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Sanskrit Class 7 Chapter 9 Hindi Translation अन्नाद् भवन्ति भूतानि Summary
कक्षा 7 संस्कृत पाठ 9 हिंदी अनुवाद
Sanskrit Class 7 Chapter 9 Hindi Anuvad
पाठ – परिचय / सार
यह पाठ एक माता और पुत्री के बीच हुए संवाद के रूप में प्रस्तुत है, जिसमें सृष्टि की उत्पत्ति और उसका क्रम बताया गया है । पुत्री जिज्ञासा करती है कि मनुष्य और जीव-जंतु पृथ्वी पर कैसे आए । माता उत्तर देती हैं कि सबसे पहले ब्रह्म (चेतन शक्ति) से आकाश उत्पन्न हुआ, आकाश से वायु, वायु से अग्नि, अग्नि से जल और जल से पृथ्वी की उत्पत्ति हुई ।
पृथ्वी से वनस्पतियाँ, औषधियाँ, वृक्ष, अन्न उत्पन्न हुए । इन्हीं से आहार बना और आहार से कीट, पशु, पक्षी और अंततः मनुष्यों की उत्पत्ति हुई । यही सृष्टि की परंपरा है- आहार के बिना कोई प्राणी जीवित नहीं रह सकता। इसलिए कहा गया है- ” अन्नाद् भवन्ति भूतानि ” अर्थात् अन्न से सभी प्राणियों की उत्पत्ति होती है ।
यह पाठ केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन और उपनिषदों पर आधारित है, जिसमें पंचमहाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) की उत्पत्ति-क्रम के माध्यम से गहरा ज्ञान छिपा है । पाठ अंत में यह संदेश देता है कि हमें भारतीय ग्रन्थों का अध्ययन करना चाहिए, क्योंकि उनमें मौलिक ज्ञान का स्रोत निहित है।
पाठ के कठिन – शब्दार्थ
भूतानि = समस्त प्राणी । अम्ब! = माँ ! । ब्रह्मणः = सृष्टिकर्ता से । काचित् = कोई । जिज्ञासा = जानने की इच्छा । तदर्थम् = इसलिए। उत्पत्तिक्रमम् = उत्पत्ति का क्रम । जानीयात् = जानना चाहिए । वत्से ! = बेटी ! अग्नेः = आग से। विस्मृतवती = भूल गयी। ओषधीनाम् = जड़ी-बूटियों का। उक्तवती = बोली । पठनीयम् = पढ़ना चाहिए। अणुः = सूक्ष्म कण । आहारः = भोजन । कीटाः = कीड़े । भूमौ = धरती पर। सस्य = फसल । निहितम् = निहित / समाहित ।
भूमिका / प्रस्तावना –
भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे ………………………………………………………. ‘विषये वयं पठामः ।
हिन्दी अनुवाद – भारत की प्रतिष्ठा दो बातों पर आधारित है- संस्कृति और संस्कृत । भारत का विशिष्ट प्राचीन ज्ञान संस्कृत भाषा पर आधारित है । संस्कृति भी संस्कृत पर ही आश्रित है। हमारे देश के प्राचीन ऋषि-मुनि, विद्वान, गणितज्ञ, खगोलशास्त्री, भूगर्भशास्त्री, मूर्तिकला के विशेषज्ञ, संगीत-नाट्य के ज्ञाता, तंत्रशास्त्र के विशेषज्ञ, आयुर्वेद के वैद्य, जल-वायु-प्राकृतिक पर्यावरण के जानकार, वास्तुकला के विशारद, जीवविज्ञान, रसायनशास्त्र, धातु – विज्ञान (लौहशास्त्र) के वैज्ञानिक, राजनीति, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान, तर्क, पाक – कला, सौंदर्यशास्त्र, नीति, धर्म और विधि- शास्त्र के ज्ञाता – इन सभी ने अपने-अपने क्षेत्र में भारत की कीर्ति चारों दिशाओं में फैलाई। आज भी बहुत से वैज्ञानिक संस्कृत ग्रन्थों पर आधारित शोध कर रहे हैं। भारतीय दर्शन में सृष्टि की उत्पत्ति के बारे में विभिन्न विचार प्रस्तुत किए गए हैं । ये विचार वैदिक और लौकिक संस्कृत वाङ्मय ( साहित्य) में मिलते हैं । उनमें सृष्टि के क्रम के विषय में हम पढ़ते हैं ।
पाठ के नाट्यांशों का हिन्दी – अनुवाद-
(1)
पुत्री – अम्ब! मम काचिद् ………………………………………………………….. “सर्वत्र व्याप्तः अस्ति ।
हिन्दी अनुवाद –
पुत्री – माँ ! मेरी एक जिज्ञासा है। हम मनुष्य, जीव-जंतु और कीट-पतंगे यह सब पृथ्वी पर कैसे आए?
माता – वत्से ! इसके लिए पहले तुम्हें पृथ्वी की उत्पत्ति का क्रम जानना चाहिए।
पुत्री – वाह ! यह तो रोचक होगा । कृपया मुझे सुनाइए ।
माता – ठीक है ! सबसे पहले ब्रह्म से आकाश की उत्पत्ति हुई ।
पुत्री – माँ ! “ब्रह्म” कहने का क्या अर्थ है ?
माता – “ब्रह्म” का अर्थ है चेतना की शक्ति, वह ऊर्जा जो सर्वत्र व्याप्त है। जैसे- आकाश और परमाणु (अणु) हर जगह फैले हुए हैं ।
(2)
पुत्री – अनन्तरम् ? …………………………………………………… कस्य उत्पत्तिः अभवत्?
हिन्दी अनुवाद-
पुत्री – फिर (उसके बाद क्या हुआ ?
माता – आकाश से वायु उत्पन्न हुई ।
पुत्री – माँ ! पृथ्वी कब उत्पन्न हुई ?
माता – सुनो बेटी, मैं बताती हूँ। वायु से अग्नि उत्पन्न हुई ।
पुत्री – माँ! यह सब क्यों हुआ? आप मनुष्यों की सीधी उत्पत्ति बताइए ।
माता – अरे बेटी ! जब यह सब (तत्व) नहीं था, तब मनुष्य या प्राणी कैसे जीवित रह सकते थे ?
पुत्री – जल, भोजन और वायु तो होते ही हैं माँ, यही तो काफी हैं !
माता – हाँ, इसलिए इनकी भी उत्पत्ति को जानना चाहिए।
पुत्री – तो फिर, अग्नि से किसकी उत्पत्ति हुई ?
(3)
माता – अग्नेः जलस्य उत्पत्तिः ………………………………………………….. ‘उत्पन्नाः खलु अम्ब ?
हिन्दी अनुवाद –
माता – अग्नि से जल की उत्पत्ति हुई ।
पुत्री – क्या मनुष्य की उत्पत्ति जल से हुई है, वास्तव में ?
माता – नहीं बेटी ! जल से पृथ्वी उत्पन्न हुई ।
पुत्री – ओह ! यह तो सच है – मैं विस्तार से समझ गई । पृथ्वी से ही जीव और मनुष्य उत्पन्न हुए।
माता – नहीं, नहीं! पृथ्वी से औषधियाँ, अनाज और वृक्ष आदि उत्पन्न हुए।
पुत्री – वाह! कितना अद्भुत है !
माता – फसलों से ही भोजन की उत्पत्ति हुई ।
पुत्री – हाँ, भोजन के बनने के बाद ही धरती पर सब कुछ आया । भोजन से ही कीड़े, जीव और मनुष्य उत्पन्न हुए, है न माँ ?
(4)
माता – अहो ! मम पुत्री बहु चतुरा ………………………………………………………………………. ‘उत्कर्षः भवति ।
हिन्दी अनुवाद-
माता – अरे ! मेरी बेटी बहुत चतुर है। तुमने सच कहा ।
पुत्री – माँ ! आप यह सब कैसे जानती हैं ?
माता – मैंने आधुनिक रसायनशास्त्र और उपनिषद ग्रंथों का अध्ययन किया है
पुत्री – वाह! माँ मैं भी उपनिषद पढ़ती हूँ ।
माता – सच है वत्से ! उपनिषदों का अध्ययन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि हमारे भारत का मौलिक ज्ञान उन्हीं में निहित है। उनसे हमारे जीवन का भी उत्कर्ष (विकास) होता है।
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