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जलाते चलो Class 6 Question Answer
जलाते चलो Question Answer Class 6
Class 6 Hindi Chapter 7 जलाते चलो Question Answer
मेरी समझ से –
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए –
(1) निम्नलिखित में से कौन-सी बात इस कविता में मुख्य रूप से कही गई है?
(अ) भलाई के कार्य करते रहना
(ब) दीपावली के दीपक जलाना
(स) बल्ब आदि जलाकर अंधकार दूर करना
(द) तिमिर मिलने तक नाव चलाते रहना
उत्तर:
(अ) भलाई के कार्य करते रहना
(2) “जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी” यह वाक्य किससे कहा गया है?
(अ) तूफ़ान से
(ब) मनुष्यों से
(स) दीपकों से
(द) तिमिर से
उत्तर:
(ब) मनुष्यों से
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(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
- इस कविता में मुख्य रूप से प्रेम रूपी दीपक जलाने की बात कही गई है। वह तब ही जल सकता है। जब हम एक-दूसरे की भलाई करेंगे एवं सहयोग करेंगे।
- दीपक जलाकर अंधकार से लड़ने की चुनौती मनुष्य ही स्वीकार करते हैं। इसलिए ‘तुम्हीं’ शब्द मनुष्यों के लिए प्रयुक्त हुआ है।
मिलकर करें मिलान-
कविता में से चुनकर कुछ शब्द यहाँ दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

उत्तर:

पंक्तियों पर चर्चा –
[नोट – इसके उत्तर के लिए विद्यार्थी पाठ की सप्रसंग व्याख्या देखें।]
सोच-विचार के लिए-
कविता को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-
(क) कविता में अँधेरे या तिमिर के लिए किन वस्तुओं के उदाहरण दिए गए हैं?
उत्तर:
कविता में अंधेरे या तिमिर के लिए सरिता, शिला, तूफान आदि वस्तुओं के उदाहरण दिये गये हैं।
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(ख) यह कविता आशा और उत्साह जगाने वाली कविता है। इसमें क्या आशा की गई है? यह आशा क्यों की गई है?
उत्तर:
‘जलाते चलो’ कविता आशा और उत्साह जगाने वाली कविता है। इसमें प्रेम भावना एवं आपसी सहयोग की आशा की गई है। क्योंकि प्रेम एवं सहयोग रखने से निराशा रूपी अन्धकार समाप्त हो जाता है।
(ग) कविता में किसे जलाने और किसे बुझाने की बात कही गई है?
उत्तर:
कविता में कवि ने प्रेम रूपी दीपक निरन्तर जलाते रहने एवं विद्युत बल्ब अर्थात् दिखावे की प्रवृत्ति को बुझाने की बात कही है।
मिलान-
स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलते- जुलते भाव वाली पंक्तियों को रेखा खींचकर जोड़िए-

उत्तर:

शब्दों के रूप-
“कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा – सी” ‘अमावस’ का अर्थ है ‘अमावस्या’। इन दोनों शब्दों का अर्थ तो समान है लेकिन इनके लिखने-बोलने में थोड़ा-सा अंतर है। ऐसे ही कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इनसे मिलते-जुलते दूसरे शब्द कविता से खोजकर लिखिए। ऐसे ही कुछ अन्य शब्द आपस में चर्चा करके खोजिए और लिखिए।
उत्तर:
1. दिया – दीपक
2. उजेला – उजाला
3. अनगिन – अनगिनत
4. पूर्णिमा – सी – पूर्णमासी
5. सरित – सरिता
6. नाव – नौका
अर्थ की बात-
(क) [नोट – विद्यार्थी कक्षा में स्वयं चर्चा करें।]
(ख) कविता में प्रत्येक शब्द का अपना विशेष महत्त्व होता है। यदि वे शब्द बदल दिए जाएँ तो कविता का अर्थ भी बदल सकता है और उसकी सुंदरता में भी अंतर आ सकता है।
नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। पंक्तियों के सामने लगभग समान अर्थों वाले कुछ शब्द दिए गए हैं। आप उनमें से वह शब्द चुनिए, जो उस पंक्ति में सबसे उपयुक्त रहेगा-
1. बहाते चलो ………………………. तुम वह निरंतर (नैया, नाव, नौका)
कभी तो तिमिर का ………………………. मिलेगा॥ (तट, तीर, किनारा)
उत्तर:
नाव, किनारा
2. रहेगा ………………………. पर दिया एक भी यदि (धरा, धरती, भूमि)
कभी तो निशा को ………………………. मिलेगा॥ (प्रात:, सुबह सवेरा)
उत्तर:
धरा, सवेरा
3. जला दीप पहला तुम्हीं ने ………………………. की (अंधकार, तिमिर, अँधेरे)
चुनौती ………………………. बार स्वीकार की थी। (प्रथम, अव्वल, पहली)
उत्तर:
तिमिर, प्रथम
प्रतीक-
(क) “कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा”
निशा का अर्थ है – रात।
सवेरा का अर्थ है – सुबह।
आपने अनुभव किया होगा कि कविता में इन दोनों शब्दों का प्रयोग ‘रात’ और ‘सुबह’ के लिए नहीं किया गया है। अपने समूह में चर्चा करके पता लगाइए कि ‘निशा’ और ‘सवेरा’ का इस कविता में क्या-क्या अर्थ हो सकता है।
(संकेत- निशा से जुड़ा है ‘अँधेरा’ और सवेरे से जुड़ा है ‘उजाला’)
उत्तर:
दुख-सुख, उत्थान-पतन, अवनति उन्नति, बुराई- अच्छाई।
(ख) कविता में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में मिलकर इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें उपयुक्त स्थान पर लिखिए।

उत्तर:
सवेरा – दिये, पूर्णिमा, दिवस, नाव, किनारा, ज्योति, उजेला, लौ, स्वर्ण, जलना।
निशा – अँधेरा, अमावस, तिमिर, शिला, तूफान, बुझना।
पंक्ति से पंक्ति-
“जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की
चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी”
कविता की इस पंक्ति को वाक्य के रूप में इस प्रकार लिख सकते हैं-
“तुम्हीं ने पहला दीप जला तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी।”
अब नीचे दी गई पंक्तियों को इसी प्रकार वाक्यों के रूप में लिखिए-
1. बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर।
2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर भर।
3. बुझाओ इन्हें यों न पथ मिल सकेगा।
4. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।
उत्तर:
1. तुम वह नाव निरन्तर बहाते चलो।
2. ये दिये स्नेह भर-भर जलाते चलो।
3. इन्हें बुझाओ, पथ यों न मिल सकेगा।
4. मगर विश्व पर आज दिवस ही में अमावस निशा-सी क्यों घिरी आ रही है।
सा/ सी / से का प्रयोग-
“घिरी आ रही है अमावस निशा-सी
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी”
इन पंक्तियों में कुछ शब्दों के नीचे रेखा खिंची है। इसमें ‘सी’ शब्द पर ध्यान दीजिए। यहाँ ‘सी’ शब्द समानता दिखाने के लिए प्रयोग किया गया है। ‘सा/ सी/ से’ का प्रयोग जब समानता दिखाने के लिए किया जाता है तो इनसे पहले योजक चिह्न (-) का प्रयोग किया जाता है।
अब आप भी विभिन्न शब्दों के साथ ‘सा / सी / से’ का प्रयोग करते हुए अपनी कल्पना से पाँच वाक्य अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:
1. मुख मयंक – सा खिल गया।
2. खिड़की से पंखे-सी हवा आ रही है।
3. आज चंद्रमा बिल्कुल गोल-सा है।
4. मुझे चौकोर – सी आकृति बनानी है।
5. बल्ब सूर्य- -सा चमकता है।
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पाठ से आगे-
अमावस्या और पूर्णिमा-
नीचे दिए गए चित्र में अमावस्या, पूर्णिमा, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को पहचानिए और ये नाम उपयुक्त स्थानों पर लिखिए-
(यदि पहचानने में कठिनाई हो तो आप अपने शिक्षक, परिजनों या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।)

उत्तर:

तिथिपत्र-
आपने तिथिपत्र (कैलेंडर) अवश्य देखा होगा। उसमें साल के सभी महीनों की तिथियों की जानकारी दी जाती है। नीचे तिथिपत्र के एक महीने का पृष्ठ दिया गया है। इसे ध्यान से देखिए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(क) दिए गए महीने में कुल कितने दिन हैं?
(ख) पूर्णिमा और अमावस्या किस दिनाँक और वार को पड़ रही है?
(ग) कृष्ण पक्ष की सप्तमी और शुक्ल पक्ष की सप्तमी में कितने दिनों का अंतर है?
(घ) इस महीने में कृष्ण पक्ष में कुल कितने दिन हैं?
(ङ) ‘वसंत पंचमी’ की तिथि बताइए।
उत्तर:
(क) दिए गये महीने में 31 दिन हैं।
(ख) पूर्णिमा 6 जनवरी, शुक्रवार एवं अमावस्या 21 जनवरी, शनिवार को पड़ रही है।
(ग) दोनों सप्तमियों के मध्य 14 दिन का अन्तर है (घ) इस महीने के कृष्ण पक्ष में कुल 14 दिन हैं।
(ङ) वसंत पंचमी की तिथि 26 जनवरी, गुरुवार की है।
आज की पहेली-
समय साक्षी है कि जलते हुए दीप
अनगिन तुम्हारे पवन ने बुझाए।
‘पवन’ शब्द का अर्थ है हवा।
नीचे एक अक्षर-जाल दिया गया है। इसमें ‘पवन’ के लिए उपयोग किए जाने वाले अलग-अलग नाम या शब्द छिपे हैं। आपको उन्हें खोजकर उन पर घेरा बनाना है, जैसा एक हमने पहले से बना दिया है। देखते हैं, आप कितने सही नाम या शब्द खोज पाते हैं।

उत्तर:

Class 6 जलाते चलो Question Answer
बहुविकल्पात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
कैसे दीये जलाने के बारे में कहा गया है?
(अ) स्नेह के दीये
(ब) मिट्टी के दीये
(स) रोशनी के दीये
(द) विज्ञान के दीये
उत्तर:
(अ) स्नेह के दीये
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प्रश्न 2.
शक्ति किसमें निहित होती है?
(अ) धन में
(ब) ज्ञान में
(स) विज्ञान में
(द) परिश्रम में
उत्तर:
(स) विज्ञान में
प्रश्न 3.
विज्ञान की शक्ति से अमावस्या भी किसके समान हो गई?
(अ) निशा के समान
(ब) रात्रि के समान
(स) अँधेरे के समान
(द) पूर्णिमा के समान
उत्तर:
(द) पूर्णिमा के समान
प्रश्न 4.
कौनसे दीप बुझाने के लिए कहा गया है?
(अ) स्नेह दीप
(ब) विद्युत दीप
(स) ज्योति दीप
(द) विज्ञान दीप
उत्तर:
(ब) विद्युत दीप
प्रश्न 5.
तिमिर को समाप्त करने के लिए चुनौती किसने स्वीकार की?
(अ) मनुष्यों ने
(ब) देवताओं ने
(स) दानवों ने
(द) तूफान ने
उत्तर:
(अ) मनुष्यों ने
प्रश्न 6.
‘तिमिर की सरित पार करने’ रेखांकित पद का क्या अर्थ है?
(अ) खुशी
(ब) अंधकार
(स) उजाला
(द) विकास
उत्तर:
(ब) अंधकार
प्रश्न 7.
युग-युग से तिमिर को किसकी उपमा दी गई है?
(अ) नाव की
(ब) अमावस की
(स) शिला की
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(स) शिला की
प्रश्न 8.
जलते हुए दीपकों को कौन बुझाता है?
(अ) पवन
(ब) मनुष्य
(स) तिमिर
(द) सरिता
उत्तर:
(अ) पवन
प्रश्न 9.
दीये और तूफान की युगों से क्या चलती आ रही है?
(अ) कविता
(ब) कहानी
(स) विरोध
(द) सम्बन्ध
उत्तर:
(ब) कहानी
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प्रश्न 10.
कवि निशा में क्या लाना चाहता है?
(अ) सवेरा
(ब) प्रात:काल
(स) सूर्योदय
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी
रिक्त स्थानों की पूर्ति –
प्रश्न 11.
रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित शब्द से कीजिए-
(i) कभी तो ……………………. का अंधेरा मिटेगा। (हमारा / धरा)
उत्तर:
धरा
(ii) तुम्हीं ने बना ……………………. की नाव तैयार की थी। (दीप / प्रेम)
उत्तर:
दीप
(iii) कभी तो तिमिर का ……………………. मिलेगा। (किनारा / सहारा)
उत्तर:
किनारा
(iv) दीप अनगिन तुम्हारे ……………………. ने बुझाए। (तूफान / पवन)
उत्तर:
पवन
(v) मगर बुझ स्वयं ……………………. जो दे गए। (ज्योति / उजेला)
उत्तर:
ज्योति
(vi) धरा पर दिया ……………………. भी यदि रहेगा (अनेक / एक)
उत्तर:
एक
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न –
प्रश्न 12.
अमावस भी पूर्णिमा सी किसमें निहित होती है?
उत्तर:
अमावस भी पूर्णिमा सी विज्ञान की शक्ति में निहित होती है।
प्रश्न 13.
आजकल दिवस कैसे प्रतीत हो रहा है?
उत्तर:
आजकल दिवस ऐसे घिरा होता है मानो अमावस्या की रात्रि हो। अर्थात् अंधकारयुक्त प्रतीत हो रहा है।
प्रश्न 14.
मनुष्यों ने किसकी चुनौती को स्वीकार किया है?
उत्तर:
मनुष्यों ने अंधकार (तिमिर) को समाप्त करने की चुनौती को स्वीकार कर प्रेम का दीप जलाया है।
प्रश्न 15.
तिमिर की सरित को पार करने के लिए मानव ने किसका निर्माण किया था?
उत्तर:
तिमिर की सरित को पार करने के लिए मानव ने दीपकों की नाव का निर्माण किया था।
प्रश्न 16.
हमारे अनगिनत जलते हुए दीपकों को किसने बुझाया है?
उत्तर:
हमारे जलते हुए अनगिनत दीपकों को पवन (हवा) ने ‘बुझाया है।
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प्रश्न 17.
धरा पर एक भी दीपक जलता हुआ रह गया तो क्या परिणाम निकलेगा?
उत्तर:
धरा पर एक भी दीपक जलता रहा तो कभी न कभी निशा को सवेरा मिलेगा।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 18.
‘कभी तो तिमिर को किनारा मिलेगा’ कवि ने ऐसा क्यों कहा है?
उत्तर:
कवि ने कहा है कि मनुष्य ने ही अंधकार को दूर करने की चुनौती स्वीकार की है। इस अंधकार रूपी नदी को पार करने के लिए उसने प्रेम के दीपकों की नाव बनाई थी। इसलिए कभी तो प्रेम के दीपकों से आपकी नाव किनारे पर पहुँचेगी अर्थात् किनारा मिलेगा।
प्रश्न 19.
‘दीप अनगिन तुम्हारे पवन ने बुझाए’ पंक्ति के भाव को समझाइए।
उत्तर:
कवि कहते हैं कि हे मनुष्यों आपने चट्टान रूपी अंधकार की कठोरता को समाप्त करने के लिए अनन्त प्रेम व कोमलता के दीप प्रज्वलित किए हैं। किन्तु तेज हवाओं ने उन्हें बुझा दिया है। अत: तुम प्रेम व कोमलता के दीप निरन्तर जलाते रहो।
प्रश्न 20.
‘उसी से तिमिर को उजाला मिलेगा’ पंक्ति से क्या प्रेरणा दी गई है?
उत्तर:
अज्ञानता रूपी अंधकार की चट्टान को समाप्त करने के लिए लोगों ने अनेक दीपक जलाए परन्तु उन्हें हवा रूपी तूफान ने बुझा दिया। इस प्रकार, लोगों ने प्रेम दीप जलाकर आत्म बलिदान किया। उन्हीं की प्रेरणा से हमें विषम परिस्थितियों में भी उजाला प्राप्त होगा।
प्रश्न 21.
कवि स्नेहभरा दीप जलाने हेतु क्यों कह रहा है?
उत्तर:
इस धरती पर विज्ञान के आविष्कारों के कारण मनुष्य में प्रेम भावना प्रायः लुप्त सी हो गई । सम्बन्ध टूटते जा रहे हैं। मानव मशीनी हो गया है। इसलिए कवि प्रेम एवं आपसी सौहार्द के दीप जलाने के लिए कह रहा है जिससे संसार का अंधकार मिटेगा।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 22.
‘बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा’ पंक्ति के माध्यम से कवि क्या कहना चाहते हैं?
उत्तर:
इस संसार में विज्ञान की शक्ति से विकास सा प्रतीत होता है। किन्तु आज विश्व में दिन का समय भी अमावस्या की रात्रि के समान अंधकारमय हो गया है। लोगों में एक-दूसरे के प्रति प्रेम नहीं है इसलिए इन विद्युत के दीपक (बल्ब) को बुझाओ क्योंकि इनसे जीवन का रास्ता दिखाई नहीं देता है। यदि जीवन का सच्चा विकास करना है तो प्रेम से भरे दीपक जलाते रहो।
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प्रश्न 23.
इस निशा को सवेरा कैसे मिलेगा? समझाइए।
उत्तर:
दिये व तूफान की कहानी निरन्तर चलती आ रही है और चलती रहेगी। उसी प्रकार संसार में उत्थान पतन की कहानी चलती आ रही है और चलती रहेगी। जिसने प्रेम एवं आपसी सहयोग की ज्वाला को प्रज्वलित कर दिया तो यह निश्चित है कि वह उत्थान की ज्वाला स्वर्ग के समान जलती हुई प्रेरित करती रहेगी। यदि एक दिया भी शेष बच गया तो इस निशा को एक न एक दिन सवेरा अवश्य मिलेगा।
जलाते चलो Class 6 Summary
कठिन शब्दार्थ एवं सप्रसंग व्याख्या / भावार्थ
1. जलाते चलो ………………………………………….. पथ मिल सकेगा।
कठिन – शब्दार्थ – दिये = दीपक। धरा = धरती, पृथ्वी। निहित = विद्यमान, मौजूद। पूर्णिमा – सी = सम्पूर्ण चाँदनी के समान, खुशी-सी। घिरी = फैली। अमावस = कृष्ण पक्ष की अन्तिम रात्रि, अमावस्या। निशा-सी = रात्रि के समान, दुख के समान। विद्युत – दीये बिजली के दीपक। बुझाओ = बन्द करो, शान्त करो। पथ = मार्ग।
प्रसंग – प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ की कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी द्वारा रचित कविता ‘जलाते ‘चलो’ से लिया गया है। इसमें विज्ञान के आविष्कारों से हुए सांस्कृतिक पतन के बारे में वर्णन किया गया है एवं परस्पर प्रेम का दीपक जलाने की प्रेरणा दी गई है।
व्याख्या / भावार्थ – कवि ने कहा है कि प्रेम के दीपक जलाकर एक-दूसरे का सहयोग करते रहो। आज नहीं तो कल कभी तो इस धरती से अज्ञानता का अंधकार समाप्त होगा। अर्थात् लोग सद्भावना से रहेंगे।
यद्यपि विज्ञान में वह शक्ति विद्यमान है जिससे अमावस्या रूपी अंधेरा भी पूर्णिमा के समान प्रकाशवान बनाया जा सकता है। किन्तु आज सम्पूर्ण विश्व दिन में भी अमावस्या की काली रात के समान घिरा हुआ दिखाई दे रहा है। अर्थात् लोग आशावादी की जगह निराशावादी दिखाई दे रहे हैं।
आज संसार में प्रेम विहीन एवं दिखावटी विद्युत के दीपक (बल्ब) जल रहे हैं। अर्थात् प्रकाश का दिखावा कर रहे हैं। इसलिए इन विद्युत दीपकों को बुझा दो या बन्द कर दो और प्रेम के दीपक जलाओ जिससे कोई न कोई रास्ता या मार्ग अवश्य निकलेगा।
2. जला दीप पहला ………………………………………….. किनारा मिलेगा॥
कठिन शब्दार्थ – तिमिर = अंधकार, अँधेरा, आँख का एक रोग चुनौती = ललकार, आह्वान। सरित = सरिता, नदी, प्रवाह। नाव = नौका, किश्ती निरन्तर = लगातार । किनारा = तट, तीर।
प्रसंग – प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ की कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी द्वारा रचित कविता ‘जलाते चलो’ से लिया गया है। इसमें कवि मनुष्यों को प्रेम का दीपक जलाकर अन्धकार से मुकाबला करने की बात कह रहे हैं।
व्याख्या/ भावार्थ – कवि मनुष्यों से कहते हैं कि तुमने ही प्रेम का प्रकाश रूपी दीपक जलाकर पहली बार अंधकार की ललकार को स्वीकार करके जोश दिखाया था और तुमने ही इस अंधकार रूपी नदी को पार करने के लिए प्रेम रूपी प्रकाश की नाव का निर्माण किया था। जिससे अज्ञानता के अंधेरे को पार किया जा सके।
तुमने यह जो प्रेम रूपी नाव का निर्माण किया है उसे लगातार आगे बढ़ाते रहो। कभी न कभी तो अंधकार रूपी नदी को पार करके किनारे पर पहुँचोगे। अर्थात् किनारा मिलेगा।
3. युगों से तुम्हीं ने ………………………………………….. उजेला मिलेगा।
कठिन शब्दार्थ – शिला = चट्टान। अनगिनत = बेहिसाब, अगणित। साक्षी = गवाह, प्रमाण। पवन = हवा, वायु। ज्योति = प्रकाश, प्रेरणा । उजेला = आशा, प्रकाश।
प्रसंग – प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ की कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी द्वारा रचित कविता ‘जलाते चलो’ से लिया गया है। इसमें कवि ने अंधकार समाप्ति के लिए जिन्होंने बलिदान दिया उन्हीं का वर्णन किया है।
व्याख्या / भावार्थ – कवि ने कहा है कि हे मनुष्यों तुम्हीं ने अंधकार रूपी चट्टान का विनाश करने के लिए अनन्त प्रेम के दीपक निरन्तर जलाएं हैं। समय अर्थात् इतिहास इस बात का साक्षी (प्रमाण) है कि तुम्हारे जलाए हुए असंख्य दीपकों को हवा रूपी तूफान ने बुझाया है।
किन्तु तुमने प्रकाश रूपी दीपक जलाकर एवं अपना बलिदान करके संसार में उजाला भर दिया। तुम्हारी उसी प्रेरणा से अंधकार को भी प्रकाश प्राप्त होगा।
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4. दिये और तूफ़ान की ………………………………………….. सवेरा मिलेगा॥
कठिन शब्दार्थ-तूफ़ान = तेज हवाएँ, जोर की वात, सैलाब। लौ = ज्वाला, दीपशिखा, चाह, आशा, क्षमता । स्वर्ण-सी = सोने के समान निशा = रात्रि, अंधेरा। सवेरा = प्रातःकाल, सुबह, सूर्योदय काल, सबेरा।
प्रसंग – प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ की कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी द्वारा रचित कविता ‘जलाते ‘चलो’ से लिया गया है। इसमें कवि ने दीपक और आँधी-तूफान के सम्बन्ध की कहानी को बताया है।
व्याख्या/ भावार्थ – कवि ने कहा है कि दीपक एवं तूफान के सैलाब की कहानी युग-युगान्तर से चली आ रही है और चलती रहेगी। दीपक प्रकाश का प्रतीक है तो तूफान विनाश का प्रतीक है। पहली बार जो दीपशिखा अर्थात् ज्वाला सोने के समान प्रज्वलित हुई वह जलती ही रहेगी चाहे कितने भी आँधी-तूफान क्यों न आएं।
यदि इस धरा पर एक भी प्रेम का दीपक जलता रहेगा तो यह निश्चित है कभी न कभी इस रात्रि (अंधकार) में सवेरा (प्रात:काल) होगा और उजाला फैलेगा। इसलिए प्रेम भाव का दीपक जलाते चलो।
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