Practicing these RBSE Class 3 Hindi Book Solutions Chapter 14 मातृकुंडिया की यात्रा Question Answer improves confidence in the language.
RBSE Class 3 Hindi Chapter 14 मातृकुंडिया की यात्रा Question Answer
मातृकुंडिया की यात्रा Question Answer
अभ्यास कार्य
आओ बात करें-
प्रश्न 1.
क्या आप भी कभी किसी मेले में गए हो ? यदि हाँ तो वहाँ क्या क्या देखा? बताइए ।
उत्तर:
हाँ, मैं एक बार मेले में गया था । वह मेला बहुत बड़ा और रंग-बिरंगा था । वहाँ बहुत भीड़ थी । मैंने वहाँ बहुत बड़े-बड़े झूले देखे। मेले में तरह-तरह की मिठाइयाँ मिल रही थीं— गुलाब जामुन, जलेबी, रसगुल्ले और चाट मैंने अपने मम्मी-पापा के साथ गोलगप्पे और बर्फ का गोला खाया । वहाँ ढेर सारी खिलौनों की दुकानें भी थीं— बंदूक, गुड़िया, गाड़ी, और बबल बनाने की रिंग । मैंने एक पिस्तौल खरीदी। मेले में लोग ढोल-नगाड़े बजा रहे थे, कुछ लोग नाच रहे थे। एक जगह बंदर का नाच भी दिखाया जा रहा था। वह बहुत मजेदार था।
प्रश्न 2.
यदि आपको मेले में जाने का मौका मिले तो सबसे पहले आप क्या करोगे?
उत्तर:
यदि मुझे मेले में जाने का मौका मिले तो मैं सबसे पहले झूलों की ओर दौडूंगा । चक्री झूले में बैठकर ऊँचाई का आनंद लूंगा । फिर मिठाइयाँ एवं चाट खाऊँगा और खिलौनों की दुकान से कुछ पसंदीदा खिलौने खरीदूंगा ।
प्रश्न 3.
आपको मेले में सबसे ज्यादा क्या पसंद है-झूले, खिलौने, मिठाइयाँ या कुछ और?
उत्तर:
मुझे मेले में सबसे ज्यादा झूले पसंद आएंगे। झूलों में ऊँचाई पर जाना और नीचे आते समय हवा का एहसास बहुत अच्छा लगता है । चक्री झूला मेरा सबसे पसंदीदा है, उसमें बैठना बहुत रोमांचक लगता है ।
सोचो और बताओ-
प्रश्न 1.
सही उत्तर चुनो (बहुविकल्पात्मक प्रश्न) –
(क) मातृकुंडिया में कौनसी नदी बहती है?
(अ) गंगा नदी
(ब) बनास नदी
(स) नर्मदा नदी
(द) यमुना नदी
उत्तर:
(ब) बनास नदी
(ख) सृष्टि को मेले में सबसे ज्यादा क्या करने में मजा आया?
(अ) झूला झूलने में
(ब) गुब्बारे खरीदने में
(स) मिठाइयाँ खाने में
(द) खिलौने खरीदने में
उत्तर:
(अ) झूला झूलने में
प्रश्न 2.
मिलान करो-

उत्तर:
बनास नदी – मेले में लगे थे
झूले – मातृकुंडिया में बहती है
मिट्टी के बर्तन – पर्यावरण के लिए लाभदायक है.
मिठाइयाँ – खाने की दुकान में बिक रही थी मातृकुंडिया में बहती है
प्रश्न 3.
रिक्त स्थान भरो-
(क) ………… नदी के किनारे मातृकुंडिया मेला लगता है।
(ख) मेले में बड़े – बड़े ……….. थे ।
(ग) शाम को जब ………. ढल रहा था, सब ने मेले से विदा ली।
(घ) कन्हैया ने मेले की ……….. ली।
उत्तर:
(क) बनास
(ख) झूले
(ग) सूरज
(घ) तस्वीरें।
![]()
रचनात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
अगर आपको मेले में जाने का मौका मिले तो आप सबसे पहले क्या करना चाहोगे?
उत्तर:
अगर मुझे मेले में जाने का मौका मिले तो मैं झूलों की ओर भागूंगा । मुझे हवा में ऊँचाई तक उड़ता चक्री झूला सबसे ज्यादा रोमांचक लगता है । फिर मैं मिठाइयाँ — जलेबी और बर्फ का गोला जरूर खाऊँगा । उसके बाद रंग-बिरंगी खिलौनों की दुकान पर जाकर खिलौने खरीदूँगा। मेले की रौनक, संगीत और हँसी- खुशी के बीच मैं हर पल को कैमरे और दिलों में कैद करना चाहूँगा।
प्रश्न 2.
कल्पना कीजिए कि आपके गाँव या शहर में एक नया मेला लगा है । वहाँ क्या – क्या होगा ?
उत्तर:
कुछ दिनों पहले मेरे गाँव में पहली बार एक भव्य मेला लगा। जैसे ही यह खबर फैली, पूरे गाँव में खुशी की लहर दौड़ गई। मेला मैदान रंग-बिरंगी झंडियों, रोशनी और सजावट से सजा हुआ था । वहाँ तरह-तरह की दुकानें लगी थीं। कहीं मिठाइयाँ बिक रही थीं, तो कहीं खिलौनों और चूड़ियों की दुकानें थीं। बच्चों के लिए नाव झूला, ड्रैगन, ट्रेन और चक्री झूला सबसे बड़े आकर्षण थे। मैंने अपने दोस्त के साथ झूले का आनंद लिया, चाट खाई और ढेर सारी तस्वीरें लीं । यह मेला मेरे लिए बहुत खास रहा।
प्रश्न 3.
अगर आप मेले में दुकानदार होते तो क्या बेचते और क्यों?
उत्तर:
अगर मैं मेले में दुकानदार होता, तो मैं बच्चों के लिए रंग-बिरंगे खिलौनों की दुकान लगाता । मेरी दुकान पर गुड़िया, कार, गेंद, पिस्तौल, बांसुरी और बबल बनाने वाली रिंग जैसी चीजें होतीं । मैं बच्चों से प्यार करता हूँ और उनकी मुस्कान मुझे बहुत खुशी देती है। जब वे मेरी दुकान से खिलौना लेकर मुस्कुराते तो मेरा मन भी खिल उठता । मैं खिलौने इसलिए बेचता क्योंकि बच्चों की मुस्कान बहुत प्यारी होती है । जब कोई बच्चा मेरी दुकान से खिलौना लेता तो मुझे ऐसा लगता जैसे मैंने उसकी खुशी में हिस्सा लिया है। मैं चाहता हूँ कि कोई भी बच्चा मेला देखकर यह न सोचे कि उसने कुछ खरीदा नहीं, इसलिए मैं सस्ते, सुरक्षित और सुंदर खिलौने बेचता ताकि हर बच्चा खुश होकर मेरी दुकान से लौटे।
प्रश्न 4.
यदि मेले में कोई बच्चा खो जाए और आपको मिले तो आप उसे उसके माता-पिता तक पहुँचाने में कैसे मदद करेंगे?
उत्तर:
यदि मैं मेले में घूम रहा होता और मुझे कोई रोता हुआ बच्चा अकेला मिलता, तो सबसे पहले मैं उसे प्यार से चुप कराता । मैं उससे उसका नाम, माता- पिता का नाम और पता पूछता । फिर मैं उसे अपने साथ मेले के मुख्य मंच या सूचना केन्द्र/पूछताछ केन्द्र तक ले जाता। वहाँ जाकर मैं आयोजकों से माइक पर उसकी जानकारी अनाउंस करवाता ताकि उसके माता- पिता उसे खोजते हुए वहाँ आ सकें । जब तक उसके माता-पिता मिल नहीं जाते, मैं उसके साथ रहता ताकि वह डरे नहीं। जब उसके माता-पिता आते और बच्चा उन्हें देखकर खुश होता, तो मुझे बहुत अच्छा लगता कि मैंने उसकी मदद की।
भाषा की बात-
1. नीचे दिए गए वाक्यों में विशेषता बताने वाले शब्द पहचानिए और उन्हें रेखांकित कीजिए-
(क) सूरज की हल्की किरणें गाँव की गलियों को रोशन कर रही थी ।
(ख) मेले में बड़े-बड़े झूले लगे थे ।
(ग) वहाँ सुहावना प्राकृतिक दृश्य था ।
(घ) महिलाएँ नदी के किनारे छोटे-छोटे दीये बहा रही थी ।
उत्तर:
(क) विशेषण — हल्की
(ख) विशेषण – बड़े – बड़े
(ग) विशेषण – सुहावना, प्राकृतिक
(घ) विशेषण – छोटे-छोटे

2. नीचे दिए गए खाली स्थान में उचित विशेषता बताने वाले (विशेषण) शब्द लिखिए-
(क) कन्हैया ने ……… खिलौने खरीदे।
(ख) दादी ने ………. बर्तन लेने की सलाह दी।
(ग) नदी का दृश्य बहुत ………. लग रहा था।
(घ) हमने ………. भोजन का आनंद लिया।
(ङ) हवा बहुत ………. चल रही थी ।
उत्तर:
विशेषण-
(क) रंग-बिरंगे
(ख) मिट्टी के
(ग) सुंदर
(घ) स्वादिष्ट
(ङ) ठंडी
3. दिये गये शब्दों से वाक्य बनाओ-
(क) मेला – ………………
(ख) झूला – ………………
(ग) मिठाई – ………………
(घ) खरीददारी – ………………
उत्तर:
(क) मेला – इस वर्ष हमारे गाँव में बहुत बड़ा मेला लगा ।
(ख) झूला – सृष्टि ने झूला झूलकर बहुत आनंद लिया।
(ग) मिठाई – मैंने मेले में अपनी पसंदीदा मिठाई खरीदी।
(घ) खरीददारी – दादी और माँ ने मेले में ढेर सारी खरीददारी की।
यह भी करें-
प्रश्न 1.
आपके आसपास कौनसा मेला लगता है? उसके बारे में बताइये।
उत्तर:
[विद्यार्थी स्वयं करें ।]
प्रश्न 2.
नीचे दिया गया विज्ञापन पढ़ो और बताओ-

प्रश्न 1.
मेला कब है?
उत्तर:
मेला 10 फरवरी, 2025 को है ।
प्रश्न 2.
मेला कहाँ लगा है ?
उत्तर:
मेला दशहरा मैदान, राशमी में लगा है।
![]()
प्रश्न 3.
मेले के मुख्य आकर्षण क्या-क्या हैं?
उत्तर:
मेले का मुख्य आकर्षण – मजेदार दुकानें, जादू से जुड़े खेल, कबड्डी प्रतियोगिता, बच्चों के खेल, झूले, नृत्य और संगीत कार्यक्रम हैं ।
मातृकुंडिया की यात्रा प्रश्न उत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
मातृकुंडिया का मेला किस नदी के किनारे लगता है ?
(अ) गंगा नदी
(ब) बनास नदी
(स) यमुना नदी
(द) नर्मदा नदी
उत्तर:
(ब) बनास नदी
प्रश्न 2.
महिलाएँ नदी के किनारे क्या बहा रही थीं?
(अ) फूल
(ब) मिठाइयाँ
(स) दीये
(द) पूजा की थाली
उत्तर:
(स) दीये
प्रश्न 3.
मेले में कौन-सी चीज पर्यावरण के लिए लाभदायक बताई गई ?
(अ) मिठाइयाँ
(ब) झूले
(स) मिट्टी के बर्तन
(द) प्लास्टिक के बर्तन
उत्तर:
(स) मिट्टी के बर्तन
प्रश्न 4.
मातृकुंडिया किस राज्य में है?
(अ) उत्तर प्रदेश
(ब) मध्य प्रदेश
(स) पंजाब
(द) राजस्थान
उत्तर:
(द) राजस्थान
प्रश्न 5.
मातृकुंडिया का मेला कब लगता है?
(अ) वैशाख पूर्णिमा
(ब) चैत्र पूर्णिमा
(स) श्रावण पूर्णिमा
(द) पूर्णिमा को
उत्तर:
(अ) वैशाख पूर्णिमा
रिक्त स्थान भरिये—
- मेले में लोग ……… का आशीर्वाद लेने और मेले का आनंद उठाने आते हैं।
- मातृकुंडिया को ‘मेवाड़ का’ ……….. भी कहते हैं।
- मेले में …….. की दुकानों पर काफी भीड़ थी।
- मेले में मेवाड़ी वेशभूषा में महिलाएँ और पुरुष …….. कर रहे थे ।
उत्तर:
- भगवान
- हरिद्वार
- खाने
- घूमर ।
सत्य / असत्य बतलाइये—
- मातृकुंडिया का मेला बनास नदी के तट पर लगा था।
- झूला झूलते हुए सबको ऐसा लग रहा था जैसे आसमान में उड़ रहे हों ।
- सभी बच्चों ने कचरा उठाया और कूड़ेदान में डाल दिया ।
- बैलगाड़ी में लौटते समय बच्चे आपस में मेले के मजेदार किस्से सुना रहे थे ।
उत्तर:
- सत्य
- सत्य
- सत्य
- असत्य ।

उचित मिलान कीजिए—

उत्तर:
(1) – (ख),
(2) – (ग),
(3) – (क),
(4) – (घ)।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
कन्हैया ने मेले में क्या देखा ?
उत्तर:
उसने देखा कि कुछ बच्चे नाश्ता करके अखबार, प्लास्टिक की थैलियाँ और रैपर इधर-उधर डाल रहे थे ।
![]()
प्रश्न 2.
मेले में महिला – पुरुष कौनसा नृत्य कर रहे थे?
उत्तर:
वे ‘घूमर’ नृत्य कर रहे थे ।
प्रश्न 3.
मेले में किस प्रकार के बर्तन बिक रहे थे ?
उत्तर:
मिट्टी के ।
प्रश्न 4.
‘मेवाड़ का हरिद्वार’ किसे कहते हैं ?
उत्तर:
मातृकुंडिया को ।
प्रश्न 5.
दादी ने बच्चों से क्या कहा?
उत्तर:
“हमें सफ़ाई का भी ध्यान रखना चाहिए ।”
प्रश्न 6.
ऊँटगाड़ी में बैठते ही कौन – सो गये?
उत्तर:
सृष्टि और यशवंत ।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
मातृकुंडिया का मेला कहाँ और कब लगता है ?
उत्तर:
मातृकुंडिया का मेला वैशाख पूर्णिमा के दिन राजस्थान के बनास नदी के किनारे लगता है । यहाँ लोग भगवान का आशीर्वाद लेने और मेले का आनंद उठाने आते हैं ।
प्रश्न 2.
मेले में क्या-क्या देखने को मिला ?
उत्तर:
मेले में झूले, रंग-बिरंगी दुकानें, खिलौनों की दुकानें, सजावटी सामान, मिट्टी के बर्तन, खिलौने, रंग-बिरंगी चूड़ियाँ, सुगंधित धूपबत्तियाँ, खाने-पीने की चीजें देखने को मिलीं ।
प्रश्न 3.
मातृकुंडिया में औरतें पूजा कर दीये क्यों बहा रही थीं?
उत्तर:
मातृकुंडिया में औरतें नदी में स्नान करने के बाद छोटे-छोटे दीये बहा रही थीं। यह एक धार्मिक परंपरा है, जिससे वे पुण्य कामना और परिवार के लिए सुख समृद्धि का संकल्प लेती हैं।
प्रश्न 4.
पाठ ‘मातृकुंडिया की यात्रा’ हमें क्या संदेश देता है ?
उत्तर:
यह पाठ हमें भारतीय संस्कृति, मेलों की धार्मिक आस्था और पारिवारिक मेल-जोल का महत्त्व समझाता है। साथ ही यह पर्यावरण संरक्षण और लोक परंपरा को अपनाने की प्रेरणा भी देता है ।

दीर्घउत्तरीय एवं निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
‘मातृकुंडिया की यात्रा’ पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर:
इस पाठ से हमें ज्ञात होता है कि भारतीय मेलों में धार्मिक आस्था और सामाजिक मेल-जोल का सुंदर संगम होता है। मिट्टी के बर्तन पर्यावरण के लिए उपयोगी हैं। आजकल एकल परिवारों के बढ़ते प्रचलन में यह पाठ यह भी बताता है कि परिवार के साथ बिताया समय बहुत आनंददायक और यादगार होता है । लोक संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव भी इस यात्रा में गहराया है।
प्रश्न 2.
मातृकुंडिया के मेले में कौन-कौनसी बातें विशेष थीं?
उत्तर:
मातृकुंडिया का मेला धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत खास था । बनास नदी के किनारे स्थित यह स्थल श्रद्धालुओं से भरा था । यहाँ पूजा, स्नान, दीये बहाने की परंपरा और बच्चों के लिए झूले, मिठाइयाँ और खिलौने थे। दुकानों की रौनक और ग्रामीण जीवन की झलक इस मेले की विशेषता थी । यह मेला हमारी लोकसंस्कृति को दर्शाता है ।
![]()
पठित गद्यांश
निम्नलिखित पठित गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(1)
हम सबसे पहले मंगलेश्वर महादेव मंदिर गए। वहाँ शिवजी के दर्शन किए।
मंदिर से बाहर निकलते ही हम मेले के मैदान में पहुँचे, चारों तरफ रौनक ही रौनक थी । हर तरफ रंग- बिरंगी दुकानें, खिलौनों की दुकानें कतार में सजी थी जहाँ सजावटी सामान, दैनिक उपयोग का सामान, मिट्टी के बर्तन, खिलौने, रंग-बिरंगी चूड़ियाँ और सुगंधित धूपबत्तियाँ बेची जा रही थी । क्या बड़े और क्या बच्चे! सब मोलभाव और खरीददारी करने में लगे थे। दादीजी ने कहा, “बेटा, मिट्टी के बर्तन पर्यावरण के लिए अच्छे होते हैं ।”
प्रश्न
- मेले में कैसी रौनक थी ?
- दुकानों पर कौन – कौन सी चीजें बिक रही थीं?
- लोग मेले में क्या कर रहे थे?
- दादी ने मिटटी के बर्तनों के बारे में क्या कहा ?
उत्तर:
- मेले में चारों तरफ चहल-पहल और रंग- बिरंगी दुकानों की रौनक थी ।
- दुकानों पर सजावटी सामान, दैनिक उपयोग की चीजें, मिट्टी के बर्तन, खिलौने, चूड़ियाँ और सुगंधित धूपबत्तियाँ बिक रही थीं।
- बड़े और बच्चे मेले में सभी मोलभाव कर खरीददारी करने में व्यस्त थे।
- दादी ने कहा कि ये बर्तन पर्यावरण के लिए अच्छे होते हैं।
(2)
आज वैशाख पूर्णिमा का दिन था । बनास नदी के तट पर मातृकुंडिया का बड़ा मेला लगा था । इस मेले की परंपरा सदियों पुरानी है । यहाँ लोग भगवान् का आशीर्वाद लेने और मेले का आनंद उठाने आते हैं। नरेश ने कौतुहल से दादाजी से पूछा, “मातृकुंडिया को ‘मेवाड़ का हरिद्वार’ क्यों कहते हैं?”
प्रश्न
- मातृकुंडिया का मेला कब लगा था ?
- लोग मातृकुंडिया क्यों आते हैं ?
- मातृकुंडिया को मेवाड़ का हरिद्वार क्यों कहा जाता है?
- नरेश ने किससे प्रश्न किया ?
उत्तर:
- मातृकुंडिया का मेला वैशाख पूर्णिमा के दिन लगा था।
- लोग भगवान का आशीर्वाद लेने और मेले का आनंद उठाने के लिए मातृकुंडिया आते हैं।
- मातृकुंडिया को मेवाड़ का हरिद्वार इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ मंगलेश्वर महादेव का बहुत पुराना मंदिर है।
- नरेश ने दादाजी से प्रश्न किया ।
मातृकुंडिया की यात्रा Summary in Hindi
पाठ का सार –
यह पाठ एक परिवार की मातृकुंडिया मेले की यात्रा पर आधारित है। एक सुबह बच्चे बहुत उत्साह से उठते हैं क्योंकि उन्हें मेला देखने जाना होता है। पूरा परिवार ऊँटगाड़ी में बैठकर मातृकुंडिया की ओर रवाना होता है।
मातृकुंडिया में बनास नदी के किनारे विशाल मेला लगा होता है, जहाँ परंपरागत चीजें झूले, खिलौने, मिठाइयाँ, मिट्टी के बर्तन और रंग-बिरंगे सामान मिलते हैं। वहाँ का वातावरण सुंदर और धार्मिक होता है।
सभी सबसे पहले मंगलेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन करते हैं, फिर मेले का आनंद लेते हैं । बच्चे झूलते हैं, मिठाइयाँ खाते हैं, नाच-गाना देखते हैं और मेले की साफ-सफाई का भी ध्यान रखते हैं । यह यात्रा उन्हें केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि स्वच्छता, परंपरा और जिम्मेदारी की सीख भी देती है । अंत में खुश .होकर सब घर लौटते हैं और यह यात्रा सबके दिलों में एक सुंदर याद बनकर रह जाती है।

कठिन शब्दार्थ-
- चहचहाहट = पक्षियों की आवाज ।
- माहौल = वातावरण।
- सजावट = सुंदर बनाना ।
- लाडले = बहुत प्रिय ।
- सवारी = यात्रा करने वाले लोग ।
- परंपरा = वर्षों से चली आ रही रीति ।
- पावन = पवित्र ।
- दीपदान = जलते हुए दीप बहाना।
- मनोरम = सुंदर, मन को भाने वाला ।
- रोशन = चमकदार।
- कौतूहल = आश्चर्य ।
- तर्पण = पितरों को जल चढ़ाना ।
- रौनक = चमक-दमक ।
- कतार = पंक्ति।
- सेल्फी = मोबाइल से अपनी तस्वीर लेना।
- जायका = स्वाद।
- कूड़ेदान = कूड़ा डालने का स्थान ।
- प्रदर्शन = किसी चीज को दिखाना ।
- विदा = विदाई लेना ।
- मौन = चुपचाप।
Leave a Reply