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RBSE Class 3 Hindi Chapter 4 श्रवण कुमार Question Answer
श्रवण कुमार Question Answer
अभ्यास कार्य
आओ बात करें-
प्रश्न 1.
इस कहानी से आपको क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर:
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि माता-पिता की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है। हमें उनके प्रति सदैव आदर और प्रेम का भाव रखना चाहिए।
प्रश्न 2.
यदि आप श्रवण कुमार की जगह होते तो क्या करते?
उत्तर:
अगर मैं श्रवण कुमार की जगह होता, तो मैं भी अपने माता-पिता की सेवा करता, उनकी इच्छाएँ पूरी करता और उन्हें तीर्थ यात्रा पर ले जाता ।
प्रश्न 3.
माता-पिता की सेवा क्यों महत्त्वपूर्ण होती है?
उत्तर:
माता – पिता ने हमें जन्म दिया, पाला-पोसा और हमारा ध्यान रखा, इसलिए उनकी सेवा करके हम उनके प्रति अपना प्रेम और आभार दिखाते हैं ।
सोचो और लिखो –
(अ) विकल्पात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता को कैसे यात्रा करवाई ?
(क) घोड़े पर बैठाकर
(ख) हाथी पर बैठाकर
(ग) कावड़ में बैठाकर
(घं) बैलगाड़ी में बैठाकर
उत्तर:
(ग) कावड़ में बैठाकर
प्रश्न 2.
राजा दशरथ ने तीर क्यों चलाया?
(क) उन्होंने समझा कि कोई जानवर नदी में पानी पी रहा है
(ख) उन्हें शिकार खेलना पसंद था
(ग) उन्होंने श्रवण कुमार को देख लिया था
(घ) माता – पिता ने उनसे कहा था
उत्तर:
(क) उन्होंने समझा कि कोई जानवर नदी में पानी पी रहा है
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(ब) मिलान करो—

उत्तर:

(स) रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए—
प्रश्न 1.
श्रवण कुमार अपने माता-पिता को …….. में बैठाकर तीर्थयात्रा करवाने निकला ।
उत्तर:
कावड़
प्रश्न 2.
राजा दशरथ ने नदी से पानी की आवाज सुनकर ……… चला दिया ।
उत्तर:
तीर
प्रश्न 3.
माता – पिता की सेवा करना सबसे ………. सेवा होती है ।
उत्तर:
बड़ी ।
रचनात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
अगर आपको अपने माता-पिता की घरेलू कार्यों में सहायता करनी हो तो आप क्या करेंगे?
उत्तर:
अगर मुझे अपने माता पिता की घरेलू कामों में मदद करनी हो, तो मैं निम्न काम करूँगा:-
- अपने खिलौने और किताबें सही जगह पर रखूँगा।
- खाना खाने के बाद अपनी थाली रसोई में ले जाऊँगा।
- अपने कपड़े आलमारी में सही से रखूँगा ।
- पानी की बोतल भरकर फ्रिज में रखूँगा ।
- अपने स्कूल का बैग खुद तैयार करूँगा ।
- अपना गृहकार्य समय पर करूँगा।
प्रश्न 2.
यदि आपका कोई मित्र अपने माता-पिता की सहायता नहीं करता है तो आप उसे कैसे समझाएँगे?
उत्तर:
अगर कोई मित्र अपने माता-पिता की मदद नहीं करता, तो मैं उसे निम्न प्रकार से समझाऊँगा- “मित्र, हमें अपने माता-पिता की मदद करनी चाहिए क्योंकि उन्होंने हमें पाला है, हमें सब कुछ दिया है। अगर हम उनकी मदद करेंगे तो उन्हें खुशी मिलेगी । हमारा घर साफ-सुथरा और अच्छा रहेगा । छोटा-छोटा काम करके भी हम उन्हें खुश कर सकते हैं, जैसे अपनी चीजें सही जगह पर रखकर अगर हम अच्छे बच्चे बनेंगे, तो हमारे माता-पिता हमें और अधिक प्यार करेंगे ।”
प्रश्न 3.
एक समूह बनाकर यह चर्चा करें कि आप कैसे समाज सेवा कर सकते हैं?
उत्तर:
- बुजुर्गों की सहायता करना –
हम अपने घर और मोहल्ले के बुजुर्गों की ज़रूरतों का ध्यान रख सकते हैं. जैसे कि दवाई लाकर देना, उनका हाल-चाल पूछना आदि । - शिक्षा में मदद करना-
जिन बच्चों को पढ़ाई की सुविधा नहीं मिलती, हम उन्हें समय निकालकर पढ़ा सकते हैं या किसी निःशुल्क शिक्षण केंद्र से जुड़ सकते हैं। - स्वच्छता बनाए रखना-
हम अपने आसपास की सफाई करके तथा दूसरों को स्वच्छता के लिए जागरूक करके समाज को साफ- सुथरा बना सकते हैं ।
प्रश्न 4.
श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता की सेवा के लिए समय निकाला। आप अपने परिवार और पढ़ाई के बीच संतुलन कैसे बनाएँगे?
उत्तर:
परिवार हमारी ताकत है और पढ़ाई हमारा भविष्य इसलिए दोनों ही जरूरी हैं। मैं अपनी दिनचर्या को इस तरह बनाऊँगा कि परिवार की जरूरतों का ध्यान भी रख सकूँ और पढ़ाई में भी अच्छा कर सकूँ । सुबह और शाम का कुछ समय मैं अपने परिवार के साथ बिताऊँगा, जैसे छोटे-मोटे घरेलू कामों में मदद करना, साथ भोजन करना या बात करना । शेष समय एकाग्रता से पढ़ाई करूँगा ताकि मेरा समय बर्बाद न हो ।
अगर कभी परिवार को मेरी ज्यादा जरूरत हो, तो मैं अपनी पढ़ाई को थोड़ी देर के लिए रोककर पहले उनका सहयोग करूँगा, बाद में उस समय की पढ़ाई को पूरा कर लूँगा ।
प्रश्न 5.
दैनिक कार्यों की सूची बनाएँ जिसमें परिवार की सहायता के लिए समय दिया जाए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें ।
प्रश्न 6.
अगर श्रवण कुमार ने माता-पिता को तीर्थयात्रा पर न ले जाने का फैसला किया होता तो क्या होता?
उत्तर:
अगर श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता को तीर्थयात्रा पर न ले जाने का निर्णय लिया होता, तो उनके माता-पिता बहुत दुःखी होते। उनकी आखिरी इच्छा पूरी नहीं हो पाती और उन्हें मानसिक पीड़ा होती । श्रवण कुमार को भी बाद में पछतावा होता कि वह अपने माता-पिता की सेवा नहीं कर सका।
इसलिए उसने कंधों पर अपने माता-पिता का बोझ उठाकर उन्हें तीर्थयात्रा पर ले जाना सही समझा ।
प्रश्न 7.
माता-पिता की सेवा नहीं करने पर परिवार और समाज पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। शिक्षक चर्चा करें।
उत्तर:
[शिक्षक महोदय की सहायता से कीजिए ।]
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भाषा की बात-
प्रश्न 1.
सूची – अ और सूची – ब में दिए गए शब्दों का उच्चारण कर मिलान कीजिए और अपने शिक्षक या साथियों के साथ मिलकर इनमें अंतर पहचानिए—

उत्तर:
स्वयं करें
प्रश्न 2.
‘श्रवण कुमार’ पाठ से पाँच अनुस्वार / चंद्रबिंदु वाले शब्द छाँटकर लिखिए ।
……….. …………. ………..
……….. ………….
उत्तर:
‘श्रवण कुमार’ पाठ में आए अनुस्वार / चंद्रबिंदु वाले शब्द-
जंगल, स्वयं, वहाँ पहुँचे, साँस, अंतिम इत्यादि ।
प्रश्न 3.
‘समाज’ शब्द के साथ ‘सेवा’ जोड़ने से समाज- सेवा शब्द बनता है । इसी प्रकार से ‘सेवा’ शब्द जोड़कर दो नए शब्द बनाइए ।
…………… …………..
उत्तर:
सेवा शब्द जोड़ने पर निर्मित नए शब्द-
- सेवाभाव
- जनसेवा ।
प्रश्न 4.
नीचे दिए गए शब्दों के विपरीत / उलटे अर्थ वाले शब्द से रिक्त स्थान भरिए —
(अपमान, रात, कमजोर, दुःख)
प्रश्न 1.
हमें बड़ों का ………. करना चाहिए ।
उत्तर:
सम्मान
प्रश्न 2.
एक …….. हम मेला देखने गए।
उत्तर:
दिन
प्रश्न 3.
उसने ………. बाँस की सहायता से एक कावड़ बनाई ।
उत्तर:
मजबूत
प्रश्न 4.
पहला ………. निरोगी काया ।
उत्तर:
सुख।
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श्रवण कुमार प्रश्न उत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
श्रवण कुमार के माता-पिता कैसे थे?
(अ) जवान
(ब) बूढ़े और अंधे
(स) बीमार
(द) अमीर
उत्तर:
(ब) बूढ़े और अंधे
प्रश्न 2.
श्रवण कुमार माता-पिता को कहाँ ले जा रहा था ?
(अ) मंदिर
(ब) अस्पताल
(स) मेले
(द) तीर्थ यात्रा
उत्तर:
(द) तीर्थ यात्रा
प्रश्न 3.
श्रवण कुमार ने माता-पिता को कैसे उठाया?
(अ) बैलगाड़ी से
(ब) अपनी पीठ पर
(स) कावड़ में
(द) घोड़े से
उत्तर:
(स) कावड़ में
प्रश्न 4.
राजा दशरथ जंगल में क्यों आए?
(अ) घूमने
(ब) शिकार खेलने
(स) पेड़ काटने
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) शिकार खेलने
प्रश्न 5.
श्रवण कुमार कहानी हमें क्या सिखाती है ?
(अ) माता-पिता की सेवा करना
(ब) माता – पिता की सेवा न करना
(स) झूठ बोलना
(द) चोरी करना
उत्तर:
(अ) माता-पिता की सेवा करना
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रिक्त स्थान भरिये-
- श्रवण कुमार बहुत ही ……… पुत्र था।
- श्रवण कुमार को …….. ने गलती से घायल किया था ।
- श्रवण कुमार अपने माता – पिता को ……… पर ले जा रहा था ।
- माता – पिता की सेवा करना सबसे बड़ी ……….. होती है।
उत्तर:
- आज्ञाकारी
- राजा दशरथ
- तीर्थ यात्रा
- सेवा
सत्य/असत्य बतलाइये-
- श्रवण कुमार के माता-पिता जवान और स्वस्थ थे
- श्रवण कुमार अपने माता-पिता को कावड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा पर ले जा रहा था।
- राजा दशरथ ने जानबूझकर श्रवण कुमार को घायल किया।
- माता-पिता की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है ।
उत्तर:
- असत्य,
- सत्य,
- असत्य,
- सत्य।
उचित मिलान कीजिए-

उत्तर:
(अ) – (क),
(ब) – (घ),
(स) – (ग),
(द) – (ख)।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
श्रवण कुमार के माता-पिता की क्या इच्छा थी ?
उत्तर:
तीर्थयात्रा करने की ।
प्रश्न 2.
श्रवण कुमार को किसने घायल किया ?
उत्तर:
राजा दशरथ ने ।
प्रश्न 3.
माता-पिता की सेवा को क्या कहा गया है ?
उत्तर:
सबसे बड़ी सेवा ।
प्रश्न 4.
श्रवण कुमार कैसा बालक था?
उत्तर:
आज्ञाकारी ।
प्रश्न 5.
श्रवण कुमार ने माता-पिता को किसमें बैठाया था?
उत्तर:
कावड़ में।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
श्रवण कुमार ने राजा दशरथ से अंतिम साँस लेते हुए क्या कहा ?
उत्तर:
श्रवण कुमार ने अंतिम साँस लेते हुए राजा से कहा, “राजन, कृपया मेरे माता-पिता को पानी पिला दीजिए। वे बिना मेरी सहायता के असहाय हैं ।”
प्रश्न 2.
राजा दशरथ ने श्रवण कुमार को कैसे घायल किया?
उत्तर:
राजा दशरथ जंगल में शिकार खेल रहे थे । उन्होंने पानी की आवाज सुनी और समझा कि कोई जंगली जानवर है । उन्होंने तीर चलाया जो जाकर पानी भरते श्रवण कुमार को लग गया।
प्रश्न 3.
श्रवण कुमार की कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर:
श्रवण कुमार की कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि हमें अपने सुखों की परवाह किए बिना अपने माता-पिता की हर आवश्यकता को पूरा करना चाहिए ।
प्रश्न 4.
श्रवण कुमार ने यात्रा के समय किन कठिनाइयों का सामना किया?
उत्तर:
यात्रा के समय श्रवण कुमार को जंगल, पहाड़ और नदियाँ पार करनी पड़ी। वह भूख-प्यास सहते हुए माता-पिता की सेवा करता रहा और बिना थके यात्रा करता रहा।
दीर्घउत्तरीय एवं निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
माता-पिता बच्चे के जीवन में किस प्रकार महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं?
उत्तर:
माता-पिता बच्चे के पहले गुरु होते हैं । वे अपने बच्चे को संस्कारवान बनाते हैं, उसकी सभी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। हजारों कष्ट सहकर भी वे मुस्कुराते रहते हैं । उनकी सेवा और सम्मान हमारा कर्त्तव्य ही नहीं जीवन का एकमात्र ध्येय है । उनके आशीर्वाद से ही हमारा जीवन सम्पूर्ण होता है । उनका आदर करना ही हमारे संस्कारों का हिस्सा है।
प्रश्न 2.
यदि आप श्रवण कुमार की जगह होते तो अपने माता-पिता के लिए क्या करते?
उत्तर:
यदि मैं श्रवण कुमार की जगह होता, तो मैं भी अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन पूर्ण निष्ठा से करता । मैं उनकी सेवा करता और उनकी प्रत्येक इच्छा को सर्वोपरि मानते हुए पूरा करने का प्रयास करता। मैं उनके सुख-दुख में उनके साथ खड़ा रहता और उन्हें कभी अकेला महसूस नहीं होने देता, क्योंकि माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है।
प्रश्न 3.
‘श्रवण कुमार की मातृ-पितृ भक्ति और सेवा भावना से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?’
उत्तर:
श्रवण कुमार अपने माता-पिता के प्रति बहुत श्रद्धावान और समर्पित पुत्र था । उसने अपने वृद्ध और अंधे माता-पिता की सेवा के लिए बहुत कष्ट सहन किए। वह उन्हें तीर्थ यात्रा कराने के लिए कंधों पर उठाकर लेकर गया। उसने बिना किसी स्वार्थ के माता-पिता की सेवा की और उनके सुख- दुख में साथ दिया। उसकी भक्ति से हमें अपने माता-पिता का सम्मान और सेवा करने की प्रेरणा मिलती है।
पठित गद्यांश
निम्नलिखित पठित गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(1)
बहुत समय पहले की बात है। श्रवण कुमार नाम का एक बालक था। वह बहुत ही आज्ञाकारी और अपने माता-पिता का आदर करने वाला था । उसके माता- पिता बहुत बूढ़े थे और देख नहीं सकते थे । श्रवण कुमार अपने माता-पिता की हर आवश्यकता का ध्यान रखता और उनकी हर बात मानता था । उसके माता-पिता की तीर्थयात्रा करने की इच्छा थी लेकिन वे खुद चल नहीं सकते थे ।
श्रवण कुमार ने सोचा, “मैं अपने माता-पिता को कंधे पर बिठाकर तीर्थयात्रा करवाऊँगा ।” उसने एक मजबूत बाँस की सहायता से एक कावड़ बनाई । उस कावड़ में दो टोकरियाँ लटकाई, जिनमें अपने माता-पिता को बैठाया और खुद कंधे पर उठाकर पैदल ही यात्रा पर निकल पड़ा।
प्रश्न
- श्रवण कुमार के माता-पिता किस स्थिति में थे और उनकी क्या इच्छा थी ?
- श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता की तीर्थयात्रा के लिए क्या उपाय किया?
- श्रवण कुमार के चरित्र की कौन – कौनसी विशेषताएँ इस गद्यांश से पता चलती हैं ?
- श्रवण कुमार की कहानी से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर:
- श्रवण कुमार के माता-पिता बहुत बूढ़े और अंधे थे। उनकी इच्छा तीर्थ यात्रा करने की थी ।
- श्रवण कुमार ने एक मजबूत बाँस से कावड़ बनाई, उसमें दो टोकरियाँ बाँधी और माता-पिता को उनमें बैठाकर कंधे पर उठाकर यात्रा पर निकल पड़ा।
- इस गद्यांश से श्रवण कुमार की आज्ञाकारी, सेवाभावी, त्यागी और माता-पिता के प्रति श्रद्धावानं स्वभाव की विशेषताएँ पता चलती हैं ।
- श्रवण कुमार की कहानी से हमें माता-पिता की सेवा और उनका सम्मान करने की प्रेरणा मिलती है।
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(2)
श्रवण कुमार ने अपनी अंतिम साँस लेते हुए राजा से कहा, “राजन, कृपया मेरे माता-पिता को पानी पिला दीजिए। वे बिना मेरी सहायता के असहाय हैं ।”
यह सुनकर राजा दशरथ का दिल भर आया । उन्होंने जल्दी से पानी लेकर उसके माता-पिता को दिया और पूरी बात बताई । श्रवण कुमार के माता-पिता अपने बेटे को खोने से बहुत दुखी हुए। उन्होंने भगवान से प्रार्थना की और दुखी मन से इस संसार को छोड़ दिया ।
प्रश्न
- श्रवण कुमार ने राजा दशरथ से क्या कहा ?
- राजा दशरथ ने श्रवण कुमार की प्रार्थना सुनकर क्या किया?
- श्रवण कुमार के माता-पिता पर राजा दशरथ की बात का क्या प्रभाव पड़ा ?
- श्रवण कुमार के माता-पिता ने दुःख में क्या किया?
उत्तर:
- श्रवण कुमार ने राजा दशरथ से कहा कि वे उसके माता-पिता को पानी पिला दें, क्योंकि वे उसकी सहायता के बिना असहाय हैं ।
- राजा दशरथ ने जल्दी से पानी लेकर श्रवण कुमार के माता-पिता को दिया और उन्हें पूरी घटना बताई ।
- श्रवण कुमार के माता-पिता बेटे की मृत्यु का समाचार पाकर दुःखी हो गये ।
- श्रवण कुमार के माता-पिता ने भगवान से प्रार्थना की और दुःख में इस संसार को छोड़ दिया ।
श्रवण कुमार Summary in Hindi
पाठ का सार—
बहुत समय पहले श्रवण कुमार नाम का एक आज्ञाकारी बालक था। वह अपने माता-पिता का बहुत आदर करता था । उसके माता- पिता बूढ़े और नेत्रहीन थे । वह हमेशा उनकी सेवा करता और उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखता था। एक दिन माता – पिता ने तीर्थयात्रा की इच्छा जताई। श्रवण कुमार ने उनके लिए एक कावड़ बनाई और उन्हें कंधे पर बैठाकर तीर्थयात्रा पर निकल पड़ा।

रास्ते में एक जंगल में माता-पिता को प्यास लगी, तो वह पानी लेने चला गया। उसी समय राजा दशरथ ने गलती से उसे कोई जानवर समझकर घायल कर दिया । मरते समय श्रवण कुमार ने राजा से विनती की, कि उसके माता-पिता को पानी पिला दीजिए क्योंकि वे बिना उसकी सहायता के असहाय हैं । यह कहानी हमें सिखाती है कि माता-पिता की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म होता है और हमें हमेशा उनका सम्मान करना चाहिए ।
कठिन शब्दार्थ-
- आज्ञाकारी = आदेश मानने वाला ।
- आदर = सम्मान, इज्जत ।
- खुद = स्वयं ।
- आवश्यक = जरूरी।
- देखभाल = ध्यान रखना।
- तीर्थ यात्रा = धार्मिक यात्रा।
- टोकरी = बाँस या लकड़ी से बनी टोकरी ।
- सेवा = मदद।
- जंगल = पेड़ों से घिरा क्षेत्र |
- घायल = चोटिल, चोट लगी हुई।
- अंतिम = आखिरी |
- सीख = शिक्षा, संदेश |
- भावना = एहसास |
- निर्दोष = जिसका कोई दोष न हो।
- प्रेरणा = उत्साह देने वाली बात ।
- असहाय = बेबस लाचार |
- प्रयास = कोशिश ।
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