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RBSE Class 3 EVS Chapter 15 Question Answer in Hindi खेजड़ली का बलिदान पेड़ों के सच्चे रक्षक

April 27, 2026 by Prasanna Leave a Comment

To deepen your understanding, the Class 3 EVS RBSE Solutions and RBSE Class 3 EVS Chapter 15 Question Answer in Hindi खेजड़ली का बलिदान पेड़ों के सच्चे रक्षक provided here offer valuable practice and clarity.

RBSE कक्षा 3 पर्यावरण पाठ 15 के प्रश्न उत्तर खेजड़ली का बलिदान पेड़ों के सच्चे रक्षक

RBSE Class 3rd EVS Chapter 15 Question Answer in Hindi

पृष्ठ संख्या – 98
आओ चर्चा करें-

प्रश्न 1.
अमृता देवी और उनकी बेटियों ने पेड़ों की रक्षा के लिए क्या किया?
उत्तर:

  • प्रतिरोध-अमृता देवी ने जोधपुर के महाराज अभयसिंह के सैनिकों द्वारा खेजड़ी के पेड़ों की कटाई का विरोध किया। उन्होंने चीखकर “खेजड़ी मत काटो!” कहा और पेड़ से चिपक गईं।
  • साहस-उनकी तीन बेटियाँ (आसू, रत्नी और भागू) भी दौड़कर आईं और माँ के साथ पेड़ों की रक्षा के लिए डट गई।
  • जिद और बलिदान-चारों ने पेड़ काटने से रोकने की जिद की। मंत्री के समझाने और धमकी के बावजूद, उन्होंने गुरु जाम्भोजी की वाणी ” सिर साटे रूंख रहे, तो भी सस्तो जाण” को दोहराया और अन्ततः अपनी जान दे दी।
  • प्रेरणा-उनके बलिदान ने 84 गाँवों के बिश्नोई समुदाय को प्रेरित किया, जिन्होंने भी पेड़ों की रक्षा के लिए बलिदान दिया।

प्रश्न 2.
बिश्नोई समुदाय का पर्यावरण संरक्षण में क्या योगदान रहा है?
उत्तर:

  • पेड़ों की रक्षा-खेजड़ली बलिदान (1730) में बिश्नोई समुदाय ने पेड़ों को बचाने के लिए सामूहिक बलिदान दिया, जो विश्व का पहला पर्यावरण संरक्षण आन्दोलन माना जाता है।
  • गुरु जाम्भोजी की शिक्षाएँ-बिश्नोई धर्म के 29 नियमों में प्रकृति संरक्षण प्रमुख हैं, जैसे-पेड़ न काटना, वन्यजीवों की रक्षा और जल संरक्षण।
  • वन्यजीव संरक्षण-बिश्नोई समुदाय काले हिरण व चिंकारा जैसे जीवों की रक्षा करता है, यहाँ तक कि शिकारियों का विरोध कर अपनी जान जोखिम में डालता है।
  • पर्यावरणीय जागरूकता-बिश्नोई समुदाय के प्रयासों से महाराज अभयसिंह ने बिश्नोई गाँवों में पेड़ों की कटाई और शिकार पर प्रतिबन्ध लगाया, जो आज भी प्रेरणा देता है।
  • आधुनिक योगदान-बिश्नोई समुदाय आज भी पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय है, जैसे-अवैध पेड़ कटाई और वन्यजीव शिकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई।

सोचकर बताइए-

प्रश्न:
यदि आप उस समय वहाँ होते, तो क्या करते?
उत्तर:
यदि मैं वहाँ होता तो मैं अमृता देवी और बिश्नोई समुदाय के साथ खड़ा होता। पेड़ों की रक्षा के लिए सैनिकों और मंत्री से शांतिपूर्ण ढंग से बातचीत करता, उन्हें प्रकृति के महत्त्व और खेजड़ी के पर्यावरणीय मूल्य (जैसे-मिट्टी संरक्षण, छाया और जैव विविधता) के बारे में समझाने की कोशिश करता। यदि बात नहीं बनती, तो मैं भी पेड़ों से चिपककर अहिंसक विरोध करता और समुदाय के साथ मिलकर महाराज अभयसिंह तक अपनी बात पहुँचाने का प्रयास करता।
साथ ही, अन्य गाँवों को संगठित कर एक बड़ा जनआन्दोलन शुरू करने की कोशिश करता ताकि दबाव बढ़े और कटाई रुके।

RBSE Class 3 EVS Chapter 15 Question Answer in Hindi खेजड़ली का बलिदान पेड़ों के सच्चे रक्षक

प्रश्न:
“सिर साटे रूंख रहे, तो भी सस्तो जाण”। इस कथन का आपके अनुसार क्या अर्थ है?
उत्तर:
अर्थ-यह कथन पर्यावरण संरक्षण के लिए सर्वोच्च बलिदान की भावना दर्शाता है। इसका मतलब है कि यदि पेड़ों को बचाने के लिए अपनी जान भी देनी पड़े, तो यह एक उचित और सार्थक सौदा है, क्योंकि पेड़ जीवन का आधार हैं।

आप क्या करेंगे?

प्रश्न 1.
पेड़ों की कटाई रोकने के लिए आज हम कौन-कौनसे कदम उठा सकते हैं?
उत्तर:
पेड़ों की कटाई रोकने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं-

  1. जागरूकता अभियान-स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों में वृक्षारोपण और कटाई के दुष्परिणामों पर कार्यशालाएँ और सेमिनार आयोजित करना।
  2. कानूनी कार्रवाई-अवैध कटाई के खिलाफ वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को शिकायत करना; पर्यावरणीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करना।
  3. वृक्षारोपण-हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक पेड़ लगाने और उसकी देखभाल करने की शपथ लेने के लिए प्रेरित करना।
  4. वैकल्पिक संसाधन-लकड़ी के बजाय बाँस, पुनर्चक्रित सामग्री या अन्य टिकाऊ विकल्पों को बढ़ावा देना।

प्रश्न 2.
आप अपने विद्यालय या घर में पेड़ लगाने के लिए कौन-कौनसे प्रयास कर सकते हैं?
उत्तर:
विद्यालय में किये जाने वाले प्रयास-

  • हरित क्लब-विद्यालय में पर्यावरण क्लब बनाकर छात्रों को वृक्षारोपण और देखभाल के लिए प्रेरित करना।
  • वृक्षारोपण दिवस-वन महोत्सव या पर्यावरण दिवस पर सामूहिक पेड़ लगाने का आयोजन करना।
  • पाठ्यक्रम में शामिल-पर्यावरण शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाकर पेड़ों के महत्त्व पर जागरूकता बढ़ाना।
  • पानी और देखभाल-विद्यालय परिसर में लगे पेड़ों की नियमित सिंचाई और देखभाल करने की योजना बनाना।
  • प्रतियोगिताएँ-पेड़ लगाने, उनकी देखभाल करने या पर्यावरण पर निबंध/चित्रकला प्रतियोगिताएँ आयोजित करना।

घर में किये जाने वाले प्रयास-

  • छोटे पौधे-गमलों में नीम, अशोक, तुलसी व अमरूद जैसे पौधे लगाना और छत/बालकनी को हरित करना।
  • परिवार की भागीदारी-परिवार के साथ मिलकर हर मौसम में एक पेड़ लगाने का लक्ष्य रखना।
  • पानी का पुनर्चक्रण-घर के गन्दे पानी (जैसेवॉशिंग मशीन का) को पौधों की सिंचाई के लिए उपयोग करना।
  • जैविक खाद-किचन के कचरे से कम्पोस्ट बनाकर पौधों को पोषण देना।
  • पड़ोस में प्रेरणा-पड़ोसियों को पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करना और सामूहिक वृक्षारोपण कार्यक्रम शुरू करना।

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
नीचे दिए गए वाक्यों को पढ़कर सही (✓) या गलत (×) का निशान लगाओ-

1. अमृता देवी बिश्नोई समुदाय की थी।
उत्तर: ✓

2. खेजड़ी का पेड़ केवल लकड़ी के लिए उपयोगी होता है।
उत्तर: ×

3. बिश्नोई समुदाय के कई लोगों ने वृक्ष रक्षा के लिए बलिदान दिया।
उत्तर: ✓

RBSE Class 3 EVS Chapter 15 Question Answer in Hindi खेजड़ली का बलिदान पेड़ों के सच्चे रक्षक

4. खेजड़ी वृक्ष राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में जीवनदायिनी होता है।
उत्तर: ✓

मिलान कीजिए-

RBSE Class 3 EVS Chapter 15 Question Answer in Hindi खेजड़ली का बलिदान पेड़ों के सच्चे रक्षक 1
उत्तर:
RBSE Class 3 EVS Chapter 15 Question Answer in Hindi खेजड़ली का बलिदान पेड़ों के सच्चे रक्षक 2

खेजड़ी वृक्ष का चित्र बनाकर रंग भरिए-
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।

दादी की पहेली-

वह भक्त और कवि था
वह गंगा किनारे रहता था
वह कहता था, ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’
उत्तर:
संत रैदास (रविदास)।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
अमृता देवी ने खेजड़ी पेड़ों की रक्षा के लिए किस गुरु की वाणी का पालन किया?
(अ) गुरु नानक
(ब) गुरु जाम्भोजी
(स) गुरु गोविंद सिंह
(द) गुरु रविदास
उत्तर:
(ब) गुरु जाम्भोजी

प्रश्न 2.
अमृता देवी की कितनी बेटियों ने खेजड़ी बलिदान में हिस्सा लिया?
(अ) एक
(ब) दो
(स) तीन
(द) चार
उत्तर:
(स) तीन

प्रश्न 3.
खेजड़ी के पेड़ों को काटने का आदेश किसने दिया था?
(अ) महाराजा अभयसिंह
(ब) गुरु जाम्भोजी
(स) अमृता देवी
(द) बिश्नोई समाज
उत्तर:
(अ) महाराजा अभयसिंह

RBSE Class 3 EVS Chapter 15 Question Answer in Hindi खेजड़ली का बलिदान पेड़ों के सच्चे रक्षक

प्रश्न 4.
खेजड़ली बलिदान का मुख्य उद्देश्य क्या था?
(अ) महल निर्माण के लिए लकड़ी एकत्र करना
(ब) बिश्नोई समाज की स्थापना
(स) वन्यजीवों का शिकार करना
(द) खेजड़ी पेड़ों की रक्षा करना
उत्तर:
(द) खेजड़ी पेड़ों की रक्षा करना

प्रश्न 5.
खेजड़ली बलिदान का संबंध किस समाज से है?
(अ) जाट समाज
(ब) बिश्नोई समाज
(स) राजपूत समाज
(द) वैश्य समाज
उत्तर:
(ब) बिश्नोई समाज

प्रश्न 6.
खेजड़ली बलिदान की घटना कहाँ हुई थी?
(अ) जोधपुर
(ब) जयपुर
(स) उदयपुर
(द) भरतपुर
उत्तर:
(अ) जोधपुर

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. वह दौड़ पड़ी और ______ से चिपक गई।
उत्तर: खेजड़ी

2. उन चारों की जिद् थी कि ______ काटने नहीं देंगे।
उत्तर: खेजड़ी

3. राजा के ______ तक बात पहुँची।
उत्तर: मंत्री

4. सिर कटा कर भी अगर ______ बचाया जाता है तो वह सस्ता सौदा है।
उत्तर: पेड़

5. ______ और उनकी तीन बेटियों की हत्या कर दी गई।
उत्तर: अमृता देवी

6. वे भी आते गए और पेड़ों के बचाव के लिए अपने ______ करते गए।
उत्तर: प्राण न्यौछावर।

निम्नलिखित कथनों में से सत्य/असत्य बतलाइये-

1. अमृता देवी ने खेजड़ी पेड़ों को बचाने के लिए अपनी जान दी।
उत्तर: सत्य

2. अमृता देवी ने कहा कि जान देकर पेड़ों की रक्षा करना सस्ता सौदा है।
उत्तर: सत्य

3. अमृता देवी ने खेजड़ी पेड़ों को बचाने के लिए सैनिकों से बहस की थी।
उत्तर: सत्य

4. गुरु जाम्भोजी की वाणी ने बिश्नोई समाज को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
उत्तर: सत्य

RBSE Class 3 EVS Chapter 15 Question Answer in Hindi खेजड़ली का बलिदान पेड़ों के सच्चे रक्षक

5. खेजड़ली बलिदान में बिश्नोई समाज के केवल पुरुष शामिल हुए थे।
उत्तर: असत्य।

6. खेजड़ी का उपयोग केवल महल के निर्माण के लिए किया जाता है।
उत्तर: असत्य।

निम्नलिखित को सही सुमेलित कीजिए

स्तम्भ ‘अ’ स्तम्भ ‘ब’
1. महाराज अभयसिंह (अ) गुरु जाम्भोजी की वाणी
2. “सिर साटे रूंख रहे” (ब) 84 गाँव
3. खेजड़ली बलिदान (स) पेड़ कटाई पर प्रतिबंध
4. बिश्नोई समाज (द) सन् 1730 की घटना

उत्तर:

स्तम्भ ‘अ’ स्तम्भ ‘ब’
1. महाराज अभयसिंह (स) पेड़ कटाई पर प्रतिबंध
2. “सिर साटे रूंख रहे” (अ) गुरु जाम्भोजी की वाणी
3. खेजड़ली बलिदान (द) सन् 1730 की घटना
4. बिश्नोई समाज (ब) 84 गाँव

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
अमृता देवी का समुदाय कौनसा था?
उत्तर: बिश्नोई।

प्रश्न 2.
खेजड़ली पेड़ों को क्यों काटा जा रहा था?
उत्तर:
चूना पकाने के लिए।

प्रश्न 3.
अमृता देवी की बेटियों के नाम बताइए।
उत्तर:
आसू, रत्नी और भागू।

प्रश्न 4.
खेजड़ली बलिदान में कितने गाँवों के लोग शामिल हुए?
उत्तर:
84 गाँव।

प्रश्न 5.
गुरु जाम्भोजी की प्रसिद्ध वाणी क्या है?
उत्तर:
सिर साटे रूंख रहे, तो भी सस्तो जाण।

प्रश्न 6.
खेजड़ली में किस वृक्ष की रक्षा की गई?
उत्तर:
खेजड़ी के वृक्ष की।

RBSE Class 3 EVS Chapter 15 Question Answer in Hindi खेजड़ली का बलिदान पेड़ों के सच्चे रक्षक

प्रश्न 7.
बिश्नोई समाज ने किसके संरक्षण के लिए बलिदान दिया?
उत्तर:
पर्यावरण संरक्षण के लिए।

प्रश्न 8.
महाराजा अभयसिंह ने खेजड़ली घटना के बाद क्या किया?
उत्तर:
महाराजा अभयसिंह ने बिश्नोई समुदाय से माफी माँगी।

प्रश्न 9.
खेजड़ली में किसके शिकार पर रोक लगाई गई?
उत्तर:
वन्यजीवों के शिकार पर।

प्रश्न 10.
बिश्नोई संमाज ने किसके प्रति समर्पण दिखाया?
उत्तर:
प्रकृति के प्रति।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
अमृता देवी की बेटियों ने खेजड़ली बलिदान में क्या भूमिका निभाई?
उत्तर:
अमृता देवी की तीनों बेटियों (आसू, रत्नी और भागू) ने माँ के साथ खेजड़ी पेड़ों से चिपककर कटाई का विरोध किया और पेड़ों की रक्षा के लिए अपने प्राण दिए।

प्रश्न 2.
अमृता देवी ने खेजड़ी पेड़ों की रक्षा क्यों की?
उत्तर:
अमृता देवी ने गुरु जाम्भोजी की वाणी, “सिर साटे रूंख रहे, तो भी सस्तो जाण” से प्रेरित होकर खेजड़ी पेड़ों की रक्षा की, क्योंकि बिश्नोई समाज प्रकृति संरक्षण को धर्म मानता है।

प्रश्न 3.
खेजड़ली बलिदान में बिश्नोई समाज की क्या भूमिका थी?
उत्तर:
बिश्नोई समाज ने खेजड़ली बलिदान में खेजड़ी पेड़ों और वन्यजीवों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौधावर किए। 84 गाँवों के लोग शामिल हुए और पर्यावरण संरक्षण के लिए अद्वितीय बलिदान दिया।

प्रश्न 4.
महाराजा अभयसिंह ने खेजड़ली बलिदान के बाद क्या कदम उठाए?
उत्तर:
महाराजा अभयसिंह ने पेड़ों की कटाई तुरंत रुकवा दी, बिश्नोई समुदाय से माफी माँगी और बिश्नोई गाँवों में पेड़ों की कटाई व वन्यजीव शिकार पर प्रतिबंध लगाया।

RBSE Class 3 EVS Chapter 15 Question Answer in Hindi खेजड़ली का बलिदान पेड़ों के सच्चे रक्षक

प्रश्न 5.
खेजड़ली बलिदान का पर्यावरण संरक्षण से क्या संबंध है?
उत्तर:
खेजड़ली बलिदान पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है, जहाँ बिश्नोई समाज ने खेजड़ी पेड़ों को बचाने के लिए प्राण दे दिए। यह घटना प्रकृति के प्रति समर्पण और बलिदान का अनूठा उदाहरण है।

दीर्घ उत्तरीय एवं निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
खेजड़ली बलिदान की घटना और उसके दीर्घकालिक प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर:
सन् 1730 में खेजड़ली गाँव में अमृता देवी, उनकी बेटियों (आसू, रत्नी और भागू) और बिश्नोई समुदाय के कई लोगों ने खेजड़ी पेड़ों की रक्षा के लिए अपने प्राण दे दिए। महाराज अभयसिंह ने पेड़ों की कटाई रुकवा दी, बिश्नोई समाज से माफी माँगी और बिश्नोई क्षेत्रों में पेड़-वन्यजीव संरक्षण का आदेश दिया।
यह विश्व का पहला पर्यावरण आन्दोलन बना, जो आज भी प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरणा देता है।

प्रश्न 2.
अमृता देवी और उनकी बेटियों की वीरता का वर्णन करें।
उत्तर:
अमृता देवी ने जोधपुर के गाँव खेजड़ली में खेजड़ी पेड़ों को बचाने के लिए महाराजा अभयसिंह के सैनिकों का डटकर विरोध किया और पेड़ों से चिपक गईं। उनकी बेटियाँ—आसू, रत्नी और भागूभी माँ के साथ शामिल हुईं। गुरु जाम्भोजी की वाणी से प्रेरित होकर उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनकी वीरता पर्यावरण संरक्षण के लिए अद्वितीय समर्पण का प्रतीक है, जिसने विश्नोई समाज को प्रेरित किया।

प्रश्न 3.
महाराजा अभयसिंह की भूमिका और उनके निर्णय का प्रभाव बताएँ।
उत्तर:
महाराजा अभयसिंह ने पहले महल के लिए चूना पकाने के लिए खेजड़ी की लकड़ी काटने का आदेश दिया। जिसके विरोध में बिश्नोई समाज ने बलिदान दिया। घटना की जानकारी मिलने पर महाराजा अभयसिंह ने पेड़ों की कटाई रोकी, बिश्नोई समाज से माफी माँगी और खेजड़ली व आस-आस के गाँवों में पेड़ों की कटाई व शिकार पर रोक लगाई। उनका यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्त्वपूर्ण था।

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