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RBSE कक्षा 5 पर्यावरण पाठ 16 के प्रश्न उत्तर म्हारो राजस्थान
RBSE Class 5th EVS Chapter 16 Question Answer in Hindi
सही उत्तर चुनो-
प्रश्न 1.
कौनसा नृत्य साँपों की चाल को प्रदर्शित करता है?
(क) कालबेलिया
(ख) घूमर
(ग) भवाई
(घ) गैर
उत्तर:
(क) कालबेलिया
प्रश्न 2.
राजस्थान में ‘बावड़ी’ का उपयोग किसके लिए किया जाता है?
(क) नृत्य के लिए
(ख) जल-संरक्षण के लिए
(ग) त्योहार मनाने के लिए
(घ) कठपुतली नचाने के लिए
उत्तर:
(ख) जल-संरक्षण के लिए
प्रश्न 3.
तुलसी के औषधीय गुण किसके लिए लाभदायक होते हैं?
(क) पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए
(ख) रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए
(ग) सर्दी-खाँसी ठीक करने के लिए
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 4.
राजस्थान के पारंपरिक जल-संरक्षण प्रणाली में कौनसा नहीं है?
(क) जोहड़
(ख) टांका
(ग) नाड़ी
(घ) नहरें
उत्तर:
(घ) नहरें
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प्रश्न 5.
कठपुतली कला के माध्यम से क्या प्रस्तुत किया जाता है?
(क) पारंपरिक कथाएँ
(ख) कृषि विधियाँ
(ग) वैज्ञानिक प्रयोग
(घ) खेल प्रतियोगिताएँ
उत्तर:
(क) पारंपरिक कथाएँ
सही या गलत लिखिए-
1. कालबेलिया नृत्य में कलाकार साँपों की तरह नृत्य करते हैं।
उत्तर:
सही
2. जोहड़ जल-संरक्षण का एक आधुनिक तरीका है।
उत्तर:
गलत
3. ग्वारपाठा (एलोवेरा) का उपयोग जलने पर नहीं किया जाता।
उत्तर:
गलत
4. लोकगीतों में पारंपरिक कथाएँ ही गाई जाती हैं।
उत्तर:
गलत
5. बावड़ियाँ सीढ़ीदार जल-संग्रहण संरचनाएँ होती हैं।
उत्तर:
सही।
रिक्त स्थान भरिए-
1. राजस्थान का प्रसिद्ध नृत्य है ______ जिसमें महिलाएँ मटकों का प्रयोग करती हैं।
उत्तर:
भवाई
2. ______ एक प्रकार की जड़ी-बूटी है जो तनाव कम करने में सहायक होती है।
उत्तर:
अश्वगंधा
3. राजस्थान में पारंपरिक जल-संरक्षण का एक प्रमुख तरीका ______ है जो मिट्टी और पत्थरों से बनाई जाती है।
उत्तर:
नाड़ी
4. ______ एक जल भंडारण कुंड होता है जिसे घरों में वर्षा जल-संग्रहण के लिए बनाया जाता है।
उत्तर:
टांका।
संक्षिप्त उत्तर लिखिए-
प्रश्न 1.
राजस्थान के प्रमुख लोकनृत्य कौन-कौनसे हैं?
उत्तर:
घूमर, कालबेलिया, गैर, भवाई आदि नृत्य राजस्थान के प्रमुख लोकनृत्य हैं।
प्रश्न 2.
कठपुतली कला का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
कठपुतली कला में पारंपरिक कथाओं को कठपुतलियों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। यह कला न केवल मनोरंजन का साधन है बल्कि यह समाज में नैतिक मूल्यों और ऐतिहासिक घटनाओं को संजोने का भी एक तरीका है।
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प्रश्न 3.
जल-संरक्षण के पारंपरिक तरीकों के बारे में दो वाक्य लिखो।
उत्तर:
- राजस्थान में बावड़ियाँ, तालाब, टांका, नाड़ी, जोहड़ आदि जल संरक्षण के पारंपरिके तरीके पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे हैं।
- आधुनिक समय में बढ़ते जल संकट के कारण जल संरक्षण के पारंपरिक तरीकों का महत्त्व और बढ़ गया है।
प्रश्न 4.
नीम के दो औषधीय गुण लिखो।
उत्तर:
- नीम एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक माना जाता है, जो मुंह की सफाई और संक्रमण को दूर करने के लिए उपयोगी है।
- नीम की पत्तियों से त्वचा संबंधी रोग दूर होते हैं।
प्रश्न 5.
अश्वगंधा किस प्रकार लाभकारी है?
उत्तर:
अश्वगंधा एक महत्त्वपूर्ण जड़ी-बूटी है, जो मानसिक तनाव को कम करने, शरीर की ताकत बढ़ाने और ऊर्जा बनाए रखने में लाभकारी है।
दीर्घ उत्तर लिखिए-
प्रश्न 1.
राजस्थान के प्रमुख लोकनृत्य एवं लोकसंगीत का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लोकनृत्य-घूमर, कालबेलिया, गैर, भवाई आदि नृत्य राजस्थान के प्रमुख लोकनृत्य हैं। घूमर नृत्य विशेष रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता है। कालबेलिया नृत्य कालबेलिया समुदाय के लोगों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है तथा इसमें साँपों की चाल को दर्शाया जाता है। भवाई नृत्य संतुलन और कलात्मक कौशल को दर्शाता है, क्योंकि इसमें महिलाएँ मटकों को सिर पर रखकर संतुलन बनाते हुए नृत्य करती हैं।
लोक संगीत-राजस्थान का लोक संगीत यहाँ की संस्कृति का अभिन्न अंग है। लोकगायक मांड, पाबूजी की फड़, पनिहारी और बधावा जैसे गीत गाते हैं, जिनमें प्रेम, वीरता और सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया जाता है।
प्रश्न 2.
जल-संरक्षण के पारंपरिक तरीकों का महत्त्व क्या है? उदाहरण सहित समझाओ।
उत्तर:
जल संरक्षण के पारंपरिक तरीके बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। राजस्थान एक शुष्क राज्य है, जहाँ वर्षा कम होती है और जल के स्रोत सीमित हैं, इसलिए यहाँ के लोगों ने पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियाँ विकसित की, जो जल-संग्रहण और प्रबंधन में अत्यंत प्रभावी हैं। उदाहरण के लिए, बावड़ी, तालाब, टांका, नाड़ी, जोहड़ आदि जल संरक्षण के पारंपरिक तरीकों का निर्माण वर्षा जल के संग्रहण एवं भूमिगत जल स्तर को बनाए रखने के लिए किया जाता था। राजस्थान में जल संरक्षण के उपर्युक्त पारंपरिक तरीके पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे हैं तथा वर्तमान समय में बढ़ते जल संकट के कारण इनका महत्त्व और अधिक बढ़ गया है।
प्रश्न 3.
राजस्थान की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में उपयोग होने वाली औषधियों का वर्णन करो।
उत्तर:
राजस्थान में आयुर्वेदिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का विशेष स्थान है। यहाँ अनेक प्रकार की औषधीय वनस्पतियाँ पाई जाती हैं जो स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए उपयोग में ली जाती हैं; जैसे-
- तुलसी-इसका उपयोग सर्दी-खाँसी से बचाव और रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है। नीम-नीम की पत्तियाँ त्वचा संबंधी रोग, मुँह की सफाई और संक्रमण से बचाव हेतु उपयोगी हैं।
- ग्वारपाठा-यह त्वचा व पेट संबंधी समस्या दूर करने, घाव भरने, जलने और बालों की देखभाल में लाभकारी है। आँवला-यह आँखों, बालों और पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद है।
- अश्वगंधा-यह मानसिक तनाव कम करने, शरीर की ताकत बढ़ाने और ऊर्जा बनाए रखने हेतु उपयोगी है।
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प्रश्न 4.
राजस्थान की सांस्कृतिक परंपराएँ किस प्रकार समाज को जोड़ती हैं?
उत्तर:
राजस्थान की सांस्कृतिक परंपराएँ जैसेलोकनृत्य, लोकसंगीत, लोककलाएँ, त्योहार, रीति-रिवाज आदि समाज के लोगों को एक सूत्र में बाधे रखती हैं और समाज को जोड़ने का कार्य करती हैं, क्योंकि इन परंपराओं के माध्यम से समाज का प्रत्येक व्यक्ति आपस में एक-दूसरे के सांस्कृतिक कार्यक्रम या त्योहारों में शामिल होते हैं और परस्पर सहयोग और प्रेमभाव को बढ़ाते हैं। सांस्कृतिक परंपराएँ ही लोगों को एक साथ लाती हैं, उन्हें सांस्कृतिक रूप से जोड़ती हैं और उन्हें सामाजिक रूप से एकजुट करती हैं।
RBSE Class 5 Paryavaran Chapter 16 Question Answer in Hindi
बहुविकल्पात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
विटामिन-सी का प्रमुख स्रोत है-
(अ) अश्वगंधा
(ब) तुलसी
(स) आँवला
(द) ग्वारपाठा
उत्तर:
(स) आँवला
प्रश्न 2.
निम्न में से कौन-सा नृत्य संतुलन और कलात्मक कौशल को दर्शाता है-
(अ) घूमर
(ब) भवाई
(स) कालबेलिया
(द) गैर
उत्तर:
(ब) भवाई
प्रश्न 3.
निम्न में से कौन-सा एक लोकसंगीत का प्रकार नहीं है-
(अ) पनिहारी
(ब) बधावा
(स) मांड
(द) भवाई
उत्तर:
(द) भवाई
प्रश्न 4.
औषधीय गुणों की रानी किसे कहा जाता है?
(अ) तुलसी
(ब) नीम
(स) अश्वगंधा
(द) आँवला
उत्तर:
(अ) तुलसी
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प्रश्न 5.
राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषतः घरों में वर्षा जल संग्रहण हेतु अग्र में से किसका निर्माण किया जाता है-
(अ) नाड़ी
(ब) बावड़ी
(स) जोहड़
(द) टांका
उत्तर:
(द) टांका
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. को प्राकृतिक एंटीबायोटिक के नाम से जाना जाता है।
उत्तर:
नीम
2. जड़ी-ब्लूटियों से ______ बनाई जाती हैं।
उत्तर:
दवाइयाँ
3. घूमर नृत्य विशेष रूप से ______ द्वारा किया जाता है।
उत्तर:
महिलाओं
4. पारंपरिक कथाओं को ______ के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।
उत्तर:
कठपुतलियों।
निम्नलिखित कथनों में से सत्य/असत्य बतलाइये-
1. राजस्थान एक शुष्क राज्य है।
उत्तर:
सत्य
2. बावड़ियाँ गहरी व सीढ़ीदार संरचनाएँ होती हैं।
उत्तर:
सत्य
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3. पारंपरिक चिकिल्सा पद्धतियों में समाज को जोड़ने और सहेजने की शक्ति होती हैं।
उत्तर:
असत्य।
4. श्रीगंगानगर, उदयपुर और भरतपुर की बावड़ियाँ अपनी सुंदरता और उपयोगिता के लिए प्रसिद्ध हैं।
उत्तर:
असत्य।
निम्नलिखित को सही सुमेलित कीजिए-
| सूची-I | सूची-II |
| 1. जोहड़ | (अ) छोटा जल भंडारण कुंड |
| 2. अश्वगंधा | (ब) तनाव कम करने में उपयोगी |
| 3. टांका | (स) एक छोटी झील |
| 4. नीम | (द) प्राकृतिक एंटीबायोटिक |
उत्तर:
| सूची-I | सूची-II |
| 1. जोहड़ | (स) एक छोटी झील |
| 2. अश्वगंधा | (ब) तनाव कम करने में उपयोगी |
| 3. टांका | (अ) छोटा जल भंडारण कुंड |
| 4. नीम | (द) प्राकृतिक एंटीबायोटिक |
अतिलघून्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
राजस्थान में कहाँ की बावड़ियाँ अपनी सुंदरता और उपयोगिता के लिए प्रसिद्ध हैं?
उत्तर:
जयपुर, जोधपुर और बूंदी की बावड़ियाँ।
प्रश्न 2.
राजस्थान में पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों को विकसित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
उत्तर:
राजस्थान एक शुष्क राज्य होने तथा यहाँ वर्षा कम होने के कारण।
प्रश्न 3.
किन्हीं तीन पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
- टांका
- बावड़ी
- जोहड़।
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प्रश्न 4.
पुराने समय से लोग किन औषधियों का उपयोग घरेलू उपचारों के रूप में करते आ रहे हैं?
उत्तर:
नीम, तुलसी, ग्वारपाठा, आँवला, अश्वगंधा इत्यादि।
प्रश्न 5.
आधुनिक समय में पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों का महत्त्व क्यों बढ़ गया है?
उत्तर:
बढ़ते जल संकट के कारण।
प्रश्न 6.
स्त्रियों द्वारा सिर पर मटकों को रखकर संतुलन बनाते हुए कौन-सा नृत्य किया जाता है?
उत्तर:
भवाई नृत्य।
प्रश्न 7.
राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई घरों में कौन-सी जल संरक्षण प्रणाली का उपयोग किया जाता है?
उत्तर:
टांका जल संरक्षण प्रणाली का।
प्रश्न 8.
कौन-सी पारंपरिक औषधि त्वचा और पेट संबंधी समस्याओं में लाभकारी हैं।
उत्तर:
ग्वारपाठा (ऐलोवेरा)।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
अध्याय के अनुसार हमारी क्या जिम्मेदारी है तथा किस प्रकार हम आत्मनिर्भर और समृद्ध समाज की ओर बढ़ सकते हैं?
उत्तर:
देशी औषधियों, जल संरक्षण और लोककला जैसी परंपराओं को संजोकर रखना हमारी जिम्मेदारी है। यदि हम अपनी परंपराओं को पहचानें और उनसे सीखें तो हम आत्मनिर्भर और समृद्ध समाज की ओर बढ़ सकते हैं।
प्रश्न 2.
बावड़ी से क्या आशय है तथा राजस्थान में किन स्थानों की बावड़ियाँ प्रसिद्ध हैं?
उत्तर:
बावड़ी राजस्थान राज्य में प्रचलित पारंपरिक जल संरक्षण की एक तकनीक है, जो गहरी व सीढ़ीदार संरचनायुक्त होती है। राजस्थान में जयपुर, जोधपुर और बूँदी की बावड़ियाँ अपनी सुंदरता और उपयोगिता के लिए प्रसिद्ध हैं।
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प्रश्न 3.
तुलसी को औषधीय गुणों की रानी क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
तुलसी को औषधीय गुणों की रानी इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह विभिन्न औषधीय गुणों से भरपूर है। यह सर्दी-खाँसी व जुकाम से संबंधित समस्याओं के इलाज में लाभकारी होती है तथा रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
दीर्घ उत्तरीय एवं निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
राजस्थान का लोकसंगीत यहाँ की संस्कृति का अभिन्न अंग है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लोकगीत, जिन्हें लोक संगीत भी कहा जाता है, राजस्थान की संस्कृति और जीवनशैली का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं। राजस्थान में लोकगायकों द्वारा मांड, पाबूजी की फड़, पनिहारी और बधावा जैसे गीत गाये जाते हैं, जिनमें प्रेम, वीरता और सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया जाता है।
प्रश्न 2.
आधुनिक समय में पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों का महत्त्व और क्यों बढ़ गया है? किसी एक जल संरक्षण तकनीक का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आधुनिक समय में बढ़ते जल संकट के कारण पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों का महत्त्व और बढ़ गया है। राज्य सरकार और विभिन्न संस्थाएँ जल-संरक्षण की पारंपरिक प्रणालियों को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही हैं।
जोहड़-यह एक छोटी झील होती है जो भूजल स्तर को बनाए रखने और वर्षा जल को संचित करने के लिए बनाई जाती है।
RBSE Class 5 EVS Chapter 16 Notes in Hindi म्हारो राजस्थान
- राजस्थान अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है।
- राजस्थान की सांस्कृतिक परंपराएँ इसकी लोककला, नृत्य, संगीत और त्योहारों में झलकती हैं।
- राजस्थान में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियाँ थी काफी लोकप्रिय हैं, जो प्राकृतिक औषधियों पर आधारित होती हैं। पुराने समय से लोग नीम, तुलसी, ग्वारपाठा, आँवला, अश्वगंधा आदि औषधियों का उपयोग घरेलू उपचारों के रूप में करते आ रहे हैं।
- राजस्थान एक शुष्क राज्य है, जहाँ वर्षा कम होती है और जल के स्रोत सीमित हैं, इसलिए पानी की कमी को देखते हुए यहाँ जल संरक्षण की अनूठी प्रणालियाँ विकसित हुई हैं; जैसे-बावड़ियाँ, तालाब, टांका, नाड़ी, जोहड़ आदि।
- राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, परंपरागत ज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग हमें सिखाता है कि हम अपने समाज और पर्यावरण को कैसे संतुलित रख सकते हैं।
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