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RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 4 Question Answer हार की जीत

February 25, 2026 by Fazal Leave a Comment

Explore these RBSE Solutions Class 6 Hindi Malhar Chapter 4 हार की जीत Question Answer to test your grasp of the chapter content.

हार की जीत Class 6 Question Answer

हार की जीत Question Answer Class 6

Class 6 Hindi Chapter 4 हार की जीत Question Answer

मेरी समझ से –

आइए, अब हम ‘हार की जीत’ कहानी को थोड़ा और निकटता से समझ लेते हैं।

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए –
(1) सुलतान के छीने जाने का बाबा भारती पर क्या प्रभाव हुआ?
(अ) बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया।
(ब) बाबा भारती ने गरीबों की सहायता करना बंद कर दिया।
(स) बाबा भारती ने द्वार बंद करना छोड़ दिया।
(द) बाबा भारती असावधान हो गए।
उत्तर:
(अ) बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया।

(2) “बाबा भारती भी मनुष्य ही थे।” इस कथन के समर्थन में लेखक ने कौन-सा तर्क दिया है?
(अ) बाबा भारती ने डाकू को घमंड से घोड़ा दिखाया।
(ब) बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे।
(स) बाबा भारती को घोड़े से अत्यधिक लगाव और मोह था।
(द) बाबा भारती हर पल घोड़े की रखवाली करते रहते थे।
उत्तर:
(ब) बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे।

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 4 Question Answer हार की जीत

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
(1) बाबा भारती को डाकू खड्गसिंह के कथनानुसार सुलतान के चोरी होने का डर सता रहा था इसलिए उसकी रक्षार्थ स्वयं पहरा देते थे। उसके छीने जाने के बाद उनके मन से चोरी-डकैती का भय समाप्त हो गया था।

(2) बाबा भारती सुलतान घोड़े की खूबसूरती एवं साहस पर लट्टू थे। इसलिए वे हमेशा दूसरों से भी घोड़े की प्रशंसा सुनने के लिए अधीर रहते थे। जैसे कि प्रत्येक मनुष्य अपनी चीजों की प्रशंसा सुनने के लिए व्याकुल रहता है।

शीर्षक-

(क) आपने अभी जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम सुदर्शन ने ‘हार की जीत’ रखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी को यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।
उत्तर:
हार की जीत कहानी का शीर्षक विषयवस्तु के आधार पर रखा गया है। बाबा भारती का डाकू ने सुलतान घोड़ा धोखे से छीना तो यह बाबा भारती की हार थी किन्तु बाबा भारती के वचनों पर प्रायश्चित करते हुए डाकू खड्गसिंह ने घोड़े को लौटा दिया तो यह बाबा भारती की जीत हुई। अतः ‘हार की जीत’ शीर्षक उचित है।

(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए।
उत्तर:
सुदर्शन द्वारा लिखित कहानी ‘हार की जीत’ का शीर्षक उपयुक्त, संक्षिप्त, सार्थक एवं आकर्षक है। इससे लेखक का उद्देश्य भी सार्थक है। इसका अन्य शीर्षक ‘गुनाह का पश्चाताप या अहसास’ या ‘डाकू का हृदय परिवर्तन’ रखा जा सकता है। क्योंकि इस कहानी में बाबा भारती ने अपनी एक प्रार्थना से डाकू खड्गसिंह का हृदय परिवर्तन कर प्रायश्चित करने के लिए मजबूर कर दिया।

(ग) बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से कौन-सा वचन लिया?
उत्तर:
बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से वचन लिया कि ‘इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना’। क्योंकि लोगों को पता चलेगा तो किसी गरीब पर कोई विश्वास नहीं करेगा। दुनिया से विश्वास उठ जाएगा।

पंक्तियों पर चर्चा –

कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार लिखिए-
1. “भगवत भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।”
उत्तर:
बाबा भारती मन्दिर में रहकर भगवत भजन में व्यस्त रहते थे। इसके अतिरिक्त जब भी समय बचता वे अपने सुलतान घोड़े की सेवा सुश्रुषा में लगे रहते थे, जैसे कि माँ अपने बेटे का पालन-पोषण करती है।

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 4 Question Answer हार की जीत

2. “बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से, खड्गसिंह ने घोड़ा देखा आश्चर्य से।”
उत्तर:
बाबा भारती का घोड़ा अतिखूबसूरत एवं साहसी था जिसकी कीर्ति चारों तरफ फैली हुई थी। डाकू खड्गसिंह जब उसे देखने पहुँचा तो बाबा भारती ने गर्व से घोड़े को दिखाया। खड्गसिंह उसे देखकर आश्चर्यचकित हुआ क्योंकि उसने सैकड़ों घोड़े देखे थे किन्तु ऐसा सुन्दर व ताकतवर घोड़ा नहीं देखा था।

3. “वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसंद आ जाए उस पर अपना अधिकार समझता था।”
उत्तर:
खड्गसिंह डाकू था। सुलतान घोड़े को देखकर उसके हृदय में हलचल होने लगी। घोड़ा उसे पसन्द आ गया था। वह उस पर अपना अधिकार समझता था क्योंकि उसके पास बाहुबल था।

4. “बाबा भारती ने निकट जाकर उसकी ओर ऐसी आँखों से देखा जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है और कहा, यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है।”
उत्तर:
डाकू खड्गसिंह बाबा भारती का घोड़ा धोखे से छीनकर ले जा रहा था तो बाबा ने उसे चिल्लाकर रोका। वह डाकू रुक गया। बाबा भारती उसके निकट जाकर ऐसे देख रहे थे जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है अर्थात् जैसे बकरा बेबस होता है उसी प्रकार बाबा डाकू के सामने बेबस खड़े थे क्योंकि उससे घोड़ा नहीं ले सकते थे।

5.”उनके पाँव अस्तबल की ओर मुड़े। परंतु फाटक पर पहुँचकर उनको अपनी भूल प्रतीत हुई।”
उत्तर:
सुलतान घोड़े को डाकू खड्गसिंह के ले जाने के बाद बाबा भारती दु:खी होकर सोये। रात्रि का चौथा प्रहर प्रारम्भ होते ही प्रतिदिन की तरह स्नान-ध्यान करके उनके कदम अस्तबल की ओर बढ़े। परन्तु फाटक पर पहुँचकर भूल का अहसास हुआ कि सुलतान तो है ही नहीं। इस पर उनका मन और पाँव घोर निराशा से भरकर रुक गए।

सोच-विचार के लिए-

कहानी को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित पंक्ति के विषय में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए। “दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।”
(क) किस-किस के आँसुओं का मेल हो गया था?
(ख) दोनों के आँसुओं में क्या अंतर था?
उत्तर:
(क) डाकू खड्गसिंह एवं बाबा भारती के आँसुओं का मेल हो गया था।
(ख) डाकू खड्गसिंह के गिरे हुए आँसू उसकी गलती के प्रायश्चित के थे एवं बाबा भारती के आँसू उनकी विश्वास की जीत एवं खुशी के थे।

दिनचर्या-

(क) कहानी पढ़कर आप बाबा भारती के जीवन के विषय में बहुत कुछ जान चुके हैं। अब आप कहानी के आधार पर बाबा भारती की दिनचर्या लिखिए। वे सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक क्या-क्या करते होंगे, लिखिए। इस काम में आप थोड़ा-बहुत अपनी कल्पना का सहारा भी ले सकते हैं।
उत्तर:
बाबा भारती गाँव से बाहर एक छोटे से मन्दिर में रहते थे और भगवत भजन में लीन रहते थे। वे रात्रि के चौथे प्रहर अर्थात् चार बजे उठकर स्नान आदि कार्य करके अस्तबल में सुलतान घोड़े के खरहरा करते थे। वे खुद ही उसे दाना खिलाते थे और पानी पिलाते थे। उसके बाद भोजनादि क्रिया करते और विश्राम करके भगवत भजन करते थे। सायंकाल के समय सुलतान घोड़े पर सवार होकर आठ-दस मील चक्कर लगाते थे। तत्पश्चात रात्रि में भगवत भजन संध्या कर शयन करते थे।

(ख) अब आप अपनी दिनचर्या भी लिखिए।
उत्तर:
विद्यार्थी अपनी-अपनी दिनचर्या स्वयं लिखें।

मुहावरे कहानी से-

(क) कहानी से चुनकर कुछ मुहावरे नीचे दिए गए हैं- लट्टू होना, हृदय पर साँप लोटना, फूले न समाना, मुँह मोड़ लेना, मुख खिल जाना, न्योछावर कर देना। कहानी में इन्हें खोजकर इनका प्रयोग समझिए।
(ख) अब इनका प्रयोग करते हुए अपने मन से नए वाक्य बनाइए।
उत्तर:
1. लठ्ठे होना – मोहित होना आजकल हर कोई क्रिकेटरों पर लट्टू रहता है।
2. हृदय पर सांप लोटना – ईर्ष्या होना – गुप्ताजी की नई गाड़ी देखकर उनके पड़ोसियों के हृदय पर सांप लोटने लगे।
3. फूले न समाना- बहुत प्रसन्न होना- बेटी के डॉक्टर बन जाने से पिताजी फूले न समा पाए।
4. मुँह मोड़ लेना – तिरस्कार करना जो व्यक्ति जरूरत के समय मुँह मोड़ ले वह सच्चा मित्र नहीं हो सकता।
5. मुख खिल जाना – खुश होना-अपनों को देखकर सबका मुख खिल जाता है।
6. न्योछावर कर देना- अर्पण करना – सच्चे देशभक्त मातृभूमि पर अपने प्राण न्योछावर कर देते हैं।

कैसे-कैसे पात्र-

इस कहानी में तीन मुख्य पात्र हैं – बाबा भारती, डाकू खड्गसिंह और सुलतान घोड़ा। इनके गुणों को बताने वाले शब्दों से दिए गए शब्द चित्रों को पूरा कीजिए-
RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 4 Question Answer हार की जीत 1
उत्तर:
RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 4 Question Answer हार की जीत 2
साधु भगत दयालु विश्वासी भारता ‘जीवदया ‘पशुप्रिय प्रसिद्ध दिव्यांग बाहुबली ईर्ष्यालु चिन्तित विचित्र सुंदर बोका धोखेबाज स्वामीभक्त खूबसूरत
आपने जो शब्द लिखे हैं, वे किसी की विशेषता, गुण और प्रकृति के बारे में बताने के लिए उपयोग में लाए जाते हैं। ऐसे शब्दों को विशेषण कहते हैं।

Class 6 हार की जीत Question Answer

बहुविकल्पात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
‘हार की जीत’ पाठ गद्य साहित्य की कौनसी विधा में लिखा गया है?
(अ) संस्मरण
(ब) निबन्ध
(स) कहानी
(द) नाटक
उत्तर:
(स) कहानी

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 4 Question Answer हार की जीत

प्रश्न 2.
‘हार की जीत’ पाठ का प्रधान पात्र कौन है?
(अ) बाबा भारती
(ब) सुलतान घोड़ा
(स) डाकू खड्गसिंह
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(अ) बाबा भारती

प्रश्न 3.
बाबा भारती को नगर के जीवन से क्या थी?
(अ) सहानुभूति
(ब) भ्रान्ति
(स) घृणा
(द) द्वेषता
उत्तर:
(स) घृणा

प्रश्न 4.
बाबा भारती को कौनसी भ्रान्ति सी हो गई थी?
(अ) मैं गाँव के बिना नहीं रह सकता।
(ब) खड्गसिंह घोड़े को चुरा लेगा।
(स) मैं सुलतान के बिना नहीं रह सकता।
(द) भजन भाव कैसे हो सकेगा।
उत्तर:
(स) मैं सुलतान के बिना नहीं रह सकता।

प्रश्न 5.
बाबा भारती के पास खड्गसिंह क्यों आया था?
(अ) डाका डालने
(ब) चोरी करने
(स) सुलतान को देखने
(द) उनकी कुशलक्षेम पूछने
उत्तर:
(स) सुलतान को देखने

प्रश्न 6.
बाबा भारती सुलतान घोड़े को कहाँ रखते थे?
(अ) अस्तबल में
(ब) घर में
(स) झोपड़ी में
(द) आश्रम में
उत्तर:
(अ) अस्तबल में

प्रश्न 7.
घोड़े की चाल को देखकर खड्गसिंह के हृदय का क्या हाल हुआ?
(अ) हृदय में आश्चर्य हुआ
(ब) हृदय में हलचल मच गई
(स) हृदय पर साँप लोट गया
(द) हृदय प्रसन्न हो गया
उत्तर:
(स) हृदय पर साँप लोट गया

प्रश्न 8.
‘सहसा एक ओर से आवाज आई’ यह आवाज किसकी थी?
(अ) डाकू खड्गसिंह की
(ब) बाबा भारती की
(स) सुलतान घोड़े की
(द) मुसाफिर की
उत्तर:
(अ) डाकू खड्गसिंह की

प्रश्न 9.
वृक्ष की छाया में पड़ा कौन कराह रहा था?
(अ) वृद्ध
(ब) अपाहिज
(स) रुग्ण
(द) अनाथ
उत्तर:
(ब) अपाहिज

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 4 Question Answer हार की जीत

प्रश्न 10.
सुलतान घोड़े के लौटाने पर डाकू की आँखों में कैसे आँसू थे?
(अ) दुःख के आँसू
(ब) खुशी के आँसू
(स) पश्चाताप के आँसू
(द) घृणा के आँसू
उत्तर:
(स) पश्चाताप के आँसू

रिक्त स्थानों की पूर्ति –

प्रश्न 11.
रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित शब्द से कीजिए-
(i) बाबा भारती उसे …………………… कह कर पुकारते। (घोड़ा/सुलतान)
उत्तर:
सुलतान

(ii) ऐसे चलता है जैसे …………………… घटा देखकर नाच रहा हो। (मोर/कोयल)
उत्तर:
मोर

(iii) लोग खड्गसिंह का नाम सुनकर …………………… थे। (काँपते/दुखी)
उत्तर:
काँपते

(iv) घोड़ा …………………… से बातें करने लगा। (बादल / हवा)
उत्तर:
हवा

(v) सारी रात …………………… की रखवाली में कटने लगी। (घोड़े / अस्तबल)
उत्तर:
अस्तबल

(vi) वह …………………… डाकू खड्गसिंह था। (बेरहम / अपाहिज)
उत्तर:
अपाहिज

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 12.
‘हार की जीत’ कहानी के लेखक कौन हैं?
उत्तर:
‘हार की जीत’ कहानी के लेखक ‘सुदर्शन’ हैं।

प्रश्न 13.
बाबा भारती का घोड़े को देखकर आनन्द किसके समान बताया गया है?
उत्तर:
जैसे माँ को अपने बेटे और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर आनन्द आता है, उसी के समान बाबा भारती का आनन्द बताया गया है।

प्रश्न 14.
बाबा भारती के घोड़े की विशेषता बताइए।
उत्तर:
वह घोड़ा बड़ा सुन्दर और बलवान था । उसके जोड़ का घोड़ा सारे इलाके में न था।

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 4 Question Answer हार की जीत

प्रश्न 15.
सुलतान घोड़े के छिन जाने पर बाबा भारती के भाव कैसे हो गए?
उत्तर:
उनके मुख से भय, विस्मय और निराशा से मिली हुई चीख निकल गई। वे कुछ देर के लिए चुप से हो गए।

प्रश्न 16.
डाकू खड्गसिंह को कोई वस्तु पसन्द आने पर वह क्या समझता था?
उत्तर:
डाकू खड्गसिंह को कोई वस्तु पसन्द आने पर वह उस पर वह अपना अधिकार समझता था।

प्रश्न 17.
जाते-जाते खड्गसिंह ने बाबा भारती से क्या कहा?
उत्तर:
खड्गसिंह ने जाते-जाते बाबा भारती से कहा कि मैं यह घोड़ा आपके पास न रहने दूँगा।

प्रश्न 18.
खड्गसिंह कहाँ खड़ा होकर रोया था?
उत्तर:
डाकू खड्गसिंह अस्तबल के बाहर खड़ा होकर पश्चाताप करता हुआ रोया था।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 19.
घोड़े की हिनहिनाहट सुनकर बाबा भारती ने क्या किया?
उत्तर:
बाबा भारती आश्चर्य और प्रसन्नता से दौड़ते हुए अस्तबल में घुसे और अपने घोड़े के लिपटकर रोने लगे। वे बार-बार उसकी पीठ पर हाथ फेरते, बार-बार उसके मुँह पर थपकियाँ देते।

प्रश्न 20.
रात के अँधेरे में मन्दिर के आसपास कैसा वातावरण था?
उत्तर:
मन्दिर के आस-पास चारों ओर सन्नाटा था। आकाश में तारे टिमटिमा रहे थे। थोड़ी दूर पर गाँव के कुत्ते भौंक रहे थे। मन्दिर के अन्दर कोई शब्द सुनाई न देता था।

प्रश्न 21.
“बाबाजी, इसमें आपको क्या डर है?” डाकू के पूछने पर बाबा भारती ने क्या जवाब दिया?
उत्तर:
डाकू के पूछने पर बाबा भारती ने उत्तर दिया, “लोगों को यदि इस घटना का पता चला तो वे किसी गरीब पर विश्वास नहीं करेंगे। दुनिया से विश्वास उठ जाएगा।”

प्रश्न 22.
सुलतान की सवारी करके बाबा भारती कैसा महसूस करते थे?
उत्तर:
संध्या के समय बाबा भारती सुलतान की पीठ पर सवार होकर घूमने जाते थे। उस समय उनकी आँखों में चमक रहती थी और मुख पर प्रसन्नता। वे कभी सुलतान के शरीर को देखते, तो कभी उसके रंग को और मन में फूले न समाते थे।

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 4 Question Answer हार की जीत

प्रश्न 23.
बाबा भारती सुलतान घोड़े का पालन पोषण कैसे करते एवं उसके लिए क्या-क्या छोड़ दिया था?
उत्तर:
बाबा भारती सुलतान घोड़े को अपने हाथ से खरहरा करते, खुद दाना खिलाते और उसकी सम्पूर्ण देखभाल करके प्रसन्न होते। उसके लिए उन्होंने रुपया, माल, असबाब (आवश्यक सामग्री), जमीन आदि अपना सब कुछ छोड़ दिया था।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 24.
बाबा भारती ने खड्गसिंह से सुलतान घोड़े की सुरक्षा कैसे की? बताइए।
उत्तर:
डाकू खड्गसिंह सुलतान घोड़े के सौन्दर्य को देखकर अधीर हो गया। उसने सोचा कि यह घोड़ा तो मेरे पास होना चाहिए। उसने बाबा भारती से कहा कि बाबाजी यह घोड़ा आपके पास नहीं रहने दूंगा। यह सुनते ही बाबा भारती डर गए। उन्हें रात को नींद न आती । सारी रात अस्तबल की रखवाली में कटने लगी। प्रतिक्षण खड्गसिंह का भय लगा रहता, परन्तु कई मास बीत गए और वह न आया। इस प्रकार बाबा भारती ने घोड़े की सुरक्षा की।

प्रश्न 25.
डाकू खड्गसिंह ने सुलतान घोड़े का कैसे अपहरण किया? बताइए।
उत्तर:
एक दिन बाबा भारती सायंकाल सुलतान घोड़े की घुड़सवारी कर रहे थे। डाकू खड्गसिंह कंगले दिव्यांग का रूप धारण करके एक वृक्ष के पास कराहता हुआ बोला, ” बाबा इस कंगले की बात सुनते जाना। मैं दुखियारा हूँ। मुझ पर दया करो। मुझे ‘रामावाला’ तक छोड़ दो परमात्मा आपका भला करेगा।” बाबा को करुणा आई। वे उसे घोड़े पर बैठाकर खुद पैदल चलने लगे। उन्हें अचानक झटका सा लगा। वह दिव्यांग (खड्गसिंह) घोड़े को तेज गति से दौड़ाये ले जा रहा था।

पठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नोत्तर-

निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिए।

(1)
माँ को अपने बेटे और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर जो आनंद आता है, वही आनंद बाबा भारती को अपना घोड़ा देखकर आता था। भगवत भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता। वह घोड़ा बड़ा सुंदर था, बड़ा बलवान उसके जोड़ का घोड़ा सारे इलाके में न था। बाबा भारती उसे सुलतान कहकर पुकारते, अपने हाथ से खरहरा करते, खुद दाना खिलाते और देख-देखकर प्रसन्न होते थे। उन्होंने रुपया, माल, असबाब, जमीन आदि अपना सब कुछ छोड़ दिया था, यहाँ तक कि उन्हें नगर के जीवन से भी घृणा थी। अब गांव से बाहर एक छोटे से मंदिर में रहते और भगवान का भजन करते थे। “मैं सुलतान के बिना नहीं रह सकूँगा”, उन्हें ऐसी भ्रांति सी हो गई थी। वे उसकी चाल पर लट्टू थे। कहते, “ऐसे चलता है जैसे मोर घटा को देखकर नाच रहा हो।” जब तक संध्या समय सुलतान पर चढ़कर आठ-दस मील का चक्कर न लगा लेते, उन्हें चैन न आता।

प्रश्न –
1. बाबा भारती भगवत भजन के अतिरिक्त समय कैसे व्यतीत करते थे?
2. घोड़े की विशेषता बताइए।
3. ‘खरहरा’ शब्द का अर्थ बताइए।
4. घोड़े की चाल की तुलना किससे की गई है?
उत्तर:
1. बाबा भारती भगवत भजन के अतिरिक्त समय सुलतान घोड़े की सेवा सुश्रुषा में अर्पण करते थे।
2. घोड़ा सुन्दर एवं बलवान था । उस क्षेत्र में उसके जोड़ का घोड़ा नहीं था।
3. खरहरा शब्द का अर्थ है कंघी करना, लोहे की कई दंतपंक्तियों वाली चौकोर कंघी जिससे घोड़े के बदन की गर्द साफ की जाती है।
4. घोड़ा ऐसे चलता है जैसे मोर घटा को देखकर नाच रहा हो।

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(2)
बाबा भारती और खड्गसिंह दोनों अस्तबल में पहुँचे। बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से, खड्गसिंह ने घोड़ा देखा आश्चर्य से उसने सैकड़ों घोड़े देखे थे, परंतु ऐसा का घोड़ा उसकी आँखों से कभी न गुजरा था। सोचने लगा, “भाग्य की बात है। ऐसा घोड़ा खड्गसिंह के पास होना चाहिए था। इस साधु को ऐसी चीजों से क्या लाभ?” कुछ देर तक आश्चर्य से चुपचाप खड़ा रहा। इसके पश्चात उसके हृदय में हलचल होने लगी। बालकों की-सी अधीरता से बोला, “परंतु बाबाजी, इसकी चाल न देखी तो क्या?”
प्रश्न-
1. खड्गसिंह ने घोड़ा किस दृष्टिकोण से देखा?
2. घोड़े को देखकर खड्गसिंह क्या सोचने लगा?
3. दोनों घोड़ा देखने कहाँ गए?
4. बालकों की-सी अधीरता से कौन बोला?
उत्तर:
1. खड्गसिंह ने घोड़ा आश्चर्य से देखा।
2. खड्गसिंह सोचने लगा कि भाग्य की बात है ऐसा घोड़ा मेरे पास होना चाहिए था।
3. दोनों घोड़ा देखने अस्तबल में गए।
4. बालकों की – सी अधीरता से डाकू खड्गसिंह बोला।

(3)
बाबा भारती ने घोड़े से उतरकर अपाहिज को घोड़े पर सवार किया और स्वयं उसकी लगाम पकड़कर धीरे- धीरे चलने लगे। सहसा उन्हें एक झटका सा लगा और लगाम हाथ से छूट गई। उनके आश्चर्य का ठिकाना न रहा, जब उन्होंने देखा कि अपाहिज घोड़े की पीठ पर तनकर बैठा है और घोड़े को दौड़ाए लिए जा रहा है। उनके मुख से भय, विस्मय और निराशा से मिली हुई चीख निकल गई। वह अपाहिज डाकू खड्गसिंह था। बाबा भारती कुछ देर तक चुप रहे और कुछ समय पश्चात कुछ निश्चय करके पूरे बल से चिल्लाकर बोले, “जरा ठहर जाओ।”
प्रश्न –
1. बाबा भारती ने दिव्यांग को किस पर सवार किया?
2. बाबा भारती को आश्चर्य क्यों हुआ?
3. दिव्यांग कौन था?
4. बाबा भारती चिल्लाकर क्या बोले?
उत्तर:
1. बाबा भारती ने दिव्यांग को अपने सुलतान घोड़े पर सवार किया।
2. दिव्यांग घोड़े की पीठ पर तनकर बैठा है और उसे दौड़ाए लिए जा रहा है।
3. दिव्यांग डाकू खड्गसिंह था।
4. बाबा भारती ने चिल्लाकर कहा- “जरा ठहर जाओ।”

(4)
रात्रि का तीसरा पहर बीत चुका था। चौथा पहर आरंभ होते ही बाबा भारती ने अपनी कुटिया से बाहर निकल ठंडे जल से स्नान किया। उसके पश्चात इस प्रकार जैसे कोई स्वप्न में चल रहा हो, उनके पाँव अस्तबल की ओर बढ़े। परंतु फाटक पर पहुंचकर उनको अपनी भूल प्रतीत हुई। साथ ही घोर निराशा ने पाँव को मन-मन भर का भारी बना दिया। वे वहीं रुक गए। घोड़े ने अपने स्वामी के पाँवों की चाप को पहचान लिया और जोर से हिनहिनाया। अब बाबा भारती आश्चर्य और प्रसन्नता से दौड़ते हुए अंदर घुसे और अपने घोड़े के गले से लिपटकर इस प्रकार रोने लगे मानो कोई पिता बहुत दिन से बिछड़े पुत्र से मिल रहा हो। बार-बार उसकी पीठ पर हाथ फेरते, बार-बार उसके मुँह पर थपकियाँ देते। और कहते थे, “अब कोई गरीबों की सहायता से मुँह न मोड़ेगा।”
प्रश्न-
1. चौथा पहर आरंभ होते ही बाबा भारती ने क्या किया?
2. बाबा भारती को अपनी भूल कहाँ प्रतीत हुई?
3. घोड़ा किसकी पदचाप पहचान हिनहिनाया?
4. घोड़े को पाकर बाबा भारती ने क्या कहा?
उत्तर:
1. बाबा भारती ने अपनी कुटिया से बाहर निकल ठंडे जल से स्नान किया।
2. बाबा भारती को अपनी भूल अस्तबल के फाटक पर पहुँचकर प्रतीत हुई।
3. घोड़ा अपने स्वामी बाबा भारती की पदचाप पहचान हिनहिनाया।
4. बाबा भारती ने कहा, “अब कोई गरीबों की सहायता से मुँह न मोड़ेगा।”

हार की जीत Class 6 Summary

कठिन शब्दार्थ एवं पाठ का सार

कठिन – शब्दार्थ – लहलहाते हरे भरे अर्पण देना या भेंट करना। इलाके = क्षेत्र। खरहरा = कंघी करना, लोहे की कई दंतपंक्तियों वाली चौकोर कंघी जिससे घोड़े के बदन की गर्द साफ की जाती है। असबाब आवश्यक सामग्री, वस्तु, मुसाफिर का सामान। घृणा = नफरत। लट्टू = मोहित, मुग्ध। अधीर = धैर्य रहित, उतावला, आकुल, दृढ़ता रहित छवि सौन्दर्य। बेरहमी निर्दयी। अस्तबल = अश्वशाला, तबेला। कंगले गरीब, निर्धन। अपाहिज = दिव्यांग लगाम बाग, रस्सी। प्रयोजन = उद्देश्य।

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 4 Question Answer हार की जीत

पाठ का सार – बाबा भारती के पास अति सुन्दर एवं साहसी घोड़ा था। जिसका नाम सुलतान था। उसके साथ बाबा भारती गाँव के बाहर छोटे से मन्दिर में रहते थे। उसी क्षेत्र में खड्गसिंह नाम का डाकू रहता था। वह भी घोड़े को देखकर मुग्ध हो गया। अतः उसने बाबा भारती से कहा कि यह घोड़ा आपके पास रहने नहीं दूँगा। डाकू ने एक दिन दिव्यांग निर्धन का रूप धारण करके बाबा भारती की मदद माँगी और मौका पाकर सुलतान को लेकर भागने लगा। बाबा भारती ने उसे रोककर कहा घोड़ा तो ले जाओ किन्तु प्रार्थना करता हूँ कि इस घटना के बारे में किसी से मत कहना वरना गरीब पर कोई विश्वास नहीं करेगा। वह अपने स्थान पर जाकर सोचने लगा। उसे आत्मग्लानि हुई। उसने आधी रात में ही सुलतान को वापस बाबा भारती के अस्तबल में बाँधकर प्रायश्चित किया। इस पर बाबा भारत को विश्वास हुआ कि गरीबों से अब कोई मुँह नहीं मोड़ेगा।

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