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Class 6 SST Chapter 6 Question Answer in Hindi भारतीय सभ्यता का प्रारंभ

February 11, 2026 by Fazal Leave a Comment

Start practicing the RBSE Class 6 SST Solutions and Class 6 Samajik Vigyan Chapter 6 Question Answer Hindi Medium भारतीय सभ्यता का प्रारंभ to consolidate your knowledge effectively.

Class 6 Social Science Chapter 6 Question Answer in Hindi

भारतीय सभ्यता का प्रारंभ Question Answer

कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान पाठ 6 के प्रश्न उत्तर (InText)

पृष्ठ 85

प्रश्न 1.
सभ्यता क्या है?
उत्तर:
सभ्यता से आशय सामान्यतः सभ्यता शब्द का प्रयोग मानव समाज के उन्नत चरण के लिए किया जाता है। एक सभ्यता में कम से कम निम्नलिखित विशेषताएं होनी चाहिए-

(1) शासन और प्रशासन का कोई रूप – जटिल समाज और उसके अनेक कार्यकलापों के प्रबंधन हेतु शासन तथा प्रशासन का होना आवश्यक है।

(2) नगरीकरण – एक सभ्यता में नगरीकरण का होना पाया जाता है। इसके अन्तर्गत नगर योजना, नगरों का विकास और उनका प्रबंधन, जिसमें सामान्यतः जल प्रबंधन और जल निकास की व्यवस्था आती है।

(3) विभिन्न प्रकार के शिल्प – एक सभ्यता में विभिन्न प्रकार के शिल्प पाए जाते हैं, जैसे- कच्चे माल का प्रबंधन और तैयार माल का उत्पादन, जैसे-पत्थर और धातु का प्रबंधन करके उसके आभूषण एवं उपकरणों का उत्पादन करना।

(4) व्यापार – सभ्यता की एक अन्य विशेषताए – व्यापार का होना है। इसके अन्तर्गत सभी प्रकार की वस्तुओं के आदान-प्रदान के लिए एक नगर अथवा क्षेत्र के अन्दर और विश्व के अन्य भागों के साथ व्यापार किया जाता है।

(5) लेखन का कोई रूप – एक सभ्यता में अभिलेखों को रखने और संवाद बनाने के लिए लेखन के किसी रूप का होना भी आवश्यक है।

(6) जीवन और विश्व के बारे में सांस्कृतिक विचार – एक सभ्यता में कला, स्थापत्य, साहित्य, श्रुति परम्पराओं और सामाजिक रीति रिवाजों के माध्यम से जीवन और विश्व के बारे में एक सांस्कृतिक विचार भी पाया जाता है।

(7) कृषि उत्पादकता – सभ्यता की एक अन्य विशेषता कृषि की इतनी उत्पादकता का होना आवश्यक होता है जो गाँवों के साथ-साथ नगरों को भी भोजन उपलब्ध करा सके।

प्रश्न 2.
भारतीय उपमहाद्वीप की आरंभिक सभ्यता कौन- सी थी?
उत्तर:
भारतीय उपमहाद्वीप की आरंभिक सभ्यता सिंधु सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) अथवा सिंधु-सरस्वती सभ्यता थी। जो सिंधु और उसकी सहायक नदियों के पंजाब और सिंध के विशाल मैदानों में लगभग 4000 वर्ष पूर्व विकसित हुई।

Class 6 SST Chapter 6 Question Answer in Hindi भारतीय सभ्यता का प्रारंभ

प्रश्न 3.
उसकी मुख्य उपलब्धियाँ क्या थीं?
उत्तर:
सिंधु-सरस्वती सभ्यता कई मायनों में एक अनूठी सभ्यता थी। इसने दिखाया कि कैसे एक सम्यक रूप से संतुलित समुदाय रहता है-जहां धनवान और निर्धन के बीच बहुत अधिक अन्तर नहीं है। संक्षेप में हड़प्पा के सामाजिक परिदृश्य में शोषण नहीं, बल्कि आपसी सामञ्जस्य था।

योजनाबद्ध नगरों का निर्माण तथा नगरों का विकास, उनमें कुशल जल प्रबंधन और जल निकास की व्यवस्था इस सभ्यता की एक मुख्य उपलब्धि थी। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के शिल्प, विस्तृत व्यापार तथा जीवन व विश्व के बारे में उनके सांस्कृतिक विचार इस की अन्य प्रमुख उपलब्धियां थीं। सिंधु सभ्यता के लोगों ने हल सहित खेती के कई उपकरण बनाए जिनमें से कुछ का उपयोग आधुनिक समय में भी किसानों द्वारा किया जाता है।

पृष्ठ 86

प्रश्न 1.
पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 86 पर बताई गई विशेषताओं में से आप किसे मूलभूत विशेषता मानते हैं- अर्थात ऐसी विशेषता, जो अन्य सभी के विकास के लिए अनिवार्य है?
उत्तर:
हम कृषि उत्पादकता की विशेषता को मूलभूत विशेषता मानते हैं।

पृष्ठ 87

प्रश्न 1.
पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 86 में दी गई सूची में प्रत्येक विशेषता के लिए क्या आप उस समय के समाज में विद्यमान व्यवसाय और रोजगार की सूची तैयार कर सकते हैं?
उत्तर:
(1) शासन और प्रशासन का कोई रूप – इसके अन्तर्गत समाज में शांति व्यवस्था बनाए रखने, नगर की सुरक्षा करने आदि क्रियाकलापों के प्रबंधन हेतु कानून या नियम निर्माता, नीति निर्माता तथा नियमों या कानूनों का उल्लंघन करने वालों को दण्ड देने वाले न्यायाधीश आदि प्रशासक तथा उनके सहायक लिपिक आदि कर्मचारी होते होंगे।

(2) नगरीकरण – इसके अन्तर्गत नगर नियोजक, नगर प्रबंधक, तथा जल प्रबन्धक एवं जल निकास की व्यवस्था करने वाले व्यवस्थापक, जल निकास की नालियों को ठीक करने वाले मजदूर तथा सड़कों की सफाई एवं मरम्मत करने वाले मजदूर आदि व्यवसाय व रोजगार रहे होंगे। नालियों के निर्माण के लिए तथा घरों के निर्माण के लिए ईंटों का निर्माण किया जाता था।

(3) विभिन्न प्रकार के शिल्प – हड़प्पा सभ्यता के लोग तांबे और काँसे के औजार, हथियार, गहने और बर्तन बना वे सोने, चांदी के आभूषण बनाते थे। वे पक्की मिट्टी (टेराकोटा) के बर्तन तथा खिलौने बनाते थे।

(4) व्यापार – हड़प्पा के व्यापारी विभिन्न प्रकार के धातुओं के बने, विशेषकर तांबे और कांसे के बर्तन, सोने-चांदी के आभूषण आदि का निर्यात करते थे तथा तांबे का आयात करते थे।

(5) लेखन का कोई रूप – हड़प्पा में लेखन का कार्य लिपिक करते थे जो नगरों में रहते थे। ये मुहरों तथा अन्य चीजों पर लिखते थे।

(6) कृषि उत्पादकता – हड़प्पा के किसान भूमि की जुताई हेतु हल का प्रयोग करते थे। अतः कृषि उत्पादकता के अन्तर्गत कृषक, खाती तथा पशुपालन का व्यवसाय और रोजगार था।

पृष्ठ 89

प्रश्न 1.
हड़प्पा सभ्यता के कुछ प्रमुख नगरों को मानचित्र (पाठ्यपुस्तक के चित्र 6.3) में दर्शाया गया है। क्या आप (कक्षा में गतिविधि के माध्यम से) इन दर्शाए गए नगरों का आगे दी गई तालिका में दिए गए आधुनिक राज्यों अथवा प्रदेशों के साथ मिलान कर सकते हैं?

हड़प्पाई नगर / हड़प्पा के नगर आधुनिक राज्य या प्रदेश
धौलावीरा पंजाब
हड़प्पा गुजरात
कालीबंगा सिंघ
मोहनजोदड़ो हरियाणा
राखीगढ़ी राजस्थान

उत्तर:

हड़प्पाई नगर / हड़प्पा के नगर आधुनिक राज्य या प्रदेश
धौलावीरा गुजरात
हड़प्पा पंजाब
कालीबंगा राजस्थान
मोहनजोदड़ो सिंध
राखीगढ़ी हरियाणा

पृष्ठ 95

प्रश्न 1.
कक्षा की एक गतिविधि के रूप में किसी फीते (इंचटेप) से अपनी कक्षा, विद्यालय के गलियारे या खेल के मैदान की लम्बाई मापें। इस लम्बाई की तुलना धौलावीरा के सबसे बड़े विशाल जलाशय की लम्बाई से कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी अपने कक्षाध्यापक की सहायता से अपने खेल के मैदान या अपनी कक्षा की लम्बाई मापें और उसकी तुलना धौलावीरा के विशाल जलाशय से कीजिए जो 73 मीटर लम्बा है।

Class 6 SST Chapter 6 Question Answer in Hindi भारतीय सभ्यता का प्रारंभ

पृष्ठ 97

प्रश्न 1.
मान लीजिए कि आप हड़प्पा के एक घर में खाना पकाते हैं। आप ऊपर दी गई जानकारी के आधार पर कौन-सा व्यंजन बनाऐंगे?
उत्तर:
हम कच्चे केले की सब्जी तथा गेहूँ की चपाती बनायेंगे।

पृष्ठ 99

प्रश्न 1.
कुछ लेखन संकेतों के साथ हड़प्पा की इन तीन मुहरों (पाठ्यपुस्तक के चित्र 6.13.1, 6.13.2 तथा 6.13.3) को देखते हुए आपके मन में क्या विचार आता है? क्या आप इनकी कोई व्याख्या देना चाहेंगे? अपनी कल्पना शक्ति का उपयोग कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पा में लेखन का कार्य लिपिक करते थे जो नगरों में रहते होंगे। ये मुहरों तथा अन्य चीजों पर लिखते थे। इन मुहरों का उपयोग दस्तावेजों को प्रमाणित करने तथा व्यापारी अपने सामान (पैकेट्स) आदि को मुहरबंद करने में करते होंगे ताकि वे व्यापार में बंदरगाहों पर अपने सामान को पहचान सकें।

पृष्ठ 102

प्रश्न 1.
लोथल के पात्र पर दर्शाई गई कहानी को पूरा कीजिए। आपके विचार से इस कहानी को 4000 से अधिक वर्षों से क्यों याद किया जाता रहा?
उत्तर:
एक प्यासा कौआ एक पात्र पर अपनी प्यास बुझाने के लिए पहुँचता है, जिसमें जल उस पात्र के निचले हिस्से में स्थित है और वहां तक उसकी चोंच नहीं पहुँच पाती है। ऐसी स्थिति में जल पीने के लिए उसने एक चतुर तरीका निकाला। उसने उस पात्र में कंकड़ लाकर डालना शुरू किया और यह कार्य वह तब तक करता रहा जब तक कि जल उस पात्र में ऊपर तक नहीं आ गया। जल के ऊपर आने पर उसने उस जल से अपनी प्यास बुझाई और उड़ गया।

हमारे विचार से इस कहानी को 4000 से अधिक वर्षों से इसलिए याद किया जाता है कि विकट परिस्थिति को हल करने के लिए धैर्य तथा चतुराई के साथ विचार करने पर उस स्थिति से निकलने का कोई न कोई रास्ता सूझ सकता है।

प्रश्न 2.
‘नर्तकी’ की लघु प्रतिमा पर विचार कीजिए। इस लघु प्रतिमा की भाव-भंगिमा से आप क्या समझते हैं? पूरी बांह को ढंकने वाली उसकी उन चूड़ियों को ध्यान से देखिए, जो गुजरात और राजस्थान के क्षेत्रों में अभी भी महिलाएँ पहनती हैं। इस अध्याय में आपने और कहाँ पर इस तरह की चूड़ियां पहनने को चिन्हित किया है? इससे हमें क्या निष्कर्ष निकालना चाहिए?
उत्तर:
नर्तकी की प्रतिमा की भाव-भंगिमा नृत्य करती हुई है। नर्तकी ने पूरी बांह को ढकने वाली जो चूड़ियाँ पहने हुई हैं, ऐसी चूडियाँ गुजरात और राजस्थान की महिलाएँ अभी भी पहनती हैं। इस अध्याय में पृष्ठ 97 पर इस तरह की चूड़ियाँ बनाने को चिन्हित किया गया है।

इससे हम यह निष्कर्ष निकालते हैं कि संभवत: जलवायु संबंधी और पर्यावरणीय परिवर्तन के कारण हड़प्पा संस्कृति का पतन हो गया अर्थात् हड़प्पा संस्कृति के नगर लुप्त हो गए। यदि कोई निवासी वहां रहे थे, तो उन्होंने परिवर्तित वातावरण में ग्रामीण जीवन शैली को अपनाया और धीरे- धीरे वे सैकड़ों की संख्या में छोटी-छोटी बस्तियों के रूप में बिखर गए तथा गुजरात व राजस्थान के क्षेत्रों में चले गए। इस प्रकार हड़प्पा की संस्कृति एवं प्रौद्योगिकी अधिकांशतः बची रही। गुजरात व राजस्थान की महिलाओं में आज भी पूरी बांह को ढंकने वाली चूड़ियों को पहनने का प्रचलन व कालबेलिया नृत्य उसी संस्कृति व प्रौद्योगिकी की ओर संकेत करता है।

भारतीय सभ्यता का प्रारंभ कक्षा 6 प्रश्न उत्तर (Exercise)

प्रश्न 1.
इस अध्याय में अध्ययन की गई सभ्यता के अनेक नाम क्यों हैं? इनके महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
इस अध्याय में अध्ययन की गई सभ्यता के तीन प्रमुख नाम हैं— (1) सिंधु सभ्यता (2) सिंधु-सरस्वती इसने दिखाया कि कैसे एक सम्यक रूप से संतुलित समुदाय सभ्यता तथा (3) हड़प्पा सभ्यता। इस सभ्यता के अनेक नाम होने के प्रमुख कारण ये हैं—

  1. यह सभ्यता पंजाब और सिंध के विशाल मैदान में विकसित हुई। इस मैदान को सिंधु और उसकी सहायक नदियां सिंचित करती हैं। इसलिए इस मैदान में विकसित हुई प्राचीन सभ्यता का नाम सिंधु सभ्यता रखा गया है।
  2. इस मैदान की पूर्व दिशा में पहले सरस्वती नदी हिमालय की तलछटी से हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और गुजरात के क्षेत्रों से प्रवाहित होती थी और इस नदी के तट पर भी की गई खुदाई में इस सभ्यता के कई महानगर जैसे – राखीगढ़ी, गंवेरीवाला, कालीबंगा, बनावली आदि मिले हैं। इस आधार पर कुछ विद्वानों ने इसे सिंधु-सरस्वती सभ्यता कहा है।
  3. लगभग एक शताब्दी पहले 1920-21 में पाकिस्तान का हड़प्पा (पंजाब) इस सभ्यता से संबंधित पहला उत्खनित नगर था। अतः उसके नाम पर इस सभ्यता का नाम ‘हड़प्पा सभ्यता’ दिया गया है।

Class 6 SST Chapter 6 Question Answer in Hindi भारतीय सभ्यता का प्रारंभ

प्रश्न 2.
सिंधु-सरस्वती सभ्यता की उपलब्धियों का सार देते हुए संक्षिप्त रिपोर्ट (150 से 200 शब्द) लिखिए।
उत्तर:
सिंधु-सरस्वती सभ्यता की उपलब्धियाँ- सिंधु – सरस्वती सभ्यता की उपलब्धियों को सार रूप में निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया गया है—
(1) नगरीय सभ्यता का विकास – सिंधु सभ्यता एक नगरीय सभ्यता था। ये नगर योजनाबद्ध थे। इन्हें मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया गया था। ‘ऊपरी नगर’ जहां अभिजात वर्ग के लोग रहते थे और ‘निचला नगर’ जहां साधारण लोग रहते थे। लेकिन यहाँ धनवान और निर्धन के बीच बहुत अधिक अन्तर नहीं था। सामाजिक परिदृश्य में आपसी सामञ्जस्य था।

नगरों की चौड़ी सड़कें, जल निकास के लिए नालियों की व्यवस्था तथा पक्की ईंटें इस सभ्यता की अन्य उपलब्धियां थीं।

(2) विभिन्न प्रकार के शिल्प- हड़प्पा नगरों से पुरातत्व- विदों को जो चीजें मिली हैं, उनमें अधिकतर पत्थर, शंख, कांसे, तांबे, सोने और चांदी जैसी धातुओं से बनाई गई थीं। सोने व चांदी से गहने और बर्तन, तथा सजावटी सामान, पत्थर के आकर्षक मनके, बांट, मुहरें, खूबसूरत लाल मिट्टी के बर्तन आदि मिले हैं। पत्थर तराशना, मनके चमकाना, मुहरों पर पच्चीकारी, मूर्तिशिल्प, प्रेयन्स के मनके तथा चूड़ियाँ यहाँ के शिल्प के प्रमुख उदाहरण हैं। खेती के लिए हल तथा अन्य अनेक उपकरणों का निर्माण किया गया।

(3) नगरीय जीवन- नगरों में शासक, साधारण लोग, लिपिक, शिल्पकार, स्त्री-पुरुष, व्यापारी रहते थे तथा नगरों में रहने वालों को किसान तथा चरवाहे खाने का सामान उपलब्ध कराते थे। इस प्रकार यह एक अनूठी सभ्यता थी। रहता है जहाँ धनवान और निर्धन के बीच बहुत अधिक अन्तर नहीं है। यहाँ के सामाजिक परिदृश्य में शोषण नहीं, बल्कि आपसी सामञ्जस्य था।

प्रश्न 3.
कल्पना कीजिए कि आपको हड़प्पा से कालीबंगा तक यात्रा करनी है। आपके पास विभिन्न विकल्प क्या हैं? क्या आप प्रत्येक विकल्प में लगने वाले समय का अनुमान लगा सकते हैं?
उत्तर:
हड़प्पा पाकिस्तान के पंजाब में है और कालीबंगा भारत के राजस्थान में है। हमारे पास हड़प्पा से कालीबंगा तक आने के दो विकल्प हैं-
(1) हवाई मार्ग और (2) सड़क मार्ग। लेकिन इनमें लगने वाले समय का हम अनुमान नहीं लगा सकते।

प्रश्न 4.
कल्पना कीजिए कि यदि हड़प्पा के किसी पुरुष या महिला को हम आज के भारत के सामान्य रसोईघर में ले आते हैं, तो उन्हें सबसे बड़े चार या पाँच आश्चर्य क्या लगेंगे?
उत्तर:
यदि हम हड़प्पा के किसी पुरुष या महिला को आज के भारत के सामान्य रसोईघर में ले आते हैं तो उन्हें सबसे बड़े आश्चर्य लगेंगे – (1) गैस सिलेण्डर (2) गैस- चूल्हा (3) मिक्सी (4) फ्रिज आदि।

प्रश्न 5.
इस अध्याय के सभी चित्रों पर दृष्टि डालते हुए उन आभूषणों / हाव-भावों / वस्तुओं की सूची बनाइए, जो अभी भी 21वीं शताब्दी में परिचित प्रतीत होती है।
उत्तर:
(1) मिट्टी से निर्मित हल का लघु प्रतिरूप, (2) कार्नेलियन के मोती, (3) चूड़ियां (4) हाथी दांत का कंघा (5) पुरोहित, राजा की मूर्ति (6) स्वास्तिक दर्शाती मुहर (7) त्रिमुखी देवता (8) लघु कांस्य नर्तकी (9) नमस्ते की मुद्रा में बैठी टेराकोटा की मूर्ति, (10) प्यासे कौए की कहानी (11) दर्पण (12) एक पक्की मिट्टी का टेराकोटा पात्र (13) भार तोलने के पत्थर (14) एक कांस्य छैनी (15) खेल बोर्ड तथा सीटी। ये वस्तुएँ अभी भी 21वीं शताब्दी में परिचित प्रतीत होती हैं।

प्रश्न 6.
धौलावीरा के जलाशयों की प्रणाली क्या सोच प्रतिबिंबित करती है?
उत्तर:
धौलावीरा में पत्थरों और यहाँ तक कि चट्टान को काटकर कम से कम 6 विशाल जलाशयों का निर्माण किया गया था। इनमें से अधिकांश को कुशल जल संचयन और वितरण के लिए भूमिगत नालियों से जोड़ा गया था।

धौलावीरा के जलाशयों की यह प्रणाली नगर में कुशल जल प्रबंधन (जल संचयन तथा जल वितरण योजना और उसके कुशल प्रबंधन) के सोच को प्रतिबिंबित करती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सिंधु-सरस्वती सभ्यता के लोग किसी भी सामूहिक कल्याणकारी कार्य के लिए योजना बनाते थे, तथा उसको कार्यरूप में परिणत करते थे और उसको अनवरत कुशलता से चलाए रखने के लिए कुशल प्रबन्धन करते थे। संभवतः उस समय ऐसे कार्य वे सामुदायिक आधार पर मिल-जुल कर प्रशासन की मदद से करते थे।

प्रश्न 7.
मोहनजोदड़ो में ईंटों से निर्मित 700 कुओं की गणना की गई है। ऐसा लगता है कि उनका नियमित रूप से रख-रखाव किया जाता रहा और अनेक शताब्दियों तक उनका उपयोग किया जाता रहा। निहितार्थों पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
मोहनजोदड़ो सिंधु नदी के तट पर स्थित एक नगर जिसकी खुदाई लगभग 1924 में की गई थी। मोहनजोदड़ो में ईंटों से निर्मित 700 कुओं की गणना की गई है। ऐसा लगता है कि पेय जल तथा स्नान आदि करने के लिए मोहनजोदड़ो के प्रत्येक घर में एक कुआ तथा स्नानागार था। जल की व्यवस्था कुओं द्वारा ही की गई थी। इसलिए उन कुओं का नियमित रूप से रख-रखाव भी किया जाता रहा जिसके कारण अनेक शताब्दियों तक जल के लिए उनका उपयोग किया जाता रहा।

Class 6 SST Chapter 6 Question Answer in Hindi भारतीय सभ्यता का प्रारंभ

प्रश्न 8.
सामान्यतः यह कहा जाता है कि हड़प्पावासियों में नागरिकता का उच्च भाव था। इस कथन के महत्व पर चर्चा कीजिए। क्या आप इससे सहमत हैं? वर्तमान भारत के महानगरों के नागरिकों के साथ इसकी तुलना कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पावासियों में नागरिकता का उच्च भाव था। वे नगर के जटिल कामों को सामुदायिक आधार पर मिलजुल कर करते थे। नगरों को यद्यपि दो भागों में बांटा गया था-एक अभिजात्य नगर, दूसरा निचला नगर अर्थात जनसाधरण का नगर लेकिन वहां धनवान और निर्धन के बीच बहुत अधिक अन्तर नहीं था। सभी लोगों में आपसी सामञ्जस्य था और सार्वजनिक कार्यों का प्रबन्धन सामुदायिक आधार पर मिलजुल कर करते थे। इस प्रकार हड़प्पा सभ्यता में एक सम्यक रूप से संतुलित समुदाय रहता था। उसके नागरिकों में नागरिकता का उच्च भाव था।

भारतीय सभ्यता का प्रारंभ Class 6 Question Answer

बहुविकल्पात्मक प्रश्न

1. सिंधु सभ्यता में सबसे पहले किस नगर की खोज हुई—
(अ) मोहनजोदड़ो
(ब) हड़प्पा
(स) लोथल
(द) धौलावीरा
उत्तर:
(ब) हड़प्पा

2. महास्नानागार निम्न में से किस नगर में मिला है?
(अ) कालीबंगा
(ब) लोथल
(स) मोहनजोदड़ो
(द) धौलावीस
उत्तर:
(स) मोहनजोदड़ो

3. हड़प्पा के लोग सामान्यतः किस धातु का आयात करते थे?
(अ) तांबा
(ब) सोना
(स) चांदी
(द) टिन
उत्तर:
(अ) तांबा

4. धौलावीरा नगर में अलग-अलग कितने क्षेत्र थे-
(अ) दो
(ब) तीन
(स) चार
(द) पांच
उत्तर:
(ब) तीन

5. हड़प्पा के नगरों के अन्त की शुरुआत कब हुई?
(अ) 5300 साल पहले
(ब) 4300 साल पहले
(स) 3300 साल पहले
(द) 2300 साल पहले
उत्तर:
(ब) 4300 साल पहले

Class 6 SST Chapter 6 Question Answer in Hindi भारतीय सभ्यता का प्रारंभ

6. हड़प्पा सभ्यता में घरों के निर्माण में किसका प्रयोग किया गया है?
(अ) पत्थरों का
(ब) पक्की ईंटों का
(स) मिट्टी का
(द) उपरोक्त में कोई नहीं
उत्तर:
(ब) पक्की ईंटों का

7. 73 मीटर लम्बा सबसे बड़ा जलाशय सिंधु सभ्यता के किस नगर में मिला है?
(अ) मोहनजोदड़ो
(ब) लोथल
(स) हड़प्पा
(द) धौलावीरा
उत्तर:
(द) धौलावीरा

8. सिंधु सभ्यता के किस नगर में लोग ईंटों से बनाए कुओं से पानी निकाला करते थे?
(अ) हड़प्पा
(ब) धौलावीरा
(स) लोथल
(द) मोहनजोदड़ो
उत्तर:
(द) मोहनजोदड़ो

9. यूरेशिया में हड़प्पा सभ्यता के लोग क्या उगाने में सर्वप्रथम थे?
(अ) गेहूँ
(ब) बाजरा
(स) धान
(द) कपास
उत्तर:
(द) कपास

10. हड़प्पा का 7 से.मी. लम्बा हाथी दांत का कंघा कहां पर पाया गया?
(अ) ओमान के तट पर
(ब) मूसा की खुदाई में
(स) लोथल में
(द) बनावली में।
उत्तर:
(अ) ओमान के तट पर

11. 217 मीटर लंबाई और 36 मीटर चौड़ाई का एक विशाल बेसिन पाया गया है—
(अ) बनावली में
(ब) धौलावीरा
(स) मोहनजोदड़ो
(द) हड़प्पा
उत्तर:
(ब) धौलावीरा

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. …………………………… सां.सं. पू. से हड़प्पा सभ्यता के पूरे क्षेत्र में गांव, नगरों में परिवर्तित हो गए।
उत्तर:
3500

2. हड़प्पा सभ्यता की खोज लगभग …………………………… ई. में की गई।
उत्तर:
1924

3. अधिकांश हड़प्पा सभ्यता के नगर सुनियोजित …………………………… के अन्तर्गत निर्मित किए गए थे।
उत्तर:
योजना

4. हड़प्पा सभ्यता के नगर के दो विशिष्ट भाग मिलते हैं- एक, ऊपर नगर और दूसरा, …………………………… नगर।
उत्तर:
निचला

5. हड़प्पा सभ्यता में कुछ भवनों का उपयोग …………………………… उद्देश्यों के लिए किया जाता था, जैसे-गोदाम।
उत्तर:
सामूहिक

6. हड़प्पावासियों ने शंखों से सुन्दर …………………………… भी बनाई।
उत्तर:
चूड़ियाँ

सत्य / असत्य कथन छांटिए

1. हड़प्पा पुरास्थल वर्तमान पाकिस्तान में है ।
उत्तर:
सत्य

2. हड़प्पा नगर में एक विशाल स्नानागार मिला है।
उत्तर:
असत्य

3. भारत में लगभग 6000 वर्ष पहले मेसोपोटामिया सभ्यता का आरंभ हुआ।
उत्तर:
असत्य

4. सरस्वती नदी की द्रोणी में राखीगढ़ी और गंवेरीवाला महानगर मिले हैं।
उत्तर:
सत्य

सही मिलान कीजिये

प्रश्न 1.

I II
1. हड़प्पा (अ) राजस्थान
2. धौलावीरा (ब) पाकिस्तान
3. राखीगढ़ी (स) गुजरात
4. कालीबंगा (द) हरियाणा
5. मोहनजोदड़ो (य) पाकिस्तान

उत्तर:

I II
1. हड़प्पा (ब) पाकिस्तान
2. धौलावीरा (स) गुजरात
3. राखीगढ़ी (द) हरियाणा
4. कालीबंगा (अ) राजस्थान
5. मोहनजोदड़ो (य) पाकिस्तान

प्रश्न 2.

I II
1. महास्नानागार (अ) अभिजात वर्ग
2. ऊपरी नगर (ब) मोहनजोदड़ो
3. निचला नगर (स) लोथल
4. 33 मीटर लम्बा जलाशय (द) साधारण लोग
5. विशाल बेसिन (य) धौलावीरा

उत्तर:

I II
1. महास्नानागार (ब) मोहनजोदड़ो
2. ऊपरी नगर (अ) अभिजात वर्ग
3. निचला नगर (द) साधारण लोग
4. 33 मीटर लम्बा जलाशय (य) धौलावीरा
5. विशाल बेसिन (स) लोथल

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
हड़प्पा सभ्यता के शहरों का निर्माण कब हुआ?
उत्तर:
3500 सा.सं.पू. हड़प्पा सभ्यता के गांव नगरों में परिवर्तित हो गए और लगभग 2600 सा.सं.पू. में वे नगरों से महानगरों में परिवर्तित हो गए।

Class 6 SST Chapter 6 Question Answer in Hindi भारतीय सभ्यता का प्रारंभ

प्रश्न 2.
हड़प्पा सभ्यता के किन्हीं चार नगरों के नाम बताइए।
उत्तर:
(1) हड़प्पा (2) मोहनजोदड़ो (3) कालीबंगा (4) लोथल।

प्रश्न 3.
हड़प्पा सभ्यता के नगर भारतीय उपमहाद्वीप के किन क्षेत्रों में मिले हैं?
उत्तर:
ये नगर वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रान्तों, भारत के गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब प्रान्तों में मिले हैं।

प्रश्न 4.
हड़प्पा सभ्यता के अधिकांश नगरों के चारों ओर क्या किया गया था?
उत्तर:
अधिकांश नगरों के चारों ओर किलेबंदी की गई थी।

प्रश्न 5.
हड़प्पा सभ्यता के नगरों के ‘ऊपरी भाग’ में किस वर्ग के लोग रहते थे?
उत्तर:
अभिजात वर्ग के लोग।

प्रश्न 6.
हड़प्पा सभ्यता के भवनों के निर्माण में किसका प्रयोग किया गया है?
उत्तर:
ईंटों का।

प्रश्न 7.
हड़प्पावासियों के नगर की जल निकास प्रणाली कैसी थी?
उत्तर:
उनके नगर की जल निकास प्रणाली साधारणत: सड़कों के नीचे होती थी जिनमें अपशिष्ट जल बहता था।

प्रश्न 8.
धौलावीरा में पत्थरों और चट्टानों को काटकर कम से कम कितने जलाशयों का निर्माण किया गया था?
उत्तर:
6 जलाशयों का।

प्रश्न 9.
धौलावीरा के जलाशयों को किनसे जोड़ा गया था?
उत्तर:
इन जलाशयों को कुशल जल संचयन और वितरण के लिए भूमिगत नालियों से जोड़ा गया था।

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प्रश्न 10.
हड़प्पावासी किसकी खेती करते थे?
उत्तर:
हड़प्पावासी दलहन, अनेक किस्म की सब्जियों तथा जौ, गेहूँ, बाजरा तथा धान जैसे अनाज की खेती करते थे।

प्रश्न 11.
हड़प्पावासियों के खाना पकाने के पात्रों में क्या होता था?
उत्तर:
उनके पात्रों में दुग्ध उत्पाद, सब्जियां, मांस तथा हल्दी, अदरक आदि मसाले आदि होते थे।

प्रश्न 12.
हड़प्पावासियों के सर्वाधिक प्रिय आभूषण क्या थे?
उत्तर:
उनके सर्वाधिक प्रिय आभूषण कार्नेलियन के मोती थे।

प्रश्न 13.
हड़प्पावासियों ने चूड़ियां किससे बनाई?
उत्तर:
उन्होंने शंखों से बहुत सुन्दर चूड़ियां बनाई।

प्रश्न 14.
हड़प्पावासियों ने निर्यातित वस्तुओं के बदले किस वस्तु का आयात किया?
उत्तर:
तांबे का।

प्रश्न 15.
हड़प्पावासियों ने अपने व्यापार को संचालित करने के लिए किस मार्ग का उपयोग किया?
उत्तर:
उन्होंने अपने व्यापार को संचालित करने के लिए स्थल मार्ग, नदियों एवं अधिक दूरवर्ती गंतव्यों के लिए समुद्री मार्गों का उपयोग किया।

प्रश्न 16.
खुदाई में मिली हजारों की संख्या में छोटी मुहरें किसकी बनी थीं?
उत्तर:
ये मुहरें एक मुलायम पत्थर स्टीऐटाइट से बनी थीं।

प्रश्न 17.
हड़प्पा की खुदाई में मिली छोटी मुहरों का क्या उपयोग रहा होगा?
उत्तर:
ये मुहरें किसी प्रकार के व्यापार की गतिविधियों से संबंधित हैं जिनसे गोदाम में व्यापारी अपने सामान को पहचानते थे।

प्रश्न 18.
हड़प्पा के नगरों में रहने वाले लोगों को भोजन कौन उपलब्ध कराते थे?
उत्तर:
किसान और चरवाहे।

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प्रश्न 19.
हड़प्पा के गाँवों में रहने वाले लोग क्या करते थे?
उत्तर:
हड़प्पा के गाँवों में रहने वाले लोग अनाज उगाते थे और जानवर पालते थे।

प्रश्न 20.
हड़प्पा के गाँवों में रहने वाले लोग खेती और पशुपालन के अतिरिक्त क्या करते थे?
उत्तर:
वे फलों का संग्रह करते, मछलियां पकड़ते तथा हिरण आदि जानवरों का शिकार करते थे।

प्रश्न 21.
हड़प्पा सभ्यता का अन्ततः ह्रास किन कारणों से हुआ?
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता का जलवायु सम्बन्धी और पर्यावरणीय परिवर्तनों के कारण अन्ततः ह्रास हो गया।

प्रश्न 22.
हड़प्पा सभ्यता के पतन के बाद वहाँ के लोग किस प्रकार की जीवन शैली की ओर लौट गए?
उत्तर:
वे लोग ग्रामीण जीवनशैली की ओर लौट गए।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विश्व की तीन प्रमुख प्राचीन सभ्यताओं के नाम तथा उनके समय को बताइए।
उत्तर:
विश्व के विभिन्न भागों में अलग-अलग समय पर सभ्यताओं का आरंभ हुआ। ऐसी तीन प्रमुख सभ्यताएं ये हैं—

  1. मेसोपोटामिया की सभ्यता, जो लगभग 6000 वर्ष पहले आरंभ हुई,
  2. प्राचीन मिस्र की सभ्यता जिसका आरंभ लगभग 5000 वर्ष पहले हुआ और
  3. सिंधु सरस्वती सभ्यता जिसका प्रारंभ लगभग 4600 वर्ष पहले हुआ।

प्रश्न 2.
सिंधु-सरस्वती सभ्यता की कोई चार विशेषताएं लिखिए।
उत्तर:

  1. इस सभ्यता को पुरातत्ववेत्ताओं ने सिंधु सभ्यता हड़प्पा सभ्यता अथवा सिंधु-सरस्वती सभ्यता जैसे नाम दिए।
  2. इस सभ्यता के निवासियों को हड़प्पाई या हड़प्पावासी कहा गया।
  3. यह सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है।
  4. विकास प्रक्रिया के तहत इसे ‘भारत का पहला नगरीकरण’ भी कहा जाता है क्योंकि यह एक नगरीय सभ्यता थी।

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प्रश्न 3.
हड़प्पा सभ्यता के नगर कहाँ-कहाँ मिले हैं?
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता के पहले दो प्रमुख नगर – हड़प्पा और मोहनजोदड़ो- क्रमश: पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रान्तों में मिले हैं। बाद में अन्य प्रमुख नगर, जैसे- धौलावीरा (गुजरात में), राखीगढ़ी (हरियाणा में), गंवेरीवाला (पाकिस्तान के चेलिस्तान मरुस्थल में) तथा लोथल (गुजरात) में मिले हैं। इसके अतिरिक्त बनावली और फरमाना (हरियाणा), कालीबंगा (राजस्थान) में मिले हैं।

प्रश्न 4.
हड़प्पावासियों के जल प्रबंधन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पावासियों के घरों में स्नान के लिए अलग स्नानागार हुआ करते थे। ये नगर जल निकास प्रणाली से जुड़े हुए थे, जो साधारणतः सड़कों के नीचे होती थीं जिनमें अपशिष्ट जल बहता था।

प्रश्न 5.
सिंधु सभ्यता के लोग जल कहां से प्राप्त करते थे?
उत्तर:
मोहनजोदड़ो में लोग घरों में बने ईंटों के कुओं से पानी निकाला करते थे। किन्तु इस सभ्यता के अन्य क्षेत्रों में तालाब, पास के झरनों अथवा मानव निर्मित जलाशयों से पानी लेते होंगे।

प्रश्न 6.
जलाशय किसे कहते हैं? धौलावीरा में विशाल जलाशय कैसे बनाए गए थे?
उत्तर:
जलाशय विशाल प्राकृतिक या कृत्रिम जल भंडारण के स्थल को कहा जाता है। धौलावीरा में पत्थरों और चट्टान को काटकर कम से कम 6 विशाल जलाशयों का निर्माण किया गया था। इनमें से अधिकांश को कुशल जल संचयन | और वितरण के लिए भूमिगत नालियों से जोड़ा गया था।

प्रश्न 7.
हड़प्पावासियों ने अपनी बस्तियां नदियों के किनारे क्यों बसाई थीं?
उत्तर:
हड़प्पावासियों ने अपनी बस्तियां नदियों के किनारे दो प्रमुख कारणों से बसाई होंगी । प्रथमतः, नदियों के किनारे जल स्रोतों तक आसानी से पहुँच होती थी, दूसरे, ये स्थान कृषि की दृष्टि से भी उचित थे क्योकि नदियां अपने आस- पास की भूमि को उपजाऊ बनाती हैं।

प्रश्न 8.
हड़प्पावासी किस-किसकी खेती करते थे?
उत्तर:
हड़प्पावासी दलहन और अनेक किस्म की सब्जियों के अतिरिक्त जौ, गेहूँ, बाजरा व अन्य मोटे अनाज और धान जैसे अनाज की खेती करते थे। वे कपास भी उगाते थे जिसका उपयोग वे कपड़ा बुनने में किया करते थे।

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प्रश्न 9.
सिंधु-सरस्वती सभ्यता के पुरास्थलों से पुरातत्वविदों को क्या-क्या अनोखी वस्तुएं मिली हैं?
उत्तर:
सिंधु-सरस्वती सभ्यता के पुरास्थलों से पुरातत्वविदों को मिट्टी के लाल बर्तन जिन पर काले रंग के चित्र बने थे, एक कांस्य दर्पण, भार तौलने के कुछ पत्थर, एक कांस्य छैनी, पत्थर पर उकेरा गया खेल बोर्ड, मनके, मिट्टी की सीटी, एक छोटी पुरोहित, राजा की मूर्ति, स्वास्तिक दर्शाती हुई मुहर, त्रिमुखी देवता को दर्शाती मुहर तथा नर्तकी की एक लघु कांस्य प्रतिमा आदि अनोखी वस्तुएं मिली हैं।

प्रश्न 10.
लोथल में मिले विशाल बेसिन का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लोथल (गुजरात) में 217 मीटर लम्बाई और 36 मीटर चौड़ाई का एक विशाल बेसिन पाया गया है। इस बेसिन में बंदरगाह जैसी संरचना रही होगी जिसका इस्तेमाल नावों के माध्यम से वस्तुओं के आयात और निर्यात के लिए किया जाता होगा।

प्रश्न 11.
हड़प्पा सभ्यता में प्राप्त मनकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता के पुरास्थलों से अनेक आकर्षक मनके प्राप्त हुए हैं। इनमें से कई कार्निलियन पत्थरों से बनाए गए थे। इन पत्थरों को काट और तराशकर मनके बनाए गए थे और इनके बीच छेद किए गए थे ताकि धागा डालकर माला बनाई जा सके।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मोहनजोदड़ो में मिले महास्नानागार का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मोहनजोदड़ो का महास्नानागार

  1. मोहनजोदड़ो का प्रसिद्ध महास्नानागार एक छोटा और विस्तृत स्नानागार है जिसका आकार 12 × 7 मीटर है।
  2. इसमें सबसे ऊपर जमायी गई ईंटों पर जल रोधक सामग्री (जैसे- डामर के रूप में प्राकृतिक बिटुमिन) की परत चढ़ाई गई है।
  3. स्नानागार के चारों ओर छोटे-छोटे कमरे हैं। उनमें से एक कमरे के अन्दर कुआँ मिला है।
  4. समय-समय पर स्नानागार के पानी को खाली करने के लिए कोने में एक नाली भी है।
  5. इस स्नानागार को स्वच्छ पानी से समय-समय पर भरा जाता था।
  6. संभवत: यह धार्मिक कार्यों के लिए प्रयुक्त होने वाला स्नानागार था।

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प्रश्न 2.
सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नगरीकरण की प्रक्रिया को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सिंधु-सरस्वती सभ्यता सिंधु और उसकी सहायक नदियों के विशाल मैदानों में तथा इस मैदान के पूर्व में सरस्वती नदी के क्षेत्रों- हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और गुजरात में विकसित हुई। 3500 सा.सं. पू. अर्थात लगभग 6000 वर्ष पूर्व इस पूरे क्षेत्र में विकसित हुए गाँव नगरों में परिवर्तित हो गए और लगभग 2600 सा.सं.पू. अर्थात लगभग 5000 वर्ष पूर्व में बढ़ते व्यापार और अन्य विनिमयों के कारण नगर, महानगरों में परिवर्तित हो गए। सिंधु सभ्यता की इस विकास प्रक्रिया को भारत का पहला नगरीकरण भी कहा जाता है।

प्रश्न 3.
हड़प्पा सभ्यता में प्रचलित कृषि का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. हड़प्पावासी दलहन और अनेक किस्म की सब्जियों के अतिरिक्त गेहूँ, जौ, कुछ मोटे अनाज, बाजरा और कभी-कभी धान जैसे अनाज की खेती करते थे।
  2. यूरेशिया में कपास उगाने में भी वे सर्वप्रथम थे, जिसका उपयोग वे कपड़ा बुनने में किया करते थे।
  3. उन्होंने हल सहित खेती के कई उपकरण बनाए, जिनमें से कुछ का उपयोग आधुनिक समय में भी किसानों द्वारा किया जाता है।
  4. यहाँ गहन कृषि खेती की गतिविधि सैकड़ों छोटे ग्रामीण स्थलों अथवा ग्रामीणों द्वारा संचालित की जाती थी।

प्रश्न 4.
सिंधु सभ्यता की खुदाई में मिली मोहरें किससे निर्मित थीं और इनका क्या उपयोग किया जाता होगा?
उत्तर:
सिंधु सभ्यता की अनेक बस्तियों की खुदाई में हजारों की संख्या में मोहरें मिली हैं। ये मोहरें एक मुलायम पत्थर स्टीऐटाइट की बनी थीं जिन्हें गरम कर कठोर बनाया जाता था। इनका माप केवल कुछ सेंटीमीटर है। इनके ऊपर जानवरों के चित्र बनाए गए हैं और इन पर कुछ लेखन प्रणाली के भी संकेत मिले हैं।

ये मोहरें किसी प्रकार के व्यापार की गतिविधियों से संबंधित हैं। संभवतः इनका प्रयोग सामान से भरे उन डिब्बों या थैलों को चिन्हित करने के लिए किया जाता था, जिन्हें एक जगह से दूसरे स्थान पर भेजा जाता था। ताकि व्यापारी अपने सामान को और एक-दूसरे को पहचान सकें।

प्रश्न 5.
हड़प्पावासी किन-किन वस्तुओं का आयात- निर्यात करते थे?
उत्तर:
हड़प्पावासियों ने आभूषणों, लकड़ी, दैनिक उपयोग की कुछ वस्तुओं, जैसे- कार्नेलियन मनके, हाथी दांत के कंधे, शंखों से बनी चूड़ियां संभवतः सोने एवं कपास और कुछ खाद्य वस्तुओं का निर्यात करते थे। हड़प्पावासियों ने निर्यातित वस्तुओं के बदले संभवत: तांबे का आयात किया होगा क्योंकि यह धातु सामान्यतः उनके पास बहुतायत में उपलब्ध नहीं थीं।

Class 6 SST Chapter 6 Question Answer in Hindi भारतीय सभ्यता का प्रारंभ

प्रश्न 6.
हड़प्पा सभ्यता के अन्त के क्या कारण थे?
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता के अन्त के कारण- पुरातत्ववेत्ताओं ने हड़प्पा सभ्यता के पतन के अनेक कारण बताए हैं।

  1. बहुत समय पहले यह सोचा गया कि युद्ध या आक्रमण ने इन नगरों का विध्वंस किया होगा, लेकिन युद्ध या आक्रमण के कोई निशान नहीं मिलते।
  2. 2200 सा.सं. पूर्व से विश्व को अत्यधिक प्रभावित करने वाले जलवायु सम्बन्धी परिवर्तनों से वर्षा में कमी और शुष्कता की स्थिति उत्पन्न हुई। इसने कृषि कार्य को कठिन बनाया होगा और नगरों की ओर खाद्य आपूर्ति में कमी आई होगी।
  3. सरस्वती नदी का मध्य बेसिन सूख गया; वहाँ कालीबंगा और बनावली जैसे नगर अचानक छोड़ दिए गए। इसमें अन्य कारण भी रहे होंगे।

स्पष्ट है कि इस सभ्यता का जलवायु सम्बन्धी और पर्यावरणीय परिवर्तनों के कारण अन्त हो गया और लोग ग्रामीण जीवन शैली की ओर लौट गए।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना की प्रमुख विशेषताएं बताइए।
उत्तर:
हड़प्पा या सिंधु-सरस्वती सभ्यता में हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, धौलावीरा, राखीगढ़ी, गंवेरीवाला, लोथल कालीबंगा आदि नगरों की खोज खुदाई में की गई है। अधिकांश हड़प्पा सभ्यता के नगर सुनियोजित योजना के अन्तर्गत निर्मित किए गए थे। इन नगरों की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित थीं-

(1) चौड़ी सड़कें – इन नगरों में सड़कें चौड़ी थीं, जो सामान्यतः चारों दिशाओं की ओर उन्मुख होती थीं।

(2) किलेबंदी – अधिकांश नगरों के चारों ओर सुरक्षात्मक उद्देश्यों से एक विशाल दीवार बनाई गई थी अर्थात किलेबंदी की गई थी।

(3) दो भाग – अधिकांश नगरों के दो विशिष्ट भाग मिलते हैं- (1) ऊपरी नगर, जहाँ संभवतः अभिजात वर्ग (शासक, अधिकारी, प्रशासक और पुरोहित पुजारी आदि) के लोग रहते थे और (2) निचला नगर, जहाँ साधारण लोग रहते थे।

(4) इन नगरों में घरों की चारदीवारियाँ पक्की ईंटों की बनाई जाती थीं।

(5) इन नगरों के घरों में स्नान के लिए स्नानागार हुआ करते थे। ये नगर जल निकास प्रणाली से जुड़े थे, जो साधारणतः सड़कों के नीचे होती थी, जिनमें अपशिष्ट जल बहता था।

(6) कुछ नगरों के नगर-दुर्ग में कुछ खास इमारतें बनाई गई थीं, जैसे- मोहनजोदड़ो में महास्नानागार।

(7) इन नगरों के लोग विभिन्न जल स्रोतों से पानी लेते थे, जैसे- मोहनजोदड़ो में प्रत्येक घर में ईंटों से बना हुआ कुआं था, तो धौलावीरा में विशाल जलाशय थे।

प्रश्न 2.
हड़प्पा सभ्यता के नगरीय जीवन की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता के नगरों में लोगों के जीवन की विशेषताएं-

  1. हड़प्पा के नगर हलचल भरे होते थे।
  2. यहाँ के शासक वर्ग नगर की खास इमारतें बनाने की योजना बनाने में जुटे रहते थे।
  3. अभिजात्य वर्ग के लोग खूबसूरत मनकों तथा सोने-चांदी के बने आभूषणों का उपयोग करते होंगे।
  4. यहाँ के लोग कला, स्थापत्य, साहित्य, परंपराओं और सामाजिक रीति-रिवाजों के माध्यम से जीवन और विश्व की अभिव्यक्ति करते थे।
  5. इन नगरों में लिपिक भी होते थे, जो मोहरों पर लिखते थे।
  6. इन नगरों में शिल्पकार स्त्री-पुरुष भी रहते थे जो अपने घरों या किसी उद्योग स्थल पर तरह-तरह की चीजें बनाते थे।
  7. नगरवासी अपने भोजन में दुग्ध, अनाज, दलहन, हरी सब्जियां, मछलियों और मांस का उपयोग करते थे।
  8. हड़प्पावासी न केवल अपनी सभ्यता के नगरों में बल्कि भारत के भीतर और बाहर की अन्य सभ्यताओं और संस्कृतियों के साथ भी सक्रिय रूप से व्यापार करते थे । इसके लिए वे स्थल मार्ग, नदियों तथा समुद्री रास्तों का भी उपयोग करते थे।
  9. नगरों में पत्थर और मिट्टी से बने खिलौने भी मिले हैं, जो बड़ों और बच्चों के मनोरंजन के साधन थे।
  10. नगरों में रहने वालों को किसान तथा चरवाहे खाने के सामान उपलब्ध कराते थे।

प्रश्न 3.
हड़प्पा के नगरों में विकसित नए शिल्पों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. हड़प्पा सभ्यता के नगरों से पुरातत्वविदों को जो चीजें मिली हैं, उनमें अधिकतर पत्थर, शंख, तांबें, काँसे, सोने और चांदी जैसी धातुओं से बनाई गई थीं।
  2. इन नगरों में ताँबे और काँसे के औजार, हथियार, गहने और बर्तन बनाए जाते थे। सजावटी सामान भी बनाए जाते थे।
  3. यहाँ के लोग आकर्षक मनके, बाट, और छैनी, कांस्य दर्पण भी बनाते थे।
  4. यहाँ के लोग पत्थर की मोहरें बनाते थे। इन आयताकार मोहरों पर सामान्यतः जानवरों के चित्र और कुछ लिखावट मिलती है।”
  5. यहाँ के लोग काले रंग के डिजाइन किए हुए खूबसूरत लाल मिट्टी के बर्तन बनाते थे।
  6. हड़प्पावासियों ने वयस्कों और बच्चों दोनों के मनोरंजन के लिए पत्थर, मिट्टी से अनेक खिलौने तैयार किए।
  7. पत्थर तराशना, मनके बनाना, मूर्तिशिल्प आदि भी यहाँ प्रचलित कार्य थे।
  8. यहाँ कार्नेलियन के मनके, शंखों से सुन्दर चूड़ियाँ तथा छोटे बर्तन बनाए जाते थे।

प्रश्न 4.
धौलावीरा नगर का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
धौलावीरा

  1. गुजरात में कच्छ के इलाके में धौलावीरा नगर बसाया।
  2. जहां हड़प्पा सभ्यता के अधिकांश नगर दो भागों में विभक्त थे, वहीं धौलावीरा नगर को तीन भागों में बांटा गया था। इसके हर हिस्से के चारों ओर पत्थर की ऊँची- ऊँची दीवार थी।
  3. इस नगर में अधिकांश भवनों की नींव पत्थरों से बनाई गई थी।
  4. इसके अन्दर जाने के लिए बड़े-बड़े प्रवेश द्वार थे।
  5. धौलावीरा में (गुजरात कच्छ के रन) में 73 मीटर लम्बा एक बड़ा जलाशय मिला है। यहाँ पत्थरों या चट्टानों को काटकर कम से कम छ: विशाल जलाशयों का निर्माण किया गया। इनमें से अधिकांश को कुशल जल संचयन और वितरण के लिए भूमिगत नालियों से जोड़ा गया था।
  6. धौलावीरा की खुदाई से प्राप्त दैनिक उपयोग की वस्तुएँ उनके जीवन दिखाती हैं। ये वस्तुएँ हैं- एक कांस्य दर्पण, टेराकोटा का पात्र, भार तौलने के पत्थर, कांस्य छैनी तथा पत्थर पर उकेरा गया खेल बोर्ड आदि।

Class 6 SST Chapter 6 Question Answer in Hindi भारतीय सभ्यता का प्रारंभ

प्रश्न 5.
एक सभ्यता में कौन-कौनसी विशेषताएँ होनी चाहिए।
उत्तर:
एक सभ्यता में कम से कम निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए-

1. शासन और प्रशासन का कोई रूप – जटिल समाज और उसके अनेक कार्यकलापों के प्रबंधन हेतु शासन और प्रशासन का कोई रूप होना आवश्यक है।

2. नगरीकरण – एक सभ्यता में नगर योजना, नगरों का विकास और उनका प्रबंधन, जिसमें सामान्यतः जल प्रबंधन और जल निकास व्यवस्था आती है।

3. विभिन्न प्रकार के शिल्प – एक सभ्यता में कच्चे माल जैसे पत्थर और धातु का प्रबंधन और तैयार माल, जैसे आभूषण और उपकरण का उत्पादन आवश्यक होता है।

4. व्यापार – एक सभ्यताओं में सभी प्रकार की वस्तुओं के आदान-प्रदान के लिए आंतरिक और बाहरी व्यापार का होना जरूरी होता है।

5. लेखन का कोई रूप – किसी भी सभ्यता में अभिलेखों को रखने और संवाद बनाने के लिए लेखन का कोई रूप होना आवश्यक है।

6. जीवन और विश्व के बारे में सांस्कृतिक विचार – एक सभ्यता में कला, स्थापत्य, साहित्य, श्रुति परंपराओं और सामाजिक रीति-रिवाजों के माध्यम से जीवन और विश्व की अभिव्यक्ति का होना भी आवश्यक है।

7. कृषि उत्पादकता – एक सभ्यता वह है, जिसके गाँव, गाँवों के साथ-साथ नगरों को भी भोजन उपलब्ध करा सकने हेतु पर्याप्त कृषि उत्पाद पैदा करते हों।

भारतीय सभ्यता का प्रारंभ Class 6 Notes

सभ्यता क्या है?
सामान्यतः सभ्यता शब्द का प्रयोग मानव समाज के उन्नत चरण के लिए किया जाता है। एक सभ्यता में कम से कम निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए—
(1) शासन और प्रशासन का कोई रूप (2) नगरीकरण (3) विभिन्न प्रकार के शिल्प (4) व्यापार (5) लेखन का कोई रूप (6) जीवन और विश्व के बारे में सांस्कृतिक विचार तथा (7) कृषि उत्पादकता।

कुछ प्रमुख प्राचीन सभ्यताओं के प्रारंभ का समय-
(1) विश्व के विभिन्न भागों में अलग-अलग समय पर सभ्यताओं का आरंभ हुआ। मेसोपोटामिया (आधुनिक इराक और सीरिया) में लगभग 6000 वर्ष पहले सभ्यता का आरंभ हुआ। लगभग 5000 वर्ष पहले मिस्र की सभ्यता का आरंभ हुआ और लगभग 5000 वर्ष पहले ही सिंधु-सरस्वती सभ्यता का प्रारंभ हुआ।

(2) सिंधु सभ्यता, हड़प्पा सभ्यता अथवा सिंधु-सरस्वती सभ्यता-

  • यह सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है।
  • सिंधु नदी ने पंजाब और सिंध के मैदानों को उपजाऊ और कृषि के अनुकूल बनाया और सरस्वती नदी ने हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और गुजरात के क्षेत्र को उपजाऊ बनाया।
  • 3500 सा.सं. पू. इस पूरे क्षेत्र में गाँव नगरों में परिवर्तित हो गए और 2600 सा.सं. पू. नगर, महानगरों में परिवर्तित हो गए। इस विकास प्रक्रिया को भारत का पहला नगरीकरण भी कहा जाता है।

नगर योजना-
हड़प्पा और मोहनजोदड़ो (जो अब पाकिस्तान में है) इस सभ्यता के सबसे पहले दो नगरों की खोज लगभग 1924 ई. में की गई। अधिकांश हड़प्पा सभ्यता के नगर सुनियोजित योजना के अन्तर्गत निर्मित किए गए थे। इस नगर योजना की प्रमुख विशेषताएं थीं- चारों दिशाओं को उन्मुख चौड़ी सड़कें, नगर के चारों ओर किलेबंदी तथा नगर के दो भाग ऊपरी नगर और निचला नगर, सामूहिक उद्देश्यों के उपयोग हेतु कुछ बड़े भवन, भवनों के निर्माण में ईंटों का प्रयोग तथा मोहनजोदड़ो का प्रसिद्ध स्नानागार जो संभवतः धार्मिक कार्यों के लिए प्रमुख होता था तथा नगर के अधिकांश घरों में स्नानागार का होना आदि।

जल प्रबंधन-

हड़प्पावासी जल प्रबंधन और स्वच्छता को बहुत महत्व देते थे। इस सभ्यता के जल प्रबंधन की प्रमुख विशेषताएं ये थीं-

  • घरों के स्नानागार जल निकासी प्रणाली से जुड़े हुए थे।
  • लाल ईंटों से बने हुए कुएँ थे तथा इसके अन्य क्षेत्रों में तालाब, पास के झरनों अथवा मानव निर्मित जलाशयों से पानी लेते थे।

उत्पादन तथा भोजन-

  • इस सभ्यता के लोगों के भोजन में विविधता थी। हड़प्पावासी दलहन, अनेक किस्म की सब्जियों, जौ, गेहूँ, बाजरा तथा धान आदि की खेती करते थे तथा उनका भोजन में उपयोग करते थे।
  • वे मांस के सेवन के लिए पशुओं को पालते थे तथा नदियों व समुद्रों से मछलियां पकड़ते थे।
  • खाना पकाने के पात्र मिट्टी के थे। इन पात्रों में दुग्ध उत्पाद, हल्दी, अदरक और केले के अवशेष मिले हैं।
  • वे कपास उगाते थे और इसका उपयोग कपड़ा बुनने में करते थे। उन्होंने हल सहित खेती के कई उपकरण बनाए।

सक्रिय व्यापार-

  1. हड़प्पावासी अपनी सभ्यता के साथ-साथ भारत के भीतर और बाहर की अन्य सभ्यताओं और संस्कृतियों के साथ भी सक्रिय रूप से व्यापार करते थे।
  2. उन्होंने आभूषणों, लकड़ी, सोने एवं कपास तथा कुछ खाद्य वस्तुओं का निर्यात किया तथा तांबे का आयात किया।
  3. उन्होंने इस तरह के व्यापार को संचालित करने के लिए स्थल मार्ग एवं नदियों तथा अधिक दूरवर्ती गंतव्यों के लिए समुद्री रास्तों का उपयोग किया। यह भारत की प्रथम गहन समुद्री गतिविधि थी।
  4. गुजरात और सिंध के तटवर्ती क्षेत्रों में कई हड़प्पाई बस्तियां स्थित हैं, जिसका उपयोग आयात और निर्यात के लिए किया जाता होगा।
  5. अनेक बस्तियों की खुदाई में मिली हजारों की संख्या में छोटी मोहरों का उपयोग संभवतः अपने-अपने सामान को पहचानने के लिए किया जाता था।

हड़प्पा सभ्यता के लोगों का जीवन-
(1) पुरातत्ववेत्ता हड़प्पावासियों द्वारा निर्मित और उपयोग की गई अनेक दैनिक उपयोग की वस्तुओं को सामने लेकर आए हैं, जैसे-एक कास्य दर्पण, एक पक्की मिट्टी का पात्र, भार तौलने के कुछ पत्थर, एक कास्य छैनी, पत्थर पर उकेरा गया एक खेल बोर्ड तथा एक 4 से.मी. लम्बी मिट्टी की सीटी आदि।

(2) इनके उपयोग की सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक वस्तुएं भी मिली हैं, जैसे- पुरोहित, राजा की एक छोटी मूर्ति, स्वास्तिक दर्शाती हुई मुहर, त्रिमुखी देवता को दर्शाती मुहर, नर्तकी की एक लघु कांस्य प्रतिमा, नमस्ते की मुद्रा में बैठी एक पक्की मिट्टी की मूर्ति आदि।

खुदाई में मिली इन सभी वस्तुओं के आधार पर हड़प्पावासियों की गतिविधियों तथा उनके जीवन के विविध पक्षों का पता लगता है।

हड़प्पा सभ्यता का पतन-
1900 सा.सं. पू. के आस-पास इस सिंधु-सरस्वती सभ्यता का उसकी सभी उपलब्धियों के बावजूद, ह्रास हो गया। इसके पतन के दो प्रमुख कारण थे-

  1. वर्षा की कमी और शुष्कता की स्थिति ने कृषि कार्य को कठिन बनाया तथा इससे खाद्य आपूर्ति में कमी आ गई।
  2. सरस्वती नदी का मध्य बेसिन सूख गया। वहाँ कालीबंगा और वनावली जैसे नगर अचानक छोड़ दिए गए।

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