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RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 3 Question Answer पहली बूँद

February 25, 2026 by Fazal Leave a Comment

Explore these RBSE Solutions Class 6 Hindi Malhar Chapter 3 पहली बूँद Question Answer to test your grasp of the chapter content.

पहली बूँद Class 6 Question Answer

पहली बूँद Question Answer Class 6

Class 6 Hindi Chapter 3 पहली बूँद Question Answer

मेरी समझ से-

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए –
1. कविता में ‘नव-जीवन की ले अँगड़ाई’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
(अ) बादल
(ब) अंकुर
(स) बूँद
(द) पावस
उत्तर:
(ब) अंकुर

2. ‘नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली से ये जलधर’ में ‘काली पुतली’ है-
(अ) बारिश की बूँदें
(ब) नगाड़ा
(स) वृद्ध धरती
(द) बादल
उत्तर:
(द) बादल

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 3 Question Answer पहली बूँद

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर क्यों चुने?
उत्तर:
1. वर्षा की पहली बूँद जब धरती पर पड़ती है तो धरती पर नई-नई कलियाँ अर्थात् अंकुर दिखाई देते हैं। वे नव-जीवन की अँगड़ाई लेते हुए दिखाई देते हैं।
2. काली पुतली जल से भरे हुए काले बादलों को कहा जाता है इसलिए काली पुतली बादल को कहा है।

मिलकर करें मिलान-

कविता की कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्तियों में कुछ शब्द रेखांकित हैं। दाहिनी ओर रेखांकित शब्दों के भावार्थ दिए गए हैं। इनका मिलान कीजिए।
RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 3 Question Answer पहली बूँद 1
उत्तर:
RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 3 Question Answer पहली बूँद 2

पंक्तियों पर चर्चा-

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार कक्षा में अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-
1.”आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर,
बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई।”
उत्तर:
वर्षा ऋतु में बादल रूपी समुद्र बिजलियों के सुनहरे पंख लगाकर आसमान में उड़ रहे हैं। बरसाती बादल ढोल नगाड़ों की गर्जना करते हुए धरती की युवावस्था अर्थात् जवानी को जगा रहे हैं। अर्थात् बादलों की गर्जना एवं आसमान में चमकती बिजली ने धरती में जवानी ( युवावस्था) का जोश जाग्रत कर दिया है।

2. “नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली से ये जलधर।
करुणा-विगलित अश्रु बहाकर, धरती की चिर- प्यास बुझाई।”
उत्तर:
वर्षा ऋतु में आसमान नीली आँखों के समान दिखाई देता है। कभी-कभी ये काले-काले बादल आँखों की काली पुतली के समान प्रतीत होते हैं। वे लोगों पर या धरती पर करुणा अर्थात् दया करने के लिए आँसू रूपी वर्षा करते हैं। वे दीर्घ काल से अतृप्त एवं संतप्त धरती की प्यास बुझाते हैं अर्थात् उसे सन्तुष्ट या जल से तृप्त करते हैं।

सोच-विचार के लिए-

कविता को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-
1. बारिश की पहली बूँद से धरती का हर्ष कैसे प्रकट होता है?
उत्तर:
बारिश की पहली बूँद जब धरती के सूखे होंठों पर पड़ती है तो वह उन्हें अमृत के समान तृप्त करती है। धरती अपनी खुशी (हर्ष) इस प्रकार प्रकट करती है कि उसके अंग-अंग पर हरी हरी दूब एवं नई कोंपलें पंक्तिबद्ध होकर खिल जाती हैं एवं चारों तरफ हरियाली फैल जाती है।

2. कविता में आकाश और बादलों को किनके समान बताया गया है?
उत्तर:
कविता में आकाश (आसमान) को नीली आँखों के समान एवं काले बादलों को आँख की काली पुतली के समान बताया गया है।

शब्द एक अर्थ अनेक-

‘अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन की ले अँगड़ाई ‘ कविता की इस पंक्ति में ‘फूटने’ का अर्थ पौधे का अंकुरण है। ‘फूट’ का प्रयोग अलग-अलग अर्थों में किया जाता है, जैसे- फूट डालना, घड़ा फूटना आदि। अब फूट शब्द का प्रयोग ऐसे वाक्यों में कीजिए जहाँ इसके भिन्न-भिन्न अर्थ निकलते हों, जैसे-अंग्रेजों की नीति थी फूट डालो और राज करो।
उत्तर:

  1. पहाड़ी क्षेत्रों में झरने फूट पड़ते हैं।
  2. हास्य कविता सुनते ही विद्यार्थियों की हँसी फूट पड़ी।
  3. मिट्टी की हँडिया गिरकर फूट गई।
  4. लोगों को राजनैतिक फूट का शिकार नहीं होना चाहिए।
  5. अवांछित संदेश मिलते ही उसकी सिसकियाँ फूट पड़ीं।

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 3 Question Answer पहली बूँद

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द-

‘नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली से ये जलधर’ कविता की इस पंक्ति में ‘जलधर’ शब्द आया है। ‘जलधर’ दो शब्दों से बना है, जल और धर। इस प्रकार जलधर का शाब्दिक अर्थ हुआ जल को धारण करने वाला। बादल और समुद्र दोनों ही जल धारण करते हैं। इसलिए दोनों जलधर हैं। वाक्य के संदर्भ या प्रयोग से हम जान सकेंगे कि जलधर का अर्थ समुद्र है या बादल। शब्दकोश या इंटरनेट की सहायता से ‘धर’ से मिलकर बने कुछ शब्द और उनके अर्थ ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर:
(1) मुरलीधर = मुरली को धारण करने वाले – श्री कृष्ण।
(2) चक्रधर = चक्र को धारण करने वाले – विष्णु
(3) गिरिधर = पर्वत को धारण करने वाले – श्रीकृष्ण।
(4) धनुर्धर = धनुष को धारण करने वाले – अर्जुन।
(5) गदाधर = गदा को धारण करने वाले – बलराम।

शब्द पहेली-

दिए गए शब्द – जाल में प्रश्नों के उत्तर खोजें-
RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 3 Question Answer पहली बूँद 3
उत्तर:
(क) एक प्रकार का वाद्य यंत्र – नगाड़ा
(ख) आँख के लिए एक अन्य शब्द – नयन
(ग) जल को धारण करने वाला – जलधर
(घ) एक प्रकार की घास – दूब
(ड) आँसू का समानार्थी – अश्रु
(च) आसमान का समानार्थी शब्द – अंबर

पाठ से आगे-

आपकी बात-

1. बारिश को लेकर हर व्यक्ति का अनुभव भिन्न होता है। बारिश आने पर आपको कैसा लगता है? बताइए।
उत्तर:
बारिश आने से पूर्व ग्रीष्म ऋतु के कारण पृथ्वी सहित सम्पूर्ण प्राणि जगत संतप्त रहते हैं। जब बारिश आती है तो सम्पूर्ण प्राणि जगत आनन्दित होकर झूम उठता है। लोग प्रसन्न होकर उत्सव मनाते हैं और खुशी के गीत गाते हैं।

2. आपको कौन-सी ऋतु सबसे अधिक प्रिय है और क्यों? बताइए।
उत्तर:
गर्मी, वर्षा, सर्दी, हेमन्त शिशिर, वसन्त ये छ: ऋतुएँ होती हैं। इनमें से वसन्त को ऋतुराज कहा जाता है। इस समय वातावरण समशीतोष्ण होता है। सभी पेड़-पौधे फल एवं फूलों से लद जाते हैं। चारों तरफ खुशी की लहर छायी रहती है।

Class 6 पहली बूँद Question Answer

बहुविकल्पात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
‘पहली बूँद’ कविता में किस ऋतु का वर्णन किया गया है?
(अ) गर्मी
(ब) वर्षा
(स) सर्दी
(द) वसन्त
उत्तर:
(ब) वर्षा

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 3 Question Answer पहली बूँद

प्रश्न 2.
पहली बूँद धरा पर आई । रेखांकित पद का अर्थ है-
(अ) पृथ्वी
(ब) देश
(स) आसमान
(द) बादल
उत्तर:
(अ) पृथ्वी

प्रश्न 3.
धरती के अधर कैसे बताए गए हैं?
(अ) गीले
(ब) तृप्त
(स) सूखे
(द) ललचाए
उत्तर:
(स) सूखे

प्रश्न 4.
धरती के सूखे अधरों पर बूँद किसके समान गिरी?
(अ) जल के समान
(ब) अमृत के समान
(स) दुग्ध के समान
(द) ओस के समान
उत्तर:
(ब) अमृत के समान

प्रश्न 5.
नगाड़े बजाकर कौन जगा रहे हैं?
(अ) वसुन्धरा
(ब) लोग
(स) बादल
(द) आसमान
उत्तर:
(स) बादल

प्रश्न 6.
‘आसमान में उड़ता सागर’ पंक्ति में ‘उड़ता सागर’ किसे कहा गया है?
(अ) बादल को
(ब) बिजली को
(स) वर्षा की बूँदों को
(द) समुद्र को
उत्तर:
(अ) बादल को

प्रश्न 7.
‘नीले नयनों-सा अंबर’ पंक्ति में किसकी विशेषता है?
(अ) आँखों की
(ब) धरती की
(स) आसमान की
(द) वर्षा की
उत्तर:
(स) आसमान की

प्रश्न 8.
‘करुणा-विगलित अश्रु बहाकर पंक्ति में अश्रु कौन बहा रहा है?
(अ) आसमान
(ब) धरती
(स) काले बादल
(द) अंबर
उत्तर:
(स) काले बादल

प्रश्न 9.
शस्य – श्यामला बनने को कौन ललचा रही है?
(अ) अचला
(ब) धरा
(स) धरती
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 3 Question Answer पहली बूँद

प्रश्न 10.
धरा पर कौन आई है?
(अ) पहली बूँद
(ब) हरी दूब
(स) तरुणाई
(द) करुणा
उत्तर:
(अ) पहली बूँद

रिक्त स्थानों की पूर्ति –

प्रश्न 11.
रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित शब्द से कीजिए-
(i) पहली बूँद ………………………… पर आई। (अंबर / धरा)
उत्तर:
धरा

(ii) गिरी बूँद ………………………… सी आकर। (अमृत / जल)
उत्तर:
अमृत

(iii) बादल ………………………… की तरुणाई। (अंबर / धरती)
उत्तर:
धरती

(iv) धरती की चिर ………………………… बुझाई (भूख / प्यास)
उत्तर:
प्यास

(v) काली ………………………… से ये जलधर। (पुतली/बदली)
उत्तर:
पुतली

(vi) ………………………… धरती शस्य – श्यामला बनने को फिर से ललचाई। (सूखी / बूढ़ी)
उत्तर:
बूढ़ी

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 12.
‘पहली बूंद’ कविता के रचनाकार कौन है?
उत्तर:
पहली बूँद कविता के रचनाकार ‘गोपालकृष्ण कौल’ हैं।

प्रश्न 13.
पहली बूँद धरा पर कब आई?
उत्तर:
पावस के प्रथम दिवस पर पहली बूँद धरा पर आई।

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 3 Question Answer पहली बूँद

प्रश्न 14.
अमृत-सी बूँद किस पर आकर गिरी?
उत्तर:
अमृत-सी बूँद धरती के सूखे अधरों पर आकर गिरी।

प्रश्न 15.
उड़ता सागर कहाँ प्रतीत हो रहा है?
उत्तर:
उड़ता सागर आसमान में प्रतीत हो रहा है।

प्रश्न 16.
बादल धरती की तरुणाई कैसे जाग्रत कर रहे हैं?
उत्तर:
बादल धरती की तरुणाई नगाड़े बजाकर (गर्जना करके) जाग्रत कर रहे हैं।

प्रश्न 17.
बूढ़ी धरती को कैसा बनने का लालच हुआ?
उत्तर:
बूढ़ी धरती को शस्य – श्यामला बनने का लालच हुआ।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 18.
धरती ने नव-जीवन की अँगड़ाई कब ली? बताइए।
उत्तर:
बारिश में प्रथम बूँद धरा पर गिरी तो धरती पर नई-नई कोंपलें फूटने लगीं। इससे ऐसा लग रहा है जैसे धरती ने नव-जीवन धारण करके अँगड़ाई ली हो।

प्रश्न 19.
अमृत-सी बूँद गिरने पर धरती ने कैसा महसूस किया?
उत्तर:
सूखी धरती के अधरों पर जब अमृत के समान वर्षा की बूँदें गिरीं तो धरती पर हरी हरी दूब की रोमावली उग आई जिसे देखकर धरती प्रसन्न होकर मुस्कुराने लगी।

प्रश्न 20.
आसमान में गर्जना करते हुए बादल क्या कर रहे हैं? बताइए।
उत्तर:
आसमान में उमड़-घुमड़ करते हुए बादल गर्जना करते हुए नगाड़े बजा रहे हैं और बिजलियाँ अपने स्वर्णिम पंखों को फैलाकर चमक रही हैं जिससे लगता है कि बादल धरती की जवानी (युवावस्था) को जगा रहे हैं।

प्रश्न 21.
काले-काले बादलों का भूमि पर क्या प्रभाव पड़ा? बताइए।
उत्तर:
आसमान में काले-काले बादल जल से भरे होते हैं। वे करुणामयी अश्रु बहाकर धरती की दीर्घकालीन प्यास को बुझाते हैं जिससे वृद्ध धरती शस्य श्यामला होने के लिए फिर से लालायित होती है।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 22.
बादल की धरती की तरुणाई,
पहली बूँद धरा पर आई।
पंक्ति में निहित भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पावस ऋतु के प्रथम दिवस पर जब आसमान में बादल घिर जाते हैं तो ऐसे प्रतीत होते हैं जैसे सागर उड़ रहे हों। उसी के साथ आसमान में बिजलियाँ स्वर्णिम पंख लगाकर चमत्कृत करती हैं। बादलों की गर्जना ढोल – नगाड़ों के समान सुनाई देती है जिससे धरती की जवानी (युवावस्था) जाग्रत हो जाती है अर्थात् सचेष्ट हो जाती है।

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 3 Question Answer पहली बूँद

प्रश्न 23.
‘पहली बूँद’ कविता का मूल भाव बताइए।
उत्तर:
बारिश का प्रारम्भ होता है तो आसमान में बादल छा जाते हैं। बिजलियाँ चमकने लगती हैं। काले बादल जल से भर जाते हैं। वे बारिश करते हैं जिससे दीर्घ संतप्त धरती की प्यास बुझती है। इस पर नई कोंपलें फूट पड़ती हैं। हरी- हरी दूब की हरियाली छा जाती है। सम्पूर्ण धरती शस्य- श्यामला हो जाती है, जो हमारे मन को प्रसन्न करती है।

पहली बूँद Class 6 Summary

कठिन शब्दार्थ एवं सप्रसंग व्याख्या / भावार्थ

1. वह पावस …………………………………….. ले अँगड़ाई।
कठिन – शब्दार्थ – पावस = वर्षा ऋतु, मानसून, समुद्र की ओर से आने वाली वर्षासूचक हवा। धरा = धरती, पृथ्वी। अंकुर = कोंपल, नोंक, रोऔं। फूट पड़ा = निकल पड़ा, प्रकट हुआ।

प्रसंग – प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ की कवि ‘गोपालकृष्ण कौल’ द्वारा रचित कविता ‘पहली बूंद’ से लिया गया है। इसमें कवि ने वर्षा ऋतु के प्रारम्भ के प्रथम दिवस का वर्णन किया है।

व्याख्या/ भावार्थ – धरती पर जब समुद्र की ओर से आने वाली वर्षासूचक हवा चलने लगी अर्थात् वर्षा ऋतु का प्रथम दिन प्रारम्भ हुआ तो वर्षा की पहली बूँद के पृथ्वी पर आते ही धरती पर नई-नई कोंपलें प्रकट होने लगीं अर्थात् दिखाई देने लगीं। इससे ऐसा आभास होता है कि धरती नवीन जीवन धारण करके आलस्य त्याग कर विकास की ओर अग्रसर हो रही हो।

2. धरती के सूखे …………………………………….. धरा पर आई।
कठिन – शब्दार्थ – अधरों होंठों, धरातल। वसुंधरा = धरती, वसुधा, जगत। दूब एक प्रकार की घास, दूर्वा। पुलकी = प्रसन्न हुई, रोमांचयुक्त, आनन्दित।
प्रसंग – प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ की कवि ‘गोपालकृष्ण कौल’ द्वारा रचित कविता ‘पहली बूंद’ से लिया गया है। इसमें कवि ने वर्षा ऋतु के प्रारम्भ के प्रभाव का वर्णन किया है।

व्याख्या/ भावार्थ – जब गर्मी से तप्त पृथ्वी के सूखे होंठों पर अर्थात् धरातल पर वर्षा की पहली बूँद गिरी तो वह अमृत के समान शीतलता प्रदान कर रही है। धरती पर अर्थात् सम्पूर्ण जगत में हरियाली रूपी दूब पंक्तिबद्ध होकर शोभायमान होते हुए, आनन्दित होकर रोमांचित होने लगी। जब पृथ्वी पर वर्षा की पहली बूँदें आईं।

3. आसमान में उड़ता सागर, …………………………………….. धरा पर आई॥
कठिन शब्दार्थ – उड़ता सागर = बादल। स्वर्णिम सोने के समान पर = पंख बजा = गर्जना। नगाड़े = बाजे। तरुणाई = जवानी, युवावस्था।

प्रसंग – प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ की कवि ‘गोपालकृष्ण कौल’ द्वारा रचित कविता ‘पहली बूँद’ से लिया गया है। इसमें कवि द्वारा वर्षा के बादलों की क्रियाशीलता का वर्णन किया गया है।

व्याख्या / भावार्थ – वर्षा ऋतु में बादल रूपी समुद्र बिजलियों के पंख लगाकर आसमान में उड़ रहे हैं। बरसाती बादल ढोल नगाड़ों की तरह गर्जना करते हुए धरती की युवावस्था जगा रहे हैं। बादलों ने वर्षा करके धरती की युवावस्था को जाग्रत कर दिया अर्थात् चारों तरफ हरियाली फैल गई। जब वर्षा की बूँदें धरती पर आई।

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 3 Question Answer पहली बूँद

4. नीले नयनों-सा …………………………………….. धरा पर आई॥
कठिन शब्दार्थ – नयनों-सा आँखों-सा। अंबर = आसमान। पुतली = आँख के बीच का काला भाग जिसके मध्य में रूप ग्रहण करने वाली इन्द्रिय होती है। जलधर = मेघ, बादल। करुणा = दया विगलित = पिघला हुआ, बहा हुआ, बिखरा हुआ, गिरा हुआ, सूखा हुआ। अश्रु आँसू चिर-प्यास = लम्बे समय की प्यास। बुझाई = शान्त की, सन्तुष्ट किया। बूढ़ी = वृद्ध शस्य – श्यामला: हरी-भरी या अन्न-धन से परिपूर्ण।

प्रसंग – प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ की कवि ‘गोपालकृष्ण कौल’ द्वारा रचित कविता ‘पहली बूंद’ से लिया गया है। इसमें कवि ने वर्षा ऋतु के प्रभाव का वर्णन किया है।

व्याख्या / भावार्थ – वर्षा ऋतु में आसमान नीली आँखों के समान दिखाई देता है। कभी ये काले बादल आँखों की काली पुतली के समान प्रतीत होते हैं। वे लोगों पर करुणा अर्थात् दया करने के लिए आँसू रूपी वर्षा करते हैं। वे दीर्घकाल से संतप्त वृद्ध धरती की प्यास बुझाते हैं अर्थात् उसे सन्तुष्ट करते हैं। जिससे पृथ्वी शस्य – श्यामला अर्थात् अन्न-धन से परिपूर्ण होने के लिए लालायित होती है। जब वर्षा की बूँदें धरती पर आती हैं।

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