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Class 7th Science Chapter 9 Question Answer in Hindi Medium
Science Class 7 Chapter 9 Question Answer in Hindi
NCERT Class 7 Science Chapter 9 Question Answer Hindi Medium
आइए, और अधिक सीखें
प्रश्न 1.
रिक्त बक्सों को उचित भागों से भरकर आहार नाल के द्वारा भोजन की यात्रा को पूरा कीजिए।

उत्तर:

व्याख्या:
डायाफ्राम का कार्य फेफड़ों को फैलाने और सिकोड़ने में मदद करना है। जब डायाफ्राम नीचे की ओर खिंचता है तो वायु फेफड़ों में प्रवेश करती है (अंतःश्वसन) और जब यह ऊपर की ओर उठता है तो वायु फेफड़ों से बाहर निकलती है (उच्छवसन)।
प्रश्न 4.
निम्नलिखित का मिलान कीजिए
| भाग का नाम | प्रकार्य |
| (i) नासाद्वार | (क) बाहर से हवा प्रवेश करती है। |
| (ii) नासा पथ | (ख) गैसों का विनिमय होता है। |
| (iii) श्वासनली | (ग) फेफड़ों को सुरक्षा प्रदान करते हैं। |
| (iv) कूपिकाएँ | (घ) सूक्ष्म रोम और श्लेष्मा हमारे द्वारा ग्रहण की गई वायु में से धूल और गंदगी को रोकने में सहायक है। |
| (v) पसली पिंजर | (ङ) इस भाग से होकर वायु हमारे फेफड़ों तक पहुँचती है। |
उत्तर:
| भाग का नाम | प्रकार्य |
| (i) नासाद्वार | (घ) सूक्ष्म रोम और श्लेष्मा हमारे द्वारा ग्रहण की गई वायु में से धूल और गंदगी को रोकने में सहायक है। |
| (ii) नासा पथ | (क) बाहर से हवा प्रवेश करती है। |
| (iii) श्वासनली | (ङ) इस भाग से होकर वायु हमारे फेफड़ों तक पहुँचती है। |
| (iv) कूपिकाएँ | (ख) गैसों का विनिमय होता है। |
| (v) पसली पिंजर | (ग) फेफड़ों को सुरक्षा प्रदान करते हैं। |
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प्रश्न 5.
अनिल ने अपनी सहपाठी सान्वी से कहा कि श्वसन और श्वास लेना एक ही प्रक्रिया है। अनिल को ये समझाने के लिए कि यह कथन सही नहीं है, सान्वी उससे क्या प्रश्न पूछ सकती है?
उत्तर:
सान्वी पूछ सकती है-“यदि श्वसन और श्वास लेना एक ही प्रक्रिया है तो श्वास लेने से हमें ऊर्जा क्यों नहीं मिलती ? ” इससे स्पष्ट होगा कि श्वास लेना केवल वायु को अंदर बाहर करना है, जबकि श्वसन (Respiration) एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें भोजन से ऊर्जा मुक्त होती है।
प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है और क्यों? अनु-हम वायु को अंतःश्वसित करते हैं। शानू- हम ऑक्सीजन को अंतःश्वसित करते हैं। तनु-हम ऑक्सीजन से समृद्ध वायु को अंतःश्वसित करते हैं।
उत्तर:
सही कथन है – तनु का कथन। कारण : हम जो वायु अंतःश्वसित करते हैं उसमें नाइट्रोजन लगभग 78% और ऑक्सीजन लगभग 21% होती है। अर्थात् हम ऑक्सीजन से समृद्ध वायु अंदर लेते हैं, न कि शुद्ध ऑक्सीजन।
प्रश्न 7.
जब हम श्वास के साथ धूल भरी वायु को अंदर लेते हैं तो प्रायः हम छींकते हैं। इसके संभावित कारण क्या हो सकते हैं?
उत्तर:
धूल के कण नाक के श्लेष्मा और बालों में फँस जाते हैं। ये श्वसन तंत्र को उत्तेजित करते हैं और शरीर इनको बाहर निकालने के लिए छींक पैदा करता है। छींक एक रक्षात्मक क्रिया है जो धूल व हानिकारक कणों को बाहर फेंकती है।
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प्रश्न 8.
कक्षा 7 की छात्राएँ परिधि और अनुषा ने अपने प्रातः कालीन व्यायाम के लिए दौड़ना आरंभ किया। अपनी दौड़ पूरी करने के बाद उन्होंने प्रति मिनट ली जाने वाली श्वासों की गिनती की। अनुषा, परिधि की अपेक्षा अधिक तेजी से श्वास ले रही थी। परिधि की अपेक्षा अनुषा द्वारा अधिक तेजी से श्वास लेने के कम से कम दो संभावित कारण बताइए।
उत्तर:
(1) अनुषा की शारीरिक क्षमता परिधि की अपेक्षा कम हो सकती है, जिससे उसे अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ी।
(2) अनुषा ने परिधि से अधिक तेजी / दूरी तक दौड़ लगाई होगी, जिससे उसके शरीर में ऊर्जा की अधिक माँग हुई और श्वास की गति बढ़ गई।
प्रश्न 9.
यदु ने अपने विचार परीक्षण के लिए एक प्रयोग किया। उसने दो परखनलियाँ ‘क’ और ‘ख’ लीं। परखनलियों को पानी से आधा भरकर और उनमें एक चुटकी चावल का आटा मिला कर उन्हें अच्छी तरह हिलाया। परखनली ‘ख’ में उसने कुछ बूंदें लार की मिलाई। दोनों परखनलियों को उसने 35-40 मिनट के लिए यथावत रहने दिया। उसके बाद उसने दोनों परखनलियों में आयोडीन विलयन डाला। प्रयोग के परिणाम चित्र 9.15 में दर्शाए गए हैं। आपके विचार से वह क्या परीक्षण करना चाहता है?

उत्तर:
यदु यह परीक्षण करना चाहता था कि लार (Saliva) भोजन में उपस्थित स्टार्च (मंड) को तोड़कर सरल शर्करा (ग्लूकोज) में बदल देती है।
- ‘परखनली ‘क’ (जिसमें लार नहीं डाली गई थी ) – आयोडीन डालने पर नीला काला रंग बना, जो स्टार्च की उपस्थिति को दर्शाता है।
- परखनली ‘ख’ (जिसमें लार डाली गई थी ) – आयोडीन डालने पर नीला काला रंग नहीं बना (या हल्का बना ), क्योंकि लार के एंजाइम सैलिवरी ऐमाइलेज ने स्टार्च को शर्करा में बदल दिया था।
प्रश्न 10.
रक्षिता ने दो स्वच्छ परखनलियाँ ‘क’ और ‘ख’ लेकर एक परीक्षण अभिकल्पित किया। उसने दोनों परखनलियों को चित्र में दर्शाए अनुसार चूने के पानी से भर दिया। परखनली ‘क’ में अंतःश्वसित वायु को नली द्वारा चूषित करके प्रवाहित किया गया। परखनली ‘ख’ में नली के द्वारा उच्छ्वसित वायु को फूँक कर प्रवाहित किया गया। आपके विचार से वह क्या जाँचना चाहती है? वह कैसे अपने निष्कर्षों की पुष्टि कर सकती है?

उत्तर:
रक्षिता यह जाँचना चाहती है कि उच्छवसित वायु ( exhaled air) में अंतःश्वसित वायु (inhaled air) की तुलना में अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) होती है।
- प्रयोग के परिणाम: परखनली ‘क’ (अंतःश्वसित वायु ) – चूने का पानी लगभग वैसा ही रहा। परखनली ‘ख’ (उच्छवसित वायु) – चूने का पानी दूधिया (milk like) हो गया।
- निष्कर्ष की पुष्टि : चूने के पानी का दूधिया होना यह दर्शाता है कि उसमें CO2 उपस्थित है। अंतःश्वसित और उच्छ्वसित वायु की तुलना करने से यह निष्कर्ष निकलेगा कि हम जो वायु बाहर निकालते हैं। उसमें CO2 की मात्रा अधिक होती है।
Class 7 Science Chapter 9 Question Answer in Hindi (Intext)
(पृष्ठ 127 -128)
प्रश्न 1.
मैंने गायों को अपना भोजन चबाते हुए देखा है जबकि उस समय न तो वे कुछ खा रही थी और न ही चर रही थी। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर:
यह रोमंथन की प्रक्रिया के कारण होता है जिसमें घास खाने वाले जंतु घास को आंशिक रूप से चबाकर निगल लेते हैं जहाँ से भोजन आमाशय में चला जाता है।
प्रश्न 2.
साहिल ने परखनली ‘क’ में रोटी के कुछ टुकड़े डाले। नेहा ने परखनली ‘ख’ में रोटी के टुकड़ों को चबा कर डाला और संतुष्टि ने परखनली ‘ग’ में उबले हुए आलू मसल कर डाले। उन सभी ने क्रमशः परखनली ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ में आयोडीन विलयन की कुछ बूँदें डालीं। उनके क्या अवलोकन होंगे? कारण बताइए।
उत्तर:
- परखनली ‘क’ ( रोटी के टुकड़े) – नीला : काला रंग बनेगा, क्योंकि स्टार्च उपस्थित है।
- परखनली ‘ख’ (चबाई हुई रोटी ) – हल्का या न के बराबर नीला : काला रंग, क्योंकि लार में उपस्थित एंजाइम (ऐमाइलेज) रोटी में स्टार्च को आंशिक रूप से शर्करा में तोड़ देता है।
- परखनली ‘ग’ (उबला आलू ) – नीला : काला रंग बनेगा, क्योंकि आलू में स्टार्च प्रचुर मात्रा में होता है जो आयोडीन से क्रिया करता है।
प्रश्न 3.
श्वास लेने में डायाफ्राम की क्या भूमिका है?
(i) वायु को निस्यंदित करना
(ii) ध्वनि उत्पन्न करना
(iii) अंत: श्वसन और उच्छवसन में सहायता करना
(iv) ऑक्सीजन अवशोषित करना
उत्तर:
(iii) अंत: श्वसन और उच्छवसन में सहायता करना
तथा आंशिक रूप से चबाया हुआ भोजन धीरे-धीरे चबाने के लिए पुनः मुँह में लाया जाता है। इन जंतुओं को रोमंथी कहते हैं। पूर्णत: चबाया गया भोजन अधिक पाचन हेतु आहार नाल में चला जाता है।
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