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Class 5 Hindi Chapter 10 दोहे और पद Question Answer
दोहे और पद Question Answer
आओ बात करें-
प्रश्न 1.
दादू और मीरा के दोहों से आपने क्या समझा? अपने शब्दों में बताइए।
उत्तर:
दादू के दोहे नीतिपरक हैं, उन्होंने अपने दोहों में ज्ञान प्राप्ति एवं परोपकार की भावना पर प्रकाश डाला है। जबकि मीरा के दोहे कृष्ण भक्ति और प्रेम भाव से भरे हुए हैं। इन दोहों में मीरा का कृष्ण के प्रति समर्पण की भावना निहित है।
प्रश्न 2.
यदि आपको कबीर, दादू या मीरा से मिलने का अवसर मिलता तो आप उनसे क्या प्रश्न पूछते?
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
प्रश्न 3.
मीरा ने कृष्ण की कैसी छवि का वर्णन किया है?
उत्तर:
मीराबाई ने कृष्ण के भक्त वत्सल स्वरूप का वर्णन किया है। श्रीकृष्ण की मूरत सब के मन को मोहने वाली है और सूरत साँवली सलोनी है। होठों पर अमृत रस बरसाने वाली मुरली सजती है और गले में वैजन्ती माला, कमर में कमरबन्द, पाँव में पायल सुशोभित है।
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प्रश्न 4.
क्या अभ्यास से हर कठिन कार्य को सरल बनाया जा सकता है? अपने अनुभव साझा करें।
उत्तर:
अभ्यास से हर कठिन कार्य को सरल बनाया जा सकता है, क्योंकि निरंतर अभ्यास से हमें कौशल में सुधार करने में मदद मिलती है। जैसे-जैसे हम किसी कार्य को बार-बार करते हैं हमारे मस्तिष्क में उस कार्य के लिए तंत्रिका पथ मजबूत हो जाते हैं, जिससे वह कार्य धीरे-धीरे सरल हो जाता है।
सोचो और लिखो-
1. सही उत्तर चुनो-
प्रश्न 1.
‘रसरी आवत जात है, सिल पर करत निशान।’ इस पंक्ति में किसका महत्त्व बताया गया है?
(क) प्रेम
(ख) धैर्य
(ग) निरंतर अभ्यास
(घ) त्याग ( )
उत्तर:
(ख) धैर्य
प्रश्न 2.
मीरा किसके प्रति अपनी भक्ति व्यक्त कर रही हैं?
(क) दादू
(ख) कृष्ण
(ग) कबीर
(घ) तुलसीदास
उत्तर:
(ग) कबीर
2. मिलान करो-

उत्तर:

3. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिये-
(क) रसरी आवत जात है, _____ पर परत निशान।
उत्तर:
सिल
(ख) मीरा प्रभु _____ सुखदाई।
उत्तर:
संतन
(ग) मोहनी मूरत, _____ सूरत, नैना बने बिसाल।
उत्तर:
साँवरी
(घ) परमारथ रै कारणै _____ धारी देह।
उत्तर:
च्यारां
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(ङ) इंजन आवे देख ने, _____ रो सत्कार।
उत्तर:
सिगनल।
रचनात्मक चिंतन-
1. ‘दादू दीया है भला, दिया करो सब कोय।’ इस दोहे का आधुनिक जीवन में क्या महत्त्व है? अपने विचार लिखिए।
2. अभ्यास का महत्त्व बताते हुए अपने जीवन की किसी घटना का वर्णन करें।
3. आपको पाठ में से जो दोहा अथवा पद सबसे अच्छा लगा है, उसके वर्णन पर आधारित चित्र बनाएँ।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर विद्यार्थी स्वयं दीजिए।
भाषा की बात-
1. नीचे दिए गए विशेषण शब्दों का वाक्यों में प्रयोग करें :
(दान, भक्त वत्सल, अविनाशी, बुद्धिमान)
(क) मीरा के कृष्ण _____ थे।
उत्तर:
भक्त वत्सल
(ख) अभ्यास करने से व्यक्ति _____ बन जाता है।
उत्तर:
बुद्धिमान
(ग) दादू ने लोगों को _____ करने की प्रेरणा दी।
उत्तर:
दान
(घ) ईश्वर _____ होते हैं, उनका कभी नाश नहीं होता।
उत्तर:
अविनाशी।
2. नीचे दिए गए शब्दों को सही क्रम में लगाकर वाक्य बनाइए-
(क) अभ्यास / सफलता / निरंतर / दिलाता है।
उत्तर:
निरन्तर अभ्यास सफलता दिलाता है।
(ख) सबको / करना / चाहिए / भला।
उत्तर:
सबको भला करना चाहिए।
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(ग) कृष्ण / मीरा / आराध्य / को / मानती / थी ।
उत्तर:
मीरा कृष्ण को आराध्य मानती थी।
(घ) अभ्यास / से / बुद्धिमान / जड़मति / बनता है।
उत्तर:
अभ्यास से जड़मति बुद्धिमान बनता है।
दोहे और पद प्रश्न उत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
‘जड़मति’ शब्द का विलोम है-
(अ) बुद्धिहीन
(ब) मूर्ख
(स) सुजान
(द) अयोग्य
उत्तर:
(स) सुजान
प्रश्न 2.
‘सत्कार’ शब्द का अर्थ नहीं है-
(अ) आदर
(ब) खातिरदारी
(स) तिरस्कार
(द) सम्मान
उत्तर:
(स) तिरस्कार
प्रश्न 3.
बिना आमन्त्रण या मान-मनुहार के हमें कहाँ नहीं जाना चाहिए-
(अ) विद्यालय में
(ब) किसी के घर
(स) मन्दिर में
(द) बाग-बगीचे में( )
उत्तर:
(ब) किसी के घर
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प्रश्न 4.
‘परमारथ’ शब्द का अर्थ है-
(अ) परमात्मा
(ब) महारथी
(स) दूसरों की भलाई
(द) अकल्याण
उत्तर:
(स) दूसरों की भलाई
प्रश्न 5.
इस पाठ में ‘मानसरोवर’ शब्द प्रयुक्त हुआ है?
(अ) झील के लिए
(ब) पर्वत के लिए
(स) जगह के लिए
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) झील के लिए
प्रश्न 6.
‘देह’ शब्द का समानार्थी शब्द है-
(अ) शरीर
(ब) काया
(स) तन
(द) उपरोक्त सभी( )
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी( )
प्रश्न 7.
“बसौ मेरे नैनन में नन्दलाल” पद में मीरा नन्दलाल के किस रूप को आँखों में बसाना चाहती है?
(अ) उनकी मोहिनी मूरत को
(ब) उनकी विशाल आँखों को
(स) उनकी साँवली सूरत को
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 8.
इंजन क्या देखकर आता है?
(अ) रेलगाड़ी
(ब) सिग्नल
(स) यात्री
(द) स्टेशन
उत्तर:
(ब) सिग्नल
प्रश्न 9.
‘नूपुर सबद रसाल’ यहाँ पर नुपूर का अर्थ है-
(अ) घुँघरू
(ब) आवाज
(स) पायल
(द) घंटियाँ
उत्तर:
(स) पायल
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. यो _____ रो ढेर।
उत्तर: छूतां
2. सिल पर परत _____ ।
उत्तर: निशान
3. घर में धरा न पाइए, जो कर _____ न होय।
उत्तर: दिया
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4. अधर _____ मुरली राजत।
उत्तर: सुधारस।
निम्नलिखित कथनों में से सत्य/असत्य बतलाइये-
1. बार-बार अभ्यास करने से जड़मति भी चतुर बन जाता है।
उत्तर: सत्य
2. मीरा बाई श्रीराम की भक्ति करती थी।
उत्तर: असत्य
3. रहट से गन्ने का रस निकालते हैं।
उत्तर: असत्य
4. संतजन दूसरों के हित में कार्य करते हैं।
उत्तर: सत्य
निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए-
| खण्ड ‘अ’ | खण्ड ‘ब’ |
| 1. रसरी आवत जात ते | (क) नैना बने बिसाल। |
| 2. वो तो खेत हरियो करे | (ख) यो छूतां से ढेर। |
| 3. मोहनी मूरत, साँवरी | (ग) प्यासा पीवै आय। सूरत |
| 4. मानसरोवर मायं जल | (घ) सिल पर परत निशान। |
उत्तर:
| खण्ड ‘अ’ | खण्ड ‘ब’ |
| 1. रसरी आवत जात ते | (घ) सिल पर परत निशान। |
| 2. वो तो खेत हरियो करे | (ख) यो छूतां से ढेर। |
| 3. मोहनी मूरत, साँवरी | (क) नैना बने बिसाल। |
| 4. मानसरोवर मायं जल | (ग) प्यासा पीवै आय। सूरत |
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
इस अध्याय के अनुसार मेघ वर्षा क्यों करते हैं?
उत्तर:
दूसरों के कल्याण के लिये मेघ वर्षा करते हैं।
प्रश्न 2.
मीरा के नेत्रों में कौन निवास करता है?
उत्तर:
मीरा के नेत्रों में श्रीकृष्ण निवास करते हैं।
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प्रश्न 3.
कुएँ में से बार-बार पानी निकालते समय रस्सी से क्या होता है?
उत्तर:
कुएँ में से बार-बार पानी निकालते समय रस्सी से पत्थर पर निशान पड़ जाता है।
प्रश्न 4.
श्रीकृष्ण के हृदय पर क्या सुशोभित हो रही है?
उत्तर:
श्रीकृष्ण के हृदय पर वैजयन्ती माला सुशोभित हो रही है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
‘पर घर पग नी मेलणों, बिना मान मनवार’ इस दोहे का क्या संदेश है?
उत्तर:
इस दोहे में संदेश दिया गया है जब तक आपको कोई मान-सम्मान सहित आमंत्रित नहीं करें तब तक उसके घर में कदम भी नहीं रखना चाहिए। अन्यथा अपमान होने का डर रहता है।
प्रश्न 2.
“परमारथ रे कारणै, च्यारां धारी देहा” यहाँ पर परमारथ के कारण कौन चारों देह धारण करते हैं?
उत्तर:
यहाँ पर सरोवर, तरवर, संतजन और वर्षा इन चारों के बारें में बताया है कि सरोवर पानी भरकर प्यास बुझाता है। वृक्ष फल और छाया देता है। संतजन अपने श्रेष्ठ आचरण से सद्यवहार की शिक्षा देते हैं और वर्षा पृथ्वी को हरा-भरा करती है, इस प्रकार ये चारों परमार्थ के लिए शरीर धारण करते हैं।
प्रश्न 3.
“रहट फिर चरखो फिरे _____ यो छूतां रो बेर।” इस दोहे का भावार्थ समझाइए।
उत्तर:
इस दोहे में बताया गया है कि रहट से खेत हरे-भरे हो जाते हैं, इसका अर्थ है कि मेहनत और प्रयास से जीवन में समृद्धि और खुशहाली आती है। ठीक इसी तरह चरखे से गन्ने का रस निकालने पर इसके साथ सूखे कचरे का ढेर लग जाता है। जो अनुपयोगी ही होता है।
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प्रश्न 4.
“दादू दीया है भला _____ जो कर दिया न होय।” यह दोहा किस प्रकार की शिक्षा प्रदान करता है?
उत्तर:
इस दोहे से शिक्षा मिलती है जैसे दीया दूसरों को प्रकाश देता है उसी प्रकार हमें भी अपने हाथों से दूसरों को दान-पुण्य करना चाहिए अन्यथा हमें कुछ नहीं मिलने वाला है।
दीर्घउत्तरीय एवं निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है? कोई पाँच बताइए।
उत्तर:
इस पाठ से हमें नैतिक व्यवहार से सम्बन्धित शिक्षा मिलती है-
- जीवन में प्रेम, सम्बन्ध और लगाव अत्यन्त महत्त्वपूर्ण होते हैं और बिना इनके जीवन अधूरा होता है।
- हमें मेहनत और प्रयास से काम करना चाहिए और किसी चीज को अत्यधिक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
- बार-बार अभ्यास करने से मन्दबुद्धि भी चतुर हो जाता है।
- सभी को ज्ञान प्राप्त करना चाहिए, ज्ञान के बिना धैर्य और शान्ति नर्हीं मिल सकती।
- हमें हमारे जीवन में परोपकार की भावना को अपनाना चाहिए।
प्रश्न 2.
‘बसो मेरे नैनन में नन्दलाल’ इस पद में मीराबाई श्रीकृष्ण के मनमोहक रूप का चित्रण करती है, इसे अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
इस पद में मीरा श्रीकृष्ण को नन्दलाल कहकर सम्बोधित करते हुए उनसे अपनी आँखों में बस जाने की अभिलाषा व्यक्त कर रही है। वह कहती है कि उनकी सांवली सूरत है, मन को मोहने वाला व्यक्तित्व है और उनकी आँखें बड़ी-बड़ी हैं। श्रीकृष्ण के अधरों पर अमृत रस बरसाने वाली मुरली सुशोभित हो रही है और हृदय पर वैजयन्ती माला, कमर पर करधनी, पैरों में घुँघरू बन्धे हुए, जो अत्यन्त मधुर ध्वनि करते हैं। मीरा कहती हैं कि उनके प्रभु श्रीकृष्ण सन्तों को सुख देने वाले हैं और भक्तों के लिए शरणागत वत्सल हैं।
दोहे और पद Summary in Hindi
कठिन शब्दार्थ और सरलार्थ-
बावजी चतुरसिंह
पर घर पगं नी मेळणो, वना मान मनवार।
इंजन आवै देख ने, सिगनल रो सत्कार ॥ 1 ॥

कठिन शब्दार्थ – पर घर = दूसरे के घर। पग नी मेलणों = कदम नहीं रखना। विना = बिना। मान = सम्मान। मनवार = मनुहार, सम्मानपूर्वक आग्रह।
सरलार्थ – जब तक आपको सम्मानपूर्वक आमन्त्रित नहीं किया जाता तब तक किसी के घर में कदम न रखें। एक रेल इंजन भी सिग्नल द्वारा आमन्त्रित किए जाने पर ही स्टेशन पर पहुँचता है। इस दोहे में सामाजिक शिष्टाचार और विनम्रता का पाठ सिखाया है। किसी के घर में बिना बुलाए या बिना अनुमति लिए नहीं जाना चाहिए।
रेंठ फैर चरक्यो फैर, पण फरवा में फेर।
वो तो वाड़ हरयौ करै, यो छूंता रो ढेर ॥ 2 ॥

कठिन शब्दार्थ – रहट = कुएँ से पानी निकालने के लिए एक पुरानी तकनीक। चरखो = गन्ने का रस निकालने का चरखा। पण = लेकिन। फरवा = फिरना, चक्र काटना। हरियो = हरा। छूतां = सूखे छिलके।
सरलार्थ – प्रस्तुत दोहे में बताया है कि रहट के फिरने और गन्ने का रस निकालने वाले चरखे के घूमने-घूमने में ही फर्क है। रहट घूमने की प्रक्रिया से खेत हरे-भरे हो जाते हैं। जबकि गन्ने का रस निकालने वाले चरखे से सूखे छिलकों का ढेर हो जाता है। कहने का आशय है कि कार्य दोनों के समान हैं किन्तु एक हरियाली फैलाता तो दूसरा कचरा फैलाता है।
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कबीर
करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत जात ते, सिल पर परत निशान ॥ 1 ॥

कठिन शब्दार्थ – करत-करत = बार-बार। अभ्यास = प्रयास। जड़मति = मन्दबुद्धि। सुजान = समझदार, चतुर। रसरी = रस्सी। सिल = पत्थर। निशान = चिह्न।
सरलार्थ – इस दोहे में बताया है कि कुएँ से पानी खींचने के लिए बर्तन से बाँधी हुई रस्सी द्वारा कुएँ के किनारे पर रखे हुए पत्थर से बार-बार रगड़ खाने से पत्थर पर भी निशान बन जाते हैं। ठीक इसी प्रकार बार-बार कार्य का बार-बार अभ्यास करने से जड़मति यानी मन्दबुद्धि व्यक्ति भी सुजान यानि समझदार हो जाता है।
सरवर तरवर संतजन, चौथो बरसै मेह।
परमारथ रै कारणै, च्यारां धारी देह ॥ 2 ॥

कठिन शब्दार्थ – सरवर = सरोवर, तालाब। तरवर = एक बड़ा या श्रेष्ठ वृक्ष। संतजन = सज्जन व्यक्ति। बरसै = बरसना। मेह = वर्षा। परमारथ = दूसरों की भलाई, कल्याण। देह = शरीर।
सरलार्थ – प्रस्तुति दोहे में परोपकार का महत्व बताया गया है। सरोवर, वृक्ष, सन्तजन एवं चौथा वर्षा बरसना। ये चारों परोपकार के लिए ही शरीर धारण करते हैं। अर्थात् वे कभी भी स्वार्थी नहीं होते हैं।
दादू दयाल
मानसरोवर मांय जळ, प्यासा पीवै आय।
दादू दोष न दीजिए, घर-घर कहण न जाय॥ 1॥

कठिन शब्दार्थ – मानसरोवर = मानसरोवर झील। मायं = के अन्दर। प्यासा = जिसे प्यास लगी हो। पीवै = पीने के लिए। कहण = कहना।
सरलार्थ-प्रस्तुत दोहे में मानसरोवर झील की महत्ता को चित्रित किया है। मानसरोवर झील में जो भी प्यासा है वो पानी पीने के लिए आता है। दादूदयाल जी कहते हैं कि दोष देने की बात नहीं है किसी को भी घर-घर कहने नहीं जाते कि तुम मानसरोवर झील से अपनी प्यास बुझाओ। सब अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए ही मानसरोवर झील पर जाते हैं।
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दादू दीया है भला, दिया करो सब कोय।
घर में धरा न पाइए, जो कर दिया न होय॥ 2 ॥

कठिन शब्दार्थ – दीया = दीपक। दिया करो सब कोय = सभी को दान-पुण्य दिया करो। भला = अच्छा, सर्वोत्तम।
सरलार्थ-दादू दयाल कहते हैं कि दीपक सभी को प्रकाश देकर परोपकार करता है उसी प्रकार तुम भी सबकुछ दान किया करो क्योंकि घरों में रखा कुछ मिलने वाला नहीं है जब तक हम हाथों से दान नहीं करते हैं अर्थात् जो पुण्यकर्म हम करते हैं वे ही हमें प्राप्त होते हैं।
मीरा
बसो मेरे नैनन में नंदलाल।
मोहनी मूरत, साँवरी सूरत, नैना बने बिसाल।
अधर सुधारस मुरली राजत, उर बैजंती माल॥
छुदर्घंटिका कटितट सोभित, नूपुर सबद रसाल।
मीरां प्रभु संतन सुखदाई भगत बछल गोपाल॥

कठिन शब्दार्थ – बसो = निवास करो। नैनन = आँखों में। मोहनी = मन को मोहने वाली, मोहक। बिसाल = विशाल। अधर = होठ। सुधारस = अमृत रस। उर = हृदय। छुद्द घंटिका कटि = कमर में छोटी-छोटी घंटियाँ। नूपुर = पायल। सबद रसाल = आम के समान मधुर ध्वनि। सन्तन = सन्तों। सुखदाई – सुख प्रदान करने वाले।
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सरलार्थ – यह पद मीराबाई के भक्ति पद संग्रह से लिया गया है। मीराबाई, एक प्रसिद्ध भक्त कवयित्री थी, जिन्होंने अपने जीवन को कृष्ण भक्ति में समर्पित कर दिया था। यह पद मीराबाई की कृष्ण के प्रति अटूट प्रेम और भक्ति भावना का प्रतीक है। हे कृष्ण ! मेरे नैनों मैं आप नित्य ही निवास करो। आपकी साँवरी सूरत एवं मोहिनी स्वरूप, विशाल नयन मन को मोहने वाले हैं। आपके होठों पर अमृत रस स्वरूप बंशी विराजमान है एवं उर पर वैजंती माला सुशोभित है। आपकी घुंघरूदार करधनी कमर पर सुशोभित है, एवं पायल की झंकार आम के समान अत्यन्त मधुर है। मीराबाई कहती है कि उनके प्रभु गोपाल नित्य ही सन्तों को सुख प्रदान करने वाले हैं एवं भक्तों, बछड़ों एवं ग्वालों को सुख देने वाले हैं।
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