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पेड़ की बात Class 6 Question Answer
पेड़ की बात Question Answer Class 6
Class 6 Hindi Chapter 13 पेड़ की बात Question Answer
मेरी समझ से-
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए-
(1) “जैसे पौधे को भी सब भेद मालूम हो गया हो” लिखिए-पौधे को कौन – सा भेद पता लग गया?
(अ) उसे उल्टा लटकाया गया है।
(ब) उसे किसी ने सजा दी है।
(स) बच्चे को गमला रखना नहीं आया।
(द) प्रकाश ऊपर से आ रहा है।
उत्तर:
(अ) उसे उल्टा लटकाया गया है।
(2) पेड़-पौधे जीव-जंतुओं के मित्र कैसे हैं?
(अ) हमारे जैसे ही साँस लेते हैं।
(ब) हमारे जैसे ही भोजन ग्रहण करते हैं।
(स) हवा को शुद्ध करके सहायता करते हैं।
(द) धरती पर हमारे साथ ही जन्मे हैं।
उत्तर:
(स) हवा को शुद्ध करके सहायता करते हैं।
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(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
(1) जब लेखक ने प्रयोग करते हुए गमले को उल्टा लटकाया तो दो-एक दिन बाद उसकी सब पत्तियाँ और डालियाँ टेढ़ी होकर ऊपर की तरफ उठ आईं तथा जड़ घूमकर नीचे की तरफ लटक गई। जैसे पौधे को पता लग गया हो कि उसे उल्टा लटकाया गया है।
(2) पेड़-पौधे जीव-जन्तुओं द्वारा छोड़ी गई कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करते हैं और उसके स्थान पर जीव-जन्तुओं की प्राणवायु (ऑक्सीजन) छोड़ते हैं। जिससे हवा शुद्ध होती है इसलिए जीव-जन्तु के मित्र पेड़-पौधे होते हैं।
पंक्तियों पर चर्चा –
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में
(क) “पेड़-पौधों के रेशे रेशे में सूरज की किरणें आबद्ध हैं। ईंधन को जलाने पर जो प्रकाश व ताप बाहर प्रकट होता है, वह सूर्य की ही ऊर्जा है।”
उत्तर:
सूर्य ऊर्जा का स्रोत है। पेड़-पौधे सूर्य से धीरे-धीरे ऊर्जा को ग्रहण करते हैं। जब पेड़-पौधे सूखकर समाप्त होते हैं तो भी हम इन्हें ईंधन के रूप में काम लेते हैं। जब इन्हें जलाते हैं तो ये ग्रहण की हुई ऊर्जा को हमें अग्नि के रूप में देते हैं।
(ख) “मधुमक्खी व तितली के साथ वृक्ष की चिरकाल से घनिष्ठता है। वे दल-बल सहित फूल देखने आती हैं।”
उत्तर:
जब पेड़-पौधे रंग-बिरंगे फूलों से लद जाते हैं तो फूलों में शहद का संचय होता है। वे अपने घनिष्ठ मित्र मधुमक्खी एवं तितलियों को शहद रस-पान हेतु आमंत्रित करते हैं। पेड़-पौधों का मधुमक्खी एवं तितलियों के साथ घनिष्ठ मित्रता का सम्बन्ध है। वे रंग-बिरंगे फूलों पर बैठकर बड़े चाव से रसपान करती हैं।
मिलकर करें मिलान-
पाठ में से चुनकर कुछ वाक्यांश नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

उत्तर:

सोच-विचार के लिए-
पाठ को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-
(क) बीज के अंकुरित होने में किस-किस का सहयोग मिलता है?
उत्तर:
बीज के अंकुरित होने में मिट्टी, जल, प्रकाश एवं वायु का सहयोग मिलता है।
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(ख) पौधे अपना भोजन कैसे प्राप्त करते हैं?
उत्तर:
पौधे अपना भोजन जड़ों के माध्यम से, जल से एवं पत्तों के माध्यम से हवा से भोजन प्राप्त करते हैं।
अनुमान या कल्पना से-
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-
(क) “इस तरह संतान के लिए अपना जीवन न्योछावर करके वृक्ष समाप्त हो जाता है।” वृक्ष के समाप्त होने के बाद क्या होता है?
उत्तर:
वृक्ष से उपजे हुए बीज से पुन: पेड़ उगाये जाते हैं। और जो पेड़ सूखकर समाप्त हो जाते हैं उसकी लकड़ी ईंधन एवं फर्नीचर बनाने के काम आती है।
(ख) पेड़-पौधों के बारे में लेखक की रुचि कैसे जागृत हुई होगी?
उत्तर:
लेखक का बचपन प्रकृति का अवलोकन करते हुए बीता। जीव-जन्तुओं से प्रेम करते हुए उनकी शिक्षा प्रारम्भ हुई। वे अपने परिवेश के प्रति जागरुक हुए होंगे इसलिए उनकी पेड़-पौधों के बारे में रुचि जाग्रत हुई होगी कि पेड़-पौधों से हमें प्राणवायु मिलती है जो हमारे जीवन का आधार है।
प्रवाह चार्ट-
बीज से बीज तक की यात्रा का आरेख पूरा कीजिए-

उत्तर:

शब्दों के रूप-
नीचे दिए गए चित्र को देखिए।
यहाँ मिट्टी से जुड़े कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं जो उसकी विशेषता बता रहे हैं। अब आप पेड़, सर्दी, सूर्य जैसे शब्दों की विशेषता बताने वाले शब्द बॉक्स बनाकर लिखिए-

उत्तर:

पाठ से आगे-
मेरे प्रिय-
नीचे दी गई तालिका से प्रत्येक के लिए अपनी पसंद के तीन-तीन नाम लिखिए-

उत्तर:

आज की पहेली-
इस शब्द सीढ़ी में पाठ में आए शब्द हैं। उन्हें पूरा कीजिए और पाठ में रेखांकित कीजिए-

उत्तर:

Class 6 पेड़ की बात Question Answer
बहुविकल्पात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
‘पेड़ की बात’ पाठ के लेखक कौन हैं?
(अ) जया मेहता
(ब) सुदर्शन
(स) जगदीशचन्द्र बसु
(द) प्रेमचन्द
उत्तर:
(स) जगदीशचन्द्र बसु
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प्रश्न 2.
आहिस्ता आहिस्ता बीज का ढक्कन दरकने पर क्या निकला?
(अ) अंकुर
(स) जड़
(ब) तना
(द) पुष्प
उत्तर:
(अ) अंकुर
प्रश्न 3.
वृक्ष का अंकुर निकलने पर जो भाग ऊपर की ओर बढ़ता है, उसे कहते हैं-
(अ) पत्ता
(ब) तना
(स) टहनी
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(ब) तना
प्रश्न 4.
पेड़-पौधों के क्या नहीं होते हैं?
(अ) पुष्प
(ब) जड़ें
(स) दाँत
(द) तने
उत्तर:
(स) दाँत
प्रश्न 5.
वृक्ष के पत्ते किससे आहार ग्रहण करते हैं?
(अ) जल से
(ब) हवा से
(स) सूर्य से
(द) नभ से
उत्तर:
(ब) हवा से
प्रश्न 6.
श्वास-प्रश्वास का अर्थ होता है?
(अ) श्वास लेना
(ब) श्वास छोड़ना
(स) श्वास लेना व छोड़ना
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(स) श्वास लेना व छोड़ना
प्रश्न 7.
यदि अंगारक वायु पृथ्वी पर इकट्ठी होती रहे तो क्या होगा?
(अ) तमाम जीव-जन्तु स्वस्थ रहेंगे।
(ब) तमाम जीव-जन्तु मर जायेंगे।
(स) तमाम पेड़-पौधे समाप्त हो जाएंगे।
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(ब) तमाम जीव-जन्तु मर जायेंगे।
प्रश्न 8.
पेड़ के जीवन का मूलमंत्र किसे कहा गया है?
(अ) प्रकाश को
(ब) अँधेरे को
(स) खुशी को
(द) दुःख को
उत्तर:
(अ) प्रकाश को
प्रश्न 9.
पेड़ की संतान किसे कहा गया है?
(अ) पत्तों को
(ब) तने को
(स) जड़ों को
(द) बीज को
उत्तर:
(द) बीज को
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प्रश्न 10.
वृक्ष अपने फूलों में किसका संचय करते हैं?
(अ) मधुमक्खियों का
(ब) तितलियों का
(स) शहद का
(द) भँवरों का
ཟउत्तर:
(स) शहद का
रिक्त स्थानों की पूर्ति-
प्रश्न 11.
रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित शब्द से कीजिए-
(i) दो सुकोमल पत्तियों के बीच …………………… बाहर निकला। (अंकुर / बीज)
उत्तर:
अंकुर
(ii) पेड़-पौधे जड़ के द्वारा …………………… करते हैं। (जल-पान / रस-पान)
उत्तर:
रस-पान
(iii) सूक्ष्मदर्शी से अत्यंत …………………… पदार्थ स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। (सूक्ष्म / बृहद)
उत्तर:
सूक्ष्म
(iv) सूर्य किरण का स्पर्श पाकर ही पेड़ …………………… होता है। (शुष्क / पल्लवित)
उत्तर:
पल्लवित
(v) मधुमक्खी के आगमन से वृक्ष का भी …………………… होता है। (उपकार / अपकार)
उत्तर:
उपकार
(vi) अंत में एक दिन …………………… पेड़ जड़ सहित भूमि पर गिर पड़ता है। (एक साथ / अकस्मात)
उत्तर:
अकस्मात
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 12.
वृक्ष किसके लिए अपना जीवन न्योछावर कर देते हैं?
उत्तर:
वृक्ष अपनी संतान (बीज) के लिए अपना जीवन न्योछावर करते हैं।
प्रश्न 13.
वृक्ष की संतान किसे कहा गया है?
उत्तर:
वृक्ष की संतान बीज को कहा गया है।
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प्रश्न 14.
किसके बिना बीज पक नहीं सकता है?
उत्तर:
पराग कण के बिना बीज पक नहीं सकता है।
प्रश्न 15.
वृक्ष की किसके साथ चिरकाल से घनिष्ठता है?
उत्तर:
वृक्ष की मधुमक्खियों एवं तितलियों के साथ चिरकाल घनिष्ठता है।
प्रश्न 16.
पेड़-पौधों के रेशे रेशे किससे आबद्ध हैं?
उत्तर:
पेड़-पौधों के रेशे रेशे में सूरज की किरणें आबद्ध हैं।
प्रश्न 17.
मटमैली माटी व अंगार से क्या बन जाते हैं?
उत्तर:
मटमैली माटी व अंगार से फूल बन जाते हैं।
प्रश्न 18.
वृक्ष का अंकुर निकलने पर जो अंश माटी के भीतर प्रवेश करता है, उसे क्या कहते हैं?
उत्तर:
उसे जड़ कहते हैं।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 19.
सभी पेड़-पौधों के कितने भाग होते हैं? बताइए।
उत्तर:
सभी पेड़-पौधों के दो भाग होते हैं। अंकुर निकलने पर जो अंश धरती के भीतर प्रवेश करता है उसे जड़ कहते हैं और जो अंश भूमि के ऊपर की ओर बढ़ता है उसे तना कहते हैं।
प्रश्न 20.
पेड़-पौधे भोजन कैसे ग्रहण करते हैं?
उत्तर:
पेड़-पौधे जड़ के द्वारा तरल द्रव्य को सोखते हैं। पत्तों द्वारा वायु से भोजन ग्रहण करते हैं और जीवित रहते हैं।
प्रश्न 21.
यदि पेड़-पौधे नहीं होंगे तो क्या परिणाम निकल सकते हैं?
उत्तर:
यदि पेड़-पौधे नहीं होंगे तो जीव-जन्तु और हम मानव प्रश्वास में जो विषाक्त वायु बाहर निकालते हैं वह बहुत ज्यादा इकट्ठी हो जाएगी। जिसे जीव-जन्तु एवं हम पुनः सेवन करके नष्ट हो सकते हैं।
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प्रश्न 22.
फूल किस तरह खिलते हैं?
उत्तर:
पेड़-पौधे मटमैली माटी से आहार व विषाक्त वायु से अंगारक ग्रहण करते हैं। फिर इस अपरूप उपादान से सुन्दर-सुन्दर फूल खिलते हैं।
प्रश्न 23.
पेड़-पौधे मधुमक्खियों और तितलियों को क्यों आमंत्रित करते हैं?
उत्तर:
पेड़-पौधे, मधुमक्खियों और तितलियों में चिरकाल से घनिष्ठता का सम्बन्ध है। पेड़-पौधे, मधुमक्खियों एवं तितलियों को इसलिए आमंत्रित करते हैं कि ये फूलों के पराग कण एक पुष्प से दूसरे पुष्प तक ले जाती हैं जिससे बीज पकते हैं।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 24.
पेड़-पौधे पर्यावरण को पूर्णतया शुद्ध कैसे करते हैं?
उत्तर:
जीव-जन्तु एवं मनुष्य श्वास के रूप में ऑक्सीजन को ग्रहण करते हैं जो पेड़-पौधों के प्रश्वास से प्राप्त होती है और जीव-जन्तु एवं मनुष्य प्रश्वास में कार्बन डाइऑक्साइड (विषाक्त वायु) छोड़ते हैं जिसे पेड़-पौधे श्वास के रूप में ग्रहण करते हैं। जिससे पर्यावरण शुद्ध होता रहता है।
प्रश्न 25.
पेड़-पौधे प्रकाश क्यों चाहते हैं? बताइए।
उत्तर:
पेड़-पौधों को प्रकाश न मिलने पर ये बच नहीं सकते क्योंकि जब इन पर सूर्य का प्रकाश पड़ता है तो ये सूर्य ऊर्जा के सहारे ‘अंगारक’ वायु से अंगार निःशेष कर देते हैं और यही अंगार पेड़-पौधों के शरीर में प्रवेश करके संवर्द्धन करते हैं। इसलिए सूर्य प्रकाश ही इनके जीवन का मूलमंत्र है।
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प्रश्न 26.
हम सभी प्रकाश की खुराक पर ही जीवित हैं, कैसे? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पेड़-पौधे एवं समस्त वनस्पति प्रकाश हथियाने के जाल हैं। जीव-जन्तु एवं पशु वनस्पति खाकर अपने प्राणों का निर्वाह करते हैं। पेड़-पौधों में सूर्य का प्रकाश समाहित है। वह इस तरह जीव-जन्तुओं के शरीर में प्रवेश करता है। इसी प्रकार अगर हम अनाज व सब्जी न खाएँ तो हम भी बच नहीं सकते हैं। इसीलिए हम सब भी प्रकाश की खुराक पर ही जीवित हैं।
गद्यांश पर आधारित प्रश्नोत्तर-
निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
(1)
बहुत दिनों तक मिट्टी के नीचे बीज पड़े रहे। इसी तरह महीना – दर – महीना बीतता गया। सर्दियों के बाद वसंत आया। उसके बाद वर्षा की शुरुआत में दो-एक दिन पानी बरसा। अब और छिपे रहने की आवश्यकता नहीं थी मानो बाहर से कोई शिशु को पुकार रहा हो, ‘और सोए मत रहो, ऊपर उठ जाओ, सूरज की रोशनी देखो।’ आहिस्ता-आहिस्ता बीज का ढक्कन दरक गया, दो सुकोमल पत्तियों के बीच अंकुर बाहर निकला। अंकुर का एक अंश नीचे माटी में मजबूती से गड़ गया और दूसरा अंश माटी भेदकर ऊपर की ओर उठा। क्या तुमने अंकुर को उठते देखा है? जैसे कोई शिशु अपना नन्हा- सा सिर उठाकर आश्चर्य से नई दुनिया को देख रहा है!
प्रश्न –
1. मिट्टी में दबे पड़े बीजों के अंकुर कौनसी ऋतु में निकलते हैं?
2. पेड़ के अंकुर की तुलना किससे की गई है?
3. अंकुर बाहर कैसे निकला?
4. अंकुर के अंश कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
1. मिट्टी में दबे पड़े बीजों के अंकुर वर्षा ऋतु में निकलते हैं।
2. पेड़ के अंकुर की तुलना शिशु से की गई है।
3. वर्षा के जल से गलकर आहिस्ता-आहिस्ता बीज का ढक्कन दरक गया और दो सुकोमल पत्तियों के बीच अंकुर बाहर निकला।
4. अंकुर के दो अंश होते हैं; धरती के अन्दर का अंश जड़ और ऊपर का अंश तना होता है।
(2)
इसके अलावा वृक्ष के पत्ते हवा से आहार ग्रहण करते हैं। पत्तों में अनगिनत छोटे मुँह होते हैं। सूक्ष्मदर्शी के जरिए अनगिनत मुँह पर अनगिनत होंठ देखे जा सकते हैं। जब आहार करने की जरूरत न हो तब दोनों होंठ बंद हो जाते हैं। जब हम श्वास-प्रश्वास ग्रहण करते हैं तब प्रश्वास के साथ एक प्रकार की विषाक्त वायु बाहर निकलती है, उसे ‘अंगारक’ वायु कहते हैं। अगर यह जहरीली हवा पृथ्वी पर इकट्ठी होती रहे तो तमाम जीव- जंतु कुछ ही दिनों में उसका सेवन करके नष्ट हो सकते हैं। जरा विधाता की करुणा का चमत्कार तो देखो, जो -जंतुओं के लिए जहर है, पेड़-पौधे उसी का सेवन करके उसे पूर्णतया शुद्ध कर देते हैं।
प्रश्न-
1. वृक्ष के पत्ते किससे आहार ग्रहण करते हैं?
2. किससे हम पत्तों के मुँह और होंठ देख सकते हैं?
3. ‘अंगारक’ वायु किसे कहते हैं?
4. विधाता की करुणा का चमत्कार किसे बताया गया है?
उत्तर:
1. वृक्ष के पत्ते वायु से आहार ग्रहण करते हैं।
2. सूक्ष्मदर्शी यंत्र के द्वारा हम पत्तों के मुँह और होंठ देख सकते हैं।
3. हमारे प्रश्वास के साथ एक प्रकार की विषाक्त वायु बाहर निकलती है, जिसे अंगारक वायु कहते हैं।
4. जो अंगारक वायु जीव-जंतुओं के लिए जहर है, पेड़- पौधे उसी का सेवन करके उसे पूर्णतया शुद्ध कर देते हैं। और स्वयं सजीव रहते हैं। इसे ही विधाता की करुणा का चमत्कार बताया गया है।
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(3)
कोई-कोई पेड़ एक वर्ष के बाद ही मर जाते हैं। सब पेड़ मरने से पहले संतान छोड़ जाने के लिए व्यग्र हैं। बीज ही उनकी संतान हैं। बीज की सुरक्षा व सार-सँभाल के लिए पेड़ फूल की पंखुड़ियों से घिरा एक छोटा-सा घर तैयार करता है। फूलों से आच्छादित होने पर पेड़ कितना सुंदर दिखलाई पड़ता है। जैसे फूल-फूल के बहाने वह स्वयं हँस रहा हो। फूल की तरह सुंदर चीज और क्या है? जरा सोचो तो, पेड़-पौधे तो मटमैली माटी से आहार व विषाक्त वायु से अंगारक ग्रहण करते हैं, फिर इस अपरूप उपादान से किस तरह ऐसे सुंदर फूल खिलते हैं । तुमने कथा तो सुनी होगी स्पर्शमणि की अर्थात् पारस पत्थर की, जिसके स्पर्श से लोहा सोना हो जाता है। मेरे विचार से माँ की ममता ही वह मणि है। संतान पर स्नेह न्योछावर होते ही फूल खिलखिला उठते हैं। ममता का स्पर्श पाते ही मानो माटी व अंगार के फूल बन जाते हैं।
प्रश्न-
1. पेड़ मरने से पहले किस लिए व्यग्र होते है?
2. पेड़ बीज की सुरक्षा के लिए क्या करते हैं?
3. पेड़ कब सुन्दर दिखते हैं?
4. सुन्दर फूल कैसे खिलते हैं?
उत्तर:
1. पेड़ मरने से पहले संतान छोड़ जाने के लिए व्यग्र होते हैं।
2. पेड़ बीज की सुरक्षा व सार सँभाल के लिए फूल की पंखुड़ियों से घिरा एक छोटा सा घर तैयार करते हैं।
3. पेड़ फूलों से आच्छादित होने पर सुन्दर दिखते हैं।
4. पेड़-पौधे मटमैली माटी से आहार व विषाक्त वायु से अंगारक ग्रहण करते हैं जिसके अपरूप उपादान से सुंदर फूल खिलते हैं।
(4)
वृक्ष अपने फूलों में शहद का संचय करके रखते हैं। मधुमक्खी व तितली बड़े चाव से मधुपान करती हैं। मधुमक्खी के आगमन से वृक्ष का भी उपकार होता है। तुम लोगों ने फूल में पराग कण देखे होंगे। मधुमक्खियाँ एक फूल के परागकण दूसरे फूल पर ले जाती हैं। पराग कण के बिना बीज पक नहीं सकता।
प्रश्न-
1. वृक्ष में शहद का संचय किसमें होता है?
2. किसके आगमन से वृक्ष का उपकार होता है?
3. पराग कण किसे कहते हैं?
4. बीज कैसे पकता है?
उत्तर:
1. वृक्ष में शहद का संचय फूलों में होता है।
2. मधुमक्खियों के आगमन से वृक्ष का उपकार होता है।
3. फूलों के भीतर की धूल को या पुष्प-रज को पराग-कण कहते हैं।
4. मधुमक्खियाँ पराग कणों को एक फूल से दूसरे फूलों तक ले जाती हैं जिससे बीज पकता है।
पेड़ की बात Class 6 Summary
कठिन शब्दार्थ एवं पाठ का सार
कठिन शब्दार्थ-आहिस्ता = धीरे से, धीमी आवाज से। दरक = दरकने की क्रिया, दरार, चीर। अंकुर = कोंपल, कली, नोंक, रोआँ, जल, रुधिर विकास आदि के सूचक चिह्न। द्रव्य = तरल पदार्थ, किसी पदार्थ का तरल रूपान्तर। सूक्ष्मदर्शी = बहुत बारीक वस्तु को देखने वाला यंत्र, अणु-रूप देखने वाला यंत्र। सूक्ष्म पदार्थ = बहुत बारीक तत्त्व, वस्तु। अनगिनत = बेहिसाब, अगणित। श्वास प्रश्वास = बाहर निकली हुई श्वास, सांस लेना और निकालना। विषाक्त = विष मिश्रित। अंगारक = कार्बन, छोटा अंगारा। व्यग्र = व्याकुल, परेशान, घबराया हुआ। आच्छादित = ढका हुआ, छिपा हुआ। अपरूप = कुरूप, भद्दा, अपूर्व। उपादान = ग्रहण, स्वीकार, वह द्रव्य जिससे कोई वस्तु बने, प्रयोग। प्रफुल्लित = खिला हुआ, अति प्रसन्न, प्रमुदित। पराग कण फूल के भीतर की धूल, पुष्परज क्षीण = दुर्बल, दुबला-पतला, क्षतिग्रस्त, घटा हुआ। क्रीड़ा = खेलकूद, किलोल, हास्य विनोद। आघात = चोट, प्रहार, धक्का, घाव। अकस्मात = अचानक, संयोगवश सहसा, बिना कारण न्योछावर = समर्पण करना, त्यागना।
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पाठ का सार – प्रसिद्ध लेखक वैज्ञानिक जगदीशचन्द्र बसु का जीवन प्रकृति अवलोकन में व्यतीत हुआ। इस पाठ में लेखक ने बीज से पेड़-पौधों की उत्पत्ति और उससे बीज निर्माण के बाद पेड़ों की समाप्ति के बारे में बताया है। बहुत दिनों तक बीज धरती में दबा रहता है। वर्षा होने पर पानी से बीज विगलित होकर जड़ें हमेशा नीचे की ओर और तना ऊपर की ओर बढ़ता है। वृक्ष जड़ों से भोजन ग्रहण और सूर्य प्रकाश से ऊर्जा ग्रहण कर वृद्धि करते रहते हैं पेड़-पौधे कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं और हमारे लिए प्राणवायु ऑक्सीजन छोड़ते हैं। धरती से रसपान करने से समयानुसार उन पर पुष्प खिलते हैं। पुष्पों से ही फल बनते हैं। फल पकने पर पुनः बीज का निर्माण करते हैं। अवधि समाप्त होने पर वे क्षीण होने लगते हैं और सूख कर अपना जीवन समाप्त कर लेते हैं। पेड़ों की यह प्रक्रिया निरन्तर चलती रहती है।
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