कारण धरती-आकाश, नदियाँ-समुद्र एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, सूरज उदय होकर संसार में रोशनी फैलाता है, चन्द्रमा अमृत बरसाता है, बादल वर्षा करते हैं तथा बाग-उपवन हरियाली से युक्त हो जाते हैं। प्रेम ही वह भावना है जो हमें दूसरों के हित में कार्य करने के लिए प्रेरित करती है।
सबसे पहले प्यार बनाया Summary in Hindi
कठिन शब्दार्थ और सरलार्थ-

नानीजी ने हमें बताया,
ईश्वर ने संसार बनाया।
बहुत जरूरी समझ ईश ने,
सबसे पहले प्यार बनाया।
इसी प्यार से धरती-अंबर,
सरिता-सागर जुड़े हुए।
इसी प्यार में बरसे बादल,
प्रहरी-पर्वत खड़े हुए।
कठिन-शब्दार्थ – संसार = दुनिया, जगत। जरूरी = आवश्यक। ईश = ईश्वर, स्वामी। धरती = पृथ्वी, जमीन। अम्बर = आकाश। सरिता = नदी। सागर = समुद्र। प्रहरी = पहरेदार। पर्वत = पहाड़। प्यार = प्रेम।
सरलार्थ – प्रस्तुत कवितांश में एक बच्ची अपनी नानी द्वारा बतायी गई बातों को प्रकट कर रही है। नानी ने हमें बताया है कि ईश्वर ने संसार का निर्माण किया है। ईश्वर को एक सर्वोच्च शक्ति व सृष्टिकर्ता माना जाता है। इस संसार को व्यवस्थित और सुचारु रूप से चलाने के लिए ईश्वर ने सबसे पहले प्यार को बनाया है, क्योंकि प्रेम ही ईश्वर का रूप है और प्रेम के बिना सृष्टि का निर्माण सम्भव नहीं था।
इसी प्यार के कारण धरती, आकाश, नदियाँ व समुद्र एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और अपने कर्त्तव्य का पालन करते हैं। प्रेम के कारण ही बादल हमारे लिए वर्षा करते हैं और पर्वत पहरेदार के रूप में खड़े होकर शत्रुओं से और प्राकृतिक आपदाओं से हमारी रक्षा करते हैं।
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इसी प्यार से सूरज उगता,
चंदा अमृत बरसाता।
तारों की टिमटिम है इससे,
इससे सबका है नाता।
ये हरियाली वन-बागों की,
कलियों सुमनों का खिलना।
तितली-भँवरों का मैंडराना,
इक-दूजे से मन मिलना।
कठिन-शब्दार्थ – सूरज = सूर्य। उगता = उदय होना। चन्दा = चन्द्रमा, चाँद। नाता = रिश्ता। बाग = बगीचा, उद्यान। सुमन = पुष्प, फूल। भंवरा = भौंरा। मंडराना = चारों ओर घूमना/फिरना। इक-दूजे = एक-दूसरे।
सरलार्थ-कवि कहता है कि प्यार के कारण ही सूर्य उदय होकर संसार को रोशनी देता है और चन्द्रमा रात्रि में अमृत बरसाता है। प्रेम से ही तारे रात को टिमटिमाते हैं। प्रेम का रिश्ता सभी से है।
प्रेम के लिए ही प्रकृति की सभी वस्तुएँ अपने कर्त्तव्य का पालन करती हैं। वन और बगीचों में हरियाली का होना, उसमें कलियों, फूलों के खिलने पर उस पर तितलियों और भँवरों का मंडराना भी ईश्वर के प्रेम का प्रतीक है। इस प्रकार ईश्वर के प्रेम से ही एक-दूसरे का मन मिल जाता है।
सारी वस्थुा प्यार भरी है,
सब संतों ने समझाया,
बहुत जरूरी समझ ईश ने
सबसे पहले प्यार बनाया।
कठिन-शब्दार्थ – वसुधा = धरती, पृथ्वी। संत = सज्जन, महात्मा।
सरलार्थ – कवि कहता है कि सम्पूर्ण पृथ्वी प्यार से भरी हुई है। हमारे देश के सभी महान संतों ने प्रेम के महत्त्व पर बल दिया है। प्रेम ही वह शक्ति है जो व्यक्ति को ईश्वर के करीब ले जाती है। प्रेम ही जीवन का आधार है। इसलिए प्रेम को बहुत जरूरी समझकर ईश्वर ने सबसे पहले इस सृष्टि में प्रेम को बनाया है।
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