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Class 5 Hindi Chapter 12 नन्हा ध्रुवतारा Question Answer
नन्हा ध्रुवतारा Question Answer
आओ बात करें-
प्रश्न 1.
आपको यह कविता कैसी लगी?
उत्तर:
हमें यह कविता बहुत अच्छी प्रेरणादायी लंगी, कविता यह दर्शाती है कि जीवन में कठिनाइयाँ और अंधकार होते हैं, लेकिन ध्रुव तारा की तरह एक स्थायी लक्ष्य और मार्गदर्शन हमें निराशा के समय भी सहारा ढल है।
प्रश्न 2.
‘सपनों का कन्दील’ किसे कहा गया है?
उत्तर:
‘सपनों का कन्दील’ उसे कहा गया है कि हमारे श्रेष्ठ सपने ही हमें राह दिखाते हैं, हमारी प्रेरणा का स्रोत हैं और हमें एक उज्जवल भविष्य की ओर ले जाते हैं।
प्रश्न 3.
अगर आपको कोई बड़ा सपना देखना हो तो वह क्या होगा?
उत्तर:
अगर मुझे कोई बड़ा सपना देखना हो, तो वह यह हो सकता है कि मैं एक सफल व्यक्ति बनूँ, एक महान काम करूँ, या दुनिया में एक बेहतर जगह बनाऊँ।
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प्रश्न 4.
“ऊँचा और खींच दे कोई, सपनों का कन्दील हमारा” इस पंक्ति का अर्थ बताइए।
उत्तर:
इस पंक्ति का यह मतलब है कि कवि चाहता है, हमारे सपनों का दीपक (कन्दील) इतना ऊँचा हो कि उसका उजाला सबको दिखाई दे। अर्थात् अंधकार और समस्याओं को दूर करने के लिए खुद रोशनी बनो, दूसरों का मार्गदर्शन करें।
प्रश्न 5.
अगर आपको धरती से एक वस्तु आकाश में भेजनी हो तो वह क्या होगी और क्यों?
उत्तर:
यदि मुझे धरती से आकाश में कोई चीज भेजनी हो, तो वह ध्रुव तारा होगा। क्योंकि कविता में ध्रुवतारा को ‘घर’ या मंजिल के रूप में दर्शाया गया है जहाँ से वह हमें सुरक्षित महसूस कराता है।
सोचो और लिखो-
प्रश्न 1.
सही उत्तर चुनो-
(क) कविता में ‘सपनों का कन्दील’ किसे कहा गया है?
(अ) दीपक
(ब) पतंग
(स) सितारा
(द) बालक
उत्तर:
(स) सितारा
(ख) “धरती पर फैला अँधियारा” किसे दर्शाता है?
(अ) रात को
(ब) कठिनाइयों को
(स) पर्व को
(द) आकाश को
उत्तर:
(ब) कठिनाइयों को
प्रश्न 2.
मिलान करो-

उत्तर:

प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
(क) सपनों का _____ हमारा।
उत्तर:
कन्दील
(ख) चंद तीलियाँ, थोड़ा _____ एक दीया, छोटी-सी बाती।
उत्तर:
कागज
(ग) जिसने _____ खाई, वही बना नन्हा ध्रुवतारा।
उत्तर:
ठोकर
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(घ) धरती से अच्छा लगता है _____ में अपना उजियारा।
उत्तर:
अम्बर।
रचनात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
“जिसने ठोकर खाई, वही बना नन्हा ध्रुवतारा” का क्या अर्थ है?
उत्तर:
इस पंक्ति का यह अर्थ है कि ध्रुव को उसके माता-पिता ने ठुकरा दिया था। जिसके कारण उसने भक्ति और तपस्या की। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे ध्रुव तारा बना दिया। अर्थात् जो व्यक्ति जीवन में मुश्किलों और असफलताओं का सामना करता है, वही आगे चलकर सफल होता है और दूसरों के लिए प्रेरणा बनता है।
प्रश्न 2.
‘हमें दूसरों की मदद करते हुए उनके जीवन में उजाला करना चाहिए’ कविता में इसके लिए कौनसी पंक्ति का उपयोग किया है?
उत्तर:
“सब मिलकर के दूर करेंगे, धरती पर फैला अँधियारा।”
प्रश्न 3.
अपनी कल्पना से इस कविता के भाव जैसी चार पंक्तियाँ लिखो।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
प्रश्न 4.
नीचे कविता की कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं अपने घर की भाषा में इनका अर्थ लिखिए
“धरती से अच्छा लगता है, अंबर में अपना उजियारा।”
______________________________
” चंद तीलियाँ, थोड़ा कागज, एक दीया, छोटीसी बाती।”
______________________________
“कहना जिसने ठोकर खाई, वही बना नन्हा ध्रुवधारा।”
______________________________
उत्तर:
विद्यार्थी सरलार्थ में से स्वयं करें।
कल्पना करो और संवाद बनाओ-
सोचो कि आप रात के समय खुले आसमान में तारे देख रहे हो। अचानक, ध्रुव तारा आपसे बात करने लगता है। वह आपसे क्या कहेगा? आप उससे क्या पूछोगे? इस पर एक छोटा-सा संवाद लिखो।

उत्तर:
ध्रुवतारा-अरे मित्र ! मेरी ओर देख़कर क्या सोच रहे हो?
मैं-सोच रहा हूँ कि तुमने यह पद कैसे प्राप्त किया? ध्रुवतारा-मैंने यह पद ठोकरें खाकर, संघर्ष करके प्राप्त किया है।
मैं-आपकी तरह मैं भी संकल्प करके, संघर्ष करते हुए जीवन में सफलता प्राप्त करूँगा।
कविता पढ़कर इसमें से पाँच प्रश्न (क्या, क्यों, कैसे, कहाँ, कब) अपने साथी से पूछिए और उन प्रश्नों को यहाँ लिखिए।
उत्तर:
- सब मिलकर क्या दूर करेंगे?
- नन्हे ध्रुव ने ठोकर क्यों खायी?
- नन्हा ध्रुव ध्रुवतारा कैसे बना?
- ध्रुवतारा कहाँ चमकता है?
- वह कब तक चमकेगा?
भाषा की बात-
1. संज्ञा और सर्वनाम पहचानकर लिखो
(क) चंद तीलियाँ मिलकर अंधेरा दूर करती हैं।
उत्तर:
संज्ञा-तीलियाँ, अँधेरा।
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(ख) उसने अपने सपनों का दीपक जलाया।
उत्तर:
- संज्ञा-दीपक, सपनों।
- सर्वनाम-उसने, अपने।
(ग) नन्हा ध्रुवतारा हमेशा चमकता रहता है।
उत्तर:
संज्ञा-ध्रुवतारा।
(घ) मेरा सपना ऊँचे उड़ने का है।
उत्तर:
- संज्ञा-सपना।
- सर्वनाम-मेरा।
2. वचन बदलकर लिखिए-
(क) दीपक जल रहा है।
उत्तर:
दीपक जल रहे हैं।
(ख) यह सितारा चमक रहा है।
उत्तर:
ये सितारे चमक रहे हैं।
(ग) तीलियाँ टूट गईं।
उत्तर:
तीली टूट गई।
3. लिंग बदलकर लिखिए-
(क) लड़का पढ़ रहा है।
उत्तर:
लड़की पढ़ रही है।
(ख) गायिका गाना गाती है।
उत्तर:
गायक गाना गाता है।
(ग) बच्चा खेल रहा है।
उत्तर:
बच्ची खेल रही है।
नन्हा ध्रुवतारा प्रश्न उत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
कविता में ‘ध्रुवतारा’ किसका प्रतीक है?
(अ) अंधकार
(ब) ज्ञान और मार्गदर्शन
(स) डर
(द) चन्द्रमा
उत्तर:
(ब) ज्ञान और मार्गदर्शन
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प्रश्न 2.
ध्रुव तारा बच्चों को कैसा मार्गदर्शन देता है?
(अ) दिशा निर्देश
(ब) प्रेरणा
(स) सुरक्षा
(द) उक्त सभी
उत्तर:
(द) उक्त सभी
प्रश्न 3.
कविता में ध्रुव तारे को क्या कहा गया है?
(अ) प्रकाश स्रोत
(ब) मार्गदर्शन देने वाला
(स) अन्धकार दूर करने वाला
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी
प्रश्न 4.
‘अंधियारा’ शब्द का विलोम है-
(अ) तमस
(ब) अंधकार
(स) उजाला
(द) तिमिर
उत्तर:
(स) उजाला
प्रश्न 5.
कवि को अम्बर में क्या अच्छा लगता है?
(अ) बादल
(ब) उजियारा फैलाना
(स) उड़ना
(द) तारे देखना
उत्तर:
(ब) उजियारा फैलाना
प्रश्न 6.
‘कन्दील’ शब्द का अर्थ है-
(अ) दीपक
(ब) लालटेन
(स) दीपक और लालटेन
(द) दोनों ही नहीं
उत्तर:
(स) दीपक और लालटेन
प्रश्न 7.
कौन बना ‘नन्हा ध्रुव तारा’?
(अ) जो बहुत सोता है
(ब) जो ठोकरें खाता है
(स) जो उड़ नहीं सकता
(द) जो रोशनी से डरता है
उत्तर:
(ब) जो ठोकरें खाता है
प्रश्न 8.
‘सपनों का कन्दील’ का क्या अर्थ है?
(अ) टेलीविजन
(ब) रोशनी देने वाली चिड़िया
(स) हमारे सपनों की रोशनी
(द) दीपावली का दीया
उत्तर:
(स) हमारे सपनों की रोशनी
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. उसे भटकने से रोकेगा यह मेरा _____ सितारा।
उत्तर: रंगीन
2. सब मिलकर के दूर करेंगे धरती पर फैला _____।
उत्तर: अँधियारा
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3. ऊँचा और खींच दे कोई _____ का कन्दील हमारा॥
उत्तर: सपनों
4. जिसने ठोकर खाई वही बना नन्हा _____॥
उत्तर: ध्रुवतारा।
निम्नलिखित कथनों में से सत्य/असत्य बतलाइये-
1. संघर्ष और ठोकरें हमें मजबूत बनाती हैं।
उत्तर: सत्य।
2. आकाश में अंधकार फैलाना अच्छा लगता है।
उत्तर: असत्य
3. सपनों को ऊँचाई पर ले जाना अच्छा लगता है।
उत्तर: सत्य।
4. अंधेरे को हटाने के लिए खुद रोशनी बनो।
उत्तर: सत्य।
निम्नलिखित को सही सुमेलित कीजिए-
| खण्ड ‘अ’ | खण्ड ‘ब’ |
| 1. धरती से अच्छा लगता है | (क) सपनों का कन्दील हमारा |
| 2. ऊँचा और खींच दे कोई | (ख) अम्बर में अपना उजियारा। |
| 3. उसे भटकने से रोकेगा | (ग) वही बना नन्हा ध्रुवतारा। |
| 4. जिसने ठोकर खाई | (घ) यह मेरा रंगीन सितारा। |
उत्तर:
| खण्ड ‘अ’ | खण्ड ‘ब’ |
| 1. धरती से अच्छा लगता है | (ख) अम्बर में अपना उजियारा। |
| 2. ऊँचा और खींच दे कोई | (क) सपनों का कन्दील हमारा |
| 3. उसे भटकने से रोकेगा | (घ) यह मेरा रंगीन सितारा। |
| 4. जिसने ठोकर खाई | (ग) वही बना नन्हा ध्रुवतारा। |
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
‘ऊँचा और खींच दे कोई ‘ इस पंक्ति का क्या अर्थ है?
उत्तर:
इसका अर्थ है कि कोई हमारे सपनों को ऊँचाई दे, उन्हें ऊपर उठाए ताकि वे दूर-दूर तक प्रकाश फैला सकें।
प्रश्न 2.
इस कविता में क्या भाव व्यक्त हुआ है?
उत्तर:
इस कविता में आत्म विश्वास, प्रेरणा और उजियारा फैलाने की आकांक्षा का भाव व्यक्त हुआ है।
प्रश्न 3.
यह कविता किस प्रकार की है?
उत्तर:
यह एक प्रेरणादायक बाल कविता है।
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प्रश्न 4.
कविता में ध्रुव तारे का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
कविता में ध्रुव तारे का महत्त्व है क्योंकि यह एक दिशा सूचक है जो हमें सही रास्ते पर चलने में मदद करता है।
प्रश्न 5.
कविता में ‘ध्रुव तारे’ को ‘नन्हा’ क्यों कहा गया है?
उत्तर:
इस कविता में कवि ध्रुव तारे को एक छोटे बच्चे की तरह देखता है और उसे प्यार करता है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
“सपनों का कन्दील हमारा” का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
उत्तर:
‘सपनों का कन्दील हमारा’ का प्रतीकात्मक अर्थ यह है कि यह हमारे सपनों और उम्मीदों की रोशनी को फैलाएँ। यह दीपक न केवल हमारे रास्ते को रोशन करता है, बल्कि दूसरों के लिए भी दिशा दिखाता है।
प्रश्न 2.
कवि को धरती से ज्यादा क्या पसन्द है और क्यों?
उत्तर:
कवि को धरती से अधिक आकांश (अम्बर) पसन्द है, क्योंकि वहाँ वह अपने उजाले को फैलाने की कल्पना करता है। आकाश में उसका प्रकाश सीमाओं से मुक्त होता है।
प्रश्न 3.
कविता का शीर्षक “नन्हा ध्रुवतारा” क्यों है?
उत्तर:
इस कविता का शीर्षक ‘नन्हा ध्रुवतारा’ इसलिए रखा है कि इसमें एक छोटे तारे की कल्पना की गई है, जो दूसरों का मार्गदर्शन करना चाहता है और अपने उजाले से संसार को रोशन करना चाहता है। यह तारा छोटा होते हुए भी प्रेरणा स्रोत है।
प्रश्न 4.
‘नन्हा धुवतारा’ कविता का उद्देश्य बताइए।
उत्तर:
कविता में कवि का उद्देश्य है कि जैसे ‘ध्रुव’ ठोकर खाकर, तपस्या करके आकाश में उच्च पद प्राप्त कर ध्रुवतारा अटल रूप से चमकता हुआ दिशानिर्देश देता है उसी प्रकार हमें भी संघर्ष करते हुए ध्रुव तारे के समान प्रकाश फैलाना चाहिए।
दीर्घउत्तरीय एवं निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
इस कविता से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर:
इस कविता से हमें यह सीख मिलती है कि चाहे हम छोटे हों या हमारे पास सीमित साधन हों, हम सब मिलकर समाज से अंधकार (अज्ञानता, समस्याएँ) को दूर कर सकते हैं। यह कविता हमें बताती है कि-
- संघर्ष और ठोकरें हमें मजबूत बनाती हैं।
- सपनों को ऊँचाई पर ले जाना जरूरी है।
- अंधेरे को हटाने के लिए खुद रोशनी बनो।
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प्रश्न 2.
‘धुवतारे’ की सुन्दरता का वर्णन कविता में कैसे किया गया है?
उत्तर:
कविता में ध्रुवतारे को एक चमकता हुआ, सुन्दर तारा बताया गया है जो रात में आकाश में चमकता है। कवि ने उसके प्रकाश और सुन्दरता का वर्णन किया है। ध्रुव तारे की चमक हमें प्रेरित करती है और हमें सही दिशा में चलने के लिए प्रोत्साहित करती है। कवि इसमें ध्रुव तारे को एक बच्चे की तरह सम्बोधित करता है तथा उसके माध्यम से बताया है कि मनुष्य समस्याओं और कठिनाइयों से संघर्ष करके ही अपनी मंजिल (लक्ष्य) को प्राप्त कर पाते हैं।
नन्हा ध्रुवतारा Summary in Hindi
कठिन शब्दार्थ और सरलार्थ-
ऊँचा और खींच दे कोई,
सपनों का कंदील हमारा।
धरती से अच्छा लगता है,
अंबर में अपना उजियारा।
दूर आ रहा होगा कोई ,
मेरे घर का पता पूछता।
उसे भटकने से रोकेगा,
यह मेरा रंगीन सितारा।
ऊँचा और खींच दे कोई,
सपनों का कंदील हमारा…..

कठिन शब्दार्थ – ऊँचा और खींच = ऊँचाई तक ले जाए या ऊँचा टाँग दे । कन्दील = दीया, लालटेन, दीपक का एक प्रकार। उजियारा = प्रकाश, रोशनी। रंगीन सितारा = सुन्दर अकर्षक तारा (यहाँ कल्पनात्मक तारा)। भटकने से रोकेगा = रास्ता भटकने से बचाएगा।
सरलार्थ – कवि यहाँ एक छोटे ध्रुवतारे के माध्यम से मानव जीवन की आशाओं, सपनों और उजाले की आकांक्षा को व्यक्त कर रहा है। वह चाहता है कि कोई उसके सपनों के कन्दील (दीपक) को ऊँचाई पर लटका दे, जिससे वह दूर तक उजाला फैला सके। यह प्रतीक है अपने सपनों को ऊँचाई देने और उन्हें पूरे समाज तक पहुँचाने का। यहाँ वह यह कह रहा है कि धरती की तुलना में आकाश (अम्बर) में उजियारा फैलाना उसे अधिक अच्छा लगता है। यह उत्कर्ष की भावना है, कुछ महान करने की आकांक्षा है।
यहाँ एक कल्पना की गई है.कि कोई भटकता हुआ व्यक्ति तारे की रोशनी से रास्ता ढूँढ़ रहा है। ध्रुवतारा उसका मार्गदर्शन करेगा। यह तारा रंगीन और सुन्दर है जो उसे दिशा देगा। उसे भटकने से रोकेगा।
वह चाहता है कि कोई उसके सपनों की लालटेन को ऊँचाई पर लटका दे, जिससे वह दूर तक उजाला फैला सके।
चन्द तीलियाँ, थोड़ा कागज,
एक दीया, छोटी-सी बाती।
सब मिलकर के दुर करेंगे,
धरती पर फैला अधियारा।
ऊँचा और खींच दे कोई,
सपनों का कन्दील हमारा…….
कठिन शब्दार्थ – चन्द्र तीलियाँ = कुछ तीलियाँ, कल्पना की अभिव्यक्ति। कागज = कागज (यहाँ शिल्प या रचनात्मकता का प्रतीक)। दीया = छोटा दीपक , प्रकाश का प्रतीक। बाती = दीए में जलने वाला धागा। अँधियारा = अंधकार, अज्ञानता या समस्याएँ।
सरलार्थ – कवि कहता है कि थोड़ी सी-चीजों जैसे कुछ तीलियाँ, थोड़ा कागज और एक छोटा-सा दीया और बाती लेकर हम सब मिलकर धरती पर फैले अंधेरे को दूर कर सकते हैं। अर्थात् सामूहिक प्रयासों से अंधकार मिटाया जा सकता है, चाहे साधन छोटे ही क्यों न हों। वह चाहता है कि उसके सपनों का दीया कोई ऊपर लटका दे ताकि उसका उजाला सब जगह फैल सके।
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अगर कभी पूछे कोई तो,
उसको इतनी बात बताना-
कहना, जिसने ठोकर खाई,
वही बना नन्हा धुवतारा।
ऊँचा और खींच दे कोई,
सपनों का कंदील हमारा।
धरती से अच्छा लगता है,
अंबर में अपना उजियारा।
कठिन शब्दार्थ – ठोकर खाना = नुकसान सहना। अम्बर = आकाश। उजियारा = उजाला, प्रकाश।
सरलार्थ – कवि कहता है कि अगर कोई भी पूछे कि ध्रुव से ध्रुवतारा कैसे बना, तो आप उसे यह बताना कि ध्रुव एक छोटा बालक था जिसे उसके माता-पिता ने ठुकरा दिया था। वह भगवान की भक्ति में लीन रहा और उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे अटल ध्रुवतारा बना दिया। इसके पीछे ध्रुव की दृढ़ संकल्प की शक्ति, भक्ति और भगवान पर विश्वास की आस्था थी।
कवि चाहता है कि हमारे सपनों का दीपक इतना ऊँचा हो कि उसका उजाला सबको दिखाई दे। उसे अपने सपनों को धरती पर सीमित रखने के बजाय आकाश में फैलाना ज्यादा अच्छा लगता है, क्योंकि वहाँ कोई सीमा नहीं है।
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