Practicing these RBSE Class 6 Sanskrit Solutions Deepakam Chapter 8 बुद्धिः सर्वार्थसाधिकाQuestion Answer improves confidence in the subject.
Class 6 Sanskrit Chapter 8 Question Answer बुद्धिः सर्वार्थसाधिका
कक्षा 6 संस्कृत पाठ 8 के प्रश्न उत्तर
Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 8 Question Answer
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु।
(पाठ के आधार पर अधोलिखित प्रश्नों के उत्तर एक पद के द्वारा लिखिए।)

उत्तर:
(क) शशकाः।
(ख) गजानाम्।
(ग) गजराजस्य।
(घ) शशकाः।
(ङ) गजराजः।
(च) शशकाः।
![]()
प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखन्तु।
(पूर्ण वाक्य में उत्तर लिखिए।)

उत्तर:
(क) यदा शशका: जीवन्ति तदा एव चन्द्रः प्रसन्नः भवति।
(ख) सायङ्काले शशकानां सभा भवति।
(ग) शशका : स्वरक्षार्थम् उपायं चिन्तयन्ति।
(घ) चन्द्र: ‘शशाङ्कः’ इति नाम्ना प्रसिद्धः अस्ति।
(ङ) “आम्, चन्द्रस्य दर्शनाय आवाम् अधुना एव सरोवरं प्रति चलाव:” इति शशकः कथयति।
प्रश्न 3.
पाठस्य आधारेण पट्टिकातः क्रियापदानि चित्वा वाक्यानि पूरयन्तु।
(पाठ के आधार पर पट्टिका से क्रियापदों को चुनकर वाक्यों की पूर्ति कीजिए।)

उत्तर:
(क) किं चन्द्रः सरोवरे तिष्ठति?
(ख) सर्वे शशका: उपायं चिन्तयन्ति।
(ग) सायंकाले शशकानां सभा भवति।
(घ) शशकाः सरोवरस्य तीरे निवसन्ति।
(ङ) सः गजराजं कथयति।
![]()
प्रश्न 4.
उदाहरणानुसारं निम्नलिखितानां पदानां वचनं पुरुषं च लिखन्तु।
(उदाहरण के अनुसार निम्नलिखित पदों के वचन और पुरुष लिखिए।)

उत्तर:
| पदम् | पुरुषः | वचनम् |
| यथा-चिन्तयति | प्रथमपुरुषः | एकवचनम् |
| तिष्ठन्ति | प्रथमपुरुषः | बहुवचनम् |
| जीवन्ति | प्रथमपुरुष: | बहुवचनम् |
| नमति | प्रथमपुरुष: | एकवचनम् |
| कथयति | प्रथमपुरुषः | एकवचनम् |
| गच्छति | प्रथमपुरुष: | एकवचनम् |
प्रश्न 5.
उदाहरणानुसारं समुचितैः क्रियापदैः रिक्तस्थानानि पूरयन्तु।
(उदाहरण के अनुसार समुचित क्रियापदों के द्वारा रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।)

उत्तर:

![]()
प्रश्न 6.
चित्रस्य आधारेण पञ्च वाक्यानि लिखन्तु।
(चित्र के आधार पर पाँच वाक्य लिखिए।)

उत्तर:
(क) चित्रे एक: आम्रवृक्षः अस्ति।
(ख) वृक्षस्य उपरि वानरः तिष्ठति।
(ग) वृक्षात् आम्रफलानि भूमौ पतन्ति।
(घ) वृक्षस्य अधः द्वे बालिके एकः बालकः च सन्ति।
(ङ) बालाः फलानि गृहीत्वा प्रसन्नाः भवन्ति।
प्रश्न 7.
अधोलिखितानां पर्यायपदानां मेलनं कृत्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु।
(अधोलिखित पर्यायपदों का मेल करके रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।)

उत्तर:
(क) गज: – हस्ती।
(ख) पदम् – चरणः।
(ग) चन्द्र: – शशाङ्कः।
(घ) सरोवर: – जलाशयः।
(ङ) प्रजा – जनता।
Class 6th Sanskrit Chapter 8 Question Answer
प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि विकल्पेभ्यः चित्वा लिखत-
(i) “बुद्धिः सर्वार्थसाधिका” इति पाठस्य क्रमः कः?
(अ) सप्तमः
(ब) अष्टमः
(स) नवमः
(द) पञ्चमः
उत्तर:
(ब) अष्टमः
![]()
(ii) पिपासाकुलं गजयूथं कुतः आगच्छति?
(अ) नगरात्
(ब) ग्रामात्
(स) सरोवरात्
(द) वनान्तरात्
उत्तर:
(द) वनान्तरात्
(iii) के भीताः चिन्तामग्नाः च भवन्ति?
(अ) शशका:
(ब) गजा:
(स) जनाः
(द) बालकाः
उत्तर:
(अ) शशका:
(iv) सरोवर: कस्य वासस्थानम् अस्ति?
(अ) शशकस्य
(ब) गजस्य
(स) चन्द्रस्य
(द) वानरस्य
उत्तर:
(स) चन्द्रस्य
(v) शशकानां सभा कदा भवति?
(अ) प्रातःकाले
(ब) सायङ्काले
(स) रात्रौ
(द) मध्याह्नकाले
उत्तर:
(ब) सायङ्काले
(vi) यदा शशका: जीवन्ति तदा कः प्रसन्नः भवति?
(अ) गजः
(ब) सरोवर:
(स) गगनः
(द) चन्द्रः
उत्तर:
(द) चन्द्रः
(vii) क: भयेन चन्द्रं नमति?
(अ) गजराजः
(ब) शशकराजः
(स) खगराजः
(द) वनराजः
उत्तर:
(अ) गजराजः
![]()
(viii) “शशका: तत्र सुखेन” तिष्ठन्ति। अत्र अव्ययपदं किम्?
(अ) तिष्ठन्ति
(ब) सुखेन
(स) तत्र
(द) शशका:
उत्तर:
(स) तत्र
(ix) “कथम् अहं विश्वासं करोमि।” इति कः कथयति?
(अ) शशकः
(ब) गजराजः
(स) सरोवर:
(द) हंसः
उत्तर:
(ब) गजराजः
(x) “अहमेव उपायं चिन्तयामि।” अत्र सर्वनामपदं किम्?
(अ) उपायं
(ब) एव
(स) चिन्तयामि
(द) अहम्
उत्तर:
(द) अहम्
प्रश्न 2.
कोष्ठकात् उचितपदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-
(i) सर्वे ……… स्वमतं प्रकाशयन्ति। (शशकः / शशका:)
(ii) वयं सर्वे स्वगृहं ……… । (गच्छाम: /गच्छन्ति)
(iii) ……… सरोवरं प्रति चलावः। (वयम् /आवाम्)
(iv) सः भयेन चन्द्र ……… । (नमति / नमन्ति)
(v) अन्ते शशकराज …………। ( वदन्ति / वदति)
उत्तर:
(i) शशका:
(ii) गच्छाम:
(iii) आवाम्
(iv) नमति।
(v) वदति।
![]()
प्रश्न 3.
एकपदेन प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखन्तु –
(i) उत्तमजीवनाय कीदृशः व्यवहारः आवश्यकः भवति?
(ii) शरीरबलात् कस्य महत्त्वम् अधिकं भवति?
(iii) वने कीदृश: महान् सरोवर: अस्ति?
(iv) गजाः कदा सरोवरे जलं पीत्वा निर्गच्छन्ति?
(v) कः पुनः कदापि सरोवरस्य समीपं न आगच्छति?
उत्तर:
(i) बुद्धिपूर्वकः।
(ii) बुद्धिबलस्य।
(iii) नित्यजलपूर्णः।
(iv) सूर्यास्तसमये।
(v) गजयूथः।
प्रश्न 4.
पूर्णवाक्येन प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखन्तु –
(i) सरोवरे गजाः किं किं कृत्वा निर्गच्छन्ति?
उत्तर:
सरोवरे गजाः जलं पीत्वा स्नात्वा, क्रीडित्वा च निर्गच्छन्ति।
(ii) कुत्र बहूनि शशक- बिलानि आसन्?
उत्तर:
सरोवरस्य तीरे समन्तात् सुकोमलभूमौ बहूनि शशक- बिलानि आसन्।
(iii) केन बिलेषु निवसन्तः बहवः शशकाः क्षतविक्षताः भवन्तिः?
उत्तर:
गजानां परिभ्रमणेन बिलेषु निवसन्तः बहवः शशका: क्षतविक्षताः भवन्ति।
(iv) रात्री शशकराजः कस्य समीपं गच्छति?
उत्तर:
रात्रौ शशकराजः यूथाधिपस्य गजराजस्य समीपं गच्छति।
(v) गजराजः सरोवरस्य जले किं दृष्ट्वा चकितः भवति?
उत्तर:
गजराजः सरोवरस्य जले चन्द्रस्य प्रतिबिम्बं दृष्ट्वा चकितः भवति।
![]()
प्रश्न 5.
रेखाङ्कितपदम् अधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु-
(i) वने एक: महान् सरोवरः अस्ति।
(ii) ते दुःखम् अनुभवन्ति।
(iii) शशकाः स्वमतं प्रकाशयन्ति।
(iv) सरोवर: चन्द्रस्य वासस्थानम् अस्ति।
(v) सः भयेन चन्द्रं नमति।
उत्तर:
(i) कुत्र एक: महान् सरोवरः अस्ति?
(ii) ते किम् अनुभवन्ति?
(iii) के स्वमतं प्रकाशयन्ति?
(iv) सरोवर: कस्य वासस्थानम् अस्ति?
(v) कः भयेन चन्द्रं नमति?
प्रश्न 6.
क्रमानुसारं शब्दार्थ-मेलनं कुरुत-
(क) – (ख)
(i) सरोवर: – हस्ती
(ii) मृताः – चन्द्रः
(iii) शशाङ्कः – जलाशयः
(iv) भीता: – छायाम्
(v) गज: – संत्रस्ताः
(vi) प्रतिबिम्बम् – हता:
उत्तर:
(i) सरोवर: – जलाशय:
(ii) मृता: – हताः।
(iii) शशाङ्कः – चन्द्र:।
(iv) भीता: – संत्रस्ताः।
(v) गज: – हस्ती।
(vi) प्रतिबिम्बम् – छायाम्।
प्रश्न 7.
“बुद्धिः सर्वार्थसाधिका” इति पाठस्य/कथायाः हिन्दी भाषायां सारं लिखन्तु।
उत्तर:
पाठ/कथा का सार – “बुद्धिः सर्वार्थसाधिका” नामक पाठ में एक कथा के माध्यम से शारीरिक बल की अपेक्षा बुद्धि-बल के महत्व की अधिकता को बतलाया गया है। पाठानुसार एक वन में हमेशा जल से भरा हुआ एक तालाब था। उस तालाब में हाथियों का समूह जल पीकर, स्नान करके सायंकाल चला जाता था। तालाब के किनारे की भूमि पर बहुत से खरगोशों के बिल थे, जिनमें बहुत खरगोश रहते थे। हाथियों के वहाँ विचरण करने से बहुत से खरगोश घायल हो गये एवं कुछ मर भी गये। इसलिए वे भयभीत और चिन्तित होकर दुःखी हो गये। वे सभी अपनी रक्षा का उपाय सोचने लगे।
एक दिन खरगोशों की सभा होती है। सभी खरगोश अपना मत प्रस्तुत करते हैं, किन्तु समाधान कर नहीं पाते हैं। अन्त में खरगोशों का राजा स्वयं उपाय सोचने की कहकर सभी को अपने-अपने घर भेज देता है। अगले दिन रात के समय वह खरगोशों का राजा हाथियों के राजा के पास जाकर कहता है कि यह तालाब चन्द्रमा का निवास स्थान है और हम खरगोश उसकी प्रजा हैं, इसलिए चन्द्रमा ” शशांक’ नाम से प्रसिद्ध है। खरगोशों के जीवित रहने पर ही चन्द्रमा प्रसन्न होता है।
तत्पश्चात् वह हाथियों का राजा उसके साथ तालाब के पास जाता है। वह जल में चन्द्रमा की छाया को देखकर चकित हो जाता है और भयपूर्वक चन्द्रमा को प्रणाम करता है। इसके बाद वह सभी हाथियों के साथ दूसरे स्थान पर चला जाता है और फिर कभी भी उस तालाब के समीप नहीं आता है। सभी खरगोश सुखपूर्वक वहाँ रहते है। अतः सही कहा गया है कि बुद्धि के द्वारा सभी कार्य सरलता से पूर्ण हो जाते हैं।
Deepakam Class 6 Chapter 8 बुद्धिः सर्वार्थसाधिका Summary
पाठ – परिचय – संसार में उत्तम जीवन के लिए बुद्धिपूर्वक व्यवहार आवश्यक होता है। बुद्धिपूर्वक व्यवहार के द्वारा कठिन कार्य भी सरल हो जाता है। विशेष रूप से स्पर्धा (प्रतियोगिता) के समय यदि प्रतिपक्षी (विरोधी) अत्यधिक बलवान् होता है तो बुद्धि-बल से हम उसको जीत सकते हैं। प्रस्तुत पाठ में हाथी एवं खरगोश की कथा के माध्यम से यह प्रेरणा दी गई है कि शारीरिक बल से बुद्धि बल का महत्त्व अधिक होता है।
कठिन शब्दार्थ, हिन्दी अनुवाद एवं पठितावबोधनम्
एकस्मिन् वने एकः ……………………………….. शशकाः निवसन्ति।
कठिन-शब्दार्थ – नित्यजलपूर्णः = हमेशा जल से भरा हुआ। सरोवरः = तालाब। कदाचिद् = किसी समय। पिपासाकुलम् = प्यास से व्याकुल। गजयूथम् = हाथियों का समूह। वनान्तरात् = दूसरे वन से। स्वेच्छया = अपनी इच्छानुसार। पीत्वा = पीकर। स्नात्वा = स्नान करके। क्रीडित्वा = खेलकर। सूर्यास्तसमये = सायंकाल। निर्गच्छन्ति = निकल जाते हैं। तीरे = किनारे पर। समन्तात् = सभी ओर। बहूनि = बहुत। शशक-बिलानि = खरगोश के बिल। निवसन्ति = रहते हैं।
हिन्दी अनुवाद – एक वन में हमेशा जल से भरा हुआ एक विशाल तालाब है। किसी समय प्यास से व्याकुल एक हाथियों का समूह वन में से वहां आता है। उस तालाब में वे हाथी इच्छानुसार जल पीकर स्नान करके और क्रीड़ा करके सायंकाल (सूर्यास्त के समय) निकल जाते हैं। उस तालाब के किनारे सभी ओर सुकोमल भूमि में खरगोशों के बहुत से बिल हैं, जिनमें बहुत से खरगोश रहते हैं।
पठित-अवबोधनम् –
प्रश्ना:- I. एकपदेन उत्तरत-
(i) पिपासाकुलं किम् आसीत्?
(ii) गजाः सरोवरे जलं पीत्वा कदा निर्गच्छन्ति?
उत्तर:
(i) गजयूथम्।
(ii) सूर्यास्तसमये।
II. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
कुत्र शशक – बिलानि सन्ति?
उत्तर:
सरोवरस्य तीरे समन्तात् सुकोमलभूमौ शशक- बिलानि सन्ति।
III. निर्देशानुसारम् उत्तराणि प्रदत्तविकल्पेभ्य चित्वा लिखन्तु-
(i) ‘कदाचित् पिपासाकुलं गजयूथं तत्र आगच्छति।’ अत्र विशेषणपदं किम्?
(अ) आगच्छति
(ब) पिपासाकुलं
(स) कदाचित्
(द) गजयूथम्
उत्तर:
(ब) पिपासाकुलं
(ii) ‘येषु बहव: शशका: …….।’ अत्र समुचितं क्रियापदं किम्?
(अ) अस्ति
(ब) निर्गच्छन्ति
(स) आगच्छन्ति
(द) निवसन्ति
उत्तर:
(द) निवसन्ति
(iii) ‘आगच्छति’ इति पदस्य गद्यांश विलोमपदं किम्?
(अ) निर्गच्छन्ति
(ब) निवसन्ति
(स) सन्ति
(द) पिबन्ति
उत्तर:
(अ) निर्गच्छन्ति
(iv) ‘सरोवरे गजाः स्नात्वा निर्गच्छन्ति। अत्र कर्तृपदं किम्?
(अ) निर्गच्छन्ति
(ब) स्नात्वा
(स) गजा:
(द) सरोवरे
उत्तर:
(स) गजा:
![]()
गजानां परिभ्रमणेन तेषु ……………………………….. उपायं चिन्तयन्ति।
कठिन शब्दार्थ – परिभ्रमणेन = चारों तरफ भ्रमण करने से। निवसन्तः = रहने वाले शशकाः = खरगोश। क्षतविक्षताः = घायल। केचन = कुछ। भीताः = भयभीत। चिन्तामग्नाः = चिन्तायुक्त। अनुभवन्ति = अनुभव करते हैं। स्वरक्षार्थम् = अपनी रक्षा करने के लिए।
हिन्दी अनुवाद – हाथियों के भ्रमण करने से उन बिलों में रहने वाले बहुत से खरगोश घायल हो जाते हैं, और कुछ तो मर भी जाते हैं। इसलिए खरगोश भयभीत और चिन्तित हो जाते हैं। वे दुःख का अनुभव करते हैं, और वे अपनी रक्षा का उपाय सोचते हैं।
पठित-अवबोधनम् –
प्रश्ना:- I. एकपदेन उत्तरत-
(i) के दुःखम् अनुभवन्ति?
(ii) शशकाः किमर्थम् उपायं चिन्तयन्ति?
उत्तर:
(i) शशका:।
(ii) स्वरक्षार्थम्।
II. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
गजानां परिभ्रमणेन के क्षतविक्षताः भवन्ति?
उत्तर:
गजानां परिभ्रमणेन बिलेषु निवसन्तः बहवः शशका : क्षतविक्षताः भवन्ति।
III. प्रदत्तविकल्पेभ्यः समुचितम् उत्तरं चित्वा लिखन्तु-
(i) ‘केचन पुनः मृताः अपि भवन्ति। अत्र क्रियापदं किम्?
(अ) भवन्तिः
(ब) मृताः
(स) केचन
(द) पुनः
उत्तर:
(अ) भवन्तिः
(ii) ‘बहव:’ इति विशेषणस्य गद्यांशे विशेष्यपदं किम्?
(अ) गजा:
(ब) केचन
(स) शशका:
(द) ते
उत्तर:
(स) शशका:
(iii) ‘सुखम् ‘ इति पदस्य गद्यांशे विलोमपदं किम् अस्ति?
(अ) भीताः
(ब) दुःखम्
(स) क्षतविक्षता:
(द) चिन्तामग्नाः
उत्तर:
(ब) दुःखम्
(iv) ‘ते उपायं चिन्तयन्ति ।’ अत्र ‘ते’ इति सर्वनामपदस्य स्थाने संज्ञापदं किम्?
(अ) खगाः
(ब) गजा:
(स) बालकाः
(द) शशका:
उत्तर:
(द) शशका:
![]()
एकस्मिन् दिने सायङ्काले ……………………………….. स्वगृहं गच्छामः।
कठिन शब्दार्थ – एकस्मिन् दिने = एक दिन। शशकानाम् = खरगोशों का। प्रकाशयन्ति = प्रकट करते हैं। परम् = किन्तु। न प्राप्नुवन्ति = प्राप्त नहीं करते हैं। शशकराजः = खरगोशों का राजा। अधुना = इस समय। गच्छामः = जाते हैं।
हिन्दी अनुवाद – एक दिन सायंकाल में उन खरगोशों की सभा होती है। सभी खरगोश अपना मत प्रकट करते हैं। कहते हैं। परन्तु वे समाधान प्राप्त नहीं करते हैं। अन्त में खरगोशों का राजा कहता है- “मैं ही उपाय सोचता हूँ। इस समय हम सब अपने घर जाते हैं।”
पठित-अवबोधनम् –
प्रश्ना:- I. एकपदेन उत्तरत-
(i) सायङ्काले केषां सभा भवति?
(ii) शशका: किम् न प्राप्नुवन्ति?
उत्तर:
(i) शशकानाम्।
(ii) समाधानम्।
II. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
शशकराजः किम् वदति?
उत्तर:
शशकराजः वदति- ‘अहमेव उपायं चिन्तयामि। अधुना वयं सर्वे स्वगृहं गच्छामः।’
III. प्रदत्तविकल्पेभ्यः समुचितम् उत्तरं चित्वा लिखन्तु-
(i) ‘शशकराज :’ इति कर्तृपदस्य गद्यांशे क्रियापदं किम्?
(अ) चिन्तयामि
(ब) भवति
(स) वदति
(द) गच्छामः
उत्तर:
(स) वदति
(ii) ‘प्रकाशयन्ति’ इति क्रियापदस्य गद्यांशे कर्तृपदं किम्?
(अ) वयम्
(ब) शशका:
(स) अहम्
(द) ते
उत्तर:
(ब) शशका:
(iii) ‘दिने’ इति विशेष्यपदस्य गद्यांशे विशेषणपदं किम्?
(अ) सर्वे
(ब) ते
(स) सायङ्काले
(द) एकस्मिन्
उत्तर:
(द) एकस्मिन्
(iv) ‘अहमेव उपायं चिन्तयामि’ अत्र ‘अहम्’ इति सर्वनामपदस्थाने संज्ञापदं किम्?
(अ) शशकराज
(ब) गजराजः
(स) शशका:
(द) चन्द्रः
उत्तर:
(अ) शशकराज
![]()
अन्यस्मिन् दिवसे रात्रौ ……………………………….. चन्द्रः प्रसन्नः भवति।
कठिन शब्दार्थ – अन्यस्मिन् दिवसे = दूसरे दिन। यूथाधिपस्य = हाथियों के समूह के राजा के। गजराजम् = हाथियों के राजा को। एषः = यह। वासस्थानम् = निवास-स्थान। शशकाः = खरगोश। शशाङ्कः = चन्द्रमा/शशोक। जीवन्ति = जीवित रहते हैं। तदा = तब।
हिन्दी अनुवाद – दूसरे दिन रात में वह खरगोशों का राजा हाथियों के राजा (गजराज) के पास जाता है। वह गजराज (हाथी) से कहता है- “हे गजराज ! यह तालाब चन्द्रमा का निवास स्थान है। हम सब खरगोश उसकी प्रजा हैं, इसलिए वह शशांक (चन्द्रमा) नाम से प्रसिद्ध है। जब खरगोश जीवित रहते हैं, तभी चन्द्रमा प्रसन्न होता है।”
पठित-अवबोधनम् –
प्रश्ना:- I. एकपदेन उत्तरत-
(i) सरोवर: कस्य वासस्थानम् अस्ति?
(ii) चन्द्रस्य प्रजा के सन्ति?
उत्तर:
(i) चन्द्रस्य।
(ii) शशकाः।
II. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
शशकराजः कस्य समीपं गच्छति?
उत्तर:
शशकराजः यूथाधिपस्य गजराजस्य समीपं गच्छति।
III. प्रदत्तविकल्पेभ्यः समुचितम् उत्तरं चित्वा लिखन्तु-
(i) ‘एष:’ इति सर्वनामपदस्य गद्यांशे संज्ञापदं किम्?
(अ) चन्द्रः
(ब) शशाङ्कः
(स) सरोवर:
(द) शशकः
उत्तर:
(स) सरोवर:
(ii) ‘जीवन्ति’ इति क्रियापदस्य गद्यांशे कर्तृपदं किम् अस्ति?
(अ) गजा:
(ब) शशका
(स) चन्द्रः
(द) शशाङ्कः
उत्तर:
(ब) शशका
(iii) ‘रात्रौ’ इति पदस्य गद्यांशे विलोमपदं किम्?
(अ) अन्यस्मिन्
(ब) समीपं
(स) चन्द्रस्य
(द) दिवसे
उत्तर:
(द) दिवसे
(iv) ‘शशाङ्कः’ इति पदस्य कोऽर्थः?
(अ) चन्द्रः
(ब) शशकः
(स) गजः
(द) सरोवर:
उत्तर:
(अ) चन्द्रः
![]()
गजराजः पृच्छति ……………………………….. सरोवरं प्रति चलावः।
कठिन शब्दार्थ- पृच्छतिः = पूछता है। कथम् = किस प्रकार चन्द्रः = चन्द्रमा सरोवरे तालाब में। तिष्ठति = रहता है। प्रदर्शयतु = दिखलाओ। कथयति = कहता है। दर्शनाय = देखने के लिए। अधुना = अब। चलावः = चलते हैं।
हिन्दी अनुवाद – गजराज (हाथियों का राजा) पूछता है- “किस प्रकार मैं विश्वास करूँ? क्या सच में ही चन्द्रमा तालाब में रहता है?” यदि तालाब चन्द्रदेव का निवास स्थान है तो वह दिखलाओ। खरगोश कहता है- “हाँ, चन्द्रमा को देखने के लिए हम दोनों इसी समय ही तालाब की ओर चलते हैं।”
पठित-अवबोधनम् –
प्रश्ना:- I. एकपदेन उत्तरत-
(i) “कथम् अहं विश्वासं करोमि” इति कः पृच्छति?
(ii) गजराजः कस्य वासस्थानं प्रदर्शनियतुं कथयति?
उत्तर:
(i) गजराजः।
(ii) चन्द्रदेवस्य।
II. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
शशकः किमर्थं सरोवरं प्रति गन्तुं कथयति?
उत्तर:
शशकः चन्द्रस्य दर्शनाय सरोवरं प्रति गन्तुं कथयति।
III. प्रदत्तविकल्पेभ्यः समुचितम् उत्तरं चित्वा लिखन्तु-
(i) ‘चन्द्र:’ इति कर्तृपदस्य गद्यांशे क्रियापदं किम्?
(अ) कथयति
(ब) तिष्ठति
(स) पृच्छतिं
(द) करोमि
उत्तर:
(ब) तिष्ठति
(ii) ‘चलाव:’ इति क्रियापदस्य गद्यांशे कर्तृपदं किम्?
(अ) अहम्
(ब) शशकः
(स) गजराजः
(द) आवाम्
उत्तर:
(द) आवाम्
(iii) ‘जलाशय:’ इति पदस्य गद्यांशे पर्यायपदं किम्?
(अ) सरोवर:
(ब) रत्नाकरः
(स) वासस्थानं
(द) गजराजः
उत्तर:
(अ) सरोवर:
(iv) ‘सत्यमेव चन्द्रः सरोवरे तिष्ठति। अत्र अव्ययपदं किम्?
(अ) तिष्ठति
(ब) सत्यम्
(स) एव
(द) चन्द्रः
उत्तर:
(स) एव
![]()
गजराजः शशकराजेन सह ……………………………….. सर्वार्थसाधिकाः।
कठिन शब्दार्थ- सह = साथ। प्रतिबिम्बम् = परछाई। चकितः = विस्मित, आश्चर्य चकित। नमति = नमस्कार करता है। अन्यत्र दूसरी जगह कदापि = कभी भी। उक्तम् = कहा गया है। सर्वार्थसाधिका = सभी कार्यों को सिद्ध करने वाली।
हिन्दी अनुवाद- हाथियों का राजा खरगोशों के राजा के साथ तालाब के समीप जाता है। वह जल में चन्द्रमा की परछाई देखता है और आश्चर्य चकित हो जाता है। वह भयपूर्वक चन्द्रमा को प्रणाम करता है। उसके बाद वह हाथियों के समूह के साथ दूसरी जगह चला जाता है। वह हाथियों का समूह फिर कभी भी उस तालाब के समीप नहीं आता है। खरगोश वहाँ सुखपूर्वक रहते हैं। सत्य ही कहा गया है। “बुद्धि सभी कार्यों को सिद्ध करने वाली होती है।”
पठित-अवबोधनम् –
प्रश्ना:- I. एकपदेन उत्तरत-
(i) कः भयेन चन्द्रं नमति?
(ii) का सर्वार्थसाधिका भवति?
उत्तर:
(i) गजराजः।
(ii) बुद्धिः।
II. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
गजयूथः पुनः कदापि कुत्र न आगच्छति?
उत्तर:
गजयूथः पुनः कदापि तस्य सरोवरस्य समीपं न आगच्छति।
III. प्रदत्तविकल्पेभ्यः समुचितम् उत्तरं चित्वा लिखन्तु –
(i) ‘तिष्ठन्ति’ इति क्रियापदस्य गद्यांशे कर्तृपदं किम् ?
(अ) शशका:
(ब) गजाः
(स) गजयूथ
(द) शशकराज
उत्तर:
(अ) शशका:
(ii) ‘स: जले चन्द्रस्य प्रतिबिम्बं पश्यति।’ अत्र ‘सः’ इति सर्वनामपदस्थाने संज्ञापदं किम्?
(अ) गजयूथ
(ब) शशकराज
(स) गजराजः
(द) शशका
उत्तर:
(स) गजराजः
(iii) ‘गजराजः’ इति कर्तृपदस्य गद्यांशे क्रियापदं किम्?
(अ) तिष्ठन्ति
(ब) गच्छति
(स) आगच्छति
(द) उक्तम्
उत्तर:
(ब) गच्छति
(iv) ‘छायाम्’ इत्यर्थे गद्यांशे किं पदं प्रयुक्तम्?
(अ) चकितम्
(ब) समीपम्
(स) भयेन
(द) प्रतिबिम्बम्
उत्तर:
(द) प्रतिबिम्बम्
Leave a Reply