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Class 6th Science Chapter 10 Question Answer in Hindi Medium
Science Class 6 Chapter 10 Question Answer in Hindi
पृष्ठ 185
प्रश्न 1.
आप बीजों को सजीव या निर्जीव किस श्रेणी में रखेंगे?
उत्तर:
बीजों को हम सजीव की श्रेणी में रखेंगे क्योंकि बीज में पौधे की भ्रूण अवस्था पाई जाती है जो निष्क्रियता की अवस्था में होती है जो अनुकूल परिस्थितियाँ आने पर सक्रिय हो जाता है।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1.
पौधों और जंतुओं के जीवन चक्र में समानताओं और भिन्नताओं को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
पौधों और जंतुओं के जीवन चक्र में समानताएँ-
- दोनों के जीवन चक्र में अनेक अवस्थाएँ पाई जाती हैं।
- दोनों ही वृद्धि और विकास की अवधि से गुजरते हैं।
- पौधों एवं जंतुओं में जीवन की निरंतरता के लिए जनन की क्रिया होती है।
पौधों और जंतुओं के जीवन चक्र में अंतर-
- पौधों का जीवन चक्र बीज से जबकि जंतुओं का जीवन चक्र अण्डे से प्रारम्भ होता है।
- पौधों में जीवन भर वृद्धि होती है जबकि जंतुओं में निश्चित अवधि तक ही वृद्धि होती है।
- पौधों की तुलना में जंतुओं की विकास अवस्थाएँ अधिक जटिल होती हैं।
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प्रश्न 2.
नीचे तालिका में कुछ विवरण (डाटा) दिया गया है। तालिका का अध्ययन कीजिए और दूसरे व तीसरे स्तंभ में दी गई स्थितियों के लिए उपयुक्त उदाहरणों का पता लगाने का प्रयास कीजिए। यदि आपको लगता है कि नीचे दी गई किसी भी स्थिति के लिए उदाहरण संभव नहीं है, तो स्पष्ट कीजिए कि ऐसा क्यों है?

उत्तर:

प्रश्न 3.
आपने सीखा है कि बीजों के अंकुरण के लिए भिन्न-भिन्न परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। अनाजों और दालों के उपयुक्त भंडारण के लिए हम इस ज्ञान का उपयोग किस प्रकार कर सकते हैं?
उत्तर:
बीजों के अंकुरण के लिए जल, वायु, मिट्टी एवं प्रकाश की आवश्यकता होती है। इसलिए अनाजों एवं दालों के उपयुक्त भण्डारण के लिए नमी, वायु एवं प्रकाशविहीन परिस्थितियाँ होनी आवश्यक है।
प्रश्न 4.
आपने सीखा है कि टैडपोल की एक पूँछ होती है लेकिन जब वृद्धि के बाद यह मेंढक बनता है तो पूँछ लुप्त हो जाती है। टैडपोल अवस्था में पूँछ होने से क्या लाभ मिलता है?
उत्तर:
टैडपोल अवस्था में पूँछ उन्हें जल में तैरने में सहायता करती है।
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प्रश्न 5.
चरण का कहना है लकड़ी का लट्ठा निर्जीव है क्योंकि इसमें गति नहीं होती। इसके विपरीत चारु इसे सजीव मानती हैं, क्योंकि यह वृक्षों से प्राप्त होता है। चरण और चारु के कथनों के पक्ष या विपक्ष में अपने अपने तर्क दीजिए।
उत्तर:
चरण का तर्क – लकड़ी का लट्ठा निर्जीव है क्योंकि इसमें गति नहीं होती। चरण का तर्क सही है क्योंकि वृक्ष से अलग हो जाने के बाद इसमें सजीवों का कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देता है और यह निर्जीव वस्तु बन जाता है।
चारु का तर्क – यह सजीव है, क्योंकि यह वृक्षों से प्राप्त होता है। चारु का तर्क तभी तक सही था जब तक लकड़ी का लट्ठा वृक्ष से जुड़ा हुआ था लेकिन वृक्ष से अलग होने के बाद वह सजीव नहीं रहा।
प्रश्न 6.
मच्छर और मेंढक के जीवन चक्र में क्या समानताएँ और क्या विभेदकारी विशेषताएँ होती हैं?
उत्तर:
समानताएँ –
- दोनों का जीवन चक्र अण्डे से शुरू होता है।
- दोनों के जीवन चक्र में लार्वा अवस्था होती है।
- दोनों के जीवन का प्रारम्भिक समय जल में व्यतीत होता है।
विभेदकारी विशेषताएँ-
- मच्छर के जीवन चक्र में प्यूपा अवस्था होती है, जबकि मेंढक के जीवन चक्र में नहीं।
- मच्छर की वयस्क अवस्था वायु में रहती है जबकि मेंढक की वयस्क अवस्था जल व थल दोनों जगह रह सकती है।
प्रश्न 7.
एक पौधे को उसकी वृद्धि के लिए उपयुक्त सभी स्थितियाँ उपलब्ध कराई गई हैं। एक सप्ताह पश्चात्

आप इस पौधे के प्ररोह और जड़ में क्या देखने की अपेक्षा करते हैं? उसका चित्र बनाइए। इसके कारण भी लिखिए।
उत्तर:
एक सप्ताह पश्चात् पौधे का प्ररोह मुड़कर ऊपर की ओर वृद्धि करता हुआ तथा जड़ मुड़कर नीचे की ओर वृद्धि करती हुई दिखाई देगी। इसका कारण यह है कि प्ररोह प्रकाश के स्रोत की ओर तथा जड़ प्रकाश स्रोत के विपरीत दिशा की ओर वृद्धि करती है।

प्रश्न 8.
तारा और विजय ने एक प्रयोग का सेट अप तैयार किया है जिसे चित्र में दर्शाया गया है। आप क्या सोचते हैं कि वे क्या पता करना चाहते हैं? और उन्हें यह कैसे पता चलेगा कि वे सही हैं?

उत्तर:
तारा और विजय इस सेट अप से शायद यह पता करना चाहते हैं कि पौधे की वृद्धि किस दिशा में होती है? वे देखना चाहते हैं कि जब प्रकाश सभी दिशाओं से प्राप्त होता है तो पौधे का प्ररोह ऊपर की ओर तथा जड़ें नीचे की ओर वृद्धि करती हैं। वे तीनों ही स्थितियों में प्ररोह को सतह से ऊपर तथा जड़ों को सतह से नीचे देखकर यह पता लगा सकते हैं कि वे सही हैं।
प्रश्न 9.
बीज अंकुरण पर तापमान के प्रभाव की जाँच करने के लिए एक प्रयोग की योजना लिखिए।
उत्तर:
बीज अंकुरण पर तापमान के प्रभाव की जाँच करने के लिए निम्न प्रयोग किया जा सकता है—
- हम एक समान प्रकार के बीज लेकर उन्हें तीन अलग- अलग बीकर में रखते हैं।
- अब पहले बीकर को कम तापमान के लिए फ्रिज में, दूसरे बीकर को सामान्य तापमान हेतु कमरे में तथा तीसरे बीकर को उच्च तापमान के लिए धूप में रख देते हैं।
- तीनों बीकर में समान मात्रा में पानी देते हैं और निश्चित समय अंतराल पर निरीक्षण करते हैं ।
- अंकुरण की दर को नोट कर, तुलना करते हैं कि किस तापमान पर बीज जल्दी और अच्छी तरह अंकुरित होते हैं।
RBSE Class 6 Science Chapter 10 Important Questions in Hindi
बहुचयनात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
कीटभक्षी पौधे का उदाहरण है-
(अ) ड्रोसेरा
(ब) बोगेनविलिया
(स) क्राइसेन्थम
(द) सनफ्लावर
उत्तर:
(अ) ड्रोसेरा
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प्रश्न 2.
किस पौधे की पत्तियाँ छूने पर अचानक सिकुड़ जाती हैं?
(अ) कैजुराइना
(ब) मिमोसा
(स) आँवला
(द) पिटूनिया
उत्तर:
(ब) मिमोसा
प्रश्न 3.
निम्न में से निर्जीव है-
(अ) छत्रक
(ब) कीट
(स) मच्छर
(द) जल
उत्तर:
(द) जल
प्रश्न 4.
किस पौधे द्वारा सूर्यास्त के बाद अपनी पत्तियाँ बन्द कर ली जाती हैं?
(अ) पिटूनिया
(स) नागफनी
(ब) नीम
(द) आँवला
उत्तर:
(द) आँवला
प्रश्न 5.
बीज के अंकुरण के लिए आवश्यक है-
(अ) वायु
(ब) जल
(स) प्रकाश
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 6.
मच्छर की कौनसी अवस्था जल में रहती है?
(अ) लार्वा व वयस्क
(ब) लार्वा व प्यूपा
(द) अण्डा व वयस्क
(स) प्यूपा व वयस्क
उत्तर:
(ब) लार्वा व प्यूपा
प्रश्न 7.
रेशम कीट (सिल्क मॉथ) के जीवन में कितनी अवस्थाएँ होती हैं?
(अ) 4
(ब) 3
(स) 2
(द) 5
उत्तर:
(अ) 4
प्रश्न 8.
मेंढक के जीवन चक्र की अवस्थाओं का सही क्रम है-
(अ) अण्डा, मंडूकक, टैडपोल, वयस्क
(ब) टैडपोल, अण्डा, मंडूकक, वयस्क
(स) अण्डा, टैडपोल, मंडूकक, वयस्क
(द) वयस्क, मंडूकक, टैडपोल, अण्डा
उत्तर:
(स) अण्डा, टैडपोल, मंडूकक, वयस्क
प्रश्न 9.
मच्छर द्वारा किस रोग का संचरण होता है?
(अ) मलेरिया
(ब) डेंगू
(स) चिकनगुनिया
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी
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प्रश्न 10.
(i) कॉलियस (ii) पिटूनिया (iii) कैलेंडुला (iv) जीनिया में से कौनसे पौधे में बीजांकुरण के लिए अंधकार की आवश्यकता होती है?
(अ) (i) व (ii)
(ब) (ii) व (iii)
(स) (iii) व (iv)
(द) (i) व (iv)
उत्तर:
(स) (iii) व (iv)
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. कीटभक्षी पौधे अपने पोषण के लिए __________ पर निर्भर होते हैं।
उत्तर:
कीटों
2. समस्त सजीव __________ के प्रति अनुक्रिया करते हैं।
उत्तर:
उद्दीपन
3. शरीर से अपशिष्ट उत्पाद के निष्कासन को __________ कहते हैं।
उत्तर:
उत्सर्जन
4. बीज के बाह्य आवरण को __________ कहते हैं।
उत्तर:
बीजावरण
5. मेंढक के अण्डे के समूह को __________ के रूप में जाना जाता है।
उत्तर:
जलांडक
6. पूर्ण विकसित वयस्क मेंढक __________ और __________ दोनों में रहते हैं।
उत्तर:
जल, थल
निम्न में से सत्य / असत्य कथन छाँटिए
1. पौधों में पुष्प केवल दिन के समय ही खिलते हैं। (सत्य / असत्य)
उत्तर:
असत्य
2. सभी सजीव जनन करते हैं। (सत्य / असत्य)
उत्तर:
सत्य
3. पौधे को सीधा रखे जाने पर जड़ नीचे की ओर वृद्धि करती है और प्ररोह की वृद्धि ऊपर की दिशा में होती है। (सत्य / असत्य)
उत्तर:
सत्य
4. सभी बीजों को अंकुरण के लिए प्रकाश की आवश्यकता होती है। (सत्य / असत्य)
उत्तर:
असत्य
कॉलम – 1 में दिए गए शब्दों का मिलान कॉलम- 2 से कीजिए
प्रश्न 1.
| कॉलम 1 | कॉलम 2 |
| (1) उद्दीपन | (A) अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन |
| (2) उत्सर्जन | (B) अपने समान संतति उत्पन्न करना |
| (3) श्वसन | (C) वातावरण में होने वाले परिवर्तन |
| (4) जनन | (D) श्वास क्रिया |
उत्तर:
| कॉलम 1 | कॉलम 2 |
| (1) उद्दीपन | (C) वातावरण में होने वाले परिवर्तन |
| (2) उत्सर्जन | (A) अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन |
| (3) श्वसन | (D) श्वास क्रिया |
| (4) जनन | (B) अपने समान संतति उत्पन्न करना |
प्रश्न 2.
| कॉलम 1 | कॉलम 2 |
| (1) बीज | (A) रंध्र |
| (2) मेंढक | (B) प्यूपा |
| (3) मच्छर | (C) टैडपोल |
| (4) पत्ती | (D) भ्रूण |
उत्तर:
| कॉलम 1 | कॉलम 2 |
| (1) बीज | (D) भ्रूण |
| (2) मेंढक | (C) टैडपोल |
| (3) मच्छर | (B) प्यूपा |
| (4) पत्ती | (A) रंध्र |
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
जनन किसे कहते हैं?
उत्तर:
सजीवों द्वारा अपनी तरह के नवजातों को जन्म देने की प्रक्रिया जनन कहलाती है।
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प्रश्न 2.
अंकुरित बीज से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
जब किसी बीज से अंकुर निकलता है तो उसे अंकुरित बीज कहते हैं।
प्रश्न 3.
सजीवों को अपनी वृद्धि और विकास के लिए किसकी आवश्यकता होती है?
उत्तर:
सजीवों को अपनी वृद्धि और विकास के लिए भोजन (पोषण) की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 4.
पौधे श्वसन किस प्रकार करते हैं?
उत्तर:
पौधे की पत्तियों की सतह पर छोटे-छोटे छिद्र होते हैं जिन्हें रन्ध्र कहते हैं।
प्रश्न 5.
उत्सर्जन किसे कहते हैं?
उत्तर:
सजीवों द्वारा अपने शरीर से अपशिष्ट उत्पादों को निष्कासित करने की प्रक्रिया उत्सर्जन कहलाती है।
प्रश्न 6.
क्या पौधे भी उत्सर्जन करते हैं?
उत्तर:
हाँ, पौधे पत्तियों की सतह पर अतिरिक्त जल और खनिजों को सूक्ष्म बूँदों के रूप में उत्सर्जित करते हैं।
प्रश्न 7.
‘उद्दीपन’ किसे कहते हैं?
उत्तर:
कोई भी वस्तु या कोई घटना जो सजीवों को अनुक्रिया करने के लिए प्रेरित करती है, उद्दीपन कहलाती है।
प्रश्न 8.
पौधे के जीवन चक्र से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
बीज से पौधा और फिर बीजों की अगली पीढ़ी तक की संपूर्ण प्रक्रिया को पौधे का जीवन चक्र कहते हैं।
प्रश्न 9.
किसी पौधे को कब मृत माना जाता है?
उत्तर:
जब एक पौधा बढ़ना बंद कर देता है और अनिवार्य सभी परिस्थितियों की उपलब्धता के बाद भी उसमें जीवन की गतिविधियाँ धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं तब उस पौधे को मृत मान लिया जाता है।
प्रश्न 10.
मच्छर अपने जीवन चक्र में कौन-कौन सी अवस्थाओं से गुजरते हैं?
उत्तर:
मच्छर अपने जीवन चक्र में चार अवस्थाओं- (i) अंडा (ii) लार्वा (iii) प्यूपा और (iv) वयस्क अवस्था से गुजरता है।
प्रश्न 11.
मच्छरों के लार्वा और प्यूपा बार-बार जल की सतह पर क्यों आते हैं?
उत्तर:
मच्छर के लार्वा और प्यूपा जल में रहते हैं और उन्हें श्वास लेने के लिए वायु की आवश्यकता होती है। इसलिए वे जल की सतह पर बार-बार आते हैं।
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प्रश्न 12.
जलांडक के रूप में किसे जाना जाता है?
उत्तर:
मेंढक के अण्डों का समूह जो जेली जैसे पदार्थ की तरह दिखाई देता है, जलांडक के रूप में जाना जाता है।
प्रश्न 13.
मेंढक के जीवन चक्र में कौन-कौन सी अवस्थाएँ पाई जाती हैं?
उत्तर:
मेंढक के जीवन चक्र में (i) अण्डा (ii) टैडपोल (iii) मंडूकक (फ्रॉगलेट) और (iv) वयस्क अवस्थाएँ पाई जाती हैं।
प्रश्न 14.
सजीवों की निरंतरता को कौन सुनिश्चित करता है?
उत्तर:
जनन की प्रक्रिया सजीवों की निरंतरता को सुनिश्चित करती है।
प्रश्न 15.
जनन क्यों अनिवार्य है?
उत्तर:
यह जीवन की निरंतरता के लिए अनिवार्य है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
क्या पौधे भी गतियाँ दर्शाते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
यद्यपि पौधे एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं जाते लेकिन वे कुछ निश्चित प्रकार की गतियाँ प्रदर्शित करते हैं।
उदाहरण-
- पौधों में गति का एक उदाहरण फूलों का खिलना है।
- आरोही लताएँ भी अपने समीप रखी किसी वस्तु के चारों ओर लिपट जाती हैं।
प्रश्न 2.
सभी सजीवों में कौनसी सामान्य विशेषताएँ पाई जाती हैं?
उत्तर:
सभी सजीव गति प्रदर्शित करते हैं, उन्हें भोजन की आवश्यकता होती है, वे वृद्धि करते हैं, श्वसन करते हैं, जनन करते हैं, उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया करते हैं और अंततः मर जाते हैं।
प्रश्न 3.
जंतुओं में उत्सर्जन के दो उत्पादों के बारे में बताइए।
उत्तर:
(i) पसीना – शरीर से अपशिष्ट पदार्थ के रूप में निकलने वाले पसीने में जल और लवण होते हैं।
(ii) मूत्र -जंतुओं में उत्सर्जन के एक उत्पाद के रूप में मूत्र भी निर्मित होता है जिसमें यूरिया उपस्थित होता है।
प्रश्न 4.
मच्छरों के जीवन चक्र को किस प्रकार भंग किया जा सकता है? उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर:
स्थिर जल पर मिट्टी का तेल छिड़क कर मच्छरों के जीवन चक्र को भंग किया जा सकता है। मिट्टी का तेल जल की सतह पर एक पतली परत बनाता है। यह परत जल को वायु से पृथक कर देती है और लार्वा एवं प्यूपा श्वास द्वारा वायु ग्रहण नहीं कर पाते हैं। परिणामतः वे मर जाते हैं।
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प्रश्न 5.
कोई सजीव कब मृत माना जाता है?
उत्तर:
जब कोई सजीव जीवित रहने के सभी संसाधनों (भोजन, वायु और जल) की उपलब्धता होने पर भी गति, श्वसन, वृद्धि, जनन, उत्सर्जन जैसे लक्षणों को प्रदर्शित करने में सक्षम नहीं होता है, उसे मृत कहते हैं।
प्रश्न 6.
क्या बीजों के अंकुरण के लिए सूर्य का प्रकाश अनिवार्य है?
उत्तर:
सामान्यतः अधिकांश बीजों को अंकुरण के लिए प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती है। किंतु अंकुरण के पश्चात् नवोद्भिद की वृद्धि के लिए सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 7.
फली के अंकुरित बीज का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
क्या पौधे भी उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया दर्शाते हैं? उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर:
हाँ, पौधे भी उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया दर्शाते हैं। उदाहरण-
- छुई-मुई ( लज्जालु या टच मी नॉट या मिमोसा ) पौधे को छूने पर वे अपनी पत्तियाँ बंद कर लेते हैं।
- कुछ पौधे सूर्यास्त के बाद अपनी पत्तियाँ बंद कर लेते हैं, जैसे—आँवला।
- कुछ पौधों के पुष्प सूर्यास्त के बाद बंद हो जाते हैं।
- कुछ पौधों के पुष्प केवल रात्रि के समय ही खिलते हैं।
प्रश्न 2.
बीजांकुरण में प्रकाश एवं अन्धकार की भूमिका उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर:
कॉलियस और पिटूनिया जैसे कुछ पुष्पीय पौधों में बीजांकुरण के लिए प्रकाश की आवश्यकता होती है। इन बीजों को मिट्टी से ढकने पर इनका अंकुरण बाधित होता है। वहीं कैलेंडुला और जीनिया जैसे कुछ पुष्पीय पौधों में बीजांकुरण के लिए अंधकार की आवश्यकता होती है। इसलिए इन बीजों को पर्याप्त मिट्टी से ढका जाता है।
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प्रश्न 3.
जगदीश चंद्र बोस के योगदान पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
जगदीश चंद्र बोस एक भारतीय वैज्ञानिक थे जिन्होंने पौधों के साथ कुछ रोचक प्रयोग किए। उन्होंने प्रकाश, ताप, विद्युत और गुरुत्वाकर्षण जैसे उद्दीपनों के प्रति पौधों की अनुक्रियाओं को अंकित करने के लिए क्रेस्कोग्राफ नामक मशीन का निर्माण किया। इस मशीन से उन्होंने मापा कि पौधे कितनी तेजी से बढ़ते हैं। उन्होंने यह भी दर्शाया कि पौधे उद्दीपनों को महसूस कर सकते हैं और उनके प्रति अनुक्रिया करते हैं।
प्रश्न 4.
रेशम कीट (सिल्क मॉथ ) के जीवन चक्र तथा महत्त्व को समझाइए।
उत्तर:
रेशम कीट (सिल्क मॉथ) जीवन की चार अवस्थाओं से गुजरता है— अंडा, लार्वा, प्यूपा और वयस्क । अण्डे लाव के रूप में स्फुटित होते हैं और फिर आकार में बढ़ते हैं। प्यूपा में परिवर्तित होने से पहले लार्वा धागे जैसा पदार्थ स्रावित करते हैं जो उनके चारों ओर लिपट जाता है। यह प्यूपा अवस्था में बदल जाता है। प्यूपा वयस्क रेशम कीट में बदलता है।
महत्त्व – रेशम कीट के लार्वा द्वारा स्रावित रेशे का उपयोग रेशमी वस्त्र बनाने में किया जाता है।
प्रश्न 5.
कीटभक्षी पौधे के उदाहरण द्वारा पौधों में गति को समझाइए।
उत्तर:
पौधों में गति का उदाहरण कीटभक्षी पौधों में देखा जा सकता है। कीटभक्षी पौधे अपने पोषण के लिए कीटों पर निर्भर होते हैं। कीटभक्षी पौधों का एक उदाहरण ड्रोसेरा है। ड्रोसेरा की पत्तियाँ तश्तरी (सॉसर) के आकार की होती हैं जिनमें असमान लंबाई वाले बाल जैसे अनेक तंतु होते हैं जिनके छोर पर चिपचिपा पदार्थ होता है। जब भी कोई कीट तश्तरी की सतह को स्पर्श करता है, बाल अन्दर की ओर मुड़ जाते हैं और अपने चिपचिपे छोर से कीट को जकड़ लेते हैं।
प्रश्न 6.
“भले ही पौधे एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं जाते हैं, फिर भी वे गतिशीलता प्रदर्शित करते हैं।” कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पौधे कुछ निश्चित प्रकार की गतियाँ प्रदर्शित करते हैं। पौधों में गति का एक उदाहरण फूलों का खिलना है। पौधों में गति का अन्य उदाहरण कीटभक्षी पौधों में देखा जा सकता है। कीटभक्षी पौधे अपने पोषण के लिए कीटों पर निर्भर होते हैं। आरोही लताएँ भी अपने समीप रखी किसी वस्तु के चारों ओर लिपट जाती हैं। इसका तात्पर्य है कि भले ही पौधे एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं जाते हैं, फिर भी वे गतिशीलता प्रदर्शित करते हैं।
प्रश्न 7.
मेंढक के जीवन चक्र में पाई जाने वाली विभिन्न अवस्थाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मेंढक के जीवन चक्र में चार अवस्थाएँ पाई जाती हैं
(i) अण्डा अवस्था – यह अवस्था भ्रूण में परिवर्तित होती है।
(ii) टैडपोल अवस्था – इसमें पहले पूँछयुक्त तथा पैरविहीन प्रारंभिक अवस्था आती है। पूँछ टैडपोल को तैरने में सहायता करती है। बाद में टैडपोल के पिछले पैर विकसित हो जाते हैं।
(iii) मंडूकक ( फ्रॉगलेट) अवस्था – धीरे-धीरे टैडपोल छोटे मेंढक की तरह दिखने लगते हैं जिन्हें मंडूकक कहते हैं। ये अब भी जल में रहते हैं लेकिन कुछ समय थल पर भी बिताना प्रारंभ कर देते हैं। ये बड़े होते जाते हैं। और इनकी पूँछ पूर्णतः लुप्त हो जाती है। इनके पैर बलवान हो जाते हैं जिससे इन्हें कूद कर स्थल पर आने में सहायता मिलती है।
(iv) वयस्क मेंढक अवस्था – मेंढक पूर्ण विकसित वयस्क बनने पर जल और थल दोनों में रहने लगते हैं।
निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
उन सामान्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए जो सजीवों को निर्जीव वस्तुओं से पृथक् करती हैं?
उत्तर:
सजीवों में निम्न विशेषताएँ पाई जाती हैं जो उन्हें निर्जीव वस्तुओं से पृथक् करती हैं-
(1) गति – सभी संजीव गतिशीलता प्रदर्शित करते हैं। यद्यपि पौधे एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं जाते लेकिन वे कुछ निश्चित प्रकार की गतियाँ प्रदर्शित करते हैं।
(2) वृद्धि – सभी सजीवों के शरीर में वृद्धि होती है।
(3) पोषण – सभी सजीवों को अपनी वृद्धि और विकास के लिए भोजन (पोषण) की आवश्यकता होती है।
(4) श्वसन – सजीवों को जीवित रहने के लिए निरन्तर श्वसन करना अनिवार्य होता है। श्वास क्रिया द्वारा वायु को शरीर के अन्दर लिया जाता है व बाहर निकाला जाता है। पौधों में इस कार्य में सहायता हेतु पत्तियों पर सूक्ष्म रन्ध्र पाये जाते हैं।
(5) उत्सर्जन – सभी सजीव अपने शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को उत्सर्जन द्वारा निष्कासित करते हैं। जंतुओं में यह पसीने और मूत्र के रूप में होता है जबकि पौधे अपनी पत्तियों की सतह से जल और खनिजों को सूक्ष्म बूँदों के रूप में उत्सर्जित करते हैं।
(6) उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया – समस्त सजीव अपने वातावरण में होने वाले परिवर्तनों के प्रति अनुक्रिया दर्शाते हैं।
(7) जनन – सभी सजीव जनन करते हैं। यह जीवन की निरंतरता के लिए अनिवार्य है।
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प्रश्न 2.
बीजांकुरण के लिए आवश्यक परिस्थितियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
बीजांकुरण के लिए निम्न परिस्थितियाँ आवश्यक हैं-
(1) जल – बीजों को अंकुरण के लिए जल की आवश्यकता होती है। जल बीजों को उनकी वृद्धि के लिए अनिवार्य प्रक्रिया को पूरा करने में सक्षम बनाता है। बीज के बाह्य आवरण जिसे बीजावरण कहते हैं, को जल मुलायम करता है जिससे इसके अन्दर के नन्हें भ्रूण को पौधे में विकसित होने में सहायता मिलती है।
(2) वायु एवं मिट्टी – बीजों को अंकुरण के लिए वायु की आवश्यकता होती है। बीज मिट्टी के कणों के बीच के स्थान में उपस्थित वायु का उपयोग करते हैं, साथ ही इससे मिट्टी में जड़ें आसानी से बढ़ती हैं।
(3) प्रकाश एवं अन्धकार – सामान्यतः अधिकांश बीजों को अंकुरण के लिए प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती है। किन्तु अंकुरण के पश्चात् नवोद्भिद की वृद्धि के लिए सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 3.
सूर्य का प्रकाश पौधों के विभिन्न भागों की वृद्धि की दिशा को किस प्रकार प्रभावित करता है? नामांकित चित्र बनाते हुए समझाइए।
उत्तर:

सूर्य के प्रकाश की विभिन्न स्थितियों में पौधे के भागों की वृद्धि की दिशा निम्नानुसार होती है-
(1) सभी दिशाओं से आते सूर्य के प्रकाश में रखा सीधा पौधा – पौधे को सीधा रखे जाने पर जड़ नीचे की ओर वृद्धि करती है और प्ररोह की वृद्धि ऊपर की दिशा में होती है।
(2) सभी दिशाओं से आते सूर्य के प्रकाश में रखा उल्टा पौधा – यदि पौधा उल्टा रखा हो तो जड़ मुड़ जाती है और नीचे की ओर वृद्धि करती है। प्ररोह भी मुड़ जाता है और ऊपर की ओर वृद्धि करता है।
(3) एक दिशा से आते सूर्य के प्रकाश में रखा सीधा पौधा – यदि पौधे को सूर्य का प्रकाश केवल एक दिशा से मिलता है तो प्ररोह प्रकाश की दिशा में वृद्धि करता है, जबकि जड़ नीचे की ओर वृद्धि करती है।
प्रश्न 4.
एक पौधे के जीवन चक्र को आरेख बनाते हुए समझाइए।
उत्तर:

एक पौधे का जीवन-चक्र बीज के अंकुरण से प्रारंभ होता है और उसके बाद वह वृद्धि एवं विकास की अनेक अवस्थाओं से गुजरता है। इनमें पुष्पन और बीज उत्पादन सम्मिलित हैं। इनके जीवन चक्र के दौरान उत्पन्न बीज नए पौधों में अंकुरित हो जाते हैं और यह चक्र जारी रहता है।
प्रश्न 5.
आरेख बनाते हुए मच्छर का जीवन-चक्र समझाइए।
उत्तर:

मच्छर अपने जीवन-चक्र में चार अवस्थाओं से गुजरते हैं। एक मच्छर अपना जीवन अंडे के रूप में प्रारंभ करता है। अंडे का विकास लार्वा के रूप में होता है। लार्वा का विकास प्यूपा के रूप में होता है और प्यूपा वयस्क मच्छर में परिवर्तित होता है। प्यूपा से निकला वयस्क मच्छर जल की सतह पर थोड़ा विश्राम करता है और फिर उड़ जाता है। वयस्क मच्छर 10 से 15 दिन तक जीवित रह सकता है। वयस्क मादा मच्छर सीधे जल पर या जल के समीप अंडे देती है और यह चक्र चलता रहता है।
प्रश्न 6.
मेंढक के जीवन चक्र का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:

मेंढक के जीवन चक्र में चार अवस्थाएँ पाई जाती हैं। मेंढक के जीवन-चक्र का प्रारंभ अंडा अवस्था से होता है। जो जेली जैसे पदार्थ के रूप में समूह में पाए जाते हैं जिन्हें जलांडक कहते हैं। अंडा भ्रूण में परिवर्द्धित हो जाता है। भ्रूण का विकास टैडपोल अवस्था में होता है, जिसमें पूँछयुक्त तथा पैरविहीन प्रारंभिक अवस्था तथा पीछे के पैरों सहित पश्च अवस्था होती है। टैडपोल का विकास मंडूकक (फ्रॉगलेट) अवस्था में होता है जिसमें पूँछ पूर्णत: विलुप्त हो जाती है और पैर मजबूत हो जाते हैं। मंडूकक से वयस्क मेंढक का विकास होता है जो जल और थल दोनों स्थानों पर रहने योग्य होता है।
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RBSE Class 6 Science Chapter 10 Notes in Hindi
- हम अपने आस – पास की वस्तुओं को सजीव और निर्जीव में वर्गीकृत कर सकते हैं।
- सभी सजीवों में कुछ मूलभूत विशेषताएँ पाई जाती हैं, जैसे—वे गति करते हैं, भोजन करते हैं, श्वास लेते हैं, वृद्धि करते हैं, उत्सर्जन करते हैं, उद्दीपनों के प्रति अनुक्रिया दर्शाते हैं, जनन करते हैं एवं मृत होते हैं। इनमें से किसी भी विशेषता की कमी यह दर्शाती है कि वे सजीव नहीं हैं।
- जब किसी बीज में अंकुर निकलता है तो उसे अंकुरित बीज कहते हैं। बीजों का अंकुरण कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है, जैसे- जल, वायु, प्रकाश की उपस्थिति या अनुपस्थिति आदि।
- बीजों के अंकुरण के दौरान प्ररोह ऊपर की ओर तथा जड़ें नीचे की ओर वृद्धि करती हैं।
- एक पौधा अपने जीवन चक्र में कई अवस्थाओं से गुजरता है। एक पौधे का जीवन चक्र बीज के अंकुरण से शुरू होता है। इसके बाद यह वृद्धि और विकास की विभिन्न अवस्थाओं से गुजरता है। इसमें पुष्पन व फलन द्वारा बीज निर्माण शामिल है।
- एक जंतु का जीवन चक्र नवजात के जन्म से शुरू होता है। यह वृद्धि एवं विकास की विभिन्न अवस्थाओं से होता हुआ वयस्क तथा वृद्धावस्था तक पहुँचता है और अंततः उसकी मृत्यु हो जाती है।
- जनन की प्रक्रिया सभी सजीवों की निरन्तरता को सुनिश्चित करती है।
- मादा मच्छर खून चूसने वाले कीट हैं, जिनसे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी अनेक बीमारियों का संचरण हो सकता है।
- मच्छर के जीवन चक्र में, अण्डा, लार्वा, प्यूपा और वयस्क अवस्थाएँ आती हैं। मेंढक के जीवन चक्र में अंडा, टैडपोल, मंडूकक (फ्रॉगलेट) और वयस्क अवस्थाएँ शामिल हैं।
- कुछ सजीवों जैसे मच्छर और मेंढकों के जीवन चक्र की विभिन्न अवस्थाओं में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं। ये परिवर्तन उनके शरीर के आकार, संरचना और आवास में देखे जा सकते हैं।
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