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Class 5 Hindi Chapter 16 उत्सर्ग Question Answer
उत्सर्ग Question Answer
आओ बात करें-
प्रश्न 1.
महाराजा के सामने लकड़ी की समस्या क्यों आई? इसका उन्होंने क्या समाधान निकाला?
उत्तर:
महाराजा के सामने लकड़ी की समस्या इसलिए आई क्योंकि उनके महल के निर्माण और अन्य राजकार्य के लिए बहुत अधिक मात्रा में लकड़ी की आवश्यकता थी। आसपास के क्षेत्रों के जंगल पहले ही काटे जा चुके थे, जिससे लकड़ी की कमी हो गई थी।
समाधान के रूप में महाराज ने अपने कर्मचारियों को आदेश दिया कि वे खेजड़ली गाँव के पास के जंगलों से खेजड़ी के पेड़ काटें, क्योंकि वहाँ ये पेड़ बड़ी संख्या में थे।
प्रश्न 2.
अमृतादेवी और ग्रामवासियों के सामने क्या समस्या आई? क्या उसका कोई अन्य समाधान भी सम्भव था? विचार करके अपने साथियों को बताइए।
उत्तर:
अमृतादेवी और ग्रामवासियों के सामने समस्या यह्ठ थी कि राजा के सैनिक खेजड़ी के पेड़ काटने आए, जो उनके लिए पूज्य थे। वे पेड़ों को बचाने के लिए जान पर खेल गए। इसका एक अन्य समाधान यह हो सकता था कि वे पहले राजा से मिलकर शान्तिपूर्वक बात करके समाधान निकालते। संवाद और समझदारी से टकराव टाला जा सकता था।
प्रश्न 3.
अमृतादेवी जब खेजड़ी के पेड़ों को काटने से रोकने गई तो किस-किसने उसका साथ दिया?
उत्तर:
जब अमृतादेवी खेजड़ी के पेड़ों को काटने से रोकने गई, तो सबसे पहले उनकी तीन बेटियाँअणसी, रतनी और भानू ने उनका साथ दिया। बाद में गाँव के अन्य विश्नोई पुरुषों और महिलाओं ने भी पेड़ों की रक्षा के लिए साथ दिया और बलिदान दिया।
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प्रश्न 4.
यदि अमृतादेवी के स्थान पर आप होते तो क्या करते? चर्चा कीजिए।
उत्तर:
यदि अमृता देवी के स्थान पर मैं होता, तो पहले राजा से मिलकर शान्तिपूर्वक पेड़ों की महत्ता समझाने की कोशिश करता। यदि आवश्यक होता, तो पेड़ों की रक्षा के लिए आन्दोलन करता।
सोचो और लिखो-
1. बहुविकल्पीय प्रश्न-
(क) जोधपुर के महाराजा को लकड़ी की आवश्यकता क्यों पड़ी?
(अ) रसोईघर के लिए
(ब) महल के निर्माण के लिए
(स) आय के लिए
(द) जंगल की सफाई के लिए
उत्तर:
(ब) महल के निर्माण के लिए
(ख) खेजड़ली गाँव में कितने वृक्ष प्रेमियों ने अपने प्राणों की आहुति दी?
(अ) 265
(ब) 363
(स) 463
(द) 263
उत्तर:
(ब) 363
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए
(क) खेजड़ली गाँव की भौगोलिक स्थिति कैसी थी?
उत्तर:
खेजड़ली गाँव जोधपुर से 8 कोस पूर्व दिशा में स्वर्णिम रेतीले धोरों से घिरा एक छोटा सा रमणीक गाँव था। जहाँ शुष्कता होने के कारण हरियाली बहुत कम थी। वहाँ खेजड़ी के पेड़ ही जीवन और पर्यावरण का मुख्य सहारा था।
(ख) अमृतादेवी के आह्वान पर कितने लोगों ने बलिदान दिया?
उत्तर:
अमृतादेवी के आह्वान पर कुल 363 विश्नोई समाज के पुरुषों और महिलाओं ने पेड़ों की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।
(ग) खेजड़ली बलिदान की घटना का जब राजा को पता चला तो उन्होंने क्या निर्णय लिया?
उत्तर:
खेजड़ली बलिदान की घटना का जब राजा को पता चला, तो वे बहुत दुःखी और पश्चाताप से भर गए। उन्होंने तुरन्त पेड़ों की कटाई रुकवा दी और भविष्य में विश्नोई समाज के इलाके में पेड़ नहीं काटने का आदेश दिया।
(घ) वर्तमान में पर्यावरण प्रदूषण की स्थिति पर विचार करते हुए पर्यावरण प्रदूषण से बचने के उपायों पर एक अनुच्छेद लिखिए।
उत्तर:
वर्तमान में पर्यावरण प्रदूषण एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। पर्यावरण प्रदूषण में वायु, जल, ध्वनि, भूमि आदि प्रदूषणों को शामिल किया जाता है। उद्योगों, कृषि गतिविधियों, परिवहन आदि से निकलने वाले प्रदूषक तत्त्व प्रर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुँच रहे हैं।
पर्यावरण प्रदूषण से बचने के उपाय-
- अधिक से अधिक संख्या में पेड़ लगाना।
- नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों (सौर, पवन आदि) को अपनाना।
- पर्यावरण संरक्षण करना तथा इसके प्रति लोगों को जागरूक करना।
- औद्योगिक कचरे और कृषि अपशिष्ट के पुनर्चक्रण की व्यवस्था करना।
(ङ) आपको कहानी का सबसे रोचक हिस्सा कौनसा लगा और क्यों?
उत्तर:
कहानी का सबसे रोचक हिस्सा अमृता देवी का पेड़ों से लिपटकर बलिदान देना लगा, क्योंकि यह साहस, आस्था और पर्यावरण प्रेम का अद्भुत उदाहरण है।
(च) महाराजा के सामने लकड़ी की समस्या क्यों आई? इसका उन्होंने क्या समाधान निकाला?
उत्तर:
[नोट-इसके लिए ‘आओ बात करें’ शीर्षक में प्रश्न संख्या 1 का उत्तर देखें।]
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(छ) अमृतादेवी और ग्रामवासियों के सामने क्या समस्या आई? क्या उसका कोई अन्य समाधान भी संभव था? विचार करके लिखो।
उत्तर:
[नोट-इसके लिए ‘आओ बात करें’ शीर्षक में प्रश्न संख्या 2 का उत्तर देखें।]
रचनात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
आपने जो कहानी पढ़ी है उसका नाम लेखक ने ‘उत्सर्ग’ रखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि लेखक ने इस कहानी का यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।
प्रश्न 2.
यदि आपको इस कहानी का कोई अन्य नाम देना हो तो आप क्या नाम देंगे? तर्क सहित उत्तर लिखो।
प्रश्न 3.
नीचे कहानी की एक पंक्ति दी गई है। इसे ध्यान से पढ़िए और विचार कीजिए। आपको इसका क्या अर्थ समझ आया? अपने विचार समूह में साझा कीजिए और अपनी अभ्यास-पुस्तिका में लिखिए। “जीव दया पालणी, रूख लीलौ नहीं घावै।”
प्रश्न 4.
कहानी का सबसे रोचक हिस्सा आपको कौनसा लगा और क्यों?
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर विद्यार्थी स्वयं दीजिए।
भाषा की बात-
1. मिलान कीजिए-
नीचे कुछ विपरीतार्थक शब्द दिए गए हैं लेकिन वे आमने-सामने नहीं हैं। रेखाएँ खींचकर विपरीतार्थक शब्दों के जोड़े बनाइए-

उत्तर:

2. मुहावरे
राजपूताना की धरती पर खून की नदियाँ बहने लगीं रेखांकित वाक्य में एक प्रसिद्ध मुहावरे का प्रयोग किया गया है जिसका अर्थ है नरसंहार करना। मुहावरे के प्रयोग से भाषा में सरलता, प्रवाहमयता उत्पन्न होती है एवं भाषा जीवंत और प्रभावशाली भी बन जाती है।
कहानी में आए मुहावरों को छाँटकर उनके अर्थ लिखते हुए वाक्य में प्रयोग करें।
उत्तर:
1. आह निकलना-किसी गहरी पीड़ा से दुखी होना।
वाक्य प्रयोग-अहमदाबाद में हवाई जहाज दुर्घटना के बारे में सुनते ही लोगों की आह निकली।
2. गाँव उजाड़ होना-गाँव का वीरान होना।
वाक्य प्रयोग-बिहार में बाढ़ आने से मेरे दोस्त का गाँव उजड़ गया।
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3. सहम जाना-डर जाना।
वाक्य प्रयोग-पड़ोस में आग लगते ही मौहल्लेवासी सहम गये।
4. सिर कटवाना-बलिदान करना।
वाक्य प्रयोग-स्वतंत्रता संग्राम में अनेक देशभक्तों ने सिर कटवाये।
3. देशज शब्द-
अमृता आँगन में दही का बिलौना कर रही थी। इस पंक्ति में रेखांकित शब्द को देशज शब्द कहते हैं अर्थात् जो शब्द देश की क्षेत्रीय भाषा और बोलियों से संबंधित होते हैं और वे हिन्दी में प्रयोग किए जा रहे हैं उन्हें देशज शब्द कहते हैं। पाठ में आए देशज शब्दों की सूची बनाकर लिखिए।
उत्तर:
पाठ में आए देशज शब्द-
- धोरे
- खेजड़ली
- उजाड़
- पालणी
- टीले
- रुख
- करोड़ों इत्यादि।
4. विराम चिह्न-
नीचे दिए गए गद्यांश से विराम चिह्न हटा दिए गए हैं। आप पुनः उपयुक्त विराम चिह्न लगाकर लिखिए-
मयंक और काजल स्कूल जा रहे थे तभी काजल का पैर कीचड़ से भरे गड्ढे में गया और काजल गिर पड़ी मयंक बोला अरे ये क्या हुआ काजल कराहते हुए उठी और बोली मैं तो सामने झाड़ी पर बैठी तितली देखने लगी और पता ही नहीं चला कि कब गड्ढा आया और गिर पड़ी सारे कपड़े ही खराब हो गए मयंक ने कहा चलो अब पहले इस गड्ढे को मिट्टी से भर देते हैं नहीं तो कोई और भी गिर सकता है दोनों दोस्त मिलकर गड्ढे को भर देते हैं
उत्तर:
मयंक और काजल स्कूल जा रहे थे, तभी काजल का पैर कीचड़ से भरे गड्ढे में गया और काजल गिर पड़ी। मयंक बोला, “अरे! ये क्या हुआ?” काजल कराहते हुए उठी और बोली, “मैं तो सामने झाड़ी पर बैठी तितली देखने लगी और पता ही नहीं चला कि कब गड्ढा आया और गिर पड़ी। सारे कपड़े ही खराब हो गए।” मयंक ने कहा, ” चलो अब पहले इस गड्ढे को मिट्टी से भर देते हैं, नहीं तो कोई और भी गिर सकता है।” दोनों दोस्त मिलकर गड्ढे को भर देते हैं।
उत्सर्ग प्रश्न उत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
खेजड़ली ग्राम किस राज्य में स्थित है?
(अ) उत्तरप्रदेश
(ब) राजस्थान
(स) गुजरात
(द) मध्यप्रदेश
उत्तर:
(ब) राजस्थान
प्रश्न 2.
अमृतादेवी किस समुदाय से सम्बन्धित थी?
(अ) जाट
(ब) राजपूत
(स) विश्नोई
(द) मारवाड़ी
उत्तर:
(स) विश्नोई
प्रश्न 3.
खेजड़ली बलिदान में कितने लोगों ने प्राणों की आहुति दी?
(अ) 173
(ब) 300
(स) 363
(द) 400
उत्तर:
(स) 363
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प्रश्न 4.
अमृता देवी ने पेड़ों को बचाने के लिए क्या किया?
(अ) राजा से निवेदन किया
(ब) पेड़ों से लिपट गई
(स) गाँव छोड़ दिया
(द) अदालत में केस किया
उत्तर:
(ब) पेड़ों से लिपट गई
प्रश्न 5.
अमृता देवी की कितनी बेटियों ने उनका साथ दिया?
(अ) दो
(ब) चार
(स) तीन
(द) एक
उत्तर:
(स) तीन
प्रश्न 6.
खेजड़ी का वृक्ष विश्नोई समाज के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
(अ) यह फलदार होता है
(ब) इससे आय होती है
(स) यह आस्था और जीवन से जुड़ा है
(द) यह छाया देता है
उत्तर:
(स) यह आस्था और जीवन से जुड़ा है
प्रश्न 7.
खेजड़ली बलिदान की घटना किस वर्ष हुई थी?
(अ) 1800
(ब) 1730
(स) 1750
(द) 1857
उत्तर:
(ब) 1730
प्रश्न 8.
राजा को जब बलिदान की जानकारी मिली तो उन्होंने क्या किया?
(अ) सैनिकों को दण्डित किया
(ब) जंगल जलवा दिए
(स) पेड़ों की कटाई रुकवा दी
(द) विश्नोई समाज से क्षमा माँगी
उत्तर:
(स) पेड़ों की कटाई रुकवा दी
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. खेजड़ली गाँव _________ राज्य में स्थित है।
उत्तर: राजस्थान
2. _________ समाज पेड़-पौधों और जीवों की रक्षा के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर: विश्नोई
3. _________ गाँव में पेड़ों की कटाई का विरोध किया गया।
उत्तर: खेजड़ली
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4. विश्नोई समाज ने _________ को बचाने के लिए जान की बाजी लगाई।
उत्तर: पेड़ों।
निम्नलिखित कथनों में से सत्य/असत्य बतलाइये-
1. खेजड़ली गाँव उत्तरप्रदेश में स्थित है।
उत्तर:
असत्य
2. खेजड़ली का पेड़ विश्नोई समाज के लिए पूज्य माना जाता है।
उत्तर:
सत्य।
3. राजा ने बलिदान के बाद भी पेड़ों की कटाई जारी रखी।
उत्तर:
असत्य
4. अमृता देवी विश्नोई समाज से थी।
उत्तर:
सत्य।
निम्नलिखित को सही सुमेलित कीजिए-
| खण्ड ‘अ’ | खण्ड ‘ब’ |
| 1. अमृता देवी | (क) पर्यावरण प्रेमी समुदाय |
| 2. विश्नोई समाज | (ख) राजस्थान में स्थित |
| 3. खेजड़ली गाँव | (ग) बलिदान देने वाले |
| 4. 363 लोग | (घ) पेड़ों की रक्षा के लिए |
उत्तर:
| खण्ड ‘अ’ | खण्ड ‘ब’ |
| 1. अमृता देवी | (घ) पेड़ों की रक्षा के लिए |
| 2. विश्नोई समाज | (क) पर्यावरण प्रेमी समुदाय |
| 3. खेजड़ली गाँव | (ख) राजस्थान में स्थित |
| 4. 363 लोग | (ग) बलिदान देने वाले |
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
खेजड़ी का पेड़ किस प्रकार का होता है?
उत्तर:
शुष्क भूमि में उगने वाला जीवनदायी वृक्ष।
प्रश्न 2.
राजा ने पेड़ों को क्यों कटवाना चाहा?
उत्तर:
महल निर्माण के लिए लकड़ी जुटाने हेतु।
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प्रश्न 3.
खेजड़ली बलिदान का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
लोगों में पेड़ संरक्षण की जागरूकता बढ़ी।
प्रश्न 4.
अमृता देवी ने पेड़ काटने वालों को क्या चेतावनी दी थी?
उत्तर:
पहले हमें काटो, फिर पेड़।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
खेजड़ली गाँव की घटना क्या थी?
उत्तर:
खेजड़ली गाँव में 1730 ई. में अमृता देवी और विश्नोई समाज के 363 लोगों ने पेड़ों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। यह पर्यावरण संरक्षण का पहला बड़ा जनांदोलन माना जाता है। इस घटना ने पूरे देश को प्रकृति प्रेम की प्रेरणा दी।
प्रश्न 2.
अमृतादेवी ने क्या साहसिक कार्य किया?
उत्तर:
जब सैनिक पेड़ काटने आए, तो अमृतादेवी खेजड़ी के पेड़ों से लिपट गईं। उन्होंने कहा “पेड़ काटने से पहले मुझे काटो।” उनकी बेटियाँ और अन्य ग्रामीणों ने भी साथ देकर बलिदान दिया।
प्रश्न 3.
खेजड़ली की घटना का आज क्या महत्त्व है?
उत्तर:
यह घटना पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बन चुकी है। हर साल इसे ” विश्व वृक्ष दिवस” की तरह याद किया जाता है। यह हमें सिखाती है कि प्रकृति के लिए बलिदान देना महान कार्य है।
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प्रश्न 4.
खेजड़ी वृक्ष के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
खेजड़ी वृक्ष गर्म और शुष्क जलवायु में भी हरा रहता है। खेजड़ी का पेड़ रेगिस्तानी क्षेत्र में जीवनदाता माना जाता है। यह पशुओं के लिए चारा, लकड़ी और छाया देता है। इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी बनी रहती है। विश्नोई समाज इसे पूज्य मानकर उसकी रक्षा करता है।
दीर्घउत्तरीय एवं निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
खेजड़ली की घटना से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर:
खेजड़ली की घटना से हमें अग्र सीख मिलती है-
- प्रकृति की रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।
- अमृता देवी और विश्नोई समाज ने निःस्वार्थ भाव से पर्यावरण के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए। यह बलिदान आज भी हमें प्रेरणा देता है कि हम पेड़ों, जल और जीवों की रक्षा करें।
- इससे यह पता चलता है कि जनसाहस से बड़ा बदलाव सम्भव है। खेजड़ली गाँव का बलिदान और साहस आज भी पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बना हुआ है। हमें भी साहस, प्रेम और समर्पण से प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए।
प्रश्न 2.
विश्नोई समाज का पर्यावरण के प्रति व्यवहार हमें क्या सिखाता है?
उत्तर:
विश्नोई समाज का प्रत्येक व्यक्ति पेड़ों, पशुओं और प्रकृति से गहराई से जुड़ा होता है। वे न तो पेड़ काटते हैं और न ही जीवों को नुकसान पहुँचाते हैं। उनके नियमों में प्रकृति और जीवजन्तुओं की रक्षा को प्रमुख स्थान दिया गया है। यह समाज हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ संतुलन में जीना ही असली मानवता है। उनका जीवन आदर्श है कि बिना किसी स्वार्थ के भी पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है। उसके प्रति प्रेम और सम्मान का भाव होना चाहिए।
पठित गद्यांश
निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
1. अमृता देवी ने अपने पति रामोजी का आह्वान करते हुए कहा, ” हमें चलना होगा। हमें जांभोजी द्वारा बताए गए नियम ‘जीव दया पालणी, रूंख लीलो नहीं घावै’ का पालन करना है।” बिलौना छोड़कर अमृता और उनके पीछे रामोजी, भागू, अणसी तथा रतनी जंगल की तरफ दौड़ पड़े। इसकी सूचना खेजड़ली ग्राम तथा आसपास के गाँवों में भी तेजी से फैल गई तथा आसपास के प्रकृति प्रेमी विश्नोई पंथ के अनुयायियों ने भी खेजड़ली पहुँचने का प्रण कर लिया और जो जहाँ था वहाँ से खेजड़ली की ओर दौड़ पड़ा।
प्रश्न 1.
अमृता ने किसका आह्वान किया?
उत्तर:
अमृता ने अपने पति रामोजी का आह्वान किया।
प्रश्न 2.
जांभोजी का नियम क्या था?
उत्तर:
जांभोजी द्वारा बताया गया नियम है-“जीव दया पालणी, रूंख लीलो नहीं घावै” का पालन करना।
प्रश्न 3.
जंगल की तरफ कौन-कौन गया?
उत्तर:
जंगल की तरफ अमृता, रामोजी, भागू, अणसी तथा रतनी आदि गये।
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प्रश्न 4.
किसके अनुयायियों ने खेजड़ली पहुंचने का प्रण लिया?
उत्तर:
विश्नोई पंथ के अनुयायियों ने खेजड़ली पहुँचने का प्रण लिया।
2. “ये खेजड़ी हमारी माँ है, हम सिर कटवा लेंगे, परन्तु पेड़ नहीं कटने देंगे।” अमृता देवी अपनी पुत्रियों और पति सहित पेड़ों से लिपट गई और सिपाहियों को ललकारा ” खेजड़ी से पहले मेरी गर्दन पर वार करना होगा अन्यथा ये खेजड़ी नहीं कटेगी।” सैनिकों ने सबसे पहला वार अमृता की गर्दन पर किया और देखते ही देखते रामोजी, भागू, अणसी और रतनी ने अपने बलिदान की गाथा लिख दी। रेगिस्तान की स्वर्णमयी धरती रक्त की धारा से लाल हो गई। अमृता के बलिदान से प्रेरित होकर उपस्थित नर-नारियों ने हरी-भरी खेजड़ियों को अपने गले लगाकर सर्वोच्च बलिदान का वरण किया। शक्ति, शौर्य और शांति के लिए विख्यात मरुधरा पर एक के बाद एक 363 वृक्षप्रेमियों ने पेड़ों से लिपटकर अपने प्राणों की आहुति दे दी।
प्रश्न 1.
‘खेजड़ी से पहले मेरी गर्दन पर वार करना होगा।’ यह पंक्ति किसने कही थी?
उत्तर:
यह पंक्ति अमृता देवी ने कही थी।
प्रश्न 2.
रक्त की धारा से कौन लाल हो गयी?
उत्तर:
रक्त की धारा से रेगिस्तान की स्वर्णमयी धरती लाल हो गई।
प्रश्न 3.
मरुधरा क्यों विख्यात है?
उत्तर:
मरुधरा शक्ति, शौर्य और शान्ति के लिए विख्यात है।
प्रश्न 4.
कितने वृक्ष प्रेमियों ने पेड़ों से चिपक कर अपने प्राणों की आहुति दी?
उत्तर:
363 वृक्ष प्रेमियों ने पेड़ों से चिपक कर अपने प्राणों की आहुति दी।
उत्सर्ग Summary in Hindi

यह अध्याय राजस्थान के जोधपुर जिले के खेजड़ली गाँव में घटित एक ऐतिहासिक घटना पर आधारित है, जिसमें प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए विश्नोई समुदाय के लोगों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया।
सन् 1730 में जोधपुर के महाराजा के आदेश पर सैनिकों को गाँव में पेड़ काटने भेजा गया था ताकि महल के निर्माण के लिए लकड़ी जुटाई जा सके। जब यह बात अमृता देवी नामक विश्नोई महिला को पता चली, तो उन्होंने पेड़ों की रक्षा के लिए पेड़ से लिपटकर अपना बलिदान दे दिया।
उनके साथ उनके पति, उनकी तीन बेटियाँ और बाद में 363 अन्य विश्नोई पुरुषों और महिलाओं ने भी प्राणों की आहुति दी। यह बलिदान पर्यावरण संरक्षण के इतिहास में एक अमिट उदाहरण बन गया।
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कठिन शब्दार्थ – उत्सर्ग = बलिदान, समर्पण। संवेदनशील = भावुक या भावनाओं को समझने वाला। प्राणों की आहुति = जीवन का बलिदान देना। संरक्षण = रक्षा करना, सुरक्षित रखना। अमिट = जिसे मिटाया न जा सके, स्थायी। प्रेरणा = उत्साह या हिम्मत देने वाली भावना। धरोहर = विरासत। सद्भावना = अच्छा भाव या भावना। रमणीय = अच्छा लगने वाला। निर्भिक = निडर। कलरव = पक्षियों के बोलने की आवाज। उद्यत = तैयार। शोक = दु:ख। गाथा = कहानी, गाथा। मद्धम = धीमी। पालणी = पालन करना। लीलो = हरा। घावै = काटना। आवती = आती हुई। करडो = बहुत सारा। कोड = प्रेम। रुख = वृक्ष। राखस्यां = रखेंगे। होड़ = मुकाबला। थूहांसू = आपसे।
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