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Class 6 Social Science Chapter 14 Question Answer in Hindi
हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ Question Answer
कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान पाठ 14 के प्रश्न उत्तर (InText)
पृष्ठ 195
प्रश्न 1.
आर्थिक गतिविधियों को किस प्रकार वर्गीकृत किया जाता है?
उत्तर:
कुछ आर्थिक गतिविधियों में समान विशेषताएँ होती हैं और इन समान विशेषताओं के आधार पर इन्हें एक समूह या व्यापक समूह में वर्गीकृत किया जाता है, जिन्हें आर्थिक क्षेत्रक कहते हैं।
इस प्रकार आर्थिक गतिविधियों को तीन प्रकार के आर्थिक क्षेत्रकों में वर्गीकृत किया जाता है। ये हैं- (1) प्राथमिक क्षेत्रक (2) द्वितीयक क्षेत्रक और (3) तृतीयक क्षेत्रक।
प्रश्न 2.
विभिन्न आर्थिक गतिविधियों को क्षेत्रकों (सेक्टरों) में समूहबद्ध करने का क्या आधार है?
उत्तर:
विभिन्न आर्थिक गतिविधियों को तीन क्षेत्रकों में समूहबद्ध करने के प्रमुख आधार निम्नलिखित हैं-
(1) प्राथमिक गतिविधियाँ – जिन आर्थिक गतिविधियों में लोग प्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं के उत्पादन के लिए प्रकृति पर निर्भर रहते हैं, उन्हें प्राथमिक गतिविधियाँ या प्राथमिक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ कहते हैं, जैसे— कृषि क्षेत्र में अन्न और सब्जियों की खेती, जगलों से लकड़ी एकत्रित करना, गाय से दूध दुहना, खदानों से कोयला निकालना मत्स्य पालन से मछलियाँ और कुक्कुट पालन से अंडे प्राप्त करना आदि।
(2) द्वितीयक गतिविधियाँ या द्वितीयक क्षेत्रक द्वितीयक क्षेत्रक उन आर्थिक गतिविधियों का समूह है जिनमें प्राथमिक क्षेत्र से प्राप्त कच्ची सामग्रियों के प्रसंस्करण द्वारा इसे बिक्री या उपभोग हेतु उत्पादों में परिवर्तित करना सम्मिलित है। जैसे—अनाज से मिलों में आटा तैयार करना, मूंगफली से तेल निकालना, लकड़ी से फर्नीचर तथा कागज तैयार करना, लौह अयस्क से इस्पात व उससे कार, ट्रक आदि मोटर वाहन बनाना आदि। मोटर वाहन कारखाना, वस्त्र कारखाना, औषधि कारखाना आदि द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधियाँ हैं।
(3) तृतीयक क्षेत्रक (तृतीयक गतिविधियाँ ) – तृतीयक क्षेत्रक उन गतिविधियों का समूह है जिसमें प्राथमिक तथा द्वितीयक क्षेत्रकों की संपूरक के रूप में इन्हें सहायता प्रदान करने वाली सेवाओं का प्रावधान है, जैसे परिवहन, बैंकिंग, व्यवसाय, प्रबंधन आदि।
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प्रश्न 3.
यह तीन क्षेत्रक (सेक्टर) आपस में किस प्रकार संबंधित हैं?
उत्तर:
क्षेत्रकों में परस्पर निर्भरता तीनों प्रकार की आर्थिक गतिविधियाँ या आर्थिक क्षेत्रक, प्राकृतिक कच्चे माल को अंतिम उत्पाद में परिवर्तित करने तथा उसे उपभोक्ता तक पहुँचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उदाहरण के लिए (i) आनंद मिल्क यूनियन लिमिटेड (अमूल) नाम के एक दुग्ध सहकारी संगठन के किसान अपनी गायों का दूध बेचने के लिए दुहते हैं। चूंकि दुग्ध उत्पादन एक प्राकृतिक स्रोत (गाय या मवेशी ) से प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त किया जाता है। अतः यह आर्थिक गतिविधि प्राथमिक क्षेत्र की गतिविधि है।
(ii) दूध दुहने के बाद डेयरी में दूध को प्रसंस्कृत किया जाता है और कारखानों में इसे तरल रूप से अन्य खाद्य रूपों, जैसे— दूध का पाउडर, घी, पनीर, मक्खन आदि अनेक रूपों में परिवर्तित किया जाता है। इन आर्थिक गतिविधियों को द्वितीयक क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियाँ कहते हैं, क्योंकि इन गतिविधियों में प्राकृतिक रूप से प्राप्त पदार्थ को अन्य उपयोगी रूपों में परिवर्तित किया जाता है।
(iii) अमूल अपने द्वारा निर्मित इन उत्पादों को विभिन्न स्थानों पर बेचता है। इसके लिए वह अपने उत्पादों को बिक्री के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए ट्रकों व लारियों, रेल, वायुयान आदि परिवहन के साधनों का उपयोग करता है। अमूल द्वारा अपने उत्पादों को विभिन्न स्थानों पर बेचने के लिए खुदरा भंडारों की स्थापना की जाती है और वहाँ तक इन उत्पादों की आपूर्ति की जाती है। यहाँ पर परिवहन, विपणन और फुटकर विक्रेता तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधियाँ हैं क्योंकि ये प्राथमिक क्षेत्र और द्वितीयक क्षेत्र दोनों की गतिविधियों में सहायक होते हैं।
स्पष्ट है कि आर्थिक गतिविधियों के तीनों क्षेत्र एक-दूसरे से घनिष्ठ रूप से संबंधित हैं।
पृष्ठ 200
प्रश्न 1.
हमने द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधियों के कुछ उदाहरण देखे हैं। क्या आप द्वितीयक क्षेत्रक में दो अन्य आर्थिक गतिविधियों के नाम बता सकते हैं?
उत्तर:
हाँ, हम द्वितीयक क्षेत्रक में दो अन्य आर्थिक गतिविधियों के नाम बता सकते हैं। ये हैं-
(1) तिल और गुड़ को मिलाकर, कूटकर गजक बनाना।
(2) गन्ना के रस से गुड़ व चीनी बनाना।
पृष्ठ 206
प्रश्न 1.
पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 205 पर दिए गए चित्र 14.1 में दर्शाए गए कार्यों को क्षेत्रकों में वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर:
(1) प्राथमिक क्षेत्रक-पेड़ को काटना और लकड़ी के गट्ठर प्राप्त करना।
(2) द्वितीयक क्षेत्रक- लकड़ी के गट्ठरों को मशीन में डालकर लुग्दी बनाना और कागज तैयार करना, पाठ्यपुस्तक को छापना।
(3) तृतीयक क्षेत्रक – लकड़ी के गट्ठरों को फैक्ट्री तक ट्रक में लादकर पहुँचाना; कागज पर लेखक द्वारा लिखना तथा पाठ्यपुस्तक का विपणन करना और उन्हें फुटकर दुकानों पर पहुँचाकर उन्हें बेचना।
पृष्ठ 207
प्रश्न 1.
अपने आस-पास की आर्थिक गतिविधियों की सूची बनाइए और प्राथमिक, द्वितीयक या तृतीयक गतिविधियों के रूप में उन्हें वर्गीकृत कीजिए। इसके उपरांत तीर लगाकर दर्शाइए कि वे एक-दूसरे से किस प्रकार से संबंधित और परस्पर आश्रित हैं; यदि इनमें से किसी एक गतिविधि का अन्त हो जाता है, तो क्या होगा?
उत्तर:
इसे विद्यार्थी अपने आस-पास की आर्थिक गतिविधियों की सूची बनाकर उन्हें तीनों क्षेत्रक की गतिविधियों में वर्गीकृत करें तथा उनके परस्पर पूरक होने को भी बताइए।
संकेत- यदि इनमें से किसी एक गतिविधि का अन्त हो जाता है, तो अन्य दोनों प्रकार की आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित होंगी। यदि संबंधित प्राथमिक गतिविधि का अन्त हो जाता है, तो उससे संबंधित द्वितीयक और तृतीयक गतिविधियाँ भी समाप्त हो जाएगी। यदि किसी द्वितीयक गतिविधि का अन्त हो जाता है तो हमें केवल प्राथमिक वस्तुएँ अर्थात् प्रकृति से प्रदत्त वस्तुएँ ही मिलेंगी और यदि तृतीयक गतिविधि का अन्त हो जाता है तो अन्य गतिविधियों की गतिशीलता में शिथिलता आ जाएगी।
हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ कक्षा 6 प्रश्न उत्तर (Exercise)
प्रश्न 1.
प्राथमिक क्षेत्रक क्या है? यह द्वितीयक क्षेत्रक से किस प्रकार भिन्न है? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
प्राथमिक क्षेत्रक- प्राथमिक क्षेत्रक उन गतिविधियों का समूह है जिसमें प्रकृति से सीधे कच्चे माल का निष्कर्षण शामिल होता है, जैसे—कृषि, मत्स्यपालन, वानिकी, खनन आदि प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधियाँ हैं।
कृषि से अन्न और सब्जियाँ, मत्स्यपालन से मछलियाँ, वानिकी से लकड़ियाँ, खनन से खनिज पदार्थ सीधे प्रकृति से प्राप्त होते हैं।
प्राथमिक क्षेत्रक द्वितीयक क्षेत्र से इस रूप में भिन्न है क्योंकि द्वितीयक क्षेत्रक प्राथमिक क्षेत्रक से प्राप्त वस्तुओं को रूपान्तर करके अन्य वस्तु का उत्पादन करते हैं। इसलिए प्राथमिक क्षेत्रक जहाँ प्रकृति पर आधारित है, वहाँ द्वितीयक क्षेत्र प्राथमिक क्षेत्रक पर आधारित है।
उदाहरण – (1) – किसान कृषि के माध्यम से खेत से अन्न पैदा करता है। यह प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि है। आटा मिल किसान द्वारा पैदा किए गए अन्न से उसका रूपान्तरण करके आटा और मैदा का उत्पादन करते हैं। यह द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधि है, क्योंकि इसमें प्राथमिक क्षेत्रक के अनाज का रूपान्तरण किया गया है।
उदाहरण- 2- लोहे की खान से लौह अयस्क निकाला जाता है। लौह अयस्क का प्रकृति से सीधे निष्कर्षण होता है। अतः लौह अयस्क निकालना प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि है। अब लौह अयस्क को इस्पात कारखाने में शुद्ध करके उसे इस्पात के रूप में रूपान्तरित किया जाता है। यह द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधि है क्योंकि इस क्षेत्रक में प्राथमिक क्षेत्रक द्वारा प्रकृति से प्राप्त की गई वस्तु लौह अयस्क का रूपान्तरण किया गया है।
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प्रश्न 2.
द्वितीयक क्षेत्रक किस प्रकार से तृतीयक क्षेत्रक पर निर्भर है? उदाहरणों द्वारा समझाइए।
उत्तर:
द्वितीयक क्षेत्रक तृतीयक क्षेत्रक पर निर्भर है, इसे निम्न उदाहरणों से स्पष्ट किया गया है-
उदाहरण 1- लोहे की खान से लौह अयस्क निकाला जाता है। इस लौह अयस्क को इस्पात बनाने के कारखाने के पास पहुँचाने के लिए क्रेन, ट्रक और मजदूर आदि की सहायता से इस्पात कारखाने तक लाया जाता है। इस प्रकार इस्पात कारखाना अर्थात् द्वितीयक क्षेत्रक, परिवहन सेवा पर निर्भर है और परिवहन का कार्य तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधि है। इसी प्रकार इस्पात निर्माण के बाद उसकी विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ बनाने, जैसे- थाली, गिलास, चम्मच आदि के लिए इस्पात को इन छोटी-निर्माण इकाइयों में परिवहन के द्वारा भेजा जाता है तथा उसका विपणन किया जाता है। इस प्रकार उपभोक्ता तक इन वस्तुओं को पहुँचाने के लिए पुनः परिवहन और विपणन जैसी तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधियों की आवश्यकता होती है।
उदाहरण – 2 – जंगल से पेड़ काटकर लकड़ी प्राप्त की जाती है। लकड़ी के गट्ठरों को जंगल से यातायात की प्रक्रिया- ट्रक या ट्रेन आदि के द्वारा – लकड़ी कारखाने तक लाया जाता है। लकड़ी कारखाने में उस लकड़ी से विभिन्न प्रकार का उपयोगी सामान बनाया जाता है, जैसे— मेज – कुर्सी, प्लाई, बोर्ड आदि। वहाँ से इन्हें बिक्री के लिए फुटकर विक्रेताओं के यहाँ भेजा जाता है। इस प्रकार लकड़ी के कारखाने में कच्चा माल लाने तथा निर्मित माल को बिक्री के लिए फुटकर विक्रेताओं तक भेजने के लिए परिवहन और विपणन की गतिविधियों की आवश्यकता होती है और ये दोनों गतिविधियाँ तृतीयक क्षेत्रक के अन्तर्गत आती हैं।
प्रश्न 3.
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों के बीच परस्पर निर्भरता का एक उदाहरण दीजिए। इसको प्रवाह चित्र (फ्लो चार्ट) का प्रयोग करते हुए समझाइए।
उत्तर:
अमूल नाम के एक दुग्ध सहकारी संगठन के किसान अपनी गायों का दूध बेचने के लिए दुहते हैं। इस प्रकार की गतिविधि प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि है क्योंकि दुग्ध उत्पादन एक प्राकृतिक स्रोत (गाय या मवेशी) से प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त किया जाता है।
इसके बाद दूध को प्रसंस्कृत किया जाता है और कारखानों में इसे तरल रूप से अन्य खाद्य रूपों में परिवर्तित किया जाता है। इन आर्थिक गतिविधियों को द्वितीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ कहते हैं।
अमूल अपने उत्पादों को विभिन्न स्थानों पर बेचता है। अपने उत्पादों को बिक्री के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने हेतु ट्रकों, लारियों, रेल, वायुयान आदि परिवहन का उपयोग करता है। इसके द्वारा खुदरा भंडारों की स्थापना की जाती है जिससे गुजरात व भारत के अन्य राज्यों के कस्बों, नगरों और गाँवों की दुकानों में दूध तथा दूध के उत्पादों की आपूर्ति की जाती है। यहाँ परिवहन, विपणन तथा फुटकर विक्रेता तृतीयक गतिविधि में सम्मिलित हैं। स्पष्ट है कि तीनों प्रकार के आर्थिक क्षेत्रक प्राकृतिक कच्चे माल दूध को अंतिम उत्पाद में परिवर्तित करने तथा उसे विभिन्न क्षेत्रों में परिवहन तथा विपणन द्वारा फुटकर विक्रेता तक पहुँचा कर उसे अंतिम उपभोक्ता तक पहुँचाते हैं।
प्रवाह चित्र-
(1) गाय-भैंस दूध दुहना, (2) बिचौलिया- दूध को डेयरी तक पहुँचाना, (3) डेयरी – दूध से विभिन्न उत्पाद तैयार करना, (4) इन उत्पादों को लारी, ट्रक, रेलवे, वायुयान द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों में भेजना, (5) खुदरा विक्रेता- देश के विभिन्न स्थानों पर खुदरा भंडारों की स्थापना करना।
हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ Class 6 Question Answer
बहुविकल्पात्मक प्रश्न
1. किसी वस्तु का मूल्य जिसे मुद्रा के किसी वस्तु का मूल्य के रूप में मापा जा सकता है, कहलाता है-
(अ) मौद्रिक मूल्य
(ब) आर्थिक मूल्य
(स) नैतिक मूल्य
(द) सामाजिक मूल्य
उत्तर:
(अ) मौद्रिक मूल्य
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2. समान विशेषताओं के आधार पर जिन आर्थिक गतिविधियों को एक समूह में वर्गीकृत किया जा सकता है, उसे कहते हैं—
(अ) सामाजिक क्षेत्रक
(ब) राजनैतिक क्षेत्रक
(स) आर्थिक क्षेत्रक
(द) नैतिक क्षेत्रक
उत्तर:
(स) आर्थिक क्षेत्रक
3. उन आर्थिक गतिविधियों का समूह जिसमें प्रकृति से सीधे कच्चे माल का निष्कर्षण शामिल होता है, कहलाता है—
(अ) प्राथमिक क्षेत्रक
(ब) द्वितीयक क्षेत्रक
(स) तृतीयक क्षेत्रक
(द) नैतिक क्षेत्रक
उत्तर:
(अ) प्राथमिक क्षेत्रक
4. निम्न में से कौनसी प्राथमिक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधि नहीं है?
(अ) कृषि
(ब) मत्स्य पालन
(स) गाय से दूध दुहना
(द) पनीर बनाना
उत्तर:
(द) पनीर बनाना
5. निम्न में कौनसी प्राथमिक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधि है?
(अ) स्वास्थ्य देखभाल
(ब) जल द्वारा जल आपूर्ति
(स) विद्युत उत्पादन
(द) खनन
उत्तर:
(द) खनन
6. निम्न में कौनसी द्वितीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधि है-
(अ) कुक्कुट पालन
(ब) वानिकी
(स) विनिर्माण
(द) बैंकिंग
उत्तर:
(स) विनिर्माण
7. निम्न में कौनसी द्वितीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधि नहीं है?
(अ) नल द्वारा जलापूर्ति
(ब) सौर ऊर्जा
(स) परिवहन
(द) विद्युत उत्पादन
उत्तर:
(ब) सौर ऊर्जा
8. निम्न में कौनसी तृतीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधि है—
(अ) वानिकी
(ब) व्यापार
(स) निर्माण
(द) पशुपालन
उत्तर:
(ब) व्यापार
9. ऐसी आर्थिक गतिविधियाँ जिनमें लोग प्राथमिक क्षेत्रक पर आधारित वस्तुओं का रूपान्तरित करके अन्य वस्तु का उत्पादन करते हैं, वर्गीकृत की जाती है-
(अ) प्राथमिक क्षेत्रक में
(ब) द्वितीयक क्षेत्रक में
(स) तृतीयक क्षेत्रक में
(द) नैतिक क्षेत्रक में
उत्तर:
(ब) द्वितीयक क्षेत्रक में
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10. निम्न में कौनसी तृतीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधि नहीं है?
(अ) दुकानें
(ब) हवाई अड्डे
(स) मोटर कारखाना
(द) सॉफ्टवेयर तैयार करना
उत्तर:
(स) मोटर कारखाना
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. सार्थक ………………………… गतिविधि का अभाव वर्तमान समृद्धि और भावी प्रगति में बाधक होता है।
उत्तर:
आर्थिक
2. बीते दशकों में आर्थिक गतिविधियों की संख्या ………………………… से बढ़ी है।
उत्तर:
तीव्र गति
3. वे विशाल इमारतें जिनमें उत्पादों को बेचने से पहले रखा जाता है, ………………………… कहलाती हैं।
उत्तर:
गोदाम
4. आर्थिक गतिविधियों के तीनों क्षेत्रक परस्पर ………………………… हैं।
उत्तर:
पूरक
5. अमूल की स्थापना ………………………… में श्री त्रिभुवन दास पटेल तथा डॉ. वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में की गई।
उत्तर:
1946
सत्य / असत्य बताइये
1. मदर डेयरी गुजरात राज्य में स्थित है।
उत्तर:
असत्य
2. प्रयोग किए हुए कागज को पुनर्चक्रण कर नया कागज बनाया जाता है।
उत्तर:
सत्य
3. सभी आर्थिक गतिविधियों को वर्गीकृत करने पर हमें उनके संबंध की जानकारी मिलती है।
उत्तर:
सत्य
4. मूंगफली से तेल निकालना प्राथमिक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधि है।
उत्तर:
असत्य
5. कपास से कपड़े तैयार करना द्वितीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधि है।
उत्तर:
सत्य
स्तम्भ I का स्तंभ II से सही मिलान कीजिए।
प्रश्न 1.
| I | II |
| 1. कुक्कुट पालन | (अ) द्वितीयक क्षेत्रक |
| 2. विद्युत उत्पादन | (ब) तृतीयक क्षेत्रक |
| 3. संचार सेवाएँ | (स) डेयरी सहकारी संगठन |
| 4. अमूल | (द) गोदाम |
| 5. उत्पादों को बेचने से पहले रखा जाना | (य) प्राथमिक क्षेत्रक |
उत्तर:
| I | II |
| 1. कुक्कुट पालन | (य) प्राथमिक क्षेत्रक |
| 2. विद्युत उत्पादन | (अ) द्वितीयक क्षेत्रक |
| 3. संचार सेवाएँ | (ब) तृतीयक क्षेत्रक |
| 4. अमूल | (स) डेयरी सहकारी संगठन |
| 5. उत्पादों को बेचने से पहले रखा जाना | (द) गोदाम |
प्रश्न 2.
| I | II |
| 1. एक ऐसा स्थान जहाँ दूध का भंडारण | (अ) बिचौलिया व्यक्ति |
| 2. उत्पादों से सामान खरीदकर उपभोक्ताओं को बेचता है। | (ब) दूध |
| 3. पनीर | (स) काष्ठ |
| 4. कागज | (द) वस्त्र |
| 5. कपास | (य) डेयरी |
उत्तर:
| I | II |
| 1. एक ऐसा स्थान जहाँ दूध का भंडारण | (य) डेयरी |
| 2. उत्पादों से सामान खरीदकर उपभोक्ताओं को बेचता है। | (अ) बिचौलिया व्यक्ति |
| 3. पनीर | (ब) दूध |
| 4. कागज | (स) काष्ठ |
| 5. कपास | (द) वस्त्र |
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
मौद्रिक मूल्य किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी वस्तु का मूल्य जिसे मुद्रा के मूल्य के रूप में मापा जाता है, मौद्रिक मूल्य कहलाता है।
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प्रश्न 2.
एक राष्ट्र की आर्थिक समृद्धि में सहायता किससे मिलती है?
उत्तर:
आर्थिक गतिविधियों के क्षेत्रक से।
प्रश्न 3.
प्राथमिक क्षेत्रक की कोई चार आर्थिक गतिविधियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
(1) कृषि (2) खनन (3) मछली पकड़ना (4) वानिकी
प्रश्न 4.
पशुपालन किस क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधि है?
उत्तर:
प्राथमिक क्षेत्रक की।
प्रश्न 5.
प्राथमिक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियों से क्या आशय है?
उत्तर:
जिन आर्थिक गतिविधियों में लोग प्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं के उत्पादन के लिए प्रकृति पर निर्भर रहते हैं, उन्हें प्राथमिक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ कहते हैं।
प्रश्न 6.
द्वितीयक क्षेत्रक की कोई चार आर्थिक गतिविधियाँ बताइए।
उत्तर:
(1) निर्माण (2) विनिर्माण (3) विद्युत उत्पादन (4) अनाज से आटा तैयार करना।
प्रश्न 7.
द्वितीयक क्षेत्रक में किस प्रकार की आर्थिक गतिविधियाँ आती हैं?
उत्तर:
द्वितीयक क्षेत्रक में वे सभी आर्थिक गतिविधियाँ आती हैं, जिनमें प्राथमिक क्षेत्रक से प्राप्त कच्ची सामग्रियों को प्रसंस्करण द्वारा बिक्री या उपभोग हेतु परिवर्तित किया जाता है।
प्रश्न 8.
मोटर वाहन के कोई चार प्रकार लिखिए।
उत्तर:
(1) यात्री वाहन जैसे कारें, (2) वाणिज्यिक वाहन जैसे- ट्रक (3) तिपहिया वाहन (4) दोपहिया वाहन।
प्रश्न 9.
तृतीय क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ कौनसी होती हैं?
उत्तर:
वे सभी आर्थिक गतिविधियाँ, जो प्राथमिक और द्वितीयक गतिविधियों में सम्मिलित लोगों को सहायता प्रदान करती हैं, तृतीय क्षेत्रक की गतिविधियाँ कहलाती हैं।
प्रश्न 10.
किन्हीं चार तृतीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
(1) फल या सब्जियों के विक्रेता (2) नर्स (3) चिकित्सक (4) शिक्षक।
प्रश्न 11.
अमूल नाम का दुग्ध सहकारी संगठन कहाँ पर स्थित है?
उत्तर:
आणंद जिले (गुजरात) में।
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प्रश्न 12.
देश के किन्हीं चार दुग्ध सहकारी संगठनों (डेयरी) के नाम लिखिए।
उत्तर:
(1) मदर डेयरी (दिल्ली), (2) आविन (तमिलनाडु) (3) विजया (आंध्रप्रदेश) (4) वरका (पंजाब)।
प्रश्न 13.
खुदरा से क्या आशय है?
उत्तर:
माल की बिक्री को थोड़ी मात्रा में अंतिम उपभोक्ताओं तक पहुँचाना खुदरा कहा जाता है।
प्रश्न 14.
निर्यात से क्या आशय है?
उत्तर:
वस्तुएँ या सेवाएँ जो किसी एक देश में उत्पादित होती हैं और उन्हें किसी अन्य देश के क्रेताओं या उपभोक्ताओं को बेचा जाता है, उसे निर्यात कहते हैं।
प्रश्न 15.
पेड़ के काष्ठ से कागज कैसे बनता है?
उत्तर:
पेड़ के काष्ठ को लुग्दी में परिवर्तित करके कागज बनाया जाता है।
प्रश्न 16.
विभिन्न प्रकार की आर्थिक गतिविधियों को समझने में हमें किससे सहायता मिलती है?
उत्तर:
आर्थिक गतिविधियों का वर्गीकरण करने से।
लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
कौटिल्य ने आर्थिक गतिविधियों के सम्बन्ध में क्या कहा है?
उत्तर:
कौटिल्य ने ‘अर्थशास्त्र’ में लिखा है कि “आर्थिक गतिविधियों से समृद्धि आती है। इसका अभाव भौतिक तनाव देता है। सार्थक आर्थिक गतिविधि का अभाव वर्तमान समृद्धि और भावी प्रगति में बाधक होता है।”
प्रश्न 2.
आर्थिक क्षेत्रक किसे कहते हैं तथा उन्हें कितने प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है?
उत्तर:
कुछ आर्थिक गतिविधियों में समान विशेषताएँ होती हैं और इनके आधार पर इन्हें एक समूह या व्यापक समूह में वर्गीकृत किया जा सकता है, उन्हें आर्थिक क्षेत्रक कहते हैं। तीन प्रकार के मुख्य आर्थिक क्षेत्रक हैं। ये हैं- (1) प्राथमिक क्षेत्रक (2) द्वितीयक क्षेत्रक (3) तृतीयक क्षेत्रक।
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प्रश्न 3.
प्राथमिक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ किसे कहते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्राथमिक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ – जिन आर्थिक गतिविधियों में लोग प्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं के उत्पादन के लिए प्रकृति पर निर्भर रहते हैं, उन्हें प्राथमिक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ कहते हैं। उदाहरण के लिए कृषि क्षेत्र में अन्न और सब्जियों की खेती, जंगलों से लकड़ी एकत्रित करना, खदानों से खनिज निकालना, मत्स्य पालन से मछलियाँ, कुक्कुट पालन से अंडे प्राप्त करना आदि प्राथमिक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ हैं।
प्रश्न 4.
द्वितीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियों से क्या आशय है? कोई चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
द्वितीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ – ऐसी आर्थिक गतिविधियाँ जिनमें लोग प्राथमिक क्षेत्रक पर आधारित वस्तुओं को रूपान्तरित करके अन्य वस्तु का उत्पादन करते हैं, उन्हें द्वितीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ कहते हैं।
(1) मोटर वाहन कारखाना, (2) वस्त्र कारखाना, (3) औषधि कारखाना और (4) फर्नीचर निर्माण इकाई आदि द्वितीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियों के उदाहरण हैं।
प्रश्न 5.
तृतीय क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियों को. उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
वे सभी आर्थिक गतिविधियाँ, जो प्राथमिक और द्वितीयक गतिविधियों में सम्मिलित लोगों की सहायता करते हैं, उन्हें तृतीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ कहते हैं। उदाहरण के लिए एक ट्रक चालक अनाज और सब्जियों को खेत से बाजार में ले जाता है। फल या सब्जियों के विक्रेता कृषि उपज को घरेलू उपभोक्ताओं को बेचते हैं। तकनीशियन इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की मरम्मत और सुधार कार्य करते हैं। ये सभी तृतीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ हैं।
प्रश्न 6.
अमूल की कौनसी आर्थिक गतिविधियाँ तृतीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियों के अन्तर्गत आती हैं?
उत्तर:
अमूल अपने उत्पादों को विभिन्न स्थानों पर बिक्री के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने हेतु ट्रकों व लारियों, रेल, वायुयान परिवहन का प्रयोग करता है। दूसरे, इसके द्वारा खुदरा भंडारों की स्थापना की जाती है जिससे गुजरात एवं भारत के अन्य राज्यों के कस्बों, नगरों और गाँवों की दुकानों में दूध एवं दूध के उत्पादों की आपूर्ति की जाती है।
इस प्रकार अमूल में परिवहन, विपणन तथा खुदरा विक्रेता की गतिविधियाँ तृतीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
पाठ्यपुस्तकें कैसे बनती हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पाठ्यपुस्तकों का निर्माण निम्नलिखित प्रमुख आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से किया जाता है—
(1) पेड़ को काटना – सर्वप्रथम सूखे बड़े पेड़ को काटा जाता है और उसकी काष्ठ को छोटे-छोटे एकसमान टुकड़ों में बदला जाता है।
(2) गट्ठर या बंडल बनाना – पेड़ के टुकड़ों को क्रेन की सहायता से ट्रक या लारी में लादा जाता है तथा उन्हें कागज बनाने के कारखाने तक लाया जाता है।
(3) लुग्दी बनाना – कागज के कारखाने में उन लकड़ी के बंडलों को लुग्दी (पेड़ के काष्ठीय रेशे) में परिवर्तित किया जाता है।
(4) कागज का निर्माण – इस लुग्दी को मशीनों में डालकर उससे कागज बनाता है।
(5) कागज पर मुद्रण – इस कागज पर मुद्रण करके, पाठ्यपुस्तकों का रूप दिया जाता है।
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प्रश्न 2.
प्रयोग किए गए कागज के पुनर्चक्रण से क्या लाभ है?
उत्तर:
प्रयोग किए गए कागज के पुनर्चक्रण से लाभ-प्रयोग किए गए कागज को पुनर्चक्रण (रिसाईकिलिंग) कर नया कागज बनाया जाता है। इस प्रक्रिया से निम्नलिखित प्रमुख लाभ होते हैं-
- केवल एक टन कागज का पुनर्चक्रण करने से 17 पेड़ों की बचत की जा सकती है।
- एक टन कागज का पुनर्चक्रण करने से 25 घन मीटर लैंडफिल स्थान की बचत की जा सकती है, जहाँ अपशिष्ट को डाला जाता है।
- पेड़ों को काटकर कागज के नए उत्पाद बनाने की जगह पुनर्चक्रित किए गए कागज का उपयोग करने से 70 प्रतिशत ऊर्जा और पानी की बचत होती है।
प्रश्न 3.
सरदार वल्लभ भाई पटेल ने किसानों को सहकारी संगठन बनाने की सलाह क्यों दी?
उत्तर:
दूध बेचने वाले गुजरात के किसान बिचौलियों की ठगी से परेशान होकर इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए जब सरदार वल्लभ भाई पटेल के पास गए और अपनी समस्या बताई तो उन्होंने किसानों को स्वेच्छा से कार्य करने और बिचौलियों पर निर्भरता को रोकने के लिए एक सहकारी संगठन बनाने का परामर्श दिया। क्योंकि एक सहकारी संगठन बनाकर किसान एक समूह के रूप में दूध की बिक्री और खरीद कर सकते थे तथा दूध के संग्रह, प्रसंस्करण और वितरण के लिए इस पूरी प्रक्रिया को अच्छी तरह संभाल सकते थे।
प्रश्न 4.
‘आर्थिक गतिविधि से समृद्धि आती है।’ कैसे? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आर्थिक गतिविधि से समृद्धि आती है क्योंकि इससे भौतिक तनाव से मुक्ति मिलती है। जैसे-जैसे आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ती जाती हैं, वैसे-वैसे समाज की सामाजिक और आर्थिक आवश्यकताओं की अधिकाधिक पूर्ति होती जाती है। इससे बेरोजगारी, आलस्य, तनाव से मुक्ति मिलती है। क्योंकि सामाजिक एवं आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति होने से समाज में प्रगति होती है और जैसे-जैसे समाज में प्रगति होती है, इन आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होती है जिनके माध्यम से लोग अपनी आजीविका चलाते हैं।
प्रश्न 5.
सहकारी संगठन किसे कहते हैं? देश में चलाए जा रहे किन्हीं पाँच दुग्ध सहकारी संगठनों के नाम लिखिए।
उत्तर:
सहकारी संगठन से आशय-व्यक्तियों का एक समूह जब स्वेच्छा से एक-साथ आकर औपचारिक तरीके से अपनी आर्थिक तथा सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा करता है, तो उसे सहकारी संगठन कहा जाता है।
एक सहकारी संगठन के सभी सदस्य उस संगठन के स्वामी होते हैं और उनके द्वारा सामूहिक रूप से ही निर्णय लिये जाते हैं।
देश में चलाए जा रहे कुछ प्रमुख दुग्ध सहकारी संगठन हैं- (1) अमूल (गुजरात), (2) नंदिनी (कर्नाटक) (3) मदर डेयरी (दिल्ली), (4) आविन (तमिलनाडु), (5) विजया (आंध्रप्रदेश), (6) केवी (नागालैंड), (7) सुधा (बिहार) तथा (8) वरका (पंजाब)
निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
द्वितीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियों को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
द्वितीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ – ऐसी आर्थिक गतिविधियाँ जिनमें लोग प्राथमिक क्षेत्रक पर आधारित वस्तुओं को अर्थात् प्राथमिक क्षेत्रक से प्राप्त कच्ची सामग्री को प्रसंस्करण के द्वारा उसे बिक्री या उपभोग हेतु उत्पादों में रूपान्तरित करना सम्मिलित है, द्वितीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ कहलाती हैं।
द्वितीयक क्षेत्रक में निम्नलिखित प्रमुख गतिविधियाँ सम्मिलित हैं—
(1) इसमें भवनों, सड़कों आदि का निर्माण तथा पानी, बिजली, गैस जैसी आवश्यक वस्तुओं को प्रदान करना सम्मिलित है।
(2) इसमें उद्योगों तथा उत्पादन इकाइयों में उत्पादों का विनिर्माण सम्मिलित है, जिसमें प्राथमिक क्षेत्रक से कच्ची सामग्री को रूपान्तरित करके बेचते हैं या स्वयं उपभोग करते हैं। मोटर वाहन कारखाना, वस्त्र कारखाना, औषधि कारखाना, फर्नीचर निर्माण इकाई, कागज निर्माण कारखाना आदि कारखाने इसके अन्दर आते हैं क्योंकि इनमें लौह अयस्क से इस्पात बनता है, जिसे मोटर वाहन बनाए जाते हैं, कपास से कपड़े तैयार किए जाते हैं, विभिन्न प्रकार की सामग्रियों को मिलकर विभिन्न प्रकार की औषधियों का निर्माण किया जाता है तथा जंगल से प्राप्त लकड़ी से फर्नीचर बनाते हैं।
(3) इसके अतिरिक्त द्वितीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियों के कुछ अन्य उदाहरण ये हैं— (i) कृषि क्षेत्र से प्राप्त अनाज से आटा मिलों में आटा तैयार करना, (ii) मूँगफली व अन्य तिलहनों से तेल निकालना, (iii) चाय की पत्तियों से चाय तैयार करना आदि।
प्रश्न 2.
तृतीय क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियों से आप क्या समझते हैं? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए। इसे सेवा क्षेत्रक क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
तृतीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ – तृतीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ, उन गतिविधियों का समूह है, जिसमें प्राथमिक तथा द्वितीयक क्षेत्रकों के संपूरक के रूप में इन्हें सहायता प्रदान करने वाली सेवाओं का प्रावधान है, जैसे— परिवहन, बैंकिंग, व्यवसाय प्रबंधन आदि। इसमें ऐसी सेवाएँ सम्मिलित हैं, जिन्हें देखा नहीं जा सकता लेकिन यह महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसी कारण इस क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक भी कहा जाता है।
तृतीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियों के कुछ प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं-
(1) परिवहन – एक ट्रक चालक अनाज और सब्जियों को खेत से उद्योग या बाजार ले जाता है। इसी प्रकार अन्य सभी परिवहन कार्य इसी क्षेत्रक के अन्तर्गत आते हैं।
(2) व्यवसाय – फल या सब्जियों के विक्रेता कृषि उपज को घरेलू उपभोक्ताओं को बेचते हैं। इसी प्रकार अन्य सभी व्यवसाय व प्रबंधन कार्य इसी क्षेत्रक के भाग हैं।
(3) सेवाएँ – चिकित्सक, नर्स, शिक्षक, अधिवक्ता, विमान चालक, अपनी सेवाएँ देते हैं, जहाँ लोगों को इनकी आवश्यकता होती हैं। तकनीशियन इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं, जैसे – मोबाइल फोन, टेलीविजन इत्यादि की मरम्मत और सुधार कार्य करते हैं। मैकेनिक कार तथा ट्रैक्टर जैसे वाहनों की मरम्मत करते हैं और बिजली मिस्त्री जो बिजली की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं। इसी प्रकार मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से संचार सेवाएँ तथा होटलों, रेस्तरां, बैंक, विद्यालय, चिकित्सालय, गोदाम आदि की सेवाएँ आदि सभी सेवाएँ तृतीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ हैं।
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प्रश्न 3.
आणंद मिल्क यूनियन लिमिटेड (अमूल) की स्थापना किस कारण तथा किस प्रकार हुई?
उत्तर:
आणंद मिल्क यूनियन लिमिटेड (अमूल) नामक एक दुग्ध सहकारी संगठन की स्थापना का कारण – 1940 के आरंभ में आणंद जिले के किसान अपना दूध आस-पास के गाँवों में बेचते थे। इसके लिए उन्हें उन बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता था, जो किसानों से बहुत कम कीमत पर अधिक मात्रा में दूध खरीदते और इसे बाजार में बेच देते थे। कई बार किसान बिचौलियों के कारण ठगा या उत्पीड़ित अनुभव करते थे।
इस समस्या को एक दिन सभी किसानों ने मिलकर सरदार वल्लभ भाई पटेल के समक्ष रखा। सरदार पटेल ने उन्हें एक सहकारी संगठन बनाने का परामर्श दिया। इस परामर्श को अमल में लाने के लिए सन् 1946 में श्री त्रिभुवनदास पटेल (अधिवक्ता और स्वतंत्रता सेनानी) तथा डॉ. वर्गीज कुरियन (एक इंजीनियर, जो मुंबई के एक डेयरी कारखाने में काम करते थे) के नेतृत्व में अमूल नामक दुग्ध सहकारी संगठन की स्थापना की।
अमूल की स्थापना के अन्य प्रयास-
(i) दूध के उत्पादन और बिक्री पर नियंत्रण करना इस सहकारी संगठन ने किसानों, विशेषकर महिलाओं को एकजुट किया। इससे दूध के उत्पादन और बिक्री पर इस संगठन का नियंत्रण बढ़ा।
(ii) बिचौलियों की समाप्ति दूध उत्पादकों ने सभी मामलों पर सामूहिक निर्णय लिए, जैसे-दूध का उत्पादन, पाश्चुरीकरण और बिक्री इन कार्यों को सभी ने आपस में साझा किया जिसके कारण इन सभी की आमदनी बढ़ी। अब उन्हें बिचौलियों की जरूरत नहीं रह गयी थी।
(iii) दुग्ध प्रसंस्करण कारखाने की स्थापना – जब दूध की मात्रा अधिक हो गई, तब किसानों ने इससे अन्य उत्पाद भी बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने आनंद में एक दूग्ध प्रसंस्करण कारखाना स्थापित कर मक्खन तथा दूध का पाउडर बनाना शुरू किया। वर्तमान में इस संगठन के पास अनेक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र और कारखाने हैं, जो भारत के सभी भागों में अनेक प्रकार के उत्पाद तैयार करते हैं।
(iv) विपणन – इसके बाद इन उत्पादों का विपणन हेतु पूरे देश में छोटी व बड़ी खुदरा दुकानों में इसकी बिक्री की जाने लगी है।
हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ Class 6 Notes
- बीते दशकों में आर्थिक गतिविधियों की संख्या तीव्र गति से बढ़ी है।
- इन सभी गतिविधियों के वर्गीकरण से हमें यह समझने में सहायता मिलती है कि ये गतिविधियाँ कैसे कार्य करती हैं और इनके मध्य क्या सम्बन्ध है।
आर्थिक क्षेत्रकों में आर्थिक गतिविधियों का वर्गीकरण
(1) कुछ आर्थिक गतिविधियों में समान विशेषताएँ होती हैं और इनके आधार पर इन्हें एक व्यापक समूह में वर्गीकृत किया जा सकता है, जिन्हें आर्थिक क्षेत्रक कहते हैं।
(2) प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक तीन प्रकार के मुख्य आर्थिक क्षेत्रक हैं।
(क) प्राथमिक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ – जिन आर्थिक गतिविधियों में लोग प्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं के उत्पादन के लिए प्रकृति पर निर्भर रहते हैं। उन्हें प्राथमिक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ कहते हैं। जैसे—कृषि कार्य, मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, खदानों से कोयला निकालना, जंगलों से लकड़ी एकत्रित करना आदि।
(ख) द्वितीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ – ऐसी आर्थिक गतिविधियाँ जिनमें लोग प्राथमिक क्षेत्रक पर आधारित वस्तुओं को रूपान्तरित करके अन्यं वस्तु का उत्पादन करते हैं, उन्हें द्वितीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ कहते हैं ।
द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधियों में अनाज से आटा तैयार करना, मूंगफली से तेल निकालना, चाय की पत्तियों से चाय तैयार करना, लकड़ी से फर्नीचर या कागज बनाना, कपास से कपड़े बनाना, लौह-अयस्क से इस्पात बनाना तथा कार, ट्रक इत्यादि मोटर वाहन बनाना।
(ग) तृतीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ – वे सभी आर्थिक गतिविधियाँ, जो प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधियों में सम्मिलित लोगों की सहायता करते हैं, उन्हें तृतीय गतिविधियाँ या तृतीयक क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियाँ कहते हैं।
इनमें ऐसी सेवाएँ सम्मिलित हैं, जिन्हें देखा नहीं जा सकता, लेकिन यह महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जैसे— ट्रक चालक द्वारा अनाज व सब्जियों को खेत से बाजार तक लाना, चिकित्सक, नर्स, शिक्षक, अधिवक्ता, विमान चालक आदि की सेवाएँ, तकनीशियन द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की मरम्मत और सुधार का कार्य, मैकेनिक की सेवाएँ आदि। इसी प्रकार संचार सेवाएँ, होटलें, रेस्तरा, बैंक, विद्यालय, चिकित्सालय, हवाई अड्डे, दुकानें, गोदाम इत्यादि इसी क्षेत्रक की गतिविधियाँ हैं।
क्षेत्रकों में परस्पर निर्भरता-
- तीनों प्रकार की आर्थिक गतिविधियाँ या आर्थिक क्षेत्रक, प्राकृतिक कच्चे माल को अंतिम उत्पाद में परिवर्तित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- तीनों क्षेत्रकों की परस्पर निर्भरता को आनंद मिल्क यूनियन लिमिटेड (अमूल) नाम के दुग्ध सहकारी संघ की गतिविधियों से निम्न प्रकार समझा जा सकता है-
- इस सहकारी संगठन के किसान अपनी गायों का दूध बेचने के लिए दुहते हैं। इस प्रकार की आर्थिक गतिविधि को प्राथमिक क्षेत्र की आर्थिक गतिविधि कहा जायेगा क्योंकि दुग्ध उत्पादन, एक प्राकृतिक स्रोत (गाय या मवेशी) से प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त किया जाता है।
- इसके बाद दूध को प्रसंस्कृत कर कारखानों में इसे अन्य खाद्य रूपों, जैसे—दूध का पाउडर, पनीर, मक्खन, घी आदि में परिवर्तित किया जाता है। इन आर्थिक गतिविधियों को द्वितीयक क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियाँ कहते हैं।
- अमूल द्वारा निर्मित विभिन्न उत्पादों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक विभिन्न परिवहन के साधनों द्वारा लाया जाता है। इनके द्वारा खुदरा भंडारों की स्थापना की जाती है, जहाँ दूध व दूध के उत्पादों को बेचा जाता है। इस प्रकार यहाँ परिवहन, विपणन और खुदरा (फुटकर) विक्रेता सभी तृतीयक गतिविधि में सम्मिलित हैं।
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