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RBSE Class 3 Hindi Chapter 10 मेला Question Answer
मेला Question Answer
अभ्यास कार्य
आओ बात करें
प्रश्न 1.
आपके आसपास कौन-कौनसे मेले लगते हैं?
उत्तर:
हमारे आसपास दशहरा मेला, तीज मेला, दीपावली मेला और पुस्तक मेला आदि लगते हैं ।
प्रश्न 2.
क्या आपने कभी मेला देखा है? आपको वहाँ क्या-क्या अच्छा लगा ? इसके बारे में बताइए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें ।
प्रश्न 3.
मेले में जाने से पहले आप क्या – क्या तैयारियाँ करते हैं?
उत्तर:
मैं अच्छे कपड़े पहनता हूँ, फिर माता-पिता से मेले में खरीदारी और खाने-पीने के लिए पैसे लेता हूँ।
सोचो और लिखो –
प्रश्न 1.
बहुविकल्पात्मक प्रश्न-
(क) मेले में क्या-क्या वस्तुएँ थीं?
(अ) झूले
(ब) चाट का ठेला
(स) खिलौने वाला
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी
(ख) बच्चों ने मेले में क्या खाया?
(अ) आइसक्रीम
(ब) चाट
(स) समोसा
(द) मिठाई
उत्तर:
(ब) चाट
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प्रश्न 2.
मेले में क्या-क्या दिखाई दे रहा था ?
उत्तर:
मेले में झूले, खिलौने, चाट के ठेले मिठाइयाँ गुब्बारे, और रंग-बिरंगी स्टालें दिखाई दे रही थी।
प्रश्न 3.
मेले में चाट के अलावा और क्या-क्या वस्तुएँ मिलती हैं?
उत्तर:
मेले में चाट के अलावा झूले, खिलौने, मिठाइयाँ गुब्बारे और रंग-बिरंगी चीजें मिलती हैं ।
प्रश्न 4.
मेले में छोटू ने किसका हाथ पकड़ा था और क्यों?
उत्तर:
मेले में छोटू गुड़िया और गुनगुन के साथ था और उसने उनका हाथ पकड़ा था ताकि वे भीड़ में खो न जाए ।
मेरी तेरी सबकी बात-
प्रश्न 1.
मेले से जुड़ी इन वस्तुओं को आपके घर की भाषा में क्या कहते हैं?
झूला ………. पकौड़ी ……….
चाट ……….. गुड़िया ……….
उत्तर:
घर की भाषा में-
झूला – झूलों/हिंडोला
चाट – चाट/चटपटा/चखना
पकौड़ी – भजिया/बरी
गुड़िया – पुतलियो / गूड़ियों
प्रश्न 2.
कविता के इन वाक्यों को पूरा कीजिए—
(अ) झूले, ठेले, सुंदर ………… ।
(ब) लाए जाकर ……… खिलौने ।
उत्तर:
(अ) हाट
(ब) चार
प्रश्न 3.
चित्र में आई वस्तुओं को पहचानकर उनके नाम लिखिए—

उत्तर:
फलवाला-फल, कुल्फीवाला – आइसक्रीम, कपड़ेवाला-कपड़े, गुब्बारेवाला-गुब्बारे, टेन्टझोपड़ी- दर्शक, खिलौनेवाला – खिलौने ।
आओ लिखें-
प्रश्न 1.
बच्चों ने मेले में क्या-क्या किया?
उत्तर:
बच्चों ने मेले में जाकर चाट खाई, झूलों का आनंद लिया व खिलौने खरीदे ।
प्रश्न 2.
कविता में गुड़िया और गुनगुन कौन हैं?
उत्तर:
गुड़िया और गुनगुन दो बच्चियाँ हैं जो मेला देखने गई हैं, उनका हाथ छोटू ने पकड़ा है
प्रश्न 3.
मेले का वातावरण कैसा था ?
उत्तर:
मेले का वातावरण आकर्षक है। इसमें लोगों की भीड़, दुकानों और मनोरंजन के साधनों की भरमार है। मेले का वातारवरण रंग-बिरंगा है।
प्रश्न 4.
आप मेले में जाते हैं तो क्या – क्या खरीदते हो ?
उत्तर:
मैं मेले में जाता हूँ तो मिट्टी के खिलौने, सजावट की वस्तुएँ व खाने-पीने का सामान खरीदता हूँ।
प्रश्न 5.
आपका दोस्त अपने मामाजी के गाँव में लगे मेले में जाकर आया है? मेले की बात जानने के लिए आप उससे कौन-कौनसे सवाल पूछेंगे ? लिखिए।
उत्तर:
- तुम, मामाजी के गाँव में कौन से मेले में गए थे?
- मेला देखने किसके साथ गए थे?
- मेले में क्या-क्या देखने को मिला ?
- क्या तुमने झूले का आनंद लिया?
- मेले में क्या-क्या खरीदा ?
- क्या वहाँ बहुत भीड़ थी ?
- क्या वहाँ सर्कस भी था ?
- क्या तुम्हें मेला अच्छा लगा ?
प्रश्न 6.
नीचे दो वाक्य दिए गए हैं। इनको आगे बढ़ाते हुए कविता बनाइए—
घर के पास लगा था मेला
काका आए लेकर थैला
……………. रेलम रेला ।
………………. पीला केला
………………………
उत्तर:
घर के पास लगा था मेला
काका आए लेकर थैला
हम सब हुए रेलम रेला ।
खाया गरम समोसा और पीला केला ।
घर के पास लगा था मेला ।
प्रश्न 7.
आपका साथी मेले में खो जाए तो आप उसे कैसे खोजेंगे? किस-किससे मिलेंगे और क्या करेंगे? शिक्षक और बड़ों से चर्चा कर बताएँ और लिखें।
उत्तर:
स्वयं (बच्चा) – अरे ! मेरा दोस्त तो कहीं दिख नहीं रहा।
शिक्षक – क्या हुआ? तुम इतने परेशान क्यों हो?
स्वयं – सर, मेरा दोस्त मेला देखते-देखते खो गया।
शिक्षक – तुम घबराओ नहीं । उसने कौन से कपड़े पहने हैं? नाम क्या है ?
स्वयं – उसका नाम रोहित है। उसने नीली टी-शर्ट . और काली पैंट पहनी है।
शिक्षक – अच्छा, हम अभी मेले के घोषणा- केन्द्र चलते हैं। वहाँ से उसके नाम की घोषणा करवाएँगे।
स्वयं – जी, सर और क्या मैं पास के पुलिस अंकल से भी बात कर सकता हूँ?
शिक्षक – हाँ, बिल्कुल । हम उन्हें भी बताएँगे । तुम मेरे साथ रहो और अकेले कहीं मत जाना।
स्वयं— अच्छा, सर ।
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भाषा की बात-
प्रश्न 1.
दिए गए वाक्यों में काम को कौन कर रहा है? पहचानकर सही उत्तर पर चिह्न लगाइए ।
(क) रीना किताब पढ़ रही है ।
(अ) रीना
(ब) किताब
(स) पढ़ रही है
उत्तर:
(अ) रीना
(ख) मोहन ने गेंद फेंकी।
(अ) मोहन
(ब) गेंद
(स) फेंकी
उत्तर:
(अ) मोहन
प्रश्न 2.
दिए गए वाक्यों में क्या काम हो रहा है?
(क) चिड़िया आकाश में उड़ रही है।
(अ) चिड़िया
(ब) उड़ रही है
(स) आकाश में
उत्तर:
(ब) उड़ रही है
(ख) बच्चे मैदान में खेल रहे हैं।
(अ) बच्चे
(ब) खेल रहे हैं
(स) मैदान
उत्तर:
(ब) खेल रहे हैं
प्रश्न 3.
वाक्य के लिए एक शब्द लिखें-
बच्चों को पढ़ाने वाली – शिक्षिका
गाय चराने वाला – ……………….
लोहे का सामान बनाने वाला – ……………….
मिठाई बनाने वाला – ……………….
क्रिकेट में बॉल फेंकने वाला खिलाड़ी – ……………….
बच्चों के पढ़ने का स्थान – ……………….
ऐसा स्थान जहाँ पुस्तकें रखी होती हैं – ……………….
उत्तर:
बच्चों को पढ़ाने वाली – शिक्षिका
गाय चराने वाला – चरवाहा/ग्वाला
लोहे का सामान बनाने वाला – लोहार
मिठाई बनाने वाला = हलवाई
क्रिकेट में बॉल फेंकने वाला खिलाड़ी – गेंदबाज
बच्चों के पढ़ने का स्थान – विद्यालय
ऐसा स्थान जहाँ पुस्तकें रखी होती हैं। – पुस्तकालय
यह भी करें-
पुस्तकालय में से मेले से जुड़ी हुई कहानी या कविता की किताब को पढ़िए और पढ़ी गई कहानी / कविता को बाल सभा में सुनाइए ।
उत्तर:
विद्यार्थी पुस्तकालय से पुस्तक लेकर कहानी या कविता पढ़ें और बाल सभा में सुनाएँ ।
मेला प्रश्न उत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
घर के पास क्या लगा था ?
(अ) दुकान
(ब) मेला
(स) बाजार
(द) मंदिर
उत्तर:
(ब) मेला
प्रश्न 2.
बच्चों ने मेले में क्या खाया?
(अ) पकौड़ी
(ब) समोसा
(स) आइसक्रीम
(द) चाट
उत्तर:
(द) चाट
प्रश्न 3.
बच्चों ने मेले से कितने खिलौने खरीदे ?
(अ) दो
(ब) तीन
(स) चार
(द) एक
उत्तर:
(स) चार
प्रश्न 4.
मेले में किसने हाथ पकड़ा था?
(अ) मोटू ने
(ब) छोटू ने
(स) गोलू ने
(द) बबलू ने
उत्तर:
(ब) छोटू ने
प्रश्न 5.
मेले में चीजें कैसी थीं?
(अ) साधारण
(ब) सुंदर
(स) रंगहीन
(द) खराब
उत्तर:
(ब) सुंदर
रिक्त स्थान भरिये—
- घर के पास ……….. लगा था । (मेला /ठेला)
- हमने जाकर खाए …………। (झूले / पकौड़े)
- गुड़िया और …….. साथ में थीं। (गुनगुन / सीमा)
- छोटू ने ………. पकड़ा था। (हाथ /पैर)
उत्तर:
- मेला
- झूले
- गुनगुन
- हाथ।
सत्य/असत्य बतलाइये—
- मेला स्कूल के पास लगा था।
- बच्चों ने मेले में समोसा खाया।
- मेले में खिलौने रंग-बिरंगे और सलोने थे।
- छोटू ने हाथ पकड़ा था।
उत्तर:
- असत्य
- असत्य
- सत्य
- सत्य ।
उचित मिलान कीजिए-

उत्तर:
(अ) – (ख),
(ब) – (क),
(स) – (ग),
(द) – (घ)।
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अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
कवि ने सबसे पहले क्या खाया?
उत्तर:
कवि ने सबसे पहले चाट खाई ।
प्रश्न 2.
कविता का शीर्षक क्या है?
उत्तर:
कविता का शीर्षक “मेला” है ।
प्रश्न 3.
मेले में कौन-कौन सी चीजें थीं?
उत्तर:
चाट, ठेला, झूले, खिलौने और सुंदर हाट था।
प्रश्न 4.
कवि ने कितने खिलौने लिए?
उत्तर:
कवि ने चार खिलौने लिए ।
प्रश्न 5.
मेले में किसका हाथ पकड़ा था?
उत्तर:
मेले में गुड़िया और गुनगुन का हाथ छोटू ने पकड़ा था।
प्रश्न 6.
“मेला” कविता के कवि का क्या नाम है ?
उत्तर:
‘मेला’ कविता के कवि का नाम ‘रमेश थानवी’ है ।
लघुत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
मेला कहाँ और कैसा लगा था ?
उत्तर:
मेला कवि के घर के पास लगा था । वहाँ बहुत चहल-पहल थी। झूले, खाने-पीने की चीजें और रंग- बिरंगे खिलौने मेले की शोभा बढ़ा रहे थे।
प्रश्न 2.
कविता में बच्चों की खुशी का वर्णन कैसे किया गया है?
उत्तर:
कविता में बच्चों की खुशी झूलों पर झूलने, चाट खाने और रंग-बिरंगे खिलौने लेने के माध्यम से दिखायी गई है। वे हँसते-खेलते, गुनगुनाते और उत्साहित दिखाई देते हैं। उनकी मासूम खुशी पूरे मेले को आनंदमय बना देती है ।
प्रश्न 3.
हमें ‘मेला” कविता से क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर:
“मेला” कविता हमें यह सिखाती है कि छोटी-छोटी खुशियों में भी बड़ा आनंद छुपा होता है बच्चों का सरल मन हर चीज में आनंद ढूंढ लेता है । यह कविता मेलों के माध्यम से पारिवारिक प्रेम, बचपन की मासूमियत और आनंद लेने की कला को दर्शाती है।
प्रश्न 4.
कविता में ‘सलोने’ शब्द का क्या आशय है?
उत्तर:
‘सलोने’ का अर्थ होता है सुंदर और प्यारे । कविता में यह शब्द खिलौनों की सुंदरता को दर्शाने के लिए प्रयोग किया गया है।
दीर्घउत्तरीय एवं निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
“घर के पास लगा था मेला पंक्तियों के आधार पर मेले का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए ।
उत्तर:
इन पंक्तियों में मेले का सुंदर और रोचक चित्रण किया गया है । मेला घर के पास ही लगा था जिससे बच्चों में बहुत उत्साह था । वहाँ चाट का ठेला लगा था और बच्चों ने स्वादिष्ट चाट खाई। मेले में झूले वाला भी आया था, बच्चों ने झूले का आनंद लिया। मेले में रौनक, ठाठ और आनंद का माहौल था। बच्चों ने खिलौने वाले से खिलौने भी खरीदे ।
प्रश्न 2.
बच्चों के जीवन में मेला किस तरह उत्साह का प्रतीक है? कविता के आधार पर लिखिए ।
उत्तर:
बच्चों के जीवन में मेला उत्साह, आनंद और नई उमंग का प्रतीक है । कविता में भी दिखाया गया है कि बच्चे मेले को लेकर उत्साहित हैं। मेले में लगे रंग-बिरंगे झूले, चाट के ठेले, खिलौने और गुब्बारे बच्चों को बेहद लुभाते हैं । वे दोस्तों और परिवार के साथ घूमते हुए खुशी का अनुभव करते हैं । वे चाट खाते हैं, झूलों का आनंद लेते हैं। रंग-बिरंगे खिलौने खरीदते हैं। वहाँ वे केवल मनोरंजन ही नहीं करते बल्कि सीखने और देखने के अवसर का लाभ भी उठाते हैं। वे तरह-तरह की चीजें देखकर खुश होते हैं और उनके मन में नई उमंग और सृजनात्मकता जागती है ।
मेला Summary in Hindi
कठिन – शब्दार्थ एवं सरलार्थ-
(1)
घर के पास लगा था मेला,
उसमें आया चाट का ठेला,
हमने जाकर खाई चाट, ऐसे थे मेले के ठाट ।
कठिन – शब्दार्थ-
- मेला = उत्सव या भीड़भाड़ वाला बाजार।
- चाट का ठेला = खाने-पीने की चलती दुकान ।
- ठाट = शान, प्रभाव।
सरलार्थ —
कवि मेले का वर्णन करते हुए कह रहा है कि घर के पास मेला लगा था । उसमें खाने-पीने की चीजों की चलती फिरती दुकानें लगी थीं । हमने वहाँ जाकर स्वादिष्ट चाट खाई। मेले का माहौल बहुत अच्छा और आनंददायक था।
(2)
घर के पास लगा था मेला,
उसमें आया झूले वाला ।
हमने जाकर खाए झूले,
मन में नहीं समाये फूले ।
कठिन-शब्दार्थ —
- झूले वाला = झूला झुलाने वाला व्यक्ति।
- फूले न समाना = बहुत प्रसन्नता, खुशी से भर जाना।
सरलार्थ —
कवि कहते हैं कि मेले में झूले वाला भी आया था। हमने वहाँ झूले का आनंद लिया और हमारा मन बहुत प्रसन्न हो गया अर्थात् बच्चों का मन उत्साह, उमंग और आनंद से भर गया ।

(3)
घर के पास लगा था मेला,
उसमें एक खिलौने वाला ।
लाए जाकर चार खिलौने,
रंग-बिरंगे बड़े सलौने ।
कठिन – शब्दार्थ –
- खिलौने = बच्चों के खेलने का सामान।
- रंग-बिरंगे = बहुत से रंगों वाले।
- सलौने = सुंदर ।
सरलार्थ —
कवि कह रहे हैं कि घर के पास मेला लगा था। मेले में एक खिलौने बेचने वाला आया । हमने उसके पास जाकर उससे चार रंग-बिरंगे खिलौने खरीदे । खिलौने बहुत सुंदर थे ।
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(4)
घर के पास लगा था मेला,
हमने देखा मन भर मेला ।
गुड़िया गुनगुन दोनों साथ,
छोटू ने पकड़ा था हाथ ।
मेले के थे ऐसे ठाट,
झूले, ठेले, सुंदर हाट ।
कठिन – शब्दार्थ –
- मन भर = जी भरकर, पूर्ण संतुष्टि के साथ ।
- ठेले = चलती फिरती खाने की दुकानें।
- हाट = अस्थाई बाजार ।
- ठाट = शान, प्रभाव ।
सरलार्थ – कवि कह रहे हैं कि घर के पास जो मेला लगा हुआ था उसे हमने जी भरकर देखा अर्थात् उसका पूर्ण आनन्द लिया। मेले में गुड़िया और गुनगुन भी साथ में गए थे और उनका हाथ छोटू नाम के लड़के ने पकड़ रखा था। मेले में घूमने के अच्छे रास्ते थे, वहाँ झूले, खाने के ठेले और सुंदर बाजार भी लगा था।
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