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Class 5 Hindi Chapter 14 धरती धोरां री Question Answer
धरती धोरां री Question Answer
आओ बात करें-
प्रश्न 1.
कविता में धोरों की धरती राजस्थान का यश कौन-कौन सुनाता है?
उत्तर:
कविता में धोरों की धरती राजस्थान की महिमा सूर्य, चाँद, तारे, पक्षी, बगियाँ, मेघ, बिजली और यहाँ के वीर स्त्री-पुरुष आदि सब सुनाते हैं।
प्रश्न 2.
धोरों की धरती के कण-कण को चमकाने वाला कौन है?
उत्तर:
धोरों की धरती के कण-कण को चमकाने वाला सूर्य है।
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प्रश्न 3.
राजस्थान की धरती पर चन्दमा क्या बरसाता है?
उत्तर:
राजस्थान की धरती पर चन्द्रमा अमृत रस बरसाता है।
सोचो और लिखो-
प्रश्न 1.
नीचे दिए गए शब्दों का प्रयोग कर वाक्य बनाइए-
धरती = राजस्थान को मरुस्थल के कारण धरती धोरां री भी कहा जाता है।
बादल = _____.
बिजली = _____.
पंछी = _____.
उत्तर:
बादल = आज आकाश में काले बादल छाए हुए हैं।
बिजली = बिजली से सब कुछ चमकता है।
पंछी = मेरा पसंदीदा पंछी मोर है।
प्रश्न 2.
बरसात आने पर वातावरण कैसा हो जाता . है? लिखिए?
उत्तर:
बरसात आने पर वातावरण ठंडा और स्वच्छ हो जाता है, धूल के कण साफ हो जाते हैं और पेड़पौधे तरोताजा हो जाते हैं। बरसात के बाद एक प्राकृतिक खुशबू भी महसूस होती है।
प्रश्न 3.
कविता में झाला देकर कौन बुला रहा है?
उत्तर:
कविता में मक्के के खेत की फसल झाला देकर बुला रही है।
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प्रश्न 4.
नीचे दिए गए शब्दों को सही क्रम में लगाकर पंक्ति बनाओ-
1. भावण / फुलड़ा / फल / ई रा / मन
उत्तर:
ई रा फल फुलड़ा मन भावण।
2. वारां / तनड़ो / ई / मनड़ो / पर
उत्तर:
ईं पर तनड़ो मनड़ो वारां।
प्रश्न 5.
इस कविता के मूलभाव को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
इस कविता में राजस्थान की रेतीली धरती की सुंदरता, संस्कृति, मेहनतकश जीवन और प्राकृतिक सौन्दर्य का चित्रण किया गया है। यह धरती वीरता, परिश्रम और प्रेम का प्रतीक है।
मेरी बात सबकी बात-
प्रश्न 1.
इस कविता में आए शब्दों से मिलते-जुलते मानक शब्द (समानार्थी या पर्यायवाची) लिखिए।
जैसे- सुरगां = स्वर्ग।
___________
___________
उत्तर:
सूरज = सूर्य
बाजरियों = बाजरा
इमरत = अमृत
जीवण = जीवन
पढ़कर जानें-
1. नीचे कविता की कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं।
जिनमें कुछ शब्द छूट हैं। छूटे स्थान पर कविता से खोजकर सही शब्द लिखिए-
पंछी _____ बोलै,
_____ मीठै सुर स्यूं घोलै,
झीणूं _____ पंपोळै,
धरती _____ री!
उत्तर:
पंछी मधरा मधरा बोलै,
मिसरी मीठै सुर स्यूं घोलै,
झीणूँ बायरियो पंपोळै,
धरती धोरां री!
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रचनात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
इस कविता की तरह ही कोई अन्य कविता/गीत परिजनों से सुनकर कुछ पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
भाषा की बात-
प्रश्न 1.
“सूरज कण-कण नै चमकावै” इस पंक्ति में कण-कण शब्द दो बार आया है। कविता में से ऐसे अन्य शब्द ढूँढ़कर लिखें-
उत्तर:
लुळ-लुळ, मधरा-मधरा, आँगण-आँगण।
प्रश्न 2.
नीचे दिए गए शब्दों को उनकी सही क्रिया से मिलाओ।

उत्तर:

3. वाक्यों को सकारात्मक और नकारात्मक वाक्य में बदलें-
1. पंछी मधुर-मधुर बोलते हैं।
उत्तर:
पंछी मधुर-मधुर नहीं बोलते हैं।
2. कुदरत दोनों हाथ से नहीं लुटाती है।
उत्तर:
कुदरत दोनों हाथ से लुटाती है।
धरती धोरां री प्रश्न उत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
इस कविता में किस प्रदेश की महिमा का वर्णन हुआ है-
(अ) राजस्थान की
(ब) पंजाब की
(स) उत्तरप्रदेश की
(द) गुजरात की
उत्तर:
(अ) राजस्थान की
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प्रश्न 2.
राजस्थान का प्रसिद्ध पशु है?
(अ) हाथी
(ब) ऊँट
(स) घोड़ा
(द) बकरी
उत्तर:
(ब) ऊँट
प्रश्न 3.
कविता में ‘धरती धोरां री’ का अर्थ क्या है?
(अ) हरे-भरे खेत
(ब) रेतीली धरती
(स) पहाड़ी भूमि
(द) जल से भरी धरती
उत्तर:
(ब) रेतीली धरती
प्रश्न 4.
“मिसरी मीठै सुर स्यूं घोलै” पंक्ति में ‘मिसरी’ किसे दर्शाती है?
(अ) मिठाई
(ब) कटुता
(स) मधुरता
(द) पानी
उत्तर:
(स) मधुरता
प्रश्न 5.
कविता का भाव मुख्यतः किस पर केन्द्रित है?
(अ) पर्वतों का सौन्दर्य
(ब) राजस्थान की संस्कृति और प्रकृति
(स) आधुनिक जीवन और संस्कृति
(द) पाश्चात्य संस्कृति और प्रकृति
उत्तर:
(ब) राजस्थान की संस्कृति और प्रकृति
प्रश्न 6.
“धरती धोरां री”! कविता किस भाषा में है?
(अ) अंग्रेजी
(ब) मराठी
(स) राजस्थानी
(द) उर्दू
उत्तर:
(स) राजस्थानी
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प्रश्न 7.
कविता में कौन-सा गुण ‘धरती’ के लिए नहीं बताया गया है?
(अ) वीरता
(ब) सुन्दरता
(स) डरपोकपन
(द) त्याग
उत्तर:
(स) डरपोकपन
प्रश्न 8.
“ईंरा फल फुलड़ा मन भावण” का अर्थ है?
(अ) धरती से डर लगता है
(ब) धरती सुन्दर फल-फूलों से भरी है
(स) धरती पर कोई पेड़ नहीं
(द) फूलों से नफरत
उत्तर:
(ब) धरती सुन्दर फल-फूलों से भरी है
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. ईं पर _____ रमण नै आवै।
उत्तर: देव
2. कुदरत दौन्यूं _____ लुटावै।
उत्तर: हाथ
3. मदुआ _____ अणूंता खाथा।
उत्तर: ऊँट
4. ईं री _____ उडै गिगनारां।
उत्तर: धजा।
निम्नलिखित कथनों में से सत्य/असत्य बतलाइये-
1. चन्दा कण-कण ने चमकावै।
उत्तर: असत्य
2. मक्का के खेत इशारा करके बुलाते हैं।
उत्तर: सत्य
3. पंछी कड़वा कड़वा बोलै, मिसरी मीठै सुर स्यू घौले।
उत्तर: असत्य
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4. मरुधरा मेरी माँ है इसके लिए प्राण भी न्यौछावर है।
उत्तर: सत्य।
निम्नलिखित को सही सुमेलित कीजिए
| खण्ड ‘अ’ | खण्ड ‘ब’ |
| 1. आ तो सुरगां नै | (क) ई री धूल लिलाड़ सरमावै लगावां |
| 2. बिजली डरती ओला | (ख) चन्दो इमरत रस खावै बरसावै |
| 3. सूरज कण-कण ने | (ग) ईं पर देव रमण ने चमकावै आवै |
| 4. ई ने मोत्यां थाल बधावां | (घ) धरती धोरां री। |
उत्तर:
| खण्ड ‘अ’ | खण्ड ‘ब’ |
| 1. आ तो सुरगां नै | (ग) ईं पर देव रमण ने चमकावै आवै |
| 2. बिजली डरती ओला | (घ) धरती धोरां री। |
| 3. सूरज कण-कण ने | (ख) चन्दो इमरत रस खावै बरसावै |
| 4. ई ने मोत्यां थाल बधावां | (क) ई री धूल लिलाड़ सरमावै लगावां |
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
‘सूरज कण-कण नें चमकावै’ इस पंक्ति में किसका वर्णन है?
उत्तर:
सूरज की रोशनी का वर्णन है।
प्रश्न 2.
‘बिजली डरती ओला खावै’ इस पंक्ति में कौनसा मौसम दर्शाया गया है?
उत्तर:
वर्षा ऋतु।
प्रश्न 3.
नर-नारी किसका यश गाते हैं?
उत्तर:
नर-नारी धोरों की धरती राजस्थान की मरुधरा का यश गाते हैं।
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प्रश्न 4.
“मदुआ ऊँट अणूंता खाथा।” पंक्ति में ऊँट की क्या विशेषता बताई गई है?
उत्तर:
ऊँट को मदमस्त, अनोखा और उतावला पशु बताया है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
वर्षाकाल में मरुभूमि का दृश्य कैसा हो जाता है?
उत्तर:
वर्षाकाल में यहाँ काले बादल गहराते हुए देखे जा सकते हैं। जब वर्षा होती है, तो ऐसा प्रतीत होता है मानों घूघुरूओं की गमक सुनाई दे रही हो। आसमान से बिजलियाँ डोलती हुई चमकती हैं। यह दृश्य बड़ा मोहक हो जाता है।
प्रश्न 2.
कवि ने राजस्थान की किन-किन विशेषताओं का वर्णन किया है?
उत्तर:
कवि ने राजस्थान की सूर्य की चमक, वीरों की बहादुरी, वर्षाकाल का सुनहरा वातावरण, राजस्थान की फसल, पशु-पक्षियों की आवाज, मिठास भरी भाषा, आँगन की सजावट, ऊँटों के काफिले, वाद्य यन्त्रों की धुन और वहाँ की परम्पराओं का सुन्दर चित्रण किया है।
प्रश्न 3.
इस कविता से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर:
इस कविता से हमें अपनी संस्कृति, परम्पराओं और मातृभूमि के प्रति गौरव और प्रेम की प्रेरणा मिलती है। साथ ही, अपने देश और क्षेत्र की विरासत को संभालने और सम्मान देने की भावना जागती है।
प्रश्न 4.
कविता में “ईंरा फल फुलड़ा मन भावण” पंक्ति से कवि क्या बताना चाहता है?
उत्तर:
इस पंक्ति में कवि ने राजस्थान की धरती की उपजाऊ शक्ति और उसकी सुन्दरता का वर्णन किया है। कवि कहना चाहता है कि यह धरती मन को भाने वाले फल और फूल देती है, जो इसके सौन्दर्य और समृद्धि का प्रतीक है।
दीर्घउत्तरीय एवं निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
“धरती धोरां री” कविता में कवि ने राजस्थान की प्रकृति और संस्कृति की विशेषताओं का वर्णन कैसे किया है? बताइए।
उत्तर:
कविता में कवि ने राजस्थान की सुन्दरता, वीरता और सांस्कृतिक विरासत को बड़े ही प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। उसने बताया कि इस धरती में सूर्य की किरणें, रेत के टीले, पक्षियों की बोली, मनभावन फल-फूल हैं। यहाँ के आँगन सजते हैं, और लोक संगीत व नृत्य जीवन में उल्लास भरते हैं। इसके अलावा कवि ने राजस्थान के लोगों की बहादुरी, सच्चाई और आत्मसम्मान की भावना का भी उल्लेख किया है। यह कविता राजस्थान की गौरवशाली परम्पराओं का सुन्दर चित्रण करती है।
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प्रश्न 2.
“ईंरी धजा उड़ै गिगनारा” इस पंक्ति का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है और यह पंक्ति कवि की किस भावना को प्रकट करती है?
उत्तर:
इस पंक्ति का प्रतीकात्मक अर्थ है कि राजस्थान की वीरता, आत्मसम्मान और गौरव की पहचान इतनी ऊँची है कि उसकी ध्वजा आकाश तक पहुँचती है। यह पंक्ति कवि की गहरी देशभक्ति और अपनी मातृभूमि पर गर्व की भावना को प्रकट करती है। वह यह बताना चाहता है कि राजस्थान की धरती पर जन्मे लोग साहसी, निडर और गौरवशाली होते हैं, जिनका नाम इतिहास में सदा के लिए अमर रहता है।
धरती धोरां री Summary in Hindi
कठिन शब्दार्थ और सरलार्थ-

धरती धोरां री!
आ तो सुरगां नै सरमावै,
ईं पर देव रमण नै आवै,
ईं रो जस नर-नारी गावै,
धरती धोरां री!
सूरज कण-कण नै चमकावै,
चंदो इमरत रस बरसावै,
तारा निछावल कर ज्यावै,
धरती धोरां री!
कठिन शब्दार्थ-धोरां = रेत के टीले। सुरगां = स्वर्ग। सरमावै = शर्मिंदा होना। जस = यश। नर-नारी = पुरुष और स्त्री। इमरत = अमृत। निछरावल = न्यौछावर।
सरलार्थ-यह पंक्तियाँ राजस्थान की रेतीली धरती की महिमा का गुणगान करती हैं। कवि गर्व से कहता है कि यह रेत की धरती विशेष है। स्वर्ग भी इस धरती की शोभा से शर्मिंदा हो जाता है। देवता भी इस धरती पर घूमने की इच्छा रखते हैं। इसकी चमक को देखकर नर-नारी इसकी स्तुति करते हैं।
सूर्य अपनी किरणों से इस धरती के कण-कण को चमकाता है। चन्द्रमा अपनी रोशनी से शीतल अमृत रस बरसाता है। तारें इस धरती को और सुशोभित करते हैं।
काळ्य बादलिया घहरावै,
बिरखा घूघरिया घमकावै,
बिजली डरती ओला खावै,
धरती धोरां री!
लुळ लुळ बाजरियो लैरावै,
मक्की झालो दे’र बुलावै,
कुदरत दोन्यं हाथ लुटावै,
धरती धोरां री!
कठिन शब्दार्थ-बादलिया = बादल। बिरखा = बारिश। ओला खावै = छूती है। लुळ लुळ = झुक-झुक कर। झालो = इशारा करना। दोन्यू हाथ = दोनों हाथों से। कुदरत = प्रकृति।
सरलार्थ-रेगिस्तानी धरती पर काले-काले बादल गरजते हैं, बारिश की बून्दें तेजी से गिरती हैं, बिजलियाँ डोलती हुई चमकती हैं और ओले गिरते हैं। आशय यह है कि वर्षाकालीन दृश्य मनोहारी हो जाता है। आसमान से सूर्य यहाँ के रेतीले कणों को चमकाता है तो रात में चन्द्रमा शीतलता का अमृत-रस बरसाता है। सितारे तो इस धरा पर न्यौछावर होते हैं। इस धोरों की धरती पर प्रकृति का सौन्दर्य बरसता है।
खेतों में लहराता हुआ बाजरा मानो झुक-झुक के बुला रहा है। मक्का भी इशारा देकर निमन्त्रित कर रहा है। धन-धान्य की समृद्धि देखकर ऐसा लगता है कि कुदरत अपने दोनों हाथों से लुटा रही है। ऐसी यह रेतीली धोरों की धरती है।
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पंछी मधरा-मधरा बोलै,
मिसरी मीठै सुर स्यूं घोलै,
झीणुं बायरियो पंपोळै,
धरती धोरां री!
नारा नागौरी हिद् ताता,
मदुआ ऊँट अणूंता खाथा,
ईं रै घोड़ां री के बातां,
धरती धोरां री!
ईं रा फल-फुलड़ा मन भावण,
ईं रै धीणो आँगण-आँगण,
बाजै सगळ्षं स्यूं बड़ भागण,
धरती धोरां री!
कठिन शब्दार्थ – मधरा-मधरा = मधुर-मधुर। मिसरी = मिश्री। झीणूं – धीमी। बायरियो = हवा। पंपोले = सहलाता है। नारा = बैल। मदुआ = मदमस्त। सगला = सभी। बड़-भागण = बहुत सौभाग्यशाली।
सरलार्थ-राजस्थान की धरती पर पक्षियों की मधुर-मधुर आवाज सुनी जा सकती है। उनके सुर इतने मीठे होते हैं कि मानों कानों में मिश्री घुल गई हो। साथ ही मंद गति से चलने वाली हवा सहलाती रहती है, ऐसी यह धोरों की धरती है।
यहाँ के प्रसिद्ध नागौरी बैल पूरे भारत में जाने जाते हैं। मदमस्त, अनोखे, उतावले ऊँट यहाँ पाये जाते हैं और यहाँ के घोड़ों की बात तो कुछ और ही है। यह धोरों की धरती पशु-सम्पदा से भी भरपूर है।
यहाँ की रेतीली भूमि पर खिलने वाले फल-फूल मन को भाने वाले हैं। यहाँ के घर-घर, आँगनआँगन में दुधारू पशुओं की सम्पदा है। जो यहाँ जन्म लेते हैं, वे बड़े सौभाग्यशाली हैं। यह रेतीले टीलों की धरती महान है।
ईं पर तनड़ो-मनड़ो वारां,
ईं पर जीवण-प्राण उवारां,
ईं री धजा उड़ै गिगनारां,
धरती धोरां री!
इं नै मोत्यां थाल बधावां,
ईं री धूल लिलाड़ लगावां,
ईं रो मोटो भाग सरावां,
धरती धोरां री!
ईं रै सत री आण निभावां,
ईं रै पत नै नहीं लजावां,
ईं नै माथो भेंट चढ़ावां,
मायड़ कोड़ां री,
धरती धोरां री!
कठिन शब्दार्थ-उबारां = न्यौछावर करना। धजा = ध्वजा, झंडा। गिगनारा = गगन में। मायड़ = माता। लिलाड = ललाट। सरावां = सरहाना करना। आण = आन, मर्यादा।
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सरलार्थ-कवि इस धरती पर अपना तन-मन वारने की बात कहता है और समय आने पर अपना जीवन और प्राण भी वारना चाहता है। इस मरुभूमि के यश की पताका आकाश में लहराती रहे। इसलिए यह माँ समान है, जहाँ वह सर्वस्व अर्पित कर सकता है।
कवि कहता है कि इस धरा की मोतियों के थाल से आरती उतारने की लालसा रखता है और इस मिट्टी की धूल को ललाट से लगाने की प्रेरणा देता है और कहता है कि हम सौभाग्यशाली हैं जो इस धरा पर जन्में हैं। इस धरती से उसे असीम प्रेम है।
कवि हमें सम्बोधित करते हुए कहता है कि हमें इसके सत्य की मर्यादा को निभाना चाहिए। इसकी प्रतिष्ठा कभी लज्जित नहीं हो, ऐसे प्रयास करने चाहिए। यदि इसकी मर्यादा की रक्षा के लिए हमें अपना सिर भी भेंट चढ़ाना पड़े तो पीछे नहीं हटना चाहिए। यह धरती माँ श्रेष्ठ है। मरुधरा मेरी माँ है।


















