Students read RBSE Class 7 Social Science Notes in Hindi and Class 7 SST Chapter 9 Notes in Hindi शासक से शासित तक सरकार के प्रकार before attending weekly tests.
From the Rulers to the Ruled Types of Governments Class 7 Notes in Hindi
शासक से शासित तक सरकार के प्रकार Class 7 Notes
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 9 नोट्स शासक से शासित तक सरकार के प्रकार
→ सरकार के कार्य – सरकार हमारे जीवन में तथा किसी देश के संचालन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके प्रमुख कार्य हैं-
- कानून व्यवस्था बनाए रखना,
- लोगों के लिए शांति एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना,
- वैदेशिक सम्बन्धों का संचालन करना,
- राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना,
- शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आधारभूत संरचना की आपूर्ति करना,
- अर्थव्यवस्था का प्रबंधन करना तथा
- लोक कल्याण के कार्य करना।
→ लोकतंत्र क्या है? लोकतंत्र को जनता के शासन के रूप में समझा जा सकता है। इसमें शक्ति और सत्ता का स्रोत देश की जनता होती है।
→ सरकारें – समूचे विश्व में विभिन्न प्रकार की सरकारें हैं। इसे कौन निर्धारित करता है? सरकार के कौन- कौन से अंग होते हैं और वे क्या कार्य करते हैं? सरकार किसके लिए कार्य करती है? सरकार को किन मूल्यों और आदर्शों का पालन करना चाहिए? सरकारें इन प्रश्नों का अलग-अलग उत्तर देती हैं। यथा-
- लोकतांत्रिक सरकारें जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों से बनती हैं।
- सरकार के तीन अंग होते हैं- (1) विधायिका (2) कार्यपालिका और (3) न्यायपालिका विधायिका कानूनों का निर्माण करती है।
यह सरकार का विधायी कार्य कहलाता है। कार्यपालिका इन नियमों (कानूनों) का कार्यान्वयन करती है, यह सरकार का प्रशासन सम्बन्धी कार्य कहलाता है और न्यायपालिका कानूनों की व्याख्या तथा विवादों का निपटारा करती है। यह सरकार का न्यायिक कार्य कहलाता है।
→ सरकारें किस प्रकार एक-दूसरे से भिन्न होती हैं? सरकारों के बीच विभिन्नता लाने वाली प्रमुख बातें इस प्रकार हैं-
- सरकार को तय करने का अधिकार किसे है?
- सरकार का गठन किस प्रकार होता है?
- सरकार के विभिन्न अंग कौन-कौनसे हैं और वे क्या कार्य करते हैं?
- सरकार किस उद्देश्य से कार्य कर रही है? और वह कौनसा लक्ष्य पाना चाहती है?
सरकार के विभिन्न स्वरूपों में उक्त चार प्रमुख पहलुओं के आधार पर भिन्नताएँ पाई जाती हैं।
→ लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धान्त – आधुनिक विश्व में लोकतंत्र शासन का सबसे लोकप्रिय स्वरूप बन गया । लोकतंत्र के कुछ मूलभूत सिद्धान्त हैं, जो प्रत्येक लोकतंत्र में अनिवार्य रूप से पाये जाते हैं। ये मूलभूत सिद्धान्त –
- समानता,
- स्वतंत्रता
- प्रतिनिधि सहभागिता
- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार
- मौलिक अधिकार,
- स्वतंत्र न्यायपालिका।
→ लोकतांत्रिक सरकारों के विभिन्न रूप – विश्वभर में लोकतांत्रिक सरकारों के विभिन्न स्वरूप विद्यमान हैं मोटे रूप से इन्हें दो स्वरूपों में विभाजित किया जाता है- (1) प्रत्यक्ष लोकतंत्र और (2) प्रतिनिधि लोकतंत्र।
आज अधिकांश लोकतंत्र प्रतिनिधि लोकतंत्र की प्रणाली अपनाते हैं। सामान्यतः प्रतिनिधि लोकतंत्र के दो प्रमुख स्वरूप होते हैं- (अ) संसदीय लोकतंत्रीय शासन, और (ब) अध्यक्षीय लोकतांत्रिक शासन प्रणाली भारत में संसदीय लोकतंत्र है।
→ लोकतांत्रिक सरकार के विभिन्न अंग-
- कार्यपालिका – यह कानून को लागू करने के लिए उत्तरदायी होता है। इसके चुनाव की प्रक्रिया विभिन्न देशों में अलग-अलग होती है।
- विधायिका – यह कानून बनाने के लिए उत्तरदायी होता है। अलग-अलग देशों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जैसे—अमेरिका में इसे ‘कांग्रेस’ और भारत में ‘संसद’ कहा जाता है। इसमें दो सदन होते हैं- (a) उच्च सदन और (b) निम्न सदन
- न्यायपालिका – इसका उत्तरदायित्व कानूनों की व्याख्या करने तथा न्याय प्रदान करने से है। यह कार्यपालिका तथा विधायिका से स्वतंत्र होती है।
शक्तियों का पृथक्करण – सरकार के तीनों अंग स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं, वे एक-दूसरे के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करते।
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→ इतिहास की एक झलक प्रारंभिक गणराज्य-
- गणराज्य एक ऐसी शासन व्यवस्था है, जिसमें राज्य का प्रमुख निर्वाचित होता है और वह वंशानुगत राजा या रानी नहीं होता।
- भारत के प्राचीन महाजनपदों, जैसे वज्जि महाजनपद में तथा चोल काल के उत्तरमेरूर शिलालेख में, प्रारंभिक गणराज्यों के उदाहरण मिले हैं।
- विश्व के अन्य भागों में भी गणराज्य थे। पाँचवीं और चौथी शताब्दी सा.सं.पू. में रोम और ग्रीस में गणराज्य प्रणाली थी।
→ अन्य प्रकार की सरकार – अन्य प्रकार की शासन व्यवस्थाओं में राजतंत्र, धर्मतंत्र, अधिनायकतंत्र और अल्पतंत्र सम्मिलित हैं। यथा-
- राजतंत्र – राजतंत्र वह शासन प्रणाली है जिसमें राजा द्वारा शासन किया जाता है, जो संप्रभु शक्ति का प्रयोग करता है। राजतंत्र प्रणाली सामान्यतः वंशानुगत होती है।
वर्तमान में दो प्रकार के राजतंत्र देखे जाते हैं – (अ) निरंकुश राजतंत्र और (ब) संवैधानिक राजतंत्र यथा-
(अ) निरंकुश राजतंत्र – इसमें राजा को शासन की तीनों शक्तियों का पूर्ण अधिकार होता है। सऊदी अरब इसका एक उदाहरण है।
(ब) संवैधानिक राजतंत्र – इसमें राजा के पास केवल औपचारिक शक्ति होती है और कार्यपालिका की वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री के पास होती है, कानून निर्माण शक्ति संसद के पास ब्रिटेन इसका प्रमुख उदाहरण है। - धर्मतंत्र – धर्मतंत्र वह शासन प्रणाली है जिसमें देश का शासन धार्मिक नियमों और धार्मिक नेताओं के निर्देशों के अनुसार होता है।
ईरान इसका प्रमुख उदाहरण है। वर्तमान में अफगानिस्तान और वेटिकन सिटी भी इसके उदाहरण हैं। - अधिनायक तंत्र – अधिनायक तंत्र एक ऐसी शासन पद्धति है जिसमें एक व्यक्ति या छोटा समूह सम्पूर्ण सत्ता पर नियंत्रण रखता है।
जर्मनी का चांसलर एडोल्फ हिटलर तथा युगांडा का सैनिक तानाशाह ईदी अमीन इसके उदाहरण रहे हैं। - अल्पतंत्र – यह एक ऐसी शासन प्रणाली है, जिसमें कुछ शक्तिशाली लोग या परिवार शासन करते हैं और सारे महत्त्वपूर्ण निर्णय वही लेते हैं। प्राचीन यूनान में इस प्रकार का शासन था।
→ लोकतंत्र क्यों महत्त्वपूर्ण है?
लोकतंत्र महत्त्वपूर्ण है, लेकिन इसके समक्ष गंभीर चुनौतियाँ भी हैं, जिनके लिए नागरिकों को सजग और सतर्क रहना आवश्यक है।
- लोकतंत्र महत्त्वपूर्ण है क्योंकि
(क) इसमें लोगों को अपना दैनिक जीवन अपने ढंग से जी सकने की तब तक स्वतंत्रता होती है, जब तक कि वे अन्य किसी के अधिकार को क्षति न पहुँचाएँ।
(ख) इसमें लोग अपनी सरकार का चुनाव करते हैं तथा निर्वाचित सरकार अपने कार्यों के लिए लोगों के प्रति उत्तरदायी होती है। यदि सरकार अपने दायित्वों का निर्वहन न करे तो लोग चुनावों के माध्यम से प्रतिनिधियों को बदल सकते हैं। - लोकतंत्र की अपनी चुनौतियाँ भी हैं, जैसे-भ्रष्टाचार, आर्थिक विषमता, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर कुछ लोगों का अत्यधिक नियंत्रण, न्यायपालिका की स्वतंत्रता का क्षरण, सूचना माध्यमों का दुरुपयोग आदि।
हम व्यक्ति और समाज के रूप में सजग रहकर ही इन समस्याओं और बाधाओं को कम कर सकते हैं।
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