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RBSE कक्षा 4 पर्यावरण पाठ 3 के प्रश्न उत्तर बीज की कहानी
RBSE Class 4th EVS Chapter 3 Question Answer in Hindi
चर्चा कीजिए पृष्ठ 14
प्रश्न 1.
यदि बीज को गड्ढे में दबाया नहीं जाता तो क्या होता?
उत्तर:
यदि बीज को गड्ढे में दबाया नहीं जाता तो यह ऐसा ही बना रहता और यह पौधे के रूप में परिवर्तित नहीं होता।
प्रश्न 2.
क्या भुने हुए चने अंकुरित हो सकते हैं? कारण पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
भुने हुए चने अंकुरित नहीं हो सकते हैं क्योंकि भुनने पर उनके अन्दर की नमी समाप्त हो जाती है।
चर्चा कीजिए पृष्ठं 15
प्रश्न 1.
यदि किसी पौधे की जड़ें काट दी जाएं तो क्या होगा और क्यों?
उत्तर:
यदि किसी पौधे की जड़ें काट दी जाएँ तो वह मुरझाकर सूख जायेगा क्योंकि जड़तंत्र के कारण ही पौधा मिट्टी से पानी, हवा और पोषक तत्त्व सोख पाता है।
प्रश्न 2.
मरुस्थल में खेजड़ी, केर जैसे पेड़ कम पानी पर कैसे जीवित रहते होंगे?
उत्तर:
मरुस्थल में खेजड़ी और केर जैसे पेड़ गहरी जड़ों, छोटे-छोटे पत्तों, गर्मी में अनुकूलन की क्षमता तथा वर्षा के जल को संग्रहित करने के तंत्र के कारण कम पानी पर भी जीवित रहते हैं।
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प्रश्न 3.
क्या सभी पेड़-पौधों की जड़ें एक जैसी होती हैं?
उत्तर:
नहीं, सभी पेड़-पौधों की जड़ें एक जैसी नहीं होती हैं-कुछ की कम गहरी गुच्छेनुमा तो कुछ की अधिक गहरी कम गुच्छे वाली होती हैं।
चर्चा कीजिए पृष्ठ 16
प्रश्न 1.
यदि पौधे को पानी न दें तो क्या होगा?
उत्तर:
पौधे को पानी न देने पर वह मुरझा जाता है।
प्रश्न 2.
गाजर-मूली में तना कहाँ है?
उत्तर:
गाजर-मूली में तना मिट्टी के नीचे है।
प्रश्न 3.
क्या तना हमेशा धरती से बाहर की ओर ही स्थित रहता है?
उत्तर:
नहीं, तना हमेशा धरती से बाहर की ओर ही स्थित नहीं रहता है; जैसे गाजर, मूली इत्यादि के तने धरती में अंदर की ओर स्थित होते हैं।
चर्चा कीजिए पृष्ठ 17
प्रश्न 1.
पौधे ने क्यों कहा कि परागण बिना मेरा जीवन ही असफल हो जाएगा?
उत्तर:
परागण के बिना पौधे का फूल, फल तथा बीज में परिवर्तित नहीं हो पाता है और फल व बीज के अभाव में उसकी जीवन यात्रा समाप्त हो जाएगी।
प्रश्न 2.
यदि कीट और जन्तु फूलों की ओर आकर्षित ना हो, तो इसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
यदि कीट और जन्तु फूलों की ओर आकर्षित ना हो तो उसमें परागण नहीं होगा और परागण के बिना फूल, फल व बीज में परिवर्तित नहीं होगा। इससे हमें खाने को फल व बीज नहीं मिलेंगे।
चर्चा कीजिए पृष्ठ 18
प्रश्न 1.
बीज फल के अन्दर क्यों होते हैं?
उत्तर:
फल के ऊपर का आवरण व अन्दर की नमी बीज की रक्षा करते हैं। इसलिए बीज प्रायः फल के अन्दर होते हैं।
प्रश्न 2.
क्या सभी बीज एक जैसे होते हैं?
उत्तर:
नहीं, सभी बीज एक जैसे नहीं होते हैं, वे विभिन्न आकार-प्रकार के होते हैं।
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प्रश्न 3.
क्या बिना बीजों के सभी पौधों की जीवन यात्रा समाप्त हो जायेगी?
उत्तर:
नहीं, बिना बीजों के सभी पौधों की जीवन यात्रा समाप्त नहीं होगी। कुछ पौधे तने से अपनी जीवन-यात्रा जारी रखते हैं। जैसे-अम्बर बेल, सदाबहार के पौधे, ग्वारपाठा तथा मनी प्लान्ट के पौधे बिना बीजों के अपनी जीवन यात्रा को जारी रखते हैं।
चर्चा कीजिए पृष्ठ 20
प्रश्न 1.
यदि बीजों का प्रसार नहीं हो तो क्या होगा?
उत्तर:
यदि बीजों का प्रसार नहीं होगा तो एक प्रकार का पौधा विभिन्न स्थानों पर नहीं उग पायेगा।
प्रश्न 2.
प्रकृति में बीजों के प्रसार का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
बीजों के प्रसार से विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे भिन्न-भिन्न स्थानों पर तथा पृथ्वी के बड़े भाग पर पैदा हो जाते हैं। इससे एक तरफ वायुमण्डल शुद्ध रहता है, सभी जीवों को ऑक्सीजन प्रचुर मात्रा में मिल पाती है और वे जीवित रहते हैं। इसके अतिरिक्त जीवों को विभिन्न प्रकार के फल व बीज खाद्य पदार्थ के रूप में मिल पाते हैं।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
सही-गलत का निशान लगाइए-
1. बीज को सूरज की रोशनी की आवश्यकता होती है।
उत्तर: गलत
2. फल के अंदर बीज होते हैं।
उत्तर: सही
3. फूलों के परागण प्रक्रिया में तितलियाँ और मधुमक्खियाँ सहायता करती हैं।
उत्तर: सही
4. सभी बीज हवा में उड़ सकते हैं।
उत्तर: गलत
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5. सभी पौधे सूर्य के प्रकाश की सहायता से बढ़ते हैं।
उत्तर: सही
कहानी पूरी कीजिए-
प्रश्न-
“एक दिन, मैंने एक छोटा बीज देखा जो जमीन में गिरा। धीरे-धीरे, वह……।’’ (आप अपनी कल्पना से आगे की कहानी लिखिए।)
उत्तर:
एक दिन, मैंने एक छोटा बीज देखा जो जमीन में गिरा तथा धीरे-धीरे मिट्टी में दब गया। कुछ दिन के बाद उस बीज के अंदर से छोटी-सी सफेद रंग की संरचना ऊपर (अंकुर) निकली जो रोज बढ़ते ही जा रही थी। फिर मैंने उस बीज को देखा तो यह पाया कि एक रोम जैसी संरचना मिट्टी के नीचे भी जड़ के रूप में बढ़ रही थी तथा कुछ ही दिनों में मिट्टी के अंदर जड़ों का जाल बन गया। अब उस पर एक छोटी सी कली निकलकर ऊपर की ओर बढ़ने लगी तथा सूरज की रोशनी में निकल आयी। कली में जल्द ही हरी पत्तियाँ निकल आईं। पौधे के बड़े होने पर उसका तना मोटा तथा गहरे रंग का हो गया। तनों से पौधों की कई शाखाएँ निकलीं। अब पौधे पर फूल आए तथा उन फूलों पर तितली, मधुमक्खी, भंवरे आदि आकर बैठने लगे। ये कीट परागण का कार्य करते हैं। परागण की क्रिया होते ही फूल, फल में परिवर्तित हो गया जिसको खाने के उपयोग में लिया जाता है। फल के अंदर गुठली निकली जिसको मिट्टी में दबाने पर पुनः वही प्रक्रिया शुरू होती है।
स्वयं कीजिए-‘अपना पौधा उगाओ’
प्रश्न 1.
हर बच्या एक बीज बोए और पौधे की वृद्धि पर एक छोटा सा रिपोर्ट कार्ड बनाए, जैसेकितने दिनों में अंकुर निकला, कब कितनी पत्तियाँ आईं इत्यादि।
उत्तर:
विद्यार्थी इस कार्य को स्वयं करें।
प्रश्न 2.
“बीज से पेड़ बनने के क्रम” का चित्र बनाइए और उसमें बीज, जड़, तना, पत्ती, फूल और फल को सही क्रम में दिखाएं।
उत्तर:
बीज से पेड़ बनने के क्रम को अग्रालिखित चित्र के अन्तर्गत दिखाया गया है-

दो से तीन वाक्यों में उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1.
बीज से पौधा बनने के लिए किन-किन तत्त्वों की आवश्यकता होती है?
उत्तर:
बीज से पौधा बनने के लिए मिट्टी, पानी, हवा, पोषक तत्त्व तथा सूरज की रोशनी आदि तत्त्वों की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 2.
फूल से फल बनने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
उत्तर:
फूल से फल बनने की प्रक्रिया को परागण की प्रक्रिया कहते हैं। जब फूलों में परागण हो जाता है तो कुछ दिनों में ही वे पूरी तरह से फल में बदल जाते हैं।
प्रश्न 3.
कौन-कौन से बीज हवा से उड़ सकते हैं?
उत्तर:
आक और शीशम के बीज हवा में उड़ सकते हैं।
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प्रश्न 4.
फल के अन्दर क्या होता है?
उत्तर:
फल के अन्दर नरम खाद्य सामग्री होती है। इसके अतिरिक्त फल के अन्दर बीज होते हैं।
प्रश्न 5.
कौन-कौन से जीव-जन्तु परागण में सहायता करते हैं?
उत्तर:
मधुमक्खियाँ, भँवरे, तितलियाँ जैसे जीव-जन्तु परागण में सहायता करते हैं।
नीचे दिए गए चित्र में रंग भरिए-

उत्तर:
यह कार्य विद्यार्थी स्वयं करें।
गतिविधि-
प्रश्न 1.
आप सभी एक-एक बीज लगाइए और 10 दिनों तक उसका अवलोकन कीजिए और गतिविधि को लिखिए।
उत्तर:
यह कार्य विद्यार्थी स्वयं करें।
प्रश्न 2.
“यदि मैं एक बीज होता तो……” विषय पर 8-10 वाक्यों का एक निबंध लिखिए।
उत्तर:
यदि मैं बीज होता तो मिट्टी के अंदर सोता। मिट्टी के कणों का पानी पीकर फूलता। फूलकर एक दिन मैं फट जाता। मेरे अंदर से अंकुर निकलता जो सूरज की रोशनी को खोजता हुआ मिट्टी के ऊपर पहुँच जाता। रोशनी से अंकुर, कली बनती फिर उस पर पत्तियां आती। इस प्रकार मैं एक पौधा बन जाता जिसकी जड़ें मिट्टी को कसकर पकड़ती। जड़ मेरे लिए उपयोगी है क्योंकि यह मिट्टी से पोषक तत्त्व खींचने का कार्य करती है। बड़ा पौधा बनते ही मेरी कई शाखाएँ निकलतीं, तने मोटे होते। अब मुझ पर फूल आते जिस पर तितलियाँ, पक्षी, भँवरे आदि आकर मँडराते, जो परागण का कार्य करते। परागण के बाद मैं फल बन जाता जिसको बच्चे, पक्षी आदि खाते और उसमें से मेरे जैसे बीज पुनः निकलते।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
मिट्टी में बीज के फूटने पर सर्वप्रथम जो रोम जैसी सफेद संरचना निकलती है, उसे कहते हैं-
(अ) अंकुर
(ब) जड़
(स) शाखा
(द) परागण
उत्तर:
(अ) अंकुर
प्रश्न 2.
एक पौधे की रसोई होती है-
(अ) जड़
(ब) हरी पत्तियाँ
(स) तना
(द) फूल
उत्तर:
(ब) हरी पत्तियाँ
प्रश्न 3.
एक पौधे की पत्तियाँ हरी हो जाती हैं-
(अ) सूरज के प्रकाश से
(ब) जड़ों के पोषण से
(स) हवा-पानी से
(द) उपरोक्त में कोई नहीं
उत्तर:
(अ) सूरज के प्रकाश से
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प्रश्न 4.
निम्न में से फूलों का कौनसा तत्त्व बहुत से कीटों को आकर्षित करता है?
(अ) चटकीला रंग
(ब) मकरंद
(स) विशिष्ट गंध
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. आक के बीज ______ से जगह बदलते हैं।
उत्तर: हवा
2. बरगद के बीज ______ की सहायता से अलग-अलग जगह पहुँच जाते हैं।
उत्तर: पक्षी
3. जब बीज से नन्हीं सी रोम जैसी संरचना निकलने लगे तो समझो कि बीज का ______ हो गया।
उत्तर: अंकुरण
4. जड़ तंत्र के कारण पौधा ______ खड़ा हो पाता है।
उत्तर: सीधा
निम्नलिखित कथनों में से सत्य/असत्य कथन छांटिए-
1. जड़ तंत्र के कारण एक पौधा मिट्टी से पानी, हवा और पोषक तत्त्व खींचता है।
उत्तर: सत्य
2. फूलों को ‘गुठली’ भी कहा जाता है।
उत्तर: असत्य
3. पौधे के बड़े होने के साथ ही तना मोटा होता जाता है।
उत्तर: सत्य
4. फूलों पर बैठकर कीट परागण का महत्त्वपूर्ण कार्य कर देते हैं।
उत्तर: सत्य
5. परागण के कुछ दिनों में ही फूल फल में बदल जाते हैं।
उत्तर: सत्य
निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए-
| 1. मधुमक्खियाँ | (अ) हवा |
| 2. पक्षी, कीट, जीवजन्तु | (ब) फूल |
| 3. गुठली | (स) फल |
| 4. आक का बीज | (द) बीज |
उत्तर:
| 1. मधुमक्खियाँ | (ब) फूल |
| 2. पक्षी, कीट, जीवजन्तु | (स) फल |
| 3. गुठली | (द) बीज |
| 4. आक का बीज | (अ) हवा |
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
हवा के माध्यम से बीजों के प्रसार वाले किसी एक पौधे का नाम लिखिए।
उत्तर:
आक।
प्रश्न 2.
पक्षियों के माध्यम से बीजों के प्रसार वाले किसी एक पेड़ का नाम लिखिए।
उत्तर:
बरगद।
प्रश्न 3.
मिट्टी के अन्दर दबे बीज को मिट्टी के कणों में एक अच्छी बात क्या मिली?
उत्तर:
मिट्टी के कणों के बीच में हवा और पानी का होना।
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प्रश्न 4.
मिट्टी के अन्दर दबा बीज मिट्टी के कणों में निहित पानी को पीकर कैसा हो गया?
उत्तर:
पानी से उसका पेट फूल गया था।
प्रश्न 5.
मिट्टी के अन्दर के बीज के फूले पेट के फूटने पर क्या हुआ?
उत्तर:
बीज के अन्दर से नन्हीं सी रोम जैसी सफेद संरचना निकलने लगी।
प्रश्न 6.
जब मिट्टी में दबे किसी बीज से नन्हीं सी रोम जैसी संरचना निकलने लगे तो क्या समझा जाता है?
उत्तर:
इसे बीज का अंकुरण होना समझा जाता है।
प्रश्न 7.
अमरबेल कैसा पौधा है?
उत्तर:
अमरबेल एक ऐसा पौधा है जिसके जड़ नहीं होती है, वह अन्य पेड़-पौधों से रस चूस कर जीवित रहता है।
प्रश्न 8.
किसी पेड़ या पौधे का भोजन कौन बनाता है?
उत्तर:
पेड़-पौधों का भोजन उसकी पत्तियाँ बनाती हैं।
प्रश्न 9.
गाजर-मूली का तना कहाँ होता है?
उत्तर:
गाजर-मूली का तना पृथ्वी के अन्दर होता है।
प्रश्न 10.
क्या तने का रंग बदलता है?
उत्तर:
हाँ, पेड़-पौधे के बड़े होने पर तने का रंग गहरा होता जाता है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
जड़तंत्र की उपयोगिता लिखिए।
उत्तर:
- जड़तंत्र के कारण ही कोई पेड़ या पौधा सीधा खड़ा हो पाता है।
- इसी जड़तंत्र के कारण पौधा मिट्टी से पानी, हवा और पोषक तत्त्व सोख पाता है।
- जड़तंत्र के बिना पौधे का जीवित रहना कठिन है।
प्रश्न 2.
समय के साथ पौधे की पत्तियों और तने में क्या-क्या परिवर्तन आते हैं?
उत्तर:
समय के साथ पोषक तत्त्व पाकर पौधे में पत्तियाँ निकलती हैं, सूरज के प्रकाश से वे हरे रंग की हो जाती हैं। साथ ही समय के साथ तना भी गहरे रंग में बदलता जाता है।
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प्रश्न 3.
पके फलों को खाने के लिए कौन आकर्षित होते हैं?
उत्तर:
पेड़-पौधों के पके फलों को खाने के लिए कई पक्षी, कीट एवं जीव-जन्तु आकर्षित होते हैं। मनुष्य भी इन फलों से भोजन प्राप्त करते हैं।
दीर्घ उत्तरीय एवं निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
बीज का अंकुरण कैसे होता है? चित्र सहित समझाइए।
उत्तर:
जब बीज को मिट्टी में दबा दिया जाता है तो वह मिट्टी के कणों के बीच जमा हवा-पानी को ग्रहण करता हुआ मोटा होता जाता है और अन्त में वह फूलकर फूट जाता है जिसके अन्दर से नन्हीं सी रोम जैसी सफेद संरचना निकलने लगती है जो सतत बढ़ती जाती है। इसी को बीज का अंकुरण कहते हैं।
इसे निम्न चित्र के अन्तर्गत दर्शाया गया है-

प्रश्न 2.
जड़/मूलतंत्र का विकास कैसे होता है?
उत्तर:
बीज के अंकुरण होने के बाद एक नन्हीं सी सफेद संरचना मिट्टी के कणों के बीच में से रास्ता बनाती हुई नीचे की ओर जाती है। साथ ही इसके बगल में ऐसी ही अनेक संरचनाएँ निकलकर मिट्टी के कणों के बीच से पानी, हवा और पोषक तत्त्व ग्रहण करती हुई तेजी से अंदर बढ़ती हुई जमीन के अन्दर एक जाल के रूप में बदल जाती है। इस प्रकार मूलतंत्र का विकास होता है।
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प्रश्न 3.
प्ररोह तंत्र का विकास कैसे होता है?
उत्तर:
पौधे के ऊपर के भाग में जो तना, शाखाएँ और पत्तियाँ होती हैं, उसे प्ररोह तंत्र कहा जाता है। बीज से एक नन्हीं सी कली निकलकर ऊपर की ओर बढ़ती है। पोषक तत्त्व पाकर वह सूरज की रोशनी में निकल आती है। अब उस कली से पत्तियाँ निकलती हैं जो सूरज की रोशनी पाकर हरी हो जाती हैं। तना मोटा और गहरे रंग का होता जाता है। फिर उस तने पर बहुत सी शाखाएँ और पत्तियाँ निकलती हैं। इस प्रकार बीज या पौधे के प्ररोह तंत्र का विकास होता है।
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