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RBSE Class 4 Hindi Chapter 1 सीखो Question Answer
सीखो Question Answer
अभ्यास कार्य
आओ बात करें –
प्रश्न 1.
कविता को हाव-भाव और सही उच्चारण के साथ पढ़िए ।
उत्तर:
विद्यार्थी शिक्षक की सहायता से करें ।
प्रश्न 2.
इस कविता से हमें क्या-क्या सीख मिलती है? अपने शब्दों में बताइए ।
उत्तर:
प्रकृति हमारे जीवन की सबसे बड़ी शिक्षक है । इसमें फूल, भौंरा, सूरज, पेड़, हवा, पानी, मछली, दीपक हमें कुछ न कुछ सिखाते हैं । हमें फूलों से मुस्कराना, भौंरों से मधुरता, झुकी डालियों से नम्रता, सूरज से जागृति, जलधारा से आगे बढ़ना और दीपक से अंधकार मिटाना सीखना चाहिए ।
प्रश्न 3.
कविता से सीखकर आप अपने जीवन में कौन – कौनसे गुण अपनाना चाहेंगे?
उत्तर:
इस कविता में कुछ मुख्य बातें हैं जिन्हें हम अपने जीवन में अपनाना चाहते हैं-
- हमेशा खुश रहना और दूसरों को भी खुश करना ।
- मधुरता और विनम्रता का व्यवहार करना ।
- सभी से प्रेम और आपसी सहयोग का व्यवहार करना ।
- दुःख में धैर्य रखना और हार न मानना ।
- अपने कर्त्तव्यों का पालन करना और समाज की सेवा करना ।
सोचो और लिखो-
(क) विकल्पात्मक प्रश्न (सही उत्तर चुनें) –
प्रश्न 1.
हमें भौंरों से क्या सीखना चाहिए?
(क) नाचना
(ख) गाना
(ग) उड़ना
(घ) बैठना
उत्तर:
(ख) गाना
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प्रश्न 2.
सूर्य की किरणों से हमें क्या सीखना चाहिए?
(क) सोना
(ख) जगना और जगाना
(ग) चलना
(घ) बोलना
उत्तर:
(ख) जगना और जगाना
(ख) मिलान करो-

उत्तर:
1. (ब)
2. (स)
3. (द)
4. (अ)
(ग) रिक्त स्थान की पूर्ति करें-
प्रश्न 1.
फूलों से हमें ………………. सीखना चाहिए ।
उत्तर:
नित हँसना
प्रश्न 2.
………. से हमें जीवन पथ पर आगे बढ़ना सीखना चाहिए ।
उत्तर:
जलधारा
प्रश्न 3.
वर्षा की बूँदों से हमें ………. बढ़ाना सीखना चाहिए ।
उत्तर:
सबसे प्रेम ।
(घ) निम्नलिखित भाव वाली पंक्तियाँ छाँटकर लिखिए-
प्रश्न 1.
फूलों के खिलते रहने से हमें प्रसन्न रहने की प्रेरणा मिलती है । कविता में इस भाव को दर्शाने वाली पंक्ति को पहचानकर लिखिए ।
उत्तर:
फूलों से नित हँसना सीखो ।
प्रश्न 2.
कविता में मित्रता का भाव दर्शाने वाली पंक्ति को पहचानकर लिखिए ।
उत्तर:
लता और पेड़ों से सीखो, सबको गले लगाना ।
(ङ) अगर आपको प्रकृति से कुछ सीखना हो तो आप किन चीजों से क्या-क्या सीखेंगे ? लिखिए-
प्रश्न 1.

उत्तर:
| किससे सीखेंगे ? | क्या – क्या सीखेंगे? |
| भौंरों से | गाना |
| लता और पेड़ों से | मित्रता |
| जलधारा से | आगे बढ़ना |
| दीपक से | अँधेरा दूर करना |
प्रश्न 2.
“सूरज की किरणों से सीखो, जगना और जगाना ।” कविता की इस पंक्ति को अलग-अलग तरह से इस प्रकार भी लिख सकते हैं-
सीखो सूरज की किरणों से, जगना और जगाना ।
जगना और जगाना सीखो सूरज की किरणों से ।
(च) आप भी निम्नलिखित पंक्ति को उलट-पलट कर लिखिए-
जलधारा से सीखो, आगे जीवन पथ पर बढ़ना ।
उत्तर:
जीवन पथ पर आगे बढ़ना सीखो जलधारा से।
प्रश्न 3.
कविता को कहानी के रूप में बदलकर लिखिए ।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें ।
प्रश्न 4.
कक्षा में समूह बनाकर कविता को नाटक के रूप में प्रस्तुत करो ।
उत्तर:
विद्यार्थी शिक्षक की सहायता से करें ।
प्रश्न 5.
एक सप्ताह तक अपने व्यवहार में कविता की किसी एक सीख को अपनाओ और अनुभव साझा करो ।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें ।
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प्रश्न 6.
कविता में बताई गई सीखों का उपयोग अपने जीवन की किसी समस्या को हल करने में कैसे करेंगे?
उत्तर:
हम कविता में दी गई सीखों को अपनाकर जीवन की समस्याओं का समाधान धैर्य, शान्ति और आपसी सहयोग से कर सकते हैं।
प्रश्न 7.
आप अपने परिवेश और देश को सुंदर और स्वच्छ बनाने के लिए क्या-क्या करेंगे?
उत्तर:
मैं अपने परिवेश में सफाई रखूँगा, पेड़ लगाऊँगा, कचरा निर्धारित स्थान पर ही डालूँगा और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करूँगा । पर्यावरण के प्रति जागरूक रहकर अपने देश को सुन्दर व स्वच्छ बनाऊँगा।
कविता से आगे-
प्रश्न 1.
कविता में पेड़ों से दुःख में धीरज रखना सीखने की बात की गई है। पेड़ों से हम और क्या- क्या सीख ले सकते हैं?
उत्तर:
पेड़ों से हम निःस्वार्थ सेवा करना, सबको छाया, फल देना, विनम्रता और परोपकार का भाव सीख सकते हैं । वे बिना किसी भेदभाव के सभी को लाभ पहुँचाते हैं, इसलिए हमें भी समाज के लिए उपयोगी बनने की प्रेरणा मिलती है ।
प्रश्न 2.
आप अपने मित्रों से भी बहुत कुछ सीखते होंगे। कोई दो बातें लिखिए।
उत्तर:
हम अपने मित्रों से आपस में बहुत कुछ सीखते हैं जैसे –
- बड़ों का हमेशा आदर करना
- ईमानदारी से कार्य करना आदि ।
भाषा की बात –
प्रश्न 1.
नीचे दिए वाक्यों में कुछ शब्द रेखांकित किए गए हैं। दिए गए रिक्त स्थानों में उन शब्दों के विपरीत अर्थ वाले शब्द लिखकर वाक्यों को पूरा करो-
(क) सूरज सुबह उगता एवं ………. को ढलता है ।
(ख) मीना बहुत मेहनती एवं राहुल …….. है ।
(ग) हमें अपने इरादे कच्चे नहीं बल्कि ………. रखने चाहिए ।
(घ) अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रसन्न रहना चाहिए न कि ………. ।
उत्तर:
(क) शाम
(ख) आलसी
(ग) पक्के
(घ) दुःखी ।
प्रश्न 2.
कविता में पाँच क्रिया शब्द छाँटकर उनसे वाक्य बनाओ।
उत्तर:
- मिलना- हमें एक-दूसरे से प्रेम से मिलना चाहिए ।
- जगना – मुझे सुबह जल्दी जगना है।
- लगाना – हमें पेड़-पौधे लगाना है ।
- मरना – हमें स्वदेश प्रेम में मरना चाहिए ।
- हरना – सभी को एक-दूसरे के दुःख-दर्द हरना चाहिए ।
प्रश्न 3.
शब्दों के वर्णों को आपस में बदल कर उनके अर्थ का पता लगाइए ।

यह भी करें-
आपने देश भक्ति की अन्य कोई कविता पढ़ी या सुनी होगी। उसे यहाँ लिखिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
सीखो प्रश्न उत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
फूलों से हमें क्या सीखने को कहा गया है ?
(क) तेज़ दौड़ना
(ख) गुस्सा करना
(ग) नित हँसना
(घ) काँटे चुभाना
उत्तर:
(ग) नित हँसना
प्रश्न 2.
दीपक से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
(क) सजावट करना
(ख) अंधकार से डरना
(ग) अंधकार हटाना
(घ) जलते रहना
उत्तर:
(ग) अंधकार हटाना
प्रश्न 3.
पतझड़ के पेड़ों से हमें सीखना चाहिए?
(क) पत्ते गिराना
(ख) दुःख में धैर्य रखना
(ग) ठण्ड सहना
(घ) चुप रहना
उत्तर:
(ख) दुःख में धैर्य रखना
प्रश्न 4.
जलधारा से हमें क्या प्रेरणा मिलती है ?
(क) ठहर जाने की
(ख) पीछे लौटने की
(ग) आगे बढ़ने की
(घ) घूमने की
उत्तर:
(ग) आगे बढ़ने की
प्रश्न 5.
सूरज की किरणों से क्या सीखने को कहा गया है ?
(क) सो जाना
(ख) जलाना
(ग) जागना और जगाना
(घ) छिप जाना
उत्तर:
(ग) जागना और जगाना
प्रश्न 6.
धुएँ से कवि ने सिखाया है-
(क) सब कुछ ढक देना
(ख) ऊपर उठना
(ग) आँखों में जलन देना
(घ) गंध फैलाना
उत्तर:
(ख) ऊपर उठना
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
(अंधेरा, शीश झुकाना, जीवन पथ, सबको गले लगाना)
प्रश्न 1.
तरु की झुकी डालियों से नित, सीखो ……….।
उत्तर:
शीश झुकाना
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प्रश्न 2.
दीपक से सीखो जितना हो सके ………. हरना ।
उत्तर:
अंधकार
प्रश्न 3.
लता और पेड़ों से सीखो ………..।
उत्तर:
सबको गले लगाना
प्रश्न 4.
जलधारा से सीखो, आगे ………. पर बढ़ना ।
उत्तर:
जीवन पथ ।
सत्य / असत्य-
- फूलों से हमें रौद्र रूप सीखने को कहा गया है।
- लता और पेड़ हमें प्रेम और अपनापन सिखाते हैं ।
- धुएँ से हमें नीचे गिरना सीखने को मिलता है।
- दीपक अंधकार को हराने की प्रेरणा देता है।
उत्तर:
- असत्य
- सत्य
- असत्य
- सत्य ।
अर्थ मिलान कीजिए-

उत्तर:
1. (ख)
2. (क)
3. (घ)
4. (ग)
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
मुस्कराना हम किससे सीखते हैं?
उत्तर:
फूलों से हम मुस्कराना सीखते हैं ।
प्रश्न 2.
अंधकार को हराने की प्रेरणा किससे मिलती है?
उत्तर:
अंधकार को हराने की प्रेरणा दीपक से मिलती है ।
प्रश्न 3.
हमें निरन्तर आगे बढ़ने की प्रेरणा किससे मिलती है?
उत्तर:
हमें निरन्तर आगे बढ़ने की प्रेरणा जलधारा से मिलती है ।
प्रश्न 4.
दूध और पानी से हमें क्या सीखना चाहिए?
उत्तर:
दूध और पानी की तरह हमें मिल-जुलकर रहना चाहिए ।
लघुत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
‘पतझड़ के पेड़ों’ से कवि ने क्या सिखाने की बात कही है?
उत्तर:
कवि कहते हैं कि जैसे पतझड़ में पेड़ पत्ते खोकर भी शान्ति से खड़े रहते हैं, वैसे ही हमें दुःख में धैर्य धारण करना चाहिए ।
प्रश्न 2.
पेड़ों और लताओं से कवि हमें क्या सिखाते हैं?
उत्तर:
कवि कहते हैं कि पेड़ और लताएँ बिना भेदभाव के सबको गले लगाती हैं। इससे हमें सीखना चाहिए कि हमें सभी से प्रेमपूर्वक व्यवहार करना चाहिए ।
प्रश्न 3.
हवा की लहरों और झकोरों से हमें क्या सीखना चाहिए?
उत्तर:
हवा की लहरों और झकोरों से हमें ऊर्जा और कोमलता लाने की प्रेरणा मिलती है। यानी जीवन में सक्रियता आवश्यक है ।
प्रश्न 4.
‘दीपक’ और ‘धुआँ’ से मिलने वाली शिक्षाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
दीपक अंधेरे में प्रकाश देता है- यह सिखाता है कि हमें दूसरों के जीवन से अज्ञान या दुःख का अंधकार दूर करना चाहिए। धुआँ भले ही जलने का प्रतीक है लेकिन यह हमें संघर्ष के बाद ऊँचाइयों तक पहुँचने की प्रेरणा देता है ।
दीर्घउत्तरीय एवं निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
इस कविता के माध्यम से कवि हमें कौन- कौनसी जीवन शिक्षाएँ देते हैं?
उत्तर:
इस कविता से कवि हमें यह सिखाते हैं कि हमें एक अच्छा, जिम्मेदार और संवेदनशील इंसान बनना चाहिए। प्रकृति स्वयं एक महान गुरु है । अगर हम चाहें, तो हर वस्तु, हर घटना और हर जीव से कुछ अच्छा सीख सकते हैं। यह कविता जीवन मूल्यों जैसे प्रसन्नता, प्रेम, सेवा, विनम्रता, संघर्ष, धैर्य और प्रगति की सुन्दर शिक्षा देती है ।
प्रश्न 2.
कविता में दी गई शिक्षाओं को हम अपने दैनिक जीवन में कैसे लागू कर सकते हैं? उदाहरण सहित उत्तर दीजिए ।
उत्तर:
हम फूलों से मुस्कराना सीखकर हमेशा खुश रह सकते हैं। भौंरों से मधुर बोल सीखकर रिश्ते सुधार सकते हैं। दीपक से प्रेरणा लेकर दूसरों की मदद कर सकते हैं और जलधारा से प्रेरणा लेकर कठिनाइयों के बावजूद आगे बढ़ते रह सकते हैं । इन शिक्षाओं को अपनाकर हम एक बेहतर, संवेदनशील और प्रेरणादायक जीवन जी सकते हैं ।
सीखो Summary in Hindi

इस कविता में कवि हमें प्रकृति से प्रेरणा लेकर श्रेष्ठ जीवन मूल्यों को अपनाने की सीख देता है । कवि ने फूलों से हँसना, भौंरों से, गाना, पेड़ों से धैर्य, सूरज से जगना- जगाना, जलधारा से आगे बढ़ना, दीपक से अंधकार मिटाना और धुएँ से ऊँचाइयों तक पहुँचना सीखने को कहा है। हर पंक्ति में जीवन के लिए कोई महत्त्वपूर्ण प्रेरणा सिखायी गई है।
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कठिन शब्दार्थ एवं सरलार्थ-
फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना ।
तरु की झुकी डालियों से नित, सीखो शीश झुकाना ॥
सीख हवा के झोंको से लो, कोमल भाव बहाना ।
दूध और पानी से सीखो, मिलना और मिलाना ॥
कठिन शब्दार्थ-
- सीखो = शिक्षा ग्रहण करो, शिक्षा लो।
- फूलों से = पुष्पों से ।
- नित = हमेशा, रोज।
- हँसना = मुस्कराना, प्रसन्न रहना।
- भौंरों से = मधुर भिनभिनाने वाले कीट ।
- तरु = वृक्ष ।
- शीश = सिर ।
- झुकाना = नम्र होना ।
सरलार्थ –
प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने बताया है कि फूलों से हमें हमेशा मुस्कराना सीखना चाहिए क्योंकि फूल बिना किसी स्वार्थ के सबको सुगन्ध और सुन्दरता देते हैं। से मधुर गीत गाना सीखना चाहिए, जिससे जीवन में मधुरता बनी रहे । वृक्षों की झुकी डालियों से हमें हमेशा विनम्रता का पाठ सीखना चाहिए जैसे फल लगने पर लियाँ झुक जाती हैं, वैसे ही गुणी व्यक्ति को भी नम्र होना चाहिए ।
हवा की लहरों से कोमल अर्थात् मधुर व्यवहार की प्रेरणा मिलती है। यानी जीवन में सक्रियता आवश्यक है । दूध और पानी की तरह हमें मिल-जुलकर रहना चाहिए। जैसे ये दोनों घुलकर एक हो जाते हैं ।
सूरज की किरणों से सीखो, जगना और जगाना ।
लता और पेड़ों से सीखो, सबको गले लगाना ॥
वर्षा की बूँदों से सीखो, सबसे प्रेम बढ़ाना ।
मेहँदी से सीखो सब ही पर, अपना रंग चढ़ाना ॥
कठिन शब्दार्थ-
- सूरज = सूर्य ।
- लता = बेल ।
- प्रेम = प्यार ।
- वर्षा = बरसात ।
- गले लगाना = अपनाना ।
- सीखो – शिक्षा लो ।
सरलार्थ –
प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने बताया है कि सूरज की किरणें हमें प्रेरणा देती हैं कि स्वयं जागो और दूसरों को भी जगाओ (ज्ञान फैलाओ)। लताएँ और पेड़ सिखाते हैं कि सबको गले लगाओ अर्थात् सबको अपनाओ । वर्षा की बूँदें हमें सबसे प्रेम भावना बढ़ाना सिखाती हैं मेहन्दी हमें सिखाती हैं कि सभी के साथ रहते हुए सभी को अपने गुणों से प्रभावित करें।
मछली से सीखो स्वदेश के लिए तड़पकर मरना ।
पतझड़ के पेड़ों से सीखो, दुख में धीरज धरना ॥
पृथ्वी से सीखो प्राणी की सच्ची सेवा करना ।
दीपक से सीखो, जितना हो सके अँधेरा हरना ॥
कठिन शब्दार्थ-
- स्वदेश = अपना देश ।
- तड़पकर = व्याकुल होकर ।
- पतझड़ = वह ऋतु जब पेड़ों से पत्ते झड़ते हैं।
- धीरज = धैर्य |
- धरना = धारण करना ।
- प्राणी = जीव ।
- सच्ची = सत्य से युक्त ।
- हरना = दूर करना ।
सरलार्थ –
प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने बताया है कि मछलियाँ अपने देश (जल) के लिए तड़पकर मरती हैं, इससे देशभक्ति का पाठ सीखने को मिलता है । पतझड़ के मौसम में पेड़ हमें सिखाते हैं कि दुःख में भी धैर्य बनाए रखना चाहिए। पृथ्वी सभी प्राणियों का निःस्वार्थ भावना से पालन-पोषण करती है— हमें भी निःस्वार्थ सेवा करनी चाहिए। दीपक अंधेरे को मिटाता है – हमें भी दूसरों के जीवन से अज्ञान और अंधकार दूर करना चाहिए ।
जलधारा से सीखो, आगे जीवन पथ पर बढ़ना ।
और धुएँ से सीखो, हरदम ऊँचे ही पर चढ़ना ॥
कठिन शब्दार्थ-
- जीवन पथ = जीवन का रास्ता ।
- धुआँ = आग या जलने से उठने वाला धुआँ ।
- हरदम = हमेशा ।
सरलार्थ –
प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने बताया है कि जलधारा हमें जीवन में निरन्तर आगे बढ़ते रहने का सन्देश देती है। धुआँ हमें सिखाता है कि कठिनाइयों के बाद भी हमें हमेशा ऊपर उठते रहना चाहिए ।
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