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Class 7 Science Chapter 7 Extra Questions and Answers in Hindi प्रकृति में ऊष्मा का स्थानांतरण
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:
प्रश्न 1.
ऊष्मा के कितने प्रकार के स्थानांतरण होते हैं?
उत्तर:
तीन प्रकार चालन, संवहन, विकिरण।
प्रश्न 2.
भोजन पकाने के लिए धातु के पात्र क्यों उपयोग किए जाते हैं?
उत्तर:
क्योंकि धातु ऊष्मा के अच्छे सुचालक होते हैं।
प्रश्न 3.
वायु को ऊष्मा का कुचालक क्यों कहा जाता है?
उत्तर;
क्योंकि वायु ऊष्मा को आसानी से संचरित नहीं करती।
प्रश्न 4.
समुद्र समीर क्या है?
उत्तर:
दिन में ठंडी हवा जो समुद्र से स्थल की ओर बहती है।
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प्रश्न 5.
विकिरण किस प्रकार का ऊष्मा स्थानांतरण है?
उत्तर:
जिसमें माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।
प्रश्न 6.
ऊनी कपड़े हमें सर्दी में गर्म क्यों रखते हैं?
उत्तर:
क्योंकि वे अपने छिद्रों में वायु पकड़ते हैं जो ऊष्मा की कुचालक है।
प्रश्न 7.
घर की दीवारों में खोखली ईंटों का क्या लाभ है?
उत्तर:
उनके अंदर की वायु ऊष्मा को रोकती है जिससे घर ठंडा या गर्म रहता है।
प्रश्न 8.
संवहन में ऊष्मा का स्थानांतरण कैसे होता है?
उत्तर:
कणों की वास्तविक गति से होता है।
प्रश्न 9.
चालन और संवहन में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर:
चालन में कण अपनी स्थिति नहीं छोड़ते, संवहन में कण गतिशील होते हैं।
प्रश्न 10.
जल के अंतः स्यंदन का क्या अर्थ है?
उत्तर:
जल का जमीन के अंदर धीरे-धीरे रिसना।
लघुत्तरात्मक प्रश्न:
प्रश्न 1.
चालन का एक उदाहरण दीजिए जिसमें धातु का उपयोग हो।
उत्तर:
धातु की चम्मच को खाना बनाने के गर्म बर्तन में रखने पर गर्म होना।
प्रश्न 2.
घर को ठंडा रखने के लिए कौन से पदार्थ उपयोग होते हैं और क्यों?
उत्तर:
लकड़ी, मृदा, खोखली ईंटें क्योंकि वे ऊष्मा के कुचालक होते हैं।
प्रश्न 3.
केरल और गंगटोक के मौसम में अंतर क्यों होता है?
उत्तर:
केरल भूमध्य रेखा के निकट और समुद्र तटीय है इसलिए अधिक गर्म एवं आर्द्र है।
प्रश्न 4.
सूर्य से पृथ्वी पर ऊष्मा किस प्रक्रिया से आती है?
उत्तर:
विकिरण के माध्यम से। क्योंकि विकिरण को ऊष्मा प्रवाह के लिए किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।
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प्रश्न 5.
धातु की पट्टी और पिन वाले प्रयोग से क्या सीखा?
उत्तर:
धातु ऊष्मा के सुचालक होते हैं इसलिए गर्मी एक छोर से दूसरे छोर तक पिनों को गिराने लगती है।
प्रश्न 6.
जल में संवहन से ऊष्मा का स्थानांतरण कैसे होता है?
उत्तर:
गरम जल के कण ऊपर उठते हैं तथा ठंडे जल के भारी कण नीचे चले जाते हैं। ऊष्मा स्थानांतरण की यह प्रक्रिया संवहन कहलाती है।
प्रश्न 7.
लद्दाख में जल संरक्षण किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर:
लद्दाख में सर्दियों में हिम स्तूप बनाये जाते हैं तथा वसंत में ये हिम स्तूप धीरे-धीरे पिघलकर खेती के लिए और अन्य आवश्यकताओं के लिए जल प्रदान करते हैं।
दीर्घउत्तरीय प्रश्न:
प्रश्न 1.
ऊष्मा के तीन प्रकार के स्थानांतरण – चालन, संवहन और विकिरण के बारे में विस्तार से बताइए।
उत्तर:
चालन – इस प्रकार के ऊष्मा स्थानांतरण में कण अपनी जगह से नहीं हिलते अपितु ऊष्मा अपने से अगले कण को स्थानांतरित कर देते हैं। मुख्यतः ठोस में। संवहन- इसमें कणों की वास्तविक गति द्वारा ऊष्मा स्थानांतरण होता है। उदाहरणतः द्रव तथा गैसीय कणों में। ऊष्मा स्थानांतरण में किसी भी विकिरण- इस प्रकार प्रकार के भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। जैसे—सूरज की गर्मी।
प्रश्न 2.
ऊष्मा के चालन की प्रक्रिया प्रयोग द्वारा समझाइए।
उत्तर:
एक 15 सेमी. लंबी एल्युमिनियम या लोहे की पट्टी ली जाती है। उसमें समान दूरी पर चार पिन मोम की सहायता से चिपकाए जाते हैं। पट्टी को स्टैंड पर मजबूती से लगाया जाता है और एक छोर को जलती मोमबत्ती से गरम किया जाता है। इस प्रयोग में, पिन किस क्रम में पट्टी से नीचे गिरेंगे, यह देखा जाता है। हमने अवलोकन किया कि पट्टी के वे पिन जो मोमबत्ती के नजदीक हैं, सबसे पहले गिरते हैं, और दूर के पिन बाद में इसका कारण यह है कि ऊष्मा पट्टी के गरम छोर से ठंडे छोर की ओर प्रवाहित होती है। जैसे-जैसे ऊष्मा पिनों तक पहुँचती है, वह पिनों के नीचे लगे मोम को पिघला देती है और पिन गिर जाते हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि धातु के पदार्थ ऊष्मा के अच्छे सुचालक होते हैं, क्योंकि ऊष्मा तेजी से पट्टी के दूसरे छोर तक पहुँच गई। लकड़ी या काँच जैसी सामग्री से बनी पट्टियों में यह प्रक्रिया नहीं होती क्योंकि वे कुचालक होते हैं और उनमें ऊष्मा स्थानांतरित नहीं होती।

प्रश्न 3.
संवहन का क्रियाकलाप द्वारा वर्णन करें।
उत्तर:
क्रियाकलाप : दो समान आकार के कागज के कप लेते हैं और उन्हें लकड़ी की छड़ के दोनों ओर लटकाते हैं। एक कप के नीचे मोमबत्ती जलाकर हवा गरम की जाती है। अवलोकन में देखा जाता है कि गरम कप ऊपर उठता है। कारण यह है कि मोमबत्ती से गरम हुई हवा हल्की होकर ऊपर उठती है और ठंडी हवा नीचे आती है। इससे एक परिसंचरण बनता है जिसे संवहन कहते हैं। इस क्रियाकलाप से यह समझ आता है कि संवहन में द्रव या गैस के कण अपनी वास्तविक गति से स्थानांतरित होकर ऊष्मा एक स्थान से दूसरे स्थान तक फैलाते हैं।
प्रश्न 4.
घरों में खोखली ईंटों और लकड़ी का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर:
खोखली ईंटें और लकड़ी घरों की दीवारों में इसलिए प्रयोग की जाती हैं क्योंकि ये ऊष्मा के कुचालक पदार्थ होते हैं। कारण खोखली ईंटों के भीतर हवा भरी होती है जो ऊष्मा का कुचालक है, अर्थात् वह ऊष्मा को बाहरी वातावरण बाहर जाने से रोकती है। लकड़ी भी कुचालक है और इसकी बनावट हवा को अंदर फंसाए रखती है, इसलिए यह दीवारों और छतों को गरम और ठंडा दोनों मौसम में आरामदायक बनाती है। ये सामग्री सद्रियों में घर को गर्म और गर्मियों में ठंडा रखने में मदद करती हैं। लाभ-ये ऊष्मा की हानि कम करती हैं जिससे ऊर्जा की बचत होती है। घर का तापमान संतुलित रहता है, जिससे रहने वाले लोगों को आराम मिलता है।
प्रश्न 5.
जल चक्र क्या है? जल के वाष्पीकरण और संघनन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
जल चक्र पृथ्वी पर जल का निरंतर पुनरावर्तन और पुनर्वितरण की प्रक्रिया है।
वाष्पीकरण (Evaporation): जब सूर्य की किरणें जल सतह (समुद्र, नदी, तालाब) पर पड़ती हैं, तो पानी गरम होकर जल वाष्प बन जाता है और वायुमंडल में उड़ जाता है। पौधों से भी पानी वाष्प के रूप में निकलता है, इसे प्रतिदाह (Transpiration) कहा जाता है।
संघनन (Condensation) : जब जल वाष्प ऊपर जाकर ठंडी वायु में मिलती है, तो वह ठंडी होकर छोटे-छोटे जल कण में बदल जाती है, जो बादलों का रूप धारण कर लेती है। इसे संघनन कहते हैं।
वर्षा (Precipitation) : बादल जब भारी हो जाते हैं तो पानी वर्षां या बर्फ के रूप में पृथ्वी पर वापस गिरता है। जल का पुनः प्रवाह – वर्षा जल नदी, तालाब और समुद्र में वापस आता है, इसी प्रकार कुछ जल जमीन के नीचे रिसकर भू-जल बनता है। यह संपूर्ण प्रक्रिया जल चक्र कहलाती है।
प्रश्न 6.
ऊष्मा के तीन प्रकार के स्थानांतरण – चालन, संवहन और विकिरण पर विस्तार से निबंध लिखिए।
उत्तर:
ऊष्मा का स्थानांतरण प्रकृति में तीन प्रकार से होता है: चालन, संवहन और विकिरण। चालन में ऊष्मा सम्पर्क में आने वाले कणों के बीच स्थानांतरित होती है। ठोस पदार्थ में जब कोई भाग गरम होता है, तो उसके कणों की गति बढ़ जाती है और वे अपनी ऊर्जा सीधे पड़ोसी कणों को दे देते हैं, लेकिन कण स्वयं अपनी स्थिति नहीं छोड़ते। इस प्रक्रिया को चालन कहते हैं।
उदाहरण के लिए, जब धातु की छड़ी के एक छोर को गरम किया जाता है तो दूसरी ओर ऊष्मा पहुँचती है। संवहन में ऊष्मा द्रव या गैसों में कणों के वास्तविक स्थानांतरण के कारण होती है। जब द्रव या गैस का कोई भाग गरम हो जाता है, तो वह फैल कर हल्का हो जाता है। और ऊपर उठता है, जबकि ठंडे और भारी कण नीचे आ जाते हैं। इस तरह कणों की गति से ऊष्मा स्थानांतरित होती रहती है। समुद्र और वायुमंडल में हवा और जल के परिसंचरण इसी प्रक्रिया के उदाहरण हैं। विकिरण वह प्रक्रिया है जिसमें ऊष्मा बिना किसी माध्यम के तरंगों के रूप स्थानांतरित होती है।
सूरज की किरणें सीधे पृथ्वी तक पहुँचती हैं, जो विकिरण प्रक्रिया का प्रमुख उदाहरण है। आग से महसूस होने वाली गर्मी भी विकिरण द्वारा ही आती है। विकिरण के लिए कोई माध्यम आवश्यक नहीं होता। ऊष्मा स्थानांतरण के ये तीन प्रकार हमारे दैनिक जीवन में अनेक स्थानों पर दिखाई देते हैं, जैसे भोजन पकाना, घर को गर्म रखना, दिन-रात का तापमान परिवर्तन आदि। ये प्रक्रियाएँ प्रकृति की ऊर्जा के संचार प्रणाली को समझने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
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प्रश्न 7.
धातु और अधातुओं के आधार पर ऊष्मा के सुचालक तथा कुचालक पदार्थों की भूमिका पर चर्चा करें।
उत्तर:
धातु और अधातु पदार्थों में ऊष्मा संचरण की क्षमता में महत्त्वपूर्ण भेद होता है। धातु पदार्थ जैसे- ताँबा, लोहा, एल्युमिनियम आदि, ऊष्मा के सुचालक होते हैं। इसका अर्थ है कि ये पदार्थ ऊष्मा को जल्दी और अच्छे तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाते हैं। यह इसलिए संभव होता है क्योंकि धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की भरमार रहती है, जो ऊर्जा को तेजी से संचारित करते हैं। इसलिए किचन में भोजन पकाने के लिए धातु के बर्तन प्रयोग किए जाते हैं, जिससे खाना जल्दी और समान रूप से पकता है। अधातु पदार्थ जैसे- काँच, लकड़ी, प्लास्टिक आदि ऊष्मा के ‘कुचालक होते हैं, अर्थात् ये ऊष्मा के हैं।
ऐसे पदार्थ कणों के बीच ऊर्जा के संचरण को रोकते संचरण में बाधा डालते हैं क्योंकि इनके पास मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होते। वे ऊष्मा को ऊपर से नीचे या एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचने नहीं देते। कपड़ों में ऊनी या कागजी कपड़े हमें ठंड से बचाने के लिए इसी सिद्धांत पर काम करते हैं। क्योंकि वे वायु के छिद्रों में फंस कर ऊष्मा को बाहर जाने से रोकते हैं। कुचालक पदार्थों का प्रयोग घरों की दीवारों, कपड़ों, कंबलों आदि में किया जाता है ताकि ऊष्मा संरक्षण हो सके। वे हमें आवश्यकतानुसार गरमी या ठंडक देते हैं। इस प्रकार धातु और अधातु पदार्थों की भूमिकाएँ ऊष्मा स्थानांतरण के संदर्भ में प्रतिकूल लेकिन परस्पर पूरक होती हैं।
प्रश्न 8.
जल, मृदा और वायु के ताप परिवर्तन एवं उनके प्रभावों का विस्तृत वर्णन करें।
उत्तर:
जल, मृदा और वायु के ताप में अंतर और उनके ताप परिवर्तन हमारे पर्यावरण को प्रभावित करते हैं। जल (पानी) की ऊष्मा क्षमता अधिक होती है, जिसका अर्थ है कि जल को गरम होने और ठंडा होने में अधिक समय लगता है। समुद्र, नदी और तालाब जैसे जल स्रोत दिन में धीरे-धीरे गरम होते हैं और रात में शीतल भी धीरे होते हैं। इस कारण तटीय क्षेत्रों में मौसम संतुलित रहता है, जो देश के आर्द्र और समशीतोष्ण जलवायु को नियंत्रित करता है।
मृदा (धरती) अपेक्षाकृत जल की तुलना में जल्दी गरम और जल्दी ठंडी होती है। दिन में मृदा जल्दी गर्म हो जाती है और रात में जल्दी ठंडी। इसलिए स्थल का तापमान जल की तुलना में अधिक उतार-चढ़ाव करता है। इस अनियमितता के कारण समशीतोष्ण क्षेत्रों में दिन और रात के तापमान में फर्क होता है।
वायु भी ताप परिवर्तित होती है। गरम हवा फैलती है और हल्की हो जाती है, इसलिए ऊपर उठती है। ठंडी हवा नीचे आती है। इसका उदाहरण है समुद्री समीर और स्थल समीर का गठन, जो स्थानीय मौसम को प्रभावित करता है। इन ताप परिवर्तनों से हमारे रोजमर्रा के जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ता है जैसे-मौसम परिवर्तन, दिन-रात का तापमान और प्राकृतिक घटना जैसे वर्षा । ये ताप परिवर्तन जलवायु और कृषि गतिविधियों को भी नियंत्रित करते हैं।
प्रश्न 9.
जल संरक्षण, जल अंतः स्यंदन और भीम जल की महत्ता पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
जल मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण संसाधन है। इसकी कमी से जीवन असंभव हो जाता है। जल संरक्षण का अर्थ है जल संसाधनों को बचाना और उनकी उपयुक्त उपयोगिता सुनिश्चित करना। जल अंतःस्पंदन वह प्रक्रिया है जिसमें वर्षा का जल या अन्य सतह जल धीरे- धीरे मृदा और चट्टानों के बीच के अंतरालों से होकर भूमिगत जल स्तर में प्रवेश करता है। अंतः स्यंदन जल संसाधन को पुनः भरण करता है और भौम जल को संचित रखता है।
भौम जल वह जल है जो भूमिगत परतों में छिद्रों एवं दरारों में संचित होता है। यह पेयजल और सिंचाई के लिए महत्त्वपूर्ण स्रोत है। बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के कारण भौम जल स्तर तेजी से घट रहा है, जिससे जल संकट उत्पन्न हो रहा है। जल संरक्षण के अनेक तरीके अपनाए जाते हैं, जैसे-वर्षा जल संचयन, पुनः भरण गड्ढे, हिम स्तूप निर्माण आदि। हिम स्तूप विशेष रूप से लद्दाख जैसे शुष्क एवं ठंडे क्षेत्रों में जल की उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। जल संरक्षण पृथ्वी के जल चक्र के संतुलन के लिए आवश्यक है और मानव जीवन की सततता के लिए अनिवार्य है।
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प्रश्न 10.
बुखारी में ऊष्मा के तीनों प्रकार के स्थानांतरण को समझाइए।
उत्तर:
बुखारी : एक पारंपरिक हीटर है जिसका उपयोग विशेषकर हिमालयी क्षेत्रों में सर्दियों में कमरों को गर्म करने के लिए किया जाता है। इसमें लकड़ी या कोयला जलाया जाता है।
चालन : बुखारी के लौ के संपर्क में आने वाली लोहे की सतह गर्म हो जाती है और यह ऊष्मा लोहे के माध्यम से फैलती है। यह चालन है।
संवहन : जब बुखारी के पास की हवा या कमरे की हवा गर्म होती है, तो वह फैलती है और हल्की होकर ऊपर उठती है, नीचे ठंडी हवा आती है। इस परिसंचरण को संवहन कहते हैं, जो कमरे के गर्म होने में मदद करता है।
विकिरण : बुखारी की लालटेन या लौ से निकली ऊष्मा विकिरण के माध्यम से आस-पास के लोगों और वस्तुओं तक पहुँचती है। यह विकिरण रूप से ऊष्मा है, जो बिना माध्यम के फैलती है। इस प्रकार बुखारी तीनों ऊष्मा स्थानांतरण प्रक्रियाओं का उपयोग एक साथ करता है, जो इसे प्रभावी हीटर बनाता है।
प्रकृति में ऊष्मा का स्थानांतरण Class 7 MCQ
बहुचयनात्मक प्रश्न:
प्रश्न 1.
ऊष्मा के स्थानांतरण का कौन-सा प्रक्रम बिना माध्यम के भी संभव है?
(अ) चालन
(ब) संवहन
(स) विकिरण
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(स) विकिरण
प्रश्न 2.
धातु के बर्तन भोजन बनाने के लिए उपयोगी होते हैं क्योंकि बहती है?
(अ) वे हल्के होते हैं
(ब) वे ऊष्मा के सुचालक होते हैं
(स) वे रंगीन होते हैं
(द) वे सस्ते होते हैं
उत्तर:
(ब) वे ऊष्मा के सुचालक होते हैं
प्रश्न 3.
समुद्र समीर कब
(अ) रात में
(ब) दिन में
(स) हर समय
(द) केवल सर्दियों में
उत्तर:
(ब) दिन में
प्रश्न 4.
वायु ऊष्मा की किस प्रकार की चालकता दर्शाती है?
(अ) सुचालक
(ब) कुचालक
(स) अर्धचालक
(द) सुपरचालक
उत्तर:
(ब) कुचालक
प्रश्न 5.
लकड़ी और काँच जैसे पदार्थ ऊष्मा के……हैं।
(अ) सुचालक
(ब) कुचालक
(स) अर्धचालक
(द) सुपरचालक
उत्तर:
(ब) कुचालक
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प्रश्न 6.
जल चक्र में निम्नलिखित कौन-सी प्रक्रिया शामिल नहीं है?
(अ) वाष्पन
(ब) संवहन
(स) विकिरण
(द) वर्षां
उत्तर:
(स) विकिरण
प्रश्न 7.
धरती के नीचे जल किस प्रकार संचित होता है?
(अ) अवसादन
(ब) अंत: स्पंदन
(स) वर्षां
(द) संवहन
उत्तर:
(ब) अंत: स्पंदन
प्रश्न 8.
निम्न में से ऊष्मा स्थानांतरण का प्रक्रम है-
(अ) चालन
(ब) संवहन
(स) विकिरण
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 9.
गर्मी से बचने के लिए किस रंग के वस्त्र पहनना उचित है?
(अ) गहरे रंग
(ब) काले रंग
(स) हल्के रंग
(द) लाल रंग
उत्तर:
(स) हल्के रंग
प्रश्न 10.
‘बुखारी’ में किस विधि द्वारा ऊष्मा स्थानांतरण नहीं होता है?
(अ) चालन
(ब) विकिरण
(स) संवहन
(द) उपर्युक्त सभी विधियाँ होती हैं।
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी विधियाँ होती हैं।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें:
प्रश्न 1.
ठोस में ऊष्मा मुख्य रूप से _____ से स्थानांतरित होती है।
उत्तर:
चालन
प्रश्न 2.
द्रव और गैसों में ऊष्मा का स्थानांतरण _____ होता है।
उत्तर:
संवहन
प्रश्न 3.
ऊष्मा का स्थानांतरण, जिसमें माध्यम आवश्यक नहीं होता _____ कहलाता है।
उत्तर:
विकिरण
प्रश्न 4.
समुद्र तट पर दिन में ठंडी हवा समुद्र में स्थल की ओर बहती है, इसे ______ कहते हैं।
उत्तर:
समुद्र समीर
प्रश्न 5.
घरों की दीवारों में खोखली ईंटों का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि उसमें उपस्थित _____ ऊष्मा की कुचालक है।
उत्तर:
वायु
प्रश्न 6.
ऊष्मा को आसानी से प्रवाहित होने देने वाले पदार्थ ऊष्मा के ______ कहलाते हैं।
उत्तर:
सुचालक
निम्न में से सत्य/असत्य कथन छाँटिए:
प्रश्न 1.
ठोस में ऊष्मा का स्थानांतरण संवहन द्वारा होता है। (सत्य / असत्य)
उत्तर:
असत्य
प्रश्न 2.
चालन में ऊष्मा का स्थानांतरण कणों की वास्तविक गति से होता है। (सत्य / असत्य)
उत्तर:
असत्य
प्रश्न 3.
मृदा की सतह वाले क्षेत्र से बालू की सतह वाले क्षेत्र की तुलना में जल का रिसाव अधिक होता है। (सत्य / असत्य)
उत्तर:
असत्य
प्रश्न 4.
स्थल से समुद्र की ओर ठंडी हवा के गमन को स्थल समीर कहते हैं। (सत्य / असत्य)
उत्तर:
सत्य
प्रश्न 5.
विकिरण द्वारा ऊष्मा स्थानांतरण के लिए माध्यम आवश्यक होता है। (सत्य / असत्य)
उत्तर:
असत्य
कॉलम – A में दिए गए शब्दों का मिलान कॉलम-B से कीजिए-
प्रश्न 1.
| कॉलम – A (प्रक्रिया) | कॉलम B (परिभाषा) |
| (i) चालन | (अ) बिना माध्यम के अष्मा स्थानांतरण |
| (ii) संवहन | (ब) कणों के कंपन द्वारा ऊष्मा स्थानांतरण |
| (iii) विकिरण | (स) कणों की वास्तविक गति से ऊष्मा स्थानांतरण |
उत्तर:
| कॉलम – A (प्रक्रिया) | कॉलम B (परिभाषा) |
| (i) चालन | (ब) कणों के कंपन द्वारा ऊष्मा स्थानांतरण |
| (ii) संवहन | (स) कणों की वास्तविक गति से ऊष्मा स्थानांतरण |
| (iii) विकिरण | (अ) बिना माध्यम के अष्मा स्थानांतरण |
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प्रश्न 2.
| कॉलम A (वस्त्र / सामग्री) | कॉलम B(ऊष्मा संबंधी विशेषता) |
| (i) ऊनी कपड़े | (अ) ऊष्मा को अवशोषित कर अधिक गरम रखते हैं। |
| (ii) हल्के रंग के वस्त्र | (ब) वायु कुचालक होने से भवन ठंडा / गरम रखते हैं। |
| (iii) गहरे रंग के वस्त्र | (स) वायु को छिद्रों में फँसा कर गरम रखते हैं। |
| (iv) खोखली ईंटें | (द) ऊष्मा को परावर्तित कर अधिक ठंडक देते हैं। |
उत्तर:
| कॉलम A (वस्त्र / सामग्री) | कॉलम A (वस्त्र / सामग्री) |
| (i) ऊनी कपड़े | (i) ऊनी कपड़े |
| (ii) हल्के रंग के वस्त्र | (ii) हल्के रंग के वस्त्र |
| (iii) गहरे रंग के वस्त्र | (iii) गहरे रंग के वस्त्र |
| (iv) खोखली ईंटें | (iv) खोखली ईंटें |
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