Practicing these RBSE Class 6 Sanskrit Solutions Deepakam Chapter 1 वयं वर्णमालां पठामः Question Answer improves confidence in the subject.
Class 6 Sanskrit Chapter 1 Question Answer वयं वर्णमालां पठामः
कक्षा 6 संस्कृत पाठ 1 के प्रश्न उत्तर
Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 1 Question Answer
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
कस्य चित्रम्? वदन्तु लिखन्तु च। (किसका चित्र है? बोलिए और लिखिए।)

उत्तर:


प्रश्न 2.
चित्रं पश्यन्तु। पट्टिकातः समुचितान् वर्णसमूहान् चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु। (चित्र देखिए। पट्टिका से समुचित वर्ण – समूह को चुनकर रिक्त स्थान पूर्ण कीजिए।)

उत्तर:

प्रश्न 3.
प्रथम-वर्णेन पदं वदन्तु लिखन्तु च। (प्रथम वर्ण के द्वारा पद बोलिए और लिखिए।)

उत्तर:
| अ | अग्निः | अस्त्रम् |
| क | कविः | कमला |
| च | चत्वार: | चषक: |
| प | पवित्रः | पत्रम् |
| र | रसना | रक्षा |
| न | नदी | नौका |
| म | मन्त्र: | ममता |
| ह | हरिः | हस्तौ |
| त | तनुजः | तमः |
| व | वशिष्ठः | वक्रम् |
![]()
प्रश्न 4.
स्व-परिवारस्य सदस्यानां पूर्ण नामानि लिखन्तु। (अपने परिवार के सदस्यों के पूर्ण नाम लिखिए।)

उत्तर:
विद्यार्थी अपने-अपने परिवार के सदस्यों के पूर्ण नाम लिखें।
प्रश्न 5.
कक्षायाः शिक्षिकाणां शिक्षकाणां च पूर्ण- नामानि लिखन्तु। (कक्षा के शिक्षक शिक्षिकाओं के पूर्ण नाम लिखिए।)

उत्तर:
स्वयं कीजिये।
प्रश्न 6.
मित्राणां पूर्ण नामानि लिखन्तु। (मित्रों के पूर्ण नाम लिखिए।)

उत्तर:
स्वयं कीजिये।
| योग्यता – विस्तार | |
| वर्णों के उच्चारण-स्थान | |
| वर्ण | उच्चारण-स्थान |
| अ, आ, क, ख, ग, घ, ङ, ह, विसर्ग (:) | कण्ठ |
| इ, ई, च, छ, ज, झ, ञ, य, श | तालु |
| ऋ, ॠ, ट, ठ, ड, ढ, ण,र,ष | मूर्धा |
| लृ, त, थ, द, ध, न, ल, स | दन्त |
| उ, ऊ, प, फ, ब, भ, म (उपध्मानीय) | ओष्ठ |
| ङ, ञ, ण,न,म | अपने स्थान के साथ ही ‘नासिका भी |
| ए, ऐ | कण्ठ-तालु |
| ओ, औ | कण्ठ-ओष्ठ |
| व | दन्त-ओष्ठ |
| अनुस्वार-अं | नासिका |
उच्चारण-स्थानानां पाणिनीय-शिक्षा-सूत्राणि
| सूत्राणि | भावः |
| अकुहविसर्जनीयाः कण्ठ्याः। | अ आ, क ख ग घ ङ ह विसर्ग : अ:- एषां वर्णानाम् उच्चारणं कण्ठ-स्थाने भवति। |
| इचुयशास् तालव्याः। | इई, च छ ज झ ञ, य श- एषां वर्णानाम् उच्चारणं तालु- स्थाने भवति। |
| ऋटुरषा मूर्धन्याः। | ऋ ॠ, ट ठ ड ढ ण, र, ष – एषां वर्णानाम् उच्चारणं मूर्ध-स्थाने भवति। |
| ऌतुलसा दन्त्याः। | ऌ त थ द ध न ल स एषां वर्णानाम् उच्चारणं दन्त-स्थाने भवति। |
| उपूपध्मानीया ओष्ठ्याः। | उ ऊ, प फ ब भ म, [उपध्मानीयः*]-एषां वर्णानाम् उच्चारणम् ओष्ठ-स्थाने भवति। |
| ङञणनमा: स्वस्थान-नासिकास्थानाः। | ङ अ ण न म एषां वर्णानाम् उच्चारणम् उभयोः स्थानयो:, अर्थात् स्वस्थानेन सह नासिका – स्थाने अपि भवति। |
| ए ऐ कण्ठतालव्यौ। | ए ऐ अनयोः वर्णयोः उच्चारणम् उभयोः कण्ठ- तालु – स्थानयोः भवति। |
| ओ औ कण्ठोष्ट्यौ। | ओ औ अनयोः वर्णयोः उच्चारणम् उभयोः कण्ठ- ओष्ठ स्थानयोः भवति। |
| वकारो दन्त्योष्ट्यः। | व-वर्णस्य उच्चारणम् उभयोः दन्त – ओष्ठ स्थानयोः भवति। |
| अनुस्वारयमा नासिक्या:। | अनुस्वारः-अं, [यमाः *च]- वर्णानाम् उच्चारणं नासिका- स्थाने भवति। |
Class 6th Sanskrit Chapter 1 Question Answer
प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि विकल्पेभ्यः चित्वा लिखत-
(i) ‘श, ष, स, ह’ इति वर्णाः के कथ्यन्ते?
(अ) अयोगवाहाः
(ब) अन्तःस्थाः
(स) ऊष्माः
(द) वर्ग्याः
उत्तर:
(स) ऊष्माः
![]()
(ii) ‘क्ष’ व्यञ्जनं कयोः व्यञ्जनयोः मेलनेन भवति?
(अ) क्+ष्
(ब) स्+च्
(स) क्+छ्
(द) क्+प्
उत्तर:
(अ) क्+ष्
(iii) ‘ज्+ञ्+अ’ इति वर्णानां मेलनेन किं संयुक्त व्यञ्जनं भवति?
(अ) द्य
(ब) त्र
(स) य
(द) ज्ञ
उत्तर:
(द) ज्ञ
(iv) ‘ग’ वर्णस्य उच्चारणस्थानं किम् अस्ति?
(अ) तालुः
(ब) कण्ठ
(स) दन्ताः
(द) ओष्ठ:
उत्तर:
(ब) कण्ठ
(v) ‘व’ – वर्णस्य उच्चारण-स्थानं किम्?
(अ) दन्तोष्ठम्
(ब) कण्ठोष्ठम्
(स) कण्ठ तालुः
(द) मूर्धा
उत्तर:
(अ) दन्तोष्ठम्
(vi) अनुस्वारस्य उच्चारण-स्थानं किम्?
(अ) दन्ताः
(ब) तालुः
(स) कण्ठः
(द) नासिका
उत्तर:
(द) नासिका
(vii) ‘व्+इ+द्+य्+आ’ इति वर्णानां संयोगेन कः शब्दः भवति?
(अ) विदा
(ब) विनय
(स) विद्या
(द) विधा
उत्तर:
(स) विद्या
(viii) ‘त्र’ इति वर्णस्य विच्छेदः किं भवति?
(अ) र्+त्+अ
(ब) त्+र्+अ
(स) र्+च्+अ
(द) त्+ऋ+र्
उत्तर:
(ब) त्+र्+अ
![]()
(ix) कस्य स्वर-वर्णस्य दीर्घः न भवति?
(अ) उ-वर्णस्य
(ब) ॠ वर्णस्य
(स) ‘ए’ वर्णस्य
(द) लृ-वर्णस्य
उत्तर:
(द) लृ-वर्णस्य
(x) ‘अ+उ’ इत्यनयोः वर्णयोः कः स्वरः भवति?
(अ) ओ
(ब) ए
(स) ऐ
(द) औ
उत्तर:
(अ) ओ
प्रश्न 2.
कोष्ठकात् उचितं शब्दं / वर्णं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-
(i) क् + र् + ई + ड्+ आ = …………… (क्रीडा/क्रिडा)
उत्तर:
क्रीडा
(ii) पद्मम् = प्+अ+ …………… +म्+अ+म् (ध्/द्)
उत्तर:
द्
(iii) वर्ण: = व् + अ + …………… + ण् +अ+: (र/ऋ)
उत्तर:
र्
(iv) …………… = क् + ऋ+ष्+ण्+अ+: (कर्ण:/कृष्ण:)
उत्तर:
कृष्ण:
(v) …………… = द्+र्+अ+ष्+ट्+आ (द्रष्टा / दृष्टा)
उत्तर:
द्रष्टा
![]()
प्रश्न 3.
एकपदेन उत्तरत-
(i) केषाम् उच्चारणं स्वतन्त्ररूपेण भवति?
(ii) स्वरा: कति विद्याः सन्ति?
(iii) कस्य स्वरस्य दीर्घः न भवति?
(iv) व्यञ्जनानाम् उच्चारणे कस्य सहायता अवश्यं भवति?
(v) ‘अर्ध- स्वरा:’ इत्यपि के उच्यन्ते?
उत्तर:
(i) स्वराणाम्।
(ii) द्विविधाः।
(iii) ‘ऌ’ – स्वरस्य।
(iv) स्वरस्य।
(v) अन्तःस्थाः वर्णाः।
प्रश्न 4.
अधोलिखितानां शब्दानां वर्ण-वियोगः कुरुत-
गुरुः, एकैकः, बाह्यम्, प्रगतिः, ब्रह्म, सप्तर्षिः
उत्तर:
(i) गुरुः = ग्+उ+र्+उ+:
(ii) एकैक: = ए + क् +ए+क्+अ+:
(iii) बाह्यम् = ब्+आ+ह्+य्++अ+म्
(iv) प्रगति = प् + र् +अ+ग्+अ+त्+इ+:
(v) ब्रह्म – ब्+र्+अ+ह्+म्+अ
(vi) सप्तर्षिः = स् +अ+प्+त्+अ+र्+ष्+इ+:
![]()
प्रश्न 5.
अधोलिखितानां वर्णानां संयोगं कृत्वा शब्दनिर्माणं कुरुत-
(i) म्+अ+ञ्+ज्+उ+ल्+अ+: = …………..
(ii) श्+इ+क्+ष्+अ+क्+अ+: = …………..
(iii) न्+अ+र्+ए+न्+द्+र्+अ+: = …………..
(iv) र्+आ+ष्+ट्+र्+अ+म् = …………..
(v) क्+अ+न्+द्+उ+क्+अ+: = …………..
(vi) म्+अ+न्+त्+र्+ई = …………..
उत्तर:
(i) मञ्जुल:
(ii) शिक्षक:
(iii) नरेन्द्र:
(iv) राष्ट्रम्
(v) कन्दुक:
(vi) मन्त्री।
प्रश्न 6.
समुचितं शब्दार्थमेलनं कुरुत-
‘क’ ‘ख’
(i) अर्णवः – सुन्दर:
(ii) ढक्का – कमलम्
(iii) पङ्कजम् – समुद्रः
(iv) मत्स्य: – गेन्दुकः
(v) मञ्जुल – मीनः
(vi) कन्दुक: – डमरु:
उत्तर:
(i) अर्णवः – समुद्रः।
(ii) ढक्का – डमरुः।
(iii) पङ्कजम् – कमलम्।
(iv) मत्स्य: – मीनः।
(v) मञ्जुल:- सुन्दरः।
(vi) कन्दुक: गेन्दुकः।
Deepakam Class 6 Chapter 1 वयं वर्णमालां पठामः Summary
पाठ – परिचय – प्रस्तुत पाठ में संस्कृत वर्णमाला का परिचय उदाहरण सहित विस्तारपूर्वक दिया गया है। स्वरों एवं व्यञ्जनों के भेदों को एवं उनसे निर्मित वर्णों एवं शब्दों को सरलता से समझाया गया है। साथ ही वर्ण-संयोग द्वारा शब्द- निर्माण एवं शब्दों का विच्छेद करने हेतु पर्याप्त अभ्यास कार्य दिया गया है।
कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद
वर्णाः द्विविधाः भवन्ति ……………………………….. अनुनासिक – स्वराः सन्ति।
कठिन शब्दार्थ-द्विविधाः = दो प्रकार के भवन्ति होते हैं। सन्ध्यक्षराणि = दो स्वरों से सन्धि द्वारा निर्मित नए वर्ण। मुखेन सह मुख के साथ नासिकया = नाक द्वारा अपि = भी। उच्चारिताः = बोले गए। हिन्दी अनुवाद – वर्ण दो प्रकार के होते हैं- स्वर और व्यञ्जन।
(1) स्वर
स्वरों का उच्चारण स्वतन्त्र रूप से होता है। स्वर दो प्रकार के होते हैं— समानाक्षर और सन्ध्यक्षर।
1. समानाक्षर – ह्रस्व स्वर- अ, इ, उ, ऋ, ऌ।
दीर्घ स्वर – आ, ई, ऊ, ऋॠ (‘लू’ वर्ण का दीर्घ नहीं होता है)।
![]()
2. सन्ध्यक्षर – ह्रस्व स्वर सन्ध्यक्षरों के ह्रस्व नहीं होते हैं।
दीर्घ स्वर ए, ऐ, ओ, औ।
दो निश्चित स्वरों की संधि द्वारा जो नवीन स्वर वर्ण बनते हैं, वे सन्ध्यक्षर स्वर होते हैं-
अ +इ → ए
अ + उ → ओ
अ + ए → ऐ
अ +ओ → औ
अनुनासिक-स्वर:
मुख के साथ नासिका के द्वारा भी उच्चारण किये जाने वाले स्वर ‘अनुनासिक – स्वर’ होते हैं।

(2) व्यञ्जन
व्यञ्जनानाम् उच्चारणे ……………………………….. गुणिताक्षराणि भवन्ति। ऐ, ओ, औ।
कठिन शब्दार्थ – उच्चारणे = बोलने में। कस्यचित् = किसी की। अतः इसलिए सर्वत्र सभी जगह। योजनम् = जोड़ना। इत्येव (इति+एव) = ऐसा ही योजितः जोड़ा गया है। चत्वारः चार स्वकीय अपना। पञ्चसु वर्गेषु = पाँच वर्गों में। पित्राज्ञा = पिता का आदेश। लाकृतिः “लृ” – वर्ण का रूप। उष्णः = गर्म। अत्र = यहाँ। पूर्वम् = पहले। सर्वेषाम् = सभी के। सह = साथ।
हिन्दी – अनुवाद – व्यञ्जनों के उच्चारण में किसी स्वर की सहायता अवश्य होती है। इसलिए वर्णमाला में व्यञ्जनों के उच्चारण के लिए सभी जगह ‘अ’ स्वर जोड़ा जाता है। उदाहरणार्थ-

व्यञ्जनों के चार भेद हैं-
1. वर्ग्याः (स्पर्शाः) वर्णाः

वर्गों के (स्पर्श) व्यञ्जन वर्ण अपने उच्चारण-स्थान के अनुसार पाँच वर्गों में विभाजित होते हैं।
2. अन्तःस्थाः वर्णाः

अन्तःस्थ वर्ण बहुधा स्वरवर्णों के स्थान पर होते हैं। अतः इन्हें- “अर्ध-स्वर” भी कहा जाता है।

3. ऊष्म वर्णाः

ऊष्म व्यञ्जन वर्णों के उच्चारण-समय मुख से उष्ण वायु निकलती है।
4. अयोगवाहौ वर्णों

अयोगवाह विशिष्ट व्यञ्जन वर्ण है। यहाँ उच्चारण के लिए स्वर का संयोजन पहले होता है, न कि बाद में। यहाँ दो अयोगवाह वर्ण हैं-

व्यञ्जनों के साथ सभी स्वरों का संयोजन होता है। व्यञ्जनों के साथ स्वरों के संयोजन से गुणिताक्षर बनते हैं-






![]()
संयुक्त व्यञ्जन
एकाधिक व्यञ्जन ……………………………….. न् + य् + अ + म्।
कठिन शब्दार्थ – अर्णवः = सागर। उष्ट्रः = ऊँट। बाह्यम् = बाहरी ग्रहणम् = स्वीकार करना / पकड़ना। वज्रम् = इन्द्र का शस्त्र /हीरा द्रष्टा देखने वाला ब्रह्म परमेश्वर देवा: संसार की पूजनीय शक्तियाँ एवं विभूतियाँ। ऋषिः = तपस्वी प्रगतिः = विकास। ब्रह्मचारी विद्या व संयम व्रत रखने वाला। जाह्नवी = जह्नु ऋषि की पुत्री गङ्गा। सप्तर्षिः = सात महान् ऋषियों का समूह। ढक्का ढोल, डंका, नगाड़ा। वित्तम् = धन / पैसे। पङ्कजम् = कमल। सन्धिः = दो वर्णों का मेल सँस्कर्ता = संस्कार करने वाला। काँस्कान् = किन-किन को। कस्मिँश्चिद् = कहीं पर/ किसी में। पुँल्लिङ्गम् = पुरुषवाचक लिङ्ग। संयमः आत्म-नियंत्रण संवादः = सौहार्दपूर्ण चर्चा। प्रातः कालः = सुबह का समय राष्ट्रम् = राष्ट्र या देश मत्स्यः = मछली धाष्ट्र्र्यम् = ढिठाई कार्त्स्यम् = संपूर्णता। दाशरथिः दशरथ का पुत्र राम। नरेन्द्रः = राजा / सम्राट्। मञ्जुलः रमणीय। पुष्करम् = कमल। स्वस्तिकः = शुभ चिह्न। सङ्गणकम् = सङ्गणक। कन्दुकः = गेंद। एकैकः = हर एक अजः = बकरा वधूः विवाहित नारी। मातृणम् = माता का ऋण क्लृप्तम् = माना हुआ। लृकारः = “ऌ” वर्ण ओम्= एकाक्षर ब्रह्म औषधम् = औषध जिह्वा = जीभ। नामधेयम् = नाम भगिनी बहन। भ्राता भाई पितामही दादी पितामहः दादा मातामही नानी मातामहः नाना। सुश्रीः = कुमारी श्रीः = लक्ष्मी, सौन्दर्य उपाधि विशेषता प्रथम-नाम पहला नाम मध्य- नाम = बीच का नाम अन्त्य – नाम अन्तिम नाम। कुल नाम = कुल गोत्र या वंश का नाम।
हिन्दी अनुवाद – एक से अधिक व्यञ्जन वर्णों के मेल से संयुक्त व्यञ्जन बनते हैं। यथा—

इसी प्रकार सभी व्यञ्जनों के सभी व्यञ्जनों के साथ मेल से संयुक्त-व्यञ्जन बनते हैं-

वर्ण-वियोग
| अजः = अ+ज्+अ+: | मातृणम् = म्+आ+त्+ॠ+ण्+अ+म् |
| रामः = र्+आ+म्+अ+: | कूतम् = क्+ऌ+प्+त्+अ+म् |
| हरिः = ह्+अ+र्+इ+: | ऌकार: = ऌ+क्+आ+र्+अ+: |
| सीता = स् + ई + त् +आ | देवाः = द्+ए+व्+आ+: |
| गुरु: = ग्+उ+र्+उ+: | एकैकः = ए+क्+ऐ+क्+अ+: |
| वधूः = व्+अ+ध्+ऊ+: | ओम् = ओ+म् |
| ऋषि = ऋ+ष्+इ+: | औषधम् = औ+ष्+अ+ध्+अ+म् |
क्य – वाक्यम् = व्+आ+क्+य्+अ+म्
व्य – तालव्य: =त्+आ+ल्+अ+व्+य्+अ+:
क्र – क्रीडा = क्+र्+ई +ड्+आ
ज्र – वज्रः = व्+अ+ज्+र्+अ+:
प्र – प्रगति: = प्+र्+अ+ग्+अ+त्+इ+:
ह्म – ब्रह्मचारी = ब्+र्+अ+ह्+म्+अ+च्+आ+र्+ई
ध्व – ध्वनिः = ध्+व्+अ+न्+इ+:
र्ण – वर्ण: = व्+अ+र्+ण्+अ+:
र्ष – सप्तर्षिः = स्+अ+प्+त्+अ+र्+ष्+इ+:
त्त – वित्तम् = व्+इ+त्+त्+अ+म्
न्य – मूर्धन्यः = म्+ऊ+र्+ध्+अ+न्+य्+अ+:
ह्य – बाह्यम् = ब्+आ+ह्+य्+अ+म्
ग्र – ग्रहणम् = ग्+र्+अ+ह्+अ+ण्+अ+म्
द्र – द्रष्टा = द्+र्+अ+ष्+ट्+आ
ब्र – ब्रह्म = ब्+र्+अ+ह्+म्+अ
ह्र – जाह्नवी = ज्+आ+न्+ह्+अ+व्+ई
स्व – सरस्वती = स्+अ+र्+अ+स्+व्+अ+त्+ई
र्म – कर्म = क्+अ+र्+म्+अ
क्क – ढक्का = द्+अ+क्+क्+आ
द्ध – सिद्धार्थः = स्+इ+ध्+द्+आ+र्+थ्+अ+:
द्म – पद्मम् = प्+अ+द्+म्+अ+म्
ङ्क – पङ्कजम् = प्+अ+ङ्+क्+अ+ज्+अ+म्
ण्ठ – कण्ठः = क्+अ+ण्+ट्+अ+:
म्भ – प्रारम्भः = प्+र्+आ+र्+अ+म्+भ्+अ+:
स्क – काँस्कान् = क् + आँ + स् +क्+आ+न्
ल्ल – पुल्लिङ्गम् = प्+उँ+ ल् + ल्+इ+ङ्+ग्+अ+म्
वं – संवादः = स्+अ+’+व्+आ+द्+अ+:
:ख-दुःखम् = द्+उ+:+ख्+अ+म्
न्द्र – इन्द्रः = इ+न्+द्+र्+अ+:
ष्ट्र – राष्ट्रम् = र्+आ+ष्+ट्+र्+अ+म्
न्त्य – दन्त्यः = द्+अ+न्+त्+य्+अ+:
ष्ठ्य – ओष्ठ्य: = ओ+ष्+ट्+य्+अ+:
स्क – संस्कृतम् = स् +अ+ ं +स्+क्+ऋ+त्+अ+म्
र्त्न्स्य – कार्त्न्स्यम् = क्+आ+र्+त्+स्+न्+य्+अ+म्
ब्द शब्द: = श्+अ+ब्+द्+अ+:
ञ्ज – व्यञ्जनम् = व्+य्+अ+ञ्+ज्+अ+न्+अ+म्
न्ध – सन्धिः = स्+अ+न्+ध्+इ+:
स्क – सँस्कर्ता = स्+अँ+स्+क्+अ+र्+त्+आ
स्मिँ – कस्मिँश्चिद् = क् +अ+स्+म्+इँ+श्+च्+इ+द्
यं – संयमः = स्+अ+ं+य्+अ+म्+अ+:
सं – हंसः = ह्+अ+ं+स्+अ+:
:क – प्रात:कालः = प् + र् + आ+त्+अ+:+क्+आ+ल्+अ+:
न्त्र – मन्त्री = म्+अ+न्+त्+र्+ई
ण्ठ्य – कण्ठ्यः = क्+अ+ण्+ट्+य्+अ+:
त्स्य – मत्स्य: = म्+अ+त्+स्+य्+अ+:
न्ध्य – सन्ध्यक्षरम् = स्+अ+न्+ध्+य्+अ+क्+ष्+अ+र्+अ+म्
ष्टर्य – धाष्टर्यम् = ध्+आ+र्+ष्+ट्+य्+अ+म्
![]()
वर्ण-संयोग
दाशरथि: = द्+आ+श्+अ+र्+अ+थ्+इ+:
कृष्णः = क्+ऋ+ष्+ण्+अ+:
मञ्जुल: = म्+अ+ञ्+ज्+उ+ल्+अ+:
कुक्कुट: = क्+उ+क्+क्+उ+ट्+अ+:
शिक्षक: = श्+इ+क्+ष्+अ+क्+अ+:
कन्दुक: = क्+अ+न्+द्+उ+क्+अ+:
कार्त्न्स्यम् = क्+आ+र्+त्+स्+न्+य्+अ+म्
हिमालय: = ह्+इ+म्+आ+ल्+अ+य्+अ+:
नरेन्द्रः = न्+अ+र्+ए+न्+द्+र्+अ+:
पुष्करः = प्+उ+ष्+क्+अ+र्+अ+:
स्वस्तिक: = स्+व्+अ+स्+त्+इ+क्+अ+ :
सङ्गणकम् = स्+अ+ङ्+ग्+अ+ण्+अ+क्+अ+म्
धाष्टर्यम् = ध्+आ+र्+ष्+ट्+य्+अ+म्
Leave a Reply