Students read RBSE Class 7 Social Science Notes in Hindi and Class 7 SST Chapter 1 Notes in Hindi भारत की भौगोलिक विविधता before attending weekly tests.
Geographical Diversity of India Class 7 Notes in Hindi
भारत की भौगोलिक विविधता Class 7 Notes
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 1 नोट्स भारत की भौगोलिक विविधता
→ भारत सारे जहाँ से अच्छा – वर्ष 1984 में अंतरिक्ष में जाने वाले प्रथम भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा थे। अंतरिक्ष से उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी से बात की तो इंदिरा गाँधी ने उनसे प्रश्न किया कि “अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है?” तब राकेश शर्मा ने उत्तर दिया कि “सारे जहाँ से अच्छा”।
→ भारत की भौगोलिक स्थिति – क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व का सातवाँ बड़ा देश है और एशिया महाद्वीप का भाग है। भारत अपने पड़ोसी देशों (पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और म्यांमार) के साथ मिलकर एक बड़े भू-भाग का निर्माण करता है, जिसे भारतीय उपमहाद्वीप के नाम से जाना जाता है।
→ भारत का भौगोलिक विभाजन – सामान्यतः भारत को निम्न पाँच प्रमुख भागों में विभाजित किया जाता है-
- महान पर्वतीय क्षेत्र,
- गंगा और सिंधु का मैदान,
- मरुस्थलीय भू-भाग
- दक्षिणी प्रायद्वीप,
- द्वीपसमूह।
→ हिमालय पर्वत श्रृंखला – ‘हिमालय’ शब्द संस्कृत के दो शब्दों ‘हिम’ और ‘आलय’ से बना है, जिसका अर्थ है ‘बर्फ का घर’ हिमालय पर्वत श्रृंखला भारत के उत्तर दिशा में एक प्राकृतिक प्राचीर के रूप में खड़ी है तथा आकाश को छूती हुई प्रतीत होती है, क्योंकि इसकी कई चोटियाँ 8000 मीटर से भी अधिक ऊँची हैं। हिमालय पर्वत श्रृंखला एशिया के छह देशों भारत, नेपाल, भूटान, चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में फैली हुई है।
हिमालय को निम्न तीन मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है-
- हिमादी (वृहद् हिमालय) – यह सर्वाधिक ऊँची और विकट पर्वत श्रृंखला है। यहाँ माउंट एवरेस्ट और कंचनजुंगा जैसे गगनचुंबी पर्वत शिखर स्थित हैं।
- हिमाचल (लघु हिमालय) – नैनीताल और मसूरी (उत्तराखंड), दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल), शिमला (हिमाचल प्रदेश) जैसे लोकप्रिय पर्वतीय पर्यटन स्थल लघु हिमालय में स्थित हैं।
- शिवालिक पहाड़ियाँ (बाह्य हिमालय) – यह हिमालय की सबसे निचली श्रृंखला है, जिसमें घुमावदार | पहाड़ियाँ और घने जंगल सम्मिलित हैं।
→ भारत का शीत मरुस्थल – लद्दाख, भारत में एक शीत मरुस्थल है। यहाँ का तापमान सर्दियों में 30 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। यहाँ वर्षा बहुत कम होती है तथा भूभाग उबड़-खाबड़ है, जिसमें चट्टानी क्षेत्र, गहरी घाटियों और झीलें सम्मिलित हैं। लद्दाख में हिम तेंदुए, आइबेक्स और तिब्बती मृग जैसे अद्वितीय वन्य जीव पाए जाते हैं।
→ गंगा के मैदान – सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी प्रणालियाँ अपनी सहायक नदियों के व्यापक जाल से इस क्षेत्र की मिट्टी को खनिजों से समृद्ध करती हैं, जिससे यह मैदानी क्षेत्र अत्यधिक उपजाऊ और कृषि के लिए आदर्श बन जाता है। भारत की जनसंख्या का एक बड़ा भाग इन मैदानी क्षेत्रों में रहता है। भारत के उत्तरी मैदानों की समतल भूमि में एक विस्तृत परिवहन तंत्र विकसित हुआ है, जो माल की आवाजाही को सुविधाजनक बनाता है।
→ विशाल भारतीय मरुस्थल या थार मरुस्थल – थार मरुस्थल एक विशाल शुष्क क्षेत्र है तथा इसका अधिकांश भाग भारत में स्थित है, जो राजस्थान, गुजरात, पंजाब और हरियाणा राज्यों में फैला हुआ है। मरुस्थल | कठोर परिस्थितियों के कारण एक प्राकृतिक अवरोध के रूप में कार्य करता है, जो मानव और पशु आवागमन को बाधित करता है, क्योंकि यहाँ दिन के समय अत्यधिक तापमान, रातें अत्यधिक ठंडी और जल की उपलब्धता का अभाव होता है। उल्लेखनीय है कि रेत के टीले तब बनते हैं जब हवा की दिशा रेत को स्थानांतरित कर पहाड़ी जैसी आकृति प्रदान करती है। कभी-कभी रेत के टीले 150 मीटर तक ऊँचे हो जाते हैं।
→ अरावली की पहाड़ियाँ – अरावली पर्वत श्रृंखला विश्व की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो लगभग 2.5 अरब वर्ष पुरानी है। इसकी सबसे ऊँची चोटी माउंट आबू की ऊँचाई 1722 मीटर है। अरावली पर्वत श्रृंखला प्राकृतिक प्राचीर के रूप में मरुस्थल का पूर्व की ओर विस्तार होने से रोकती है।
→ प्रायद्वीपीय पठार – भारत में अनेक पठार हैं, जिनमें सबसे महत्त्वपूर्ण पठार देश के मध्य और दक्षिण में स्थित त्रिकोणीय प्रायद्वीपीय क्षेत्र है यह क्षेत्र प्रायद्वीप कहलाता है, क्योंकि यह तीन ओर से अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर द्वारा जल से घिरा हुआ है। प्रायद्वीपीय पठार दो पर्वत श्रृंखलाओं- पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट से घिरा हुआ है। प्रायद्वीपीय पठार भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यह पठार खनिजों, वनों तथा उपजाऊ भूमि से समृद्ध है। गोदावरी, कृष्णा और महानदी प्रायद्वीपीय पठार में अवस्थित प्रमुख नदियाँ हैं, जो पूर्व की ओर बहती हैं और बंगाल की खाड़ी में अपना जल गिराती हैं।
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→ भारतीय तट रेखा – भारतीय तट रेखा 75 किमी. से भी अधिक लंबी है। भारतीय तट रेखा को दो भागों में बाँटा जाता है- (i) पश्चिमी तट (ii) पूर्वी तट।
(i) पश्चिमी तट – भारत का पश्चिमी तट गुजरात से लेकर केरल तक विस्तृत है, जो महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक से होकर गुजरता है। यहाँ की अधिकांश नदियाँ पश्चिमी घाट से निकलकर तेजी से बहते हुए पश्चिमी तटों पर मुहानों (एस्चुरी) का निर्माण करती हैं। इस वट पर नर्मदा और ताप्ती नदियों के मुहाने सबसे बड़े हैं।
(ii) पूर्वी तट – पूर्वी तट पूर्वी घाट और बंगाल की खाड़ी के मध्य स्थित है तथा गंगा के डेल्टा से कन्याकुमारी तक विस्तृत है। यहाँ चिल्का झील (ओडिशा) और पुलिकट झील (आंध्र प्रदेश) जैसी महत्त्वपूर्ण लैगून पाई जाती हैं।
→ भारतीय द्वीपसमूह – हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीपों के समूह को भारतीय द्वीपसमूह कहते हैं। भारत में निम्न दो प्रमुख द्वीपसमूह हैं-
लक्षद्वीप द्वीपसमूह – लक्षद्वीप द्वीपसमूह (द्वीपों का समूह) केरल के मालाबार तट के पास अरब सागर में स्थित है। यह मूंगे (कोरल) से बने 36 बड़े द्वीपों का समूह है।
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह – इस द्वीपसमूह में 500 से अधिक छोटे-बड़े ज्वालामुखी द्वारा निर्मित द्वीप सम्मिलित हैं, जिन्हें दो अलग-अलग समूहों में विभाजित किया जाता है-अंडमान द्वीपसमूह और निकोबार द्वीपसमूह इनकी भौगोलिक स्थिति अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यह द्वीपसमूह बंगाल की खाड़ी में स्थित है।
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूहों में बैरन द्वीप भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है। यह कभी-कभी सक्रिय होता है जिससे आकाश में धुआँ और लावा फैल जाता है।
→ पूर्वोत्तर की पहाड़ियाँ – पूर्वोत्तर में गारो, खासी और जयंतिया पहाड़ियाँ हैं, जो कि मेघालय पठार में अवस्थित हैं। ये अपनी हरियाली, भारी वर्षा और लुभावने जलप्रपातों के लिए प्रसिद्ध हैं। यह विश्व के सर्वाधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में से एक है। मेघालय की पूर्वी खासी पहाड़ियों में स्थित ‘मावलिननॉन्ग गाँव’ एशिया का सबसे स्वच्छ गाँव है।
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