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परीक्षा Class 6 Question Answer
परीक्षा Question Answer Class 6
Class 6 Hindi Chapter 10 परीक्षा Question Answer
मेरी समझ से-
(क) आपकी समझ से नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए –
(1) महाराज ने दीवान को ही उनका उत्तराधिकारी चुनने का कार्य उनके किस गुण के कारण सौंपा?
(अ) सादगी
(ब) उदारता
(स) बल
(द) नीतिकुशलता
उत्तर:
(द) नीतिकुशलता
(2) दीवान साहब द्वारा नौकरी छोड़ने के निश्चय का क्या कारण था?
(अ) परमात्मा की याद
(ब) राज-काज सँभालने योग्य शक्ति न रहना
(स) बदनामी का भय
(द) चालीस वर्ष की नौकरी पूरा हो जाना।
उत्तर:
(ब) राज-काज सँभालने योग्य शक्ति न रहना
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(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
(1) क्योंकि दीवान साहब अनुभवशील एवं नीतिकुशल थे। नीतिज्ञ व्यक्ति ही उचित या योग्य व्यक्ति का चयन कर सकता है।
(2) दीवान साहब द्वारा नौकरी छोड़ने का निश्चय किया गया कि बुढ़ापे के कारण राजकार्य संभालने योग्य शक्ति नहीं होने के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ने का निश्चय किया।
शीर्षक-
(क) आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम प्रेमचंद ने ‘परीक्षा’ रखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी का यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर के कारण भी लिखिए।
उत्तर:
इस कहानी का शीर्षक विषयवस्तु के आधार पर रखा गया है। इसमें दीवान सुजानसिंह अपने उत्तराधिकारी ‘दीवान’ का चयन एक जौहरी के रूप में परीक्षण करके करता है। इसलिए कहानी का नाम परीक्षा रखा गया है, जो उचित है।
(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए?
उत्तर:
इस कहानी का यह शीर्षक उपयुक्त है। इसका दूसरा शीर्षक ‘जौहरी की खोज’ दे सकते हैं। क्योंकि इसमें दीवान सुजानसिंह जौहरी हैं जो पं. जानकीनाथ जैसे हीरे की खोज करता है।
पंक्तियों पर चर्चा –
कविता में से चुनकर यहाँ कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए- “इस पद के लिए ऐसे पुरुष की आवश्यकता थी, जिसके हृदय में दया हो और साथ-साथ आत्मबल। हृदय वह जो उदार हो, आत्मबल वह जो आपत्ति का वीरता के साथ सामना करे। ऐसे गुणवाले संसार में कम हैं और जो हैं, वे कीर्ति और मान के शिखर पर बैठे हुए हैं।”
उत्तर:
इस कथन के आधार पर दीवान सुजानसिंह अपने योग्य उत्तराधिकारी दीवान का चयन करते हुए कहते हैं कि हमें इस पद के लिए ऐसे योग्य पुरुष की आवश्यकता थी जो दयालु प्रवृत्ति का हो, जिसका मनोबल साहसी प्रवृत्ति का हो और जो किसी भी परिस्थिति में वीरता एवं साहस का परिचय दे सके। ऐसे विरले इस संसार में बहुत कम होते हैं और जो हैं वे उच्च पदों पर आसीन हैं अर्थात् उनकी प्रसिद्धि फैल रही है।
सोच-विचार के लिए-
कहानी को एक बार फिर से पढ़िए, निम्नलिखित के बारे में पता लगाइए और लिखिए-
(क) नौकरी की चाह में आए लोगों ने नौकरी पाने के लिए कौन-कौन से प्रयत्न किए?
उत्तर:
नौकरी की चाह में आए लोगों ने नौकरी पाने के लिए अपने जीवन को अपनी बुद्धि के अनुसार अच्छे रूप में दिखाने के प्रयत्न किए। जल्दी न उठने वाले जल्दी उठकर प्राणायाम करने लगे। जिन्होंने नौकरों के नाक में दम कर रखा था वे सज्जनता का व्यवहार करने लगे। जिन्हें पुस्तक पढ़ने से घृणा थी वे बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ने में डूब गए।
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(ख) “उसे किसान की सूरत देखते ही सब बातें ज्ञात हो गई।” खिलाड़ी को कौन-कौनसी बातें पता चल गईं?
उत्तर:
पंडित जानकीनाथ ने जब आत्मबल एवं साहस से बूढ़े किसान की गाड़ी को दलदल से बाहर निकलवाकर पुरस्कार मांगा तो किसान को देखते ही पहचान लिया कि यह और कोई नहीं दीवान सुजानसिंह ही है जो हमारी परीक्षा ले रहा था।
(ग) “मगर उन आँखों में सत्कार था, इन आँखों में ईर्ष्या।” किनकी आँखों में सत्कार था और किनकी आँखों में ईर्ष्या थी? क्यों?
उत्तर:
जब पंडित जानकीनाथ के नाम की घोषणा दीवान पद के लिए हुई तो उसकी आँखों में पद के प्रति सम्मान की भावना थी। आँखों में खुशी के आँसू झलक रहे थे किन्तु जिन लोगों का चयन नहीं हुआ उनकी आँखों में पं. जानकीनाथ के प्रति ईर्ष्या की भावना थी कि इसे यह पद क्यों मिला।
खोजबीन-
कहानी में से वे वाक्य खोजकर लिखिए जिनसे पता चलता है कि-
(क) शायद युवक बूढ़े किसान की असलियत पहचान गया था।
उत्तर:
युवक में किसान की तरफ गौर से देखा। उसके मन में एक संदेह हुआ, क्या यह सुजानसिंह तो नहीं हैं? आवाज मिलती है, चेहरा मोहरा भी वही। किसान ने भी उसकी ओर तीव्र दृष्टि से देखा। शायद उसके दिल के संदेह को भाँप गया। मुस्कराकर बोला, “गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।”
(ख) नौकरी के लिए आए लोग किसी तरह बस नौकरी पा लेना चाहते थे।
उत्तर:
जिससे बात कीजिए वह नम्रता और सदाचार का देवता बना मालूम होता था। लोग समझते थे कि एक महीने का झंझट है, किसी तरह काट लें। कार्य सिद्ध हो जाने पर कौन पूछता है।
समस्या और समाधान-
इस कहानी में कुछ समस्याएँ हैं और उसके समाधान भी हैं। कहानी को एक बार फिर से पढ़कर बताइए कि –
(क) महाराज के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?
उत्तर:
महाराज के सामने समस्या थी कि अनुभवशील एवं नीतिकुशल सुजानसिंह दीवान पद छोड़ देगा तो इसका उचित उत्तराधिकारी कहाँ से लाऊँगा। उन्होंने इसका समाधान यही खोजा कि इस पद के लिए योग्य व्यक्ति ढूँढ़ने की जिम्मेदारी सुजानसिंह को ही दे दी।
(ख) दीवान के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?
उत्तर:
दीवान सुजानसिंह के सामने समस्या थी कि इतने वर्षों तक मैंने इमानदारी से काम किया। बुढ़ापे में यदि कोई दाग लग गया तो सारी जिन्दगी की नेकनामी मिट्टी में मिल जाएगी। इसका समाधान खोजने के लिए महाराज से प्रार्थना की कि मैं यह पद अब नहीं संभाल सकता क्योंकि बुढ़ापे में कोई दाग लग गया तो ठीक न होगा।
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(ग) नौकरी के लिए आए लोगों के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?
उत्तर:
नौकरी के लिए आये लोगों के सामने जल्दी न उठने, अनुचित व्यवहार एवं पुस्तकें न पढ़ने की समस्या थी। उन्होंने सोचा कि एक महीने की ही तो आफत है, बाद में कौन पूछेगा ? इसलिए समाधान स्वरूप जल्दी उठने लगे, सद्व्यवहार करने लगे और बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ने में डूबे रहे।
मन के भाव-
“स्वार्थ था, मद था, मगर उदारता और वात्सल्य का नाम भी न था।”
इस वाक्य में कुछ शब्दों के नीचे रेखा खिंची हुई है। ये सभी नाम हैं, लेकिन दिखाई देने वाली वस्तुओं, व्यक्तियों या जगहों के नाम नहीं हैं। ये सभी शब्द मन के भावों के नाम हैं। आप कहानी में से ऐसे ही अन्य नामों को खोजकर आगे दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए।

उत्तर:

विपरीतार्थक शब्द-
“विद्या का कम, परंतु कर्त्तव्य का अधिक विचार किया जाएगा।”
‘कम’ का विपरीत अर्थ देने वाला शब्द है ‘अधिक’। इसी प्रकार के कुछ विपरीतार्थक शब्द नीचे दिए गए हैं लेकिन वे आमने-सामने नहीं हैं। रेखाएँ खींचकर विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़े बनाइए-

उत्तर:

कहावत-
नीचे कुछ कहावतें और उनके भावार्थ दिए गए हैं। आप इन कहावतों को कहानी से जोड़कर अपनी लेखन- पुस्तिका में लिखिए-
• अधजल गगरी छलकत जाए – जिसके पास थोड़ा ज्ञान होता है, वह उसका दिखावा करता है।
• अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत – समय निकल जाने के बाद पछताना व्यर्थ होता है।
• एक अनार सौ बीमार – कोई ऐसी एक चीज़ जिसको चाहने वाले अनेक हों।
• जो गरजते हैं वे बरसते नहीं हैं – जो अधिक बढ़-चढ़कर बोलते हैं, वे काम नहीं करते हैं।
• जहाँ चाह, वहाँ राह – जब किसी काम को करने की इच्छा होती है, तो उसका साधन भी मिल जाता है।
(संकेत – विज्ञापन में तो एक नौकरी की बात कही गई थी, लेकिन उम्मीदवार आ गए हजारों इसे कहते हैं- एक अनार सौ बीमार।)
उत्तर:
- दीवान पद के लिए आए हुए अयोग्य अभ्यर्थी एक महीने का झंझट समझकर बाह्याडम्बर कर रहे थे। इसे कहते हैं अधजल गगरी छलकत जाए।
- पं. जानकीनाथ का दीवान पद पर चयन होते ही शेष अभ्यर्थी उन्हें ईर्ष्या भाव से देख रहे थे। इसे कहते हैं अब पछताए क्या होत जब चिड़ियाँ चुग गई खेत।
- विज्ञापन में तो एक नौकरी की बात कही गई थी। लेकिन उम्मीदवार आ गए हजारों इसे कहते हैं एक अनार सौ बीमार।
- किसान की गाड़ी कीचड़ में फँसी देखकर भी खिलाड़ी उसका मजाक उड़ाते हुए एवं अनदेखा कर रियासत चले गये। इसे कहते हैं जो गरजते हैं वे बरसते नहीं हैं।
- पं. जानकीनाथ ने घायल होते हुए भी साहस से किसान की गाड़ी को कीचड़ से बाहर निकलवाया। इसे कहते हैं। जहाँ चाह वहाँ राह।
पाठ से आगे-
अनुमान या कल्पना से-
(क) “दूसरे दिन देश के प्रसिद्ध पत्रों में यह विज्ञापन निकला” देश के प्रसिद्ध पत्रों में नौकरी का विज्ञापन किसने निकलवाया होगा? आपको ऐसा क्यों लगता है?
उत्तर:
यह विज्ञापन देवगढ़ रियासत के दीवान सुजानसिंह ने निकलवाया होगा क्योंकि उन्हें ही नया ‘दीवान’ खोजने की जिम्मेदारी दी गई थी।
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(ख) “इस विज्ञापन ने सारे मुल्क में तहलका मचा दिया।” विज्ञापन ने पूरे देश में तहलका क्यों मचा दिया होगा?
उत्तर:
पूरे देश में तहलका इसलिए मचा होगा कि ‘दीवान’ जैसा ऊँचा पद, उसमें भी किसी प्रकार का बंधन नहीं है। केवल नसीब का खेल है। इसलिए उम्मीदवारों का मेला- सा लग गया।
परिधान तरह-तरह के-
“कोट उतार डाला”
‘कोट’ एक परिधान का नाम है। कुछ अन्य परिधानों के नाम और चित्र नीचे दिए गए हैं। परिधानों के नामों को इनके सही चित्र के साथ मिलाइए। इन्हें आपके घर में क्या कहते हैं? लिखिए।


उत्तर:


Class 6 परीक्षा Question Answer
बहुविकल्पात्मक प्रश्न–
प्रश्न 1.
सरदार सुजानसिंह कहाँ के दीवान थे?
(अ) अलवर रियासत
(ब) राजगढ़ रियासत
(स) देवगढ़ रियासत
(द) राजपूताना रियासत
उत्तर:
(स) देवगढ़ रियासत
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प्रश्न 2.
दीवान सुजानसिंह में गुण था-
(अ) अनुभवशीलता
(ब) नीतिकुशलता
(स) नेकनामी
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 3.
दीवान पद हेतु विज्ञापन से कहाँ तहलका मचा हुआ था?
(अ) राजगढ़ रियासत में
(ब) देवगढ़ रियासत में
(स) सारे देश में
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(स) सारे देश में
प्रश्न 4.
दीवान पद के उम्मीदवारों में सबसे अधिक संख्या किसकी थी?
(अ) नसीब वालों की
(ब) मंदाग्नि वालों की
(स) ग्रेजुएटों की
(द) साहसियों की
उत्तर:
(स) ग्रेजुएटों की
प्रश्न 5.
दीवान पद के उम्मीदवारों में एक महीने में क्या परिवर्तन आने लगा?
(अ) जल्दी उठने लगे
(ब) सज्जन बनने लगे
(स) बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ने लगे
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 6.
उम्मीदवारों को कितने समय तक रियासत में रखा गया था?
(अ) एक माह
(ब) छह माह
(स) एक वर्ष
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) एक माह
प्रश्न 7.
देवगढ़ रियासत में कौनसा खेल निराला था?
(अ) शतरंज
(ब) ताश
(स) क्रिकेट
(द) हॉकी
उत्तर:
(द) हॉकी
प्रश्न 8.
किसान झुंझलाकर क्या करता है?
(अ) बैलों को ललकारता है।
(ब) बैलों को मारता है
(स) गाड़ी के पहिए को ढकेलता है।
(द) थककर बैठ जाता है
उत्तर:
(ब) बैलों को मारता है
प्रश्न 9.
“तुम गाड़ी पर जाकर बैलों को साधो” ये शब्द किसने कहे?
(अ) किसान ने
(ब) राजा साहब ने
(स) खिलाड़ियों ने
(द) चोटिल खिलाड़ी ने
उत्तर:
(द) चोटिल खिलाड़ी ने
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प्रश्न 10.
राजा के दरबार में कौन-कौन बैठे थे?
(अ) शहर के रईस
(ब) धनाढ्य लोग
(स) उम्मीदवारों का समूह
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी
रिक्त स्थानों की पूर्ति –
प्रश्न 11.
रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित शब्द से कीजिए-
(i) राजा साहब अपने अनुभवशील ……………………. दीवान का बड़ा आदर करते थे। (शक्तिहीन / नीतिकुशल )
उत्तर:
नीतिकुशल
(ii) प्रत्येक रेलगाड़ी से उम्मीदवारों का एक ……………………. उतरता। (मेला-सा / रेल-सा)
उत्तर:
मेला – सा
(iii) आजकल वे बगीचे में टहलते हुए ……………………. का दर्शन करते थे। (उषा / संध्या)
उत्तर:
उषा
(iv) इन बगुलों में ……………………. कहाँ छिपा हुआ है। (दीवान / हँस)
उत्तर:
हँस
(v) खून की गरमी आँख और ……………………. से झलक रही थी। (शरीर / चेहरे)
उत्तर:
चेहरे
(vi) गहरे पानी में पैठने से ही ……………………. मिलता है। (मोती/हीरा)
उत्तर:
मोती।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 12.
दीवान सुजानसिंह ने रियासत की दीवानी की बधाई किसको दी?
उत्तर:
दीवान सुजानसिंह ने रियासत की दीवानी की बधाई पंडित जानकीनाथ को दी।
प्रश्न 13.
देवगढ़ रियासत का नीतिज्ञ दीवान कौन था?
उत्तर:
देवगढ़ रियासत का नीतिज्ञ दीवान सुजानसिंह था।
प्रश्न 14.
राजा ने दीवान की प्रार्थना स्वीकार करते हुए क्या शर्त रखी?
उत्तर:
राजा ने दीवान की प्रार्थना स्वीकार करते हुए शर्त रखी कि नया दीवान भी आपको ही खोजना पड़ेगा।
प्रश्न 15.
समाचारपत्रों में क्या विज्ञापन निकला?
उत्तर:
समाचारपत्रों में विज्ञापन निकला कि देवगढ़ के लिए सुयोग्य दीवान की जरूरत है।
प्रश्न 16.
देवगढ़ में कैसे मनुष्य दिखाई देने लगे?
उत्तर:
देवगढ़ में नए-नए और रंग-बिरंगे मनुष्य दिखाई देने लगे।
प्रश्न 17.
नए फैशनवालों ने एक दिन क्या योजना बनाई?
उत्तर:
एक दिन नए फैशनवालों ने आपस में हॉकी का खेल खेलने की योजना बनाई।
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प्रश्न 18.
सुजानसिंह ने आगन्तुकों के लिए कैसा प्रबन्ध किया?
उत्तर:
सुजानसिंह ने आगन्तुकों के लिए आदर-सत्कार का बड़ा अच्छा प्रबन्ध किया।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 19.
बूढ़ा जौहरी कहानी में किसे कहा गया है? वह छिपकर क्या देख रहा था?
उत्तर:
कहानी में बूढ़ा जौहरी दीवान सुजानसिंह को कहा गया है। वह छिपकर उन आगन्तुकों रूपी बगुलों में से हँस रूपी नये दीवान की तलाश कर रहा था कि इनमें से कौन योग्य है जो मेरा उत्तराधिकारी बनेगा।
प्रश्न 20.
हॉकी के खेल का क्या परिणाम निकला? बताइए।
उत्तर:
खिलाड़ी संध्या तक हॉकी धूमधाम से खेलते रहे। वे पसीने से तर हो गए। उनके खून की गर्मी चेहरे और आँखों में झलक रही थी मानो एक-दूसरे के लिए लोहे की दीवार के समान हो गए। अन्त में कोई परिणाम नहीं निकला।
प्रश्न 21.
किसान की गाड़ी नाले को पार क्यों नहीं कर पा रही थी?
उत्तर:
नाला गहरा और कीचड़युक्त था। इसके साथ चढ़ाई भी थी। गाड़ी अनाज से भरी हुई थी। बैल कमजोर और थके हुए थे। इसलिए गाड़ी कीचड़ में फंस गई। वृद्ध किसान के प्रयत्नों के बाद भी गाड़ी नाले से पार नहीं हो पाई।
प्रश्न 22.
“गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है” कथन को सोदाहरण समझाइए।
उत्तर:
कथन का आशय है कि जैसे गहरे पानी में ही मोती पाये जाते हैं। अर्थात् पानी के ऊपर-ऊपर तैरने से मोती नहीं मिलते हैं। वैसे ही दीवान सुजानसिंह ने स्वयं गाड़ीवान किसान का रूप धारण करके देवगढ़ के नये दीवान रूपी मोती की खोज की।
प्रश्न 23.
सभा में सुजानसिंह ने क्षमा माँगते हुए क्या घोषणा की? बताइए।
उत्तर:
सुजानसिंह ने दीवानी के उम्मीदवारों से कहा- “महाशयों आप लोगों को जो कष्ट दिया उसके लिए क्षमा कीजिए। इस पद के लिए ऐसे पुरुष की आवश्यकता थी जिसके हृदय में दया, आत्मबल और वीरता हो। सौभाग्य से हमें ऐसा पुरुष पं. जानकीनाथ मिल गया है।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 24.
दीवान सुजानसिंह दीवान पद क्यों छोड़ना चाहते थे?
उत्तर:
दीवान सुजानसिंह की वृद्धावस्था आ चुकी थी। उन्हें सेवा कार्य करते हुए चालीस वर्ष व्यतीत हो चुके थे। उनमें राज-काज संभालने की शक्ति भी नहीं रही थी। उन्होंने नेकनामी से कार्य किया था। वृद्धावस्था में भूल- चूक होने की अधिक संभावना होती है जिससे उन्हें चरित्र पर दाग लगने का डर था। इसलिए उन्होंने राजा साहब से कार्यमुक्ति की प्रार्थना की थी।
प्रश्न 25.
दीवान पद के उम्मीदवारों के लिए क्या-क्या शर्त रखी गई? बताइए।
उत्तर:
विज्ञापन में बताया गया कि इस पद के योग्य उम्मीदवार को ग्रेजुएट होना आवश्यक नहीं किन्तु हृष्ट-पुष्ट होना आवश्यक है। मंदाग्नि के मरीज पधारने का कष्ट न करें। एक महीने तक उम्मीदवारों के रहन-सहन, आचार- विचार की देखभाल की जाएगी। विद्या पर कम परन्तु कर्त्तव्य पर अधिक विचार किया जायेगा। जो महाशय इस परीक्षा में सफल होंगे वह इस उच्च पद पर सुशोभित होंगे।
गद्यांश पर आधारित प्रश्नोत्तर-
निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
(1)
दूसरे दिन देश के प्रसिद्ध पत्रों में यह विज्ञापन निकला कि देवगढ़ के लिए एक सुयोग्य दीवान की जरूरत है। जो सज्जन अपने को इस पद के योग्य समझें, वे वर्तमान सरकार सुजानसिंह की सेवा में उपस्थित हों। यह जरूरी नहीं है कि वे ग्रेजुएट हों, मगर हृष्ट-पुष्ट होना आवश्यक है, मंदाग्नि के मरीज को यहाँ तक कष्ट उठाने की कोई जरूरत नहीं। एक महीने तक उम्मीदवारों के रहन-सहन, आचार-विचार की देखभाल की जाएगी। विद्या का कम, परंतु कर्त्तव्य का अधिक विचार किया जायेगा। जो महाशय इस परीक्षा में पूरे उतरेंगे, वे इस उच्च पद पर सुशोभित होंगे।
प्रश्न –
1. विज्ञापन का विषय क्या था?
2. पद योग्य सज्जन को किसकी सेवा में उपस्थित होना था?
3. दीवान पद के लिए कैसे व्यक्ति पधारने का कष्ट न करें?
4. कौन इस उच्च पद पर सुशोभित होंगे?
उत्तर:
1. विज्ञापन का विषय था कि देवगढ़ के लिए एक सुयोग्य दीवान की जरूरत है।
2. दीवान पद योग्य सज्जन को वर्तमान सरकार सुजानसिंह की सेवा में उपस्थित होना था।
3. जो व्यक्ति मंदाग्नि के मरीज हों वे दीवान पद हेतु पधारने का कष्ट न करें।
4. उम्मीदवारों की एक महीने रहन-सहन, आचार-विचार की देखभाल की जाएगी। विद्या पर कम, परन्तु कर्त्तव्य का अधिक विचार किया जाएगा। जो इस परीक्षा में सफल होंगे वही इस उच्च पद पर सुशोभित होंगे।
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(2)
इस विज्ञापन ने सारे मुल्क में तहलका मचा दिया। ऐसा ऊँचा पद और किसी प्रकार की कैद नहीं? केवल नसीब का खेल है। सैकड़ों आदमी अपना-अपना भाग्य परखने के लिए चल खड़े हुए। देवगढ़ में नए-नए और रंग-बिरंगे मनुष्य दिखाई देने लगे। प्रत्येक रेलगाड़ी से उम्मीदवारों का एक मेला-सा उतरता। कोई पंजाब से चला आता था, कोई मद्रास से, कोई नए फैशन का प्रेमी, कोई पुरानी सादगी पर मिटा हुआ। रंगीन एमामे, चोगे और नाना प्रकार के अंगरखे और कंटोप देवगढ़ में अपनी सज-धज दिखाने लगे। लेकिन सबसे विशेष संख्या ग्रेजुएटों की थी, क्योंकि सनद की कैद न होने पर भी सनद से परदा तो ढका रहता है।
प्रश्न-
1. सारे मुल्क में तहलका क्यों मच गया?
2. सैकड़ों आदमी देवगढ़ के लिए क्यों चल पड़े?
3. उम्मीदवारों की विशेषता कैसी थी?
4. ‘चोगे’ किसे कहते हैं?
उत्तर:
1. सारे देश में तहलका इसलिए मचा हुआ था कि दीवान जैसा उच्च पद और किसी प्रकार की कैद नहीं, केवल नसीब का खेल है।
2. सैकड़ों आदमी देवगढ़ में दीवान पद के लिए अपना-अपना भाग्य परखने के लिए चल पड़े।
3. उम्मीदवारों में कोई नए फैशन का प्रेमी, तो कोई पुरानी सादगी पर मिटा हुआ था।
4. चोगे – लम्बा, ढीला-ढाला अंगरखा जिसका आगे का भाग खुला होता है उसे चोगा या गाऊन कहते हैं।
(3)
किसान युवक के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। बोला, “महाराज, आपने आज मुझे उबार लिया, नहीं तो सारी रात मुझे यहाँ बैठना पड़ता।”
युवक ने हँसकर कहा, “अब मुझे कुछ इनाम देते हो?” किसान ने गंभीर भाव से कहा, “नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी।”
युवक ने किसान की तरफ गौर से देखा। उसके मन में युवक एक संदेह हुआ, क्या यह सुजानसिंह तो नहीं हैं? आवाज मिलती है, चेहरा-मोहरा भी वही। किसान ने भी उसकी ओर तीव्र दृष्टि से देखा। शायद उसके दिल के संदेह को भाँप गया। मुस्कराकर बोला, “गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।”
प्रश्न –
1. किसान युवक के सामने हाथ जोड़कर क्यों खड़ा हुआ?
2. यदि युवक किसान को नहीं उबारता तो क्या होता?
3. युवक के इनाम माँगने पर किसान ने क्या कहा?
4. युवक और किसान कौन थे?
उत्तर:
1. क्योंकि उस युवक ने जख्मी होते हुए भी किसान की फंसी हुई गाड़ी को नाले से बाहर निकलवाई थी।
2. किसान को सारी रात गाड़ी के साथ नाले में ही बितानी पड़ती।
3. किसान ने गंभीर स्वर में कहा- “नारायण चाहेंगे तोदीवानी आपको ही मिलेगी।”
4. युवक पं. जानकीनाथ एवं किसान दीवान सुजानसिंह थे।
(4)
रियासत के कर्मचारियों और रईसों ने जानकीनाथ की तरफ़ देखा। उम्मीदवार दल की आँखें उधर उठीं, मगर उन आँखों में सत्कार था, इन आँखों में ईर्ष्या। सरदार साहब ने फिर फरमाया, “आप लागों को यह स्वीकार करने में कोई आपत्ति न होगी कि जो पुरुष स्वयं जख्मी होकर भी एक गरीब किसान की भरी हुई गाड़ी को दलदल से निकालकर नाले के ऊपर चढ़ा दे उसके हृदय में साहस, आत्मबल और उदारता का वास है। ऐसा आदमी गरीबों को कभी न सतावेगा। उसका संकल्प दृढ़ है, जो उसके चित्त को स्थिर रखेगा। वह चाहे धोखा खा जाए, परंतु दया और धर्म से कभी न हटेगा।”
प्रश्न –
1. रियासत के कर्मचारियों और रईसों ने जानकीनाथ की तरफ क्यों देखा?
2. ‘मगर उन आँखों में सत्कार था’ पंक्ति में किसकी आँखों में सत्कार था?
3. ‘इन आँखों में ईर्ष्या’ इन आँखों में ईर्ष्या क्यों थी?
4. कैसा आदमी गरीबों को कभी नहीं सताएगा?
उत्तर:
1. क्योंकि जानकीनाथ का चयन देवगढ़ के दीवान पद के लिए हुआ था।
2. जानकीनाथ की आँखों में दीवान पद के प्रति सत्कार था।
3. जानकीनाथ के अतिरिक्त उम्मीदवारों की आँखों में ईर्ष्या थी कि इसको दीवानी पद क्यों मिला।
4. जिस आदमी के हृदय में साहस, आत्मबल और उदारता का वास हो वह कभी गरीबों को नहीं सताएगा।
परीक्षा Class 6 Summary
कठिन शब्दार्थ एवं पाठ का सार
कठिन शब्दार्थ – रियासत = राज, शासन, अमीरी दीवान प्रधानमंत्री, राजा या बादशाह की बैठक या थाने का मुंशी जिसके जिम्मे लिखा पढ़ी का काम होता है। दाग कलंक, बदनामी। नेकनामी सुख्याति, सुप्रसिद्धि, सुकीर्ति नीति कुशल नीति में निपुण या चतुर, नीतिज्ञ विज्ञापन = निवेदन, समाचार-पत्रों आदि में प्रचार। हृष्ट-पुष्ट = स्वस्थ मंदाग्नि = पाचन शक्ति का दुर्बल होना, हाजमे का बिगड़ जाना। मुल्क = देश, राज्य, प्रदेश नसीब = भाग्य चोगे = लम्बा, ढीला-ढाला अंगरखा जिसका आगे का भाग खुला होता है, गाऊन कंटोप वह टोपी जिससे कान ढके रहें। सनद वह जिस पर पीठ टेकी जाए, प्रमाण-पत्र, अनुमति पत्र। डूबे खोये। झंझट = आफत जौहरी जवाहरात का रोजगार करने वाला, रत्न व्यवसायी, पारखी अप्रेंटिस काम सीखने के लिए काम करने वाला व्यक्ति। निराली अनोखी, विचित्र धावे = किसी को जीतने या लूटने आदि के लिए बहुत से लोगों का एक साथ दौड़ पड़ना, हमला बेदम अत्यन्त दुर्बल, अधमरा। मद = खाता, लेखा, उन्माद, रोग अहंकार। अकस्मात् = अचानक, संयोगवश सहसा, बिना कारण निदान अंत में, आखिर, रोग का कारण, का निर्णय। आत्मबल = आत्मा का बल, मन का बल।
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पाठ का सार – नेकनामी नीतिज्ञ सुजानसिंह देवगढ़ रियासत का दीवान था। बुढ़ापे में दाग न लगे इसलिए राजा से पद मुक्ति की पेशकश करने पर उन्हें ही नया दीवान खोजने की शर्त रख दी गई। दीवान साहब ने समाचार-पत्र में दीवान पद हेतु विज्ञापन निकाला। विज्ञापनानुसार विविध क्षेत्रों से अभ्यर्थी आये। उन्हें एक महीना वहीं व्यतीत करना था। उसके आधार पर ही दीवान का चयन होगा। वे एक दिन हॉकी का खेल खेलने मैदान में गये। दिनभर खेलते हुए थक गये किन्तु कोई निर्णय नहीं निकला। मैदान के पास एक नाला बह रहा था जिस पर पुल नहीं था। मनुष्यों का बूढ़ा जौहरी (सुजानसिंह) एक गाड़ीवान किसान बनकर उधर से गुजरा। नाले में उसकी गाड़ी फंस गई। उसने बहुत प्रयत्न किया किन्तु असफल रहा। सायंकाल वे हारे थके खिलाड़ी गाड़ी को फंसी हुई देखकर भी अनदेखा करके रियासत चले गए किन्तु उनमें एक जख्मी खिलाड़ी पं. जानकीनाथ ने गाड़ीवान की सहायता करते हुए आत्मबल एवं साहस से गाड़ी को नाले से पार करवाया। परीक्षा में पुरस्कार स्वरूप पं. जानकीनाथ का ‘दीवान’ पद पर चयन हुआ।
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