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RBSE Class 4 Hindi Chapter 5 मेरा गाँव Question Answer
मेरा गाँव Question Answer
अभ्यास कार्य
आओ बात करें –
प्रश्न 1.
वर्तमान में आपके परिवेश में कौन- कौनसी फसलें हो रही हैं?
उत्तर:
वर्तमान में हमारे परिवेश में गेहूँ, जौ, चना, सरसों, मसूर, मटर, आलू और अलसी आदि की फसलें हो रही हैं ।
प्रश्न 2.
आपके परिवेश में कौन-कौनसे वृक्ष, पशु एवं पक्षी दिखाई देते हैं?
उत्तर:
हमारे परिवेश में पीपल, बरगद, नीम, कीकर, आम, अमरुद, अनार, बैर आदि के पेड़ हैं। गाय, भैंस, बैल, भेड़, बकरी, ऊँट, घोड़ा, गधा आदि पशु हैं । चिड़िया, तोता, कबूतर, कमेड़ी, मोर, कोयल, कव्वा, बगुला आदि पक्षी हैं ।
प्रश्न 3.
गाँव के जीवन और शहर के जीवन के बारे में चर्चा करें ।
उत्तर:
गाँव के व्यक्तियों का जीवन सरल, शान्त एवं प्राकृतिक वातावरण से युक्त होता है । वे सादा जीवन उच्च विचार के सिद्धान्त पर चलते हैं। शहर के व्यक्तियों का जीवन व्यस्ततम, तेज एवं अत्यधिक आधुनिक सुविधाओं से भरपूर होता है एवं भीड़ भरा वातावरण होता है । गाँवों का जीवन खेती एवं पशुपालन पर आधारित होता है जबकि शहरों का जीवन व्यापार एवं उद्योग-धन्धों पर आधारित होता है ।
प्रश्न 4.
कविता में बताए गए विभिन्न खेलों के बारे में चर्चा करें ।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं शारीरिक शिक्षक से चर्चा करें ।
सोचो और लिखो-
(क) बहुविकल्पात्मक प्रश्न –
प्रश्न 1.
कविता के अनुसार सरसों के संग कौन मुस्काता है?
(अ) गेहूँ
(ब) बाजरा
(स) चना
(द) अलसी
उत्तर:
(अ) गेहूँ
प्रश्न 2.
कविता में पतंग को किसके समान कहा गया है ?
(अ) तारे
(ब) सूरज
(स) पर्वत
(द) तितली
उत्तर:
(द) तितली
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(ख) रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए-
प्रश्न 1.
साँझ-सकारे ………, दौड़े जाते रुनझुन-रुनझुन ।
उत्तर:
गायों के दल
प्रश्न 2.
चना गुलाबी पगड़ी पहने, ……… भरे उमंग।
उत्तर:
बना है दूल्हा
प्रश्न 3.
शहद सी मीठी, नटखट, चंचल
उत्तर:
मेरे गाँव की प्यारी भोर ।
(ग) मिलान कीजिए-


उत्तर:
1. (ग)
2. (क)
3. (घ)
4. (ख)
प्रश्न 2.
ध्वनियाँ और उनके


उत्तर:
1. (ख)
2. (ग)
3. (घ)
4. (क)

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
कविता में बताए गए जीवों के नाम लिखिए ।
उत्तर:
गाय, तोता, कोयल, चिड़िया, तितली आदि ।
प्रश्न 2.
कविता में किस ऋतु की फसलों की चर्चा की गई है ?
उत्तर:
वसन्त ऋतु ।
कविता से आगे-
प्रश्न 1.
सोचिए और बताइए –
प्रश्न (i)
पंछियों की तुलना इन्द्रधनुष से क्यों की गई है?
उत्तर:
पंछियों की तुलना इन्द्रधनुष से इसलिए की गई है क्योंकि जैसे इन्द्रधनुष रंग-बिरंगा और सुन्दर होता है, वैसे ही पंछी भी अनेक रंगों के होते हैं और आकाश में उड़ते हुए बहुत सुन्दर लगते हैं । उनके पंख और उड़ान इन्द्रधनुष जैसी शोभा बिखेरते हैं।
प्रश्न (ii)
चने को गुलाबी पगड़ी पहने क्यों बताया गया है?
उत्तर:
चने को ‘गुलाबी पगड़ी पहने ‘ इसलिए बताया गया है क्योंकि चने के फूल गुलाबी रंग के होते हैं । ये फूल ऐसे लगते हैं जैसे खेतों में चना गुलाबी रंग की पगड़ी पहनकर खड़ा हो। यह एक सुन्दर उपमा है जो खेत की शोभा को दर्शाता है ।
प्रश्न 2.
अनुमान / कल्पना आधारित-
प्रश्न (i)
बादलों में आपने कौन-कौनसी आकृतियाँ देखी हैं?
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें ।
प्रश्न (ii)
यदि आप चिड़िया होते तो कहाँ जाना पसंद करते एवं किस तरह की ध्वनि निकालते?
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें ।
प्रश्न (iii)
आपके गाँव या शहर की सुबह कैसी होती है? लिखिए |
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें ।
प्रश्न 3.
निम्नलिखित पंक्तियों पर आधारित चित्र बनाइए-
प्रश्न (i)
इन्द्रधनुष से पंख पसारे, पंछी गाते गुनगुन- गुनगुन ।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें ।
प्रश्न (ii)
चना गुलाबी पगड़ी पहने, बना है दूल्हा भरे उमंग ।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें ।
भाषा की बात-
(क) निम्नलिखित पंक्तियों में से संज्ञा, विशेषण और क्रिया छाँटिए-
1. साँझ- सकारे गायों के दल, दौड़े जाते रुनझुन – रुनझुन ।
2. चना गुलाबी पगड़ी पहने, बना है दूल्हा भरे उमंग ।
3. घर्र-घर्र घर्राते ट्रैक्टर, दौड़ रहे खेतों की ओर ।
4. उड़ी पतंगें तितली जैसी, खींच रहीं चरखी से डोर |
संज्ञा – ……………………………………………..
विशेषण – ……………………………………………..
क्रिया – ……………………………………………..
उत्तर:
संज्ञा – गाय, चना, पगड़ी, दल, दूल्हा, उमंग, ट्रैक्टर, खेतों ।
विशेषण – सांझ – सकारे, गुलाबी, भरे, घर्र-घर्र, तितली, घर्राते ।
क्रिया – दौड़े जाते, पहने, बना है, दौड़ रहे, उड़ी, खोज रहीं ।
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(ख) निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त ध्वनि से मिलते-जुलते शब्द बनाइए ।
1. छाँव – ……………………………………………..
2. छप – ……………………………………………..
3. चटक – ……………………………………………..
उत्तर:
1. छाँव – गाँव, ठाँव, पाँव
2. छप – टप, धप, थप
3. चटक – मटक, गटक, फटक, झनक
(ग) नीचे दिए गए शब्दों के विपरीत अर्थ बताने वाले शब्द लिखिए-
1. हँसना – …………………
2. साँझ – ……………….
3. मीठी – ……………….
उत्तर:
1. हँसना – रोना
2. साँझ – सुबह
3. मीठी – कड़वी ।
मेरा गाँव प्रश्न उत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
इन्द्रधनुष से क्या लगते हैं?
(क) फूल
(ख) तारे
(ग) पंख पसारे पंछी
(घ) बूँदें
उत्तर:
(ग) पंख पसारे पंछी
प्रश्न 2.
खेतों में क्या महकता है ?
(क) मिर्च
(ख) सरसों
(ग) आलू
(घ) गन्ना
उत्तर:
(ख) सरसों
प्रश्न 3.
‘चना गुलाबी पगड़ी पहने’- इस पंक्ति में चना को क्या दर्शाया गया है ?
(क) किसान
(ख) राजा
(ग) दूल्हा
(घ) योद्धा
उत्तर:
(ग) दूल्हा
प्रश्न 4.
गाँव में कौनसे खेल खेले जा रहे हैं?
(क) क्रिकेट, हॉकी
(ख) खो-खो, कुश्ती, कबड्डी
(ग) फुटबॉल
(घ) टेनिस
उत्तर:
(ख) खो-खो, कुश्ती, कबड्डी
प्रश्न 5.
“शहद सी मीठी, नटखट, चंचल” किसे कहा गया है?
(क) गाँव की लड़कियाँ
(ख) गाँव की गलियाँ
(ग) गाँव की छुट्टी
(घ) गाँव की प्यारी भोर
उत्तर:
(घ) गाँव की प्यारी भोर
प्रश्न 6.
बच्चे चरखी से क्या खींच रहे हैं ?
(क) तितली
(ख) पतंग
(ग) डोर
(घ) डंडा
उत्तर:
(ग) डोर
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
(बादल, पंख, गेहूँ, डोर)
प्रश्न 1.
इन्द्रधनुष से ………….. पसारे, पंछी गाते गुनगुन-गुनगुन ।
उत्तर:
पंख
प्रश्न 2.
खेतों में इठलाता ……… मुस्काता है, सरसों के संग।
उत्तर:
गेहूँ
प्रश्न 3.
अम्बर के आँगन में ……… बजा रहे ढप, ढोल, मृदंग ।
उत्तर:
बादल
प्रश्न 4.
उड़ी पतंग तितली जैसी, खोज रही चरखी से ……..।
उत्तर:
डोर ।
सत्य / असत्य-
- खेतों में गेहूँ और सरसों की फसलें लहलहा रही हैं ।
- गाँव के बच्चे केवल घरों में खेलते हैं ।
- गाँव में कोई पतंग नहीं उड़ाता ।
- गाँव की सुबह बहुत प्यारी और चंचल होती है।
उत्तर:
- सत्य
- असत्य
- असत्य
- सत्य।
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उचित मिलान कीजिए-

उत्तर:
1. (ख)
2. (क)
3. (घ)
4. (ग)

अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
गाँव में किसकी मीठी नटखट, मुस्कुराहट दिखाई देती है?
उत्तर:
बच्चों की ।
प्रश्न 2.
गाँव की हवा कैसी लगती है?
उत्तर:
गाँव की हवा शहद जैसी मीठी लगती है।
प्रश्न 3.
गेहूँ की फसल कैसी दिखाई देती है?
उत्तर:
गेहूँ की फसल इठलाती दिखाई देती है।
प्रश्न 4.
बच्चे किससे पतंग उड़ाते हैं ?
उत्तर:
बच्चे चरखी-डोर से पतंग उड़ाते हैं ।
प्रश्न 5.
रुनझुन रुनझुन करते हुए संध्या को कौन दौड़े आते हैं ?
उत्तर:
रुनझुन – रुनझुन करते हुए संध्या को गायों के समूह दौड़े आते हैं।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
खेतों में फसलें किस प्रकार दिखाई देती हैं?
उत्तर:
खेतों में गेहूँ की बालियाँ इठलाती हैं और सरसों मुस्कुराती हुई लगती है । चना गुलाबी पगड़ी पहनकर दूल्हे जैसा दिखाई देता है ।
प्रश्न 2.
गाँव की भोर को लेखक ने कैसे वर्णित किया है?
उत्तर:
लेखक ने गाँव की भोर को शहद सी मीठी, नटखट और चंचल बताया है। बच्चों के खेलकूद एवं लोगों के कार्यों से यह सुबह बहुत आनन्ददायक और जीवन्त होती है।
प्रश्न 3.
लेखक ने गाँव की सुन्दरता को किन- किन चीजों से दर्शाया है?
उत्तर:
लेखक ने गाँव की सुन्दरता को खेतों की फसलों, उड़ते पक्षियों, खेलते बच्चों और रंग-बिरंगी पतंगों से दर्शाता है। ये सभी मिलकर गाँव को जीवन्त और मनोहारी बनाते हैं ।
प्रश्न 4.
गाँव के बच्चे किस तरह के खेल खेलते हैं?
उत्तर:
गाँव के बच्चे पारम्परिक देसी खेलों में मस्त रहते हैं जैसे खो-खो, कबड्डी, गिल्ली-डण्डा, पतंग उड़ाना आदि । ये खेल शरीर को स्वस्थ रखते हैं और आपसी मेल-जोल बढ़ाते हैं ।
प्रश्न 5.
गाँव की फसलें किस प्रकार वातावरण को सुन्दर बनाती हैं?
उत्तर:
गाँव की फसलें जैसे गेहूँ, सरसों और चना खेतों में लहराते हुए सुन्दर दृश्य प्रस्तुत करती हैं। गाँव के खेतों की हरियाली और रंग-बिरंगे फूल आँखों को सुखद एवं मनमोहक बनाते हैं ।
दीर्घउत्तरीय एवं निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
लेखक ने गाँव के प्राकृतिक सौन्दर्य का चित्रण कैसे किया है?
उत्तर:
लेखक के अनुसार गाँव के खेतों में लहराती फसलें, इन्द्रधनुष से उड़ते रंगीन पक्षी और उड़ती पतंगें वातावरण को मनमोहक बनाती हैं। गाँव की गलियों में बच्चों की खेलकूद दिखाई देती है। सुबह की मीठी हवा और पक्षियों की बोली गाँव को रमणीय बनाती है । पूरा दृश्य आनन्द और शान्ति से भरपूर है ।
प्रश्न 2.
गाँव में त्योहार और खेल – कूद का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
गाँव में त्योहार और खेल – कूद जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। सावन एवं फागुन में ढोल, मृदंग और ढप की धुन से त्योहारी वातावरण गूँज उठता है । बच्चे और युवा पारम्परिक खेलों में भाग लेते हैं। ये गतिविधियाँ सामाजिक मेलजोल और आनन्द का अवसर देती हैं । इनसे गाँव में ऊर्जा और उल्लास बना रहता है ।
मेरा गाँव Summary in Hindi
इस कविता में कवि ने गाँव का चित्रण किया है। गाँव का प्राकृतिक सौन्दर्य बहुत मनमोहक होता है जहाँ पक्षियों की चहचहाहट और बच्चों की हँसी गूँजती है। खेतों में लहराती फसलें, रंग-बिरंगे फूल और बदलते मौसम का दृश्य मन को भाता है। गाँव के लोग मेहनती होते हैं जो सुबह-सुबह खेतों की ओर निकल पड़ते हैं। बच्चे खेल-कूद में मस्त रहते हैं और गाँव की सुबह शहद – सी मीठी लगती है।
कठिन शब्दार्थ एवं सरलार्थ-
इन्द्रधनुष से पंख पसारे,
पंछी गाते गुनगुन-गुनगुन ।
साँझ-सकारे गायों के दल,
दौड़े जाते रुनझुन रुनझुन ।
टें-टें तोता, कुहु-कोयलिया,
चीं-चीं चिड़िया चुनमुन – चुनमुन ।
हो-हो, हा-हा, हू-हू, ही – ही,
टनटन – टनटन छुट्टी की धुन ।

कठिन शब्दार्थ-
- इन्द्रधनुष = सात रंगों वाला धनुष, जो बारिश के बाद दिखता है।
- पंख पसारे = पंख फैलाकर ।
- गुनगुन = मधुर स्वर में गाना ।
- साँझ – सकारे = शाम और सुबह ।
- रुनझुन = छन-छन या खन-खन जैसी आवाज ।
- कोयलिया = कोयल ।
- धुन = आवाज ।
सरलार्थ-
कवि बताता है कि गाँव का दृश्य बहुत सुन्दर है । जब बारिश के बाद इन्द्रधनुष निकलता है तो ऐसा लगता है जैसे इन्द्रधनुष पक्षियों के समान पंख फैला रहा हो। पक्षी मधुर गीत गुनगुनाते हैं । सुबह और शाम गाँव की गलियों में गायों के समूह दौड़ते हैं तो उनके पैरों की आवाज ‘रुनझुन’ की तरह गूँजती है। तोता, मैना, चिड़िया, कोयल, सभी अपनी-अपनी मधुर आवाजों में संगीत गाते हैं। घंटी की टनटन बच्चों के छुट्टी होने की आवाज से बच्चे प्रसन्न होकर हो-हल्ला करते हैं ।
खेतों में इठलाता गेहूँ, मुस्काता है सरसों के संग।
चना गुलाबी पगड़ी पहने, बना है दूल्हा भरे उमंग ।
अंबर के आँगन में बादल, बजा रहे ढप, ढोल, मृदंग ।
सौंधी महक, झूमता सावन और मचलते फागुन के रंग ।
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कठिन शब्दार्थ-
- इठलाता = मस्ती से लहराता ।
- पगड़ी = सिर पर बाँधा जाने वाला कपड़ा ।
- उमंग = खुशी, उत्साह ।
- ढप, ढोल, मृदंग = पारम्परिक वाद्य यन्त्र।
- महक = खुशबू ।
- फागुन = वसन्त ऋतु का महीना (होली वाला समय) ।
सरलार्थ-
कवि ने कहा है कि गाँव के खेतों में गेहूँ की बालियाँ हवा में लहराकर मस्ती करती हैं, और सरसों पीले फूलों के साथ मुस्कुरा रही है। चना ऐसा लगता है मानो गुलाबी पगड़ी पहनकर कोई खुशी से दूल्हा बना हो । आसमान के आँगन में जैसे बादल ढोल बजा रहे हों और खेतों में सावन की शुद्ध खुशबू झूम रही है और फागुन के रंग-बिरंगे रंग मचल रहे हैं ।
घर – घर घरते ट्रैक्टर,
दौड़ रहे खेतों की ओर ।
उड़ी पतंगें तितली जैसी,
खींच रहीं चरखी से डोर ।
गुल्ली-डंडा, कुश्ती, कबड्डी और
कहीं खो – खो का शोर ।
शहर सी मीठी, नटखट, चंचल,
मेरे गाँव की प्यारी भोर ।
कठिन शब्दार्थ-
- घर्राते = गूँजते या आवाज करते हुए।
- चर्खी = पतंग उड़ाने वाला उपकरण ।
- खो-खो = एक प्रकार का देसी खेल ।
- नटखट = शरारती ।
- चंचल = चुलबुला, हँसमुख ।
- भोर = सुबह ।
सरलार्थ –
कवि ने इस पद में गाँव की सुबह के सुन्दर दृश्य प्रस्तुत किये हैं। घरों से ट्रैक्टर खेतों की ओर गूँजते हुए जा रहे हैं। बच्चे तितली जैसी रंग- बिरंगी पतंगें उड़ाते हैं और चर्खी की डोर से पतंग संभालते हैं। वे गुल्ली-डण्डा, कुश्ती, कबड्डी और खो-खो जैसे देसी खेल खेलते हुए शोर मचाकर प्रसन्न होते हैं। गाँव की सुबह बहुत प्यारी, नटखट, चंचल होती है और शहद सी मीठी होती है।
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