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Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 8 Question Answer in Hindi आजादी का आन्दोलन और राजस्थान
हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 8 के प्रश्न उत्तर
I. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर के विकल्प को कोष्ठक में लिखिए-
प्रश्न 1.
‘चेतावणी रा चूंगट्या’ नामक प्रसिद्ध सोरठे लिखे थे-
(अ) केसरी सिंह बारहठ ने
(ब) अर्जुन लाल सेठी ने
(स) जोरावर सिंह बारहठ ने
(द) राव गोपाल सिंह खरवा ने
उत्तर:
(अ) केसरी सिंह बारहठ ने
प्रश्न 2.
राव सवाई कृष्ण सिंह के समय में बिजोलिया की जनता से लागतें (लाग) ली जाती थीं-
(अ) 48 प्रकार की
(ब) 84 प्रकार की
(स) 88 प्रकार की
(द) 44 प्रकार की
उत्तर:
(ब) 84 प्रकार की।
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II. स्तम्भ ‘अ’ को स्तम्भ ‘ब’ से सुमेलित कीजिए-
| स्तम्भ ‘अ’ | स्तम्भ ‘ब’ |
| मारवाड़ प्रजामंडल | माणिक्य लाल वर्मा |
| मेवाड़ प्रजामंडल | पं. अभिन्न हरि |
| जयपुर प्रजामंडल | जमनालाल बजाज |
| बीकानेर प्रजामंडल | जयनारायण व्यास |
| कोटा प्रजामंडल | मघाराम वैद्य |
उत्तर:
| स्तम्भ ‘अ’ | स्तम्भ ‘ब’ |
| मारवाड़ प्रजामंडल | जयनारायण व्यास |
| मेवाड़ प्रजामंडल | माणिक्यलाल वर्मा |
| जयपुर प्रजामंडल | जमनालाल बजाज |
| बीकानेर प्रजामंडल | मघाराम वैद्य |
| कोटा प्रजामंडल | पं. अभिन्न हरि |
III. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. भगत आंदोलन ………………….. द्वारा चलाया गया।
उत्तर:
गोविन्द गुरु
2. 1919 में वर्धा में राजस्थान सेवा संघ की स्थापना …………………… द्वारा की गयी।
उत्तर:
विजय सिंह पथिक।
IV. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
किन्हीं तीन किसान आंदोलनों के नाम लिखिए।
उत्तर:
तीन किसान आंदोलनों के नाम हैं-
- बिजोलिया किसान आंदोलन
- बेगूं किसान आंदोलन,
- बूंदी किसान आंदोलन।
प्रश्न 2.
गोविन्द गुरु किसके विचारों से प्रभावित थे?
उत्तर:
गोविन्द गुरु दयानंद सरस्वती के विचारों से बहुत अधिक प्रभावित थे।
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V. लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
बिजोलिया किसान आंदोलन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
भारत के पहले संगठित किसान आंदोलन के रूप में विख्यात बिजोलिया किसान आंदोलन 1897 ई. में धाकड़ जाति के किसानों द्वारा प्रारंभ किया गया, क्योंकि उस समय बिजोलिया की जनता से 84 प्रकार की लागतें वसूल की जाती थीं। किसानों के प्रतिनिधि नानजी और ठाकरी पटेल द्वारा इसकी शिकायत मेवाड़ महाराणा से करने पर नाराजगीस्वरूप राव कृष्ण सिंह ने प्रजा पर एक और कर ‘चंवरी कर’ लगा दिया तथा उसकी मृत्यु के बाद पृथ्वीसिंह ने ‘तलवार बन्दी’ कर लगाया। किसानों ने इसका विरोध किया। यह आंदोलन मुख्यतः तीन चरणों (1897 से 1914 1914 से 1923 एवं 1923 से 1941) में विभक्त था। विजयसिंह पथिक, जमनालाल बजाज आदि ने बिजोलिया किसान आन्दोलन का नेतृत्व किया। 1941 में एक लम्बे संघर्ष के बाद आंदोलन समाप्त हुआ।
प्रश्न 2.
प्रजामंडल से आप क्या समझते हैं? इनके नाम लिखिए।
उत्तर:
प्रजामंडल का अर्थ है-प्रजा का मंडल अथवा संगठन। राजस्थान में प्रजामंडलों ने जन भागीदारी में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। जन आंदोलन के संचालन का दायित्व जनता को दिया गया एवं राजस्थान की विभिन्न रियासतों में प्रजामंडलों का गठन किया गया, जिनके नाम हैं-
- मारवाड़ प्रजामंडल
- मेवाड़ राज्य प्रजामंडल
- कोटा राज्य प्रजामंडल
- जयपुर प्रजामंडल
- बीकानेर राज्य प्रजामंडल
कक्षा 7 हमारा राजस्थान पाठ 8 के प्रश्न उत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न –
प्रश्न 1.
बिजोलिया किसान आंदोलन कितने वर्षों तक चला?
(अ) 11
(ब) 22
(स) 33
(द) 44
उत्तर:
(द) 44
प्रश्न 2.
बेगूं किसान आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
(अ) जमनालाल बजाज
(ब) विजय सिंह पथिक
(स) रामनारायण चौधरी
(द) पं. नयनूराम
उत्तर:
(स) रामनारायण चौधरी
प्रश्न 3.
मारवाड़ प्रजामंडल की स्थापना कब हुई ?
(अ) सन् 1934 में
(ब) सन् 1936 में
(स) सन् 1938 में
(द) सन् 1939 में
उत्तर:
(अ) सन् 1934 में
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प्रश्न 4.
सेठ दामोदर दास राठी ने ब्यावर में आर्य समाज की नींव कब रखी ?
(अ) 1920 में
(ब) 1921 में
(स) 1935 में
(द) 1947 में
उत्तर:
(ब) 1921 में
प्रश्न 5.
आदिवासी जातियों के दूसरे मसीहा कौन थे?
(अ) गोविन्द गुरु
(ब) माणिक्यलाल वर्मा
(स) विजयसिंह पथिक
(द) मोतीलाल तेजावत
उत्तर:
(द) मोतीलाल तेजावत
प्रश्न 6.
अलवर महाराजा जयसिंह द्वारा की गई लगान वृद्धि के विरुद्ध किसानों ने नीमूचाणा गाँव में एक सभा का आयोजन किया-
(अ) 1921 में
(ब) 1917 में
(स) 1925 में
(द) 1943 में
उत्तर:
(स) 1925 में
प्रश्न 7.
सरदार हरलाल सिंह, नेतराम सिंह तथा पृथ्वीसिंह गोठड़ा जिस किसान आन्दोलन से जुड़े प्रमुख नेता थे, वह था-
(अ) शेखावाटी किसान आन्दोलन
(ब) नीमूचाणा किसान आन्दोलन
(स) बूंदी किसान आन्दोलन
(द) सीकर किसान आन्दोलन
उत्तर:
(द) सीकर किसान आन्दोलन
प्रश्न 8.
वर्ष 1903 में ‘संप सभा’ की स्थापना किसने की ?
(अ) गोविन्द गुरु ने
(ब) मोतीलाल तेजावत ने
(स) भोगीलाल पंड्या ने
(द) हरिदेव जोशी ने
उत्तर:
(अ) गोविन्द गुरु ने
प्रश्न 9.
जयपुर में वर्धमान विद्यालय की स्थापना की-
(अ) गोविन्द गुरु ने
(ब) मोतीलाल तेजावत ने
(स) जयनारायण व्यास ने
(द) अर्जुन लाल सेठी ने
उत्तर:
(द) अर्जुन लाल सेठी ने
प्रश्न 10.
24 अप्रैल, 1938 को किसकी अध्यक्षता में मेवाड़ प्रजामण्डल की स्थापना हुई ?
(अ) बलवंत सिंह मेहता
(ब) माणिक्यलाल वर्मा
(स) मघाराम वैद्य
(द) लक्ष्मणदास स्वामी
उत्तर:
(अ) बलवंत सिंह मेहता
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. चिड़ावा में ……………………… ने सेवा समिति का गठन किया।
उत्तर:
मास्टर कालीचरण
2. ………………………. में मानगढ़ पहाड़ी पर आश्विन सुदी पूर्णिमा को ………………… का अधिवेशन हो रहा था।
उत्तर:
1913 संप सभा
3. अलवर राज्य में …………………….. किसानों की फसलों को नुकसान पहुँचाते थे।
उत्तर:
जंगली सूअर
4. ……………………… में रणछोड़ दास गट्टानी की अध्यक्षता में ……………………… का गठन हुआ।
उत्तर:
1938, मारवाड़ लोक परिषद्
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5. भारत में संगठित किसान आन्दोलन की शुरुआत का श्रेय मेवाड़ के …………………… किसान आन्दोलन को जाता है।
उत्तर:
बिजोलिया
6. ……………………. में मघाराम वैद्य एवं ……………………… ने बीकानेर प्रजामंडल की स्थापना की।
उत्तर:
1936 लक्ष्मणदास स्वामी।
स्तंभ ‘अ’ को स्तम्भ ‘ब’ से सुमेलित कीजिए-
| स्तंभ ‘अ’ | स्तंभ ‘ब’ |
| 1. जरायम पेशा कानून | (अ) नानक भील |
| 2. बेगूं किसान आन्दोलन में शहीद | (ब) रूपाजी व कृपाजी धाकड़ |
| 3. बूंदी किसान आन्दोलन में शहीद | (स) 21 सूत्रीय माँगपत्र |
| 4. मेवाड़ की पुकार | (द) मीणा जनजाति |
| 5. सीकर किसान आन्दोलन | (य) सरदार हरलाल सिंह |
उत्तर:
| स्तंभ ‘अ’ | स्तंभ ‘ब’ |
| 1. जरायम पेशा कानून | (द) मीणा जनजाति |
| 2. बेगूं किसान आन्दोलन में शहीद | (ब) रूपाजी व कृपाजी धाकड़ |
| 3. बूंदी किसान आन्दोलन में शहीद | (अ) नानक भील |
| 4. मेवाड़ की पुकार | (स) 21 सूत्रीय माँगपत्र |
| 5. सीकर किसान आन्दोलन | (य) सरदार हरलाल सिंह |
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
1931 में किनके प्रयासों से जयपुर प्रजामण्डल की स्थापना हुई?
उत्तर:
1931 में कर्पूरचंद पाटनी एवं जमनालाल बजाज के प्रयासों से जयपुर प्रजामण्डल की स्थापना हुई।
प्रश्न 2.
बिजोलिया किसान आन्दोलन के तीसरे चरण का नेतृत्व किसने किया?
उत्तर:
जमनालाल बजाज ने ।
प्रश्न 3.
गोविन्द गुरु का जन्म कहाँ हुआ था ?
उत्तर:
गोविन्द गुरु का जन्म डूंगरपुर राज्य में एक साधारण बंजारा परिवार में हुआ था।
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प्रश्न 4.
अर्जुन लाल सेठी कितनी भाषाओं के जानकार थे ?
उत्तर:
ये अंग्रेजी, पारसी, संस्कृत, अरबी और पाली के विद्वान थे।
प्रश्न 5.
ब्रिटिश सरकार की अमानुषिक यातनाओं का शिकार होकर बरेली जेल में कौनसे क्रांतिकारी अल्पायु में ही शहीद हो गए?
उत्तर:
कुँवर प्रताप सिंह (केसरीसिंह बारहठ के पुत्र)।
प्रश्न 6.
राजस्थान में सशस्त्र क्रांति का कार्य किन्हें सौंपा गया?
उत्तर:
खरवा के ठाकुर गोपाल सिंह एवं विजय सिंह पथिक को।
प्रश्न 7.
चंवरी कर किसे कहते हैं?
उत्तर:
जनता से बेटी की शादी पर जागीरदार द्वारा लिया जाने वाला कर चंवरी कर कहलाता है।
प्रश्न 8.
गाँधीजी ने किसे राजस्थान का जलियाँवाला बाग हत्याकांड कहा?
उत्तर:
नीमूचाणा गाँव में किसानों की सभा पर गोली चलाने की घटना को गाँधीजी ने राजस्थान का जलियाँवाला बाग हत्याकांड कहा।
प्रश्न 9.
बूंदी के किसानों ने कब और किसके नेतृत्व में लाग-बाग व बेगार के विरुद्ध आन्दोलन छेड़ा ?
उत्तर:
सन् 1926 में पं. नयनूराम, रामनारायण चौधरी तथा हरिभाई किंकर के नेतृत्व में।
प्रश्न 10.
भीलों में जागृति की विचारधारा का प्रसार करने में किसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही?
उत्तर:
गोविन्द गुरु की।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-I
प्रश्न 1.
बीकानेर प्रजामंडल के बारे में जानकारी दीजिए।
उत्तर:
वर्ष 1936 में मघाराम वैद्य एवं लक्ष्मणदास स्वामी ने बीकानेर प्रजामंडल की स्थापना की 30 जून, 1946 को रायसिंह नगर में प्रजामंडल का खुला अधिवेशन आयोजित किया गया।
प्रश्न 2.
सरकार ने 1924 में क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के तहत् मीणा जनजाति पर क्या पाबन्दी लगाई ?
उत्तर:
सरकार ने 1924 में क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के तहत् 12 वर्ष से अधिक आयु के मीणा जनजाति के लोगों को प्रतिदिन नजदीकी थाने में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पाबन्द किया। इससे मीणा जनजाति में असंतोष फैला।
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प्रश्न 3.
मारवाड़ प्रजामंडल पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
मारवाड़ प्रजामंडल – वर्ष 1934 में जोधपुर में भंवरलाल सर्राफ की अध्यक्षता में जयनारायण व्यास ने मारवाड़ प्रजामंडल की स्थापना की। प्रजामंडल को गति प्रदान करने के लिए वर्ष 1938 में रणछोड़ दास गट्टानी की अध्यक्षता में मारवाड़ लोक परिषद् का गठन हुआ।
प्रश्न 4.
ब्रिटिश काल में राजस्थान में मीणा जनजाति आन्दोलन क्यों चलाया गया?
उत्तर:
मीणा समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने, जरायम पेशा कठोर कानून को हटवाने और चौकीदारी प्रथा समाप्त करने के लिए आन्दोलन चलाया गया। स्वतन्त्रता के बाद सन् 1952 में जाकर जरायम पेशा कानून समाप्त हुआ।
प्रश्न 5.
संप सभा की स्थापना कब, किसने और क्यों की?
उत्तर:
संप सभा की स्थापना 1903 में गोविन्द गुरु ने डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, दक्षिणी मेवाड़, सिरोही, गुजरात और मालवा के बीच के पहाड़ी प्रदेश में रहने वाले आदिवासियों को संगठित करने तथा उनको शराब, माँस, चोरी, लूटमार आदि से दूर करने तथा उनके शैक्षिक व नैतिक उत्थान हेतु किया।
प्रश्न 6.
जन आंदोलन के संदर्भ में जवाहरलाल नेहरू के क्या विचार हैं?
उत्तर:
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि किसी स्थान पर जन-आन्दोलन तभी आरम्भ हो सकता है, जब वहाँ की जनता तैयार हो। जन-आन्दोलन के संचालन का दायित्व जनता को दिया गया।
प्रश्न 7.
विजयसिंह पथिक का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
विजय सिंह पथिक इनका जन्म उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हुआ, इनका वास्तविक नाम भूपसिंह गुर्जर था। इन्होंने विजय सिंह पथिक के नाम से बिजोलिया किसान आंदोलन के दूसरे चरण का सफल नेतृत्व किया। सन् 1919 में वर्धा में इन्होंने राजस्थान सेवा संघ की स्थापना की।
लघुत्तरात्मक प्रश्न- II
प्रश्न 1.
राजस्थान में आजादी का आंदोलन किस प्रकार शुरू हुआ?
उत्तर:
जब देश में आजादी के आंदोलनों का दौर चल रहा था, तब राजस्थान भी इससे अछूता नहीं रहा। इस समय राजस्थान के अजमेर पर अंग्रेजों का प्रत्यक्ष आधिपत्य था जबकि शेष राजस्थान पर देशी राजा-महाराजाओं का शासन था। अतः यहाँ स्वतंत्रता संघर्ष का स्वरूप थोड़ा भिन्न था। धीरे-धीरे अंग्रेजों ने देशी रियासतों के काम-काज में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया था, जिससे कि यहाँ के सामाजिक ताने-बाने में फर्क आया। इन सबके विरुद्ध यहाँ के किसानों एवं जनजातियों ने आवाज बुलंद की एवं संघर्ष किया। कालान्तर में विभिन्न रियासतों में प्रजामंडलों की स्थापना हुई। इन प्रजामंडलों ने लोगों में राजनीतिक चेतना जागृत की एवं उन्हें एकीकृत किया।
प्रश्न 2.
राजस्थान में किसान आंदोलन क्यों हुए?
उत्तर:
मध्यकाल में राजस्थान के जागीरदारों और किसानों के आपसी संबंध मधुर थे। अतः विभिन्न जागीरदार क्षेत्रीय किसानों को अपनी जागीर में बसने हेतु प्रोत्साहित करते थे। परन्तु बाद में अंग्रेजों एवं राजाओं के मध्य सहायक संधियाँ हुईं जिससे कि अंग्रेजों ने राजाओं से नकद लगान वसूलना प्रारम्भ किया। राजाओं ने यह राशि जागीरदारों से तथा जागीरदारों ने संबंधित किसानों से वसूलनी प्रारंभ की। अंग्रेजों की संगत में आकर पहले राजा, फिर जागीरदार ऐशोआराम में संलिप्त हो गए। इस तरह के खर्चों का बोझ भी किसानों पर डाला जाने लगा। उन पर लागतें बढ़ा दी गईं। इन सभी दिक्कतों से परेशान होकर किसानों ने अपना विरोध जताने के लिए विभिन्न आंदोलन किए।
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प्रश्न 3.
अलवर (नीमूचाणा) किसान आंदोलन की संक्षेप में व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
अलवर किसान आंदोलन – यह आंदोलन दो कारणों से हुआ। प्रथम, अलवर राज्य में जंगली सूअरों का आतंक था, वे किसानों की फसलों को नुकसान पहुँचाते। परन्तु उन्हें मारने की मनाही थी, अतः 1921 में किसानों ने आंदोलन किया। द्वितीय, सन् 1925 में अलवर महाराजा जय सिंह द्वारा की गई लगान वृद्धि के विरुद्ध किसानों ने नीमूचाणा गाँव में सभा का आयोजन किया। इस सभा पर जलियांवाला बाग की तरह अंधाधुंध गोलियाँ चलाई गई जिसमें सैकड़ों किसान, स्त्रियाँ व बच्चे मारे गए। अनेक घर जला दिए गए तथा अनेक पशु जलकर मर गए।
प्रश्न 4.
सेठ दामोदर दास राठी के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
सेठ दामोदर दास राठी-इनका जन्म मारवाड़ के पोकरण में हुआ था। इनका बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय चर्चाओं की ओर झुकाव था। खरवा के राव गोपाल सिंह से श्री राठी की गहरी मित्रता थी। प्रथम महायुद्ध के दौरान सम्पूर्ण देश में 21 फरवरी, 1915 को क्रांति करने की योजना थी। इस हेतु, राजस्थान में अजमेर व नसीराबाद की छावनी पर कब्जा करने की जिम्मेदारी खरवा के राव गोपाल सिंह और भूपसिंह को दी गई। इस दौरान आर्थिक सहायता सेठ दामोदर दास राठी ने उपलब्ध करवाई थी। सन् 1921 में श्री राठी ने ब्यावर में आर्य समाज की नींव रखी।
प्रश्न 5.
सीकर किसान आन्दोलन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सीकर किसान आंदोलन – जयपुर राज्य के बड़े ठिकानों में से एक सीकर में किसानों ने लगान वृद्धि का विरोध किया। सरदार हरलाल सिंह, नेतराम सिंह तथा पृथ्वी सिंह गोठड़ा इस आंदोलन के प्रमुख नेता थे। किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर गोलियाँ चलीं, जिसकी गूँज लंदन के हाउस ऑफ कॉमंस में हुई। अंततः बंदोबस्त सुधार हेतु किसानों को आश्वस्त करना पड़ा तथा लगान में भी कमी – करनी पड़ी।
प्रश्न 6.
बिजोलिया किसान आंदोलन के दौरान किन- किन महान विभूतियों ने अपना सहयोग दिया?
उत्तर-
बिजोलिया किसान आंदोलन धाकड़ जाति के किसानों द्वारा प्रारम्भ किया गया। किसानों के प्रतिनिधि नानजी और ठाकरी पटेल ने मेवाड़ महाराणा से 84 प्रकार की लागतों की शिकायत की तथा साधु सीताराम दास, फतहकरण चारण और ब्रह्मदेव ने प्रथम चरण में नेतृत्व किया। दूसरे चरण में विजयसिंह पथिक ने आंदोलन का नेतृत्व किया, उनको माणिक्यलाल वर्मा का भी साथ मिला। आंदोलन के तीसरे चरण में जमनालाल बजाज ने नेतृत्व की कमान संभाली। अंजना देवी चौधरी, रमा देवी, नारायणी देवी वर्मा जैसी महिला नेत्रियों ने भी इस आंदोलन में अपना योगदान दिया। लगभग 44 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद आंदोलन सफलतापूर्वक समाप्त हुआ।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
राजस्थान के किन्हीं तीन किसान आंदोलनों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान के तीन किसान आंदोलन निम्नलिखित हैं-
1. बेगूं किसान आंदोलन-बिजोलिया आंदोलन से प्रेरित होकर मारवाड़ के बेगूं ठिकाने में भी किसानों ने जागीरदारों के विरुद्ध आवाज उठाई। पथिक जी के आदेश से रामनारायण चौधरी ने किसानों का नेतृत्व किया। रुपाजी व कृपाजी धाकड़ जैसे नेताओं ने अपना बलिदान देकर आंदोलन को सफल बनाया। प्रशासन को झुकना पड़ा और 53 में से 34 लागतें समाप्त की गईं व बेगार भी बंद कर दिया गया।
2. बूंदी किसान आंदोलन इस आंदोलन की शुरुआत सन् 1926 में पं. नयनूराम, रामनारायण चौधरी एवं हरिभाई किंकर के नेतृत्व में हुई। किसानों ने लाग-बाग व बेगार का विरोध किया, नानक भील को पुलिस की गोली का शिकार होना पड़ा। अंततः बूंदी राज्य प्रशासन ने 1943 में किसानों की माँगें स्वीकार कर ली।
3. शेखावाटी किसान आंदोलन- शेखावाटी के किसानों ने भी लगान वृद्धि का विरोध किया। चिड़ावा में मास्टर कालीचरण ने सेवा समिति का गठन किया। नवलगढ़, मंडावा, डूंडलोद, बिसाऊ, मालासर के किसानों ने भी लगान देने से मना कर दिया । ठिकानेदारों व ठाकुरों ने किसानों पर निर्मम अत्याचार किये। यहाँ का स्थायी समाधान आजादी के बाद हो पाया।
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प्रश्न 2.
राजस्थान में भील जनजाति आन्दोलन का विवेचन कीजिए।
उत्तर:
भील जनजाति आंदोलन – भील जनजाति में जागृति की विचारधारा का सूत्रपात करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका गोविंद गुरु की रही। उन्होंने संप सभा की स्थापना की और भीलों को एकजुट किया। उन्होंने बेगार व अनुचित लागतें न देने हेतु भीलों का आह्वान किया। सन् 1913 में मानगढ़ पहाड़ी पर आश्विन सुदी पूर्णिमा को संप सभा का अधिवेशन किया जा रहा था तब अंग्रेजी सिपाहियों ने पहाड़ी को चारों तरफ से घेरकर अंधाधुंध गोलियाँ चलाई। परिणामतः घटनास्थल पर ही हजारों की संख्या में भील आदिवासी मारे गये और अनगिनत घायल हुए। चूँकि गोविंद गुरु के अनुयायियों को भगत कहा जाता था, अतः इस आंदोलन को भगत आंदोलन भी कहा गया।
आदिवासी समुदाय के दूसरे मसीहा थे मोतीलाल तेजावत। उन्होंने चित्तौड़गढ़ के मातृकुण्डीयां में किसानों व आदिवासियों को बेगार, लगान, अत्याचार आदि के विरुद्ध संघर्ष हेतु जागृत किया। आंदोलन को गति देने के लिए एकता पर बल दिया गया, अत: इसे एकी आंदोलन भी कहा गया। इस आंदोलन के तहत हजारों आदिवासी उदयपुर में एकत्रित हुए तथा महाराणा को 21 सूत्रीय मांगपत्र दिया, इस मांगपत्र को ‘मेवाड़ की पुकार’ के नाम से जाना जाता है। महाराणा ने तत्काल 18 माँगें मान लीं।
बाँसवाड़ा, देवल और डूंगरपुर में भीलों को संगठित करने में भोगीलाल पंड्या तथा हरिदेव जोशी की भी महती भूमिका रही।
प्रश्न 3.
राजस्थान में हुए मीणा जनजाति आन्दोलन पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
मीणा जनजाति आंदोलन प्रारम्भ में अंग्रेजी शासन ने मीणा जनजाति के एक विशेष वर्ग को शांति व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दे रखी थी। अतः ये मीणा लोग गाँवों की चौकीदारी करते थे। इस तरह के मीणाओं को ‘चौकीदार मीणा’ कहा जाता था। आगे चलकर, राज्य में होने वाली चोरी-डकैती के लिए अक्सर इन मीणाओं को जिम्मेदार ठहराया जाने लगा और कोई चोरी हुआ माल बरामद न होने पर उस माल की कीमत मीणाओं से वसूली जाने लगी। अंग्रेजी सरकार ने 1924 में क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के तहत 12 वर्ष से अधिक आयु के मीणा जाति के लोगों को प्रतिदिन समीप के थाने में अपनी उपस्थिति देने हेतु पाबंद कर दिया। इस कानून एवं व्यवहार से मीणाओं में असंतोष व रोष व्याप्त हो गया।
मीणा समाज में व्याप्त विभिन्न बुराइयों का निराकरण करने, जरायम पेशा जैसे कठोर कानून को हटवाने और चौकीदारी प्रथा समाप्त करने के लिए आंदोलन चलाया गया। लगातार कोशिशों के परिणामस्वरूप आजादी के बाद सन् 1952 में जाकर जरायम पेशा कानून समाप्त किया जा सका।
प्रश्न 4.
राजस्थान की किन्हीं तीन रियासतों में प्रजामंडलों की स्थापना पर प्रकाश डालिए ।
उत्तर:
राजस्थान की तीन रियासतों में प्रजामंडलों की स्थापना निम्नवत् हुई-
1. जयपुर प्रजामंडल – यह राजस्थान का पहला प्रजामंडल था। इसकी स्थापना सन् 1931 में कर्पूरचंद पाटनी एवं जमनालाल बजाज के प्रयासों से हुई। सन् 1936 में इस प्रजामंडल का पुनर्गठन हुआ तथा चिरंजीलाल मिश्र के नेतृत्व में इसने कार्य करना शुरू किया। सन् 1938 में जमनालाल बजाज की अध्यक्षता में पहला अधिवेशन हुआ। आगे चलकर हीरालाल शास्त्री भी जयपुर प्रजामंडल के अध्यक्ष बने। इस प्रजामंडल ने रियासत में उत्तरदायी शासन की स्थापना की माँग रखी।
2. मेवाड़ प्रजामंडल – बलवंत सिंह मेहता की अध्यक्षता में 24 अप्रैल, 1938 को मेवाड़ राज्य प्रजामंडल स्थापित किया गया। माणिक्यलाल वर्मा ने इसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस प्रजामंडल ने महाराणा पर निरंतर दबाव डाला कि वे अंग्रेजों से संबंध न रखें। स्वतंत्रता संघर्ष में भी प्रजामंडल की सक्रिय भूमिका रही थी।
3. कोटा प्रजामंडल इस हाड़ौती प्रजामंडल की स्थापना नयनूराम ने अभिन्न हरि, तनसुख लाल आदि के सहयोग से की। मई 1939 में कोटा में पं. नयनूराम की अध्यक्षता में प्रजामंडल का अधिवेशन हुआ। कोटा राज्य प्रजामंडल के कार्यकर्ताओं ने भी भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया तथा उत्तरदायी शासन की माँग रखी।
प्रश्न 5.
राजस्थान के निम्नलिखित जननायकों पर संक्षिप्त| टिप्पणी लिखिए –
(1) गोविंद गुरु
(2) अर्जुनलाल सेठी
(3) केसरी सिंह बारहठ।
उत्तर:
1. गोविंद गुरु इनका जन्म डूंगरपुर राज्य में एक साधारण बंजारा परिवार में हुआ था। ये दयानंद सरस्वती से अत्यधिक प्रभावित थे। इन्होंने सामाजिक उत्थान के उद्देश्य से 1903 में संप सभा की स्थापना की। संप सभा के माध्यम से इन्होंने आदिवासियों का चारित्रिक विकास एवं सामाजिक उत्थान किया। आदिवासियों को शराब, मांस, चोरी, लूटमार आदि से दूर रहने का उपदेश दिया। इस प्रकार, गोविंद गुरु ने डूंगरपुर, बांसवाड़ा, दक्षिणी मेवाड़, सिरोही, गुजरात और मालवा के बीच के पहाड़ी प्रदेश में रहने वाले आदिवासियों को संगठित कर दिया।
2. अर्जुनलाल सेठी – इनका जन्म जयपुर में हुआ था। ये अंग्रेजी, पारसी, संस्कृत, अरबी और पाली के विद्वान थे। जयपुर में इन्होंने वर्धमान विद्यालय की स्थापना की, जहाँ देशभर के क्रांतिकारियों को समुचित प्रशिक्षण देने की व्यवस्था थी। श्री सेठी धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों को देश सेवा एवं क्रांति का पाठ भी पढ़ाते थे। राजस्थान में सशस्त्र क्रांति का संगठन करने की जिम्मेदारी श्री सेठी को दी गयी।
3. केसरी सिंह बारहठ – केसरी सिंह बारहठ राजस्थान में सशस्त्र क्रांति के साथ जुड़े थे। इन्होंने राजपूताने के जागीरदारों व रईसों का स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय सहयोग प्राप्त करने का कार्य किया। उदयपुर, जोधपुर व बीकानेर के राजघरानों पर केसरी सिंह बारहठ का गहरा प्रभाव था । उन्होंने ‘ चेतावनी रा चूंगट्या’ नामक प्रसिद्ध सोरठे लिखकर मेवाड़ महाराणा को अंग्रेजों के प्रति सचेत किया।
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प्रश्न 6.
राजस्थान के किन्हीं तीन जननायकों की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान के तीन जननायकों की भूमिका का वर्णन निम्नलिखित है-
1. ठाकुर जोरावर सिंह बारहठ-ये ठाकुर केसरी सिंह बारहठ के छोटे भाई और अमर शहीद कुंवर प्रताप सिंह के चाचा थे। चाँदनी चौक में लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंकने वाले रासबिहारी बोस के साथ ठाकुर जोरावर सिंह भी उपस्थित थे। इनको पकड़ने के लिए कोटा सरकार तथा बिहार सरकार ने भारी इनाम की घोषणा कर रखी थी। अतः ये लगातार भूमिगत रहे।
2. कुंवर प्रताप सिंह बारहठ-ये केसरी सिंह बारहठ के पुत्र थे। इन्होंने रासबिहारी बोस के साथ क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया। इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और बरेली जेल में भेज दिया गया, जहाँ कठोर यातनाएँ दी गईं। इनसे अन्य क्रांतिकारियों के बारे में पूछताछ की गई परंतु इन्होंने अपने साथियों के बारे में नहीं बताया। अंग्रेजों की अमानुषिक यातनाओं का शिकार होकर बरेली जेल में अल्पायु में ही शहीद हो गये ।
3. राव गोपाल सिंह खरवा – इन्होंने राजस्थान में सशस्त्र क्रांति के दौरान विजयसिंह पथिक का पूर्ण सहयोग किया। क्रांति की योजना विफल हो गयी और इन दोनों को टॉडगढ़ किले में नजरबंद कर दिया गया। कुछ दिनों बाद वे वहाँ से भाग निकले परंतु गोपाल सिंह पुनः सलेमाबाद में पकड़ लिए गए और तिहाड़ जेल भेज दिए गए। सन् 1920 में रिहा होने पर वे रचनात्मक कार्यों में संलग्न हो गए।
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