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Class 6

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 6 Question Answer सः एव महान् चित्रकारः

April 10, 2026 by Fazal Leave a Comment

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 6 Question Answer सः एव महान् चित्रकारः 1

Practicing these RBSE Class 6 Sanskrit Solutions Deepakam Chapter 6 सः एव महान् चित्रकारः Question Answer improves confidence in the subject.

Class 6 Sanskrit Chapter 6 Question Answer सः एव महान् चित्रकारः

कक्षा 6 संस्कृत पाठ 6 के प्रश्न उत्तर

Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 6 Question Answer

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
पाठस्य आधारेण प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु।
(पाठ के आधार पर प्रश्नों के उत्तर एक पद में लिखिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 6 Question Answer सः एव महान् चित्रकारः 1
उत्तर:
(क) हरितवर्णम्।
(ख) हरितवर्णेन।
(ग) हरितः।
(घ) परमेश्वरः।
(ङ) शुकान्।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 6 Question Answer सः एव महान् चित्रकारः

प्रश्न 2.
पाठस्य आधारेण प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखन्तु।
(पाठ के आधार पर प्रश्नों के उत्तर पूर्ण वाक्य में लिखिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 6 Question Answer सः एव महान् चित्रकारः 2
उत्तर:
(क) आचार्यस्य प्रावारकस्य वर्णः श्वेतः अस्ति।
(ख) मञ्जुलस्य उद्याने विविधेषु वर्णेषु पाटलपुष्पाणि सन्ति।
(ग) इन्द्रधनुः बहुवर्णमयम् इति मञ्जुलस्य अभिप्रायः।
(घ) चित्रवर्णशुकानां पक्षा: नीलाः पीताः रक्ताः च भवन्ति।
(ङ) काकस्य पिकस्य च वर्णः कृष्णः।

प्रश्न 3.
उचितवर्णेन सह शब्द योजयन्तु। (उचित रंग के साथ शब्द को जोड़िये।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 6 Question Answer सः एव महान् चित्रकारः 3
उत्तर:
(i) फलं रक्तवर्णः अस्ति।
(ii) नीलवर्ण: खगः।
(iii) कृष्णवर्णः काकः।
(iv) हरितवर्ण: शुक:।
(v) पीतवर्णः धेनुः।
(vi) श्वेतवर्ण: बकः।
(vii) पाटलवर्ण: पाटलपुष्पम्।
(viii) नीललोहितः जम्बुफलम्।

प्रश्न 4.
राष्ट्रध्वजस्य समुचितैः वर्णैः अधः प्रदत्तेषु वाक्येषु रिक्तस्थानानि पूरयन्तु।
(राष्ट्रीय ध्वज के समुचित रंगों से नीचे प्रदत्त वाक्यों में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 6 Question Answer सः एव महान् चित्रकारः 4
उत्तर:
(क) उपरि केसरम् वर्णः अस्ति।
(ख) मध्ये श्वेतः वर्णः अस्ति।
(ग) अध: हरितः वर्णः अस्ति।
(घ) ध्वजस्य केन्द्रे नीलः वर्णः अस्ति।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 6 Question Answer सः एव महान् चित्रकारः

प्रश्न 5.
प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु।
(प्रश्नों के उत्तर एक पद में लिखिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 6 Question Answer सः एव महान् चित्रकारः 5
उत्तर:
(क) कृष्णः।
(ख) नीलः।
(ग) पीतः।
(घ) श्वेतः।
(ङ) कृष्णः।
(च) नीलः।

प्रश्न 6.
[नोट दिये गये चित्रों में विद्यार्थी निर्दिष्ट रंग भरें॥]
उत्तर:
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 6 Question Answer सः एव महान् चित्रकारः 6

Class 6th Sanskrit Chapter 6 Question Answer

1. निम्नलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि विकल्पेभ्यः चित्वा लिखत-
(i) राष्ट्रपतिभवनस्य परिसरे विद्यमानस्य उद्यानस्य किम् नाम?
(अ) अशोक- उद्यानम्
(ब) इन्द्र- उद्यानम्
(स) देव-उद्यानम्
(द) अमृत-उद्यानम्
उत्तर:
(द) अमृत-उद्यानम्

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 6 Question Answer सः एव महान् चित्रकारः

(ii) पर्णानि कीदृशानि सन्ति?
(अ) कृष्णानि
(ब) हरितानि
(स) पीतानि
(द) रक्तानि
उत्तर:
(ब) हरितानि

(iii) शुकः केन वर्णेन शोभते?
(अ) हरितवर्णेन
(ब) कृष्णवर्णेन
(स) श्वेतवर्णेन
(द) पाटलवर्णेन
उत्तर:
(अ) हरितवर्णेन

(iv) का हरितवर्णम् एव पश्यति?
(अ) मेधा
(ब) राधा
(स) श्रद्धा
(द) मनीषा
उत्तर:
(स) श्रद्धा

(v) पिकस्य वर्ण: क:?
(अ) नीलः
(ब) कृष्ण:
(स) पीत:
(द) रक्तः
उत्तर:
(ब) कृष्ण:

(vi) छात्रा: कीदृशान् शुकान् द्रष्टुम् इच्छन्ति?
(अ) रक्तवर्णान्
(ब) हरितवर्णान्
(स) श्वेतवर्णान्
(द) चित्रवर्णान्
उत्तर:
(द) चित्रवर्णान्

(vii) कः श्वेतवर्ण: ?
(अ) हंस:
(ब) काक:
(स) पिक:
(द) शुकः
उत्तर:
(अ) हंस:

(viii) शिक्षकस्य प्रावारकं कीदृशम्?
(अ) कृष्णम्
(ब) पीतम्
(स) श्वेतम्
(द) रक्तम्
उत्तर:
(स) श्वेतम्

(ix) सर्व: अपि निसर्गः कीदृशः अस्ति?
(अ) एकवर्णमयः
(ब) बहुवर्णमयः
(स) वर्णरहितः
(द) पञ्चवर्णमयः
उत्तर:
(ब) बहुवर्णमयः

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 6 Question Answer सः एव महान् चित्रकारः

(x) वर्णयोजक: चित्रकार: क:?
(अ) नृपः
(ब) शिक्षक:
(स) लेखक :
(द) परमेश्वरः
उत्तर:
(द) परमेश्वरः

प्रश्न 2.
कोष्ठकात् उचितपदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-
(i) वयम् अत्र पुष्पाणि …….। (पश्यन्ति पश्यामः)
(ii) …….. उपरि शुकः अस्ति। (वृक्षस्य / पर्वतस्य)
(iii) …….. अपि वर्णः कृष्णः। (हंसस्य/पिकस्य)
(iv) शुकस्य चञ्चुः अपि ……..। (रक्तवर्णा / कृष्णवर्णा)
(v) …….. तु बहुवर्णमयं खलु। (शिवधनुः इन्द्रधनुः)
उत्तर:
(i) पश्याम:
(ii) वृक्षस्य
(iii) पिकस्य
(iv) रक्तवर्णा
(v) इन्द्रधनुः

प्रश्न 3.
एकपदेन उत्तरत-
(i) छात्रा : चित्रवर्णाः शुकाः प्रायः कुत्र पश्यन्ति?
(ii) पर्णस्य वर्ण: क:?
(iii) काकस्य वर्णः कः?
(iv) जपापुष्पस्य वर्ण: क:?
(v) कैः एव अस्माकं जीवनम् अपि मनोरमं भवति?
उत्तर:
(i) जन्तुशालायाम्।
(ii) हरितः।
(iii) कृष्णः।
(iv) रक्त:।
(v) वर्णैः।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 6 Question Answer सः एव महान् चित्रकारः

प्रश्न 4.
पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(i) अमृत उद्यानम् कुत्र अस्ति?
उत्तर:
अमृत-उद्यानम् राष्ट्रपतिभवनस्य परिसरे अस्ति।

(ii) अमृतोद्याने सामान्यतः कति ऋतुपुष्पाणि सन्ति?
उत्तर:
अमृतोद्याने सामान्यतः पञ्चसहस्त्राधिकानि ऋतुपुष्पाणि सन्ति।

(iii) चित्रवर्णाः शुकाः कीदृशाः भवन्ति?
उत्तर:
चित्रवर्णानां शुकानां पक्षा: नीलाः पीताः रक्ताः च भवन्ति।

(iv) इन्द्रधनुषि कति वर्णाः भवन्ति?
उत्तर:
इन्द्रधनुषि सप्त वर्णाः भवन्ति।

(v) क: एव महान् चित्रकार:?
उत्तर:
परमेश्वरः एव महान् चित्रकारः।

प्रश्न 5.
रेखाङ्कितपदम् आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
(i) वृक्षस्य उपरि शुकः अस्ति।
(ii) तव इष्टवर्ण: हरितः।
(iii) शुकस्य चञ्चुः रक्तवर्णा।
(iv) पाटलपुष्पाणि विविधवर्णयुक्तानि भवन्ति।
(v) वर्णयोजक : चित्रकार: परमेश्वरः।
उत्तर:
(i) कस्य उपरि शुकः अस्ति?
(ii) तव इष्टवर्णः कः?
(iii) कस्य चञ्चुः रक्तवर्णा?
(iv) कानि विविधवर्णयुक्तानि भवन्ति?
(v) वर्णयोजक : चित्रकार: क:?

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 6 Question Answer सः एव महान् चित्रकारः

प्रश्न 6.
क्रमानुसारं शब्दार्थमेलनं कुरुत-
(क) – (ख)
(i) पर्णानि – पक्षिणः
(ii) शुकः – वायसः
(iii) काकः – पत्राणि
(iv) पिक: – मराल:
(v) खगाः – कोकिलः
(vi) हंस: – कीर:
उत्तर:
(i) पर्णानि – पत्राणि।
(ii) शुकः – कीरः।
(iii) काक: – वायसः।
(iv) पिक: – कोकिलः।
(v) खगा: – पक्षिणः।
(vi) हंस: – मरालः।

Deepakam Class 6 Chapter 6 सः एव महान् चित्रकारः Summary

पाठ – परिचय – प्रस्तुत पाठ में उद्यान का चित्र दिया गया है। यह राष्ट्रपति भवन के परिसर में विद्यमान ‘अमृत-उद्यान’ का चित्र है। यहाँ सौ से अधिक प्रकार के गुलाब के फूल हैं और सामान्यतः पाँच हजार से अधिक विविध ऋतुओं के पुष्प हैं। रमणीय प्राकृतिक शोभा विविध वर्णों से सभी के मन को आकर्षित करती है। इस पाठ में शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं के वार्तालाप के माध्यम से प्रकृति में स्थित विभिन्न रंगों का एवं ईश्वर की अद्भुत् कला का परिचय देते हुए बतलाया गया है कि वास्तव में वही ईश्वर एक चित्रकार है जिसने असंख्य रंगों से प्रकृति को चित्रित किया है।

कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद

शिक्षक:- वयम् अत्र किं ……………………………….. एव पश्यसि खलु।
कठिन शब्दार्थ- अत्र = यहाँ। पश्यामः = देख रहे हैं। सर्वत्र = सभी जगह। विविधानि = विभिन्न प्रकार के। हरितानि = हरे रंग के। पर्णानि = पत्ते। खगाः = पक्षी। जन्तवः = प्राणी। सत्यम् = सही है। एवमेव = इसी प्रकार। यथा = जिस प्रकार। पर्णस्य = पत्ते का। हरितः = हरा रंग। उपरि = ऊपर। शुकः = तोता। शोभते = सुशोभित है। इष्टवर्णः = इष्ट रंग। चिन्तयामि = सोचता हूँ।

हिन्दी अनुवाद- शिक्षक हम सब यहाँ क्या-क्या देख रहे हैं?

श्रद्धा- सभी जगह विभिन्न प्रकार के फूल, हरे रंग के पत्ते, पक्षी और पशु हैं, ऐसा हम सब देख रहे हैं।

शिक्षक – सही है। इसी प्रकार उनके रंग भी विभिन्न प्रकार के हैं। जैसा कि श्रद्धा कहती है- ‘हरे रंग के पत्ते’ यहाँ पत्ते का रंग कौनसा है?

सभी छात्र- (सभी) हरा रंग।
श्रद्धा- यहाँ वृक्ष के ऊपर तोता है। वह भी हरे रंग से सुशोभित है।
शिक्षक – श्रद्धा! तुम्हारा प्रिय रंग हरा है, ऐसा मैं सोचता हूँ। इसीलिए हरा रंग ही देख रही हो।

मेधा आचार्य ! अत्र काकः ……………………………….. द्रष्टुम् इच्छामः।
कठिन शब्दार्थ – काकः = कौआ। अपि = भी। यस्य = जिसका। कृष्णः = काला। पिकस्य = कोयल का। आम् = हाँ। भवत्याः = आपका। पश्यतु = देखो। जपापुष्पम् = गुड़हल का फूल। वदतु = बोलो। रक्तवर्णः = लाल रंग। चञ्चुः = चोंच। पाटलपुष्पम् = गुलाब का फूल। चित्रवर्णाः = रंग-बिरंगे। जानन्ति = जानते हैं। कीदृशा: = किस प्रकार के। द्रष्टुम् = देखने के लिए।

हिन्दी अनुवाद – मेधा – आचार्य ! यहाँ कौआ भी है, जिसका रंग काला है। इसी प्रकार कोयल का रंग भी काला है।

शिक्षक – हाँ। आपके द्वारा पूर्णरूप से सही देखा गया है। छात्रों ! (आप सब) देखो, यहाँ फूल भी हैं। मनीष ! गुड़हल का फूल देखो। बताओ, इसका रंग क्या है?

मनीष आचार्य ! लाल रंग है। तोते की चोंच भी लाल रंग की है। गुलाब का फूल भी लाल रंग से युक्त है। शिक्षक- सुन्दर यहाँ रंग-बिरंगे तोते भी हैं, क्या यह जानते हो?

आदित्य- आचार्य ! वे किस प्रकार के होते हैं? हम सब देखना चाहते हैं।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 6 Question Answer सः एव महान् चित्रकारः

शिक्षक:- तादृशान् शुकान् वयं ……………………………….. प्रावारकम् अपि श्वेतम्।
कठिन – शब्दार्थ – तादृशान् = उस प्रकार के। शुकान् = तोतों को। जन्तुशालायाम् = चिड़ियाघर में। तेषाम् = उनके। पक्षाः = पंख। नीलाः = नीले। पीताः = पीले। रक्ताः = लाल। मम = मेरे। उद्याने = बगीचे में। श्वेतवर्णानि = सफेद रंग के। नीललोहितवर्णानि = जामुनी रंग के। केसरवर्णानि = केसरिया रंग के। हंसः = हंस। बकः = बगुला। शशः = खरगोश। भवतः = आपका। प्रावारकम् = कोट।

हिन्दी अनुवाद – शिक्षक- उस प्रकार के (रंग-बिरंगे) तोतों को हम प्राय: चिड़ियाघर में देखते हैं। उनके पंख नीले, पीले और लाल रंग के होते हैं।

मञ्जुल- आचार्य! गुलाब के फूल भी विभिन्न रंगों से युक्त होते हैं। मेरे उद्यान में पीले रंग के, सफेद रंग के, जामुनी रंग के और केसरिया रंग के गुलाब के फूल हैं।

शिक्षक- उत्तम देखों, हंस सफेद रंग का है। तथा अन्य कौन सफेद रंग के हैं?
मेधा- आचार्य ! बगुला और खरगोश, तथा आपका कोट भी सफेद रंग का है।

शिक्षक:- आम्। सम्यक्। सर्वे ……………………………….. महान् चित्रकारः।

कठिन शब्दार्थ- सम्यक् = सही है। सर्वे = सभी। स्वस्य = अपना। अन्येषाम् = दूसरों के। अवलोकयन्तु = देखो। इन्द्रधनुः = इन्द्रधनुष। सप्त = सात। निसर्गः = संसार। बहुवर्णमयः = बहुत से रंगों वाला (रंगीन)। मनोरमम् = सुन्दर/रमणीय।

हिन्दी अनुवाद – शिक्षक हाँ ठीक है। सभी अपने और दूसरों के वस्त्रों के रंगों को देखिए।

मञ्जुल – आचार्य ! इन्द्रधनुष तो बहुत रंगीन है। उसमें सात रंग होते हैं।

शिक्षक – हाँ । सम्पूर्ण संसार ही बहुत रंगीन है। उसी से संसार सुन्दर है। रंगों से ही हमारा जीवन भी मनोरम (सुन्दर) होता है।

उसमें ‘रंगों को भरने वाला चित्रकार कौन है?’ क्या यह जानते हो?
सभी- (जोर से) परमेश्वर, परमेश्वर।
शिक्षक- हाँ। वही महान् चित्रकार है।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च

April 10, 2026 by Fazal Leave a Comment

RBSE Solutions for Class 6 Sanskrit Chapter 3 आकारान्त-स्त्रीलिङ्गशब्दप्रयोगः 5

Practicing these RBSE Class 6 Sanskrit Solutions Deepakam Chapter 3 अहं च त्वं च Question Answer improves confidence in the subject.

Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च

कक्षा 6 संस्कृत पाठ 3 के प्रश्न उत्तर

Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 3 Question Answer

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 2.
उदाहरणानुगुणम् अधोलिखितेषु वाक्येषु पट्टिकातः उचितैः पदैः रिक्तस्थानानि पूरयन्तु।
(उदाहरण के अनुसार अधोलिखित वाक्यों में पट्टिका से उचित पदों द्वारा रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 17
यथा- हे बाल! त्वं छात्रः असि।
उत्तर:
(क) आवां शिक्षकौ स्वः।
(ख) मञ्वे यूयं नर्तक्यः स्थ।
(ग) अत्र अहम् अस्मि।
(घ) सभायां युवां गायिके स्थः।
(ङ) विद्यालये वयं स्मः।
(च) वैद्यालये त्वं चिकित्सका असि।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च

प्रश्न 3.
चित्रं दृष्ट्वा उदाहरणस्य अनुगुणं वाक्यानि लिखन्तु।
(चित्र देखकर उदाहरण के अनुसार वाक्य लिखिए।)

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 18
उत्तर:
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 3
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 4
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 19
उत्तर:
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 6

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 20
उत्तर:
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 8
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 21
उत्तर:
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 10
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 11

प्रश्न 4.
उदाहरणानुगुणं वाक्यानि परस्परं योजयन्तु।
(उदाहरण के अनुसार वाक्यों को परस्पर जोड़िये।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 22
उत्तर:

(क) त्वं बालिका असि। युवां बालिके स्थः। यूयं बालिकाः स्थ।
(ख) अहं गायकः अस्मि। आवां गायकौ स्वः। वयं गायकाः स्मः।
(ग) त्वं छात्रः असि। युवां छात्रौ स्थः। यूयं छात्रा: स्थ।
(घ) अहं शिक्षकः अस्मि। आवां शिक्षकौ स्वः। वयं शिक्षकाः स्मः।
(ङ) अहं नर्तकी अस्मि। आवां नर्तक्यौ स्वः। वयं नर्तक्यः स्मः।
(च) त्वं गृहिणी असि। युवां गृहिण्यौ स्थ:। यूयं गृहिण्यः स्थ।
(छ) अहम् आरक्षकः अस्मि। आवाम् आरक्षकौ स्वः। वयम् आरक्षकाः स्मः।
(ज) त्वं सैनिक असि। युवां सैनिकौ स्थः। यूयं सैनिकाः स्थ।
(झ) त्वं चिकित्सकः असि। युवां चिकित्सक स्थ। यूयं चिकित्सका: स्थ।
(ञ) अहं तन्त्रज्ञः अस्मि। आवां तन्त्रज्ञौ स्वः। वयं तन्त्रज्ञाः स्मः।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च

प्रश्न 5.
उदाहरणानुगुणम् उत्तराणां प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु।
(उदाहरण के अनुसार उत्तरों के प्रश्न निर्माण कीजिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 23
उत्तर:
(क) त्वं तन्त्रज्ञः। – कः तन्त्रज्ञ:? – त्वं कः?
(ख) युवां बालकौ। – कौ बालकौ? – युवां कौ?
(ग) यूयं छात्राः। – के छात्रा:? – यूयं के?
(घ) अहं न्यायाधीशः। – कः न्यायाधीश:? – अहं क:?
(ङ) आवां गायिके। – के गायिके? – आवां के?
(च) वयं शिक्षिकाः। – का: शिक्षिका:? – वयं का?

योग्यता विस्तार-
कर्तृ-क्रियापद-
पुरुष: – एकवचनम् – द्विवचनम् – बहुवचनम्
प्रथमपुरुष: – भवान् / भवती अस्ति। – भवन्तौ / भवत्यौ स्तः। – भवन्तः/ भवत्यः सन्ति।
मध्यमपुरुष: – त्वम् असि। – युवां स्थः। – यूयं स्थ।
उत्तमपुरुष: – अहम् अस्मि। – आवां स्वः। – वयं स्मः।

परियोजना-कार्यम्-
प्रश्न- अस्मद् – युष्मद्-शब्दयोः सर्वाणि रूपाणि स्फोरक- पत्रे लिखन्तु।
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 24
उत्तर:
अस्मद् – शब्दरूपाणि
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 25

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 26

युष्मद्- शब्दरूपाणि
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 27

Class 6th Sanskrit Chapter 3 Question Answer

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि विकल्पेभ्यः चित्वा लिखत-
(i) मम नाम भरतः। अहं कः?
(अ) छात्रौ
(ब) छात्र:
(स) छात्रा:
(द) बालकाः
उत्तर:
(ब) छात्र:

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च

(ii) मम नाम राधिका। अहं का?
(अ) सैनिकाः
(ब) चिकित्सिके
(स) शिक्षिका:
(द) सैनिकी
उत्तरम्:
(द) सैनिकी

(iii) चिकित्सिका का अस्ति?
(अ) सुमित्रा
(ब) युवाम्
(स) सीतारमे च
(द) आवाम्
उत्तरम्:
(अ) सुमित्रा

(iv) युवां कौ?
(अ) गायकः
(ब) गायकाः
(स) गायकौ
(द) सैनिक:
उत्तरम्:
(स) गायकौ

(v) पत्रकारा: के?
(अ) अहम्
(ब) वयम्
(स) आवाम्
(द) त्वम्
उत्तरम्:
(ब) वयम्

(vi) त्वं कः?
(अ) सैनिकौ
(ब) पत्रकारा
(स) गायकाः
(द) पाचक:
उत्तरम्:
(द) पाचक:

(vii) यूयं का ?
(अ) तन्त्रज्ञा:
(ब) तन्त्रज्ञः
(स) तन्त्रज्ञौ
(द) नर्तकी
उत्तरम्:
(अ) तन्त्रज्ञा:

(viii) आवां के?
(अ) पाचिका:
(ब) पाचिका
(स) पाचिके
(द) गायकाः
उत्तरम्:
(स) पाचिके

(ix) युवां चित्रकारौ ………………..। अत्र पूरणीयं क्रियापदं किम्?
(अ) असि
(ब) स्थः
(स) स्थ
(द) स्मः
उत्तरम्:
(ब) स्थः

(x) ………….. चिकित्सिके स्वः। अत्र पूरणीयं सर्वनामपदं किम्?
(अ) अहं
(ब) वयं
(स) युवां
(द) आवां
उत्तरम्:
(द) आवां

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च

प्रश्न 2.
कोष्ठकात् उचितपदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-
(i) ……….. आरक्षकाः स्मः। (अहम् / वयम्)
(ii) युवां ……….. स्थ:। (गायिके / गायिका:)
(iii) त्वं चित्रकार: ………..। (अस्ति / असि)
(iv) आवां ……….. स्वः। (नर्तक्यौ / नर्तक्यः)
(v) ……….. कृषकः अस्मि। (अहम् / त्वम्)
उत्तरम्:
(i) वयम्
(ii) गायिके
(iii) असि।
(iv) नर्तक्यौ
(v) अहं

प्रश्न 3.
मञ्जूषातः समुचितपदं चित्वा अधोलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-
मञ्जूषा
गायकाः, सैनिक, सुमित्रा, तन्त्रज्ञा, पत्रकारौ, यूयं नर्तक्यः, पाचिके
प्रश्ना:- (i) मम नाम किम्?
(ii) आवां कौ?
(iii) के सैनिका:?
(iv) त्वं क:?
(v) त्वं का?
(vi) यूयं का स्थ?
(vii) आवां के स्वः?
(viii) वयं के स्म:?
उत्तरम्:
(i) मम नाम सुमित्रा।
(ii) आवां पत्रकारौ।
(iii) यूयं सैनिका:।
(iv) त्वं सैनिकः।
(v) त्वं तन्त्रज्ञा।
(vi) यूयं नर्तक्य: स्थ।
(vii) आवां पाचिके स्व:।
(viii) वयं गायकाः स्मः।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च

प्रश्न 4.
कोष्ठ के भ्यः समुचितपदं चित्वा रेखाङ्कितपदमधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
(i) युवां चित्रकारौ स्थ:। (के/कौ)
(ii) अहम् आरक्षकः अस्मि। (क: का)
(iii) त्वं गायिका अस्ति। (के / का)
(iv) यूयं पाचिका: स्थ। (का: /क:)
(v) आवां तन्त्रज्ञे स्वः । (कौ/के)
(vi) वयं नर्तक्यः स्मः। (के/काः)
उत्तरम्:
(i) युवां कौ स्थ:?
(ii) अहम् कः अस्मि?
(iii) त्वं का असि?
(vi) वयं का स्म:?
(v) आवां के स्वः?
(iv) यूयं का: स्थ?

प्रश्न 5.
क्रमानुसारं शब्दार्थ-मेलनं कुरुत-
(क) – (ख)
(i) नाम – वार्ताहर:
(ii) सैनिक: – अभिधानम्
(iii) तन्त्रज्ञः – आलेख्यकार:
(iv) पत्रकार: – सङ्गणकज्ञः
(v) चित्रकार: – भटः
उत्तरम्:
(i) नाम – अभिधानम्।
(ii) सैनिकः – भटः।
(iii) तन्त्रज्ञः – सङ्गणकज्ञ:
(iv) पत्रकार: – वार्ताहरः।
(v) चित्रकार: – आलेख्यकारः।

Deepakam Class 6 Chapter 3 अहं च त्वं च Summary

पाठ-परिचय- प्रस्तुत पाठ में चित्रों एवं अत्यन्त सरल व छोटे-छोटे वाक्यों के द्वारा संस्कृत भाषा में संभाषण करना सिखलाया गया है। संस्कृत भाषा में रुचि उत्पन्न करना तथा परस्पर में संस्कृत में बोलने व समझने की दक्षता उत्पन्न करना इस पाठ का मुख्य उद्देश्य है।

कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद

मम नाम भरतः ……………………………….. अहं सैनिकी।
कठिन शब्दार्थ मम मेरा / मेरी नाम नाम अहम् = मैं शिक्षिका अध्यापिका /शिक्षिका। चिकित्सिका = वैद्या सैनिकी सैनिका।

हिन्दी अनुवाद –
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 12
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 13
मम नाम भरतः। अहं छात्रः। (मेरा नाम भरत है। मैं छात्र हूँ।)
मम नाम गणेशः। अहं शिक्षकः। (मेरा नाम गणेश है। मैं शिक्षक हूँ।)
मम नाम गौतमः। अहं चिकित्सकः। (मेरा नाम गौतम है। मैं चिकित्सक (वैद्य) हूँ।)
मम नाम राघवः। अहं कृषकः। (मेरा नाम राघव है। मैं किसान हूँ।)
मम नाम मेनका। अहं छात्रा (मेरा नाम मेनका है। मैं छात्रा हूँ।)
मम नाम प्रियंवदा। अहं शिक्षिका (मेरा नाम प्रियंवदा है। मैं शिक्षिका हूँ।)
मम नाम सुमित्रा। अहं चिकित्सिका। (मेरा नाम सुमित्रा है। मैं वैद्या हूँ।)
मम नाम राधिका। अहं सैनिकी (मेरा नाम राधिका है। मैं सैनिका हूँ।)

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च

त्वं कः? अहं सैनिकः ……………………………….. वयं पाचकाः
कठिन – शब्दार्थ – त्वम् = तुम। युवाम् = तुम दोनों। यूयम् = तुम सब । कः = कौन हो? अहम् = मैं आवाम् = हम दो वयम् = हम सब गायकः = गायक पत्रकारः = पत्रकार। पाचकः = रसोइया।

हिन्दी अनुवाद-
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 14

पुंलिङ्गम्
त्वं कः? = तुम कौन हो? युवां कौ? = तुम दोनों कौन हो? यूयं के? = तुम सब कौन हो?
अहं सैनिकः। = मैं सैनिक हूँ। आवां सैनिकौ। = हम दोनों सैनिक हैं। वयं सैनिकाः। = हम सब सैनिक हैं।
त्वं कः? = तुम कौन हो? युवां कौ? = तुम दोनों कौन हो? यूयं के? = तुम सब कौन हो?
अहं गायक: = मैं गायक हूँ। आवां गायकौ = हम दोनों गायक हैं। वयं गायकाः। = हम सब गायक हैं।
त्वं कः? = तुम कौन हो? युवां कौ? = तुम दोनों कौन हो? यूयं के? = तुम सब कौन हो?
अहं पत्रकार:। = मैं पत्रकार हूँ पत्रकारौ: = हम दोनों पत्रकार हैं। आवां – वयं पत्रकारा:। = हम सब पत्रकार हैं।
त्वं कः? = तुम कौन हो? युवां कौ? = दोनों कौन हो? यूयं के? = तुम सब कौन हो?
अहं पाचकः। = मैं रसोइया हूँ। आवां पाचकौ = हम दोनों रसोइया हैं। वयं पाचकाः। = हम सब रसोइया हैं।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च

त्वं का? अहं गायिका ……………………………….. वयं चिकित्सिकाः स्मः।
कठिन-शब्दार्थ- का = कौन हो? गायिका = गायिका। तन्त्रज्ञा = तन्त्रज्ञा (कम्प्यूटर इंजीनियर)। नर्तकी = नृत्यांगना। पाचिका = पकाने वाली। चित्रकारः = चित्रकार (आलेख्यकार)। आरक्षकः = आरक्षक (सिपाही/रक्षक)।

हिन्दी अनुवाद-
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 15

स्त्रीलिङ्गम्
त्वं का? = तुम कौन हो? युवां के? = तुम दोनों कौन हो? यूयं का? = तुम सब कौन हो?
अहं गायिका। = मैं गायिका हूँ। आवां गायिकेः = हम दोनों गायिका हैं। वयं गायिकाः = हम सब गायिका हैं।
त्वं का? = तुम कौन हो? युवां के? = तुम दोनों कौन हो? यूयं का? = तुम सब कौन हो?
अहं तन्त्रज्ञा। = मैं तन्त्रज्ञा हूँ। आवां तन्त्रज्ञे। = हम दोनों तन्त्रज्ञा हैं। वयं तन्त्रज्ञाः। = हम सब तन्त्रज्ञा हैं।
त्वं का? = तुम कौन हो? युवां के? = तुम दोनों कौन हो? यूयं का? = तुम सब कौन हो?
अहं नर्तकी = मैं नर्तकी हूँ। आवां नर्तक्यौ । = हम दोनों नर्तकी हैं। वयं नर्तक्यः। = हम सब नर्तकी हैं।
त्वं का? = तुम कौन हो? युवां के? = तुम दोनों कौन हो? यूयं का? = तुम सब कौन हो?
अहं पाचिका। = मैं पकाने वाली हूँ। आवां पाचिके। हम दोनों पकाने वाली हैं। वयं पाचिकाः। = हम सब पकाने वाली हैं।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 3 Question Answer अहं च त्वं च 16

त्वं चित्रकार : असि। = तुम चित्रकार हो। अहम् आरक्षकः अस्मि। = मैं आरक्षक हूँ।
युवां चित्रकारौ स्थः = तुम दोनों चित्रकार हो। आवाम् आरक्षकौ स्वः। = हम दोनों आरक्षक हैं।
यूयं चित्रकाराः स्थ= तुम सब चित्रकार हो। वयम् आरक्षकाः स्मः। हम सब आरक्षक हैं।
त्वं गायिका असि। = तुम गायिका हो। अहं चिकित्सिका अस्मि। = मैं वैद्या हूँ।
युवां गायिके स्थ:। = तुम दोनों गायिका हो। आवां चिकित्सिके स्वः। = हम दोनों वैद्या हैं।
यूयं गायिका: स्थ। = तुम सब गायिका हो। वयं चिकित्सिकाः स्मः। = हम सब वैद्या हैं।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः

April 10, 2026 by Fazal Leave a Comment

RBSE Solutions for Class 6 Sanskrit Chapter 12 सुभाषितानि 1

Practicing these RBSE Class 6 Sanskrit Solutions Deepakam Chapter 12 आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः Question Answer improves confidence in the subject.

Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः

कक्षा 6 संस्कृत पाठ 12 के प्रश्न उत्तर

Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 12 Question Answer

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तराणि यच्छन्तु। (अधोलिखित प्रश्नों के उत्तर एक पद में दीजिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः 1
उत्तर:
(क) भिक्षुकः किं करोति स्म? – भिक्षाटनम्।
(ख) कदाचित् तेन मार्गेण कः आगच्छति? – धनिकः।
(ग) भिक्षुकः धनिकात् किम् इच्छति? – प्रभूतं धनम्।
(घ) धनिकः भिक्षुकात् किं याचितवान्? – शरीराङ्गानि।
(ङ) सौभाग्येन वयं किं प्राप्तवन्तः? – मानवजन्म।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः

प्रश्न 2.
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि ‘आम्’ अथवा ‘न’ इति पदेन लिखन्तु।
(अधोलिखित प्रश्नों के उत्तर ‘आम्’ (हाँ) अथवा ‘न’ (नहीं) पद के द्वारा लिखिए।)
यथा- ग्रामे कश्चन भिक्षुकः आसीत्। – आम्
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः 2
उत्तर:
(क) भिक्षुकः उन्नतः दृढकायः च आसीत्। – आम्
(ख) जनाः तस्मै दण्डं यच्छन्ति। – न
(ग) भिक्षुकः प्रभूतं धनम् इच्छति। – आम्
(घ) भिक्षुकः धनिकाय पादौ ददाति। – न
(ङ) भिक्षुकः भिक्षाटनं त्यजति। – आम्

प्रश्न 3.
अधोलिखितेषु वाक्येषु द्वितीयाविभक्तेः शब्दानां द्विवचने परिवर्तनं कृत्वा वाक्यानि लिखन्तु।
(अधोलिखित वाक्यों में द्वितीया विभक्ति के शब्दों को द्विवचन में बदलकर वाक्य लिखिए।)
यथा – चन्द्रशेखरः लेखं लिखति। चन्द्रशेखरः लेखौ लिखति।
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः 3
उत्तर:
(क) आपणिकः अङ्कनीं ददाति। आपणिकः अङ्कन्यौ ददाति।
(ख) मातामही कथां श्रावयति। मातामही कथे श्रावयति।
(ग) सैनिक: मां रक्षति। सैनिक : आवां रक्षति।
(घ) कृष्णः कन्दुकं गृह्णाति। कृष्णः कन्दुके गृह्णाति।
(ङ) छात्रः श्लोकं पठति। छात्रः श्लोकौ पठति।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः

प्रश्न 4.
चित्रं दृष्ट्वा द्वितीयाविभक्तेः वाक्यानि रचयन्तु।
(चित्र देखकर द्वितीय विभक्ति के वाक्यों की रचना कीजिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः 4
उत्तर:
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः 8

प्रश्न 5.
कोष्ठके विद्यमानानां शब्दानां द्वितीयाविभक्तेः एकवचनरूपेण सह वाक्यानि लिखन्तु।
(कोष्ठक में विद्यमान शब्दों के द्वितीया विभक्ति के एकवचन के रूप के साथ वाक्य लिखिए।)
यथा – भक्त: (देव) नमति। भक्तः देवं नमति।
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः 5
उत्तर:
(क) छात्रा : (ग्रन्थ) पठन्ति। छात्राः ग्रन्थं पठन्ति।
(ख) बालकाः (कथा) लिखन्ति। बालकाः कथां लिखन्ति।
(ग) रमा ( लेखनी) क्रीणाति। रमा लेखनीं क्रीणाति।
(घ) शिक्षक (अस्मद् ) पाठयति। शिक्षकः माँ पाठयति।
(ङ) अर्जुन (नदी) पश्यति। अर्जुनः नदीं पश्यति।
(च) पितामही (रजनी) आह्वयति। पितामही रजनीम् आह्वयति।
(छ) अहं (युष्मद्) नमस्करोमि। अहं त्वां नमस्करोमि।
(ज) कृषक : (क्षेत्र) कर्षति। कृषकः क्षेत्रं कर्षति।
(झ) पर्यटक (कन्याकुमारी) गच्छति। पर्यटक : कन्याकुमारीं गच्छति।
(ञ) चित्रकार: (चित्र) रचयति। चित्रकार: चित्रं रचयति।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः

प्रश्न 6.
द्वितीयाविभक्तेः एकवचनशब्दानां बहुवचने परिवर्तनं कृत्वा वाक्यानि रचयन्तु।
(द्वितीया विभक्ति के एकवचन के शब्दों को बहुवचन में बदलकर वाक्यों की रचना कीजिए।)
यथा वयं सुभाषितं वदामः। वयं सुभाषितानि वदामः।
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः 6
उत्तर:
(क) अरुण दूरवाणीं नयति। अरुणः दूरवाणी: नयति।
(ख) पिता लेखनीम् आनयति। पिता लेखनीः आनयति।
(ग) जननी पाकं पचति। जननी पाकान् पचति।
(घ) मातामहः मां बोधयति। मातामहः अस्मान् बोधयति।
(ङ) अग्रजा त्वाम् आह्वयति। अग्रजा युष्मान् आह्वयति।

प्रश्न 7.
अधः प्रदत्तं चित्रं दृष्ट्वा द्वितीयाविभक्तेः प्रयोगं कृत्वा दश वाक्यानि रचयन्तु।
(नीचे दिये गये चित्र को देखकर द्वितीया विभक्ति का प्रयोग करके दस वाक्यों की रचना कीजिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः 7
उत्तर:
(क) अस्मिन चित्रे बालकाः विद्यालयं गच्छन्ति।
(ख) बालकाः कन्दुकं पश्यन्ति।
(ग) शिक्षकः बालकान् व्यायामं शिक्षयति।
(घ) छात्राः व्यायामं कुर्वन्ति।
(ङ) बालिके क्रीडनकं पश्यतः।
(च) शिक्षिका पुस्तकं पाठयति।
(छ) शिक्षक: माम् प्रश्नं पृच्छति।
(ज) अहम् प्रश्नस्य उत्तरं यच्छामि।
(झ) विद्यालये वयं पाठान् पठामः।
(ञ) बालकाः शिक्षकान् नमस्कुर्वन्ति।

Class 6th Sanskrit Chapter 12 Question Answer

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि विकल्पेभ्यः चित्वा लिखत-
(i) मनुष्याणां शरीरस्थो महान् शुत्रः कः?
(अ) परिश्रमः
(ब) आलस्यम्
(स) बलम्
(द) विवेकम्
उत्तर:
(ब) आलस्यम्

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः

(ii) भिक्षुकः कुत्र आसीत्?
(अ) नगरे
(ब) वने
(स) नदीतटे
(द) ग्रामे
उत्तर:
(द) ग्रामे

(iii) कस्मै दानं करोतु?
(अ) दरिद्राय
(ब) धनिकाय
(स) बालकाय
(द) मित्राय
उत्तर:
(अ) दरिद्राय

(iv) “अहो मम भाग्यम्” इति कः चिन्तयति?
(अ) धनिकः
(ब) शिक्षक:
(स) भिक्षुकः
(द) बालकः
उत्तर:
(स) भिक्षुकः

(v) धनिकः सहस्त्रं रूप्यकाणि दत्वा किम् इच्छति?
(अ) हस्तौ
(ब) पादौ
(स) कर्णौ
(द) दन्ताः
उत्तर:
(ब) पादौ

(vi) धनिकः सहस्त्राधिकैः रूप्यकैः भिक्षुकस्य कानि क्रेतुम् इष्टवान्?
(अ) पात्राणि
(ब) वस्त्राणि
(स) गृहाणि
(द) शरीराङ्गानि
उत्तर:
(द) शरीराङ्गानि

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः

(vii) केन समः बन्धुः नास्ति?
(अ) परिश्रमेण
(ब) आलस्येन
(स) धनेन
(द) बलेन
उत्तर:
(अ) परिश्रमेण

(viii) किं कृत्वा मनुष्यः नावसीदति?
(अ) भिक्षाटनम्
(ब) आलस्यम्
(स) उद्यमम्
(द) दुग्धपानम्
उत्तर:
(स) उद्यमम्

(ix) “अहं कथं भिक्षां स्वीकरोमि।” रेखाङ्कितपदे का विभक्ति:?
(अ) प्रथमा
(ब) द्वितीया
(स) तृतीया
(द) पञ्चमी
उत्तर:
(ब) द्वितीया

(x) सौभाग्येन वयं किं प्राप्तवन्तः?
(अ) धनम्
(ब) भोजनम्
(स) निवासम्
(द) मानवजन्म
उत्तर:
(द) मानवजन्म

प्रश्न 2.
कोष्ठकात् उचितपदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-
(i) ………. ग्रामे भिक्षुकः आसीत्। (एकस्य एकस्मिन्)
(ii) भिक्षुकः ………. वदति। (धनिकः धनिकं)
(iii) अहं प्रभूतं धनम् ………. । (इच्छामि/इच्छति)
(iv) त्वं ………. तव पादौ यच्छ। (माम्/मह्यम्)
(v) विना ………. कथं वा चलामि? (पादौ / पादा:)
उत्तर:
(i) एकस्मिन्
(ii) धनिकं
(iii) इच्छामि।
(iv) मह्यम्
(v) पादौ

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः

प्रश्न 3.
एकपदेन उत्तराणि लिखन्तु-
(i) जनाः कस्मै धनं यच्छन्ति?
(ii) “कृपया दानं करोतु” इति भिक्षुकः कं प्रति कथयति?
(iii) धनिकः कस्य शरीराङ्गानि क्रेतुम् इच्छति?
(iv) “इतः गच्छ, शुभं भवतु ” इति कः वदति?
(v) किं कृत्वा नरः नावसीदति?
उत्तर:
(i) भिक्षुकाय।
(ii) धनिकं प्रति।
(iii) भिक्षुकस्य।
(iv) धनिकः।
(v) उद्यमम्।

प्रश्न 4.
पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखन्तु-
(क) जीवने कः सफलतां प्राप्नोति?
उत्तर:
यः परिश्रमं करोति सः एव जीवने सफलतां प्राप्नोति।

(ख) भिक्षुकः कीदृशः युवकः आसीत्?
उत्तर:
भिक्षुकः उन्नतः दृढकायः च युवकः आसीत्।

(ग) धनिकं दृष्ट्वा भिक्षुकः मनसि किं चिन्तयति?
उत्तर:
धनिकं दृष्ट्वा भिक्षुकः मनसि चिन्तयति यत्- “अहो मम भाग्यम्। अद्य अहं प्रभूतं धनं प्राप्नोमि” इति।

(घ) भिक्षुकः किं त्यक्त्वा कथञ्च जीवनयापनम् आरब्धवान्?
उत्तर:
भिक्षुकः भिक्षाटनं त्यक्त्वा परिश्रमेण धनार्जनं च कृत्वा सगौरवं जीवनयापनम् आरब्धवान्।

(ङ) कस्य सफलतार्थं प्रयत्नं करणीयम्?
उत्तर:
मानवजीवनस्य सफलतार्थं प्रयत्नं करणीयम्।

प्रश्न 5.
रेखाङ्कितपदम् अधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु-
(i) सः भिक्षाटनं करोति स्म।
(ii) दरिद्राय दानं करोतु।
(iii) भिक्षुकः सविनयम् उक्तवान्।
(iv) मह्यं तव हस्तौ यच्छ।
(v) उद्यमेन समः बन्धुः नास्ति।
उत्तर:
प्रश्ननिर्माणम्-
(i) सः किं करोति स्म?
(ii) कस्मै दानं करोतु?
(iii) क: सविनयम् उक्तवान्?
(iv) मह्यं तव कौ यच्छ?
(v) केन समः बन्धु नास्ति?

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः

प्रश्न 6.
क्रमानुसारं शब्दार्थ-मेलनं कुर्वन्तु-
(क) – (ख)
(i) दृढकाय – ददातु
(ii) प्रभूतम् – बलहीनम्
(iii) दुर्बलम् – दृढशरीर:
(iv) भिक्षुक: – परिश्रमः
(v) यच्छतु – याचकः
(vi) उद्यम: – पर्याप्तम्
उत्तर:
(i) दृढकाय: – दृढशरीरः।
(ii) प्रभूतम्-पर्याप्तम्।
(iii) दुर्बलम्-बलहीनम्।
(iv) भिक्षुक :- याचकः।
(v) यच्छतु- ददातु।
(vi) उद्यम – परिश्रमः।

प्रश्न 7.
“आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः” इति कथायाः सारं हिन्दी भाषायां लिखन्तु।
उत्तर:
कथा-सार- प्रस्तुत पाठ में वर्णित कथा के माध्यम आलस्य को मनुष्य का शत्रु बतलाते हुए आलस्य त्यागकर परिश्रम करने की प्रेरणा दी गई है।

कथा के अनुसार किसी गाँव में एक भिखारी रहता था। वह शरीर से दृढ़ एवं उन्नत युवक था, किन्तु भिक्षा माँगने के लिए घूमता रहता था। एक बार किसी धनवान् को देखकर उसने मन में सोचा कि इससे आज मैं अत्यधिक धन प्राप्त करूँगा। वह धनवान् से बोला कि “मैं बहुत गरीब हूँ। कृपया दान दीजिए।” धनवान् ने पूछा कि तुम क्या चाहते हो? उसने कहा कि मैं पर्याप्त धन चाहता हूँ।

इसके बाद धनवान् व्यक्ति ने कहा कि “मैं तुम्हें एक हजार रुपये दूँगा, तुम मुझे अपने दोनों पैर दे दो।” भिखारी ने कहा कि “बिना पैरों के मैं कैसे चलूँगा?” इसके बाद धनवान् ने कहा कि “मैं तुम्हें पाँच हजार रुपये दूँगा, तुम अपने दोनों हाथ मुझे दे दो।” किन्तु भिखारी ने कहा कि “बिना हाथों के मैं भीख कैसे लूँगा?” इसी प्रकार धनवान् ने हजारों रुपये देकर उसके शरीर के अन्य अंगों को खरीदना चाहा, किन्तु भिखारी ने मना कर दिया।

तब धनवान ने उससे कहा कि “मित्र! देखो, तुम्हारे पास ही हजारों मूल्य की वस्तुएँ हैं, फिर किसलिए तुम स्वयं को दुर्बल मानते हो? सौभाग्य से प्राप्त इस मानव- जीवन की सफलता के लिए प्रयत्न करो।

उस दिन से भिखारी ने भीख माँगना छोड़कर परिश्रम से धन कमाते हुए गौरवपूर्ण जीवन प्रारम्भ कर दिया। वस्तुतः सही कहा गया है- आलस्य मनुष्यों के शरीर में रहने वाला परम शत्रु है और परिश्रम के समान कोई मित्र नहीं है। परिश्रम करके व्यक्ति कभी दुःखी नहीं होता है।

Deepakam Class 6 Chapter 12 आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः Summary

पाठ – परिचय – प्रस्तुत पाठ में माता द्वारा एक कथा के माध्यम से पुत्र को आलस्य के बारे में बतलाया गया है। इसमें आलस्य को मनुष्य का शत्रु बतलाते हुए सदैव परिश्रम करने की सुन्दर प्रेरणा दी गई है। आलस्य से मनुष्य का पतन हो जाता है एवं परिश्रम से जीवन उन्नत होता है। आलस्य के कारण कोई भी कार्य सिद्ध नहीं होता है। किन्तु परिश्रम करने से सभी कार्य पूर्ण होते हैं एवं मनुष्य कभी भी दुःखी नहीं होता है।

कठिन शब्दार्थ, हिन्दी अनुवाद एवं पठितावबोधन

मातः! अद्य तु ……………………………….. एतां कथां पठ।
कठिन शब्दार्थ- अद्य = आज। तु = तो। सम्पूर्णदिने = पूरे दिन। करिष्यामि = करूँगा। न = नहीं। बहु = अधिक/बहुत। करोषि = करते हो। उत्तिष्ठ = उठो। कुरु = करो। उत्तीर्णः = उत्तीर्ण। यः = जो। प्राप्नोति = प्राप्त करता है। तत् = वह। कथम् = किस प्रकार। ज्ञातुम् = जानने के लिए।

हिन्दी अनुवाद-
पुत्र- माता! आज तो अवकाश का दिन है। आज मैं पूरे दिन विश्राम करूँगा।
माता- अवकाश विद्यालय का है, स्वाध्याय का नहीं। बहुत आलस्य करते हो। उठो, परिश्रम करो।
पुत्र- मैं उत्तीर्ण हो जाऊँगा। अधिक परिश्रम से क्या लाभ?
माता- जो परिश्रम करता है, वही जीवन में सफलता प्राप्त करता है। परिश्रम ही मनुष्य का मित्र है। आलस्य तो शुत्र के समान है।
पुत्र- वह किस प्रकार माता?
माता- यदि जानना चाहते हो तो इस कथा को पढ़ो।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः

एकस्मिन् विशाले ग्रामे ……………………………….. केचन च तर्जयन्ति।
कंठिन शब्दार्थ – विशाले = बहुत बड़े। ग्रामे = गाँव में। कश्चन = कोई। भिक्षुकः = भिखारी। उन्नतः = ऊँचा। दृढकायः = दृढ़ शरीर वाला। तथापि = फिर भी। भिक्षाटनम् = भीख के लिए घूमना। मिलति = मिलता है। तम् = उसको। यच्छतु = दीजिए। दरिद्राय = गरीब के लिए। जनाः = लोग। तस्मै = उसके लिए। तर्जयन्ति = प्रताड़ित करते हैं।

हिन्दी अनुवाद- एक बहुत बड़े गाँव में कोई भिखारी रहता था। यद्यपि वह ऊँचे और मजबूत (दृढ़) शरीर वाला युवक था, फिर भी वह भीख माँगने के लिए घूमता रहता था। मार्ग में जो कोई भी मिलता उसको वह कहता- “कृपया भीख दीजिए। गरीब के लिए दान करो। पुण्य प्राप्त करो।” कुछ लोग उसको धन दे देते हैं और कुछ उसे प्रताड़ित करते थे।

पठित अवबोधनम् –
प्रश्नाः- I. एकपदेन उत्तरं लिखतु-
(i) जनाः कस्मै धनं यच्छन्ति?
(ii) दरिद्राय किं करोतु?
उत्तर:
(i) भिक्षुकाय।
(ii) दानम्।

II. पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखतु-
दृढकाय: युवकः किं करोति स्म?
उत्तर:
दृढकाय: युवक: भिक्षाटनं करोति स्म।

III. प्रदत्तविकल्पेभ्यः समुचितम् उत्तरं चित्वा निर्देशानुसारं लिखतु-
(i) “केचन जनाः तं तर्जयन्ति’- अत्र क्रियापदं किम्?
(अ) केचन
(ब) तर्जयन्ति
(स) तम्
(द) जनाः
उत्तर:
(ब) तर्जयन्ति

(ii) “उन्नतः दृढकायः च युवकः आसीत्।” अत्र विशेष्यपदं किम्?
(अ) आसीत्
(ब) दृढकाय
(स) उन्नतः
(द) युवक:
उत्तर:
(द) युवक:

(iii) ‘पापम्’ इति पदस्य गद्यांशे विलोमपदं किम्?
(अ) पुण्यम्
(ब) दानम्
(स) भिक्षाम्
(द) धनम्
उत्तर:
(अ) पुण्यम्

(iv) “तथापि सः भिक्षाटनं करोति” – अत्र सर्वनामपदं किम्?
(अ) करोति
(ब) तथा
(स) सः
(द) भिक्षाटनम्
उत्तर:
(स) सः

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः

एकदा तेन मार्गेण ……………………………….. सविनयम् उक्तवान्।
कठिन शब्दार्थ – एकदा एक बार धनिकः = धनवान्। मनसि = मन में। चिन्तयति सोचता है। प्रभूतम् = अत्यधिक। प्राप्नोमि = प्राप्त करता हूँ। दरिद्रः = निर्धन। पृष्टवान् = पूछा। इच्छसि = चाहते हो। सविनयम् = विनम्रतापूर्वक उक्तवान् = कहा।

हिन्दी अनुवाद- एक बार उस मार्ग से कोई धनवान् व्यक्ति आ रहा था। वह भिखारी मन में ही सोचता है कि- “मेरा अहोभाग्य है। आज मैं ढेर सारा धन प्राप्त करूँगा।” भिखारी धनवान् व्यक्ति से कहता है- “आर्य! मैं अत्यधिक गरीब हूँ। कृपया दान कीजिए।”
धनवान् व्यक्ति ने उससे पूछा- “तुम क्या चाहते हो?” “आर्य! मैं ढेर सारा धन चाहता हूँ”- ऐसा उसने (भिक्षुक ने) विनम्रतापूर्वक कहा।

पठित-अवबोधनम् –
प्रश्ना:- I. एकपदेन उत्तरं लिखतु-
(i) धनिकः कं पृष्टवान्?
(ii) “अहो मम भाग्यम्” इति कः चिन्तयति?
उत्तर:
(i) भिक्षुकम्।
(ii) भिक्षुकः।

II. पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखतु –
भिक्षुकः धनिकं किम् वदति?
उत्तर:
भिक्षुकः धनिकं वदति – “आर्य! अहम् अतीव दरिद्रः अस्मि। कृपया दानं करोतु” इति।

III. प्रदत्तविकल्पेभ्यः समुचितम् उत्तरं चित्वा निर्देशानुसारं लिखतु-
(i) “आर्य! अहम् अतीव दरिद्रः अस्मि” अत्र ‘अस्मि’ क्रियायाः कर्तृपदं किम्?
(अ) दरिद्रः
(ब) आर्य
(स) अहम्
(द) अतीव
उत्तर:
(स) अहम्

(ii) “आर्य! अहं प्रभूतं धनम् इच्छामि” – अत्र विशेषणपदं किम्?
(अ) प्रभूतम्
(ब) अहम्
(स) धनम्
(द) इच्छामि
उत्तर:
(अ) प्रभूतम्

(iii) “धनिकः तं पृष्टवान्”- अत्र ‘तम्’ इति सर्वनामपदस्य स्थाने संज्ञापदं किम्?
(अ) जनम्
(ब) धनिकम्
(स) दानम्
(द) भिक्षुकम्
उत्तर:
(द) भिक्षुकम्

(iv) ‘धनिकः’ इति पदस्य गद्यांशे विलोमपदं किम् अस्ति?
(अ) धनम्
(ब) दरिद्रः
(स) प्रभूतम्
(द) निर्धन
उत्तर:
(ब) दरिद्रः

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः

तदा धनिकः वदति ……………………………….. भिक्षुकः निराकृतवान्।
कठिन-शब्दार्थ – तदा = तब तुभ्यम् = तुम्हारे लिए। सहस्त्रम् = हजार। यच्छामि = देता हूँ। मह्यम् = मुझे। पादौ = दोनों पैर अस्तु = ठीक है। हस्तौ दोनों हाथ। सहस्त्राधिकैः = हजारों से शरीराङ्गानि = शरीर के अंग। क्रेतुम् = खरीदना। इष्टवान् = इच्छा की। निराकृतवान् = अस्वीकार/मना कर दिया।

हिन्दी अनुवाद – तब धनवान् कहता है- “मैं तुम्हें एक हजार रुपये देता हूँ। तुम मुझे तुम्हारे दोनों पैर दे दो।”
भिखारी कहता है- “मैं मेरे दोनों पैर तुम्हें कैसे दे सकता हूँ? अथवा बिना पैरों के मैं कैसे चलूँगा?”
धनवान् कहता है— “ठीक है, तुम पाँच हजार रुपये स्वीकार करो। मुझे तुम्हारे दोनों हाथ दे दो।”
भिखारी बोला- “दोनों हाथों के बिना मैं किस प्रकार भीख ग्रहण करूँगा?”
इसी प्रकार धनवान् व्यक्ति हजारों रुपयों के द्वारा उसके शरीर के अनेक अंगों को खरीदना चाहता था। किन्तु भिखारी ने उसे अस्वीकार कर दिया।

पठित-अवबोधनम् –
प्रश्नाः – I. एकपदेन उत्तरं लिखतु-
(i) धनिकः भिक्षुकस्य हस्तयोः मूल्यं कति रुप्यकाणि वदति?
(ii) “विना पादौ कथं वा चलामि” इति कः वदति?
उत्तर:
(i) पञ्चसहस्त्रम्।
(ii) भिक्षुकः।

II. पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखतु –
धनिकः सहस्त्राधिकैः रुप्यकैः भिक्षुकस्य कानि क्रेतुम् इष्टवान्?
उत्तर:
धनिकः सहस्त्राधिकैः रूप्यकैः भिक्षुकस्य अनेकानि शरीराङ्गानि क्रेतुम् इष्टवान्।

III. प्रदत्तविकल्पेभ्यः समुचितम् उत्तरं चित्वा निर्देशानुसारं लिखतु-
(i) “अहं मम पादौ तुभ्यं कथं ददामि।” अत्र ‘ददामि क्रियायाः कर्त्ता क:?
(अ) मम
(ब) अहम्
(स) तुभ्यम्
(द) पादौ
उत्तर:
(ब) अहम्

(ii) “मह्यं तव हस्तौ यच्छ।” अत्र ‘मह्यम्’ इति सर्वनामपदस्य स्थाने संज्ञापदं किम्?
(अ) धनिकाय
(ब) भिक्षुकाय
(स) दरिद्राय
(द) जनाय
उत्तर:
(अ) धनिकाय

(iii) “त्वं पञ्चसहस्त्रं रूप्यकाणि स्वीकुरु।” अत्र विशेषणपदं किम?
(अ) स्वीकुरु
(ब) त्वम्
(स) रूप्यकाणि
(द) पञ्चसहस्त्र
उत्तर:
(द) पञ्चसहस्त्र

(iv) “विना पादौ कथं वा चलामि।” अत्र रेखाङ्कितपदे का विभक्तिः ?
(अ) तृतीया
(ब) पञ्चमी
(स) द्वितीया
(द) सप्तमी
उत्तर:
(स) द्वितीया

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः

तदा धनिकः उक्तवान् ……………………………….. शुभं भवतु” इति।
तस्माद् दिनात् भिक्षुकः ……………………………….. सज्जनाः वदन्ति।
कठिन शब्दार्थ – तदा = तब। उक्तवान् = कहा। पश्य = देखो। समीपे = पास में। आत्मानम् = स्वयं को। मन्यसे = मानते हो। प्राप्तवन्तः = प्राप्त किया है। इतः = यहाँ से। शुभम् = शुभ/कल्याण। तस्माद् दिनात् = उस दिन से। त्यक्त्वा = छोड़कर। धनार्जनम् = धन कमाकर। सगौरवम् = गौरवपूर्वक। आरब्धवान् = प्रारम्भ किया।

हिन्दी अनुवाद – तब धनवान् ने कहा- “देखो मित्र! तुम्हारे पास ही हजारों रुपये मूल्य की वस्तुएँ हैं। फिर भी किसलिए तुम स्वयं को दुर्बल मानते हो? सौभाग्य से ही हमें मानव-जीवन प्राप्त हुआ है। इसकी सफलता के लिए प्रयत्न करो। यहाँ से जाओ, आपका कल्याण (शुभ) होवे।”
उसी दिन से भिखारी ने भीख माँगना छोड़कर परिश्रम के द्वारा धन कमाकर गौरवपूर्ण जीवन यापन करना प्रारम्भ
कर दिया। इसीलिए सज्जन कहते हैं-

पठित-अवबोधनम् –
प्रश्ना:- I. एकपदेन उत्तरं लिखतु-
(i) क: आत्मानं दुर्बलं मन्यते?
(ii) सौभाग्येन वयं किं प्राप्तवन्तः?
उत्तर:
(i) भिक्षुकः।
(ii) मानवजन्म।

II. पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखतु –
कस्य सफलतार्थं प्रयत्नं करणीयम्?
उत्तर:
मानवजीवनस्य सफलतार्थं प्रयत्नं करणीयम्।

III. प्रदत्तविकल्पेभ्यः शुद्धम् उत्तरं चित्वा निर्देशानुसारं लिखतु-
(i) ‘मित्र ! तव समीपे एव सहस्त्राधिक मूल्यकानि वस्तूनि सन्ति।’ अत्र विशेष्यपदं किम्?
(अ) वस्तूनि
(ब) तव
(स) मित्र!
(द) मूल्यका
उत्तर:
(अ) वस्तूनि

(ii) ‘किमर्थं त्वम् आत्मानं दुर्बलं मन्यसे ।’ अत्र ‘मन्यसे क्रियायाः कर्तृपदं किम्?
(अ) दुर्बलम्
(ब) आत्मानं
(स) त्वम्
(द) किमर्थम्
उत्तर:
(स) त्वम्

(iii) ‘दुर्भाग्येन’ इति पदस्य गद्यांशे विलोमपदं किम्?
(अ) परिश्रमेण
(ब) सौभाग्येन
(स) प्रयत्नेन
(द) सुखेन
उत्तर:
(ब) सौभाग्येन

(iv) ‘अस्य सफलतार्थं प्रयत्नं कुरु।’ अत्र सर्वनापदं किम्?
(अ) कुरु
(ब) प्रयत्नं
(स) सफलतार्थं
(द) अस्य
उत्तर:
(द) अस्य

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 12 Question Answer आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः।
नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति॥
पदच्छेदः – आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थः महान् रिपुः, न अस्ति उद्यमसमः बन्धुः कृत्वा यं न अवसीदति।
अन्वयः – आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थः महान् रिपुः (अस्ति)। उद्यमसमः बन्धुः नास्ति यं कृत्वा न अवसीदति।

कठिन – शब्दार्थ- शरीरस्थः = शरीर में रहने वाला। रिपुः = शत्रु। उद्यमसमः = परिश्रम के समान। यम् = जिसको। कृत्वा = करके। न अवसीदति दुःखी नहीं होता है ।

हिन्दी अनुवाद / भावार्थ – आलस्य मनुष्यों के शरीर में स्थित महान् शत्रु है। क्योंकि आलस्य के कारण कार्य सिद्ध नहीं होता है। इसी प्रकार परिश्रम के समान बन्धु भी नहीं, क्योंकि परिश्रम करके कोई भी व्यक्ति दुःख को प्राप्त नहीं करता है। अत: हमें आलस्य का त्याग करके सदैव परिश्रम करना चाहिए।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव

April 10, 2026 by Fazal Leave a Comment

RBSE Solutions for Class 6 Sanskrit Chapter 15 रघो उदारता 1

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Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव

कक्षा 6 संस्कृत पाठ 15 के प्रश्न उत्तर

Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 15 Question Answer

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
पाठे लिखितानि सुभाषितानि सस्वरं पठन्तु, अवगच्छन्तु, लिखन्तु स्मरन्तु च।
(पाठ में लिखित सुभाषितों को सस्वर पढ़ो, जानो, लिखो और याद करो।)
उत्तर:
स्वयं कीजिए।

प्रश्न 2.
पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु।
(पाठ के आधार पर अधोलिखित प्रश्नों के उत्तर एक पद में लिखिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव 7
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव 8
उत्तर:
(क) आतपे।
(ख) नद्यः।
(ग) हृदः।
(ग) वृक्षाः।
(ङ) वृक्षेभ्यः।
(च) फलानि।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव

प्रश्न 3.
पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखन्तु।
(पाठ के आधार पर अधोलिखित प्रश्नों के उत्तर पूर्ण वाक्य में लिखिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव 9
उत्तर:
(क) नद्यः स्वयमेव जलं न पिबन्ति।
(ख) वृक्षाः अस्मभ्यं पुष्पं फलं, छायां मूलं, वल्कलं, दारूं च यच्छन्ति।
(ग) इदं शरीरं परोपकाराय अस्ति।
(घ) दशपुत्रसमः वृक्षः भवति।
(ङ) सतां विभूतयः परोपकाराय भवन्ति।
(च) अन्यस्य छायां वृक्षाः कुर्वन्ति।

प्रश्न 4.
पट्टिकात उचितानि पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु।
(पट्टिका से उचित पद चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव 10
उत्तर:
(क) फलान्यपि परार्थाय वृक्षाः सत्पुरुषा इव।
(ख) दशहृदसमः पुत्रः दशपुत्रः समो द्रुमः।
(ग) सुजनस्येव येषां वै विमुखा यान्ति नार्थिनः।
(घ) परोपकाराय इदं शरीरम्।
(ङ) स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षाः।
(च) परोपकाराय सतां विभूतयः।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव

प्रश्न 5.
उदाहरणानुसारम् अधोलिखितेषु वाक्येषु स्थूलाक्षरपदानां विभक्तिं निर्दिशन्तु।
(उदाहरण के अनुसार अधोलिखित वाक्यों में स्थूलाक्षर पदों की विभक्ति का निर्देश कीजिए।)
यथा – वृक्षा: अन्यस्य कृते छायां कुर्वन्ति। द्वितीया विभक्तिः
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव 11
उत्तर:
(क) द्वितीया विभक्तिः
(ख) प्रथमा विभक्तिः
(ग) प्रथमा विभक्तिः
(घ) चतुर्थी विभक्तिः
(ङ) प्रथमा विभक्तिः
(च) द्वितीया विभक्तिः।

प्रश्न 6.
अधोलिखितानां पदानां द्विवचने बहुवचने च रूपाणि लिखन्तु।
(अधोलिखित पदों के द्विवचन और बहुवचन में रूप लिखिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव 12
उत्तर:
(क) मेघः – मेघौ – मेघाः
(ख) हृदः – ह्रदा:
(ग) सत्पुरुषः – सत्पुरुषौ – सत्पुरुषाः
(घ) छाया – छाये – छाया:
(ङ) वापी – वाप्यौ – वाप्यः
(च) नदी – नद्यौ – नद्यः
(छ) शरीरम् – शरीरे – शरीराणि
(ज) पुष्पम् – पुष्पे – पुष्पाण

प्रश्न 7.
अधोलिखितानां पदानां परस्परं समुचितं मेलनं कृत्वा ‘कः किं ददाति’ इति लिखन्तु।
(अधोलिखित पदों का परस्पर में समुचित मेल करके ‘कौन क्या देता है’ ऐसा लिखिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव 13
उत्तर:
(क) वृक्षः शुद्धं वायुं ददाति।
(ख) गौ: दुग्धं ददाति।
(ग) सूर्य प्रकाशं ददाति।
(घ) नदी जलं ददाति।
(ङ) अग्निः तापं ददाति।
(च) शिक्षक विद्यां ददाति।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव

प्रश्न 8.
अधोलिखितानां क्रियापदानां लट्लकारे प्रथमपुरुषस्य रूपाणि लिखन्तु।
(अधोलिखित क्रियापदों के लट्लकार में प्रथम पुरुष के रूप लिखिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव 14
उत्तर:
तिष्ठन्ति – तिष्ठति – तिष्ठतः – तिष्ठन्ति।
फलन्ति – फलति – फलतः – फलन्ति।
यान्ति – याति – यातः – यान्ति।
पिबन्ति – पिबति – पिबतः – पिबन्ति।
खादन्ति – खादति – खादतः – खादन्ति।

Class 6th Sanskrit Chapter 15 Question Answer

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि विकल्पेभ्यः चित्वा लिखत-
(i) ‘वृक्षाः सत्पुरुषाः इव’ इति पाठस्य क्रमः कः?
(अ) त्रयोदश:
(ब) पञ्चदश
(स) एकादश:
(द) चतुर्दश:
उत्तर:
(ब) पञ्चदश

(ii) वृक्षाः कीदृशा: भवन्ति?
(अ) अपूज्याः
(ब) भक्ष्याः
(स) कर्तनीया:
(द) पूज्याः
उत्तर:
(द) पूज्याः

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव

(iii) वृक्षाः कुत्र तिष्ठन्ति?
(अ) आतपे
(ब) शीतले
(स) भवने
(द) छायायाम्
उत्तर:
(अ) आतपे

(iv) दशहृदसमः कः भवति?
(अ) कूप:
(ब) वापी
(स) पुत्र:
(द) द्रुमः
उत्तर:
(स) पुत्र:

(v) केषां जन्म वरम् अस्ति?
(अ) दैत्यानाम्
(ब) वृक्षाणाम्
(स) याचकानाम्
(द) दुर्जनानाम्
उत्तर:
(ब) वृक्षाणाम्

(vi) नद्यः किमर्थम् वहन्ति?
(अ) स्वार्थाय
(ब) प्रलयाय
(स) निरर्थकम्
(द) परोपकाराय
उत्तर:
(द) परोपकाराय

(vii) ‘महीरुहाः’ इति पदस्य कोऽर्थः?
(अ) वृक्षा:
(ब) पर्वताः
(स) जना:
(द) नद्यः
उत्तर:
(अ) वृक्षा:

(viii) परोपकाराय केषां विभूतयः भवन्ति?
(अ) असताम्
(ब) बालकानाम्
(स) सताम्
(द) धनिकानाम्
उत्तर:
(स) सताम्

(ix) फलानि स्वयं के न खादन्ति?
(अ) सज्जना:
(ब) वृक्षा:
(स) नद्यः
(द) दुर्जनाः
उत्तर:
(ब) वृक्षा:

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव

(x) ‘वारिवाहा:’ इति पदस्य कोऽर्थः?
(अ) वृक्षा:
(ब) सज्जनाः
(स) जलम्
(द) मेघाः
उत्तर:
(द) मेघाः

प्रश्न 2.
कोष्ठकात् उचितपदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-
(i) पिबन्ति …………… स्वयमेव नाम्भः। (नद्यः/हृदः)
(ii) दशकूपसमा …………… । (पुत्र:/वापी)
(iii) परोपकाराय दुहन्ति …………… । (गाव:/वृक्षा:)
(iv) परोपकाराय इदं …………… । (गृहम्/शरीरम् )
(v) विमुखाः …………… नार्थिन:। (यान्ति/कुर्वन्ति।)
उत्तर:
(i) नद्य:
(ii) वापी।
(iii) गाव:।
(iv) शरीरम्।
(v) यान्ति

प्रश्न 3.
एकपदेन उत्तराणि लिखन्तु-
(i) अन्यस्य छायां के कुर्वन्ति?
(ii) दशपुत्रसमः कः भवति?
(iii) परोपकाराय के फलन्ति?
(iv) इदं शरीरं किमर्थम् अस्ति?
(v) वारिवाहाः किम् न अदन्ति?
उत्तर:
(i) वृक्षाः।
(ii) द्रुमः।
(iii) वृक्षाः।
(iv) परोपकाराय।
(v) सस्यम्।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव

प्रश्न 4.
पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखन्तु-
(i) सत्पुरुषाः इव के सन्ति?
उत्तर:
वृक्षाः सत्पुरुषाः इव सन्ति।

(ii) एकः वृक्षाः केन समः भवति?
उत्तर:
एक: वृक्षः दशपुत्रसमः भवति।

(iii) सर्वप्राणि उपजीवनं सुजनस्य इव केषां जन्म वरम्?
उत्तर:
सर्वप्राणि उपजीवनं सुजनस्य इव वृक्षाणां जन्म वरम्।

(iv) नद्यः किमर्थम् वहन्ति?
उत्तर:
नद्यः परोपकाराय वहन्ति।

(v) वृक्षाः स्वयं किं न खादन्ति?
उत्तर:
वृक्षाः स्वयं फलानि न खादन्ति।

प्रश्न 5.
अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु।
(i) छात्रा: प्रदर्शनीं पश्यन्ति।
(ii) छात्रा: शिक्षकेण सह संलपां कुर्वन्ति।
(iii) वृक्षाः फलानि पुष्पाणि च यच्छन्ति।
(iv) वृक्षाः सत्पुरुषाः सन्ति।
(v) गावः परोपकाराय दुहन्ति।
उत्तर:
प्रश्ननिर्माणम्-
(i) छात्रा : कां पश्यन्ति?
(ii) छात्रा: केन सह संलापं कुर्वन्ति?
(iii) वृक्षाः कानि यच्छन्ति?
(iv) के सत्पुरुषाः सन्ति?
(v) गाव: किमर्थम् दुहन्ति?

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव

प्रश्न 6.
क्रमानुसारं शब्दार्थमेलनं कुर्वन्तु-
(क) – (ख)
(i) सत्पुरुषाः – मेघाः
(ii) हृदः – काष्ठैः
(iii) द्रुमः – सरोवर:
(iv) दारुभि: – जलम्
(v) अम्भ: – वृक्ष:
(vi) वारिवाहा: – सज्जनाः
उत्तर:
(i) सत्पुरुषाः – सज्जनाः।
(ii) हृदः – सरोवर:।
(iii) द्रुमः – वृक्ष:।
(iv) दारुभिः काष्ठैः।
(v) अम्भ: – जलम्।
(vi) वारिवाहाः – मेघाः।

Deepakam Class 6 Chapter 15 वृक्षाः सत्पुरुषाः इव Summary

पाठ-परिचय – वर्तमान समय में ‘पर्यावरण संरक्षण’ पर विशेष ध्यान देने के लिए सभी प्रयत्नशील हैं। पर्यावरण की सुरक्षा का एकमात्र उपाय ‘वृक्षारोपण’ है। क्योंकि वृक्ष ही सज्जनों के समान स्वयं कष्ट सहन करके दूसरों का हित करते हैं।

प्रस्तुत पाठ में विद्यालय में ‘पर्यावरण संरक्षण’ विषय पर आयोजित एक प्रदर्शनी का अवलोकन करते समय शिक्षक एवं छात्रों का वार्तालाप वर्णित है। इसमें वृक्षों के महत्त्व को दर्शाने वाले कुछ सुभाषित संकलित हैं।

कठिन शब्दार्थ, अन्वय एवं हिन्दी अनुवाद/भावार्थ

पर्यावरणसंरक्षणस्य ……………………………….. संलापं च कुर्वन्ति।
श्रीमन्! अहं जीवशास्त्रस्य ……………………………….. छात्राः अपि गायन्ति।
कठिन-शब्दार्थ – आयोजिता = आयोजित। पश्यन्ति = देखते हैं। सह = साथ। संलापं = वार्तालाप। यत् = कि। यच्छन्ति = देते हैं। पूज्याः = पूजनीय। पठितवती = पढ़ा है। सत्पुरुषाः = श्रेष्ठ पुरुष। एवम् = ऐसा। श्रावयतु = सुनाओ।

हिन्दी अनुवाद- ‘पर्यावरण संरक्षण के विषय में एक प्रदर्शनी विद्यालय में आयोजित है। छात्र उस प्रदर्शनी को देखते हैं और शिक्षक के साथ वार्तालाप करते हैं।
छात्रा – श्रीमान्! मैंने जीवशास्त्र की पुस्तक में पढ़ा है कि वृक्ष शुद्ध वायु देते हैं।
छात्र – श्रीमान्! मेरी माता भी बोलती हैं कि वृक्ष पूजनीय होते हैं।
शिक्षक – प्रिय छात्रों ! सच है, वृक्ष शुद्ध वायु, फल, पुष्प और सब कुछ भी देते हैं। इसलिए वे पूजनीय हैं।
छात्रा – श्रीमान्! मैने एक सुन्दर कथन पढ़ा है कि ‘वृक्ष सत्पुरुष हैं।’
शिक्षक – क्या ऐसा है? ठीक है, तो वह सुभाषित सुनाओ।
छात्रा – ठीक है श्रीमान् !
(मुदिता सुभाषित सुनाती है, दूसरे छात्र भी गाते हैं।)

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव

पाठ के सुभाषित-

छायामन्यस्य कुर्वन्ति तिष्ठन्ति स्वयमातपे।
फलान्यपि परार्थाय वृक्षाः सत्पुरुषा इव।।
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव 1
पदच्छेदः – छायाम् अन्यस्य कुर्वन्ति तिष्ठन्ति स्वयम् आतपे फलानि अपि परार्थाय वृक्षाः सत्पुरुषाः इव।
अन्वयः – (वृक्षाः) स्वयम् आतपे तिष्ठन्ति (किन्तु) अन्यस्य छायां कुर्वन्ति, फलानि अपि परार्थाय (यच्छन्ति) (अत:) वृक्षाः सत्पुरुषाः इव (सन्ति)।

कठिन शब्दार्थ – अन्यस्य दूसरे की आतपे धूप में तिष्ठन्ति रहते हैं। फलान्यपि = (फलानि + अपि) फल भी । परार्थाय दूसरों के उपकार के लिए। सत्पुरुषाः = सज्जन लोग इव = समान।

हिन्दी अनुवाद/भावार्थ- वृक्ष स्वयं धूप में रहते हैं किन्तु दूसरे लोगों के लिए छाया करते हैं, फल भी स्वयं नहीं खाते हैं अपितु दूसरों के लिए ही देते हैं। इसलिए वृक्ष सज्जनों के समान होते हैं। क्योंकि सज्जन स्वयं कष्टों को सहकर भी दूसरों का हित करते हैं।

दशकूपसमा वापी दशवापीसमो हृदः।
दशह्रदसमः पुत्रः दशपुत्रसमो दुमः।।
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव 2
पदच्छेदः- दशकूपसमा वापी दशवापीसमः हृदः दशह्रदसमः पुत्रः दशपुत्रसमः द्रुमः।
अन्वयः – दशकूपसमा वापी (अस्ति), दशवापीसमः हृदः (अस्ति), दशहृदसमः पुत्रः (अस्ति), दशपुत्रसम: द्रुमः (अस्ति)।

कठिन शब्दार्थ- दशकूपसमा दस कुओं के समान वापी बावड़ी हृदः तालाब, झील। द्रुमः = पेड़।

हिन्दी अनुवाद/भावार्थ- दस कुओं के समान एक बावड़ी (जलकुंड) है, दस बावड़ियों (जलकुंडों) के समान एक तालाब है, दस तालाबों के समान एक पुत्र है तथा दस पुत्रों के समान एक वृक्ष मूल्यवान् होता है। अर्थात् एक वृक्ष। सबसे अधिक उपकार करने वाला होता है। इसलिए सभी को वृक्षारोपण करना चाहिए।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव

अहो एषां वरं जन्म सर्वप्राण्युपजीवनम्।
सुजनस्येव येषां वै विमुखा यान्ति नार्थिनः।।
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव 3
पदच्छेदः – अहो! एषां वरं जन्म सर्वप्राणि उपजीवनं सुजनस्य इव येषां वै विमुखाः यान्ति न अर्थिनः।
अन्वयः – अहो! एषां सर्वप्राण्युपजीवनं जन्म वरम् (अस्ति)। सुजनस्य इव येषाम् अर्थिनः विमुखाः न यान्ति। कठिन शब्दार्थ – एषां इनका सर्वप्राण्युपजीवनं = सभी प्राणियों के उपकार के लिए। वरम् = श्रेष्ठ। सुजनस्य = सज्जन का। अर्थिनः = याचक, प्राप्त करने के इच्छुक। विमुखाः = विमुख, निराश न यान्ति नहीं जाते हैं।

हिन्दी अनुवाद/भावार्थ- अरे! इन वृक्षों का जन्म श्रेष्ठ है, क्योंकि इनका जन्म सभी प्राणियों के उपकार के लिए होता है। जैसे सज्जनों से लोगों को निराशा नहीं होती है उसी प्रकार वृक्षों के समीप आकर प्रार्थना करने वाले (याचक) लोगों को निराशा नहीं होती है। उनकी आशा के अनुरूप वृक्ष उनके लिए फल, पुष्प और छाया देते हैं।

परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः।
परोपकाराय दुहन्ति गावः परोपकाराय इदं शरीरम् ।।
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव 4
पदच्छेदः – परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः परोपकाराय दुहन्ति गावः परोपकाराय इदं शरीरम्।
अन्वयः – वृक्षा: परोपकाराय फलन्ति, नद्यः परोपकाराय वहन्ति, गावः परोपकाराय दुहन्ति, परोपकाराय (एव) इदं शरीरम् (अस्ति)।

कठिन शब्दार्थ- परोपकाराय = दूसरों के उपकार के लिए। फलन्ति = फल देते हैं। नद्यः = नदियाँ। वहन्ति : बहती हैं। गावः = गायें। दुहन्ति = दूध देती हैं। इदम् = यह।

हिन्दी अनुवाद/भावार्थ- परोपकार के लिए वृक्ष फल देते हैं अर्थात् वृक्ष के फल दूसरे लोग ही खाते हैं, स्वयं वृक्ष नहीं खाते हैं। नदियाँ परोपकार के लिए बहती हैं अर्थात् नदियों का जल भी दूसरों के उपयोग में आता है। गाय परोपकार के लिए दूध देती हैं। इसी प्रकार हमारा यह शरीर भी परोपकार के लिए ही है। हमें दूसरों का उपकार करना चाहिए।

पुष्प-पत्र – फलच्छाया-मूल- वल्कल – दारुभिः।
धन्या महीरुहा येषां विमुखा यान्ति नार्थिनः।।
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव 5
पदच्छेदः – पुष्प-पत्र – फल- छाया-‍ -मूल- वल्कल – दारुभिः धन्याः महीरुहाः येषां विमुखाः यान्ति न अर्थिनः।

अन्वयः – येषां पुष्प-पत्र – फल- छाया-मूल- वल्कल-दारुभिः अर्थिनः विमुखाः न यान्ति (ते) महीरुहाः धन्याः (सन्ति)।

कठिन – शब्दार्थ – येषां = जिनके। पत्र = पत्ते। मूलम् = जड़ वल्कल पेड़ की छाल। दारुभिः = लकड़ियों से। महीरुहाः = पेड़।

हिन्दी अनुवाद/भावार्थ- प्राणी वृक्ष से फूल, पत्ते, फल, छाया, जड़, छाल और लकड़ियाँ प्राप्त करते हैं। अर्थात् वृक्षों के पास जो कुछ भी है वह सब प्राणियों के लिए ही है। वृक्ष कभी भी याचकों को निराश नहीं करते हैं। इसलिए वृक्ष धन्य हैं।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव

पिबन्ति नद्यः स्वयमेव नाम्भः
स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षाः।
नादन्ति सस्यं खलु वारिवाहाः
परोपकाराय सतां विभूतयः।।
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 15 Question Answer वृक्षाः सत्पुरुषाः इव 6
पदच्छेदः – पिबन्ति नद्यः स्वयम् एव न अम्भः, स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षाः। न अदन्ति सस्यं खलु वारिवाहाः, परोपकाराय सतां विभूतयः।

अन्वयः – नद्यः अम्भः स्वयम् एव न पिबन्ति। वृक्षाः अपि फलानि स्वयं न खादन्ति । वारिवाहा : (अपि) सस्यं न अदन्ति खलु। (यतः) सतां विभूतयः परोपकाराय (भवन्ति)।

कठिन शब्दार्थ- नद्यः = नदियाँ अम्भः = जल। वारिवाहाः = बादल सस्यं अनाज, धान्य न अदन्ति नहीं खाते हैं। सतां = सज्जनों की। विभूतयः = समृद्धियाँ।

हिन्दी अनुवाद/भावार्थ- नदियाँ अपना पानी स्वयं नहीं पीती हैं अपितु दूसरों के उपयोग के लिए देती हैं। इसी प्रकार वृक्ष भी फल स्वयं नहीं खाते हैं। बादल भी जल की वर्षा करते हैं और उससे उत्पन्न अनाज स्वयं नहीं खाते हैं। इस प्रकार सज्जनों की सम्पत्ति भी परोपकार के लिए होती है।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः

April 10, 2026 by Fazal Leave a Comment

RBSE Solutions for Class 6 Sanskrit Chapter 9 आदर्शविद्यालयः 4

Practicing these RBSE Class 6 Sanskrit Solutions Deepakam Chapter 9 यो जानाति सः पण्डितः Question Answer improves confidence in the subject.

Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः

कक्षा 6 संस्कृत पाठ 9 के प्रश्न उत्तर

Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 9 Question Answer

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
पाठस्य आधारेण निम्नलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखन्तु।
(पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक पद में लिखिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः 1
उत्तर:
(क) तक्रम्।
(ख) मृत्युञ्जयः (शिवः)।
(ग) शक्रस्य (इन्द्रस्य)।
(घ) कुम्भकर्णस्य।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः

प्रश्न 2.
पाठस्य आधारेण निम्नलिखितानां प्रश्नानाम् पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखन्तु।
(पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पूर्ण वाक्य में लिखिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः 2
उत्तर:
(क) विष्णुपदं दुर्लभं प्रोक्तम्।
(ख) नयनस्य आदिः अन्तः च ‘न’ अस्ति।
(ग) नरः काश्यां मृत्युम् इच्छति।
(घ) कुलालस्य गृहे अर्धं कुम्भम् अस्ति।

प्रश्न 3.
अधोलिखितानि शब्दरूपाणि पठन्तु अवगच्छन्तु स्मरन्तु च।
(अधोलिखित शब्द रूपों को पढ़ों, समझो और याद कीजिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः 3
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः 4
उत्तर:
(नोट- विद्यार्थी स्वयं पढ़कर स्मरण करें।)

प्रश्न 4.
उदाहरणानुसारं वाक्यानि लिखन्तु।
(उदाहरण के अनुसार वाक्य लिखिए।)
यथा – विद्यालय: छात्र – विद्यालयस्य छात्रः गच्छति।
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः 5
उत्तर:
(क) द्विचक्रिका – चक्रम् – द्विचक्रिकायाः चक्रं भ्रमति।
(ख) वृक्षः – फलम् – वृक्षस्य फलं खादति।
(ग) छात्रा – नाम – छात्रायाः नाम पृच्छति।
(घ) रामः – पुस्तकम् – रामस्य पुस्तकम् आनयति।
(ङ) मन्दिरम् – शिखरं – मन्दिरस्य शिखरं पश्यति।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः

प्रश्न 5.
तालिकायां प्रदत्तानां शब्दानां षष्ठीविभक्तेः रूपाणि रिक्तस्थाने लिखन्तु।
(तालिका में प्रदत्त शब्दों के षष्ठी विभक्ति में रूप रिक्त स्थान में लिखिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः 6
उत्तर:
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः 10

प्रश्न 6.
रिक्तस्थानेषु कुटुम्बस्य परिचयं लिखन्तु।
(रिक्त स्थानों में परिवार का परिचय लिखिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः 7
उत्तर:
यथा मम नाम दिनेशः। मम पितुः नाम सुरेशः।
मम मातुः नाम कमला मम अग्रजस्य नाम महेन्द्रः।
मम अनुजायाः नाम सुधा मम पितामहस्य नाम गोपालः।
मम पितामह्याः नाम विमला। मम पितृव्यस्य नाम जितेन्द्रः।
मम पितृव्यायाः नाम राधा । एतत् मम कुटुम्बकम्।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः

प्रश्न 7.
अधः श्रीरामस्य कुटुम्बस्य रेखाचित्रम् अस्ति। चित्रं दृष्ट्वा उदाहरणानुसारं वाक्यानि रचयन्तु।
(नीचे श्रीराम के परिवार का रेखाचित्र है। चित्र देखकर उदाहरण के अनुसार वाक्य – रचना कीजिए।)
यथा- रामस्य पिता दशरथः
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः 8
उत्तर:
रामस्य पिता दशरथः। दशरथस्य पुत्रः रामः।
रामस्य माता कौशल्या। कौशल्यायाः पुत्रः रामः।
रामस्य श्वशुरः जनकः। जनकस्य जामाता रामः।
रामस्य पत्नी सीता। सीतायाः पतिः रामः।
रामस्य श्वश्रूः सुनयना सुनयनायाः जामाता रामः।
रामस्य अनुज लक्ष्मणः। लक्ष्मणस्य अग्रजः रामः।
रामस्य पुत्रः लवः। लवस्य पिता रामः।
सीतायाः श्वशुरः दशरथ:। दशरथस्य स्नुषा सीता।
सीतायाः श्वश्रूः कौशल्या कौशल्याया: स्नुषा सीता।
सीतायाः पिता जनकः। जनकस्य पुत्री सीता।
सीतायाः पतिः रामः। रामस्य पत्नी सीता।
सीतायाः माता सुनयना। सुनयनायाः पुत्री सीता।
सीतायाः देवरः लक्ष्मणः। लक्ष्मणस्य भ्रातृजाया सीता।
सीतायाः पुत्रः लवः। लवस्य माता सीता।

प्रश्न 8.
निम्नङ्कित – पुस्तकसूचि मध्ये कस्य उपरि किम् अस्ति इति लिखन्तु।
(निम्नांकित पुस्तक – सूचि के मध्य में किसके ऊपर क्या है ? यह लिखिए।)
RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः 9
उत्तर:
यथा- 1. लीलावत्याः उपरि पञ्चतन्त्रम् अस्ति।
2. भगवद्गीतायाः उपरि लीलावती अस्ति।
3. रामायणस्य उपरि भगवद्गीता अस्ति।
4. हितोपदेशस्य उपरि रामायणम् अस्ति।
5. योगशास्त्रस्य उपरि हितोपदेशः अस्ति।
6. रघुवंशस्य उपरि योगशास्त्रम् अस्ति।
7. मनुस्मृत्याः उपरि रघुवंशम् अस्ति।
8. अमरकोषस्य उपरि मनुस्मृतिः अस्ति।
9. अष्टाध्याय्याः उपरि अमरकोषः अस्ति।
10. महाभारतस्य उपरि अष्टाध्यायी अस्ति।
11. अर्थशास्त्रस्य उपरि महाभारतम् अस्ति।

Class 6th Sanskrit Chapter 9 Question Answer

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि विकल्पेभ्यः चित्वा लिखत-
(i) “यो जानाति सः पण्डित” इति पाठस्य क्रमः कः?
(अ) पञ्चमः
(ब) सप्तमः
(स) दशमः
(द) नवमः
उत्तर:
(द) नवमः

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः

(ii) भोजनान्ते किं पेयम्?
(अ) दुग्धम्
(ब) तक्रम्
(स) जलम्
(द) आम्ररसम्
उत्तर:
(ब) तक्रम्

(iii) जयन्तः कस्य पुत्रः?
(अ) विष्णोः
(ब) शिवस्य
(स) शक्रस्य
(द) शुक्रस्य
उत्तर:
(स) शक्रस्य

(iv) दुर्लभं किम् प्रोक्तम्?
(अ) विष्णुपदम्
(ब) धनम्
(स) उच्चपदम्
(द) स्वर्गम्
उत्तर:
(अ) विष्णुपदम्

(v) ‘मध्ये यस्तस्य तिष्ठति’- अत्र क्रियापदं किम्?
(अ) यः
(ब) मध्ये
(स) तस्य
(द) तिष्ठति
उत्तर:
(द) तिष्ठति

(vi) कस्य आदि अन्तः च ‘न’ अस्ति?
(अ) पवनस्य
(ब) नयनस्य
(स) भुवनस्य
(द) मननस्य
उत्तर:
(ब) नयनस्य

(vii) मानवः काश्यां किम् इच्छति?
(अ) ऐश्वर्यम्
(ब) वित्तम्
(स) मृत्युम्
(द) भूमिम्
उत्तर:
(स) मृत्युम्

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः

(viii) ‘युद्धे’ इति पदस्य पर्यायपदं किम्?
(अ) रणे
(ब) रसे
(स) जये
(द) पराक्रमे
उत्तर:
(अ) रणे

(ix) ‘किमिच्छति नरः काश्याम्’ अत्र कर्तृपदं किम्?
(अ) इच्छति
(ब) काश्याम्
(स) किम्
(द) नरः
उत्तर:
(द) नरः

(x) ‘पूर्णम्’ इति पदस्य विलोमपदं किम्?
(अ) सर्वम्
(ब) अर्धम्
(स) न्यूनतमम्
(द) अधिकम्
उत्तर:
(ब) अर्धम्

प्रश्न 2.
कोष्ठकात् उचितपदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-
(i) जयन्त: ………. सुत:? (किम्/कस्य)
(ii) भोजनान्ते च ………. पेयम्। (तक्रं/शक्रं)
(iii) ………. अग्रे फलं दृष्टम् (वृक्ष:/ वृक्षस्य)
(iv) यो ………. सः पण्डितः। (जानाति / जानासि)
(v) रणे भूपानां ………. हितः। (पराजय : जय:)
उत्तर:
(i) कस्य
(ii) तक्रं
(iii) वृक्षस्य
(iv) जानाति
(v) जय:

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः

प्रश्न 3.
एकपदेन उत्तराणि लिखन्तु-
(i) विष्णुपदं कीदृशम् कथितम्?
(ii) शक्रस्य पुत्रः कः?
(iii) कस्य आदि अन्तः च ‘न’ अस्ति?
(iv) हस्तिनापुरे कुम्भकारस्य अपरम् अर्धम् किम्?
(v) मृत्युञ्जयः केषां वन्दनीयः?
उत्तर:
(i) दुर्लभम्।
(ii) जयन्त:।
(iii) नयनस्य।
(iv) कर्ण:।
(v) सर्वदेवानाम्।

प्रश्न 4.
पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखन्तु-
(i) वृक्षस्याग्रे किं दृष्टम्? फलाग्रे च किम् दृष्टम्?
(ii) अकारादिः सकारान्तं च किम्?
(iii) ‘तवाप्यस्ति ममाप्यस्तिः’ इति प्रहेलिकायाः उत्तरं किम्?
(iv) का बुद्धे तार्किकशक्तिं वर्धयन्ति?
(v) प्रहेलिका : किम् विकासयन्ति?
उत्तर:
(i) वृक्षस्याग्रे फलं दृष्टम्। फलाग्रे च वृक्षः दृष्टः।
(ii) अकारादिः सकारान्तम् च ‘अनानासः’।
(iii) इति प्रहेलिकायाः उत्तरम् -‘ नयनम्’ इति।
(iv) प्रहेलिका बुद्धे : तार्किकशक्तिं वर्धयन्ति।
(v) प्रहेलिका : चिन्तनक्षमतां विकासयन्ति।

प्रश्न 5.
रेखाङ्कितपदम् अधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु-
(i) प्रहेलिका कवीनां बुद्धिमत्तां दर्शयन्ति।
(ii) भोजनस्य अन्ते तक्रं पानीयम्।
(iii) वृक्षस्य अग्रे फलं दृष्टम्।
(iv) मनुष्यः काश्यां मृत्युम् इच्छति।
(v) युद्धे महाराजानां जय: हितः।
उत्तर:
(i) प्रहेलिकाः केषां बुद्धिमत्तां दर्शयन्ति?
(ii) कस्य अन्ते तक्रं पानीयम्?
(iii) कस्य अग्रे फलं दृष्टम्?
(iv) मनुष्यः कुत्र मृत्युम् इच्छति?
(v) युद्धे केषां जय: हित:?

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः

प्रश्न 6.
उचितक्रमानुसारं शब्दार्थ – मेलनं कुर्वन्तु –
(क) – (ख)
(i) सुतः – नृपाणाम्
(ii) कुलालस्य – इन्द्रस्य
(iii) तक्रम् – कुम्भकारस्य
(iv) शक्रस्य – युद्धे
(v) रणे – मथितम्
(vi) भूपानाम् – पुत्र:
उत्तर:
(i) सुत: पुत्र:।
(ii) कुलालस्य – कुम्भकारस्य।
(iii) तक्रम् – मथितम्।
(iv) शक्रस्य – इन्द्रस्य।
(v) रणे – युद्धे।
(vi) भूपानाम् – नृपाणाम्।

Deepakam Class 6 Chapter 9 यो जानाति सः पण्डितः Summary

पाठ-परिचय-संस्कृत साहित्य में पहेलियों का विशेष स्थान है। पहेलियाँ बालक से लेकर वृद्धों तक सभी के मन में प्रसन्नता उत्पन्न करती हैं। बुद्धि की तर्क शक्ति को बढ़ाती हैं। चिन्तन करने की क्षमता का विकास करती हैं। प्राचीन कवियों की बुद्धिमत्ता और कल्पना शक्ति को दिखलाती हैं। प्रस्तुत पाठ में कुछ पहेलियों को दर्शाया गया है।

कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद / भावार्थ

भोजनान्ते च किं पेयं जयन्तः कस्य वै सुतः।
कथं विष्णुपदं प्रोक्तं क्रं शक्रस्य दुर्लभम् ॥१॥

विवरणम् – भोजनस्य ……………………………….. उक्तम् ! (……..)।
कठिन शब्दार्थ – भोजनान्ते = भोजन के अन्त में। पेयम् = पीने के योग्य। कस्य = किसका। सुतः = पुत्र। विष्णुपदम् = भगवान् विष्णु का स्थान। प्रोक्तम् = कहा गया है। तक्रम् = छाछ। शक्रस्य = इन्द्र का।

हिन्दी अनुवाद / भावार्थ भोजन के अन्त में क्या पीना चाहिए? उत्तर- छाछ। जयन्त किसका पुत्र है? उत्तर- इन्द्र का। विष्णु भगवान् का सान्निध्य किस प्रकार का कहा गया है? उत्तर-दुर्लभ।

न तस्यादिर्न तस्यान्तो मध्ये यस्तस्य तिष्ठति।
तवाप्यस्ति ममाप्यस्ति यदि जानासि तद्वद ॥२॥

विवरणम् – तस्य आदिः ……………………………….. तत् वद -(………..)।
कठिन शब्दार्थ – तस्य = उसका। आदिः = आरम्भ। न = नहीं। यः = जो। मध्ये = बीच में। तव = तुम्हारा। अपि = भी। मम = मेरा। जानासि = जानते हो। वद = बोलो।

हिन्दी अनुवाद / भावार्थ – जिसका प्रारम्भ नहीं (न) है, जिसका अन्त नहीं (न) है, उसके मध्य में जो (य) रहता है। वह तुम्हारे पास भी है और मेरे पास भी है। यदि जानते हो तो बतलाओ वह क्या है ? उत्तर- नयन (नेत्र)।
अर्थात् ‘नयन’ शब्द के प्रारम्भ व अन्त में ‘न’ तथा मध्य में ‘य’ है। नयन सभी के पास है।

वृक्षस्याग्रे फलं दृष्टं फलाग्रे वृक्ष एव च।
अकारादिं सकारान्तं यो जानाति स पण्डितः ॥३॥

विवरणम् – वृक्षस्य अग्रे ……………………………….. सः पण्डितः – (………..)।
कठिन शब्दार्थ वृक्षस्य वृक्ष पेड़ के अग्रे आगे दृष्टम् = देखा गया। अकारादिम् = ‘अ’ वर्ण जिसके आरम्भ में है। सकारान्तम् = ‘स’ वर्ण जिसके अन्त में है। जानाति जानता है।

हिन्दी अनुवाद / भावाथ – वृक्ष के आगे फल देखा गया है तथा फल के आगे भी वृक्ष ही है। जिसके आरम्भ में ‘अ’ वर्ण है और उसी प्रकार जिसके अन्त में ‘स’ वर्ण है, उस पद को जो जानता है, वही पण्डित (विद्वान्) है। उत्तर- ‘अनानास ‘। अनानास के फल के आगे एवं पीछे वृक्ष ही होता है।

किमिच्छति नरः काश्यां भूपानां को रणे हितः
को वन्द्यः सर्वदेवानां दीयतामेकमुत्तरम् ॥४॥
विवरणम् – मनुष्यः काश्यां ……………………………….. ददातु – (………..)।
कठिन – शब्दार्थ – नरः = मनुष्य काश्याम् = काशी नगरी में। किम् = क्या। इच्छति = चाहता है। रणे = युद्ध में। भूपानाम् = राजाओं का। हितः = भला, हित। सर्वदेवानाम् = सभी देवताओं में। वन्द्यः = वन्दनीय। दीयताम् = दीजिए।

हिन्दी अनुवाद / भावार्थ – मनुष्य काशी नगरी में क्या चाहता है? उत्तर- मृत्यु। युद्ध में राजाओं का हित (भला) क्या है? उत्तर – जय। सभी देवताओं के वन्दनीय कौन हैं? एक पद में उत्तर – दीजिए- मृत्युञ्जय। अर्थात् इस पहेली के प्रथम एवं द्वितीय प्रश्नों के उत्तरों को मिलाकर तृतीय प्रश्न की पहेली का एक पद में उत्तर बन जाता है। सभी देवों के वन्दनीय भगवान् ‘मृत्युञ्जय’ (शिव) हैं।

RBSE Class 6 Sanskrit Chapter 9 Question Answer यो जानाति सः पण्डितः

कुलालस्य गृहे ह्यर्थं तदर्थं हस्तिनापुरे।
द्वयं मिलित्वा लङ्कायां यो जानाति स पण्डितः ॥५॥

विवरणम् – कुम्भकारस्य सः ……………………………….. पण्डितः – (………..)।
कठिन – शब्दार्थ – कुलालस्य = कुम्हार (कुम्भकार) के गृहे = घर में अर्धम् = आधा तदर्थम् = उसका आधा। हस्तिनापुरे हस्तिनापुर में मिलित्वा = मिलकर। यः = जो। जानाति = जानता है।

हिन्दी अनुवाद / भावार्थ- कुम्हार (कुम्भकार) के घर में एक आधा भाग क्या है? उत्तर-घड़ा (कुम्भ, कुम्भकार का आधा भाग)। हस्तिनापुर में उसका (कुम्भकार शब्द का) दूसरा आधा भाग क्या है? उत्तर- कर्ण (कार शब्द का रूप)। दोनों मिलकर (कुम्भ+कर्ण) पूर्णरूप लंका में क्या है? जो इसका उत्तर जानता है वही पण्डित है। उत्तर-कुम्भकर्ण। इस पहेली के प्रथम प्रश्न एवं द्वितीय प्रश्न के उत्तर को मिलाकर तीसरे प्रश्न का उत्तर हल हो जाता है।

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