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Class 7 SST Chapter 12 Question Answer in Hindi बाजारों की समझ

May 23, 2026 by Prasanna Leave a Comment

Start practicing the Exploring Society India and Beyond Class 7 Solutions and Class 7 SST Chapter 12 Question Answer in Hindi Medium बाजारों की समझ to consolidate your knowledge effectively.

Class 7 Social Science Chapter 12 Question Answer in Hindi

बाजारों की समझ कक्षा 7 प्रश्न उत्तर

Class 7 Samajik Vigyan Chapter 11 Question Answer बाजारों की समझ

महत्त्वपूर्ण प्रश्न (पृष्ठ संख्या 247)

प्रश्न 1.
बाजार क्या होते हैं और वे कैसे कार्य करते हैं?
उत्तर:
बाजार – वह स्थान जहाँ लोगों द्वारा विभिन्न वस्तुओं का क्रय-विक्रय किया जाता है, उसे बाजार कहते हैं। इसे हिंदी में हाट और कन्नड़ में ‘मारुकट्टे’ कहा जाता है।

बाजार की कार्यप्रणाली-

  1. हर बाजार में क्रेता और विक्रेता होते हैं। दोनों को एक कीमत पर सहमत होने की आवश्यकता होती है, जिस पर लेन-देन हो सके। किसी भी लेन-देन को पूर्ण करने के लिए कीमत एक महत्त्वपूर्ण विशेषता है।
  2. प्रायः क्रेता और विक्रेता किसी स्वीकार्य कीमत पर लेन-देन करने के लिए मोल तोल करते हैं। खरीददार और विक्रेता तब तक मोल तोल करते हैं, जब तक कि वे किसी कीमत पर परस्पर सहमत नहीं हो जाते। तभी लेन देन पूरा किया जा सकता है। वह स्थिति जहाँ क्रेता और विक्रेता एक कीमत पर सहमत नहीं होते, उस स्थिति में लेन-देन नहीं हो सकता।

प्रश्न 2.
व्यक्तियों के जीवन में बाजारों की क्या भूमिका है?
उत्तर:
व्यक्तियों के जीवन में बाजारों की भूमिका को निम्न प्रकार स्पष्ट किया गया है—
(1) आर्थिक जीवन में महत्त्वपूर्ण भूमिका — बाजार लोगों के आर्थिक जीवन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। व्यक्ति वस्तुओं और सेवाओं की मूलभूत आवश्यकताओं एवं अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बाजारों पर निर्भर रहते हैं।

(2) सामाजिक जीवन में भूमिका— बाजार लोगों, परम्पराओं और विचारों को जोड़ते हैं। एक तरफ बाजार रोजगार प्रदान करता है, जो हमारे परिवारों के लिए आय का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत बन गया है, दूसरी तरफ यह बाजार विभिन्न संस्कृतियों का संगम स्थल भी है। विभिन्न समुदायों के लोग यहाँ विचारों का आदान-प्रदान करने और साझा परम्पराओं का आनंद लेने के लिए साथ आते हैं।

Class 7 SST Chapter 12 Question Answer in Hindi बाजारों की समझ

प्रश्न 3.
सरकार बाजारों में क्या भूमिका निभाती है?
उत्तर:
सरकार बाजारों में निम्नलिखित भूमिका निभाती है—

  1. सरकार उपभोक्ताओं और उत्पादकों के बीच अंतः क्रिया और मूल्य के उचित निर्धारण की निगरानी करती है।
  2. सरकार कुछ वस्तुओं के मूल्यों को नियंत्रित करती है, उदाहरण के लिए, वह विक्रेता द्वारा वसूले जाने वाले अधिकतम मूल्य को निर्धारित करती है।
  3. सरकार कर्मचारियों द्वारा किए गए कार्य के लिए न्यूनतम मजदूरी भी निर्धारित करती है, ताकि नियोक्ता उन्हें उचित भुगतान कर सकें।
  4. सरकार यह सुनिश्चित करती है कि निर्माता सामान बनाते समय और सेवाएँ प्रदान करते समय आवश्यक गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन करें।
  5. सरकार बाजारों के ऐसे प्रभावों को नियंत्रित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है जिसका प्रभाव पर्यावरण तथा उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को भी संकट में डालता है।
  6. सरकार ऐसी सार्वजनिक वस्तुएँ प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है जिससे सभी का कल्याण सुनिश्चित होता है।

प्रश्न 4.
उपभोक्ता अपनी क्रय की गई वस्तुओं तथा सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन किस प्रकार कर सकते हैं?
उत्तर:
उपभोक्ता अपनी क्रय की गई वस्तुओं तथा सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन सरकार द्वारा उसकी गुणवत्ता के लिए प्रदान किए गए विशेष चिह्नों के आधार पर कर सकते हैं, जैसे—
(1) एफ.एस.एस.ए.आई. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण’ का खाद्य पैकेटों और गत्ते के डिब्बो पर fssai’ अंकित चिह्न यह दर्शाता है कि खाद्य पदार्थों की जांच सरकार द्वारा की गई है और ये उपयोग के लिए सुरक्षित हैं।

(2) आई. एस. आई. ‘भारतीय मानक ब्यूरो आई.एस.आई. ‘चिह्न जारी करता है। यह चिह्न सामान्यतः विद्युत उपकरणों, निर्माण सामग्रियों, मोटर वाहन के पहियों, कागज इत्यादि पर दिए जाते हैं। यह चिह्न उत्पाद की गुणवत्ता और इसके सुरक्षित होने का सूचक है।

(3) एगमार्क – कृषि उत्पादों, जैसे— सब्जियों, फलों, अनाजों, दालों, मसालों, शहद इत्यादि के लिए ‘एगमार्क’ एक प्रमाणन चिह्न है।

(4) ‘बी.ई.ई.’ ‘स्टार रेटिंग’ – इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, वातानुकूलित उपकरणों आदि पर ‘बी.ई.ई.’ ‘स्टार रेटिंग’ अंकित होती है। यह रेटिंग उत्पाद के पैकेट पर तारों के रूप में छपी होती है। अधिक तारे उसकी गुणवत्ता को दर्शाते हैं।

(5) अन्य कारक – इसके अतिरिक्त उत्पाद की प्रसिद्धि तथा वस्तु और सेवाओं की ऑनलाइन समीक्षा भी उपभोक्ता के निर्णय को प्रभावित करती है।

आइए पता लगाएँ (पृष्ठ संख्या 251) 

प्रश्न 1.
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि यह बाजार अपनी समृद्धि की चरम सीमा पर कैसा रहा होगा?
उत्तर:
कर्नाटक का हंपी बाजार अपनी समृद्धि की चरम सीमा पर निम्न प्रकार का रहा होगा—

  1. यहाँ शिल्पकार गलियों में काम करते होंगे जो सोने के जवाहरात और कृत्रिम आभूषण बनाते होंगे तथा हर प्रकार के माणिक्य, हीरे मोतियों के साथ बेचते होंगे।
  2. यहाँ कपड़े के विक्रेताओं का एक पृथक बाजार होगा।
  3. यहाँ पर विभिन्न प्रकारों के उत्पादों की अलग-अलग मंडियाँ रही होंगी, जैसे— कपास की मंडी, अनाज की मंडी।
  4. यहाँ बाजार से थोड़ा दूर सड़क के किनारे पशु बाजार रहता होगा जहाँ गाय, खरगोश, घोड़े जैसे पशु और बटेर, तीतर जैसे पक्षियों का व्यापार होता होगा।
  5. बाजार में अनाज, बीज, दूध, तेल, रेशम आदि अन्य विभिन्न प्रकार के उत्पादों का व्यापार होता होगा।

अतः स्पष्ट है कि बाजार में विभिन्न प्रकार के उत्पादों का कारोबार होने तथा यहाँ देशी-विदेशी व्यापारियों या उपभोक्ताओं के होने के कारण, उस समय यह अपनी समृद्धि की चरम सीमा पर पहुँच गया होगा।

प्रश्न 2.
क्या आप अपने राज्य में किन्हीं पुराने बाजारों के बारे में जानते हैं? वे वर्तमान बाजारों से किस तरह समान या भिन्न होंगे? अपने परिवार और समुदाय के वरिष्ठजनों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं अपने परिवार और समुदाय के वरिष्ठजनों के साथ चर्चा करके अपने राज्य के किन्हीं पुराने बाजारों के बारे में पता लगाएँ।

Class 7 SST Chapter 12 Question Answer in Hindi बाजारों की समझ

आइए विचार करें (पृष्ठ संख्या 252)

प्रश्न- क्या आप किसी ऐसे बाजार के बारे में सोच सकते हैं, जहाँ मोल तोल कम प्रचलित है और क्यों?
उत्तर:
(i) ऑनलाइन बाजार में मोल तोल नहीं होता है क्योंकि इसमें विक्रेता और क्रेता प्रत्यक्ष रूप से नहीं मिलते हैं। (ii) बिग बाजार, डी मार्ट या स्मार्ट बाजार जैसी जगहों पर भी मोल तोल नहीं होता। वहाँ कीमतें तय होती हैं तथा सामान पर लेवल लगा होता है।

आइए विचार करें (पृष्ठ संख्या 254)

प्रश्न – साप्ताहिक बाजार में देर रात को सब्जियाँ दिन की तुलना में सस्ती हो जाती हैं? आपके विचार में ऐसा क्यों होता है? शीत ऋतु के अंत में कपड़े की दुकानों में ऊनी वस्त्रों पर भारी छूट दी जाती है। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर:
साप्ताहिक बाजार में देर रात को सब्जियाँ दिन की तुलना में इसलिए सस्ती हो जाती हैं क्योंकि पूरे दिन में उपभोक्ता सब्जियों को छाँटकर ले जाते हैं, बची हुई सब्जियाँ गुणवत्ता की दृष्टि से हल्की रह जाती हैं। दूसरे, विक्रेता सब्जियों के रख-रखाव से बचने के लिए रात के समय समस्त सब्जी को बेचना अधिक हितकर समझते हैं। इसलिए वे उन्हें दिन की अपेक्षा कम दामों पर बेचने को मजबूर हो जाते हैं। इसी प्रकार शीत ऋतु के अंत में ऊनी वस्त्रों को बेचने के लिए भारी छूट इसलिए दी जाती है क्योंकि आगे इन कपड़ों की मांग नहीं रहेगी और उन्हें सालभर के लिए स्टॉक में संभालकर रखना होगा। अतः वे इन्हें कम दामों पर बेचना अधिक श्रेयस्कर समझते हैं ताकि उनसे प्राप्त आय से अन्य कपड़े खरीदकर सालभर उन्हें बेच कर आय अर्जित करें। यह आय उस दी गई छूट से अधिक होती है।

आइए विचार करें (पृष्ठ संख्या 255)

प्रश्न 1.
आपके विचार में ऑनलाइन और प्रत्यक्ष क्रय के क्या लाभ और हानि हैं? इसका उत्तर विक्रेता और क्रेता दोनों के दृष्टिकोण से पता कीजिए।
उत्तर:
(अ) क्रेता की दृष्टि से ऑनलाइन खरीददारी में दूर से खरीददारी की सुविधा होती है। इसमें घर बैठे कहीं से भी खरीददारी की जा सकती है। इसमें गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर कुछ परेशानियाँ हो सकती हैं। दूसरी तरफ, प्रत्यक्ष खरीददारी में उत्पाद को देखने और महसूस करने के बाद तुरंत खरीदने का मौका मिलता है। क्रेता का विक्रेता से सीधा सम्पर्क होता है। ऑनलाइन की तुलना में प्रत्यक्ष क्रय अधिक सुरक्षित माना जाता है क्योंकि भुगतान और सामान तुरन्त मिल जाता है।

(ब) विक्रेता की दृष्टि से विक्रेता की दृष्टि से, ऑनलाइन खरीद के लाभों में व्यापक ग्राहक आधार तक पहुँच और कम परिचालन लागत शामिल है, जबकि हानि में प्रतिस्पर्धा, धोखाधड़ी का जोखिम और लॉजिटिक्स की जटिलताएँ आती हैं। दूसरी तरफ प्रत्यक्ष क्रय में ग्राहकों से सीधा सम्बन्ध बनाना और बेहतर ग्राहक सेवा प्रदान करना संभव है, लेकिन इसमें सीमित पहुँच और उच्च खर्च शामिल हैं।

प्रश्न 2.
कुछ सेवाओं के लिए व्यक्तिगत सम्पर्क की आवश्यकता होती है, जैसे कपड़ों की सिलाई, जिसकी ऐसी अन्य सेवाओं का सुझाव दे सकते हैं, जिनके सेवा ऑनलाइन प्रदान नहीं की जा सकती। क्या आप लिए प्रत्यक्ष बाजार की आवश्यकता होती है? लिए हमें प्रत्यक्ष बाजार की आवश्यकता होती है, क्योंकि उत्तर- सोना, चाँदी, हीरे-जवाहरात के गहने खरीदने के इन्हें हम ऑनलाइन नहीं खरीद सकते। इसी प्रकार सैलून, ब्यूटी पार्लर आदि की सेवाएँ भी ऑनलाइन नहीं दी जा सकतीं।

आइए विचार करें (पृष्ठ संख्या 263)

प्रश्न- क्या हम कल्पना कर सकते हैं कि हमारा जीवन बाजारों के बिना कैसा होगा? यदि किसान चावल, गेहूँ, दाल, सब्जियाँ और फल बाजार में न लाएँ तो क्या होगा? अगर सूरत में वस्त्र बनाने वाले उत्पादक बाजार से कपास जैसी आवश्यक सामग्री न खरीद पाएं तो क्या होगा?
उत्तर:
बाजारों के बिना हमारा जीवन अनेक कठिनाइयों से भरा होगा। हमारे जीवन-यापन की अनेक सुविधाएँ बाजारों के बिना समाप्त हो जाएँगी।

जैसे— यदि किसान चावल, गेहूँ, दाल, सब्जियाँ और फल बाजार में न लाएँ तो हमें इन चीजों को प्राप्त करने के लिए गाँवों में किसानों के पास जाना होगा। यह ज्ञात करना होगा कि किस किसान ने गेहूँ उत्पादन किया और किसने दालें व सब्जियाँ कौनसा फल किस क्षेत्र में उत्पादित होता है तथा कौनसी फसल किस समय आती है? आदि का ज्ञान करना होगा। इस सबके बावजूद हमें इन वस्तुओं को प्राप्त करने के लिए अन्य अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

दूसरी तरफ, बाजार न होने पर उत्पादक किसानों को भी अपनी फसल बेचने में कठिनाई होगी क्योंकि बाजार के बिना उसकी उत्पादित वस्तु को खरीदने वाले उपभोक्ताओं की कमी होगी। दूसरे, फल और सब्जियाँ समय पर न बिकने पर उनके सड़ने का डर रहेगा। फलतः उन्हें उन वस्तुओं को कम दामों पर भी बेचने के लिए मजबूर होना होगा।

स्पष्ट है कि बाजार के अभाव से वस्तुओं के लेन-देन में कठिनाई आयेगी तथा उनके कीमत निर्धारण में भी समस्या उठेगी। साथ ही वस्तुओं के क्रय-विक्रय पर सरकार का भी नियंत्रण नहीं रहेगा।

यही स्थिति सूरत व्यापारियों की होगी। उन्हें दूर-दराज से किसानों के पास जाकर कपास खरीदनी होगी। इसमें उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

Class 7 SST Chapter 12 Question Answer in Hindi बाजारों की समझ

आइए विचार करें (पृष्ठ संख्या 267)

प्रश्न- आप प्रतियोगिता के लिए नए कंचे खरीदना चाहते हैं। आपने 150 रु. बचा रखे हैं। आप कंचे खरीदने हेतु दुकान जाते हैं। आप कंचों में कौनसे गुण देखेंगे ताकि आप प्रतियोगिता जीत सकें?
उत्तर:
हम कंचों में कंचों का आकार, मजबूती, मूल्य और आकर्षक रंग आदि गुण देखकर कंचे खरीदेंगे।

कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पाठ 12 के प्रश्न उत्तर

प्रश्न 1.
बाजार की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? हाल में जब आप बाजार गए थे, तब आपने वहाँ कौन-कौनसी विशेषताएँ देखी ?
उत्तर:
बाजार की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
(1) क्रेता और विक्रेता का होना— हर बाजार में क्रेता और विक्रेता होते हैं।

(2) वस्तुओं और सेवाओं की उपलब्धता— वस्तुएँ और सेवाएँ बाजार के माध्यम से व्यक्तियों, परिवारों और व्यापारियों के लिए उपलब्ध होती हैं।

(3) एक कीमत पर सहमति— बाजार में लेन-देन के लिए क्रेता और विक्रेता दोनों को वस्तु की एक कीमत पर सहमत होने की आवश्यकता होती है। किसी लेन-देन को पूर्ण करने के लिए कीमत एक महत्त्वपूर्ण विशेषता है।

(4) मोल तोल— बाजार में प्रायः क्रेता और विक्रेता किसी स्वीकार्य कीमत पर लेन-देन करने के लिए मोल तोल करते हैं।

हाल में जब हम बाजार गए थे, तब हमने बाजार की उक्त चारों विशेषताएँ देखी थीं।

प्रश्न 2.
इस अध्याय में आरंभ में दिए गए एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री के उद्धरण को देखिए। इस अध्याय के संदर्भ में उस उद्धरण की प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
इस अध्याय के आरंभ में एडम स्मिथ के वाक्य में यह कहा गया है कि बाजार में समृद्धि तभी उत्पन्न होती है, जब व्यक्तियों को उन वस्तुओं और सेवाओं की आवश्यकता होती है, जिन्हें वे स्वयं निर्मित नहीं कर सकते हैं। इसका अभिप्राय यह है कि जब किसी बाजार के लोगों को दूर के क्षेत्रों से, दूसरे बाजारों से तथा विदेशों में बनी वस्तुओं की आवश्यकता होती है, तो उस बाजार में लेन-देन की वस्तुओं और सेवाओं में वृद्धि हो जाती है। इसी से उ बाजार की समृद्धि होती है। यह कथन आज भी प्रासंगिक है।

प्रश्न 3.
अमरूद के क्रय-विक्रय के दिए गए उदाहरण में यदि विक्रेता को अच्छा मूल्य मिल रहा है, तो वह किसानों से और अधिक अमरूद क्रय करने का प्रयास करेगा, ताकि वह उन्हें उसी मूल्य पर बेचकर अपनी आमदनी बढ़ा सके। ऐसी स्थिति में किसान क्या करेगा? क्या आपको लगता है कि वह अगली ऋतु में अमरूदों की मांग के बारे में सोचना शुरू करेगा। उसकी संभावित प्रतिक्रिया क्या होगी?
उत्तर:
ऐसी स्थिति में किसान यह आकलन कर सकता है। कि क्रेता को लगभग कितनी मात्रा में अमरूद की आवश्यकता है और भविष्य में वह बाजार में उतनी ही मात्रा उपलब्ध करायेगा।

इससे किसान द्वारा उपलब्ध कराई गई अमरूद की मात्रा तथा क्रेता द्वारा अपेक्षित मूल्य से अमरूदों की कीमत के निर्धारण से सहायता मिलेगी। माँग की अधिकता को देखकर किसान पूर्व निर्धारित कीमत पर न बेचकर उससे कहीं अधिक कीमत की माँग कर सकता है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रकार के बाजारों का उनकी विशेषताओं से मिलान कीजिए—
Class 7 SST Chapter 12 Question Answer in Hindi बाजारों की समझ 1
उत्तर:

क्र.सं. बाजार मानदंड
(क) प्रत्यक्ष बाजार क्रेता और विक्रेता की प्रत्यक्ष उपस्थिति आवश्यक है।
(ख) ऑनलाइन बाजार क्रेता और विक्रेता आभासी रूप से मिलते हैं और किसी भी समय लेन-देन कर सकते हैं।
(ग) घरेलू बाजार किसी राष्ट्र की सीमा के भीतर स्थित।
(घ) अन्तर्राष्ट्रीय बाजार वस्तुएँ और सेवाएँ जो राष्ट्र की सीमा से बाहर भेजी जाती हैं।
(ङ) थोक बाजार बड़ी मात्रा में सौदे।
(च) खुदरा बाजार अंतिम उपभोक्ताओं तक वस्तुएँ एवं सेवाएँ पहुँचाना।

प्रश्न 5.
सामान्यतया मूल्य क्रेताओं की माँग और विक्रेताओं की आपूर्ति की अन्तःक्रिया द्वारा निर्धारित होता है। क्या आप ऐसे उत्पादों के बारे में सोच सकते हैं, जहाँ किसी उत्पाद की माँग के लिए क्रेताओं की संख्या कम होने के बावजूद उसका मूल्य अधिक होता है। इसके क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर:
हाँ, ऐसे कई उत्पाद हैं जिनकी माँग कम होने के बावजूद उसका मूल्य अधिक होता है। यथा-
(1) लक्जरी वस्तुएँ—जैसे दुर्लभ हीरे, कला के अनोखे नमूने, उच्चस्तरीय लक्जरी कारें।
इनकी माँग भले ही कम हो, लेकिन ये दुर्लभ हैं और इनकी उच्च कीमत उपभोक्ताओं को उनके असाधारण गुणों और प्रतिष्ठा के कारण आकर्षित करती हैं।

(2) उच्च तकनीकी उत्पाद कुछ विशेष गैजेट्स या सॉफ्टवेयर जो विशेष सुविधाएँ प्रदान करते हैं, माँग कम होने पर भी वे उच्च कीमत वाले हो सकते हैं।
इसके कारण हैं—तकनीकी नवाचार, निर्माण की उच्च लागत और अद्वितीय लाभ।

अधिक मूल्य होने के प्रमुख कारण ये हैं— (1) दुर्लभता ‘ (2) उच्च उत्पादन लागत (3) अद्वितीय लाभ तथा (4) नियंत्रित आपूर्ति ।

प्रश्न 6.
सब्जियों के एक खुदरा विक्रेता की वास्तविक जीवन स्थिति पर विचार कीजिए—
एक परिवार सब्जियाँ खरीदने के लिए दुकान पर आया। विक्रेता, जो फलियाँ ठेले पर बेच रहा था, उसकी कीमत ₹30/- प्रति किलोग्राम थी। महिला ने कीमत को ₹25/- प्रति किलोग्राम के नीचे लाने के लिए विक्रेता के साथ मोलभाव करना शुरू कर दिया। विक्रेता ने उस मूल्य पर विक्रय करने से मना कर दिया और कहा कि उसे उस मूल्य पर घाटा होगा। महिला वहाँ से चली गई। फिर परिवार समीप के सुपर मार्केट में गया और वहाँ से सब्जियाँ क्रय की सुपर मार्केट में अच्छे ढंग से पैक की गई फलियों के लिए उन्होंने ₹40/- प्रति किलोग्राम का भुगतान किया। क्या कारण है कि परिवार ने ऐसा किया। क्या कीमतों के अतिरिक्त ऐसे कई कारक हैं, जो क्रय-विक्रय को प्रभावित करते हैं।
उत्तर:

  1. सुपर मार्केट में चीजों को पैक करके बेचा जाता है, यहाँ पर दाम निश्चित होते हैं तथा मोल तोल कम प्रचलित है या नहीं किया जाता है। इसलिए जो चीज जिस दाम में बिक रही है, उसे उसी कीमत पर खरीदा जाता है।
  2. सुपर मार्केट में कीमतों के अतिरिक्त अन्य कारक भी होते हैं जो क्रय-विक्रय को प्रभावित करते हैं। यहाँ सामान को अच्छे तरीके से पैक किया जाता है, जिससे वे दिखने में आकर्षक हो जाती हैं। उन्हें अच्छी गुणवत्ता का माना जाने लगता है। यहाँ विक्रेता मालिक द्वारा चीजों के दाम पहले से ही निर्धारित कर दिए जाते हैं तथा उन वस्तुओं का विक्रय कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। उन्हें मोल भाव करने का अधिकार नहीं होता है। फलत: परिवार ने यहाँ पहले से ही निर्धारित कीमत पर ही फलियों को खरीदा।
  3. सुपर मार्केट में वस्तुओं के विक्रेता (मालिक) तथा क्रेता का प्रत्यक्ष आमना-सामना नहीं होता, बल्कि विक्रेता कर्मचारी और क्रेता का आमना-सामना होता है। यहाँ क्रेता को पता होता है कि इस कर्मचारी को मोल तोल करने का अधिकार नहीं है। फलतः वस्तु की पूर्व निर्धारित कीमत पर ही वस्तु खरीदनी पड़ती है।

प्रश्न 7.
भारत के कुछ जिले टमाटर उगाने के लिए प्रसिद्ध हैं। हालांकि, कुछ मौसमों में किसानों के लिए स्थिति अच्छी नहीं होती। अधिक उपज होने पर कृषकों द्वारा अपनी उपज को फेंकने और उनका सारा श्रम नष्ट होने के समाचार आते हैं।
आपके विचार में किसान ऐसा क्यों करते हैं? ऐसी स्थिति में थोक विक्रेता क्या भूमिका निभा सकते हैं? यह सुनिश्चित करने के संभावित उपाय क्या हो सकते हैं जिससे टमाटर बर्बाद न हों और किसानों को नुकसान भी न पहुँचे।
उत्तर:
किसानों द्वारा टमाटर की उपज को फेंकने का कारण—हमारे विचार से किसान ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि थोक विक्रेता उन्हें उस समय टमाटरों की बहुत कम कीमत देते हैं जिससे किसानों की लागत भी नहीं निकल पाती है। चूंकि टमाटर जल्दी खराब होने लगते हैं। अतः किसानों को कभी-कभी अपनी उपज फेंकनी पड़ जाती है।

थोक विक्रेताओं की भूमिका — ऐसी स्थिति में थोक विक्रेता निम्न भूमिका निभा सकते हैं-

  1. जब टमाटर की उपज अधिक होती है और किसानों को कीमत न मिलने पर उन्हें फेंकने की स्थिति आ जाती है, तो ऐसी स्थिति में थोक विक्रेता उत्पादों को बड़ी मात्रा में खरीदकर, उन्हें उन स्थानों पर भेज सकते हैं। जहाँ टमाटर की माँग अधिक है क्योंकि टमाटर भारत के सभी क्षेत्रों में एक ही समय नहीं उगाए जाते तथा कुछ क्षेत्रों में उनको नहीं उगाया जाता है। उपभोक्ता ऐसे बाजारों की जानकारी इकट्ठा करके टमाटरों का परिवहन उन क्षेत्रों में करके वहाँ के थोक व खुदरा व्यापारियों को बेचने की व्यवस्था कर सकते हैं।
  2. वे उत्पादों को छोटे-छोटे बैचों में तोड़कर खुदरा विक्रेताओं के पास पहुँचाएँ, जिससे वितरण की प्रक्रिया अधिक कुशल बन सके। थोक विक्रेता परिवहन और लॉजिस्टिक व्यवस्था भी कर सकते हैं।
  3. वे टमाटरों के अधिक उत्पादन के प्रचार में सहायता कर उनकी माँग बढ़ा सकते हैं। ऐसा करके वे किसानों के टमाटरों की बिक्री में सहायता कर सकते हैं। वे कुछ जोखिम उठाकर किसानों से उचित कीमत पर टमाटर खरीदकर उसे परिवहन द्वारा अन्य स्थानों पर विक्रय की व्यवस्था कर सकते हैं। इससे किसानों को नुकसान भी नहीं होगा और फसल भी बर्बाद नहीं होगी।

Class 7 SST Chapter 12 Question Answer in Hindi बाजारों की समझ

प्रश्न 8.
क्या आपने अपने या किसी अन्य विद्यालय द्वारा आयोजित किसी मेले के बारे में सुना है या उसमें गए हैं? अपने मित्रों और शिक्षकों से ऐसे मेलों के बारे में चर्चा कीजिए कि इन मेलों में किस तरह से क्रय- विक्रय और मोल-भाव होता है?
उत्तर:
विद्यार्थी अपने मित्रों और शिक्षकों से चर्चा करके इसका उत्तर स्वयं खोजें ।

प्रश्न 9.
कोई भी पाँच उत्पाद चुनें और अध्याय में चर्चा किए गए प्रमाणन चिह्नों के साथ उनके लेबल की जाँच करें। क्या आपको ऐसे उत्पाद मिले, जिन पर मानक चिह्न नहीं था? यह किस बात का सूचक है?
उत्तर:
पाँच उत्पाद हैं – (1) फल (2) शहद (3) दूध (4) मसाले (5) दालें।

फल, शहद, दाल और मसालों का मानक चिह्न ‘एगमार्क’ है और दूध के पैकेट का मानक चिह्न ‘fssai’ है। हाँ, हमें ऐसे उत्पाद मिले, जिन पर मानक चिह्न नहीं था । उत्पाद पर मानक चिह्न का न होना इस बात का सूचक है। कि उत्पाद उपयोग के लिए असुरक्षित हो सकता है तथा यह भी हो सकता है कि उत्पाद न्यूनतम गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरता हो।

प्रश्न 10.
आपने और आपके सहपाठियों ने मिलकर साबुन बनाया है। इसकी पैकेजिंग के लिए एक लेबल डिजाइन कीजिए। आपके विचार में लेबल पर क्या लिखा होना चाहिए, ताकि उपभोक्ता उत्पाद को बेहतर तरीके से जाँच सकें?
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं अपने उत्पाद साबुन का लेबल बनाए। इस लेवल पर साबुन का वजन तथा उसमें किस-किस मात्रा में किस-किस सामग्री का उपयोग किया गया है तथा इसकी निर्माण तिथि और एक्सपायर तिथि क्या है आदि लिखा होना चाहिए। इससे उपभोक्ता उत्पाद को बेहतर तरीके से जाँच सकेगा।

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