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Class 6 Hamara Rajasthan Chapter 7 Question Answer in Hindi जल संसाधन एवं संरक्षण
हमारा राजस्थान कक्षा 6 पाठ 7 के प्रश्न उत्तर
(पृष्ठ 39) – आओ अभ्यास करें
प्रश्न 1.
नदी पर बने बाँधों से होने वाले लाभों की सूची बनाइये।
उत्तर:
नदी पर बने बाँधों से होने वाले लाभ-
- जल विद्युत उत्पादन
- सिंचाई सुविधा
- पेयजल की प्राप्ति
- वृक्षारोपण योजना
- भूमिगत जल स्तर में वृद्धि
- बाढ़ नियन्त्रण
- मृदा अपरदन पर नियंत्रण
- पर्यटन स्थलों का निर्माण
- मत्स्य पालन आदि।
प्रश्न 2.
क्या आपके जिले में कोई नदी घाटी परियोजना है? यदि हाँ तो उससे संबंधित जानकारी एकत्र कीजिए।
उत्तर:
मैं बाँसवाड़ा जिले में रहती हूँ। हमारे जिले में माही बजाज सागर परियोजना है। यह परियोजना माही नदी पर स्थित है। यह राजस्थान और गुजरात राज्य की सम्मिलित परियोजना है। इस परियोजना के माध्यम से दोनों राज्यों में सिंचाई, जल विद्युत और पेयजल की सुविधाएँ उपलब्ध हो रही हैं।
I. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर के विकल्प को कोष्ठक में लिखिए-
प्रश्न 1.
बनास किस नदी की सहायक नदी है?
(अ) चम्बल
(ब) लूनी
(स) बाणगंगा
(द) माही
उत्तर:
(अ) चम्बल
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प्रश्न 2.
माही बजाज सागर परियोजना कहाँ विकसित की गई ?
(अ) बाँसवाड़ा में
(ख) डूंगरपुर में
(स) उदयपुर में
(द) कोटा में
उत्तर:
(अ) बाँसवाड़ा में।
II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करो-
1. बनास नदी राजसमंद जिले में ……………………… की पहाड़ियों से जन्म लेती है।
उत्तर:
खमनोर
2. जयसमंद झील का निर्माण मेवाड़ के महाराणा ……………………….. ने ……………………. नदी पर करवाया था।
उत्तर:
जयसिंह, गोमती।
III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
चंबल की प्रमुख सहायक नदियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
चंबल की प्रमुख सहायक नदियाँ बनास, बेड़च, कोठारी, कालीसिंध, पार्वती आदि हैं।
प्रश्न 2.
राजस्थान की प्रमुख नदी घाटी परियोजनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
- चंबल परियोजना
- माही बजाज सागर परियोजना
- बीसलपुर परियोजना
- सरदार सरोवर परियोजना |
IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
चंबल परियोजना पर लघु निबंध लिखिए।
उत्तर:
चंबल परियोजना- चंबल परियोजना राजस्थान और मध्य प्रदेश राज्यों की संयुक्त परियोजना है। इस परियोजना के अंतर्गत कुल चार बाँध बनाए गए हैं। इनमें से गाँधी सागर बाँध मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित है। राजस्थान में चित्तौड़गड़ जिले में राणा प्रताप सागर बाँध एवं कोटा जिले में जवाहर सागर व कोटा बैराज बाँध स्थित हैं। इस परियोजना से दोनों राज्यों को जल विद्युत एवं सिंचाई की सुविधाएँ मिलती हैं।
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प्रश्न 2.
राजस्थान की परम्परागत जल संरक्षण विधियों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान में जल संरक्षण का प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व रहा है। राजस्थान के लगभग हर क्षेत्र में परम्परागत जल संरक्षण की विधियाँ अपनाई गई हैं। इनके अन्तर्गत पारम्परिक जल स्रोत कुएं, बावड़ियाँ, जोहड़, टांके, खड़ीन आदि का उपयोग जल संरक्षण के लिये किया जाता है। राजा-महाराजाओं ने झीलों के निर्माण द्वारा भी जल संरक्षण का कार्य किया।
V. चिन्तन प्रश्न-
प्रश्न 1.
यदि हम सभी ने जल संरक्षण के दायित्व को नहीं निभाया तो हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
जल की उपलब्धता के कारण ही पृथ्वी पर जीवन संभव है। यदि जल संरक्षण के दायित्व को नहीं निभाया तो आने वाले समय में पेयजल, दैनिक घरेलू कार्यों, सिंचाई व उद्योगों के लिए जलापूर्ति बाधित हो जायेगी। जल की उपलब्धता के बिना पृथ्वी पर जीवन संकट में आ जायेगा।
कक्षा 6 हमारा राजस्थान पाठ 7 के प्रश्न उत्तर
बहुचयनात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
अरब सागर के अपवाह तंत्र की नदी है-
(अ) पार्वती
(ब) कालीसिंध
(स) घग्घर
(द) लूनी
उत्तर:
(द) लूनी
प्रश्न 2.
सोम व जाखम नदियाँ किस नदी की सहायक नदियाँ हैं?
(अ) माही
(ब) चम्बल
(स) घग्घर
(द) बनास
उत्तर:
(अ) माही
प्रश्न 3.
अर्जुन की गंगा किस नदी को कहा जाता है?
(अ) घग्घर
(ब) बाणगंगा
(स) माही
(द) लूनी
उत्तर:
(ब) बाणगंगा
प्रश्न 4.
राणा प्रताप सागर बाँध किस जिले में है?
(अ) उदयपुर
(ब) कोटा
(स) चित्तौड़गढ़
(द) जयपुर
उत्तर:
(स) चित्तौड़गढ़
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प्रश्न 5.
विश्व की मीठे पानी की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील कौनसी मानी जाती है?
(अ) जयसमंद
(ब) पोकरण
(स) राजसमंद
(द) कायलाना झील
उत्तर:
(अ) जयसमंद
प्रश्न 6.
निम्न में से कौनसी झील खारे पानी की नहीं है?
(अ) सांभर झील
(ब) पचपदरा झील
(स) फलौदी झील
(द) नक्की झील
उत्तर:
(द) नक्की झील
प्रश्न 7.
जिस झील के उत्तरी भाग को नौ चौकी भी कहा जाता की है, वह है-
(अ) जयसमंद झील
(ब) राजसमंद झील
(स) आनासागर झील
(द) पुष्कर झील
उत्तर:
(ब) राजसमंद झील
प्रश्न 8.
अजमेर स्थित एक धार्मिक महत्त्व की प्राकृतिक झील कौनसी है?
(अ) पुष्कर झील
(ब) आनासागर झील
(स) नक्की झील
(द) पिछोला झील
उत्तर:
(अ) पुष्कर झील
प्रश्न 9.
नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर परियोजना का निर्माण किया गया है-
(अ) मध्य प्रदेश में
(ब) महाराष्ट्र में
(स) गुजरात में
(द) राजस्थान में
उत्तर:
(स) गुजरात में
प्रश्न 10.
किस नदी का पानी भरतपुर में घना पक्षी राष्ट्रीय उद्यान में नम भूमि का निर्माण करता है-
(अ) लूनी
(ब) बाणगंगा
(स) माही
(द) घग्घर
उत्तर:
(ब) बाणगंगा।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. राजस्थान के अपवाह तंत्र को ……………………. भागों में बाँटा जाता है।
उत्तर:
तीन
2. ……………….. परियोजना राजस्थान और मध्य प्रदेश की संयुक्त परियोजना है।
उत्तर:
चंबल
3. गढ़ीसर झील ……………………. में स्थित है।
उत्तर:
जैसलमेर
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4. हमें ………………….. में घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट नहीं डालना चाहिए।
उत्तर:
जलाशयों
5. ………………. नदी को प्राचीन सरस्वती नदी का अवशेष या सहायक नदी माना जाता है।
उत्तर:
घग्घर
6. जल संरक्षण के आधुनिक तरीकों में ……………………. सबसे प्रमुख है।
उत्तर:
बाँध बनाना।
स्तंभ ‘अ’ को स्तम्भ ‘ब’ से सुमेलित कीजिए-
| स्तंभ ‘अ’ | स्तंभ ‘ब’ |
| 1. वाटर हार्वेस्टिंग | (अ) किसी नदी व उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित जल-प्रवाह की व्यवस्था |
| 2. अपवाह तंत्र | (ब) पूर्णत: राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी नदी |
| 3. चम्बल | (स) अर्जुन की गंगा |
| 4. बनास | (द) राजस्थान की वर्षभर बहने वाली नदी |
| 5. बाणगंगा | (य) जल संचयन तकनीक |
उत्तर:
| स्तंभ ‘अ’ | स्तंभ ‘ब’ |
| 1. वाटर हार्वेस्टिंग | (य) जल संचयन तकनीक |
| 2. अपवाह तंत्र | (अ) किसी नदी व उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित जल-प्रवाह की व्यवस्था |
| 3. चम्बल | (द) राजस्थान की वर्षभर बहने वाली नदी |
| 4. बनास | (ब) पूर्णत: राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी नदी |
| 5. बाणगंगा | (स) अर्जुन की गंगा |
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
जल का उपयोग प्रायः किन कार्यों में किया जाता है?
उत्तर:
जल का उपयोग प्रायः दैनिक घरेलू कार्यों, सिंचाई, ‘उद्योग एवं पेयजल के रूप में किया जाता है।
प्रश्न 2.
राजस्थान के मुख्य जल स्रोत कौनसे हैं ?
उत्तर:
राजस्थान के मुख्य जल स्रोत झीलें, नदियाँ और उन पर बने बाँध व नहरें, तालाब, कुएँ एवं नलकूप आदि हैं।
प्रश्न 3.
अपवाह तंत्र किसे कहते हैं?
उत्तर:
धरातलीय बनावट और भू-गर्भिक संरचना के आधार पर किसी नदी तथा उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित जल प्रवाह की विशेष व्यवस्था को अपवाह तंत्र कहते हैं।
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प्रश्न 4.
सहायक नदियों से आपका क्या आशय है?
उत्तर:
ऐसी छोटी नदियाँ जो आगे चलकर किसी बड़ी नदी में मिल जाती हैं, उन्हें सहायक नदियाँ कहा जाता है।
प्रश्न 5.
बाणगंगा नदी का उद्गम कहाँ से होता है?
उत्तर:
जयपुर संभाग के कोटपूतली – बहरोड़ जिले में स्थित अरावली की बैराठ पहाड़ी से बाणगंगा नदी का उद्गम होता है।
प्रश्न 6.
बनास की प्रमुख सहायक नदियों के नाम बताइये।
उत्तर:
बनास की प्रमुख सहायक नदियाँ मेनाल कोठारी, बेड़, खारी आदि हैं।
प्रश्न 7.
सरदार सरोवर परियोजना किन-किन राज्यों की संयुक्त परियोजना है?
उत्तर:
सरदार सरोवर परियोजना गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान राज्यों की संयुक्त परियोजना है।
प्रश्न 8.
राजस्थान के अपवाह तन्त्र को कितने भागों में बाँटा गया है?
उत्तर:
तीन भागों में
- बंगाल की खाड़ी का अपवाह तन्त्र,
- अरब सागर का अपवाह तन्त्र
- आन्तरिक अपवाह तंत्र।
प्रश्न 9.
राजस्थान की जल विभाजक रेखा किसे माना जाता है?
उत्तर:
अरावली पर्वतमाला को।
प्रश्न 10.
बंगाल की खाड़ी के अपवाह तन्त्र में शामिल राजस्थान की प्रमुख नदियों के नाम बताइये।
उत्तर:
चंबल, कालीसिन्ध, पार्वती, पूर्वी भाग में बहने वाली बनास तथा इनकी सहायक नदियाँ ।
प्रश्न 11.
अरब सागर में गिरने वाली राजस्थान की प्रमुख नदियाँ कौन-कौनसी हैं ?
उत्तर:
माही, लूनी, साबरमती, पश्चिमी बनास एवं इनकी सहायक नदियाँ ।
प्रश्न 12.
‘आन्तरिक अपवाह तन्त्र’ से क्या आशय है?
उत्तर:
वे नदियाँ जो सागर में मिलने से पहले झील या स्थल भाग में मिलकर लुप्त हो जाती हैं, आन्तरिक अपवाह तन्त्र का निर्माण करती हैं।
प्रश्न 13.
राजस्थान के आन्तरिक अपवाह तन्त्र में कौन- कौन सी नदियाँ सम्मिलित हैं?
उत्तर:
घग्घर, बाणगंगा, कांतली, साबी, रूपारेल व मेंढा आदि।
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प्रश्न 14.
चंबल परियोजना के अन्तर्गत राजस्थान में बनाये गये बाँधों के नाम बताइये ।
उत्तर:
- राणा प्रताप सागर बाँध
- जवाहर सागर बाँध,
- कोटा बैराज बाँध।
प्रश्न 15.
‘झीलों की नगरी’ किसे कहा जाता है ?
उत्तर:
उदयपुर को ‘झीलों की नगरी’ कहा जाता है।
प्रश्न 16.
खारे पानी की दो झीलों के नाम लिखिये।
उत्तर:
- सांभर झील
- लूणकरणसर झील।
प्रश्न 17.
टांका किसे कहते हैं?
उत्तर-
पश्चिमी राजस्थान में जल संरक्षण हेतु घर में बनाई गई कुएँनुमा संरचना को टांका कहते हैं।
प्रश्न 18.
खड़ीन से आपका क्या आशय है?
उत्तर:
पश्चिमी राजस्थान में कृषि के लिए जल संरक्षण हेतु बनाई गई संरचना खड़ीन कहलाती है।
प्रश्न 19.
जोहड़ क्या है?
उत्तर:
वर्षा जल रोककर भूमिगत जल स्तर को बढ़ाने हेतु बनाई गई संरचना जोहड़ कहलाती है।
प्रश्न 20.
जल विभाजक रेखा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
दो अपवाह क्षेत्र के मध्य उच्च भूमि जो वर्षा के पानी को दो भागों में विभाजित करती है, जल विभाजक रेखा कहलाती है, जैसे- राजस्थान में अरावली पर्वतमाला।
प्रश्न 21.
नदी घाटी परियोजनाओं को आधुनिक भारत के मंदिर किसने कहा और क्यों?
उत्तर:
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने नदी घाटी परियोजनाओं के महत्त्व को देखते हुए इन्हें ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ कहा।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
घग्घर नदी के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
घग्घर- घग्घर एक अन्त: प्रवाही नदी है। इसका उद्गम हिमाचल प्रदेश में हिमालय पर्वत की शिवालिक श्रेणी से होता है। उत्तरी राजस्थान में यह नदी हनुमानगढ़ में प्रवेश कर श्रीगंगानगर में भूमिगत हो जाती है। इस नदी को प्राचीन सरस्वती नदी का अवशेष अथवा सहायक नदी माना जाता है।
प्रश्न 2.
नदी घाटी परियोजनाओं को बहुउद्देश्यीय परियोजनाएँ क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
नदी घाटी परियोजनाओं से अनेक उद्देश्यों की पूर्ति होती है। नदियों पर बाँध बनाने से जल विद्युत उत्पादन, सिंचाई, पेयजल, मत्स्य पालन, वृक्षारोपण, भूमिगत जल स्तर में वृद्धि, बाढ़ नियन्त्रण, मृदा अपरदन और पर्यटन आदि कई प्रकार के उद्देश्य पूरे होते हैं। इन्हीं कारणों से इन्हें बहुउद्देश्यीय परियोजनाएँ कहा जाता है।
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प्रश्न 3.
राजस्थान की आठ नदी घाटी परियोजनाओं के नाम लिखिये ।
उत्तर:
राजस्थान की आठ नदी घाटी परियोजनाएँ-
- चंबल परियोजना
- सरदार सरोवर परियोजना
- माही बजाज सागर परियोजना
- बीसलपुर परियोजना
- जवाई बाँध परियोजना (पाली)
- सोम कमला अम्बा परियोजना (डूंगरपुर)
- मानसी वाकल परियोजना (उदयपुर)
- जाखम परियोजना ( प्रतापगढ़)।
प्रश्न 4.
बीसलपुर परियोजना का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
बीसलपुर परियोजना- राजस्थान के टोंक जिले के टोडारायसिंह नगर के पास बीसलपुर गाँव में बनास नदी पर सिंचाई और पेयजल के उद्देश्य से बीसलपुर परियोजना का निर्माण किया गया है। इस परियोजना से राज्य के जयपुर, अजमेर, ब्यावर, टोंक, डीडवाना कुचामन सहित कई अन्य क्षेत्रों को पेयजल आपूर्ति की जाती है।
प्रश्न 5.
सरदार सरोवर परियोजना का संक्षिप्त वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
सरदार सरोवर परियोजना – यह परियोजना गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान राज्यों की संयुक्त परियोजना है। इसका निर्माण गुजरात में नर्मदा नदी पर किया गया है। इस परियोजना से राजस्थान के दक्षिण-पश्चिम में नहर द्वारा बाड़मेर व जालोर जिलों में सिंचाई एवं पेयजल सुविधा उपलब्ध हो रही है।
प्रश्न 6.
राजस्थान में खारे पानी की झीलों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान में खारे पानी की अनेक झीलें हैं। इनमें जयपुर, अजमेर एवं डीडवाना कुचामन के मध्य सांभर झील, | बालोतरा में पचपदरा झील, डीडवाना कुचामन में डीडवाना झील, बीकानेर में लूणकरणसर झील, जैसलमेर में पोकरण झील, फलौदी जिले में फलौदी झील आदि मुख्य हैं।
प्रश्न 7.
माही बजाज सागर परियोजना का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
माही बजाज सागर परियोजना- यह परियोजना बाँसवाड़ा में माही नदी पर स्थित है। यह परियोजना राजस्थान और गुजरात राज्य की सम्मिलित परियोजना है। इससे दोनों राज्यों में सिंचाई जल विद्युत और पेयजल की सुविधाएँ उपलब्ध हो रही हैं।
दीर्घउत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न 1.
माही और बाणगंगा नदियों का संक्षिप्त वर्णन कीजिये ।
उत्तर:
- माही माही नदी मध्य प्रदेश में विंध्याचल पर्वत से निकलती है। यह नदी राजस्थान में बाँसवाड़ा व प्रतापगढ़ जिलों में बहने के बाद, खंभात की खाड़ी में मिलती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ सोम एवं जाखम हैं।
- बाणगंगा- इस नदी का उद्गम, जयपुर संभाग के कोटपूतली – बहरोड़ जिले में स्थित अरावली की बैराठ पहाड़ी से होता है। इस नदी का पानी भरतपुर में घना पक्षी राष्ट्रीय उद्यान में नम भूमि का निर्माण करता है। इसे ‘अर्जुन की गंगा’ भी कहा जाता है।
प्रश्न 2.
लूनी नदी के बारे में बताइये ।
उत्तर:
लूनी नदी लूनी नदी राजस्थान के अजमेर जिले में गोविन्दगढ़ के निकट सरस्वती व सागरमती नामक दो धाराओं के मिलने से निकलती है। अजमेर ब्यावर, नागौर, पाली, जोधपुर, बालोतरा, बाड़मेर, जालोर जिलों में बहने के बाद, यह नदी कच्छ की खाड़ी में मिल जाती है। बालोतरा तक इस नदी का जल मीठा होता है, इसके बाद यह खारा हो जाता है। जोजड़ी, बांडी, जवाई, मीठड़ी, खारी, सूकड़ी, सागी, गूहिया अदि इसकी सहायक नदियाँ हैं।
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प्रश्न 3.
उदयपुर की ऐतिहासिक जल प्रबंधन प्रणाली का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
उदयपुर में ऐतिहासिक जल प्रबंधन प्रणाली- उदयपुर में 14वीं सदी से 19वीं सदी तक जल संरक्षण हेतु, अनेक कार्यों द्वारा ऐतिहासिक जल प्रबंधन प्रणाली का विकास किया गया। यहाँ के राणाओं ने पिछोला, उदयसागर, फतहसागर, गोवर्धनसागर, रंगसागर, स्वरूपसागर आदि झीलों का समय-समय पर निर्माण करवाया एवं नहरें बनाकर इन्हें आपस में जोड़ दिया। इससे वर्षा ऋतु में जल एक के बाद, दूसरी झील में स्थानान्तरित हो जाता है। इन सभी झीलों के कारण ही उदयपुर को ‘झीलों की नगरी’ भी कहा जाता है।
प्रश्न 4.
‘रूफ टॉप जल संचयन’ एवं ‘वाटर हार्वेस्टिंग’ तकनीक के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
जल संरक्षण हेतु वर्तमान में ‘रूफ टॉप जल संचयन’ एवं ‘वाटर हार्वेस्टिंग’ तकनीकें बहुत प्रचलित हैं। ‘रूफ टॉप जल संचयन’ विधि में घर की छत पर आने वाले वर्षा के जल को घर के नीचे बने कुएँ में एकत्र किया जाता है, जबकि वाटर हार्वेस्टिंग तकनीक द्वारा वर्षा के व्यर्थ बहने वाले जल को भूमिगत किया जाता है। इन तकनीकों को वृहद् स्तर पर अपनाकर जल संरक्षण किया जा सकता है।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
अपवाह तंत्र से आप क्या समझते हैं? राजस्थान के अपवाह तंत्र का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अपवाह तंत्र – अपवाह तंत्र या प्रवाह प्रणाली किसी नदी तथा उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित जल प्रवाह की विशेष व्यवस्था है, जो धरातलीय बनावट और भू- गर्भिक संरचना से प्रभावित होती है।
राजस्थान का अपवाह तंत्र- राजस्थान के अपवाह तंत्र को निम्न तीन भागों में बाँटा जाता है-
- बंगाल की खाड़ी का अपवाह तंत्र – अरावली पर्वतमाला के पूर्वी भाग में बहने वाली बनास, कालीसिंध, पार्वती आदि नदियाँ चंबल में प्रवाहित होकर यमुना नदी में मिल जाती हैं तथा यमुना नदी, गंगा नदी में और गंगा नदी का जल बंगाल की खाड़ी में मिल जाता है। अतः इन नदियों को बंगाल की खाड़ी का अपवाह तंत्र कहते हैं।
- अरब सागर का अपवाह तंत्र अरावली पर्वत के पश्चिमी भाग में बहकर अपना जल अरब सागर में ले जाने वाली माही, लूनी, साबरमती, पश्चिमी बनास एवं इनकी सहायक नदियों को अरब सागर का अपवाह तंत्र कहते हैं।
- आंतरिक अपवाह तंत्र ऐसी नदी जो किसी समुद्र तक न पहुँचकर स्थल भाग में ही विलुप्त हो जाए या किसी झील में मिल जाए तो उसे आंतरिक या भूमिगत अपवाह तंत्र वाली नदी कहा जाता है। राजस्थान में बहने वाली घग्घर, बाणगंगा, कांतली साबी, रूपारेल, मेंढा आदि नदियाँ आंतरिक अपवाह तंत्र के उदाहरण हैं।
प्रश्न 2.
चंबल एवं बनास नदियों का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
1. चंबल- यह राजस्थान की सबसे लंबी व एकमात्र वर्षभर बहने वाली नदी है। इसका उद्गम मध्य प्रदेश में विंध्याचल पर्वत से होता है। राजस्थान में यह नदी चित्तौड़गढ़ जिले में भैंसरोड़गढ़ से प्रवेश कर कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, करौली व धौलपुर जिलों में बहने के बाद उत्तर प्रदेश में यमुना नदी में मिल जाती है। बनास, बेड़च कोठारी, कालीसिंध, पार्वती आदि इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। राजस्थान का औद्योगिक नगर कोटा चंबल नदी के किनारे स्थित है।
2. बनास – यह नदी राजसमन्द जिले में खमनौर की पहाड़ियों से निकलती है, जो राजसमन्द, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, टोंक जिलों में बहकर सवाई माधोपुर में रामेश्वर के निकट चंबल नदी में मिल जाती है। यह एक मौसमी नदी है। यह पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी (480 किमी.) नदी है। मेनाल कोठारी, बेड़च, खारी आदि इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं।
प्रश्न 3.
जल संसाधन के रूप में राजस्थान की झीलों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान में झीलें – राजस्थान में झीलें भी जल संसाधन का प्रमुख रूप हैं। यहाँ अनेक झीलें पाई जाती हैं। इन्हें दो भागों में बांटा जा सकता है-
1. मीठे पानी की झीलें – उदयपुर में मीठे पानी की अनेक झीलें हैं जिसके कारण इसे ‘झीलों की नगरी’ भी कहा जाता है। यहाँ पिछोला, उदयसागर, फतहसागर, गोवर्धनसागर, रंगसागर, स्वरूपसागर आदि झीलें प्रमुख हैं। यहाँ के राणाओं ने समय-समय पर इनका निर्माण करवाया एवं नहरें बनाकर इन्हें आपस में जोड़ दिया गया। इससे वर्षा ऋतु में जल एक के बाद, दूसरी झील में चला जाता है।
मेवाड़ के महाराणा जयसिंह जी ने सन् 1687 से 1691 ई. तक गोमती नदी पर जयसमंद झील का निर्माण करवाया । यह विश्व की मीठे पानी की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील मानी जाती है। राजसमंद जिले में स्थित राजसमंद झील भी प्रसिद्ध है, जिसके उत्तरी भाग को नौ चौकी भी कहा जाता है। अजमेर में स्थित पुष्कर एक धार्मिक महत्त्व की प्राकृतिक झील है। आनासागर भी अजमेर की एक प्रसिद्ध झील है। सिरोही के माउंट आबू में स्थित नक्की | झील राज्य में सर्वाधिक ऊँचाई पर स्थित प्राकृतिक झील है।
इसके अतिरिक्त जोधपुर में बालसमंद, कायलाना एवं उम्मेदसागर जैसलमेर में गढ़ीसर डूंगरपुर में गेपसागर; बीकानेर में कोलायत अलवर में सिलीसेढ़ आदि कई अन्य झीलें भी राज्य में महत्त्वपूर्ण जल संसाधन हैं।
2. खारे पानी की झीलें-मीठे पानी की झीलों के अतिरिक्त राज्य में जयपुर, अजमेर एवं डीडवाना कुचामन के मध्य सांभर झील, बालोतरा में पचपदरा, डीडवाना कुचामन में डीडवाना, बीकानेर में लूणकरणसर, जैसलमेर में पोकरण, फलौदी जिले में फलौदी आदि खारे पानी की प्रमुख झीलें हैं।
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प्रश्न 4.
जल संरक्षण हेतु क्या उपाय किये जाने चाहिए?
उत्तर:
जल संरक्षण हेतु उपाय –
- जल संरक्षण के लिए प्रत्येक नागरिक को प्रशासन का सहयोग करना चाहिए।
- हमें जलाशयों में घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट नहीं डालना चाहिए।
- पेयजल स्रोतों के निकट स्नान आदि नहीं करना चाहिए।
- इनके साथ-साथ जल संचयन, जनसंख्या नियंत्रण, सिंचाई की उन्नत विधियों के प्रयोग, वृक्षारोपण में वृद्धि, भूमिगत जल का विवेकपूर्ण उपयोग और जल का पुनः उपयोग आदि प्रयत्नों से जल का संरक्षण किया जाना चाहिए।
- अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों से, जल को नहरों के द्वारा कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पहुँचाकर, जन-जीवन और उद्योगों के लिये, अनुकूल परिस्थितियाँ सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
- रूफ टॉप जल संचयन’ एवं ‘वाटर हार्वेस्टिंग’ तकनीकें अपनाकर भी जल संरक्षण किया जा सकता है।
- राजस्थान में प्राचीन समय से ही यहाँ के निवासी टांका, खड़ीन, जोहड़ आदि का निर्माण कर जल का संग्रहण एवं संरक्षण करते आ रहे हैं। इन तकनीकों को भी वृहद स्तर पर अपनाने की आवश्यकता है।
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