Students read RBSE Class 7 Social Science Notes in Hindi and Class 7 SST Chapter 11 Notes in Hindi वस्तु विनिमय से मुद्रा तक before attending weekly tests.
From Barter to Money Class 7 Notes in Hindi
वस्तु विनिमय से मुद्रा तक Class 7 Notes
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 11 नोट्स वस्तु विनिमय से मुद्रा तक
→ वस्तु विनिमय प्रणाली – मुद्रा के अस्तित्व में आने से पहले वस्तु विनिमय प्रणाली प्रचलित थी। विनिमय को सुविधाजनक बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की वस्तुओं का प्रयोग करते थे।
अतः अपनी वस्तुओं और सेवाओं का विनिमय अन्य वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए करने की व्यवस्था को वस्तु विनिमय प्रणाली कहते हैं। यह लेन-देन का सबसे प्रारंभिक रूप था। उस समय लोग विनिमय के लिए कौड़ी, कवच, नमक, चायपत्ती, तंबाकू, कपड़ा, पशुधन, बीज आदि जैसी वस्तुओं का प्रयोग करते थे।
→ वस्तु विनिमय प्रणाली की सीमाएँ – वस्तु विनिमय प्रणाली की अनेक सीमाएँ थीं। यथा-
- आवश्यकताओं के द्विसंयोग की समस्या।
- मूल्य का कोई सामान्य मापक उपलब्ध नहीं।
- विभाज्यता की समस्या।
- सुवाह्यता (पोर्टेबिलिटी) की समस्या।
- टिकाऊपन (ड्यूरेबिलिटी) की समस्या।
→ मुद्रा का विकास – वस्तु मुद्रा प्रणाली की सीमाओं ने विनिमय के माध्यम के रूप में मुद्रा के विकास को प्रेरित किया। जैसे-जैसे विनिमय की जाने वाली वस्तुओं के प्रकार और उनकी संख्या बढ़ने लगी, वैसे-वैसे एक सामान्य विनिमय माध्यम की आवश्यकता महसूस होने लगी और इसी कारण मुद्रा अस्तित्व में आई।
→ मुद्रा – मुद्रा एक सामान्य अंकित मूल्य के रूप में कार्य करती है, जिसके द्वारा वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मापा जाता है और उनके मूल्य की तुलना करना संभव होता है। अतः मुद्रा को भविष्य में भुगतान के माध्यम के रूप में स्वीकार किया गया, जिससे यह स्थगित भुगतान का एक मानक बन गया है।
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→ मुद्रा की यात्रा – समय के साथ मुद्रा के विभिन्न रूप विकसित हुए, जैसे- कवच, सिक्के और कागजी मुद्रा । यह विकास निरन्तर चल रहा है क्योंकि हम भुगतान करने और प्राप्त करने के नए और आसान तरीके सृजित कर रहे हैं, जिसमें क्यू. आर. कोड भी सम्मिलित है। यथा –
1. सिक्का प्रणाली – सिक्के मुद्रा के सबसे प्राचीन रूपों में से एक हैं, उस समय में शासक सिक्के जारी करते थे, जो नागरिकों के द्वारा अपने-अपने राज्य में लेन-देन में प्रयोग लाए जाते थे।
समय के साथ शक्तिशाली शासकों के सिक्के उनके अपने राज्य के अलावा अन्य राज्यों में भी स्वीकृत होने लगे।
सिक्के सोना, चाँदी और ताँबा अथवा उसकी मिश्रधातु से बनाए जाते थे।
प्राचीन समय में सिक्के के दो पहलुओं-सिक्के के शीर्ष (मुख्य चित्र) और पृष्ठ (पट्ट) पर विभिन्न प्रकार के चिह्न और आकृतियाँ उकेरी जाती थीं।
सिक्कों के प्रयोग से भारत को विश्व में समुद्री व्यापार बढ़ाने में सहायता मिली।
वर्तमान में विभिन्न अंकित मूल्यों के अलग-अलग आकार के सिक्के प्रचलन में हैं और प्रत्येक सिक्के पर हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं का प्रयोग किया गया है।
2. कागजी मुद्रा – बड़ी मात्रा में सिक्कों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की कठिनाई तथा उनको संग्रहित करने की समस्या के कारण कागजी मुद्रा प्रयोग में आई। कागजी मुद्रा पहली बार चीन में प्रयोग की गई और भारत में इसे 18वीं शताब्दी के अंत में प्रयोग में लाया गया।
वर्तमान में सिक्कों का प्रयोग सामान्यतः छोटे मूल्यों के लिए, जबकि कागजी मुद्रा का प्रयोग बड़े मूल्यों के लेन-देन के लिए किया जाता है।
3. मुद्रा के नए रूप – समय के साथ-साथ तकनीकी प्रगति के कारण वर्तमान में मुद्रा के अन्य रूपों का भी प्रयोग होने लगा है। जैसे- क्यू. आर. कोड का प्रयोग, डिजिटल मुद्रा का प्रयोग, इसमें भुगतान के विभिन्न तरीकों, जैसे-डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, यू.पी.आई. का प्रयोग किया जाता है।
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