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RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 5 Question Answer रहीम के दोहे

February 25, 2026 by Fazal Leave a Comment

Explore these RBSE Solutions Class 6 Hindi Malhar Chapter 5 रहीम के दोहे Question Answer to test your grasp of the chapter content.

रहीम के दोहे Class 6 Question Answer

रहीम के दोहे Question Answer Class 6

Class 6 Hindi Chapter 5 रहीम के दोहे Question Answer

मेरी समझ से-

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही (सटीक) उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए –
(1) “रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल। आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल।” दोहे का भाव है-
(अ) सोच-समझकर बोलना चाहिए।
(ब) मधुर वाणी में बोलना चाहिए।
(स) धीरे-धीरे बोलना चाहिए।
(द) सदा सच बोलना चाहिए।
उत्तर:
(अ) सोच-समझकर बोलना चाहिए।

(2) “रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।” इस दोहे का भाव क्या है?
(अ) तलवार सुई से बड़ी होती है।
(ब) सुई का काम तलवार नहीं कर सकती।
(स) तलवार का महत्त्व सुई से ज्यादा है।
(द) हर छोटी-बड़ी चीज का अपना महत्त्व होता है।
उत्तर:
(द) हर छोटी-बड़ी चीज का अपना महत्त्व होता है।

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 5 Question Answer रहीम के दोहे

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने यही उत्तर क्यों चुने?
उत्तर:
(1) रहीम जी ने जीभ को बावली कहा है। यह उल्टा सीधा कुछ भी बोल सकती है जिससे सिर पर जूते पड़ सकते हैं। अतः सोच-समझकर बोलना चाहिए।
(2) जहां सुई का काम होता है वहाँ सुई ही कार्य कर सकती है तलवार नहीं और जहाँ तलवार का कार्य होता है। वहाँ तलवार ही कार्य करेगी सुई नहीं। इसलिए यही कहा जा सकता है कि हर छोटी-बड़ी वस्तु का अपना-अपना महत्त्व होता है।

मिलकर करें मिलान-

पाठ में से कुछ दोहे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और उनके भाव स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर सही भाव से मिलान कीजिए।
RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 5 Question Answer रहीम के दोहे 1
उत्तर:
RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 5 Question Answer रहीम के दोहे 2

पंक्तियों पर चर्चा –

नीचे दिए गए दोहों पर समूह में चर्चा कीजिए और उनके अर्थ या भावार्थ अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-
(क) “रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय।
हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय॥”
(ख) “रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल।
आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल॥”
उत्तर:
नोट – ‘क’ और ‘ख’ का भावार्थ विद्यार्थी पाठ की सप्रसंग व्याख्या / भावार्थ में देखें।

सोच-विचार के लिए –

दोहों को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-

1. ‘रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥”

(क) इस दोहे में ‘मिले’ के स्थान पर ‘जुड़े’ और ‘छिटकाय’ के स्थान पर ‘चटकाय’ शब्द का प्रयोग भी लोक में प्रचलित है। जैसे-
“रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय।”
इसी प्रकार पहले दोहे में ‘डारि’ के स्थान पर ‘डार’, ‘तलवार’ के स्थान पर ‘तरवार’ और चौथे दोहे में ‘मानुष’ के स्थान पर ‘मानस’ का उपयोग भी प्रचलित है। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर:
क्षेत्रीयता के कारण भाषा में परिवर्तन आ जाता है। और वे लोक प्रचलित हो जाते हैं। उक्त शब्द अवधी एवं ब्रजभाषा में प्रचलित शब्द हैं।

(ख) इस दोहे में प्रेम के उदाहरण में धागे का प्रयोग ही क्यों किया गया है? क्या आप धागे के स्थान पर कोई अन्य उदाहरण सुझा सकते हैं? अपने सुझाव का कारण भी बताइए।
उत्तर:
‘धागा’ शब्द का प्रयोग रिश्ता या सम्बन्ध के अर्थ में किया गया है। जिसके स्थान पर गागरी (मटकी) या फूल / डाली का भी प्रयोग किया जा सकता है। ये भी टूटने के बाद जुड़ नहीं सकते हैं और यदि जोड़ भी दिया जाए तो उसमें बनावटीपन आ ही जाता है। जैसे- धागे में गाँठ पड़ जाती है।

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 5 Question Answer रहीम के दोहे

2. “तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिँ न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपत्ति सँचहि सुजान॥”
इस दोहे में प्रकृति के माध्यम से मनुष्य के किस मानवीय गुण की बात की गई है? प्रकृति से हम और क्या-क्या सीख सकते हैं?
उत्तर:
इस दोहे में प्रकृति के माध्यम से मनुष्य के परोपकार मानवीय गुण की बात की गई है। प्रकृति के तत्त्वों से ही मानव शरीर का निर्माण हुआ है। इसलिए प्रकृति हमारे लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। प्रकृति से हम परोपकार के अलावा उदारता, सर्वसमभाव, विनयशीलता तथा समर्पण भाव आदि मानवीय गुणों को सीख सकते हैं।

शब्दों की बात-

हमने शब्दों के नए-नए रूप जाने और समझे। अब कुछ करके देखें-
• शब्द-संपदा-
कविता में आए कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन शब्दों को आपकी मातृभाषा में क्या कहते हैं? लिखिए।
उत्तर:

कविता में आए शब्द मातृभाषा में समानार्थक शब्द
तरुवर वृक्ष या पेड़
बिपति कठिनाई, दुख, परेशानी
छिटकाय झटका देना, धोखा देना, तोड़ना
सुजान सज्जन, समझदार
सरवर सरोवर, तालाब
साँचे सच्चा, अच्छा
कपाल सिर, खोपड़ी

• शब्द एक अर्थ अनेक-

“रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥”
इस दोहे में ‘पानी’ शब्द के तीन अर्थ हैं-सम्मान, जल, चमक।

इसी प्रकार कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। आप भी इन शब्दों के तीन-तीन अर्थ लिखिए। आप इस कार्य में शब्दकोश, इंटरनेट, शिक्षक या अभिभावकों की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर:
कल – मशीन, चैन, आने वाला दिन
पत्र – पत्ता, चिट्ठी, पृष्ठ
कर – किरण, हाथ, सूँड
फल – लाभ, नतीजा, तलवार

Class 6 रहीम के दोहे Question Answer

बहुविकल्पात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
‘बड़ेन’ शब्द का अर्थ है-
(अ) फुर्तीला
(ब) सामर्थ्यशाली
(स) सुई
(द) तलवार
उत्तर:
(ब) सामर्थ्यशाली

प्रश्न 2.
सज्जन व्यक्ति की विशेषता है-
(अ) वे परोपकारी होते हैं
(ब) वे स्वार्थी होते हैं
(स) वे शोषक होते हैं
(द) वे कार्यरहित होते हैं
उत्तर:
(अ) वे परोपकारी होते हैं

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 5 Question Answer रहीम के दोहे

प्रश्न 3.
संपत्ति संचहि सुजान। रेखांकित पद का अर्थ है-
(अ) समझदार
(ब) सज्जन
(स) महापुरुष
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 4.
प्रेम का महत्त्व किसके माध्यम से समझाया गया है?
(अ) सुई
(ब) धागा
(स) तलवार
(द) मोती
उत्तर:
(ब) धागा

प्रश्न 5.
‘पानी’ शब्द किस अर्थ में प्रयुक्त हुआ है?
(अ) चमक
(ब) इज्जत
(स) जल
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 6.
रहिमन बिपदाहू भली। रेखांकित पद का अर्थ है-
(अ) विपत्ति
(ब) विवशता
(स) पराधीनता
(द) पराजय
उत्तर:
(अ) विपत्ति

प्रश्न 7.
रहीम ने जिह्वा को कैसी बताया है?
(अ) चंचल
(ब) मधुर
(स) मीठी
(द) बावली
उत्तर:
(द) बावली

प्रश्न 8.
जिह्वा बोलकर कहाँ छिप जाती है?
(अ) मुख में
(ब) स्वर्ग में
(स) पाताल में
(द) उपर्युक्त सभी में
उत्तर:
(अ) मुख में

प्रश्न 9.
संपत्ति होने पर लोगों का कैसा व्यवहार होता है?
(अ) अपने भी पराये हो जाते हैं।
(ब) पराये भी अपने हो जाते हैं।
(स) सभी स्वार्थी हो जाते हैं
(द) सभी दुश्मन हो जाते हैं।
उत्तर:
(ब) पराये भी अपने हो जाते हैं।

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 5 Question Answer रहीम के दोहे

प्रश्न 10.
सच्चे मित्र को कसौटी पर कब कसा जाता है?
(अ) सम्पत्ति के समय
(ब) विपत्ति के समय
(स) खुशी के समय
(द) स्वार्थ के समय
उत्तर:
(ब) विपत्ति के समय

रिक्त स्थानों की पूर्ति-

प्रश्न 11.
रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित शब्द से कीजिए-
(i) रहिमन देखि बड़ेन को, ………………………… न दीजिए डारि। (लघु/सुई)
उत्तर:
लघु

(ii) कहि रहीम पर काज हित, ………………………… संचहि सुजान। (बिपति/ संपति)
उत्तर:
संपति

(iii) रहिमन ………………………… प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। (धागा / फल)
उत्तर:
धागा

(iv) रहिमन ………………………… राखिये। (प्रेम/पानी)
उत्तर:
पानी

(v) कहि गइ ………………………… पताल। (सरग/भीतर)
उत्तर:
सरग

(vi) बिपति ………………………… जे कसे। ( संपति/ कसौटी)
उत्तर:
कसौटी

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 12.
कवि ने सुई व तलवार के द्वारा क्या समझाने का प्रयत्न किया है?
उत्तर:
हर छोटी-बड़ी चीज का अपने-अपने स्थान पर महत्त्व होता है।

प्रश्न 13.
महापुरुष सम्पत्ति किसके लिए जोड़ते हैं?
उत्तर:
महापुरुष सम्पत्ति परोपकार के लिए जोड़ते हैं।

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 5 Question Answer रहीम के दोहे

प्रश्न 14.
किसके टूटने पर पुनः मिलना अति कठिन है?
उत्तर:
प्रेम के बंधन टूटने पर पुनः मिलना अति कठिन है।

प्रश्न 15.
जीभ से उल्टी-सीधी बातें करने पर क्या परिणाम निकलते हैं?
उत्तर:
जीभ से उल्टी-सीधी बातें करने पर सिर पर जूते पड़ते हैं।

प्रश्न 16.
विपत्तिकाल में किसकी पहचान होती है?
उत्तर:
विपत्तिकाल में सच्चे मित्र की पहचान होती है।

प्रश्न 17.
किसके बिना मानव जीवन व्यर्थ है?
उत्तर:
आत्मसम्मान के बिना मानव जीवन व्यर्थ है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 18.
रहीमदास ने पानी (सम्मान) के माध्यम से क्या समझाया है? बताइए।
उत्तर:
रहीमदास जी ने मनुष्य को कहा है कि अपने जीवन में आत्मसम्मान को सुरक्षित रखिए, इसके बिना जीवन व्यर्थ है। जैसे— मोती की चमक चले जाने पर उसका महत्त्व नहीं होता, चूना या आटा कितना भी हो यदि जल नहीं है तो उसका कोई प्रयोजन नहीं हो सकता।

प्रश्न 19.
विपत्ति (कठिनाई) पर रहीमदास के विचारों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
रहीमदास जी कहते हैं कि यदि थोड़े समय के लिए विपत्ति या कष्ट आते हैं तो वे अच्छे हैं। इस संसार में सुख-दुख सबके जीवन में आते हैं। सम्पूर्ण संसार जानता है कि सुख-दुःख के मिश्रण से ही जीवन की पूर्णता होती है।

प्रश्न 20.
सज्जन व्यक्ति की विशेषता बताइए।
उत्तर:
सज्जन व्यक्ति धन-सम्पत्ति स्वयं के लिए न जोड़कर परोपकार के लिए जोड़ते हैं। जैसे— पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते एवं तालाब अपना जल स्वयं नहीं पीते। इसलिए सज्जन या महापुरुष बनने के लिए स्वार्थों का परित्याग करके परोपकार करना चाहिए।

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 5 Question Answer रहीम के दोहे

प्रश्न 21.
सच्चे मित्र की पहचान कैसे होती है? समझाइए।
उत्तर:
रहीमदास जी कहते हैं कि सम्पत्ति या सुख के समय हमारा कोई भी मित्र बन जायेगा किन्तु जो हमारे दुख या विपत्ति के समय में दुख-दर्द दूर करने में साथ देता है वही हमारा सच्चा मित्र होता है।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 22.
रहीम के प्रेम के सम्बन्ध में विचारों को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
रहीमदास जी कहते हैं कि अपने प्रेम के नाते- रिश्ते को धागे की तरह स्वार्थ या धोखे से मत तोड़िये । धागा एक बार टूट जाता है तो जोड़ना मुश्किल होता है। यदि हम किसी प्रकार प्रयत्न करके जोड़ भी देते हैं तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। उसी प्रकार हमारे रिश्ते टूटने पर दिलों में दूरियाँ बढ़ाकर खटास पैदा कर देते हैं। जो प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देता है किन्तु परोक्ष रूप से महसूस किया जा सकता है।

प्रश्न 23.
मानव की जीभ के महत्त्व को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
रहीमदास जी कहते हैं कि यह जीभ बावली अर्थात् नासमझ है जो अपने निजी स्वार्थों के कारण उल्टी-सीधी बातें करती रहती है। इसमें उसका तो कुछ नहीं बिगड़ता है। वह तो कहकर मुँह में छिप जाती है। उसका परिणाम खोपड़ी (सिर) को भुगतना पड़ता है। उसे यातनाएँ सहनी पड़ती है। इसी जीभ के कारण हमारा अपमान और सम्मान होता है। इसलिए इस पर नियंत्रण रखते हुए सोच-समझकर बोलना चाहिए।

रहीम के दोहे Class 6 Summary

कठिन शब्दार्थ एवं सप्रसंग व्याख्या/ भावार्थ

1. रहिमन देखि ……………………………………………… करे तलवारि॥
कठिन शब्दार्थ-बड़ेन = उच्च, सामर्थ्यशाली व्यक्ति या वस्तु। लघु = छोटा, निर्बल, फुर्तीला, कम, हल्का डारि = छोड़ना या परित्याग करना। कहा = क्या।

प्रसंग – प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ के अब्दुर्रहीम खानखाना द्वारा रचित दोहों से लिया गया है। इसमें कवि ने छोटे-बड़े व्यक्ति या वस्तु के महत्त्व का वर्णन किया है।

व्याख्या/ भावार्थ – रहीमदास जी कहते हैं कि हमें बड़े या सामर्थ्यवान व्यक्ति या वस्तु मिलने पर छोटे या निर्बल व्यक्ति या वस्तु को नहीं फेंकना या छोड़ना चाहिए क्योंकि जहाँ सुई का कार्य होगा वहाँ सुई ही काम आयेगी । वहाँ तलवार का कोई काम नहीं है। अत: उपयोगिता का महत्त्व है चाहे छोटा हो या बड़ा।

2. तरुवर फल नहिं ……………………………………………… संचहि सुजान॥
कठिन शब्दार्थ – तरुवर = वृक्ष, पेड़। सरवर = सरोवर, तालाब । पान = पानी, जल पर काज = परोपकार। सँचहि = एकत्र करना, जोड़ना। सुजान समझदार, सयाना, सज्जन।

प्रसंग – प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ के अब्दुर्रहीम खानखाना द्वारा रचित दोहों से लिया गया है। इसमें सज्जन या समझदार व्यक्ति के गुणों के बारे में बताया गया है।

व्याख्या/ भावार्थ – रहीमदास जी कहते हैं कि पेड़ या वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते। सरोवर या तालाब अपना जल स्वयं नहीं पीते अर्थात् वे परोपकार करते हैं। उसी प्रकार सज्जन या समझदार व्यक्ति सम्पत्ति या धन का संचय स्वयं के लिए नहीं करते हैं। वे संचित धन को परोपकार में लगाते हैं। अतः हमें परोपकार करना चाहिए।

3. रहिमन धागा प्रेम ……………………………………………… गाँठ परि जाय॥
कठिन – शब्दार्थ – धागा = बन्धन, सम्बन्ध, रिश्ता प्रेम आत्मीयता छिटकाय = झटका देकर, धोखा देकर। गाँठ = रुकावट या बाधा।

प्रसंग – प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ के अब्दुर्रहीम खानखाना द्वारा रचित दोहों से लिया गया है। इसमें कवि द्वारा सच्चे प्रेम के महत्त्व को समझाया गया है।

व्याख्या/ भावार्थ – रहीमदास जी कहते हैं कि प्रेम रूपी बन्धन या धागे को झटका देकर या धोखे से मत तोड़िये। यदि यह बन्धन रूपी धागा या रिश्ता एक बार टूट गया तो जुड़ नहीं सकता। यदि किसी प्रकार प्रेम रूपी धागे को जोड़ेंगे भी तो उसमें गाँठ पड़ जायेगी अर्थात् मन की खटास कभी दूर नहीं होगी। अतः रिश्तों को सहेजकर रखना चाहिए।

4. रहिमन पानी राखिये, ……………………………………………… मोती, मानुष, चून॥
कठिन शब्दार्थ- पानी = आत्मसम्मान, इज्जत, चमक, जल सून = बेकार, व्यर्थ। ऊबरै = उद्धार। चून = आटा या चूना।

प्रसंग – प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ के अब्दुर्रहीम खानखाना द्वारा रचित दोहों से लिया गया है। इसमें कवि द्वारा आत्मसम्मान की सुरक्षा के महत्त्व को अनेक उदाहरणों द्वारा समझाया गया है।

व्याख्या / भावार्थ – रहीमदास जी कहते हैं कि व्यक्ति को अपने आत्मसम्मान या स्वाभिमान की सुरक्षा करनी चाहिए। इसके बिना जीवन में सब कुछ व्यर्थ है। आत्मसम्मान के बिना व्यक्ति का कोई महत्त्व नही है। जैसे मोती का चमक के बिना, मनुष्य का इज्जत के बिना, आटा या चूने का जल के बिना कोई महत्त्व नहीं होता है।

5. रहिमन बिपदाहू भली, ……………………………………………… जानि परत सब कोय॥
कठिन शब्दार्थ – बिपदाहू विपत्ति या दुख भली अच्छी थोरे कम अनहित बुराई जगत = संसार। कोय = कोई।

प्रसंग – प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ के अब्दुर्रहीम खानखाना द्वारा रचित दोहों से लिया गया है। इसमें कवि ने भलाई – बुराई के बारे में बताया है।

व्याख्या / भावार्थ – रहीमदास जी कहते हैं कि यह आवश्यक नहीं कि जीवन में खुशी ही खुशी मिले। जीवन में कठिनाइयाँ या दुख भी अच्छे होते हैं यदि वे कुछ समय के लिए आयें। क्योंकि संसार के सभी मनुष्य अपना भला-बुरा सब जानते हैं। जीवन में सुख-दुख समान होते हैं।

6. रहिमन जिह्वा बावरी ………………………………………………. जूती खात कपाल॥
कठिन शब्दार्थ – जिह्वा = जीभ बावरी = पागल या नासमझ। सरग = स्वर्ग पताल = पाताल या नरक खात = पड़ते हैं। कपाल = सिर या खोपड़ी।

प्रसंग – प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ के अब्दुर्रहीम खानखाना द्वारा रचित दोहों से लिया गया है। इसमें कवि द्वारा जीभ को बावली या नासमझ कहा गया है। अतः इस पर नियन्त्रण रखना चाहिए।

व्याख्या/ भावार्थ-रहीमदास जी कहते हैं कि हमारी यह जीभ बावली है जो उल्टी-सीधी स्वर्ग से पाताल तक की बातें कह जाती है। व्यर्थ की बातें करके यह स्वयं तो मुँह के अन्दर चली जाती है इसके बदले सिर पर या खोपड़ी पर जूते पड़ते हैं। अतः जीभ पर नियंण रखते हुए सोच-समझकर बोलना चाहिए।

RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 5 Question Answer रहीम के दोहे

7. कहि रहीम ………………………………………………. ते ही साँचे मीत॥
कठिन शब्दार्थ – संपति सुख के समय में सगे = नाते रिश्तेदार रीत रीति-रिवाज या तरीके। विपति दुख के समय कसौटी परख, जाँच, एक काला पत्थर जिस पर घिसकर सोना परखा जाता है। मीत. मित्र, दोस्त।

प्रसंग – प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ के अब्दुर्रहीम खानखाना द्वारा रचित दोहों से लिया गया है। इसमें कवि ने सच्चे मित्र की पहचान बताई है।

व्याख्या / भावार्थ – रहीमदास जी कहते हैं कि जब व्यक्ति के पास धन-सम्पत्ति या खुशी होती है तो लोग कई नाते- रिश्ते निकालकर सम्बन्धी या मित्र बन जाते हैं। किन्तु जो व्यक्ति विपत्तिकाल या कठिनाई के समय में साथ दे अर्थात् सहयोग करे वही सच्चा मित्र होता है। अर्थात् विपत्तिकाल में ही सम्पत्ति और सगे-सम्बन्धियों की परीक्षा होती है।

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